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ऑपरेशन सिंदूर का खुलासा: SU-30, राफेल और ब्रह्मोस की ताकत ने किया किराना हिल्स पर भारी हमला

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान को किस तरह रणनीतिक रूप से झटका दिया, इस पर लंबे समय से बहस होती रही है. अब जाने-माने एरियल वॉरफेयर विश्लेषक और इतिहासकार टॉम कूपर ने दावा किया है कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स पर सटीक हमला कर उसकी कमर तोड़ दी थी. टॉम कूपर के मुताबिक यही वह निर्णायक वार था, जिसके बाद पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था और सीजफायर की भीख मांगने लगा. हालांकि भारतीय वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर किराना हिल्स को निशाना बनाने से इनकार किया है, लेकिन टॉम कूपर का कहना है कि सबूत साफ हैं. टॉम कूपर ने NDTV को दिए इंटरव्यू में बताया कि पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें मिसाइलों के धुएं के निशान पहाड़ियों की ओर जाते और टकराते दिखाई देते हैं. इसके अलावा एक अन्य वीडियो में पाकिस्तानी वायुसेना के 4091वें स्क्वाड्रन के रडार स्टेशन से धुआं उठता दिखा. कूपर के मुताबिक भारत ने पहले इन रडार स्टेशनों को निशाना बनाकर पाकिस्तान की जवाबी क्षमता को निष्क्रिय किया और फिर अंडरग्राउंड स्टोरेज सुविधाओं के कम से कम दो प्रवेश द्वारों पर हमला किया. पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भी मारे गए?     टॉम कूपर ने दावा किया कि उस समय पाकिस्तान का ऑपरेशन ‘बुनियान-उन-मार्सूस’ फेल हो चुका था. भारत की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को बड़े पैमाने पर नाकाम कर दिया.     कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमान मार गिराए गए. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई में 12-13 एयरबेस पर हमला किया. अंत में किराना हिल्स पर स्ट्राइक ने पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से घेर लिया.     हमले के समय कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज थी. पाकिस्तान, अमेरिका और भारत से संपर्क कर युद्धविराम के रास्ते तलाश रहा था. कूपर के शब्दों में यह साफ संकेत था कि पाकिस्तान अब आगे बढ़ने की स्थिति में नहीं था. क्यों पाकिस्तान की कमजोर नस है किराना हिल्स? किराना हिल्स को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अहम केंद्र माना जाता है. यहां 20 से ज्यादा परमाणु परीक्षण किए जा चुके हैं और बड़ी संख्या में हार्डन शेल्टर व भूमिगत सुरंगें मौजूद हैं. टॉम कूपर का तर्क है कि ऐसी जगह पर हमला तभी किया जाता है जब स्पष्ट संदेश देना हो- ‘हम जब चाहें, जहां चाहें, जितनी ताकत से चाहें, वार कर सकते हैं.’ कूपर ने यह भी सवाल उठाया कि जब सबूत इतने स्पष्ट हैं तो भारत आधिकारिक तौर पर हमले से इनकार क्यों करता है. वो इसे लेकर इतने आश्वस्त हैं कि बोलते हैं कि इससे इनकार करना वैसा ही जैसे कोई कहे कि सूरज पूरब से नहीं उगता. रूसी फाइटर जेट और ब्रह्मोस ने किया तांडव हथियारों की बात करें तो कूपर के अनुसार भारत को किसी विशेष गुप्त तकनीक की जरूरत नहीं पड़ी. सुखोई-30 विमानों से ब्रह्मोस और रैम्पेज मिसाइलें दागी गईं, जगुआर ने रैम्पेज लॉन्च किए और राफेल ने स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया. इतना पाकिस्तान के लिए काफी था. उन्होंने भारत की इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सिस्टम की खास तारीफ की, जिसने रक्षात्मक और आक्रामक दोनों मोर्चों पर अहम भूमिका निभाई. कुल मिलाकर टॉम कूपर का आकलन है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की स्पष्ट रणनीतिक जीत थी. किराना हिल्स पर कथित हमले ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया कि भारत की सैन्य क्षमता और एडवांस तकनीक के सामने उसकी जवाबी ताकत सीमित है.

