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SF में कौन मारेगा बाजी? Sunil Gavaskar ने खोले पत्ते, Jasprit Bumrah को बताया मैच का ‘गेम चेंजर’

नई दिल्ली अपने जमाने के दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर को लगता है कि भारत और इंग्लैंड के बीच टी20 विश्व कप का सेमीफाइनल मैच बेहद रोमांचक होगा। बल्लेबाजी में लचीलापन और जसप्रीत बुमराह जैसे तेज गेंदबाज की मौजूदगी से भारतीय टीम थोड़ा फायदे में रहेगी। मौजूदा चैंपियन टीम इंडिया गुरुवार को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड से भिड़ेगी। इससे पहले 2022 और 2024 में भी इन दोनों टीमों के बीच सेमीफाइनल खेला गया था। इंग्लैंड ने 2022 में एडिलेड में भारत को 10 विकेट से हराया, जबकि रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम ने दो साल बाद वेस्टइंडीज के प्रोविडेंस में इसका बदला चुकता कर दिया था। गावस्कर ने बेंगलुरु में चुनिंदा मीडियाकर्मियों से कहा, ‘दोनों टीम बहुत अच्छी हैं। उनके पास अच्छे बल्लेबाज और अच्छे गेंदबाज हैं। उनके पास मध्य क्रम में अच्छे बल्लेबाज हैं और फिनिशर भी हैं। दोनों टीमों की गेंदबाजी में विविधता है।’ उन्होंने कहा, ‘इंग्लैंड के पास कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में खेल चुके हैं और भारतीय परिस्थितियों से परिचित हैं। उसके खिलाड़ी नॉकआउट मैच खेलने के दबाव से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह एक रोमांचक मुकाबला होगा।’ गावस्कर ने हालांकि कहा कि तेज गेंदबाज बुमराह और इंग्लैंड के बल्लेबाजों के बीच जंग इस मैच का परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इंग्लैंड की टीम में कप्तान हैरी ब्रूक इस समय शानदार फॉर्म में चल रहे हैं। पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, ‘मेरा मानना ​​है कि बुमराह को पावरप्ले में कम से कम दो ओवर करने चाहिए क्योंकि नई गेंद से अगर वह शुरू में विकेट ले लेते हैं, तो भारत का पलड़ा भारी हो जाएगा। वह जोस बटलर, फिल साल्ट और हैरी ब्रूक के विकेट लेकर इंग्लैंड की बल्लेबाजी को ध्वस्त कर सकते हैं।’ गावस्कर ने कहा कि बुमराह को चार ओवर के बाद गेंदबाजी सौंपने का कोई मतलब नहीं है।उन्होंने कहा, ‘जब चार ओवर पहले ही फेंके जा चुके हैं और बल्लेबाजों को लगभग 20 गेंदें खेलने को मिल चुकी हैं, तो इसका मतलब होगा कि जब बुमराह गेंदबाजी करने के लिए आएंगे तो दोनों बल्लेबाजों को 8-10 गेंदें खेलने को मिल चुकी है और उन्होंने क्रीज पर अपने पांव जमा लिए होंगे। बुमराह और भारत दोनों के लिए यह बेहतर होगा कि बुमराह शुरू में गेंदबाजी करके विकेट हासिल करें।’ बुमराह का सभी प्रारूपों में इतना घातक गेंदबाज कैसे बने, इस बारे में गावस्कर ने कहा, ‘अगर आपने आंद्रे अगासी की आत्मकथा (ओपन) पढ़ी है तो आपको पता चल जाएगा कि उन्होंने बोरिस बेकर की सर्व का अंदाज़ा कैसे लगाया। शुरू में तो वह उनकी सर्व का अंदाज़ा नहीं लगा पाए, लेकिन फिर उन्हें अहसास हुआ कि अगर गेंद उछालते समय उनकी जीभ बाईं ओर होती है तो वे वाइड सर्व करेंगे। अगर उनकी जीभ दाईं ओर होती है तो वे सेंटर लाइन पर सर्व करेंगे।’ गावस्कर ने कहा, ‘लेकिन जहां तक बुमराह का सवाल है तो उनको समझना आसान नहीं है। वह पहले वाइड गेंद फेंकते हैं तो अक्सर लगता है कि गेंद अंदर की तरफ आएगी। लेकिन वह गेंद को स्विंग करा सकते हैं। इसीलिए वह तीनों प्रारूप में इतने खतरनाक गेंदबाज हैं।’ गावस्कर के अनुसार भारत का एक और फायदा यह है कि उसकी बल्लेबाजी में लचीलापन है और तिलक वर्मा जैसे बल्लेबाज किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी करने में सक्षम हैं। तिलक ने शुरू में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी की, लेकिन टीम प्रबंधन ने जब संजू सैमसन को अंतिम एकादश में शामिल करने का फैसला किया तो वह पांचवें और छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने लगे। गावस्कर ने कहा, ‘तिलक वर्मा बहुत ही समझदार क्रिकेटर है, जो स्थिति का अच्छी तरह आकलन करता है और फिर उसी के अनुसार खेलता है। मुझे लगता है कि पांचवें या छठे नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए वह स्थिति की नजाकत को समझ सकता है। मुझे लगता है कि जिस तरह से उसने वेस्टइंडीज के खिलाफ बल्लेबाजी की, उसने सैमसन पर से दबाव काफी हद तक कम कर दिया था।’उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि भारत भाग्यशाली है कि उसके पास तिलक जैसे खिलाड़ी हैं जो तीसरे नंबर पर और यहां तक ​​कि पांचवें या छठे नंबर पर भी बल्लेबाजी कर सकते हैं।’ इंग्लैंड के बल्लेबाज जोस बटलर की टूर्नामेंट में खराब फॉर्म के बारे में गावस्कर ने कहा, ‘वह अभिषेक शर्मा की तरह खतरनाक खिलाड़ी साबित हो सकते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि बटलर का विकेट जल्दी लेना महत्वपूर्ण होगा। हमने आईसीसी और आईपीएल जैसी प्रतियोगिताओं में देखा है कि वह काफी खतरनाक बल्लेबाज साबित हो सकते हैं।’  

