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MP में सियासी बदलाव, 40 साल बाद कांग्रेस में नई पीढ़ी की एंट्री, BJP में भी नए चेहरे सामने आ रहे

भोपाल मध्य प्रदेश की राजनीति में अब नई पीढ़ी का दौर तेजी से दिखाई देने लगा है। लंबे समय तक वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में चलने वाली दोनों प्रमुख पार्टियों—Indian National Congress और Bharatiya Janata Party—में अब युवा नेताओं को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के बाद प्रदेश स्तर पर नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की रणनीति अपनाई है, वहीं भाजपा में भी नए चेहरे प्रभावी होते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस में नई पीढ़ी को नेतृत्व 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए वरिष्ठ नेता Kamal Nath को प्रदेश नेतृत्व से हटाकर युवा नेता Jitu Patwari को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया।साथ ही आदिवासी नेता Umang Singhar को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब पटवारी और सिंघार की जोड़ी प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और पार्टी को फिर से खड़ा करने के प्रयास में जुटी हुई है। संगठन सृजन अभियान में उम्र सीमा तय कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के दौरान पदाधिकारियों के लिए 50 वर्ष से कम उम्र की सीमा तय की। इसके तहत ब्लॉक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर करीब आधे पदों पर 50 वर्ष से कम उम्र के नेताओं को मौका दिया गया है। नई व्यवस्था के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक पद पर पांच वर्ष से अधिक नहीं रखा जाएगा, ताकि संगठन में लगातार नए नेताओं को अवसर मिलते रहें। पटवारी–सिंघार बने नई रणनीति का चेहरा कांग्रेस की इस रणनीति का असर प्रदेश नेतृत्व में साफ दिखाई देता है। Jitu Patwari और Umang Singhar को लगभग 50 वर्ष की उम्र में ही बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी इसे युवा नेतृत्व को आगे लाने की शुरुआत मान रही है। भाजपा में भी उभर रहे नए चेहरे मध्य प्रदेश में Bharatiya Janata Party में भी नेतृत्व परिवर्तन की झलक दिखाई दे रही है। प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav और प्रदेश अध्यक्ष के रूप में Hemant Khandelwal को नई पीढ़ी के नेताओं में माना जा रहा है। भाजपा में यह बदलाव अपेक्षाकृत सहज तरीके से स्वीकार किया गया, जबकि कांग्रेस में शुरुआत में कुछ हिचक देखने को मिली थी। भाजपा की पुरानी पीढ़ी का लंबा दौर दरअसल, 1985-90 के दौर में भाजपा के नेतृत्व ने जिन नेताओं को आगे बढ़ाया था, वे लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। इनमें Shivraj Singh Chouhan, Kailash Vijayvargiya, Narendra Singh Tomar, Prahlad Patel, Narottam Mishra और Jayant Malaiya जैसे नेता शामिल रहे। वर्ष 2023 में करीब तीन दशक बाद भाजपा ने नया चेहरा सामने लाते हुए Mohan Yadav को मुख्यमंत्री बनाया। सियासी संकेत: मध्य प्रदेश में अब राजनीति धीरे-धीरे पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी की ओर बढ़ती हुई नजर आ रही है। आने वाले वर्षों में दोनों ही दलों में युवा नेतृत्व की भूमिका और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।  

कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान

उद्यानिकी स्टोरी:पारंपरिक खेती से प्रगतिशील बागवानी तक का सफर  कुशवाह बने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती करने वाले भोपाल के पहले किसान कुशवाह बने भोपाल के पहले किसान, जिन्होंने ऑटोमेशन सिस्टम से फूलों की खेती शुरू की भोपाल  भोपाल जिले के फन्दा क्षेत्र के ग्राम बरखेड़ा बोंदर के  रामसिंह कुशवाह  कभी धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहकर सीमित आय अर्जित करने वालेकिसान रहे है। आज वे फूलों और फलों की आधुनिक खेती से प्रतिमाह लाखों रुपये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा केवल आर्थिक उन्नति की कहानी नहीं, बल्कि किसान सशक्तिकरण और नवाचार की प्रेरक मिसाल है।  कुशवाह कहते हैं, “मैं प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।सरकार की एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने हमें आत्मनिर्भर बनाया है और समाज में एक नई पहचान दी है।”  कुशवाह का परिवार वर्षों से पारंपरिक खेती करता आ रहा था,जिसमें बढ़ती लागत और कम लाभ के कारण आर्थिक चुनौतियाँ बनी रहती थीं। इसी दौरान उन्हें उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने राष्ट्रीय विकास परियोजना के अंतर्गत इस योजना का लाभ लेते हुए एक हजार स्क्यायर फिट में पॉली हाउस बनाकर फूलों (गुलाब और जरबेरा) की खेती प्रारंभ की। राज्य योजना में उद्यानिकी विभाग से एकीकृत बागवानी विकास मिशन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में उन्होंने एक एकड़ भूमि में पॉली हाउस सरकार के लिए सब्सिड़ी लेते हुए गुलाब, जरबेरा, गेंदा के 30 हजार पौधें रोपे, जिससे  कुशवाह प्रतिदिन 4 हजार कट फ्लावर बेच कर प्रतिदिन 4 से 6 हजार रूपये तक की आमदनी प्राप्त कर रहे है। फूलों का उत्पादन बढ़ाने एवं लागत को कम करने के लिए उन्होंने इस वर्ष एकीकृत बागवानी विकास मिशन अंतर्गत सेंसर आधारित ऑटोमेशन सिस्टम अपने पॉली हाउस में स्टॉल करवाया जिसकी लागत 4 लाख रूपये है। इसमें 2 लाख रूपये की सब्सिड़ी सरकार द्वारा प्राप्त हुई है। ऑटोमेशन सिस्टम से एक एकड़ की खेती में पानी, खाद, दवाइयों की संतुलित मात्रा 24 x 7 बिना किसी मेन्युअल सिस्टम से दी जा रही है। जिससे पानी, खाद के समय एवं लागत की भी बचत हो रही है, वर्तमान में  कुशवाह पारंपरिक खेती से ऑटोमेटिक सिस्टम से बागवानी करने वाले भोपाल के पहले किसान बन गए है। उनके गुलाब, जरबेरा की सप्लाई लखनऊ, दिल्ली, जयपुर तक हो रही है। किसान  कुशवाह ने एक एकड़ में विगत वर्षों में 30 हजार जरबेरा के हाइब्रिड पौधों का रोपण किया तथा ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली को अपनाया, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिला। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के परिणामस्वरूप वे मात्र एक वर्ष में ही प्रतिदिन 1500 से 2000 फूलों का उत्पादन कर बाजार में विक्रय कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 4 हजार फूल स्पाईक प्राप्त कर प्रतिदिन 4 से 5 हजार रूपये की आमदनी भी प्राप्त कर रहे है। फूलों और फलों की खेती ने  कुशवाह की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना दिया है।  कुशवाह की यह कहानी प्रदेश के किसानों के लिए प्रेरणा है कि सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीक और शासकीय योजनाओं के सहयोग से खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।  

MP में दाल प्रसंस्करण और पैकेजिंग इकाई शुरू करने पर किसानों को मिलेगा 33% की सब्सिडी, 25 लाख का लोन

 ग्वालियर  मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश को दलहन उत्पादन और प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नई पहल शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत प्रदेश भर में कुल 55 खाद्य प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग यूनिटें स्थापित की जानी हैं। ग्वालियर जिले के किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए यह खुद का उद्यम शुरू करने का मौका है। क्योंकि दलहन यूनिट की स्थापना के लिए सरकार आर्थिक रूप से बड़ी सहायता प्रदान कर रही है। एक यूनिट लगाने के लिए पात्र आवेदकों को 25 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इस लोन पर सरकार की ओर से 33 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। यानी लगभग 8.25 लाख रुपये की सीधी बचत होगी, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होगा। यहां बता दें कि ग्वालियर-चंबल संभाग में गेहूं, सरसों व धान के अलावा तूअर यनि अरहर, चना जैसी दलहनी फसलों की पैदावार होती है। साथ ही मूंग व उड़द की भी कुछ क्षेत्रों में खेती की जाती है। ऐसे में ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के किसान दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाकर खेती के साथ स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं। पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगा चयन पूरे प्रदेश के लिए केवल 55 यूनिटों का लक्ष्य रखा गया है, इसलिए इसमें चयन की प्रक्रिया काफी कड़ी हो सकती है। जिले के जो भी युवा या किसान इस योजना का लाभ उठाकर अपनी दाल प्रसंस्करण इकाई लगाना चाहते हैं, उन्हें बिना देरी किए सबसे पहले आवेदन करना होगा। आवेदन में देरी होने पर यह मौका हाथ से जा सकता है। किसानों को क्या होगा फायदा वर्तमान में ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों के किसान अपनी दालें जैसे चना, तुअर, मूंग को कच्ची फसल के रूप में मंडी में बेच देते हैं। खुद की पैकेजिंग और प्रसंस्करण यूनिट होने से किसान दालों की सफाई और ग्रेडिंग करके उन्हें ऊंचे दामों पर बेच पाएंगे। यह इकाई न केवल उद्यमी किसान को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी। यह करना होगा किसानों को यदि कोई किसान इस योजना के तहत अनुदान प्राप्त करना चाहते हैं, तो स्थानीय कृषि अभियांत्रिकी विभाग के कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। योजना के तहत यूनिट लगाने के लिए पात्रता और आवेदन से जुड़ी विस्तृत जानकारी विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी। खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना     दलहन प्रसंस्करण व पैकेजिक इकाई लगाने के लिए किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। जिले में दलहन प्रसंस्करण इकाई लगाने की अच्छी संभावनाएं हैं। सरकार ने इस योजना में 33 प्रतिशत अनुदान देने की घोषणा की है। इसलिए यह किसानों के लिए खेती के साथ खुद का व्यवसाय लगाने की अच्छी संभावना है। चूंकि पूरे प्रदेश का टारगेट 55 इकाई का हैं, इसलिए पहले आवेदन करने वाले किसानों के लिए मौका रहेगा। – टीसी पाटीदार, कार्रकारी इंजीनियर, कृषि अभियांत्रिकी विभाग  