CM साय आज विभागीय बैठक कर ‘जाणता राजा’ में होंगे शामिल

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गुरुवार का दौरा कार्यक्रम तय किया गया है। मुख्यमंत्री आज सिविल लाइन स्थित अपने निवास में विभागीय बैठक लेंगे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री शाम 6.30 बजे आयोजित महानाट्य ‘जाणता राजा’ कार्यक्रम में शामिल होंगे। किसानों की अहम बैठक आज रायपुर में आज किसानों की एक बैठक आयोजित होने वाली है। यह बैठक दोपहर 1 बजे कलेक्टर गार्डन रायपुर में होगी, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के घटक संगठनों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में भारतीय किसान यूनियन छत्तीसगढ़ की भी सक्रिय भागीदारी रहेगी। इस दौरान भारत–अमेरिका ट्रेड डील का किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा होगी। साथ ही छत्तीसगढ़ में धान का ₹3286 प्रति क्विंटल अंतर राशि का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। बैठक में किसानों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर आगे की रणनीति तय किए जाने की संभावना है। सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े सुनेंगी समस्याएं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग केंद्र में आज मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े उपस्थित रहेंगी। इस दौरान वे आम जनता व पार्टी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनकर उनके निराकरण करेंगी। सहयोग केंद्र के माध्यम से लोग अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर आवेदन कर सकेंगे। असम के चुनावी दौरे से लौटेंगे डिप्टी सीएम अरुण साव उप मुख्यमंत्री अरुण साव असम के तीन दिवसीय चुनावी दौरे के बाद आज रायपुर लौटेंगे। अपने दौरे के दौरान उन्होंने असम में भाजपा संगठन के साथ मिलकर चुनावी रणनीति तैयार की। अरुण साव को लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र की 9 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दौरे के दौरान उन्होंने ढकुआखाना, लखीमपुर, तिनसुकिया और धेमाजी में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर डबल इंजन सरकार के विकास कार्यों पर चर्चा की।

Team India Super-8 Schedule: तारीखें तय, इन टीमों से होगी भिड़ंत

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है. सुपर-8 चरण में ग्रुप-1 की तस्वीर साफ है. मेजबान भारत के साथ जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका ने जगह बनाई है. अब हर मुकाबला सेमीफाइनल की दिशा तय करेगा. भारत अपने अभियान की शुरुआत 22 फरवरी को करेगा. पहला ही मैच चुनौतीपूर्ण है, जब टीम की भिड़ंत दक्षिण अफ्रीका से होगी. यह मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में शाम 7 बजे खेला जाएगा. टूर्नामेंट के इस चरण में शुरुआती जीत मनोवैज्ञानिक बढ़त दिला सकती है, लिहाजा नजरें इस हाई-वोल्टेज टक्कर पर टिकी होंगी. दूसरा मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में जिम्बाब्वे के खिलाफ होगा. सुपर-8 का यह मुकाबला भारत के लिए अंक तालिका में मजबूती का अहम अवसर माना जा रहा है. स्पिन के अनुकूल चेन्नई की पिच पर रणनीति निर्णायक भूमिका निभा सकती है. भारत का तीसरा सुपर-8 मुकाबला 1 मार्च को कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला जाएगा. यह मैच सुपर-8 के ग्रुप-1 की तस्वीर पूरी तरह साफ कर सकता है. कैरेबियाई टीम की विस्फोटक बल्लेबाजी के सामने भारत की गेंदबाजी की असली परीक्षा होगी. सुपर-8 के ग्रुप-1 में चारों टीमें मजबूत हैं, ऐसे में रनरेट भी अहम भूमिका निभा सकता है. मेजबान होने के नाते भारत पर उम्मीदों का दबाव है, लेकिन घरेलू परिस्थितियां टीम के पक्ष में जा सकती हैं. टीम इंडिया सुपर-8 की राह को पार कर सेमीफाइनल का टिकट कटाने के लिए ताकत झोंकने के लिए तैयार है.  उधर, सुपर-8 के ग्रुप-2 में इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें हैं. सुपर-8 के बाद टूर्नामेंट का नॉकआउट दौर (सेमीफाइनल) शुरू होगा, जहां 4 (दोनों ग्रुप से शीर्ष 2-2) टीमें होंगी. टूर्नामेंट के दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 4 और 5 मार्च को खेले जाएंगे. इसके बाद क्रिकेट जगत की निगाहें 8 मार्च पर टिकी होंगी, जब खिताबी मुकाबला खेला जाएगा. पाकिस्तान सुपर-8 राउंड की शुरुआत शनिवार को कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले से करेगा.  अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करता है, तो वह 4 मार्च को कोलंबो में खेले जाने वाले पहले सेमीफाइनल में उतरेगा. लेकिन यदि पाकिस्तान क्वालिफाई नहीं करता, तो यह सेमीफाइनल मुकाबला कोलकाता में खेला जाएगा. दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेला जाएगा. अगर भारत क्वालिफाई करता है, तो वह दूसरे सेमीफाइनल में खेलेगा. यदि पाकिस्तान फाइनल में पहुंचता है, तो खिताबी मुकाबला कोलंबो में आयोजित होगा, अन्यथा फाइनल अहमदाबाद में खेला जाएगा. सेमीफाइनल और फाइनल दोनों मुकाबलों के लिए रिजर्व डे भी रखा गया है.

