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राजस्थान के 10 शहरों के पासपोर्ट-पोस्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी

जयपुर. राजस्थान के 10 से ज्यादा शहरों में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब कहीं पासपोर्ट ऑफिस तो कहीं पोस्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली। प्रदेश में एक साथ 10 से ज्यादा जगह सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी से पुलिस प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही सभी जगह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाला और परिसरों को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। जानकारी के अनुसार बांसवाड़ा, सीकर, जोधपुर और जैसलमेर जिले के पासपोर्ट ऑफिस को मंगलवार को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। वहीं, अजमेर व बीकानेर के हेड पोस्ट ऑफिस और दौसा के पोस्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। बताया जा रहा है सभी जगह ईमेल के जरिए धमकी भरा संदेश आया। इसके अलावा राजधानी जयपुर सहित अलवर, सवाई माधोपुर और हनुमानगढ़ में भी सरकारी दफ्तरों को ​भी धमकी भरा ईमेल मिला है। परिसरों को खाली कराकर सघन तलाशी अभियान धमकी भरे ईमेल की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई। इसके बाद तुरंत स्थानीय थाना पुलिस को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही सभी जगह पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर परिसरों को भी खाली करवाया गया। इसके बाद सघन तलाशी ली गई। हालांकि, अभी तक किसी भी जगह कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। जैसलमेर में पासपोर्ट ऑफिस सील जैसलमेर शहर के डाकघर परिसर में स्थित पासपोर्ट कार्यालय में मंगलवार को ई-मेल के माध्यम से पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने डाकघर परिसर खाली कराया और कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा। स्थानीय पुलिस ने कार्यालय और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर सर्च ऑपरेशन जारी रखी हैं। धमकी की गंभीरता को देखते हुए परिसर का संपूर्ण कामकाज फिलहाल बंद कर दिया गया है। परिसर को अस्थायी रूप से सील किया गया है। बीकानेर में संदिग्ध ई-मेल से हड़कंप बीकानेर के पासपोर्ट कार्यालय में मंगलवार को संदिग्ध ई-मेल आने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। ई-मेल में दावा किया गया है कि कुछ संदिग्ध तत्व पासपोर्ट कार्यालय से जुड़े वीवीआईपी दस्तावेजों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि पहले यह मेल एजेंसियों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल को परखने के लिए भेजा गया था। साथ ही कथित तौर पर आईईडी ब्लास्ट जैसी घटनाओं की आशंका जताते हुए पासपोर्ट और पोस्ट ऑफिस के आसपास से स्टाफ और लोगों को हटाने की बात कही गई है। बांसवाड़ा के पासपोर्ट कार्यालय को भी धमकी बांसवाड़ा के नया बस स्टैंड पर स्थित पासपोर्ट कार्यालय को मंगलवार दोपहर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ये धमकी भरा मैसेज मेल के जरिए आया है। एहतियात के तौर पर डाकघर बिल्डिंग को भी खाली करवा लिया गया। इस धमकी के बाद कर्मचारियों और काम के सिलसिले में आए आम नागरिकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सीकर में धमकी के बाद खाली कराया परिसर सीकर के पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ने की धमकी मिली है। यह धमकी जयपुर पासपोर्ट ऑफिस की ऑफिशियल मेल आईडी पर आया है। इसके बाद पूरे परिसर को खाली करवाया गया है। मौके पर जिला विशेष शाखा, सीओ सिटी संदीप चौधरी, कोतवाली थानाधिकारी सुनील जांगिड़, उद्योग नगर एसएच राजेश कुमार बुडानिया टीम के साथ मौके पर पहुंचे। धमकी भरा मेल आने पर जयपुर से बम निरोधक दस्ते को बुलाया गया है। भारी संख्या में पुलिस जाब्ता भी तैनात किया गया है। अलवर में पाकिस्तान से आया धमकी भरा मेल अलवर शहर में मोती डूंगरी स्थित प्रधान डाकघर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। पाकिस्तान से मेल आना बताया गया है। अभी पूरे परिसर को खाली कराकर बम निरोध टीम जांच करने में लगी है। पूरे परिसर को खाली करा मुख्य गेट को बंद कर दिया है। अब अंदर से जांच करने के बाद ही कर्मचारी व आमजन को प्रवेश दिया जाएगा। यहां भी मिली बम से उड़ाने की धमकी राजधानी जयपुर में पासपोर्ट कार्यालय और मुख्य डाकघर कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। हनुमानगढ़ जंक्शन स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इसके बाद कार्यालय को खाली कराया गया। सवाई माधोपुर के मुख्य डाकघर को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद मंगलवार को हड़कंप मच गया।

मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को मंजूरी

निःशक्तजन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति 7 जिलों के लिए "एक जिला-एक उत्पाद" परियोजना का किया अनुमोदन सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में हुई। मंत्रि-परिषद ने कल्याणकारी योजनाओं सहित विभिन्न 7 विभागों की महत्वपूर्ण योजनाओं की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए लगभग 33 हजार 240 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोगाम को भी मंजूरी दी है। सिंगरौली के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन की भी मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने मैहर, कैमोर जिला कटनी और निमरानी जिला खरगोन में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के 3 औषधालय खोलने सहित चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों के सृजन को स्वीकृति दी गयी है। मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम को 3 वर्ष क्रियान्वयन के लिए 190 करोड़ रूपये की स्वीकृति त्रि-परिषद द्वारा "मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम" को 3 वर्ष के लिए क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिए अधिकृत किया गया है। निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट की निरंतरता कीस्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च, 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति दी गयी गई है। 7 जिलों के लिए "एक जिला-एक उत्पाद" परियोजना का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा "एक जिला-एक उत्पाद" परियोजना अंतर्गत चयनित 07 जिलों में पारंपरिक व विशिष्ट उत्पाद के सरंक्षण, विकास और विपणन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगामी 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस परियोजना में चयनित 07 जिलों में सीधी जिले में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी, हाथकरघा वस्त्र, भोपाल मे जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद (जैसे पर्स आदि), धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट में आगामी 5 वर्षों के लिए 37.50 करोड़ रूपये की डी.पी.आर, तैयार की गयी है।इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधायें प्रदान की जाएगी। यह परियोजना प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता को बढावा, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने चितरंगी जिला सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड का एक नवीन पद और उनके कार्यालयीन अमले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 नवीन पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृत प्रदान की है। मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नये औषधालयों को मंजूरी मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआईसी) द्वारा मैहर (जिला-मैहर), कैमोर (जिला कटनी), तथा निमरानी (जिला खरगौन) में 3 नये औषधालयों को खोलने एवं चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों का सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। मैहर, कैमोर तथा निमरानी में नये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने एवं नये पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे रजिस्टर्ड 15,686 श्रमिकों एवं उन पर आश्रित लगभग 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी। रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान करने की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारा निर्णय लिया गया कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, यथा वितरण हानियों में कमीं तथा वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण और विकास कार्यों के लिए प्राप्त केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य की वितरण कंपनियों को राज्य शासन द्वारा अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।स्कीम के अंतर्गत माह नवम्बर 2024 तक ऋण के रूप में प्रदत्त राशि 887 करोड़ 91 लाख रूपये को राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया। विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के उद्देश्य से वित्तीय रूप से साध्य व परिचालन में दक्ष वितरण क्षेत्र विकसित करने के लिए रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लागू की गई है। योजना अन्तर्गत विद्युत अधोसंरचनात्मक कार्यों के लिए केन्द्र शासन द्वारा 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है एवं शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान की जा रही है। लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और योजनाओं की निरंतरता के लिए 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद् द्वारावित्त विभाग की लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के अन्तर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए निरंतरता के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। ग्रामीण, पिछड़े और खनिज क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना एवं पेयजल आपूर्ति के लिए 6090 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा खनिज साधन विभाग के अंतर्गत "खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अतंरण" योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है। यह योजना खनिज साधन विभाग के अंतर्गत पूर्व से संचालित योजना पूर्णतः राज्य वित्त पोषित एवं भारित व्यय से संबंधित योजना है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े क्षेत्रों, खनि क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति योजना तथा सड़क विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिये किया जायेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं के सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की 31 मार्च 2031 तक निरंरता एवं सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी है। स्वीकृति अनुसार विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण के लिए 16 करोड़ 78 लाख रूपये, महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण … Read more

