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भूमि पेडनेकर का करियर मंत्र: आत्मसम्मान की कीमत पर कोई समझौता नहीं

मुंबई  फिल्मी दुनिया में कलाकारों की चमक-दमक अक्सर लोगों को आकर्षित करती है, लेकिन इस चमक के पीछे कड़ा संघर्ष छिपा होता है। इस कड़ी में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने अपने करियर, बचपन और निजी अनुभवों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि अभिनय उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। कुछ बातें ऐसी हैं जिन पर वे कभी समझौता नहीं कर सकतीं। भूमि पेडनेकर हाल ही में वेब सीरीज 'दलदल' में नजर आई थीं। इस दौरान उन्होंने 'वुमन ऑफ इम्पैक्ट' कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपने जीवन के कई अहम पहलुओं पर बात की। उन्होंने कहा, ''जब मैं सिर्फ 12 साल की थीं, तभी मैंने अपनी मां को साफ कह दिया था कि मैं अभिनेत्री बनना चाहती हूं। उस उम्र में यह सपना बहुत बड़ा था, लेकिन मैंने अपने लक्ष्य को कभी छोड़ा नहीं। मैंने मेहनत की, सीखा और धीरे-धीरे फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई। आज मैं अपनी दमदार भूमिकाओं और मजबूत अभिनय के लिए जानी जाती हूं।'' कार्यक्रम के दौरान भूमि ने अपने स्कूल के दिनों की एक ऐसी घटना भी साझा की, जिसने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया था। उन्होंने कहा, ''एक दिन जब मैं अपनी कक्षा में लौटीं तो मुझे एक कागज का टुकड़ा मिला, जिस पर मेरे शरीर को लेकर मजाकिया और अपमानजनक शब्द लिखे थे। उस समय मैं बहुत छोटी थी और ऐसी बातें मेरे मन पर गहरा असर डाल गईं।'' उन्होंने कहा, ''कम उम्र में इस तरह की छींटाकशी और बदमाशी बच्चों को डर और असुरक्षा का एहसास कराती है। यह अनुभव मेरे लिए आसान नहीं था, लेकिन मैंने समय के साथ खुद को मजबूत बनाया।'' भूमि ने कहा, ''मैं किसी भी ऐसी भूमिका का हिस्सा नहीं बनूंगी जिसमें महिलाओं के प्रति अपमान हो। मेरे लिए आत्मसम्मान और महिलाओं का सम्मान सबसे अहम है। मैं ऐसी कहानियों का हिस्सा नहीं बनना चाहती, जहां महिला किरदार को कमजोर या कमतर दिखाया जाए। मैं ऐसे भी किरदार निभाना पसंद नहीं करती जिनमें करने के लिए बहुत कम हो। मैंने अपने करियर में बहुत मेहनत करके एक ऐसी पहचान बनाई है जो उनके अभिनय पर आधारित है, और मैं चाहती हूं कि दर्शक मुझसे मजबूत और प्रभावशाली भूमिकाओं की ही उम्मीद रखें।''

सौरभ शर्मा का 100 करोड़ का सोना और नकद जब्त होगा, मुंबई प्राधिकरण ने किया बेनामी लेनदेन का खुलासा