कैंट-आगरा कॉलेज मेट्रो लाइन सितंबर तक पूरी, काम ने पकड़ी रफ्तार; जानें ताजे अपडेट

आगरा  उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन दूसरे कॉरिडोर में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक सितंबर तक मेट्रो सेवा शुरू हो जाएगी। यह कॉरिडोर दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।  उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के उप महाप्रबंधक पंचानन मिश्रा ने बताया कि दूसरा कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनाया जा रहा है। यह दो चरणों में बनेगा। पहले चरण में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक मेट्रो ट्रेन सेवा चलेगी। इसमें पिलर और स्टेशन बनाने का काम चल रहा है। सितंबर में आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक मेट्रो ट्रेन चलने लगेगी आगरा कॉलेज से कालिंदी विहार का ट्रैक बनाने का कार्य दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। पहले कॉरिडोर की बात करें तो अप्रैल में ताज पूर्वी से आईएसबीटी तक मेट्रो ट्रेन चलने लगेगी। अभी 6 स्टेशनों पर ही मेट्रो ट्रेन चल रही है। अगले पांच स्टेशन एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा कॉलेज, राजा की मंडी, आरबीएस और आईएसबीटी स्टेशन है। इनका काम पूरा हो गया है। डाउन लेन की पटरी बिछाने का कार्य चल रहा है। इसी महीने हाईस्पीड ट्रायल करने के बाद अगले महीने में मेट्रो ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी।  

देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल

होली में गोमाता ने रंग भरे गोपालकों व ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी में देसी गाय के गोबर के कंडों की राख तथा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों से बन रहा गुलाल योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण व स्वास्थ्य अनुकूल उत्पादों का निर्माण भी बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश भर में किया जा रहा है निर्माण लखनऊ उत्तर प्रदेश में इस बार होली का उल्लास न केवल रंगों से, बल्कि गोमाता के आशीर्वाद और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन से भी सराबोर होगा। प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में राज्य के विभिन्न जिलों में पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों से पारंपरिक 'ऑर्गेनिक गुलाल' तैयार किया जा रहा है। यह गुलाल न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए नारी सशक्तिकरण का नया अध्याय लिख रहा है। प्रकृति के रंगों से सजेगा त्योहार गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस अनूठी पहल के तहत ग्रामीण महिलाएं गोशाला पालकों के सहयोग से प्राकृतिक तत्वों के जरिए गुलाल का निर्माण कर रही हैं। इसमें गोबर के कंडों की राख के अलावा गुलाब की पंखुड़ियों, चुकंदर, पालक, जामुन की पत्तियों और इंडिगो (नील) जैसे तत्वों का उपयोग किया जा रहा है। बाजार में मिलने वाले जहरीले केमिकल युक्त रंगों के मुकाबले यह गुलाल पूरी तरह इको-फ्रेंडली और त्वचा के लिए सुरक्षित है। गोबर की राख का 'वैज्ञानिक' आधार इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता देशी गाय के गोबर के कंडों की राख का उपयोग है। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित 'क्षारीय तत्व' पाए जाते हैं, जो नमी को कम कर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं। प्रसंस्करण के बाद यह राख गुलाल को एक मुलायम आधार प्रदान करती है, जिससे रंगों का फैलाव बेहतर होता है और किसी कृत्रिम फिलर की जरूरत नहीं पड़ती। प्रदेश भर में रोजगार आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि इस योजना के तहत बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन किया गया है। यह प्रयास न केवल होली को स्वास्थ्यकर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है, बल्कि स्थानीय संसाधनों के सतत उपयोग का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। गोशालाओं से प्राप्त सामग्री के उपयोग से गोवंश का संरक्षण हो रहा है और महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।

एलनाज नौरोजी का बड़ा डर, खामेनेई की मौत पर जश्न मनाने के बाद कहा- “मुझे मार डालेंगे”

नई दिल्ली एलनाज नौरोजी बीते कुछ वक्त से चर्चा में हैं। वह अपने देश ईरान के शासकों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। एलनाज ने अली खामेनेई की मौत पर खुशी जाहिर की थी। इसके बाद एक वीडियो शेयर करके कहा था कि वहां जो भी हो रहा है, वहां के हुक्मरान इसके जिम्मेदार हैं। अब एक इंटरव्यू में एलनाज ने यह भी कहा है कि जब तक वो सरकार है, वह अपने देश वापस नहीं जा सकतीं। उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इजराइल से अच्छे थे ईरान के रिश्ते एलनाज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि वह यूएस और इजराइल का सपोर्ट क्यों कर रही हैं। वह बोलीं, 'जब हम ईरान के बारे में बात करते हैं तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक को अलग कर देना चाहती हूं जिन्होंने ईरान के लोगों पर कब्जा कर रखा है। ईरान के ज्यादातर लोग स्मार्ट और पढ़े-लिखे हैं और उनके विचार इस्लामिक रिपब्लिक से नहीं मिलते। एक वक्त था जब ईरान और इजराइल के रिश्ते अच्छे थे। अगर आप सायरस द ग्रेट को देखें, जिस इंसान ने दुनिया का पहला मानवाधिकार लिखा, वो पर्शियन (ईरान का) था। उसने उसने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त करवाया था। शाह (मोहम्मद रजा पहलवी) के वक्त में भी हमारे यूएस से अच्छे रिश्ते थे। सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ही है जो लगातार कह रहा है कि नक्शे से इजराइल को मिटाना चाहता है।' एलनाज ने बताया क्यों कर रहीं विरोध एलनाज आगे बोलीं, 'एक महीने पहले जो ईरानी इन शासकों का विरोध कर रहे थे, उन्हें मार दिया गया। मैं ईरान में पैर भी नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया तो वे लोग मुझे भी मार देंगे। 2022 मूवमेंट में जो हुआ उसकी वजह से मैं ईरान नहीं जा पाई हूं, जहां उन्होंने माहसा अमीनी (22 साल की लड़की) को मार दिया था। सितंबर 2022 में पुलिस कस्टडी में जिसकी मौत होने के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। उस लड़की को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने हिजाब गलत तरीके से पहना था। मैंने खामेनेई के खिलाफ बोला तो मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता हो गई। अगर युद्ध में लोग मारे जाते हैं तो मैं अयातुल्ला को दोष दूंगी क्योंकि लोग कई बार आए और उन्होंने कहा कि वे उन्हें नहीं चाहते लेकिन वे लोग नहीं हटे। ये डिक्टेटरशिप है।' बचपन में ही ईरान से चली गई थीं एलनाज एलनाज का जन्म ईरान में हुआ था लेकिन वह 8 साल की हुईं तो उनके परिवार ने ईरान छोड़ दिया और जर्मनी चली गईं। उनके कुछ रिश्तेदार अभी भी वहां रहते हैं। जर्मनी में एलनाज ने मॉडलिंग की फिर 20 साल की उम्र में भारत आईं। वह कई साल से ईरान नहीं गई हैं।

इंग्लैंड से तीसरी बार सेमीफाइनल में टकराएगा भारत, कौन होगा आगे?

नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में रविवार को टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है. अब 5 मार्च को सेमीफाइनल के नॉकआउट मैच में उसकी भिड़ंत इंग्लैंड के साथ होनी है. भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली इस टक्कर में जो भी टीम जीतेगी वो फाइनल में चली जाएगी और 8 मार्च को अहमदाबाद में नजर आएगी. तो आइए आपको इन दोनों टीमों के बीच की राइवलरी के बारे में बताते हैं… पहले एक नजर सभी 4 टीमों पर इस बार 20 टीमों ने इस वर्ल्ड कप के महासमर में हिस्सा लिया था. इनमें से केवल 4 टीमें अब सेमीफाइनल के लिए सेलेक्ट हुई हैं. इनमें ग्रुप 1 से साउथ अफ्रीका और टीम इंडिया हैं. तो ग्रुप 2 से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने क्वालिफाई किया है |  पहला सेमीफाइल मैच 4 मार्च को कोलकाता में साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े में इंग्लैंड और भारत के बीच होगा |  लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में भारत एक अजब संयोग भी है. टीम इंडिया लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है. और दिलचस्प ये है कि तीनों बार उसका सामना इंग्लैंड से ही तय हुआ है. इससे पहले साल 2022 और साल 2024 में जब टीम इंडिया ने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई किया तो फिर उसकी भिड़ंत इंग्लैंड से ही हुई थी. अब ये तीसरी बार दोनों की टक्कर है |  कैसा रहा है रिकॉर्ड दोनों टीमों की 2022 में जब सेमीफाइनल की भिड़ंत हुई तो टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा के हाथों में थी और इंग्लैंड के कप्तान बटलर थे. इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने हार्दिक पंड्या और कोहली की फिफ्टी के दम पर 168 रन बनाए थे. लेकिन इसके जवाब में इंग्लैंड ने 16 ओवर में ही 10 विकेट से भारत को धूल चटा दी थी. और भारत की उम्मीदों को तोड़ डाला था. फिर इंग्लैंड इस बार चैम्पियन भी बनी थी |  अब कहानी 2024 की अगली बार जब टी20 वर्ल्ड कप हुआ तो फिर से भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला गया. लेकिन इस बार टीम इंडिया तैयार थी. कप्तान दोनों टीमों के सेम थे. लेकिन इस बार नतीजा भारत के पक्ष में आया. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने रोहित शर्मा की फिफ्टी के दम पर 171 रन बनाए. इसके जवाब में इंग्लैंड 103 पर ही सिमट गया. अक्षर और कुलदीप ने इस मैच में 3-3 विकेट झटके थे. बुमराह को 2 सफलता मिली थी |  अब तीसरी भिड़ंत अब लगातार तीसरी बार दोनों टीमें सेमीफाइनल में हैं. इंग्लैंड की टीम सुपर-8 में एक भी मैच नहीं हारी है और अपने ग्रुप की टॉपर रही है. लेकिन भारत को सुपर-8 के पहले मैच में ही साउथ अफ्रीका के हाथों हार झेलनी पड़ी थी. लेकिन फिर भारत ने बाउंस बैक किया और लगातार दो मैच जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया |  कैसा है टी20 वर्ल्ड कप का रिकॉर्ड सेमीफाइनल का आंकड़ा तो आपने जान लिया. लेकिन अब ये भी जानना जरूरी है कि आखिर टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के आंकड़े क्या कहते हैं. टी20 वर्ल्ड कप में दोनों के बीच पांच मैच हुए हैं, जिसमें भारत ने तीन और इंग्लैंड ने दो जीते हैं. हालांकि सेमीफाइनल में 1-1 की बराबरी रही है |  अब देखना होगा कि वानखेड़े में दोनों टीमें कैसा प्रदर्शन करती हैं. इस बार इंग्लैंड की कमान हैरी ब्रूक के हाथों में है, जबकि टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव हैं | 