शिक्षक की बेटी को मिली साइकिल, जिम्मेदारों के बयान आपस में टकराए

बड़वानी  बड़वानी के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक–1 में साइकिल वितरण योजना को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। दूरदराज से आने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए चलाई जा रही सरकारी योजना में कथित अनियमितता सामने आई है, जब उसी विद्यालय में पदस्थ शिक्षक की पुत्री को साइकिल वितरित किए जाने का मामला उजागर हुआ। जानकारी के अनुसार विद्यालय में अध्ययनरत कुमारी प्रियांशी गुजराती, पिता जगदीश गुजराती, को भी साइकिल दी गई थी, जबकि उनके पिता स्वयं इसी विद्यालय में शिक्षक के रूप में पदस्थ हैं। सूत्रों के अनुसार छात्रा की आईडी में निवास स्थान अवलदा दर्शाया गया है, जबकि परिवार के लोग एकलव्य विद्यालय परिसर के क्वार्टर में निवासरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि यदि छात्रा विद्यालय के पास ही रहती है तो उसे योजना का लाभ किस आधार पर दिया गया। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग की साइकिल वितरण योजना का उद्देश्य उन विद्यार्थियों को लाभ देना है जो दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूल आते हैं। योजना में दूरी और निवास स्थान प्रमुख पात्रता मापदंड माने जाते हैं। ऐसे में शिक्षक की पुत्री को साइकिल मिलने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे। विद्यालय के प्राचार्य का कहना है कि साइकिल वितरण कार्यक्रम जुलाई–अगस्त में हुआ था और वे छात्रवृत्ति प्रभारी  शुक्ला से जानकारी लेकर बताएंगे। वहीं छात्रवृत्ति एवं साइकिल वितरण प्रभारी  शुक्ला का दावा है कि जब शिक्षक की पुत्री को साइकिल मिलने का मामला सामने आया तो प्रभारी बीईओ  जाधव के कहने पर साइकिल वापस ले ली गई और उसे वर्ष 2027–28 में वितरित करने की बात कही गई। लेकिन इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब बीईओ  जाधव ने ही साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया और न ही साइकिल वापस लेने की बात कही। अधिकारियों के परस्पर विरोधी बयान से मामले में और संदेह गहरा गया है। इधर संबंधित शिक्षक जगदीश गुजराती का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। बताया जाता है कि पूर्व में सहायक आयुक्त के नाम से कूट रचित पत्र जारी करवाने का मामला भी सामने आ चुका है। इसके बावजूद उन्हें जिला स्तरीय माध्यमिक शिक्षा मंडल के मूल्यांकन केंद्र, शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में बनाई गई परीक्षा मूल्यांकन समिति में शामिल किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस तरह के विवादित आचरण वाले शिक्षक को बोर्ड परीक्षा की गोपनीय मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करना क्या उचित है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि साइकिल वितरण सूची, पात्रता और दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंच सके। अब सवाल यह है कि— क्या साइकिल योजना में नियमों को ताक पर रखा गया? और जिम्मेदार अधिकारी आखिर सच क्यों छिपा रहे हैं?