भोपाल  आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा और उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपए के सोना और नकदी को अब जब्त किया जाएगा।आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भोपाल स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) की कार्रवाई को सही ठहराया है। वहीं, सौरभ शर्मा को सोने का वास्तविक मालिक बताया गया है। भोपाल के मेंडोरी में 18 और 19 दिसंबर की दरम्यानी रात एक इनोवा कार से 51.8 किलोग्राम सोना और 11.6 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे। इस मामले में आयकर विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई शुरू की थी। पूरा मामला क्या है? यह मामला 18 और 19 दिसंबर 2025 की रात का है। भोपाल के मेंडोरी इलाके में एक इनोवा कार से 51.8 किलोग्राम सोना और 11.6 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए थे। इस मामले की जांच आयकर विभाग ने शुरू की थी। आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने भोपाल स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) की कार्रवाई को सही बताया है। साथ ही, सौरभ शर्मा को सोने का असली मालिक भी घोषित किया गया है। अस्थायी कुर्की का फैसला आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई ने अगस्त 2025 में पीबीपीटी अधिनियम, 1988 के तहत इस संपत्ति की अस्थायी कुर्की की थी। उस समय इन संपत्तियों की कीमत करीब 52 करोड़ रुपए बताई गई थी, लेकिन अब इनकी कीमत 100 करोड़ रुपए के आसपास हो गई है। जानकारी के अनुसार, अब इस संपत्ति को पूरी तरह जब्त किया जाएगा। चेतन सिंह गौर को बेनामीदार घोषित किया गया जांच एजेंसी ने यह पाया कि चेतन सिंह गौर को बेनामीदार और सौरभ शर्मा को वास्तविक मालिक के रूप में पहचाना गया है। इस मामले में आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन के तहत कार्रवाई की है। संपत्तियों की जांच जारी आयकर विभाग अब सौरभ शर्मा, चेतन सिंह गौर और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी 32 से अधिक संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कर रहा है। इस मामले में अभी और फैसले आना बाकी हैं। ED और IT की कार्रवाई इस मामले में पहले लोकायुक्त ने ( सौरभ शर्मा संपत्ति जांच) और बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आयकर विभाग (IT) ने भी जांच शुरू की थी। ED ने फरवरी 2025 में सौरभ शर्मा और उनके करीबियों को गिरफ्तार किया था और उनकी संपत्तियों को अटैच करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बावजूद, एमपी विधानसभा में सरकार का यह कहना कि 'जानकारी एकत्रित की जा रही है', विपक्षी खेमे को हमलावर होने का मौका दे रहा है।इस कार्रवाई के बाद, यह सौरभ शर्मा भ्रष्टाचार मामला अब और भी चर्चा में आ गया है और लोगों के बीच कई सवाल उठने लगे हैं।

Holi पर कई वाहन जब्त और काटे चालान

लुधियाना/खन्ना. होली के त्योहार को देखते हुए जिला खन्ना की पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर विशेष नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान हुड़दंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई और उनके चालान काटे गए। इसके साथ ही पुलिस ने कई दोपहिया वाहनों को भी जब्त किया है। कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस ने हुड़दंग करने वाले बच्चों के माता-पिता को भी हिदायत दी है। पुलिस ने परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों को समझाएं कि होली का त्योहार आपसी भाईचारे और शांति के साथ मनाएं, न कि हुड़दंग कर दूसरों को परेशान करें।

Punjab में हनीट्रैप गिरोह की महिला और पूर्व सरपंच गिरफ्तार

लुधियाना/फाजिल्का. पुलिस ने हनीट्रैप का पर्दाफाश करते हुए 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस संबंधी जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि, महिला और पूर्व सरपंच भोलेभाले लोगों को अपने जाल में फंसा करा बाद में उन्हें ब्लैकमेल कर पैसों की मांग करते थे। काबू किए गए आरोपियों की पहचान मंदीप कौर उर्फ ऋतु और जोगिंदरपाल सिंह उर्फ गुलाबी जोकि लाधुका से पूर्व सरपंच है। पूर्व सरपंच पर पहले भी मुकदमा दर्ज है। पुलिस को मिली शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से 25 हजार रुपये नकद, 2 मोबाइल फोन और एक कार बरामद की गई है। फिलहाल पुलिस आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है, ताकि उनसे और पूछताछ की जा सके। ऐसे बनाते थे शिकार सदर थाना फाजिल्का के एसएचओ प्रगट सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि महिला व्हाट्सएप के जरिए लोगों से संपर्क करती थी। वह पहले मासूम और भोले-भाले लोगों से बातचीत कर उन्हें अपने जाल में फंसाती थी। इसके बाद उनसे मुलाकात कर उनकी तस्वीरें या अन्य सबूत जुटाकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था और पैसों की मांग की जाती थी। पुलिस अब इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। वहीं जांच दौरान सामने आया है कि, महिला ने जलालाबाद निवासी एक व्यक्ति को अपने जाल में फंसा कर उसे ब्लैकमेल करते हुए 4 लाख रुपए की मांग की। इस दौरान जब व्यक्ति ने दोनों आरोपियों को पैसे लेने के लिए बुलाया तो पुलिस ने दोनों दबोच लिया।