भारत सरकार तय कर रही है क्रूड ऑयल के इस्तेमाल की प्राथमिकताएं, ईरान जंग का असर पड़ने वाला है

 नई दिल्ली ईरान जंग के मद्देनजर भारत सरकार कच्चे तेल के इस्तेमाल की प्रायरिटी फिर से तय कर रही है. कच्चा तेल कहां और कैसे इस्तेमाल हो इसके लिए सरकार योजना बना रही है. हालांकि सरकार ने कहा है कि भारत के पास इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे क्रूड से ज़्यादा क्रूड है. LPG की कोई कमी नहीं है. सरकार ने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। वेस्ट एशिया से सप्लाई में रुकावट के बाद भारत ने ऑयल रिफाइनरीज को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG)  प्रोडक्शन ज़्यादा से ज़्यादा करने का निर्देश दिया है. सरकार ने घरेलू प्रोड्यूसर को उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन रिसोर्स का इस्तेमाल करके LPG आउटपुट को प्रायोरिटी देने का आदेश दिया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG इंपोर्टर है, और पिछले साल इसने 33.15 मिलियन मीट्रिक टन फ्यूल की खपत क. इंपोर्ट डिमांड का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, जिसमें वेस्ट एशिया 85 से 90 परसेंट सप्लाई करता है, जिससे भारत रीजनल रुकावटों के प्रति कमज़ोर हो जाता है। सरकार ने कहा है कि भारत में LPG की किल्लत नहीं होने दी जाएगी. भारत खाड़ी देशों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से LNG खरीदना शुरू कर दिया है. इसके अलावा भारत कतर सरकार से भी बात कर रहा है ताकि LNG की सप्लाई फिर से शुरू की जा सके. बता दें कि कतर भारत का सबसे बड़ा LNG सप्लायर है. कतर के गैस प्लांट पर ईरानी हमले के बाद कतर ने गैस प्रोडक्शन बंद कर दिया है और भारत को एक्सपोर्ट रोक दिया है।  जनवरी से US से LPG भारत आनी शुरू हो गई है. नवंबर 2025 में भारतीय सरकारी तेल कंपनियों ने 2026 के लिए US गल्फ कोस्ट से लगभग 2.2 MTPA LPG इंपोर्ट करने के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है।  रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सभी ऑयल रिफाइनर को निर्देश दिया गया है कि वे अपने पास मौजूद प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करें और यह पक्का करें कि LPG प्रोडक्शन के लिए उनका इस्तेमाल हो. प्रोड्यूसर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे सरकारी रिफाइनर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को घरों में बांटने के लिए LPG, प्रोपेन और ब्यूटेन उपलब्ध कराएं. भारत में लगभग 332 मिलियन एक्टिव LPG कंज्यूमर हैं। LPG के लिए प्रोपेन और ब्यूटेन का ज़रूरी इस्तेमाल करने से एल्काइलेट्स का प्रोडक्शन कम हो जाएगा, जो गैसोलीन ब्लेंडिंग का एक हिस्सा है। रिफाइनर को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन को पेट्रोकेमिकल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल न करें, जिससे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों के लिए फीडस्टॉक कम हो जाएगा।

