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Farmers Relief Plan: हरियाणा सरकार का वादा—मुआवजा मिलेगा, नहरों का होगा पुनर्निर्माण

चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्य सरकार के मंत्रियों ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। विधायकों ने जहां गांवों की मूलभूत सुविधाओं, किसानों की परेशानी, भ्रष्टाचार और इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार के मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, वहीं मंत्रियों के जवाबों में समाधान, योजनाएं और सख्त कार्रवाई का भरोसा नजर आया। जुलाना नगर पालिका के चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला सदन में गर्माया तो सरकार ने अपने रुख को लेकर कोई ढिलाई नहीं दिखाई। कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट द्वारा सवाल उठाने के बाद शहरी निकाय मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि पहले ही विजिलेंस जांच में एफआइआर दर्ज हो चुकी है। चेयरमैन को उसी दिन सस्पेंड कर दिया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने तुरंत एक्शन लिया है और इस मामले में कांट्रेक्टर पर भी केस दर्ज हुआ है। रेवाड़ी के अकेड़ा और घातल महनियावास गांवों की समस्याएं भाजपा विधायक लक्ष्मण यादव ने उठाई, जिस पर विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने साफ किया कि दोनों गांवों के पास पर्याप्त जमीन नहीं है, जिससे सीवरेज प्लांट लगाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में समाधान के तौर पर दोनों गांवों को मिलाकर ‘महाग्राम’ बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। लोहारू के कांग्रेस विधायक राजबीर सिंह फरटिया के सवाल पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि 1.57 लाख से ज्यादा किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। 575 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भरपाई हुई है। केवल 601 किसानों का भुगतान तकनीकी कारणों से अटका है। असंध के भाजपा विधायक योगेंद्र सिंह राणा ने क्षेत्र की नहरों का मुद्दा उठाया तो सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने बड़ा रोडमैप सामने रखा। उन्होंने कहा कि 10 नहरों और रजवाहों के पुनर्निर्माण की योजना है। वर्ल्ड बैंक से फंड मिलने की संभावना है। अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से नहरों पर काम होगा। 20 साल पुरानी और 75% क्षतिग्रस्त नहरों पर प्राथमिकता के आधार पर काम होगा। आदमपुर के कांग्रेस विधायक चंद्र प्रकाश के सवाल पर श्रुति चौधरी ने दावा किया कि अधिकतर नहरों में पानी पहुंच रहा है। कुछ सब-माइनर के अंतिम छोर पर समस्या है। इसका समाधान भी चरणबद्ध तरीके से तय किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले मुख्य स्रोत की मरम्मत होगी।

CBSE Guidelines: मूल्यांकन में लापरवाही अब पड़ेगी भारी, शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

लुधियाना. सैंट्रल बोर्ड ऑफ सैकेंडरी एजुकेशन (सी.बी.एस.ई.) ने 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन (चैकिंग) कार्य में जुटे अध्यापकों के लिए एक बेहद सख्त एडवाइजरी जारी की है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉपियां चैक करने की प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय है और यदि किसी भी शिक्षक ने इससे जुड़ी कोई भी जानकारी, फोटो या निजी राय सोशल मीडिया पर सांझा की, तो इसे पेशेवर आचरण का उल्लंघन मानकर उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, बोर्ड के संज्ञान में आया है कि कुछ शिक्षक फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मूल्यांकन से जुड़ी बातें लिख रहे हैं। कोई शिक्षक कॉपियों में लिखे उत्तरों का मजाक उड़ा रहा है, तो कोई मार्किंग स्कीम को लेकर भ्रामक दावे कर रहा है। सी.बी.एस.ई. ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा है कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट्स से छात्रों और अभिभावकों में बेवजह का तनाव और डर पैदा होता है। बोर्ड ने याद दिलाया है कि इवैल्यूएशन एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसकी गरिमा बनाए रखना हर शिक्षक की जिम्मेदारी है। जेल या सस्पैंशन जैसी कड़ी कार्रवाई होगी बोर्ड ने अपने सर्कुलर में चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अध्यापकों को सस्पैंड किया जा सकता है, उन्हें स्कूल से निकाला जा सकता है या भविष्य में बोर्ड की किसी भी ड्यूटी के लिए हमेशा के लिए बैन (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि परीक्षा प्रणाली की पवित्रता के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अध्यापकों से अपील की गई है कि वे सस्ते प्रचार के बजाय एक सच्चे प्रोफैशनल की तरह व्यवहार करें। प्रिंसिपल्स को निगरानी बढ़ाने के निर्देश सी.बी.एस.ई. ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के प्रिंसिपल्स को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने स्टाफ को इन नियमों के प्रति तुरंत जागरूक करें। प्रिंसिपल्स को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके स्कूल का कोई भी शिक्षक ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हो जो बोर्ड की गोपनीयता को भंग करती हो। बोर्ड का यह कदम उन लाखों विद्यार्थियों के हित में है जो परीक्षा के बाद मानसिक दबाव में रहते हैं, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचाया जा सके।