CBSE में दूर के मूल्यांकन केंद्रों में ड्यूटी से शिक्षक परेशान

लुधियाना. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा चल रही वार्षिक परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए दूर दराज क्षेत्रों में बनाए गए इवैल्यूएशन सेंटरों ने अध्यापकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि बोर्ड ने कई शिक्षकों की ड्यूटी शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में बने सेंटरों पर लगा दी है, जिससे उन्हें रोजाना लंबा सफर तय करना पड़ेगा। कई विषय विशेषज्ञ अध्यापकों के अनुसार उनकी ड्यूटी खन्ना, माछीवाड़ा और समराला के आसपास स्थित स्कूलों में बनाए गए मूल्यांकन केंद्रों में लगी है। कई सेंटर मुख्य सड़क से अंदरूनी इलाकों में होने के कारण शिक्षकों को दो-दो वाहन बदलने पड़ेंगे  इससे रोजाना लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा  जो समय और ऊर्जा दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। शिक्षकों का कहना है कि मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचने का समय तय है और देरी होने पर प्रवेश नहीं दिया जाता। ऐसे में ट्रैफिक जाम, बसों की अनियमितता या मौसम में बदलाव की स्थिति में देरी होने का डर बना रहता है। महिला शिक्षकों ने  खासकर सुबह जल्दी या देर शाम लौटने के दौरान सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। कई शिक्षकों ने बताया कि  लगातार लंबी यात्रा के कारण थकान बढ़ने का असर कॉपियों की जांच की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। लुधियाना के कई स्कूल प्रिंसिपलों ने बोर्ड को ई-मेल भेजकर सुझाव दिया है कि शिक्षकों की ड्यूटी शहर की सीमा के भीतर या निकटतम केंद्रों पर लगाई जाए, ताकि वे बिना अतिरिक्त दबाव के मूल्यांकन कार्य कर सकें। प्रिंसिपलों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्कूल उपलब्ध हैं, जहां मूल्यांकन केंद्र बनाए जा सकते हैं। अब सभी की निगाहें बोर्ड के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि क्या अध्यापकों की इन व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी  में कोई संशोधन किया जाएगा। 

अमित शाह ने नीतीश के RS नामांकन की सराहना की, नॉमिनेशन के बाद CM हाउस में मुलाकात

पटना  नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा. इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी. नीतीश की अमित शाह ने दिल खोलकर की तारीफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. ऐसे में उन्होंने पटना पहुंचकर नामांकन भरा. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया. बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा. इनके दामन पर कोई दाग नहीं है. नॉमिनेशन के बाद CM हाउस पहुंचे नीतीश, शाह ने की मीटिंग नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. नॉमिनेशन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ की मीटिंग . तेजस्वी बोले- सबको पता था, बीजेपी यही करेगी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि पहले से ही कह रहा था कि उनको बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है. उनके साथ जो हो रहा है, सबको पता था कि यही होगा. हम लोग अगर वहां होते, तो उनको ये दिन नहीं देखना पड़ता. उनके साथ सहानुभूति है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव में नारा दिया 25 से 30, फिर से नीतीश और अभी देखिए. पटना के जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. 'मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं…', नीतीश ने किया ऐलान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.

मध्यप्रदेश में गिद्धों का बढ़ता आंकड़ा, पन्ना और वन विहार में अलग-अलग प्रजातियां; सिर्फ एक दशक में दोगुना

