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CBSE में दूर के मूल्यांकन केंद्रों में ड्यूटी से शिक्षक परेशान

लुधियाना. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) द्वारा चल रही वार्षिक परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए दूर दराज क्षेत्रों में बनाए गए इवैल्यूएशन सेंटरों ने अध्यापकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात यह हैं कि बोर्ड ने कई शिक्षकों की ड्यूटी शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों में बने सेंटरों पर लगा दी है, जिससे उन्हें रोजाना लंबा सफर तय करना पड़ेगा। कई विषय विशेषज्ञ अध्यापकों के अनुसार उनकी ड्यूटी खन्ना, माछीवाड़ा और समराला के आसपास स्थित स्कूलों में बनाए गए मूल्यांकन केंद्रों में लगी है। कई सेंटर मुख्य सड़क से अंदरूनी इलाकों में होने के कारण शिक्षकों को दो-दो वाहन बदलने पड़ेंगे  इससे रोजाना लगभग 80 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा  जो समय और ऊर्जा दोनों की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण है। शिक्षकों का कहना है कि मूल्यांकन केंद्र पर पहुंचने का समय तय है और देरी होने पर प्रवेश नहीं दिया जाता। ऐसे में ट्रैफिक जाम, बसों की अनियमितता या मौसम में बदलाव की स्थिति में देरी होने का डर बना रहता है। महिला शिक्षकों ने  खासकर सुबह जल्दी या देर शाम लौटने के दौरान सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। कई शिक्षकों ने बताया कि  लगातार लंबी यात्रा के कारण थकान बढ़ने का असर कॉपियों की जांच की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। लुधियाना के कई स्कूल प्रिंसिपलों ने बोर्ड को ई-मेल भेजकर सुझाव दिया है कि शिक्षकों की ड्यूटी शहर की सीमा के भीतर या निकटतम केंद्रों पर लगाई जाए, ताकि वे बिना अतिरिक्त दबाव के मूल्यांकन कार्य कर सकें। प्रिंसिपलों का तर्क है कि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्कूल उपलब्ध हैं, जहां मूल्यांकन केंद्र बनाए जा सकते हैं। अब सभी की निगाहें बोर्ड के अगले निर्णय पर टिकी हैं कि क्या अध्यापकों की इन व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी  में कोई संशोधन किया जाएगा। 

अमित शाह ने नीतीश के RS नामांकन की सराहना की, नॉमिनेशन के बाद CM हाउस में मुलाकात

पटना  नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा. इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी. नीतीश की अमित शाह ने दिल खोलकर की तारीफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने वाले हैं. ऐसे में उन्होंने पटना पहुंचकर नामांकन भरा. इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे. नीतीश कुमार के सियासी सफर पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा, "नीतीश कुमार ने अपने शासन काल में बिहार को जंगल राज से मुक्त करने का काम किया. बिहार की सड़कों को गांव तक जोड़ा. इनके दामन पर कोई दाग नहीं है. नॉमिनेशन के बाद CM हाउस पहुंचे नीतीश, शाह ने की मीटिंग नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन कर दिया है. नॉमिनेशन के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री आवास पहुंच गए हैं. वहीं, गृह मंत्री अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस में बीजेपी और जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ की मीटिंग . तेजस्वी बोले- सबको पता था, बीजेपी यही करेगी तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा कि पहले से ही कह रहा था कि उनको बीजेपी ने हाईजैक कर लिया है. उनके साथ जो हो रहा है, सबको पता था कि यही होगा. हम लोग अगर वहां होते, तो उनको ये दिन नहीं देखना पड़ता. उनके साथ सहानुभूति है. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता ने इसे जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव में नारा दिया 25 से 30, फिर से नीतीश और अभी देखिए. पटना के जेडीयू दफ्तर में तोड़फोड़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की बात पर जेडीयू समर्थक भड़क उठे. भड़के जेडीयू समर्थकों ने पटना के जेडीयू दफ्तर में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. 'मैं राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं…', नीतीश ने किया ऐलान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सक्रिय राजनीति में अपने अगले कदम का खुलासा कर दिया है. उन्होंने राज्यसभा सदस्य बनने की ख्वाहिश जताते हुए साफ कर दिया है कि वे अब दिल्ली की राह पकड़ेंगे और बिहार की नई सरकार को अपना मार्गदर्शन देंगे.