युद्ध की आग से हिल रहा दुबई का रियल एस्टेट मार्केट, निवेशकों को चिंता

 दुबई सपनों की नगरी दुबई, जहां आसमान छूती कांच की इमारतें और समंदर की लहरों पर बसते आलीशान विला हर किसी को अपनी ओर खींचते हैं. आम इंसान के लिए यह एक ख्वाब है, तो रईसों और बॉलीवुड सितारों के लिए दूसरा घर, लेकिन युद्ध के साए में इसकी चमक फीकी पड़ती दिख रही है।   भीषण संघर्ष और मिसाइल हमलों ने यहां की रौनक को फीका करना शुरू कर दिया है. सवाल सिर्फ पर्यटन का नहीं, बल्कि उन अरबों रुपयों का है जो इस शहर की रियल एस्टेट में लगे हैं. क्या युद्ध की ये चिंगारी दुबई के चमकते भविष्य को झुलसा देगी. दुबई की उस 'सेफ हेवन' वाली छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस शहर को निवेश का सबसे सुरक्षित माना जाता था, क्या अब वहां के करोड़ों के निवेश पर युद्ध का साया मंडरा रहा है।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट पिछले कुछ समय से अपने सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहा था. साल 2025 इसके लिए ऐतिहासिक रहा, जहां 187 मिलियन डॉलर की रिकॉर्ड तोड़ प्रॉपर्टी सेल्स दर्ज की गई. यही नहीं दुनिया भर के हजारों नए करोड़पति अपनी संपत्ति और परिवार के साथ यूएई में शिफ्ट हुए. इसका मुख्य कारण यहां का वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा थी. दुबई की पूरी अर्थव्यवस्था उसकी सुरक्षा और स्थिरता पर टिकी है. लेकिन हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमलों और क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के माहौल ने इस 'सुरक्षित ठिकाने' वाली छवि को हिलाकर रख दिया है. निवेशकों के मन में अब यह डर बैठने लगा है कि क्या युद्ध की स्थिति में उनकी की संपत्ति सुरक्षित रहेगी।  दुबई का रियल एस्टेट मार्केट खतरे में भारतीय निवेशकों का बड़ा दांव दुबई के रियल एस्टेट की चमक में भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है. कुल ट्रांजैक्शंस का लगभग 25% से 30% हिस्सा भारतीय नागरिकों या एनआरआई (NRIs) का होता है. भारत के कई दिग्गज डेवलपर्स भी वहां बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स लॉन्च कर रहे हैं. युद्ध के इस माहौल ने न केवल व्यक्तिगत निवेशकों, बल्कि इन बड़े भारतीय कॉर्पोरेट्स की चिंता भी बढ़ा दी है।  मार्केट में एक और बड़ी चिंता 'सप्लाई और डिमांड' के संतुलन को लेकर है. साल 2026 तक दुबई में लगभग 1.2 लाख नई रेजिडेंशियल यूनिट्स बाजार में आने वाली हैं. यह संख्या सामान्य वार्षिक आपूर्ति से दोगुनी है।  क्या पीछे हट रहे हैं विदेश खरीदार? अगर युद्ध के तनाव के कारण विदेशी खरीदार पीछे हटते हैं, तो मार्केट में घरों की बाढ़ आ जाएगी. विशेषज्ञों का अनुमान है कि मांग में कमी आने पर प्रॉपर्टी की कीमतें 3% से 7% तक गिर सकती हैं. तनाव का असर जमीन पर दिखने लगा है. इजराइल की स्ट्राइक के बाद से दुबई में प्रॉपर्टी देखने आने वालों की संख्या में भारी कमी आई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुर्ज खलीफा जैसे प्रीमियम इलाकों में भी कुछ बड़े निवेशकों ने ऐन वक्त पर डील कैंसिल कर दी है और अपने हाथ खींच लिए हैं।  अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या डरा हुआ एचएनआई (HNI) निवेशक अपना पैसा दुबई से निकालकर भारत के उभरते लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट की ओर ले जाएगा? या फिर यह पूंजी सिंगापुर और लंदन जैसे पारंपरिक सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करेगी. आने वाले कुछ महीने दुबई के भविष्य की दिशा तय करेंगे।  रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिन खरीदारों ने पहले ही दुबई में अपने घर बुक कर लिए हैं, वे अब सौदे की शर्तों पर फिर से बातचीत कर सकते हैं या भारी डिस्काउंट की मांग कर सकते हैं. वहीं, नए खरीदार फिलहाल 'देखो और इंतजार करो' (wait-and-watch) की नीति अपना रहे हैं, ताकि स्थिति पूरी तरह स्थिर होने के बाद ही कोई कदम उठा सकें. जानकारों का यह भी कहना है कि कुछ निवेशक अपना पैसा अब दुबई से हटाकर भारत के प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की ओर मोड़ सकते हैं।  विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह संघर्ष लंबा खींचता है, तो मार्केट में ट्रांजैक्शन वॉल्यूम, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और निवेशकों के भरोसे में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है. आने वाले महीनों में मध्यम वर्ग के खरीदार ज्यादा आक्रामक तरीके से मोलभाव कर सकते हैं, जबकि डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स को लॉन्च करने के फैसले को फिलहाल टाल सकते हैं. बड़े निवेशक (HNIs) भी अब बड़े निवेश करने से पहले समय और हालात का दोबारा आंकलन कर रहे हैं और नई प्रतिबद्धताओं को लेकर काफी सतर्क हो गए हैं. अगर अनिश्चितता का यह दौर जारी रहा, तो कम से कम शॉर्ट-टर्म के लिए दुबई से भारत की ओर पूंजी का एक बड़ा पलायन देखने को मिल सकता है।   