असम चुनाव की तैयारी तेज, SIR पूरा; CEC बोले—EVM में होगा अहम बदलाव

नई दिल्ली असम में चुनाव की तैयारियों और हाल ही में खत्म हुई SIR प्रक्रिया पर, चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, प्योर इलेक्टोरल रोल लोकतंत्र की नींव हैं. असम में हाल ही में खत्म हुई SIR का मकसद था कि कोई भी योग्य वोटर बाहर न हो और कोई भी अयोग्य वोटर शामिल न हो. फाइनल इलेक्टोरल रोल में, लगभग 2.49 करोड़ लोगों को शामिल किया गया है. घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए: ज्ञानेश कुमार असम में SIR समाप्त हो चुका है. यहां का स्पेशल रिविजन 12 अन्य राज्यों से अलग है. बाकी 12 राज्यों के 51 करोड़ मतदाताओं के SIR का अंतिम चरण सामने आ चुका है और कई के समाप्त हो चुके हैं. असम में SIR पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, असम में SIR करने का सिर्फ एक ही मकसद था – सभी एलिजिबल वोटर्स को शामिल करना और इनएलिजिबल वोटर्स को बाहर करना. अवैध घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं और नये वोटर जो युवा हैं, जो पहली बार वोट करेंगे उनके नाम जोड़े गए हैं. EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो दिखाई जाएंगी : ज्ञानेश कुमार असम में चुनाव की तैयारियों के रिव्यू पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार ने कहा, इस बार, EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो दिखाई जाएंगी, और उनके नाम और सीरियल नंबर बड़े फॉन्ट में दिखाए जाएंगे. हमने हर पोलिंग सेंटर पर 1,200 वोटरों की लिमिट भी तय की है. पहली बार, असम में वोटर वोटिंग सेंटर के एंट्री पॉइंट पर अपने मोबाइल फोन रख सकेंगे. चुनाव कार्यक्रम मार्च के मध्य में हो सकता है जारी पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर विधानसभा चुनाव हो सकते हैं, जिससे संबंधित कार्यक्रम मार्च के मध्य में घोषित किए जाने की संभावना है. चुनाव अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर हो सकते हैं. पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई और जून में अलग-अलग तारीखों पर खत्म हो रहा है. पुडुचेरी विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल 15 जून को खत्म होगा, वहीं असम का 20 मई, केरल का 23 मई, तमिलनाडु का 10 मई और पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को खत्म हो रहा है.