मध्यप्रदेश में गिद्धों का बढ़ता आंकड़ा, पन्ना और वन विहार में अलग-अलग प्रजातियां; सिर्फ एक दशक में दोगुना

भोपाल  मध्य प्रदेश में इस बार गिद्धों की संख्या 14 हजार के पार पहुंच गई है। वन विभाग द्वारा तीन दिन तक किए गए सर्वे में यह आंकड़े सामने आए हैं। अंतिम रिपोर्ट जारी होने के बाद संख्या में और बढ़ोतरी संभव है। पिछली गणना में प्रदेश में 12,981 गिद्ध दर्ज किए गए थे। पन्ना क्षेत्र में लाल सिर वाले गिद्ध और भोपाल स्थित वन विहार नेशनल पार्क में सफेद पीठ वाले गिद्ध पाए गए हैं। पिछले 10 वर्षों में प्रदेश में गिद्धों की संख्या लगभग दोगुनी हो चुकी है। मध्य प्रदेश पहले से ‘चीता, टाइगर और तेंदुआ स्टेट’ के रूप में पहचाना जाता है। अब गिद्धों की बढ़ती संख्या ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में राज्य की उपलब्धि को और मजबूत किया है। 20 से 22 फरवरी के बीच हुए सर्वे में करीब 7 प्रजातियों की पहचान हुई है। इनमें भारतीय गिद्ध, सिनेरियस गिद्ध, मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजर) और हिमालयन ग्रिफॉन प्रमुख हैं। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रायसेन जिले के हलाली डैम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा था। इन पक्षियों पर अत्याधुनिक जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे वन विभाग उनकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। 2016 से लगातार बढ़ रहे आंकड़े प्रदेश में गिद्धों की गणना वर्ष 2016 से शुरू हुई थी। तब 7,028 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इसके बाद संख्या लगातार बढ़ती रही—     2019: 8,397     2021: 9,446     2024: 10,845     2025: 12,981 अब 2026 में यह आंकड़ा 14 हजार से अधिक पहुंचने की संभावना है। प्रदेश में कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 4 स्थानीय और 3 प्रवासी हैं। शीत ऋतु के अंतिम चरण में गणना करना सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस समय स्थानीय और प्रवासी दोनों प्रजातियां एक साथ मिल जाती हैं। इंदौर और भोपाल में भी इजाफा इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध गिने गए थे, जो इस बार बढ़कर 156 हो गए हैं। वहीं, Van Vihar National Park के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। कभी विलुप्ति की कगार पर थे विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध स्वभाव से संवेदनशील और कम प्रजनन दर वाले पक्षी होते हैं। एक समय प्रदेश समेत देशभर में इनकी संख्या तेजी से घट रही थी और ये विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए थे। लेकिन संरक्षण प्रयासों के चलते अब स्थिति में सुधार हो रहा है। प्रदेश में ऐसे बढ़ी गिद्धों की संख्या जानकारी के अनुसार, प्रदेश में गिद्धों की गणना की शुरुआत वर्ष 2016 से की गई थी। प्रदेश में गिद्धों की कुल 7 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें से 4 प्रजातियां स्थानीय एवं 3 प्रजाति प्रवासी हैं। गिद्धों की गणना करने के लिए शीत ऋतु का अंतिम समय सही रहता है। इस दौरान स्थानीय एवं प्रवासी गिद्धों की गणना आसानी से हो जाती है। वर्ष 2019 की गणना में गिद्धों