अभिषेक चौबे–सिद्धांत चतुर्वेदी की जोड़ी, अब बलिया की कहानी बड़े पर्दे पर

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी अपने मित्र और निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ मिलकर अपने होम टाऊन बलिया को केंद्र में रखकर एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। छोटे शहर बलिया से निकलकर मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा तक अपनी पहुंच बनानेवाले सिद्धांत चतुर्वेदी अब अपनी ज़िंदगी के अनुभवों को परदे पर लाने की तैयारी में जुटे हैं। हाल ही में सिद्धांत चतुर्वेदी ने खुद यह बात कही कि वह निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ मिलकर अपने होम टाऊन बलिया को केंद्र में रखकर एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि 'गली बॉय' से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सिद्धांत चतुर्वेदी ने 'गहराइयाँ', 'खो गए हम कहाँ' और 'धड़क 2' जैसी फ़िल्में की और हमेशा लेयर्ड और हटकर किरदार चुने। यही वजह है कि अपनी हर फिल्म में अपने हर परफॉर्मेंस के लिए सिद्धांत ने अपने दर्शकों की सराहना बटोरी। फिलहाल अब वह अपने करियर के एक ऐसे मोड़ पर हैं, जहां वे चाहते हैं कि कहानी सीधे उनके जीवन और यादों से निकलकर सामने आए। सिद्धांत ने कहा, “अभी तक ये ऑफिशियल नहीं है, लेकिन मुझे लगता है ये वही स्टेज है जहां मैं बोल देना चाहता हूं। मैं अपनी रूट्स (जड़ों) पर वापस जाना चाहता हूं। मुझे बलिया की कहानी कहनी है। वहां की ज़िंदगी मैंने देखी है, और मैं वही एक्सपीरियंस स्क्रीन पर लाना चाहता हूं।” उन्होंने इस फिल्म में निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ अपने सहयोग को लेकर भी उत्साह ज़ाहिर करते हुए कहा, “अभिषेक चौबे के साथ हम एक बलिया-बेस्ड स्टोरी पर काम कर रहे हैं। यह वाकई बहुत ही कमाल की कहानी है। इस पर काफी चर्चा चल रही है और मुझे लगता है कि बहुत जल्द ये सबके सामने आएगी।" बलिया में पले-बढ़े एक आम लड़के से लेकर बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता बनने तक, सिद्धांत चतुर्वेदी की जर्नी मेहनत, आत्मविश्वास और उद्देश्य से भरी रही है। ऐसे में यह फिल्म सिर्फ एक नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनकी पहचान, यादों और जड़ों की ओर वापसी का संकेत है। यही वजह है कि सिद्धांत के मुंह से इस फिल्म की बात सुनते ही उनके दर्शकों के मन में उत्साह की लहर दौड़ गई है, क्योंकि वे जानते हैं की अपनी फिल्मों के ज़रिए सच्चाई, गहराई और भावनात्मक ईमानदारी का संदेश देनेवाले सिद्धांत चतुर्वेदी कुछ ख़ास ही करेंगे।  

हार्ट अटैक: महिलाओं में दिखते हैं अलग संकेत, जिन्हें नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