‘कम से कम तीन बच्चे हों’ — मोहन भागवत का आह्वान, बोले किसी से खतरा नहीं

लखनऊ  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि हिंदू समाज को किसी से खतरा नहीं है, लेकिन उसे सजग और संगठित रहना चाहिए। उन्होंने यह बात लखनऊ स्थित विद्या भारती के भारतीय शिक्षा शोध संस्थान, सरस्वती कुंज, निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक के दौरान कही। डॉ. भागवत ने कहा कि हिंदू परिवारों को कम से कम तीन बच्चों का संकल्प लेना चाहिए। उनका तर्क था कि जिन समाजों में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत कम हो जाती है, वे धीरे-धीरे कमजोर पड़ जाते हैं। 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता इसके बाद माधव सभागार में आयोजित 'कार्यकर्ता कुटुंब मिलन' कार्यक्रम में उन्होंने 'घर वापसी' अभियान को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग पुनः हिंदू धर्म में लौटते हैं, उनके साथ संवाद और सहयोग बनाए रखना चाहिए। हम सभी एक ही देश और मातृभूमि के पुत्र अपने संबोधन में उन्होंने कहा, हम सभी एक ही देश और मातृभूमि के पुत्र हैं। जो हमारे विरोधी हैं, उन्हें समाप्त करना हमारा विचार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर, कुआं और श्मशान जैसे सार्वजनिक धार्मिक स्थल सभी हिंदुओं के लिए समान रूप से खुले होने चाहिए। कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस कार्यक्रम में सिख, बौद्ध और जैन समाज के प्रतिनिधियों के साथ कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी उपस्थित रहे। इनमें रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम और ब्रह्म विद्या निकेतन सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हुए।  

आज से रमजान की शुरुआत, मंत्री इरफान अंसारी ने झारखंड वासियों को दीं शुभकामनाएं

रांची  पवित्र माह-ए-रमजान की शुरुआत के अवसर पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक मुबारकबाद दी है। उन्होंने राज्य में अमन-चैन, खुशहाली और तरक्की की दुआ की। मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि रमजान बरकत, रहमत और मगफिरत (माफी) का महीना है। इस महीने में लोग रोजा रखकर अपने देश, राज्य और परिवार की सलामती के लिए दुआ करते हैं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह सब्र, परहेजगारी और खुद को बेहतर बनाने का संदेश देता है।मंत्री ने आगे कहा कि तरावीह की नमाज के जरिए लोग अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं और सच्चे दिल से की गई दुआ जरूर कबूल होती है। रमजान को उन्होंने इम्तेहान का महीना बताया, लेकिन साथ ही कहा कि यह रहमतों और नेमतों से भरा हुआ समय भी है। मंत्री ने समाज के लोगों से अपील की कि इस पवित्र महीने में ज्यादा से ज्यादा जकात और खैरात दें तथा जरूरतमंदों की मदद करें, ताकि समाज में प्यार, भाईचारा और हमदर्दी बनी रहे। अंत में उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को माह-ए-रमजान की दिली मुबारकबाद दी।