की संख्या 8 हजार 397, वर्ष 2021 में 9 हजार 446, वर्ष 2024 में 10 हजार 845 और 2025 में 12 हजार 981 हो गई थी। इस बार हुई गणना में यह संख्या 14 हजार से ज्यादा पहुंच सकती है। इंदौर में भी बढ़ी संख्या इंदौर वन मंडल में पिछली बार 86 गिद्ध मिले थे, जो इस बार 156 काउंट किए गए हैं। वन विहार के गिद्ध संरक्षण केंद्र में सफेद पीठ वाले गिद्धों की संख्या में इजाफा हुआ है। कभी विलुप्त होने की कगार पर थे गिद्ध एक्सपर्ट के मुताबिक, गिद्ध जल्दी अपना साथी या मैटिंग पेयर नहीं बनाते हैं। यह पक्षी असल में नर्वस किस्म का जीव है। इस मामले में शर्मिला कहा जा सकता है। गिद्ध कभी विलुप्त होने की कगार पर थे। मप्र सहित देशभर में 'धरती के सफाई दूत' की संख्या बुरी तरह घटती जा रही थी, लेकिन अब प्रदेश में इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विहार में 3 साल पहले हरियाणा से लाए गए थे गिद्ध भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क में करीब तीन साल पहले हरियाणा से सफेद पीठ वाले 20 गिद्ध लाए गए थे। 1100 किलोमीटर की यात्रा करके यह भोपाल पहुंचे थे। वर्तमान में यह गिद्ध संरक्षण एवं संवर्धन केंद्र की एवरी में है। 20 व्हाइट रम वल्चर (सफेद पीठ वाले गिद्ध) में 5 नर और 5 मादा, 10 सब एडल्ट गिद्ध थे। अंडे से जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% गिद्ध साल में एक ही बार अंडे देते हैं। साइज में यह मुर्गी के अंडे से तीन गुना बड़े होते हैं। मई-जून से अक्टूबर के दौरान मैटिंग सीजन और अंडे देने का समय होता है। अंडे से बच्चे जीवित निकलने का सक्सेस रेट 50% माना जाता है। यही वजह है कि आधे अंडे विकसित नहीं होते हैं। अंडे से 55 दिन में बच्चा निकलता है। चार महीने बच्चा घोंसले में रहता है। फिर वह उड़ने के लिए तैयार हो जाता है। संरक्षण प्रयासों का असर भोपाल के केरवा डैम में 2014 में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ संरक्षण अभियान शुरू हुआ। मार्च 2017 में यहां सफेद पीठ वाले गिद्ध का पहला सफल प्रजनन दर्ज किया गया। इसके अलावा पन्ना, रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। वन विभाग गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ने से पहले उन पर जीपीएस ट्रैकर लगाता है, ताकि उनकी सुरक्षा और गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जा सके। प्रदेश में गिद्धों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 2014 में शुरू हुए थे संरक्षण के प्रयास भोपाल के केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना के साथ वर्ष 2014 में गिद्धों के संरक्षण के प्रयास शुरू हुए थे। मार्च 2017 में यहां पहले सफल प्रजनन के रूप में सफेद पीठ वाले गिद्ध का चूजा पैदा हुआ था। यहां सफेद पीठ वाले (Oriental White-backed) और लंबी चोंच वाले (Long-billed) गिद्धों का प्रजनन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, गिद्धों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के लिए पन्ना (पवई), रायसेन (हलाली डैम), शिवपुरी और गांधीसागर अभयारण्य (मंदसौर) में भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 2016 में पहली बार हुई थी गणना मध्य … Read more