देश में LPG किल्लत पर एक्शन मोड में सरकार, PM मोदी ने बुलाई अहम बैठक

नई दिल्ली पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। देश में LPG सिलेंडरों की किल्लत चल रही है और सरकार ने उसके प्रबंधन को लेकर एस्मा लागू कर दिया है। इससे सरकार ने यह तय करने की कोशिश की है कि घरेलू उपभोक्ताओं को पर्याप्त एलपीजी मिलती रहे। इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस मसले पर एक हाईलेवल मीटिंग की है। इस बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही पेट्रोलियम मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी मौजूद थे। ईरान में इजरायल और अमेरिका के हमलों के चलते हालात बिगड़ गए हैं। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सप्लाई को बाधित किया है और इससे भारत समेत कई एशियाई देशों में गैस और तेल की किल्लत हो गई है। फिलहाल केंद्र सरकार का फोकस इस बात पर है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की सप्लाई कम ना होने पाए। इसकी एवज में औद्योगिक यूनिट्स को सप्लाई कम कर दी गई है। इसके अलावा कॉमर्शियल सिलेंडर भी कम दिए जा रहे हैं। होटल इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति भी जताई है कि क्योंकि उनका कॉमर्शियल सिलेंडरों से ही होता है। ऐसी स्थिति में होटल इंडस्ट्री के कामकाज के ही ठप होने का खतरा है। अगले कुछ दिन देश में एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई के लिहाज से अहम हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही भारत को आने वाले ज्यादातर तेल और गैस सप्लाई होता है। ऐसी स्थिति में संकट गहरा गया है। भारत अपनी जरूरत का कुल 62 फीसदी एलपीजी आयात करता है। यही नहीं तेल के मामले में यह निर्भरता 85 फीसदी के करीब है। ऐसी स्थिति में ज्यादा दिनों तक यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद रहा तो फिर संकट बढ़ेगा। देश में अब बड़े पैमाने पर खाना बनाने के लिए लोगों की निर्भरता एलपीजी पर बढ़ गई है। दो दशक पुरानी स्थिति नहीं है। ऐसे में गैस की किल्लत देश में बड़े गुस्से का कारण भी बन सकती है। यही वजह है कि सरकार ने इसे प्राथमिकता से लिया है और एस्मा लागू करके एलपीजी की सप्लाई का वर्गीकरण कर दिया है। गैस की जरूरत का 85 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है भारत अपनी गैस की जरूरत का करीब 85 फीसदी हिस्सा फिलहाल सऊदी अरब से खरीद रहा है। इसका आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही होता है। अभी यह बंद है। ऐसे में संकट गहरा है और सरकार फिलहाल सप्लाई के दूसरे रास्ते तलाश रही है। भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। बता दें कि देश में कुल एलपीजी की खपत में 87 फीसदी हिस्सा घरेलू उपभोक्ताओं का ही है। इसके बाद 13 फीसदी हिस्सा उद्योग, होटल और रेस्तरां आदि में इस्तेमाल होता है।  

POCO C85x 5G भारत में लॉन्च: बड़ी 6300mAh बैटरी और कम कीमत, खरीदने से पहले जानें फायदे-नुकसान

नई दिल्ली POCO C85x 5G स्‍मार्टफोन को भारत में 10,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्‍च कर दिया गया है। 6300mAh बैटरी वाले इस फोन में कई अच्‍छे और कुछ एवरेज फीचर्स दिए गए हैं। यूनिसॉक का प्रोसेसर इस फोन में है जो मीड‍ियाटेक और क्‍वॉलकॉम पसंद करने वालों को चुभ सकता है। हालांकि 120 हर्त्‍ज का रिफ्रेश रेट, एंड्रॉयड 16 ओएस और 5जी कनेक्‍ट‍िविटी लोगों को लुभा सकती है। जिन्‍हें 4G स्‍मार्टफोन से 5G में स्‍व‍िच करना है, उनके लिए यह एक विकल्‍प बन सकता है। POCO C85x 5G के प्राइस इस फोन की कीमत 4GB+64GB मॉडल के ल‍िए 10999 रुपये है। वहीं, 4GB+128GB मॉडल के दाम 11999 रुपये रखे गए हैं। यह ब्‍लैक, गोल्‍ड और ग्रीन कलर्स में आता है। इसे 14 मार्च से फ्लिपकार्ट पर ल‍िया जा सकेगा। POCO C85x 5G को क्‍याें खरीदें POCO C85x 5G को जिस प्राइस रेंज में लाया गया है, यह 5जी फोन चाहने वालों की सभी प्रमुख जरूरतें पूरी करेगा। बड़ा डिस्‍प्‍ले और बड़ी बैटरी इस फोन के पॉजिट‍िव पॉइंट्स हैं। कैमरा बेसिक हैं, लेकिन ठीकठाक फोटो निकाल लेंगे। 120 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट के साथ एचडी कंटेंट देखने के लिए भी फोन ठीक नजर आ रहा है। POCO C85x 5G को क्‍याें ना खरीदें अगर आपके पास पहले से 5जी स्‍मार्टफोन है और उसे अपग्रेड करने के बारे में सोच रहे हैं, बजट भी पर्याप्‍त है तो यह फोन आपके लिए नहीं है। कैमरा के शौकीनों को भी इस फोन में काफी कुछ नहीं मिलेगा। परफॉर्मेंस देखने वालों को याद रखना होगा कि चिपसेट मीडि‍याटेक या क्‍वाॅलकॉम का नहीं है। यह फोन व‍िशेष रूप से उन यूजर्स के लिए बेहतर विकल्‍प बन सकता है, जिन्‍हें 4G स्‍मार्टफोन से 5G स्‍मार्टफोन में स्‍व‍िच करना है।  