रात 10 बजे के बाद ट्रेन में लागू हो जाते हैं ये नियम, 99% लोग होंगे अनजान

नई दिल्ली  भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवाओं में से एक है और हर दिन करोड़ों यात्री इससे सफर करते हैं। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने कई नियम बनाए हैं। खासकर रात के समय यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कुछ विशेष नियम लागू किए जाते हैं। अगर आप रात में ट्रेन से सफर कर रहे हैं, तो इन नियमों की जानकारी होना जरूरी है। तो आइए जानते हैं कि रात के 10 बजे के बाद ट्रेन में कौन-कौन से नियम लागू हो जाते हैं और यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। रात 10 बजे के बाद टिकट चेकिंग का नियम रेलवे के नियमों के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक टीटीई (ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर) सो रहे यात्रियों को टिकट दिखाने के लिए परेशान नहीं कर सकता। यह नियम स्लीपर और एसी दोनों कोच पर लागू होता है। हालांकि, जो यात्री रात 10 बजे के बाद ट्रेन में चढ़ते हैं, उनसे टिकट जांच की जा सकती है। यदि कोई अधिकारी बिना कारण बार-बार परेशान करता है, तो यात्री रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शोर-शराबे पर सख्ती रात के समय ट्रेन में शांति बनाए रखना अनिवार्य है। तेज आवाज में बात करना, मोबाइल पर लाउडस्पीकर चलाना या बिना हेडफोन गाने सुनना नियमों के खिलाफ है। यदि किसी यात्री की वजह से दूसरों की नींद या आराम में बाधा आती है, तो उस पर कार्रवाई हो सकती है। रेलवे एक्ट 1989 की धारा 145 के तहत शांति भंग करने पर 500 से 1000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। लाइट और अन्य सुविधाओं के नियम रात 10 बजे के बाद कोच की मुख्य लाइट बंद कर दी जाती है और केवल नाइट लाइट चालू रहती है। समूह में यात्रा कर रहे लोग भी ऊंची आवाज में बातचीत नहीं कर सकते। कुछ ट्रेनों में देर रात भोजन सेवा बंद कर दी जाती है। जरूरत हो तो पहले से खाना बुक किया जा सकता है।     सफाई कर्मचारियों की आवाजाही रात में सीमित रहती है।  सुरक्षा कारणों से कई ट्रेनों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक चार्जिंग पॉइंट बंद किए जा सकते हैं। मिडिल बर्थ से जुड़ा नियम स्लीपर कोच में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक मिडिल बर्थ वाला यात्री अपनी सीट खोल सकता है। इस दौरान लोअर बर्थ पर बैठे यात्री उसे रोक नहीं सकते। सुबह 6 बजे के बाद मिडिल बर्थ को वापस बंद करना होता है, ताकि नीचे बैठने वाले यात्रियों को सुविधा मिल सके। क्यों जरूरी हैं ये नियम? इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को रात के समय शांत और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है। सही जानकारी होने से आप अनावश्यक विवाद और असुविधा से बच सकते हैं। अगर आप अगली बार रात में ट्रेन से सफर करें, तो इन नियमों का ध्यान रखें और दूसरों की सुविधा का भी सम्मान करें।