दुनिया में बढ़ा तनाव! ईरान जंग के बीच अमेरिका का Doomsday मिसाइल परीक्षण, धमकी के बाद स्पेन आया लाइन पर

न्यूयॉर्क/ तेहरान मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच मंगलवार रात अमेरिका ने कैलिफोर्निया तट पर एक डूम्सडे बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया. न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सांता बारबरा के पास वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से रात 11 बजे 'मिनटमैन III बैलिस्टिक मिसाइल' लॉन्च की गई, जो हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से 20 गुना ज्यादा ताकतवर परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।  यूएस स्पेस फोर्स के मुताबिक, जीटी 254 के रूप में जाना जाने वाला निहत्था रॉकेट, पश्चिम-मध्य प्रशांत महासागर में मार्शल द्वीप के पास अपने टार्गेट पर जाकर गिरा. फोर्स ग्लोबल स्ट्राइक कमांड के मुताबिक, मिसाइल को 'प्रभावशीलता, तत्परता और सटीकता को सत्यापित करने' के लिए दागा गया था।  576वें फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी व्रे ने एक प्रेस रिलीज में कहा, "इससे हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग घटकों के प्रदर्शन का आकलन करने की अनुमति मिली।  जंग की ज़द में पूरा मिडिल ईस्ट पिछले दिनों अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया, जिसमें देश के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की तेहरान में मौत हो गई. इसके बाद पूरा मिडिल ईस्ट जंग की चपेट में आ गया है।   खामेनेई की मौत के बाद ईरान की तरफ से लगातार इजरायल और मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी हैं. उधर हिज्बुल्लाह के एक्टिव होने के बाद इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरुत में हमलों की झड़ी लगा दी है।  राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में ईरान पर हमले तेज करने की कसम खाई और चेतावनी देते हुए कहा कि बड़ा हमला होने वाला है.  धमकी और स्पेन आ गया लाइन पर! मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है. इस बार मामला केवल ईरान, इज़राइल और अमेरिका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूरोप का प्रमुख देश स्पेन भी इसमें खिंच आया. महज दो दिनों के भीतर स्पेन की सरकार के बयान और रुख में जो बदलाव दिखाई दिया, उसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में आर्थिक दबाव की ताकत को फिर से सामने ला दिया।  पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने ईरान पर अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना की. उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता युद्ध दुनिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. सांचेज़ के अनुसार, इस तरह की लड़ाई लाखों लोगों की ज़िंदगी को खतरे में डाल सकती है. उन्होंने टेलीविजन पर अपने संबोधन में कहा कि स्पेन ऐसी किसी कार्रवाई का हिस्सा नहीं बनेगा जो दुनिया के लिए नुकसानदेह हो और उसके अपने मूल्यों के खिलाफ जाती हो. उनका कहना था कि केवल किसी देश के दबाव या डर से स्पेन अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगा. लेकिन स्पेन का यह रुख ज्यादा देर तक बिना प्रतिक्रिया के नहीं रहा।  ट्रंप की कड़ी चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सख्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर स्पेन अपने यहां मौजूद संयुक्त सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान पर हमलों के लिए अमेरिका को नहीं करने देता, तो अमेरिका स्पेन के साथ व्यापारिक संबंध खत्म कर सकता है. ट्रंप के इस बयान को यूरोप में गंभीरता से लिया गया. वजह यह है कि ट्रंप पहले भी कई बार टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों की धमकी देकर दूसरे देशों पर दबाव बनाते रहे हैं. स्पेन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने ठिकानों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था. यही फैसला ट्रंप को नागवार गुजरा।  सैन्य अड्डों पर शुरू हुआ विवाद स्पेन के दक्षिण में दो अहम सैन्य अड्डे हैं रोता नौसैनिक अड्डा और मोरॉन वायुसेना अड्डा.इनका इस्तेमाल अमेरिका और स्पेन दोनों करते हैं, लेकिन इन पर नियंत्रण स्पेन का ही है. ट्रंप ने इन अड्डों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो उनका इस्तेमाल कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि हम वहां जाकर उनका उपयोग कर सकते हैं, कोई हमें रोक नहीं सकता।  स्पेन का साफ संदेश: युद्ध नहीं ट्रंप की धमकी के बावजूद सांचेज़ ने शुरुआत में अपना रुख बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि स्पेन की नीति बहुत स्पष्ट है युद्ध नहीं.उनका कहना था कि अगर ईरान पर हमले बढ़ते हैं तो मध्य पूर्व एक बार फिर लंबे और महंगे युद्ध में फंस सकता है, जैसा पहले इराक और अफगानिस्तान में हुआ था.इन युद्धों ने कई सालों तक क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित किया था और भारी मानवीय व आर्थिक नुकसान हुआ था।  यूरोपीय संघ के नियमों के मुताबिक व्यापार से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से किए जाते हैं. इसलिए अगर अमेरिका स्पेन पर व्यापारिक कार्रवाई करता है तो उसका असर पूरे यूरोप पर पड़ सकता है. यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने सदस्य देशों के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ने पर अपने आर्थिक हितों की रक्षा करेगा।  ऐसे होता है दोनों के बीच व्यापार  आंकड़ों के अनुसार अमेरिका और स्पेन के बीच व्यापार काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन इतना बड़ा भी नहीं कि तुरंत आर्थिक संकट पैदा हो जाए. स्पेन के केंद्रीय बैंक बैंक ऑफ स्पेन के मुताबिक अमेरिका के साथ स्पेन का कुल व्यापार उसके सकल घरेलू उत्पाद का करीब 4.4 प्रतिशत है.स्पेन से अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 16 अरब यूरो का है.इस हिसाब से अमेरिका स्पेन का छठा सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका की चेतावनी का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक भी होता है।  ट्रंप के बयान के बाद स्पेन के उद्योग और व्यापार जगत में चिंता बढ़ गई. वहां के प्रमुख कारोबारी संगठन सीईओई, सीईपीवाईएमई और एटीए ने कहा कि अमेरिका स्पेन का एक अहम आर्थिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को प्रभावित नहीं होना चाहिए. व्यापारिक संगठनों ने उम्मीद जताई कि दोनों देश बातचीत के जरिए इस विवाद को सुलझा लेंगे।  सरकार की तरफ से संयम बरतने का संदेश स्पेन के मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि ट्रंप की टिप्पणियों के अलावा अमेरिका की तरफ से कोई नया कदम नहीं उठाया गया है. उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय शांत रहने की अपील की।  स्पेन और ट्रंप प्रशासन के बीच यह पहला विवाद नहीं है. पिछले साल स्पेन ने नाटो के उस प्रस्ताव … Read more