Raipur Tragedy: जहरीली गैस से गई 3 सफाईकर्मियों की जान, घटना के बाद मचा बवाल

रायपुर. राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण अस्पताल में मंगलवार की रात दर्दनाक हादसा हो गया. सफाई करने सिवरेज टैंक में उतरे तीन लोगों की मौत हो गई. घटना के बाद अस्पताल के गेट पर मृतकों के परिजन और लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ झूमाझटकी हुई. मौके पर जमकर हंगामा हुआ और मृतकों के परिजन भीड़ अंदर घुस आई. मृतकों के परिजन बिलखते नजर आए. जानकारी के मुताबिक, रामकृष्ण हॉस्पिटल के सिवरेज टैंक की सफाई के लिए तीनों मजदूरों को अंदर उतारा गया था. इसी दौरान टैंक में मौजूद जहरीली गैस की वजह से एक-एक कर तीनों की हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. खर्च बचाने नियमों की अनदेखी का आरोप घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बिना किसी सुरक्षा उपकरण के मजदूरों को सिवरेज टैंक में उतारा गया. अस्पताल प्रबंधन ने खर्च बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की. प्रशिक्षित कर्मचारियों की बजाय सामान्य मजदूरों से सफाई कराई गई. अगर सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था. दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे परिजन दरअसल, सिवरेजटैंक की सफाई बेहद जोखिम भरा काम होता है, जिसे आमतौर पर नगर निगम या प्रशिक्षित टीम द्वारा आधुनिक उपकरणों और सुरक्षा किट के साथ किया जाता है. इसमें गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन मास्क और अन्य सुरक्षा साधनों का उपयोग अनिवार्य होता है. घटना के बाद परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. वहीं, पुलिस और प्रशासन द्वारा मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही जा रही है. अस्पताल में तनाव का माहौल बना हुआ है. बताया जा रहा है कि मृतकों की पहचान गोविंद सेंद्रे, अनमोल मचकन और प्रशांत कुमार के रूप में हुई है, तीनों सिमरन सिटी निवासी हैं.