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। वन विभाग द्वारा तीन दिन तक किए गए सर्वे में यह आंकड़े सामने आए हैं। अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद संख्या में और बढ़ोतरी संभव है। पिछली गणना में प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज किए गए थे। पन्ना क्षेत्र में लाल सिर वाले गिद्ध और भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क में सफेद पीठ वाले गिद्ध पाए गए हैं। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में गिद्धों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। मध्य प्रदेश पहले से ‘चीता, टाइगर और तेंदुआ स्टेट’ के रूप में पहचाना जाता है। अब गिद्धों की बढ़ती संख्या ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धि को और मजबूत किया है। 20 से 22 फरवरी के बीच हुए सर्वे में करीब 7 प्रजातियों की पहचान हुई है। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजर) और हिमालयन ग्रिफॉन प्रमुख हैं। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा था। इन पक्षियों पर अत्याधुनिक जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। 2016 से लगातार बढ़ रहे आंकड़े प्रदेश में गिद्धों की गणना वर्ष 2016 से शुरू हुई थी। तब 7,028 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इसके बाद संख्या लगातार बढ़ती रही—     2019: 8,397     2021: 9,446     2024: 10,845     2025: 12,981 अब 2026 में यह आंकड़ा 14 हजार से अधिक पहुंचने की संभावना है। प्रदेश में कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 4 स्थानीय और 3 प्रवासी हैं। शीत ऋतु के अंतिम चरण में गणना करना सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां एक साथ मिल जाती हैं। इंदौर और भोपाल में भी इजाफा इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध गिने गए थे, जो इस बार बढ़कर 156 हो गए हैं। वहीं, Van Vihar National Park के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। कभी विलुप्ति की कगार पर थे विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध स्वभाव से संवेदनशील और कम प्रजनन दर वाले पक्षी होते हैं। एक समय प्रदेश समेत देशभर में इनकी संख्या तेजी से घट रही थी और ये विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन संरक्षण प्रयासों के चलते अब स्थिति में सुधार हो रहा है। प्रदेश में ऐसे बढ़ी गिद्धों की संख्या जानकारी के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना की शुरुआत वर्ष 2016 से की गई थी। प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें से 4 प्रजातियां स्थानीय एवं 3 प्रजाति प्रवासी हैं। गिद्धों की गणना करने के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय सही रहता है। इस दौरान स्थानीय एवं प्रवासी गिद्धों की गणना आसानी से हो जाती है। वर्ष 2019 की गणना में गिद्धों की संख्या 8 हजार 397, वर्ष 2021 में 9 हजार 446, वर्ष 2024 में 10 हजार 845 और 2025 में 12 हजार 981 हो गई थी। इस बार हुई गणना में यह संख्या 14 हजार से ज्यादा पहुंच सकती है। इंदौर में भी बढ़ी संख्या इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध मिले थे, जो इस बार 156 काउंट किए गए हैं। वन विहार के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में इजाफा हुआ है। कभी विलुप्त होने की कगार पर थे गिद्ध एक्सपर्ट के मुताबिक, गिद्ध जल्दी अपना साथी या मैटिंग पेयर नहीं बनाते हैं। यह पक्षी असल में नर्वस किस्म का जीव है। इस मामले में शर्मिला कहा जा सकता है। गिद्ध कभी विलुप्त होने की कगार पर थे। मप्र सहित देशभर में 'धरती के सफाई दूत' की संख्या बुरी तरह घटती जा रही थी, लेकिन अब प्रदेश में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विहार में 3 साल पहले हरियाणा से लाए गए थे गिद्ध भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में करीब तीन साल पहले हरियाणा से सफेद पीठ वाले 20 गिद्ध लाए गए थे। 1100 किलोमीटर की यात्रा करके यह भोपाल पहुंचे थे। वर्तमान में यह गिद्ध संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की एवरी में है। 20 व्हाइट रम वल्चर (सफेद पीठ वाले गिद्ध) में 5 नर और 5 मादा, 10 सब एडल्ट गिद्ध थे। अंडे से जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% गिद्ध साल में एक ही बार अंडे देते हैं। साइज में यह मुर्गी के अंडे से तीन गुना बड़े होते हैं। मई-जून से अक्टूबर के दौरान मैटिंग सीजन और अंडे देने का समय होता है। अंडे से बच्चे जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% माना जाता है। यही वजह है कि आधे अंडे विकसित नहीं होते हैं। अंडे से 55 दिन में बच्चा निकलता है। चार महीने बच्चा घोंसले में रहता है। फिर वह उड़ने के लिए तैयार हो जाता है। संरक्षण प्रयासों का असर भोपाल के केरवा डैम में 2014 में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ संरक्षण अभियान शुरू हुआ। मार्च 2017 में यहां सफेद पीठ वाले गिद्ध का पहला सफल प्रजनन दर्ज किया गया। इसके अलावा पन्ना, रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वन विभाग गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले उन पर जीपीएस ट्रैकर लगाता है, ताकि उनकी सुरक्षा और गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जा सके। प्रदेश में गिद्धों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2014 में शुरू हुए थे संरक्षण के प्रयास भोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ वर्ष 2014 में गिद्धों के संरक्षण के प्रयास शुरू हुए थे। मार्च 2017 में यहां पहले सफल प्रजनन के रूप में सफेद पीठ वाले गिद्ध का चूजा पैदा हुआ था। यहां सफेद पीठ वाले (Oriental White-backed) और लंबी चोंच वाले (Long-billed) गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 2016 में पहली बार हुई थी गणना मध्य … Read more