मनी प्लांट भी फेल! इस पौधे को सही दिशा में लगाते ही बढ़ने लगती है धन-दौलत

वास्तु शास्त्र में पेड़-पौधों का विशेष महत्व बताया गया है। अक्सर लोग सुख-समृद्धि के लिए घर में 'मनी प्लांट' लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा पौधा भी है जिसे मनी प्लांट से भी ज्यादा शक्तिशाली और 'धन खींचने वाला' माना जाता है? इस पौधे का नाम है क्रसुला, जिसे कुबेर पौधा या जेड प्लांट भी कहा जाता है। क्रसुला का पौधा अपनी मोटी, मखमली और गहरे हरे रंग की पत्तियों के लिए जाना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यह पौधा घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में जादुई भूमिका निभाता है। जैसे चुंबक लोहे को अपनी ओर खींचता है, वैसे ही यह पौधा सकारात्मक ऊर्जा और धन के आगमन के रास्ते खोलता है। सही दिशा का महत्व     वास्तु शास्त्र में किसी भी चीज का पूरा लाभ तभी मिलता है जब उसे सही दिशा में रखा जाए।     पौराणिक मान्यताओं और वास्तु के नियमों के मुताबिक, क्रसुला के पौधे को घर के मुख्य द्वार के दाईं ओर रखना सबसे शुभ माना जाता है।     अगर आप इसे मुख्य द्वार पर रखते हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है।     इसे ऑफिस की डेस्क पर रखने से व्यापार में उन्नति और पदोन्नति के योग बनते हैं।     धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पौधे को कभी भी दक्षिण दिशा में नहीं रखना चाहिए, क्योंकि इससे विपरीत परिणाम मिल सकते हैं। देखभाल में है बहुत आसान     इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत अधिक देखभाल की जरूरत नहीं होती।     इसे रोजाना पानी देने की आवश्यकता नहीं है। हफ्ते में दो या तीन बार पानी देना पर्याप्त है।     यह पौधा छाया में भी अच्छी तरह पनपता है, इसलिए इसे घर के अंदर आसानी से रखा जा सकता है।     इसकी पत्तियां जितनी हरी-भरी रहती हैं, घर में उतनी ही सुख-शांति बनी रहती है। वास्तु के अनुसार, मुरझाया हुआ या सूखा पौधा तुरंत हटा देना चाहिए क्योंकि यह प्रगति में बाधा डालता है। आर्थिक तंगी से छुटकारा अगर आप लंबे समय से कर्ज या पैसों की किल्लत से जूझ रहे हैं, तो क्रसुला का पौधा एक उम्मीद की किरण बन सकता है। प्राचीन शास्त्रों में वर्णित प्रकृति के नियमों के आधार पर, यह पौधा न केवल धन को आकर्षित करता है बल्कि परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य भी बढ़ाता है।  