राज्यसभा में बदलता गणित: शरद-सिंघवी की कुर्सी खाली, BJP कब्जे की तैयारी में

नई दिल्ली लोकसभा के बाद राज्‍यसभा में भी इंडिया अलायंस की ताकत घटने जा रही है. चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों पर 16 मार्च को चुनाव कराने का ऐलान क‍िया है. लेकिन यह महज एक रूटीन चुनाव नहीं है; यह भारतीय राजनीति के उन दिग्गजों की विदाई और नए समीकरणों के उदय की कहानी है, जो संसद के गलियारों में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदलने वाला है. सबसे बड़ी सुगबुगाहट उन कुर्सियों को लेकर है जो खाली होने जा रही हैं. विपक्षी एकता के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार और कांग्रेस के संकटमोचक अभिषेक मनु सिंघवी जैसे चेहरों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी इन खाली होती कुर्सियों पर अपना ‘कमल’ खिलाकर राज्‍यसभा में अपनी बादशाहत बनाने जा रही है? 10 राज्य और 37 सीटें चुनाव आयोग के मुताबिक, अप्रैल में खाली हो रही 37 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान और उसी दिन मतगणना होगी. ये सीटें महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश , पश्चिम बंगाल, बिहार, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, छत्तीसगढ़, हरियाणा, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण राज्यों से आती हैं. सीटों का गणित एक नजर में महाराष्ट्र    7    असम    3 पश्चिम बंगाल    6    हरियाणा    2 बिहार    6    छत्तीसगढ़    2 तमिलनाडु    6    हिमाचल प्रदेश    1 ओडिशा    4    स्रोत-    ECI शरद पवार से सिंघवी तक… दिग्गजों की विदाई एनसीपी के संस्थापक शरद पवार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. महाराष्ट्र की बदली हुई राजनीति में, जहां अजित पवार की पार्टी अब एनडीए का हिस्सा हैं, शरद पवार के लिए दोबारा सदन पहुंचना एक बड़ी चुनौती है. वहीं, कांग्रेस के दिग्गज वकील और रणनीतिकार अभिषेक मनु सिंघवी की सीट भी खाली हो रही है. उनके अलावा प्रियंका चतुर्वेदी (शिवसेना-UBT), केटीएस तुलसी (कांग्रेस), और रामनाथ ठाकुर (JDU) जैसे नाम भी रिटायर होने वालों की सूची में हैं. इन दिग्गजों की विदाई विपक्ष के लिए एक बड़ा वैचारिक और रणनीतिक वैक्यूम पैदा कर सकती है. महाराष्ट्र और बिहार: एनडीए के लिए ‘लॉटरी’ का मौका महाराष्ट्र में 7 सीटों पर चुनाव होने हैं. अभी यहां बीजेपी और शरद पवार गुट के पास 2-2 सीटें हैं, जबकि कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और रामदास आठवले के पास 1-1 सीट है. लेकिन राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखें तो एनडीए यानी बीजेपी, एकनाथ शिंदे शिवसेना और अजित पवार यहां ‘क्लीन स्वीप’ की स्थिति में दिख रहा है. जानकारों का मानना है कि बीजेपी यहां अपनी सीटों की संख्या में भारी इजाफा करेगी, जिससे शरद पवार और उद्धव ठाकरे के खेमे को बड़ा नुकसान हो सकता है. बिहार में भी 5 सीटों का समीकरण एनडीए के पक्ष में झुकता दिख रहा है. यहां जेडीयू की 2 और आरजेडी की 2 सीटें खाली हो रही हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद अब एनडीए यहां 3 सीटों पर मजबूत पकड़ रखता है, जबकि ‘इंडिया’ गठबंधन को नुकसान उठाना पड़ सकता है. पश्चिम बंगाल और ओडिशा: बीजेपी मारेगी सेंध? पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के गढ़ में बीजेपी अपनी पैठ मजबूत करने की तैयारी में है. यहां 6 सीटों पर चुनाव हैं. वर्तमान में TMC के पास 4 सीटें हैं और एक लेफ्ट (सीपीआई-एम) के पास. जिस तरह से बंगाल विधानसभा में वामपंथ का सफाया हुआ है, बीजेपी यहां सीपीआई-एम की सीट छीनकर अपना खाता खोलने और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए तैयार है. ओडिशा में भी 4 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है. नवीन पटनायक की बीजेडी और बीजेपी के बीच यहां सीटों का बंटवारा विधानसभा की ताकत के आधार पर होगा, जहां बीजेपी अपनी मौजूदा 2 सीटों को बरकरार रखने या बढ़ाने की कोशिश करेगी. NDA vs INDIA… क‍िसके पास क‍ितने नंबर अनुमानों के मुताबिक, 16 मार्च के चुनाव एनडीए के लिए ‘सुपर संडे’ साबित हो सकते हैं. अनुमान है कि एनडीए को इन चुनावों में कम से कम 6 सीटों का फायदा होगा इससे एनडीए का आंकड़ा 21 के करीब पहुंच सकता है. दूसरी ओर, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन को लगभग 4 सीटों का नुकसान होने की संभावना है. कांग्रेस के लिए तेलंगाना, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से अच्छी खबरें आ सकती हैं, जहाँ वह अपनी स्थिति में थोड़ा सुधार कर सकती है. बीजेपी कर रही रिकॉर्ड की तैयारी     साल 2026 बीजेपी के लिए राज्यसभा में ऐतिहासिक होने जा रहा है. मार्च के इन 37 सीटों के अलावा, पूरे साल में कुल 71 सदस्य रिटायर होने वाले हैं. अप्रैल में 32 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 9 बीजेपी से हैं. जून में 22 सदस्य रिटायर होंगे. इनमें से 12 बीजेपी से हैं. इसी तरह नवंबर के अंत में 11 सदस्य रिटायर होंगे, इनमें से 9 बीजेपी से हैं.     बीजेपी न केवल अपनी सीटें बचा रही है, बल्कि क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के कमजोर राज्यों से अतिरिक्त सीटें खींच रही है. अगर यह ट्रेंड जारी रहा, तो बीजेपी अपने दम पर राज्यसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुंच जाएगी.     राज्यसभा में कुल 245 सीटें होती हैं. साधारण बहुमत के लिए किसी भी गठबंधन या दल को 123 सीटों की आवश्यकता होती है. वर्तमान में बीजेपी के पास लगभग 95-98 सदस्य हैं. NDA का आंकड़ा 115 से 118 के आसपास पहुंचता है.इस चुनाव के बाद राज्यसभा में एनडीए 123 के बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है. बदल जाएगा राज्‍यसभा का मिजाज शरद पवार और अभिषेक मनु सिंघवी जैसे कद्दावर नेताओं की कमी विपक्ष को खलेगी, जबकि बीजेपी के लिए यह अपनी विधायी ताकत को और अधिक धार देने का अवसर है. राज्यसभा में बहुमत मिलने का मतलब है कि सरकार को अब विवादास्पद बिलों को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआर कांग्रेस जैसे दलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. एनडीए की बढ़ती ताकत ने साफ कर दिया है कि ‘उच्च सदन’ की चाबी अब मजबूती से सत्तापक्ष के हाथों में जाने वाली है.  