महिलाएं अक्सर थकान, कमजोरी और लगातार बने रहने वाले दर्द को अपनी दिनचर्या का दोष मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं, ये कमजोर या बीमार होते हार्ट के लक्षण भी हो सकते हैं। ऐसे में, तुरंत सतर्क होने और डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होती है… पुरुषों और महिलाओं में हार्ट से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं की बड़ी समस्या यही है कि लक्षणों को लंबे समय तक अनदेखा करने के कारण उन्हें सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता। हालांकि, एस्ट्रोजन के चलते महिलाओं को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच मिला होता है, लेकिन 50 वर्ष की उम्र के बाद इस सुरक्षा का असर कम हो जाता है। एक हालिया डाटा की मानें तो बीते कुछ वर्षों में महिलाओं में कार्डियक मामलों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ऐसे में, हम समय रहते लक्षणों को लेकर गंभीरता बरतें तो ऐसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है। महिलाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याएं अधिक सामने आने लगी हैं। हालांकि, पुरुषों और महिलाओं में इस समस्या के पीछे कारण और लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं में अक्सर मेनोपाज यानी 45 से 50 की उम्र के बाद यह समस्या देखने में आती है। मेनोपाज से पहले एस्ट्रोजन की मात्रा भरपूर होती है। इससे रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं और अच्छा कोलेस्ट्राल (एचडीएल) संतुलित रहता है। यह हार्ट को सुरक्षित रखने वाला कोलेस्ट्राल होता है। इससे बैड कोलेस्ट्राल एलडीएल से भी सुरक्षा मिलती है। मेनोपाज के बाद एस्ट्रोजन अचानक कम हो जाता है, जिससे कोलेस्ट्राल का संतुलन बिगड़ जाता है। कई सारे कारणों पर रखनी होगी नजर महिलाओं में हार्ट की समस्या के पीछे अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे पालिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आदि से भी हार्ट की बीमारी का जोखिम बढ़ता है। जल्दी मेनोपाज या प्रेग्नेंसी भी इस परेशानी का कारण बन सकती है। हमें समझना होगा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय की धमनियों की बनावट थोड़ी छोटी और रक्तवाहिकाएं पतली होती हैं। अक्सर ब्लाकेज इन पतली और छोटी धमनियों में होता है। इन छोटी-छोटी धमनियों का ब्लाकेज अक्सर पता नहीं चलता। यही कारण है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में लक्षण बहुत ही अलग तरह के होते हैं। ये बहुत स्पष्ट नहीं होते, पर खतरनाक जरूर होते हैं। रोजमर्रा की थकान, कमजोरी को टालें नहीं महिलाओं में रोजमर्रा की थकान होती है, उन्हें लगता है कि यह दिनचर्या की वजह से है, इसलिए ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करती रहती हैं। इसी तरह सीने में दर्द उठना और उसका गर्दन व कंधों तक फैलना भी एक बड़ा लक्षण होता है। हार्ट की समस्या होने पर चक्कर और बेहोशी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। अचानक कमजोरी महसूस करना, घबराहट या फिर लगना कि धड़कन बहुत अधिक तेज हो गई है तो इसे टालने के बजाय तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। किन्हें है अधिक जोखिम? जिन महिलाओं का मेनोपाज हो चुका है या जिन लोगों के परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री है या फिर जिन्हें डायबिटीज, ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें हार्ट की हेल्थ को लेकर अधिक सतर्क होने की जरूरत है। धूमपान या अल्कोहल का सेवन, मानसिक तनाव भी बड़े रिस्क फैक्टर हैं। गर्भकाल के दौरान सीने में होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चूंकि, महिलाओं में हार्ट की समस्या को चिह्नित करना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए समय रहते इन लक्षणों को पहचानने और समस्या होने पर डॉक्टर से मिलने के लिए जरूर प्रयास करना चाहिए। रिस्क फैक्टर पर रहे नजर     अगर आपकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है और बार-बार सीने में दबाव महसूस करती हैं।     अगर सांस फूल रही है, पसीना आ रहा है या कमजोरी महसूस होती है।     अगर उल्टी लगती है, दर्द गर्दन तक पहुंचता है, तो तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। बचाव के लिए आदतों में करें सुधार     हार्ट की समस्या से बचने के लिए स्वस्थ और संतुलित भोजन की आदत बनाएं।     नियमित व्यायाम करें, वजन, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखें।     धूमपान या अल्कोहल, अल्ट्रा प्रोसेस्ड आहार आदि से दूरी बनाएं।     नींद को अच्छी तरह से पूरा करें। मानसिक तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     अपना नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराते रहें।  