प्रियंका चतुर्वेदी के पक्ष में संजय राउत का वीटो, उद्धव सेना में आदित्य ठाकरे की योजना रद्द

मुंबई  महाराष्ट्र में राज्यसभा चुनाव में विपक्ष महज एक सीट ही जीतने की स्थिति में है। इसके लिए वरिष्ठ नेता शरद पवार का नाम तय हुआ है। 85 वर्षीय लीडर के नाम के ऐलान के लिए जो प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई थी, उसमें उद्धव सेना का कोई नेता शामिल नहीं था। इसे लेकर कयास लगने लगे तो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले खुद सामने आईं और कहा कि उद्धव सेना की नाराजगी के सारे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में संजय राउत पहले ही आए थे और शरद पवार से मिलकर भरोसा दे गए थे कि यदि आप उम्मीदवार होते हैं तो हम आपके साथ होंगे। इसके बाद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी लिखा, 'कांग्रेस ने आखिर राज्यसभा में उम्मीदवार फाइन कर लिया। महाविकास अघाड़ी एक है और हम सभी साथ रहेंगे।' यह बात सही है कि संजय राउत लगातार कहते रहे हैं कि शरद पवार को राज्यसभा जाना चाहिए। हालांकि उनके सुर आदित्य ठाकरे से अलग रहे हैं, जो चाहते थे कि प्रियंका चतुर्वेदी को एक मौका और मिलना चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और उन्हें फिर से मौका नहीं मिला है। वह राज्यसभा में अपने कार्यकाल के आखिरी दिन भावुक भी नजर आई थीं। इस तरह पूरे प्रकरण को आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच खींचतान के तौर पर देखा जा रहा है और इसके आधार पर लोग यह भी रहे हैं कि प्रियंका के नाम पर संजय राउत ने वीटो लगा दिया और इस तरह शरद पवार का रास्ता साफ हो गया। पूरे मामले की जानकारी रखने वालों का कहना है कि संजय राउत एक तरह से विजेता बनकर उभरे और उन्होंने उद्धव सेना का एजेंडा तय कर दिया। अब कहा जा रहा है कि उद्धव सेना के खाते में विधान परिषद की सीट आ सकती है। लेकिन पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि सबसे बड़ा दल विपक्ष में उद्धव सेना ही है। फिर भी राज्यसभा की सीट एनसीपी-एसपी के खाते में जाना दुखद है। कांग्रेस का भी था दावा, पर खरगे ने खुद ही किया पीछे हटने का ऐलान राज्यसभा सीट के लिए तो कांग्रेस ने भी दावा किया था। इस संबंध में राहुल गांधी से भी बात की गई थी, लेकिन अंत में पार्टी शरद पवार के नाम पर ही सहमत हो गई। अब देखना होगा कि एमएलसी सीट पर क्या होता है। अगले महीने ही उद्धव ठाकरे का एमएलसी का कार्यकाल समाप्त होगा। ऐसे में नजरें इस बात पर हैं कि वह रिपीट होंगे या फिर किसी और नेता को उनके स्थान पर मौका दिया जा सकता है।

तेल की कीमत में उछाल, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच कच्चा तेल 83 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर

नई दिल्ली   मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। सप्लाई पर असर पड़ने के कारण कीमतों में उछाल आया है, क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को बंद कर दिया है। सुबह के शुरुआती कारोबार में इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर बेंचमार्क क्रूड का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.43 प्रतिशत बढ़कर 83.26 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (एनवाईमेक्स) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 2.63 प्रतिशत बढ़कर 76.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा है। तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी भारत के आयात बिल पर असर डाल सकती है। यदि कच्चे तेल की कीमत पूरे साल के लिए प्रति बैरल 1 डॉलर बढ़ती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 16,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है। इस बीच, सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी को लेकर भारत फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित स्थिति में है। देश के पास लगभग 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक मौजूद है, जिसमें वह तेल भी शामिल है जो जहाजों के जरिए भारत के बंदरगाहों की ओर आ रहा है। भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसमें से करीब 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है। ईरान युद्ध के बाद इस मार्ग से सप्लाई प्रभावित हुई है। हालांकि, भारत ने अफ्रीका, रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर अपने स्रोतों में विविधता लाई है और रणनीतिक भंडार बनाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने खाड़ी देशों के अलावा अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है, जिसके चलते अब बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते नहीं आती। भारत ने 31 मार्च 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर 137 अरब डॉलर खर्च किए थे। वहीं चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों (अप्रैल 2025 से जनवरी 2026) के दौरान 206.3 मिलियन टन कच्चे तेल के आयात पर 100.4 अरब डॉलर खर्च किए गए।  