MP में हॉट पोलिटिकल हूटर रेस: मंत्री और विधायक नियमों की अनदेखी कर रहे, पुलिस कार्रवाई से कतराती हुई

भोपाल  राजधानी में आपको हूटर प्रेमी बहुत दिख जाएंगे, जो खुलआम अपने वाहनों में हूटर लगाकर कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से वीवीआईपी कल्चर खत्म करने को लेकर कई बार अलग-अलग मंचों से कह चुके हैं. इसके साथ ही इस कल्चर को खत्म करने के लिए कई नियमों में बदलाव भी किया गया. इसके बावजूद नेताओं और अधिकारियों का लाल बत्ती के साथ हूटर के लिए जो प्यार है, खत्म होने का नाम नहीं लेता है. मंत्री-विधायक और सांसदों के वाहन सांय-सांय की आवाज करते सड़कों पर दौड़ते नजर आ जाते हैं. हूटर नियम के बाद नहीं उतर रहे हैं. पीएम मोदी के आदेश एमपी में बेअसर करीब 8 साल पहले केंद्र सरकार की ओर से मंत्री अफसर समेत सभी जनप्रतिनिधियों के वाहनों पर हूटर लगाने के नियम को बंद कर दिया गया था. इसके बाद से गाड़ियों पर लगे हूटरों को उतारना शुरू भी कर दिया गया था. ज्यादातर गाड़ियों से हूटर और लाल बत्ती को प्रशासन द्वारा उतरावा भी दिया गया था, लेकिन मध्य प्रदेश में जनप्रतिनिधि हों या बड़े अधिकारी अब भी हूटर का उपयोग कर रहे हैं. केंद्र सरकार की मंशा ये थी की हूटर से काफी तेज आवाज निकलती है और ऐसे में सामान्य तौर पर उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने की अनुमति नहीं केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के तहत इस तरह का कोई भी प्रेशर हॉर्न किसी वाहन में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, लेकिन पहले वीआईपी लोगों को इसकी इजाजत थी. केन्द्र सरकार के आदेश के बाद वीआईपी लोगों के वाहनों पर भी हूटर लगाना बंद कर दिया गया था. हूटर लगाने की इजाजत सिर्फ आपातकालीन सेवा में इस्तेमाल होने वाले वाहन जैसे एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के वाहन शामिल हैं. इन वाहनों के अलावा अगर और कोई हूटर इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है. हूटर लगाकर फर्राटा भर रहे नेतागण वर्तमान में विधायक, नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ ही अन्य राजनीतिक दलों के पदाधिकारी बेखौफ होकर हूटर लगाकर अपना जलवा बिखेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं. यातायात पुलिस की चालानी कार्रवाई 2 पहिया वाहनों, सीट बेल्ट व वाहनों के दस्तावेज चेक करने तक ही सिमट कर रह गई है. अनाधिकृत रूप से हूटर लगाकर शहर और मुख्य मार्गों में दौड़ने वाले वाहनों के विरुद्ध अब तक यातायात पुलिस ने भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. इन वाहनों में हूटर लगाने की छूट अगर कोई इन नियमों के खिलाफ जाकर अपने वाहन पर हूटर लगाता है, तो उस पर 5000 रुपये तक का चालान किया जा सकता है. केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के नियम 119(3) के तहत इन वाहनों को हूटर और साइरन के लिए छूट दी गई है, जिसमें एंबुलेंस, फायर बिग्रेड, आपातकालीन सेवा में चलने वाली गाड़ी और परिवहन विभाग के अफसरों की गाड़ियां शामिल हैं. नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई इस मामले में पुलिस कमिश्नर संजय सिंह ने कहा, "यातायात पुलिस की ड्यूटी है कि ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करें. जरूरत पड़ी तो हूटर के खिलाफ अभियान भी चलाया जाएगा." हूटर के अलावा प्रेशर हॉर्न, ब्लैक फिल्म, फ्लैशर लाइट और मॉडिफाइड साइलेंसर लगाना केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम 1989 के खिलाफ है. ऐसा करने पर भी जुर्माना भरना पड़ सकता है. इसीलिए वाहन चलाते वक्त इन नियमों का ध्यान रखना काफी जरूरी है.