बिहार में कॉपियों, प्लास्टिक और इलेक्ट्रिक सामान की कीमत 12 तक बढ़ी

भागलपुर. खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध से पनपे वैश्विक हालात का असर अब भागलपुर के बाजारों में भी दिखने लगा है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कागज, कॉपी, प्लास्टिक और कुछ इलेक्ट्रिक सामान महंगे हो गए हैं। स्कूलों में नया सत्र शुरू हो रहा है। सभी अभिभावकों को कॉपी खरीदनी ही है। इसी वक्त कॉपियों की कीमतों में बढ़ोतरी से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। भागलपुर में कॉपियों की कीमतें अचानक 12 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। हालांकि, थोक और खुदरा बाजार में कीमतों में अंतर होने से ग्राहकों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दुकानदारों की मानें तो कागज बनाने में कई पेट्रोकेमिकल आधारित रसायनों का उपयोग होता है। इन रसायनों का कच्चा माल खाड़ी देशों से आता है। वैश्विक तनाव के कारण इनकी लागत बढ़ने से कागज और कॉपियों की कीमतों में तेजी आई है। कोतवाली चौक के समीप कॉपियों के थोक विक्रेता गोपाल खेत्रीवाल ने बताया कि कई कंपनियों ने एमआरपी बढ़ा दी है। इससे बाजार में नई कॉपियां महंगी हो गई हैं। पहले 120 पेज की कॉपी का एमआरपी 32 रुपये था। इसे बढ़ाकर अब 40 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 172 पेज की कॉपी का एमआरपी पहले 52 रुपये था, जो अब बढ़कर 60 रुपये हो गया है। जेराक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले ए-4 साइज पेपर की कीमत भी बढ़ गई है। पहले इसका थोक भाव 175 रुपये था, अब बढ़कर 190 रुपये हो गया है। कीमतों में नहीं दिख रही एकरूपता एमआरपी बढ़ने के बाद खुदरा दुकानदार भी कॉपियां बढ़ी हुई कीमतों पर बेचने लगे हैं। इस कारण कीमतों में एकरूपता नहीं दिख रही है। स्कूलों से जुड़े विक्रेता कॉपियों पर करीब 10 प्रतिशत की छूट दे रहे हैं, जबकि खुदरा बाजार में ग्राहकों को एमआरपी पर 30 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। कुछ थोक विक्रेता भी खुदरा की तरह सीधे ग्राहकों को कॉपियां बेच रहे हैं। गोपाल खेत्रीवाल के अनुसार, कॉपियों पर अभी भी 50 प्रतिशत तक का डिस्काउंट मिल रहा है। सुबोध कुमार ने बताया कि कई दुकानदार बढ़ी हुई एमआरपी पर ही कॉपियां बेच रहे हैं। स्कूल सत्र शुरू होने के साथ ही बाजार में कॉपियों की मांग बढ़ गई है। फरवरी, मार्च और अप्रैल में कॉपियों की बिक्री सबसे अधिक होती है और साल का लगभग 40 प्रतिशत व्यापार इसी अवधि में हो जाता है। दूसरी ओर, अभिभावक संजय कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले कॉपी खरीदने की योजना थी, लेकिन किसी कारण से खरीद नहीं पाए। अब पांच से आठ रुपये बढ़ी हुई कीमतों पर कॉपी खरीदनी पड़ी। रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़े बाजार में प्लास्टिक और इलेक्ट्रिक सामान की कीमतों में भी तेजी आई है। गुरुद्वारा रोड स्थित प्लास्टिक विक्रेता आकाश कुमार ने बताया कि अधिकांश सामानों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पहले साधारण प्लास्टिक बाल्टी 100 से 120 रुपये में मिलती थी, अब बढ़कर 130 से 140 रुपये हो गई है। बैठने वाला प्लास्टिक स्टूल पहले करीब 150 रुपये में मिलता था, अब 170 से 180 रुपये में बिक रहा है। डस्टबिन की कीमत 150 से 170 रुपये से बढ़कर 180 से 200 रुपये तक पहुंच गई है। किचन में इस्तेमाल होने वाला कंटेनर पहले 50 रुपये में मिल जाता था, अब 60 से 65 रुपये में बिक रहा है। प्लास्टिक मग, जो पहले 20 रुपये में मिलता था, अब 25 से 30 रुपये तक पहुंच गया है। आकाश के अनुसार ये रोजमर्रा के उपयोग के कम कीमत वाले सामान हैं, इसलिए बिक्री पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ा है। लोग जरूरत के हिसाब से इन्हें खरीद रहे हैं और बाजार में मांग सामान्य बनी हुई है। दूसरी ओर, गर्मी के मौसम को देखते हुए इलेक्ट्रिक सामान की मांग भी बढ़ने लगी है। दुकानदारों के अनुसार पंखों की कीमत में भी तेजी आई है। एक ब्रांड का पंखा जो पहले 1250 रुपये में मिलता था, अब 1450 से 1500 रुपये में बिक रहा है।