विमानन नीति-2025 से मध्यप्रदेश में हवाई सेवाओं का तेजी से विस्तार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विमानन नीति-2025 से मध्यप्रदेश में हो रहा हवाई सेवाओं का निरंतर विस्तार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन हवाई सेवा का हुआ शुभारंभ केंद्रीय नागर विमानन मंत्री  नायडू भी वर्चुअली हुए शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश विमानन नीति 2025 लागू कर देश में हवाई सेवाओं के विस्तार का कार्य व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। नीति के अंतर्गत ही रीवा से रायपुर की विमान सेवा प्रारंभ हो रही है। यही नहीं जबलपुर से कोलकाता और इंदौर से आबूधाबी की उड़ानों की स्वीकृति भी इस नीति के अंतर्गत संभव हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को रीवा से रायपुर अलायन्स एयर की सप्ताह में तीन दिन की उड़ान के शुभारंभ समारोह को मंत्रालय भोपाल से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आने वाले समय में रीवा एयरपोर्ट के विस्तार का कार्य होगा जो संपूर्ण विंध्य अंचल के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के विंध्य क्षेत्र का पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ से हवाई मार्ग से जुड़ना समृद्धि और संस्कृति के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विंध्यवासियों को रीवा से रायपुर की उड़ान प्रारंभ होने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राज्य के विमानन क्षेत्र में ये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। गत 2 वर्ष में चार महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। जहां वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने रीवा में एयरपोर्ट का शुभारंभ किया, वहीं रीवा से दिल्ली विमान सेवा शुरू हुई। इसके बाद गत वर्ष रीवा से इंदौर की विमान सेवा शुरू हुई। आज रीवा से रायपुर की विमान सेवा प्रारंभ हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में आज 8 एयरपोर्ट हैं। शीघ्र ही उज्जैन और शिवपुरी का एयरपोर्ट प्रारंभ होने पर संख्या 10 हो जाएगी। प्रदेश में कुल 20 हवाई पट्टियां और 220 हेलीपैड हैं। शहडोल, नीमच, छिंदवाड़ा और मंडला एयरस्ट्रीप रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के अंतर्गत एयरपोर्ट के रूप में विकसित होंगी। प्रधानमंत्री  मोदी का कहना है कि हवाई चप्पल पहनने वाले व्यक्ति भी हवाई यात्रा कर सकते हैं। प्रधानमंत्री  मोदी के इस मंत्र को प्रदेश में साकार करने के लिए जहां पीएम एयर एंबुलेंस सेवा प्रारंभ की गई वहीं पर्यटन, वन्य जीव अभयारण्य और धार्मिक महत्व के स्थानों तक जाने के लिए भी धार्मिक पर्यटन हेली सेवा प्रारंभ की गई हैं। नागरिक विमानन नीति-2025 में दे रहे हैं सहायता मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में नागरिक विमानन नीति-2025 लागू की गई है। इसमें अंतर्गत घरेलू मार्ग के विकास के लिए 10 लाख रूपए और अंतर्राष्ट्रीय मार्गों के लिए 15 लाख रुपए की सहायता राशि देकर बढ़ावा दिया जा रहा है। माल ढुलाई के कार्य को तेज, सस्ता और सुगम बनाने के लिए एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं के लिए भी 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। कृषि उत्पादों के लिए कार्गो क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। ऐसे विद्यार्थी जो गैर सिम्युलेटर कोर्स कर रहे हैं, उनकी फीस का 60 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार करेगी। इससे जहां व्यापार व्यवसाय क्षेत्र को प्रोत्साहन मिल रहा है वहीं संपूर्ण अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रीवा-रायपुर हवाई यात्रा के लिए केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री और मंत्रालय के अधिकारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। मध्यप्रदेश में विमानन क्षेत्र में हो रहा अच्छा कार्य – केंद्रीय मंत्री  नायडू केंद्रीय नागर विमानन मंत्री  किजारापु राममोहन नायडू ने नई विमान सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में नई दिल्ली से वर्चुअली शामिल होते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में विमानन क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ाने के लिए अच्छा कार्य हो रहा है। केंद्रीय मंत्री  नायडू ने इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बधाई दी। केंद्रीय मंत्री  नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2024 में रीवा एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था और आज विमान यात्रियों को रीवा से रायपुर की विमान सेवा का लाभ मिलना शुरू हो गया है। मध्यप्रदेश में पीएम हेली पर्यटन सेवा और गंभीर रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन व्यवस्था के तौर पर पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा का संचालन सराहनीय है। केंद्रीय मंत्री  नायडू ने कहा कि "वन रूट वन फेयर" के लिए एलाइंस एयर के साथ अनुबंध किया गया है। यह इस तरह का देश में प्रथम अनुबंध है। केंद्रीय मंत्री  नायडू ने कहा कि आशा है मध्यप्रदेश में नए विमानतल और नई हवाई पट्टियों के विकास के कार्य निरंतर होते रहेंगे। रीवा में हवाई सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल, वरिष्ठ सांसद  विष्णु दत्त शर्मा,  जनार्दन मिश्रा के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। खजुराहो एयरपोर्ट पर भी अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे जो कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े।  