“ईरान युद्ध के बाद…” ट्रंप ने बताया अपना अगला बड़ा टारगेट

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की प्राथमिकताओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। वाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनके प्रशासन का वर्तमान लक्ष्य ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करना है, जिसके तुरंत बाद अमेरिका का पूरा ध्यान क्यूबा की ओर मुड़ जाएगा। यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के अगले रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। मेजर लीग सॉकर चैंपियन 'इंटर मियामी सीएफ' के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्य पूर्व के संघर्ष पर चर्चा की। उन्होंने कहा, "हम पहले ईरान युद्ध को खत्म करना चाहते हैं।" उन्होंने आगे संकेत दिया कि क्यूबा के साथ संबंधों में सुधार या वहां के राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव केवल समय की बात है। ट्रंप ने दावा किया कि क्यूबा की राजधानी हवाना वाशिंगटन के साथ समझौता करने के लिए बेहद उत्सुक है। उन्होंने कहा, "क्यूबा बहुत बुरी तरह से एक डील चाहता है। जल्द ही बहुत से अद्भुत लोग वापस क्यूबा जा सकेंगे।" ईरान युद्ध में बड़ी जीत का दावा राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर एक उत्साहजनक रिपोर्ट पेश की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना और उनके इजरायली सहयोगी दुश्मन को समय से काफी पहले ही पूरी तरह से ध्वस्त कर रहे हैं। सैन्य प्रगति का विवरण देते हुए ट्रंप ने कहा ईरान के पास अब न तो कोई वायु सेना बची है और न ही प्रभावी हवाई रक्षा प्रणाली। राष्ट्रपति ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने मात्र तीन दिनों के भीतर ईरान के 24 जहाजों को नष्ट कर दिया है, जिससे उनकी नौसेना की शक्ति खत्म हो गई है। हालांकि, इन सैन्य दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन ट्रंप का लहजा पूरी तरह से आक्रामक और जीत के प्रति आश्वस्त नजर आया। वार्ता की मेज पर ईरान? ट्रंप ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व अब युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत का रास्ता तलाश रहा है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “वे फोन कर रहे हैं और पूछ रहे हैं कि डील कैसे की जाए? मैंने उनसे कहा कि आप थोड़ा देर कर चुके हैं, अब हम उनसे ज्यादा लड़ने के इच्छुक हैं।” इसके साथ ही उन्होंने ईरानी राजनयिकों को एक अवसर भी दिया। ट्रंप ने कहा कि जो लोग सहयोग करेंगे वे एक नए और बेहतर ईरान के निर्माण में मदद कर सकते हैं, जिसमें विकास की अपार संभावनाएं होंगी। उन्होंने चेतावनी भी दी कि संघर्ष जारी रखने के परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं। तेल बाजार की रणनीति युद्ध के आर्थिक प्रभावों, विशेषकर तेल की कीमतों पर बोलते हुए ट्रंप ने स्वीकार किया कि इस संघर्ष की वजह से उन्हें अपनी घरेलू प्राथमिकताओं से थोड़ा भटकाव लेना पड़ा। उन्होंने कहा, "तेल की कीमतें अब काफी हद तक स्थिर हो गई हैं। हमने कीमतों को बहुत कम रखा था, लेकिन इस युद्ध के कारण हमें यह छोटा सा मोड़ लेना पड़ा।" राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा बाजारों पर दबाव कम करने के लिए जल्द ही कुछ नए उपायों की घोषणा की जा सकती है।