INDIA मीटिंग में राहुल गांधी बने निशाने पर, वामपंथी दल बोले– गठबंधन ऐसे नहीं चलेगा

नई दिल्ली सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। केरल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और मुकाबले में लेफ्ट के नेतृत्व में एलडीएफ गठबंधन है तो वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का यूडीएफ है। चुनाव से पहले बयानबाजी का दौर तेज है, लेकिन इसका असर दिल्ली तक दिख रहा है और INDIA गठबंधन में भी तनाव पैदा हो रहा है। सोमवार को अलायंस की मीटिंग में दिल्ली में थी, जिसमें संसद सत्र को लेकर चर्चा होनी थी। लेकिन इस दौरान लेफ्ट पार्टियों ने सीधे राहुल गांधी पर ही हमला बोल दिया। इन दलों ने ऐतराज जताया कि राहुल गांधी केरल में जिस तरह से लेफ्ट पार्टियों पर हमला बोल रहे हैं, वह ठीक नहीं है। इससे INDIA अलायंस की एकता प्रभावित होगी और संबंध में कड़वाहट आ जाएगी। वामपंथी दलों के सांसद जॉन ब्रिट्स और पी. संतोष कुमार ने मीटिंग में आपत्ति जताई कि राहुल गांधी कम्युनिस्ट पार्टी और भाजपा के बीच गठजोड़ की बात कैसे कर सकते हैं। दरअसल राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि केरल में भाजपा और कम्युनिस्ट दलों के बीच तालमेल है। यही नहीं उन्होंने आरोप लगाते हुए एक टर्म भी दी थी- कम्युनिस्ट जनता पार्टी। वामपंथी दलों के नेताओं को सबसे ज्यादा यह टर्म ही चुभी है, जिसमें उन्हें कम्युनिस्ट जनता पार्टी कहा गया। वामपंथी नेताओं ने कहा कि इस तरह सहयोगी दलों पर टिप्पणियां करने से गठबंधन कैसे चल पाएगा। वहीं वामपंथी नेताओं की शिकायत पर कुछ और दलों के नेताओं ने दखल दिया। उन्होंने कहा कि यह मीटिंग तो संसद सत्र के एजेंडे को लेकर बुलाई गई है। ऐसे में इस फोरम पर दो दलों के आपसी संबंधों को लेकर बात नहीं करनी चाहिए। यही नहीं कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी मीटिंग के दौरान लेफ्ट सांसदों के रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इस मसले पर बाद में बात की जाएगी और हम बताएंगे कि आखिर राहुल गांधी के कहने का क्या मतलब था। उन्होंने कहा कि मीटिंग में इस तरह राहुल गांधी की स्पीच के एक हिस्से को मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। राहुल गांधी भी बैठक में थे मौजूद, वामपंथी नेताओं की आपत्ति पर क्या बोले इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद थे और उन्होंने भी यही कहा कि इस पर बाद में बात की जाएगी। इस दौरान ज्यादातर नेताओं ने यही कहा कि हमें फिलहाल बैठक में संसद के एजेंडे पर फोकस करना चाहिए। गौरतलब है कि अगले कुछ महीनों में ही केरल में इलेक्शन होने वाले हैं। बीते लगातार दो कार्यकाल से वामपंथी नेतृत्व वाली सरकार केरल की सत्ता पर काबिज है। यहां भाजपा तीसरे नंबर की पार्टी है, जबकि कांग्रेस मुकाबले में रही है। ऐसे में कांग्रेस को लगता है कि इस बार वह सत्ता हासिल कर लेगी। केरल की ही वायनाड लोकसभा सीट से राहुल गांधी सांसद रहे हैं। फिलहाल यहां का प्रतिनिधित्व उनकी बहन प्रियंका वाड्रा करती हैं।