पसंदीदा सीट के लिए अब नहीं देना होगा अतिरिक्त शुल्क, एयरलाइंस ने बदला नियम

 नई दिल्ली भारत में हवाई यात्रियों को जल्द ही छिपे हुए खर्चों से बड़ी राहत मिल सकती है, क्योंकि सरकार ने सीट चुनने पर लगने वाले एक्स्ट्रा चार्ज पर रोक लगाने और सभी एयरलाइंस में यात्रियों के अधिकारों को और मज़बूत करने के लिए कदम उठाए हैं. नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइन ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि वे यह तय करें कि किसी भी फ़्लाइट में करीब 60 फीसदी सीटें चुनने के लिए मुफ़्त में उपलब्ध हों. इसका मतलब है कि वेब चेक-इन या सीट सिलेक्शन के दौरान यात्रियों से वसूले जाने वाले एक्स्ट्रा शुल्क पर लगाम लगेगी। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा जारी इस आदेश का मकसद हवाई यात्रा को ज्यादा सहज और पारदर्शी बनाना है। कई एयरलाइंस टिकट बुक करने के बाद या वेब चेक-इन के दौरान पसंदीदा सीट चुनने के लिए एक्स्ट्रा चार्ज ले रही थीं. नए निर्देश का मकसद इस तरह एक्टिविटीज पर लगाम लगाना और यात्रियों को बेहतर सुविधा मुहैया करवाना है। साथ बैठेंगे एक ही बुकिंग वाले यात्री मंत्रालय ने एयरलाइंस से यह भी तय करने को कहा है कि एक ही PNR पर सफर करने वाले यात्री साथ बैठें और हो सके तो उन्हें आस-पास की सीटें ही अलॉट हों. इससे उन परिवारों और ग्रुप्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर एक-दूसरे के पास सीटें पाने के लिए ज़्यादा पैसे देने पड़ते थे। एयरलाइंस को सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए, खेल के सामान और म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स को ले जाने की सुविधा पारदर्शी और यात्री-अनुकूल तरीके से देनी होगी. उनसे यह भी कहा गया है कि वे पालतू जानवरों को ले जाने के बारे में साफ़ नीतियां प्रकाशित करें; यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें यात्रियों के बीच अक्सर भ्रम की स्थिति बनी रहती है। यात्रियों के अधिकारों और पारदर्शिता पर ज़ोर सरकार ने यात्रियों के अधिकारों का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, खासकर तब जब उड़ान में देरी हो, उड़ान रद्द हो जाए या यात्रियों को बोर्डिंग से रोक दिया जाए. एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, बुकिंग प्लेटफ़ॉर्म और एयरपोर्ट्स के काउंटरों पर इन अधिकारों को साफ़-साफ़ दिखाना होगा. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंच स्थापित करने के लिए यात्रियों को उनके अधिकारों के बारे में क्षेत्रीय भाषाओं में भी जानकारी दी जानी चाहिए। भारत का घरेलू एविएशन सेक्टर तेज़ी से बढ़ा है और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाज़ार बन गया है. यहां के हवाई अड्डों पर रोज़ाना पांच लाख से ज़्यादा यात्री आते-जाते हैं. ऐसे में मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यात्रियों को सुविधाएं देना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. मंत्रालय ने 'UDAN यात्री कैफ़े' जैसी पहलों का ज़िक्र किया है, जहां हवाई अड्डों पर किफ़ायती खाना और मुफ़्त Wi-Fi की सुविधा मिलती है।