वायुसेना का जबरदस्त शो! राफेल और तेजस के साथ पोखरण में गूंजेगी भारत की दहाड़

जैसलमेर  भारतीय वायुसेना 27 फरवरी 2026 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित पोखरण रेंज में अपनी युद्धक क्षमता का ऐतिहासिक प्रदर्शन करने जा रही है। 'वायुशक्ति-2026' नामक इस युद्धाभ्यास में वायुसेना 'ऑपरेशन सिंदूर' की तर्ज पर अपनी मारक क्षमता का लोहा मनवाएगी। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दुश्मन पर त्वरित हमले, रणनीतिक बढ़त और 'आत्मनिर्भर भारत' की स्वदेशी शक्ति का प्रदर्शन करना है। आसमान में दिखेगी 'बाज' जैसी पैनी नजर इस बार के अभ्यास में एक नया एयरक्राफ्ट और आधुनिक तकनीक विशेष आकर्षण का केंद्र होंगे, जो आसमान में बाज की तरह मंडराकर पलक झपकते ही सटीक हमला करने में सक्षम हैं। वायुसेना इस दौरान दिन, शाम और रात के समय कठिन मिशनों को अंजाम देने की अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करेगी। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन और संघर्ष क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी (HADR) में वायुसेना की भूमिका का भी सजीव चित्रण किया जाएगा। बेड़े में शामिल होंगे ये आधुनिक लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर वायुशक्ति-26 में भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लगभग सभी प्रमुख विमान हिस्सा लेंगे…     लड़ाकू विमान: राफेल, तेजस (स्वदेशी), सुखोई-30 MKI, मिराज-2000, जगुआर, मिग-29 और हॉक।     परिवहन विमान: C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस और स्वदेशी C-295।     हेलिकॉप्टर: अपाचे (अटैक), चिनूक (हैवी लिफ्ट), प्रचंड (LCH), ध्रुव (ALH MK-IV) और एमआई-17।     अटैक ड्रोन्स: रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA) और लॉइटरिंग मुनिशन्स। स्वदेशी हथियार प्रणालियों का 'अभेद्य' प्रदर्शन 'अचूक, अभेद्य और सटीक' के मंत्र के साथ वायुसेना अपनी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन करेगी…     मिसाइल सिस्टम: स्वदेशी 'आकाश' और 'स्पाइडर' मिसाइल प्रणालियों से सटीक मार का प्रदर्शन।     ड्रोन रोधी तकनीक: काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (CUAS) की टेस्टिंग।     लॉइटरिंग मुनिशन्स: नई तकनीक वाले 'कामिकेज़' ड्रोन्स जो लक्ष्य को खोजकर नष्ट करते हैं।