एग्जाम टाइम में टीचर्स की मुश्किलें बढ़ीं: पंजाब सरकार के नए आदेश से बढ़ी जिम्मेदारी

लुधियाना आम आदमी पार्टी की राज्य सरकार 2022 में मुख्य रूप से तीन गारंटी – शिक्षा, स्वास्थ्य और नशा खत्म करने के वादों के साथ सत्ता में आई थी, जिसमें से सरकार चार साल बाद भी फेल रही है। पहले, भारत के चुनाव आयोग द्वारा निर्देशित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तैयारी ने शिक्षक BLO को स्कूली शिक्षा से दूर रखा और अब राज्य सरकार द्वारा घोषित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना ने हदें पार कर दी हैं और स्कूलों में चल रही परीक्षाओं के बीच लुधियाना जिले में कई शिक्षकों को इस योजना के तहत ड्यूटी पर लगा दिया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए संगठन के जिला अध्यक्ष रमनजीत सिंह संधू और महासचिव रूपिंदर पाल सिंह जंडियाली ने कहा कि पिछले महीने, पंजाब के मुख्यमंत्री ने राज्य के हर निवासी को 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा देने के लिए मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना शुरू की और अपने राजनीतिक मकसद को पूरा करने के लिए लोगों से इकट्ठा किए गए टैक्स को विज्ञापनों के रूप में बर्बाद करने के अलावा, उन्होंने स्कूली शिक्षा को भी भगवान भरोसे छोड़ दिया है। मौजूदा सरकार और शिक्षा मंत्री की कई बार स्टेज से टीचरों से सिर्फ़ पढ़ाई से जुड़े काम लेने की बात एक बड़ा झूठ साबित हुई है। सरकारी स्कूलों में पिछड़े और मेहनती लोगों के बच्चे पढ़ाई के लिए टीचरों का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन प्रशासन टीचरों को गैर-पढ़ाई वाले काम सौंप देता है। अब स्कूलों में नॉन-बोर्ड क्लास और बोर्ड क्लास के एग्जाम चल रहे हैं, इसी बीच जिला प्रशासन ने लुधियाना जिले के टीचरों की ड्यूटी मुख्यमंत्री सेहत योजना में लगा दी है। इससे पहले, पंजाब भर में लगभग 20,000 टीचर पहले से ही BLO ड्यूटी पर थे और एग्जाम की तैयारियों के दौरान लगभग डेढ़ महीने तक स्कूल से बाहर रखे गए थे। संगठन ने इन गैर-पढ़ाई वाले कामों की कड़ी निंदा की है और जोर देकर मांग की है कि पंजाब सरकार और जिला प्रशासन ऐसे कामों के लिए नई भर्तियां करें और टीचरों को छूट देने की पुरजोर मांग की है। जिला उपाध्यक्ष बलबीर सिंह बासियां, जंगपाल सिंह रायकोट, राजिंदर जंडियाली, प्रभजोत सिंह तलवंडी, नरिंदर सिंह रायकोट, अवतार सिंह खालसा, राकेश पुहीड़, 4161 मास्टर कैडर यूनियन पंजाब राज्य वित्त सचिव जसविंदर सिंह ऐतियाना, 6635 ई.टी.टी. टीचर्स यूनियन पंजाब जिला लुधियाना के अध्यक्ष परमिंदर सिंह मलौद, जिला सचिव बलजिंदर सिंह, अमरिंदर सिंह आदि ने राज्य सरकार से जोरदार अपील की कि स्कूलों में पढ़ाने के लिए भर्ती किए गए टीचरों से सिर्फ पढ़ाई का काम लिया जाए और परीक्षा के दिन लगाई गई गैर-पढ़ाई ड्यूटी से तुरंत छूट दी जाए। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना और अन्य प्रशासनिक ड्यूटी के लिए बेरोजगारों को रोजगार देने का प्रबंध किया जाए।

US-South Korea सैन्य अभ्यास पर उत्तर कोरिया की चेतावनी, किम जोंग-उन की बहन ने कहा—परिणाम होंगे खतरनाक