ट्रंप ने पलटी मारी, अमेरिका ने होर्मुज पर ईरानी मिसाइल भंडार पर गिराया भारी बम

वाशिंगटन  ईरान के साथ जंग में अमेरिका अकेला पड़ चुका है. उसका साथ कोई नहीं दे रहा है. ऐसे में अब अमेरिका ने अकेले ही ईरान से आर-पार की जंग लड़ने की ठान ली है. अमेरिका अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अकेले ईरान के कब्जे से मुक्त कराने में जुट गया है. जी हां, इसी सिलसिले में अमेरिका ने होर्मुज के पास 23 क्विंटल के खतरनाक बमों की बमबारी की है. इस बमबारी का मकसद होर्मुज के पास स्थित ईरानी मिसाइल साइटों को ध्वस्त करना था. ताकि होर्मुज के दरवाजे को समुद्री व्यापार के लिए खोला जा सके. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. इसके मुताबिक, ईरान की इन क्रूज मिसाइलों से होर्मुज से होने वाली अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा था। दरअसल, अमेरिकी फोर्स ने कई 5000 पाउंड वजन वाले गहराई तक घुसने वाले बम गिराए. यानी अमेरिका ने करीब 23 क्विंटल के बम से ईरान के मिसाइल भंडार पर हमला किया है. ये बम ईरान के मजबूत बनाए गए मिसाइल स्टोरेज और लॉन्च साइटों पर गिराए गए, जो समुद्र किनारे बने थे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसकी सफलता की जानकारी दी। यूएस सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ‘कुछ घंटे पहले अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के समुद्र तट पर स्थित ईरान की मजबूत मिसाइल साइटों पर 5000 पाउंड के कई ‘डीप पेनिट्रेटर’ बमों का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया. इन साइटों पर मौजूद ईरान की जहाज-रोधी क्रूज मिसाइलों से इस जलडमरूमध्य में होने वाली अंतर्राष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही को खतरा था.’ इसका मतलब है कि अमेरिका इस कार्रवाई को सफल मान रहा है। क्यों दुनिया के लिए खास है होर्मुज गौरतलब है कि होर्मुज की खाड़ी दुनिया के लिए बहुत अहम है. यहां से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है. अगर ये रास्ता बंद हो जाए तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छू जाती हैं. अभी इस होर्मुज के कारण पूरी दुनिया में खलबली है. कारण कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग चल रही है. ईरान ने बदला लेते हुए होर्मुज को बंद कर दिया है. ईरान लगातार होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को टारगेट करने के लिए मिसाइलें, ड्रोन और माइन्स का इस्तेमाल कर रहा है. इस खौफ से ईंधन वाले जहाज पार नहीं कर पा रहे हैं. इससे तेल के टैंकर रुक गए और दुनिया भर में तेल संकट खड़ा हो गया है। होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल पर अटैक क्यों? होर्मुज खोलना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती है. कारण कि ईरान ने भारत समेत एशिया के कुछ देशों को छूट तो दी है, मगर अमेरिका और यूरोप के लिए पूरी तरह से होर्मुज का दरवाजा बंद कर रखा है. ऐसे में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार नाटो और अन्य देशों से होर्मुज खोलने में मदद मांग रहे हैं. उन्होंने कहा कि होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए दूसरे देश भी जहाज भेजें.  लेकिन कई सहयोगी देशों ने मना कर दिया. ट्रंप ने नाराजगी जताई और कहा कि अमेरिका अकेले ही ये काम कर सकता है. यहा कारण है कि अब अमेरिका अकेले ही होर्मुज को खुलवाने में जुट गया है. आज का यह एक्शन इसी का नतीजा है। अमेरिका ने गेम पलटना शुरू किया पहले अमेरिका ने ईरान के खार्ग द्वीप पर भी हमले किए थे. वहां मिलिट्री टारगेट नष्ट किए गए, लेकिन तेल सुविधाओं को बचाया गया. ट्रंप ने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो तेल सुविधाएं भी निशाना बनाई जा सकती हैं. अब ये नया हमला ट्रंप की रणनीति का हिस्सा लगता है. होर्मुज के पास ईरानी मिसाइल भंडार को तबाह करके ट्रंप ने गेम पलट दिया है. अमेरिका के इस एक्शन से होर्जुम में ईरान का खतरा कम हो जाएगा. ईरान की मिसाइलें नष्ट होने से होर्मुज का दरवाजा फिर से खुलने की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिका ने किस बम से किया अटैक अमेरिका का ये हमला बंकर-बस्टर बमों से किया गया. ये बम जमीन के अंदर घुसकर मजबूत ठिकानों को तबाह कर देते हैं. अमेरिका ने 5000 पाउंड यानी करीब 23 क्विंटल बमों से अटैक किया. ईरान की तरफ से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. लेकिन ये साफ है कि अमेरिका ईरान की समुद्री ताकत को कमजोर करने पर जोर दे रहा है. अगर अमेरिका का यह दावा सही है तो दुनिया भर के व्यापारियों और तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है. अगर होर्मुज खुल गया तो तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी और कीमतें गिरेंगी. वैसे भी ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सहयोगियों के बिना भी इस रास्ते को सुरक्षित रखेगा. बता दें कि 28 फरवरी से ही युद्ध जारी है। क्या है ये बंकर बस्टर बम और क्यों है इसकी इतनी चर्चा? अब सवाल उठता है कि ये बंकर बस्टर बम आखिर बला क्या है? आम भाषा में समझें तो ये ऐसे बम हैं जो जमीन या कंक्रीट की मोटी दीवारों को भेदकर गहराई में छिपे दुश्मनों का काल बन जाते हैं. 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे बम की कीमत करीब 2.88 लाख डॉलर होती है. हालांकि, अमेरिका के पास इससे भी बड़े 30,000 पाउंड वाले बम हैं, लेकिन फिलहाल ईरान के इन मिसाइल ठिकानों को मिट्टी में मिलाने के लिए ये 5,000 पाउंड यानी 2200 किलो वाले बम ही काफी थे। पूरी कहानी का दूसरा पहलू ये भी है कि इस जंग के पीछे इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भी हाथ माना जा रहा है, जो महीनों से अमेरिका को इस रास्ते पर चलने के लिए उकसा रहे थे. लेकिन ट्रंप का कहना है कि यह उनकी अपनी फीलिंग थी कि ईरान से खतरा बढ़ रहा है, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया. दूसरी तरफ, ईरान आज भी अपनी बात पर अड़ा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली बनाने जैसे शांतिपूर्ण कामों के लिए है और उसका बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। फिलहाल, हालात ये हैं कि पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज के इस रास्ते पर टिकी हैं. अमेरिका ने अपनी ताकत दिखाकर ये साफ कर दिया है कि वो पीछे हटने वाला नहीं है. अब देखना ये होगा कि ईरान इस बंकर बस्टर हमले का क्या … Read more

आंगनबाड़ी केंद्रों में न्योता भोज कार्यक्रम: पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का व्यापक अभियान