महादेव की होली सीहोर में धूमधाम से, पंडित मिश्रा ने नबाव के बंद करने की बात बताई और शांति की कामना की

सीहोर  सीहोर में महादेव की होली गुरुवार को शुरू हो चुकी है। काशी, मथुरा और बरसाना की तर्ज पर यहां पर फूल-गुलाल से होली खेली जाएगी। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पहले सीवन नदी किनारे होली खेली जाती थी। नबाव साहब ने इसे बंद करा दिया था, अब हमने फिर से शुरू किया।  उन्होंने कहा भगवान शिव के स्वरूप को सब जानें कि उनकी भक्ति का रंग अजर-अमर है। इजराइल-अमेरिका, ईरान में चल रहे युद्ध पर भी कथावाचक ने कहा कि किसी न किसी कारण से देश बर्बाद हो रहे हैं। सारे राष्ट्र में अब शांति हो यह युद्ध अब समाप्त होना चाहिए। सब पर बाबा देवाधिदेव महादेव की कृपा बनी रहे। भारत का एक-एक नागरिक प्रार्थना करता है कि सभी जगह पर शांति हो। फूल-गुलाल से खेली जाती है होली इस होली की खास बात यह है कि इसमें केवल गुलाल और फूलों का उपयोग किया जाता है। पानी या पानी में घुले रंगों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। इसका उद्देश्य यह है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को वापस घर लौटते समय किसी तरह की असुविधा न हो। पांच शिव मंदिरों में खेली जाती है होली महादेव की होली शहर के छावनी स्थित चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर विभिन्न शिव मंदिरों से होती हुई आगे बढ़ती है। इसके बाद यह गुप्तेश्वर महादेव मंदिर, पिपलेश्वर महादेव मंदिर और नर्मदेश्वर महादेव मंदिर होते हुए प्राचीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचती है। यहां विशेष आरती के साथ आयोजन का समापन किया जाता है। शिव और गुरु के साथ होली का संदेश पंडित प्रदीप मिश्रा के अनुसार यह होली शिव और गुरु के साथ खेली जाती है, जो यह संदेश देती है कि बड़ों के सानिध्य में जीवन खुशियों के रंगों से भर जाता है। उनका कहना है कि शिव ही ऐसे हैं जिनका रंग एक बार चढ़ जाए तो जीवन भर नहीं उतरता। देशभर के श्रद्धालुओं को किया आह्वान पंडित मिश्रा ने देशवासियों से अपने-अपने शिव मंदिरों में भगवान शिव को चंदन युक्त जल अर्पित करने का आह्वान किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि महादेव की होली उत्साह के साथ लेकिन पूरी शांति और अनुशासन के साथ मनाएं।

जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं

जन समस्याओं के निस्तारण में शिथिलता अक्षम्य: मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 150 लोगों की समस्याएं तत्परता और संवेदनशीलता से हो जनता की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी गोरखपुर,  गोरखपुर में जनता के साथ बुधवार दिनभर होली की खुशियां साझा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनसेवा के नियमित प्रकल्प ‘जनता दर्शन’ में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन समस्याओं का समाधान तत्परता और संवेदनशील तरीके से किया जाए। इसमें किसी भी तरह की शिथिलता या लापरवाही अक्षम्य होगी। हर समस्या का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और संतुष्टिपरक होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जनता की हर समस्या का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। गोरखनाथ मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने आयोजित जनता दर्शन में कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद चलकर पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने करीब 150 लोगों से मुलाकात की और सबको आश्वस्त किया कि हर व्यक्ति को न्याय दिलाया जाएगा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित निस्तारण का निर्देश देने के साथ मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है।  सीएम ने अफसरों से कहा कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होना चाहिए। हर पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार अपनाते हुए उसकी सहायता की जानी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि किसी की जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले और कमजोरों को उजाड़ने वाले किसी भी सूरत में बख्शे न जाएं। उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।  मुख्यमंत्री के समक्ष जनता दर्शन में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। सीएम योगी ने उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इलाज के लिए भरपूर मदद करेगी। उनके प्रार्थना पत्रों को अधिकारियों को हस्तगत करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इलाज से जुड़ी इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण करा कर शासन में उपलब्ध कराया जाए।

PCB का बड़ा फैसला: पाकिस्तानी टीम के नए टेस्ट कोच के रूप में सरफराज अहमद पर भरोसा

 इस्लामाबाद पाकिस्तानी मेन्स क्रिकेट टीम को जल्द ही नया टेस्ट कोच मिलने जा रहा है. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) चाहता है कि अगली टेस्ट सीरीज से पहले स्थायी कोच की नियुक्ति कर दिया जाए, ताकि लंबे समय की योजना पर काम शुरू हो सके. पीसीबी ने हेड कोच पद के लिए पूर्व कप्तान सरफराज अहमद को औपचारिक प्रस्ताव दिया है. पीसीबी उनके जवाब का इंतजार कर रहा है। सरफराज अहमद इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हैं, तो वह ऐसे समय में कमान संभालेंगे जब पाकिस्तानी टीम निरंतर बदलाव और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है. पिछले कुछ महीनों से पाकिस्तान के टेस्ट कोचिंग सेटअप में स्थिरता की कमी रही है. वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप (WTC) के मौजूदा चक्र में पाकिस्तानी टीम को स्पष्ट रणनीति, सही सेलेक्शन प्रोसेस और मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। सरफराज अहमद की सबसे बड़ी ताकत उनकी नेतृत्व शैली मानी जाती है. उन्हें एक ऐसे कप्तान के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने पाकिस्तानी ड्रेसिंग रूम में ऊर्जा और एकजुटता बनाए रखी. पाकिस्तान क्रिकेट में अक्सर प्रतिभा की कमी नहीं होती, लेकिन निरंतरता और संरचना की चुनौती रहती है. पीसीबी को उम्मीद है कि 38 साल के सरफराज इन दोनों पहलुओं में संतुलन ला सकते हैं। राष्ट्रीय टीम से बाहर होने के बाद भी सरफराज अहमद सिस्टम से जुड़े रहे. उन्होंने पाकिस्तान शाहीन्स और अंडर-19 स्तर पर मेंटर की भूमिका निभाई है. वह खिलाड़ियों की मानसिकता और टीम के प्रेशर पॉइंट्स को करीब से जानते हैं. अगर सरफराज प्रस्ताव स्वीकार करते हैं, तो उनकी कोचिंग इनिंग्स की शुरुआत मई में बांग्लादेश के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज से हो सकती है. बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियां स्पिनर्स के मुफीद मानी जाती है. ऐसे में नए कोच के सामने शुरुआत से ही बड़ी चुनौती होगी। …जब पाकिस्तानी टीम ने जीती चैम्पियंस ट्रॉफी सरफराज अहमद ने पाकिस्तानी टीम के लिए तीन फॉर्मेट को मिलाकर कुल 232 मुकाबले खेले, जिसमें उन्होंने 34.24 के एवरेज से 6164 रन बनाए. सरफराज ने अपनी कप्तानी में पाकिस्तान को आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी 2017 का खिताब दिलाया था। अब देखना यह होगा कि क्या वह अपनी कोचिंग में टेस्ट टीम को सफलता दिला पाते हैं या नहीं. फिलहाल सबकी नजर सरफराज के फैसले पर टिकी हैं. यदि वह हां कहते हैं, तो पाकिस्तानी टेस्ट क्रिकेट में एक नए अध्याय की शुरुआत तय मानी जाएगी।