 उत्तर कोरिया कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। उत्तर कोरिया के सनकी किंग किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि उत्तर कोरिया की सुरक्षा को चुनौती देने वाला कोई भी कदम “भयानक परिणाम” ला सकता है। यह बयान उस समय आया जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया ने सोमवार से 11 दिन तक चलने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield की शुरुआत की है।  इस अभ्यास में हजारों सैनिक हिस्सा ले रहे हैं और इसका उद्देश्य बदलते युद्ध परिदृश्यों के बीच दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता का परीक्षण करना है।किम यो जोंग ने बिना सीधे ईरान का नाम लिए कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध चल रहे हैं और वैश्विक सुरक्षा ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है, अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह कदम क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया बाहरी खतरों के खिलाफ अपनी सैन्य शक्ति और युद्ध निरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा। किम यो जोंग ने उत्तर कोरिया के बढ़ते परमाणु कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों को बार-बार अपनी “घातक युद्ध निरोधक क्षमता” का एहसास कराता रहेगा। प्योंगयांग लंबे समय से अमेरिका और दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संभावित हमले की तैयारी बताता रहा है और अक्सर इन्हें अपने हथियार परीक्षणों को सही ठहराने के लिए इस्तेमाल करता है। हालांकि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य केवल संभावित खतरों के खिलाफ संयुक्त तैयारी को मजबूत करना है। aइसी अभ्यास के साथ Warrior Shield नामक फील्ड-ट्रेनिंग कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की भी आलोचना की थी और इसे “फर्जी शांति के बहाने किया गया अवैध आक्रामक कृत्य” बताया था। विश्लेषकों के अनुसार उत्तर कोरिया और ईरान उन कुछ देशों में शामिल हैं जिन्होंने यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन किया है और दोनों पर रूस को सैन्य उपकरण देने के आरोप भी लगते रहे हैं।

राजस्थान में सर्दियों के पीक टूरिस्ट सीजन में दौड़ेंगी ‘डबल डेकर’ बसें

जयपुर. राजस्थान की राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के तीन बड़े शहरों की सार्वजनिक परिवहन में जल्द ही बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। दरअसल, सार्वजनिक परिवहन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (JCTSL) ने 50 अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक डबल-डेकर बसों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। खास बात यह है कि केंद्र की 'पीएम ई-बस सेवा' से इतर, इन डबल डेकर बसों का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। किन शहरों को कितनी बसें मिलेंगी? योजना के अनुसार, कुल 50 बसों में से सर्वाधिक बसें इस तरह से अलग-अलग शहरों के हिस्से में आएंगी: जयपुर: 30 डबल डेकर बसें (शहर के प्रमुख मार्गों और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी के लिए)। जोधपुर: 10 डबल डेकर बसें (पर्यटन स्थलों को जोड़ने के लिए)। उदयपुर: 10 डबल डेकर बसें (झीलों की नगरी के खूबसूरत रास्तों के अनुकूल)। JCTSL के प्रबंध निदेशक नारायण सिंह के अनुसार, विभाग का लक्ष्य है कि दीपावली (2026) के आसपास इन बसों की पहली खेप मिल जाए ताकि दिसंबर की सर्दियों वाले पीक टूरिस्ट सीजन से पहले इन्हें सड़कों पर उतारा जा सके। पर्यटन और कनेक्टिविटी पर फोकस इन डबल डेकर बसों का मुख्य उद्देश्य केवल परिवहन नहीं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, इन बसों के रूट इस तरह तय किए जाएंगे कि वे: शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों (जैसे आमेर किला, मेहरानगढ़, सिटी पैलेस) को जोड़ें। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और मुख्य बस स्टैंडों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करें। यात्रियों को शहर का 'पैनोरमिक व्यू' (Panoramic View) प्रदान करें, जो विशेषकर विदेशी और घरेलू सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। रूट चयन की चुनौतियां, होगा सर्वे जयपुर के कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान (CMP) के तहत 25 बस कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। हालांकि, डबल डेकर बसें चलाने से पहले प्रशासन पुराने फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज (RoB), अंडरपास और हाइट बैरियर की जांच कर रहा है। बस की ऊंचाई को देखते हुए उन रूट्स को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ मार्ग में बाधाएं कम हों। पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट' ये बसें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होंगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा। राजस्थान सरकार का यह कदम 'नेट जीरो' लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। इससे शहरों में शोर और वायु प्रदूषण कम होगा, जिससे निवासियों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।