आंगनबाड़ी केन्द्रों में न्योता भोज कार्यक्रम : पोषण, शिक्षा और जनभागीदारी का राज्यव्यापी अभियान प्रदेशभर में 9,763 न्योता भोज आयोजित, 1.83 लाख से अधिक बच्चे हुए लाभान्वित  रायपुर आंगनबाड़ी केन्द्रों में संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम प्रदेश में पोषण, शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप शुरू की गई इस पहल के तहत अब समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। राज्य स्तर पर जनवरी से फरवरी 2026 तक कुल 9,763 न्योता भोज आयोजनों के माध्यम से 1,83,927 बच्चों को लाभान्वित किया गया है, जो इस योजना की व्यापक सफलता को दर्शाता है। जिलेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिलासपुर जिले में सर्वाधिक 884 आयोजन हुए, जिनमें 18,703 बच्चे लाभान्वित हुए। वहीं कोरबा में 720 आयोजनों के माध्यम से 13,944 बच्चों, रायगढ़ में 690 आयोजनों से 9,835 बच्चों तथा कांकेर में 636 आयोजनों से 7,915 बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। इसी प्रकार धमतरी में 606 आयोजन कर 11,228 बच्चों, महासमुंद में 415 आयोजनों के माध्यम से 7,302 बच्चों तथा जांजगीर-चांपा में 439 आयोजनों से 10,518 बच्चों को लाभ पहुंचाया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत समाज के नागरिक, जनप्रतिनिधि, दानदाता एवं पालक अपने विशेष अवसरों—जैसे जन्मदिन, वर्षगांठ या अन्य पारिवारिक खुशियों—पर आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों के साथ भोजन साझा कर रहे हैं। इससे बच्चों को अतिरिक्त पौष्टिक आहार मिल रहा है, साथ ही समाज में उनके प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता भी बढ़ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आने वाले अधिकांश बच्चे ग्रामीण एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से होते हैं। ऐसे में ‘न्योता भोज’ जैसे प्रयास उनके शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह पहल न केवल कुपोषण को कम करने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के प्रति बच्चों और अभिभावकों का आकर्षण भी बढ़ा रही है। शासन ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे अपने सामाजिक एवं पारिवारिक अवसरों को आंगनबाड़ी के बच्चों के साथ साझा कर इस अभियान को और मजबूत बनाएं।

योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय

उत्तर प्रदेश की नई वित्तीय नीति: जनता के काम में सीधे खर्च हो रहा पैसा योगी सरकार का बेहतरीन मॉडल, टैक्स से सीधे जनहित तक हर रुपये का उद्देश्य तय कहां से पैसा आया और कहां खर्च हुआ, अब सब कुछ है स्पष्ट गो कल्याण, सड़क, खेती और विरासत को मिल रहा सीधा लाभ लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने सार्वजनिक वित्त के क्षेत्र में एक स्पष्ट और व्यावहारिक बदलाव किया है। अब टैक्स को केवल राजस्व इकट्ठा करने का माध्यम नहीं माना जा रहा, बल्कि उसे सीधे किसी खास उद्देश्य से जोड़कर खर्च किया जा रहा है। सरल शब्दों में समझें तो कौन सा पैसा कहां से आया और कहां खर्च हुआ, यह अब स्पष्ट दिख रहा है। यह मॉडल इसलिए खास है क्योंकि आम नागरिक अब आसानी से समझ सकता है कि उसका दिया हुआ टैक्स किस काम में लग रहा है। इस पूरी नीति का सीधा मतलब है कि टैक्स अब सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विकास का साधन बन चुका है। उत्तर प्रदेश ने दिखाया है कि अगर योजना स्पष्ट हो, तो हर रुपये का सही उपयोग करके समाज, अर्थव्यवस्था और संस्कृति तीनों को एक साथ मजबूत किया जा सकता है। गो कल्याण सेस: छोटा टैक्स, बड़ा असर राज्य सरकार ने आबकारी से जुड़े राजस्व पर 0.5% का गो कल्याण सेस लगाया है। यह टैक्स शराब की बिक्री से जुड़ा है। आम उपभोक्ता पर इसका बहुत कम असर पड़ता है, लेकिन पूरे राज्य से यह मिलकर सैकड़ों करोड़ रुपये जुटाता है। इस पैसे को सीधे आवारा गोवंश की देखभाल में खर्च किया जाता है। प्रदेश में बने गोवंश आश्रय स्थल में हजारों पशुओं को रहने, खाने और इलाज की सुविधा मिल रही है। दरअसल, कृषि में मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण किसानों की पशुओं पर निर्भरता कम हुई है, जिससे आवारा पशुओं की समस्या बढ़ी। अब इस सेस के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान तैयार किया गया है। हर सेक्टर का पैसा उसी सेक्टर में लग रहा उत्तर प्रदेश ने एक और स्पष्ट नीति अपनाई है और वो ये कि जिस सेक्टर से राजस्व आता है, उसी सेक्टर के विकास में उसका उपयोग किया जाता है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें: 1. रियल एस्टेट: धार्मिक और पर्यटन विकास संपत्ति की खरीद-फरोख्त से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी का उपयोग काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट में किया जा रहा है। इससे पर्यटन बढ़ रहा है, रोजगार मिल रहा है और विरासत सुरक्षित हो रही है। 2. खनन: सिंचाई और पानी की व्यवस्था खनन से मिलने वाला पैसा गांवों में सिंचाई और जल प्रबंधन सुधारने में लगाया जा रहा है, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है। 3. एक्सप्रेसवे: गांवों तक सड़क कनेक्टिविटी पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से मिलने वाला टोल छोटी सड़कों (फीडर रोड) के निर्माण में खर्च हो रहा है, जिससे दूर-दराज के गांव भी मुख्य सड़कों से जुड़ रहे हैं। 4. मंडी शुल्क: किसानों की सुरक्षा मंडी से मिलने वाली फीस का उपयोग फसल सुरक्षा और किसान योजनाओं में किया जा रहा है। अब टैक्स का उपयोग साफ दिख रहा इस नई नीति की सबसे बड़ी ताकत है, स्पष्टता। अब लोगों को साफ दिखता है कि शराब की बिक्री से मिला पैसा गो कल्याण में लग रहा है। टोल टैक्स का पैसा सड़क और कनेक्टिविटी में, प्रॉपर्टी टैक्स का पैसा धार्मिक और पर्यटन विकास में निवेश हो रहा है। इससे सरकार पर भरोसा बढ़ता है, क्योंकि टैक्स अब “कहां गया” का सवाल नहीं, बल्कि “यहीं लगा” का जवाब देता है। तेजी से विकास की मजबूत तैयारी उत्तर प्रदेश का लक्ष्य है 2029-30 तक $1 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार लगातार सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई और खेती, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री, पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रही है। राज्य के बजट में पूंजीगत खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे रोजगार, व्यापार और कनेक्टिविटी तीनों में तेजी आ रही है। दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण उत्तर प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक स्पष्ट रास्ता दिखाता है। मतलब साफ है कि जो राज्य जिस क्षेत्र में मजबूत है, वह उसी से मिलने वाले टैक्स को उसी क्षेत्र के विकास में लगा सकता है। जैसे, जहां पर्यटन ज्यादा है, वहां पर्यटन से मिलने वाले टैक्स को पर्यटन सुविधाएं बेहतर करने में खर्च किया जा सकता है। औद्योगिक राज्यों में उद्योगों से जुड़े शुल्क को पर्यावरण सुधार पर लगाया जा सकता है। वहीं कृषि प्रधान राज्यों में मंडी से मिलने वाली फीस को खेती और किसानों को मजबूत बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, हर राज्य अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार टैक्स को विकास से जोड़कर ज्यादा प्रभावी परिणाम हासिल कर सकता है।

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में निवेश की गति तेज, तीन कंपनियों को मिली भूमि आवंटन