दुनिया में बढ़ा तनाव! ईरान जंग के बीच अमेरिका का Doomsday मिसाइल परीक्षण, धमकी के बाद स्पेन आया लाइन पर

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे 'मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल' लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को 'प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने' के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

मनी प्लांट भी फेल! इस पौधे को सही दिशा में लगाते ही बढ़ने लगती है धन-दौलत

वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है। अक्सर लोग सुख-समृद्धि के लिए घर में 'मनी प्लांट' लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा पौधा भी है जिसे मनी प्लांट से भी ज्यादा शक्तिशाली और 'धन खींचने वाला' माना जाता है? इस पौधे का नाम है क्रसुला, जिसे कुबेर पौधा या जेड प्लांट भी कहा जाता है। क्रसुला का पौधा अपनी मोटी, मखमली और गहरे हरे रंग की पत्तियों के लिए जाना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह पौधा घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में जादुई भूमिका निभाता है। जैसे चुंबक लोहे को अपनी ओर खींचता है, वैसे ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा और धन के आगमन के रास्ते खोलता है। सही दिशा का महत्व     वास्तु शास्त्र में किसी भी चीज का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में रखा जाए।     पौराणिक मान्यताओं और वास्तु के नियमों के मुताबिक, क्रसुला के पौधे को घर के मुख्य द्वार के दाईं ओर रखना सबसे शुभ माना जाता है।     अगर आप इसे मुख्य द्वार पर रखते हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है।     इसे ऑफिस की डेस्क पर रखने से व्यापार में उन्नति और पदोन्नति के योग बनते हैं।     धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पौधे को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत परिणाम मिल सकते हैं। देखभाल में है बहुत आसान     इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती।     इसे रोजाना पानी देने की आवश्यकता नहीं है। हफ्ते में दो या तीन बार पानी देना पर्याप्त है।     यह पौधा छाया में भी अच्छी तरह पनपता है, इसलिए इसे घर के अंदर आसानी से रखा जा सकता है।     इसकी पत्तियां जितनी हरी-भरी रहती हैं, घर में उतनी ही सुख-शांति बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, मुरझाया हुआ या सूखा पौधा तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि यह प्रगति में बाधा डालता है। आर्थिक तंगी से छुटकारा अगर आप लंबे समय से कर्ज या पैसों की किल्लत से जूझ रहे हैं, तो क्रसुला का पौधा एक उम्मीद की किरण बन सकता है। प्राचीन शास्त्रों में वर्णित प्रकृति के नियमों के आधार पर, यह पौधा न केवल धन को आकर्षित करता है बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य भी बढ़ाता है।  

प्रियंका चतुर्वेदी के पक्ष में संजय राउत का वीटो, उद्धव सेना में आदित्य ठाकरे की योजना रद्द

मुंबई  महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष महज एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 वर्षीय लीडर के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं था। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दे गए थे कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा, 'कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइन कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे।' यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग यह भी रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। कांग्रेस का भी था दावा, पर खरगे ने खुद ही किया पीछे हटने का ऐलान राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हो गई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।