MP में अवैध खनिज परिवहन रोकने के लिए 40 ई-चेक पोस्ट की व्यवस्था, मोबाइल पर मिलेगा E-Challan

भोपाल  मध्य प्रदेश में अवैध खनिज परिवहन पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने तकनीक आधारित नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। प्रदेश में 40 ई-चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां से फिलहाल वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रखी जा रही है। इन ई-चेक पोस्ट के माध्यम से खनिज परिवहन में गड़बड़ी पाए जाने पर जल्द ही ऑनलाइन ई-चालान जारी किए जाएंगे। ई-चालान से संबंधित नियम बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजे गए हैं। जैसे ही नियम लागू होंगे, ई-चेक पोस्ट पर दर्ज अनियमितताओं के आधार पर संबंधित वाहन मालिक को सीधे मोबाइल पर ई-चालान भेजा जाएगा। आधुनिक कैमरे पहचानेंगे वाहनों में लदा खनिज ई-चेक पोस्ट पर अत्याधुनिक तकनीक से लैस कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहनों में लोड खनिज की पहचान करने में सक्षम होंगे। यह भी पता लगाया जा सकेगा कि वाहन में कौन सा खनिज परिवहन किया जा रहा है। इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जिसे आधुनिक कैमरों से जोड़ा गया है। इस तकनीक की मदद से खनिज परिवहन की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी और अवैध गतिविधियों को चिन्हित किया जा सकेगा। AI आधारित तकनीक से होगी वाहनों की जांच अवैध परिवहन को रोकने के लिए स्थापित इन ई-चेक पोस्ट पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां वेरीफोकल कैमरा, आरएफआईडी लीडर और ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रीडर जैसे उपकरण लगाए गए हैं। इन उपकरणों की सहायता से खनिज परिवहन में लगे वाहनों की पहचान और उनकी गतिविधियों की जांच की जाएगी। इससे अवैध खनिज परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। निगरानी के लिए बनाए गए कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अवैध परिवहन की निगरानी को मजबूत बनाने के लिए राज्य स्तर पर भोपाल में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है। इसके अलावा भोपाल और रायसेन में जिला स्तर पर भी कमांड सेंटर बनाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ई-चेक पोस्ट से प्राप्त डेटा की निगरानी की जाएगी और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। प्रदेश में वैध और अवैध रेत खदानों की स्थिति प्रदेश में वर्तमान में 728 रेत खदानें वैध रूप से संचालित हो रही हैं, जबकि 200 से अधिक अवैध रेत खदानों के संचालन की जानकारी भी सामने आई है। यही कारण है कि सरकार ने अवैध उत्खनन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। अवैध उत्खनन और परिवहन के हजारों मामले दर्ज मध्य प्रदेश में वर्ष 2024-2025 के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन के 10,956 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में फिलहाल केवल जुर्माने की कार्रवाई की गई, जबकि कानून में गंभीर मामलों में सजा का भी प्रावधान है। अप्रैल 2024 से अब तक दर्ज मामलों के अनुसार अवैध उत्खनन के 1565, अवैध परिवहन के 8540 और अवैध भंडारण के 851 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में कुल 83 करोड़ 74 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। कार्रवाई के दौरान हमलों की घटनाएं भी सामने आईं अवैध खनन रोकने के दौरान कई बार अधिकारियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। कई मामलों में उत्खननकर्ता खनिज विभाग या कार्रवाई करने पहुंचे अमले पर हमला कर देते हैं। पिछले वर्ष भिंड में अवैध उत्खनन रोकने गए एक प्रशिक्षु पुलिस अधिकारी की मौत तक हो चुकी है। CM के निर्देश पर चला था विशेष अभियान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जून 2024 में अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद राज्य में विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत देवास, सीहोर, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, खरगोन, हरदा और शहडोल सहित प्रदेश के कई जिलों में लगभग 200 प्रकरण दर्ज किए गए। कार्रवाई के दौरान डंपर, पोकलेन मशीन और पनडुब्बी जैसे उपकरण जब्त किए गए तथा 1.25 करोड़ रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।