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बड़े निवेश की रफ्तार तेज, तीन कंपनियों को भूमि आवंटन योगी सरकार की औद्योगिक नीति का असर, तीनों कंपनियों से आएगा 3,400 करोड़ रुपये से अधिक निवेश ट्रैक्टर, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट और ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट लगेंगी, सृजित होंगे 5,700 से ज्यादा रोजगार के अवसर लखनऊ/नोएडा  उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में तीन बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की गई है। यह आवंटन इन्वेस्ट यूपी की संस्तुति पर किया गया है, जिससे प्रदेश में निवेश का माहौल और मजबूत हुआ है। इन परियोजनाओं से कुल 3,400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा और लगभग 5,700 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिलेगा। एस्कॉर्ट्स कुबोटा से मिलेगा बड़ा निवेश और रोजगार एस्कॉर्ट्स कुबोटा लि. (M/s Escorts Kubota Limited) को सेक्टर-10 में 154 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट निर्माण इकाई स्थापित करेगी। इस परियोजना में लगभग 2,029 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 4,000 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह यूनिट प्रदेश में कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को नई मजबूती देगी। सीएनएच इंडस्ट्रियल से कृषि मशीनरी सेक्टर को बढ़ावा सीएनएच इंडस्ट्रियल इंडिया प्रा लि (M/s CNH Industrial India Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 100 एकड़ भूमि दी गई है। कंपनी यहां ट्रैक्टर निर्माण यूनिट स्थापित करेगी, जिसमें 1,219.81 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इस प्रोजेक्ट से लगभग 1,200 लोगों को रोजगार मिलेगा। यह निवेश उत्तर प्रदेश को कृषि मशीनरी निर्माण का एक प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगा। सन ऑर्गेनिक से फूड प्रोसेसिंग सेक्टर मजबूत सन ऑर्गेनिक इंडस्ट्रीज प्रा लि (M/s Sun Organic Industries Pvt. Ltd.) को सेक्टर-8डी में 30,000 वर्गमीटर भूमि आवंटित की गई है। कंपनी यहां ड्राई फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट लगाएगी। इस परियोजना में करीब 225.16 करोड़ रुपये का निवेश होगा और 569 लोगों को रोजगार मिलेगा। इससे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनेंगे। योगी सरकार की नीतियों से बढ़ा निवेश का भरोसा प्रदेश में बढ़ते निवेश को योगी सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों, सिंगल विंडो सिस्टम और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का परिणाम माना जा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र तेजी से एक औद्योगिक हब के रूप में विकसित हो रहा है, जहां बड़ी कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। इन सभी परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी, जिससे प्रदेश के समग्र विकास को बल मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाना है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में हो रहा यह निवेश उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सस्ती और बेहतर इलाज की दिशा में बड़ा कदम: पंजाब को NHM से मिला 572.66 करोड़ का बजट

चंडीगढ़. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में पंजाब को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 572.66 करोड़ रुपये का फंड जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए सभी नागरिकों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। जेपी नड्डा ने प्रश्न के उत्तर में कहा, “एनएचएम का उद्देश्य सस्ती और गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं तक सभी भी पहुंच सुनिश्चित करना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, पंजाब के लिए 572.66 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है। इस योजना के तहत जारी की गई धनराशि का उपयोग ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मौजूदा उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने के लिए किया जाता है।” उन्होंने कहा कि एनएचएम के तहत, कार्यान्वयन और प्रगति का आकलन करने के लिए विभिन्न तंत्र मौजूद हैं। धनराशि की निगरानी और प्रबंधन के लिए सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली है। व्यय विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुपालन के आधार पर किस्तें जारी की जाती हैं। एनएमसी पोर्टल पर 2025 से 2,572 शिकायतें मिलीं। स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2025 से अब तक एनएससी के शिकायत पोर्टल पर 2,572 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से पिछले वर्ष 1,829 और इस वर्ष 743 शिकायतें शामिल हैं। अनुप्रिया ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के अनुसार छात्रों और अन्य हितधारकों के लिए शिकायतें कराने का वेब-आधारित पोर्टल स्थापित किया गया है। अन्य प्रश्न के उत्तर में अनुप्रिया पटेल ने कहा कि केंद्रीय दवा नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने वजन प्रबंधन और मोटापे के इलाज के लिए तीन दवाओं – ओर्लिस्टेट, टिरजेपेटाइड और सेमाग्लूटाइड को मंजूरी दी है। ये दवाएं डॉक्टर की पर्ची (प्रेसक्रिप्शन) पर दवा की दुकान में उपलब्ध होंगी। अन्य प्रश्न के उत्तर में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के तहत 28 फरवरी तक देशभर में अस्पतालों में भर्ती के 11.69 करोड़ मामलों में 1.73 लाख करोड़ को मंजूरी दी गई है। इनमें से वित्तीय वर्ष 2023-24 और वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान अस्पतालों में भर्ती के 4.40 करोड़ मामलों में 68,302.23 करोड़ रुपये की मंजूरी शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि योग्य लाभार्थी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे उनके जेब से होने वाले खर्च में कमी आ रही है। एबी-पीएमजेएवाई के तहत प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज मिलता है। अन्य प्रश्न के उत्तर में प्रतापराव जाधव ने कहा कि 2022-23 से 2024-25 के बीच तीन वर्षों में खाद्य सुरक्षा विभागों के अधिकारियों ने 5.18 लाख से अधिक खाद्य नमूनों का विश्लेषण किया। इस अवधि में 88,192 मामलों में दंड लगाए गए और 3,614 मामलों में सजा सुनाई गई और 1,161 लाइसेंस रद किए गए।