12 हजार शिक्षकों को होली पर मिला 70 करोड़ का वेतन

बांका. होली का उत्साह परवान चढ़ चुका है। बाजार से गांव तक इसका रंग जमाने गुरुजी के बैंक खाते में सोमवार की सुबह ही 70 करोड़ से अधिक की राशि चली गई। शिक्षकों के खाते में यह राशि फरवरी के वेतन भुगतान के रूप में गई है। कोषागार ने ही करीब 60 करोड़ का वेतन भुगतान एक साथ कर दिया। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक लेकर उच्च माध्यमिक तक के शिक्षक शामिल हैं। इससे करीब 12 हजार शिक्षकों को वेतन मिला है। वेतन की इतनी बड़ी राशि ही होली का रंग जमाएगा। इसमें पुराने वाले नियमित शिक्षक के अलावा विशिष्ट और बीपीएससी शिक्षकों की बड़ी संख्या है। सुबह-सुबह वेतन मिलते ही शिक्षक खरीदारी के लिए बाजार में उतर गए। विभागीय आदेश पर शिक्षा विभाग ने फरवरी का वेतन भुगतान करने के लिए 10 दिन पूर्व की कवायद शुरु कर दी है। प्रखंड और जिला स्तर पर आने वाले निगेटिव को पिछले सप्ताह ही मंगा लिया था। 26 फरवरी तक वेतन भुगतान का विपत्र तैयार कर इसे कोषागार भेज दिया गया, ताकि फरवरी का वेतन शिक्षकों को समय पर मिल जाए। पिछले दो दिन शनिवार और रविवार को कोषागार बंद रहने से इसका वेतन भुगतान नहीं हो सका। लेकिन सोमवार की सुबह ही प्रशासन ने वेतन भुगतान को गंभीरता से लेते हुए सभी को वेतन का भुगतान कर दिया। इसके साथ ही शिक्षकों के चेहरे पर होली की चमक दिखने लगी। वैसे धूरखेली के दिन सोमवार को बड़ी संख्या में माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और प्रारंभिक शिक्षक इंटर और मैट्रिक की कापी जांच के लिए छह केंद्रों पर जमे रहे। इसके अलावा बचे शिक्षकों को विद्यालय खुला रहने के कारण धूल और कीचड़ खाते हुए विद्यालय जाना पड़ा। नियोजित प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव हीरालाल प्रकाश यादव ने कहा कि जीओबी मद से कटोरिया और चांदन के नियोजित शिक्षकों को वेतन मिलता है। लेकिन होली जैसे त्योहार में उनके ढाई सौ शिक्षकों को वेतन नहीं मिल सका है। डीईओ देवनारायण पंडित ने बताया कि अधिकांश शिक्षकों को वेतन भुगतान हो गया। कुछ नियोजित शिक्षकों का वेतन भुगतान बैंक के माध्यम से होता है। विभाग उनका वेतन भी भुगतान के लिए बैंक भेज दिया है। भयो-भयो कोलाहल समर भूमि में…. माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षकों का होली मिलन समारोह सोमवार को आरएमके मैदान के रंगमंच पर हुआ। इसमें दर्जन भर शिक्षकों ने रामायणकालीन एक से एक होली गीतों से सबको सराबोर कर दिया। हिंदी शिक्षक प्रवीण कुमार ने पहले आज खेलत होली गोईया, कन्हैया खेलत होली… से इसकी शुरुआत की। इसके बाद संगीत शिक्षक सुशील कुमार ने एक-एक होली गीतों की प्रस्तुति की। आलोक प्रखर, धर्मेंद्र कुमार, दिलीप कुमार आदि ने एक से एक होली गीत की प्रस्तुति दी। नाल, तबला, हारमोनियम, झाल, झांझर बजाकर सबने होली का रंग जमा दिया। इस अवसर पर डीईओ देवनारायण पंडित, आरएमके प्रधान डा राकेश रंजन, एसएस बालिका प्रधान अनिल कुमार झा, कैरी के प्रधानाध्यापक राजीव रंजन, निशांत केतु, रौशन कृष्णा, अमरेश कुमार, राजीव कुमार, अमित कुमार यादव, प्रीतम कुमार, बमबम पंडित, चंदन चौधरी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। सबने एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामना दी। अध्यक्षता माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार दीपक और संचालन डा. राहुल कुमार ने किया।

केंद्रीय विश्वविद्यालय में होली मिलन में तेज साउंड बजाने पर छात्रों में जमकर चले लात-घूंसे

बिलासपुर. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) परिसर में ब्रदर हुड पैनल ने होली मिलन कार्यक्रम रंग बरसे 0.5 का आयोजन किया था। कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने नशे में जमकर रंग-गुलाल उड़ाए और एक दूसरे के कपड़े फाड़े। इसके बाद अचानक एक दूसरे से मारपीट करने लगे। मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ है। यूनिवर्सिटी में एबीवीपी द्वारा होली पर आयोजित कार्यक्रम में हुई मारपीट की चर्चा खत्म नहीं हुई और दूसरी बार छात्र आपस में भिड़ गए। ब्रदरहुड पैनल ने छात्रों के लिए रंग बरसे 0.5 का आयोजन किया था। ऑडिटोरियम के सामने तेज आवाज में साउंड सिस्टम लगाकर छात्र जमकर रंग-गुलाल उड़ा रहे थे। छात्र-छात्राएं सभी आपस में डांस कर रहे थे। कुछ छात्र आपस में ही एक दूसरे के शर्ट तक फाड़ रहे थे। अबीर गुलाल के नशे के बीच अचानक कुछ छात्रों ने मारपीट शुरू कर दी। बाकी छात्र विवाद देख इधर-उधर भागने लगे। मारपीट का वीडियो भी शाम तक सोशल मीडिया में वायरल होने लगा। वीडियो में छात्र एक दूसरे से मारपीट करते नजर आ रहे हैं। इस विवाद के बाद न तो पुलिस यूनिवर्सिटी आई और ना ही कोई थाने गया। चार दिन पहले भी इसी तरह के आयोजन में लड़े थे छात्र चार दिन पहले एबीवीपी ने कैंपस में होली मिलन का आयोजन किया था। कार्यक्रम के दौरान यहां भी छात्र आपस में भिड़ गए थे। कुछ छात्र तो विवाद का पूरा कारण दबी जुबान में नशा और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की उदासीनता को बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले कार्यक्रम में विवाद के बाद यूनिवर्सिटी को ब्रदरहुड पैनल को रंग बरसे की अनुमति नहीं देना चाहिए था।

हरियाणा में बैजलपुर की देवर-भाभी की ‘कोरड़ा होली’ बनी पहचान

फतेहाबाद. होली के रंग जहां देशभर में मस्ती और उमंग के प्रतीक हैं, वहीं जिले के गांव बैजलपुर में यह पर्व सामाजिक सौहार्द और परंपरा के संरक्षण का अनोखा संदेश देता है। पिछले 22 वर्षों से यहां दुलहंडी पर मनाई जा रही ‘कोरड़ा होली’ अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गांव की पहचान बन चुकी है। 4 से 6 मार्च तक चलने वाले इस तीन दिवसीय फाग उत्सव में 20 साल के युवाओं से लेकर 70 वर्ष तक के बुजुर्ग देवर-भाभी जोश के साथ हिस्सा लेते हैं। गांव के मुख्य चौक में जैसे ही ढोल की थाप और फाग के पारंपरिक गीत गूंजते हैं, पूरा माहौल रंगों से नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट से सराबोर हो उठता है। वर्ष 2004 में गांव में बढ़ते होली हुड़दंग और पानी की बर्बादी को देखते हुए हवलदार सतबीर सिंह झाझडिया, मास्टर रोहताश भाखर और धर्मवीर कादियान के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया। उद्देश्य स्पष्ट था होली की मस्ती भी रहे और सामाजिक मर्यादा भी कायम रहे। कमेटी की पहल पर सामूहिक फाग उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें पूरे गांव ने एक स्थान पर एकत्र होकर होली खेलने की परंपरा अपनाई। धीरे-धीरे यह आयोजन ‘कोरड़ा होली’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया और आज यह आसपास के गांवों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। कढ़ाई का पानी और रस्सी के कोरड़े इस अनोखी होली की सबसे खास बात है इसकी शैली। गांव के चौक में लोहे की बड़ी कढ़ाई पानी से भरकर रखी जाती है। पास में टैंकरों में भी पानी की व्यवस्था रहती है। एक ओर महिलाएं चुन्नी, कपड़ों और मजबूत रस्सियों से बने कोरड़ों के साथ खड़ी रहती हैं, तो दूसरी ओर रिश्ते में देवर लगने वाले युवा तैयार रहते हैं। महिलाएं हंसी-ठिठोली के बीच कोरड़ों से वार करती हैं और युवक कढ़ाई से पानी भरकर उन पर डालते हैं। यह दृश्य देखने लायक होता है। चारों ओर फाग के गीत, तालियां और ठहाके गूंजते हैं। खास बात यह है कि पूरा आयोजन मर्यादा और सम्मान की सीमा में रहता है। ग्रामीण परिवेश में देवर-भाभी का रिश्ता हमेशा हंसी-मजाक और अपनत्व से जुड़ा रहा है। ‘कोरड़ा होली’ इसी रिश्ते की सजीव झलक पेश करती है, जहां कोरड़ों की मार भी स्नेह का प्रतीक बन जाती है और युवा इसे खुशी-खुशी सहते हैं। सम्मान से बढ़ता उत्साह उत्सव के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले देवर-भाभी के जोड़ों को कमेटी की ओर से सम्मानित किया जाता है। विजेताओं को आकर्षक उपहार दिए जाते हैं, जिससे युवाओं में उत्साह दोगुना हो जाता है। ग्राम पंचायत बैजलपुर के सरपंच हेमंत बैजलपुरिया के अनुसार, इस परंपरा का मूल उद्देश्य भाईचारे को मजबूत करना और पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकना है।