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मजदूरी से उठकर अनीता ने बदली अपनी कहानी, मेहनत से बनाई पहचान

स्वयं सहायता समूह से बदली तकदीर: अनीता संग 4400 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर मजदूरी से उठकर अनीता ने बदली अपनी कहानी, मेहनत से बनाई पहचान सरकारी सहयोग से सिलाई और किराने की दुकान से अनीता ने बनाया आर्थिक आधार लखनऊ अमरोहा जिले के विकास खंड गजरौला के ग्राम पंचायत सलेमपुर गोसाईं की रहने वाली अनीता देवी आज उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकीं हैं, जो कभी आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के कारण अपनी जरूरतों को भी ठीक से पूरा नहीं कर पातीं थीं। वे अपने पति के साथ मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करती थीं। जीवन में स्थिर आय का कोई साधन नहीं था और हर दिन संघर्ष से भरा होता था। लेकिन आज वही अनीता “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं, जो अपने दम पर सालाना लाखों की आय अर्जित कर रहीं हैं। उनके समूह से जुड़ी 4400 महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन गई हैं। योगी सरकार की मदद से अनीता ने लिखी अपनी कहानी सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने अनीता देवी के जीवन में जो बदलाव किया, जिसने पूरी दिशा ही बदल दी। आज वह अपने समूह की अध्यक्ष हैं। उनके समूह से 4400 महिलाएं जुड़ी हुई हैं जो कि आत्मनिर्भर बन चुकीं हैं। शक्ति स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद अनीता को न केवल आर्थिक सहायता मिली, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने का अवसर भी मिला। योगी सरकार के सहयोग से वर्ष 2021 में सामुदायिक निवेश निधि से उन्हें 1,10,000 रुपये मिले जिससे उनके व्यवसाय को मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्हें वर्ष 2023 में समूह के माध्यम से 15 हजार रिवॉल्विंग फंड के रूप में प्राप्त हुए। जबकि वर्ष 2024 में 3,00,000 सीसीएल और 2025 में 4,00,000 सीसीएल प्राप्त हुआ। आज समूह के सहयोग से अनीता देवी ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।  कोरोना काल में किया खूब काम, उसी से मिली सफलता  आज सलेमपुर में अनीता ने 27 समूह बनाए हैं। उन्होंने अपने घर से सिलाई के कार्य की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने इसे एक व्यवसाय का रूप दिया और कपड़े तैयार कर बेचने लगीं। कोरोना काल में उनके समूह ने मिलकर मास्क और उससे जुड़े बहुत से उत्पाद बनाए थे। उनकी यही मेहनत रंग लाई और आज उनकी आमदनी में काफी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। 2023 दिसंबर में उन्होंने 'शक्ति ट्रेडर्स' के नाम से किराना की दुकान खोली जिसे उनके पति और बेटा मिलकर चलाते हैं। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़ते गए। वर्तमान में उनकी मासिक आय 40,000 से 45000 रुपये तक हो जाती है। यह सफलता केवल उनके परिश्रम का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि योगी सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर कैसे महिलाओं को सशक्त बना रही हैं।  आत्मनिर्भरता से सम्मान तक: अनीता बनीं समूह और गांव के लिए प्रेरणा आज अनीता न केवल अपने परिवार का सहारा बनीं हैं, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणा का स्रोत भी हैं। इसके अलावा समय मिलने पर वह अपने घर से कॉस्मेटिक से जुड़े उत्पाद भी बेचने का काम करतीं हैं। उन्होंने मेहनत से यह दिखाया है कि आत्मनिर्भरता से ही सच्चा सम्मान मिलता है। अब वह अन्य महिलाओं को भी समूह से जुड़ने के लिए प्रेरित करती रहती हैं, ताकि वे भी अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। अनीता इसके लिए योगी सरकार का धन्यवाद देती हैं। वे कहती हैं कि “समूह से जुड़ने के बाद हमारे जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब हमारे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से बहुत बेहतर हुई है। अनीता की यह कहानी केवल एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की कहानी है, जो सरकारी योजनाओं, सामूहिक प्रयास और मजबूत इच्छाशक्ति से संभव हुई है।

हरियाणा में पंचायती जमीन पर निजी परियोजनाओं की मंजूरी के लिए नए नियम लागू, ग्राम सभा की अनुमति जरूरी

 चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ग्राम पंचायत की सामूहिक भूमि (शामलात देह) पर निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता बनाने के नये नियम लागू करने वाली है। अब कोई भी निजी प्रोजेक्ट ग्राम पंचायत की जमीन के जरिए रास्ता लेना चाहे, तो उसके लिए पहले ग्राम पंचायत और ग्राम सभा की मंजूरी लेना अनिवार्य होगी। प्रस्तावित नई नीति के मुताबिक, ग्राम पंचायत के सभी सदस्यों में से कम से कम तीन-चौथाई सदस्यों का समर्थन होना चाहिए। उसके बाद गांव की आम बैठक यानी ग्राम सभा में उपस्थित लोगों में से दो-तिहाई लोगों की हां जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रास्ता बनाने का फैसला सिर्फ कुछ लोगों के स्वार्थ के लिए नहीं होगा, बल्कि पूरी पंचायत और गांव की सहमति से लिया जाए। प्रदेश सरकार यह भी प्रस्तावित कर रही है कि रास्ता बनाने के लिए जमीन बेची या लीज पर नहीं दी जाएगी। नया रास्ता पंचायत के स्वामित्व में रहेगा और सभी गांववासियों के लिए सामान्य उपयोग के लिए उपलब्ध रहेगा। निजी प्रोजेक्ट के लिए रास्ता बनाते समय पंचायत की भूमि का लाभ निजी लाभ के लिए नहीं लिया जाएगा। इस नियम का उद्देश्य है कि निजी परियोजनाओं के विकास में ग्राम पंचायत की जमीन सुरक्षित रहे, गांववासियों की सहमति सुनिश्चित हो और कोई विवाद न उठे। साथ ही, यह नीति निजी निवेश और बुनियादी ढांचे के निर्माण को भी प्रोत्साहित करेगी, क्योंकि अब रास्ता बनाने की मंजूरी प्रक्रिया साफ, सरल और नियमबद्ध होगी। पानीपत की ग्राम पंचायत मच्छरौली ने शामलात देह की नौ कनाल तीन मरला भूमि को एमएस कपूर इंडस्ट्रीज लिमिटेड की 15 कनाल जमीन के साथ बदलने का प्रस्ताव पास किया है। यह निर्णय इसलिए लिया गया, क्योंकि मौजूदा कुछ रास्ते और खाल अब उपयोग में नहीं हैं, और नए रास्ते की सुविधा प्रदान करने के लिए यह आदान-प्रदान आवश्यक है। आज कैबिनेट मीटिंग में पंचायत के इस प्रस्ताव पर मुहर लग सकती है। तय फार्मेट के अनुसार दिखाना होगा सरकारी अनुदान का उपयोग राज्य सरकार ने वित्तीय नियमों में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर ली है। वित्तीय नियम 8.14 (बी) के तहत यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (यूसी) का नया फार्मेट निर्धारित किया जा रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। सरकारी अनुदान (ग्रांट-इन-एड) अक्सर स्वायत्त संस्थाओं, स्थानीय निकायों, बोर्ड/कार्पोरेशनों और सहकारी समितियों को दी जाती है। इन संस्थाओं को यह प्रमाण देना होता है कि अनुदान का उपयोग केवल उस उद्देश्य के लिए किया गया, जिसके लिए इसे मंजूरी मिली थी। पहले इस यूसी का कोई तय फार्मेट नहीं था, जिससे जवाबदेही और निगरानी में दिक्कतें आती थीं। अब वित्त विभाग ने एक मानक फॉर्मेट बनाया है, जिसे सभी संस्थाओं को अब अपनाना होगा।

सीएम विष्णुदेव साय का नुआपाड़ा दौरा, पत्नी कौशल्या साय व विधायक पुरंदर मिश्रा रहे साथ

नुआपाड़ा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज धार्मिक यात्रा पर ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में स्थित कोमना के वैष्णो देवी मंदिर पहुंचे। वहां उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर का अवलोकन किया। मंदिर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का स्थानीय श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनके साथ पत्नी कौशल्या साय और विधायक पुरंदर मिश्रा भी मौजूद थे।

कॉन्स्टेबल भर्ती: खाली पद वेटिंग लिस्ट से भरने की योजना, हाईकोर्ट ने जॉइनिंग के बाद पद भरने का दिया निर्देश

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ में कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़े विवाद पर हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू ने स्पष्ट किया है कि सूची जारी होने के बाद भी अगर पद खाली रहते हैं, तो उन्हें वेटिंग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) के अभ्यर्थियों से भरा जाएगा। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सबसे पहले चयन सूची में शामिल उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए और उनकी जॉइनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके बाद कुछ पद खाली रह जाते हैं तो उन पदों को वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को मौका देकर भरा जाए। बता दें कि एक ही कैंडिडेट का कई-जिलों में सिलेक्शन हो गया था। दरअसल कॉन्स्टेबल भर्ती के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग दर्जनों याचिकाएं दायर की गई है, जिसमें बताया गया कि पुलिस विभाग में करीब 5967 पदों के लिए भर्ती निकली थी। एक से अधिक जिलों में आवेदन की अनुमति होने के कारण कई अभ्यर्थी कई जगह चयनित हो गए। इस वजह से कई योग्य उम्मीदवार मेरिट सूची से बाहर रह गए। विभाग ने जिलेवार वेटिंग लिस्ट जारी नहीं किया है, जिसके कारण पद खाली होने के बाद भी वेटिंग लिस्ट जारी नहीं होने के कारण उम्मीदवारों को चयन से वंचित होना पड़ेगा। चयन सूची में गड़बड़ी के आरोप याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि कई जिलों में चयन सूची में भी गड़बड़ी की गई है। अभ्यर्थियों से कम नंबर पाने वालों का नाम चयन सूची में शामिल है, जबकि अधिक नंबर पाने वालों का नाम कट गया है। उनका यह भी तर्क था कि एक ही अभ्यर्थी के कई जिलों की चयन सूची में शामिल होने के कारण वास्तविक रूप से बड़ी संख्या में पद खाली रह जाएंगे, जबकि विभाग ने सभी पद भरने का दावा किया था। राज्य का जवाब- जॉइनिंग के बाद ही स्पष्ट होंगे रिक्त पद दूसरी तरफ राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि चयन सूची मैरिट के आधार पर जिला स्तर पर तैयार की गई है और एक से अधिक जिलों में चयन होना विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक स्थिति तब सामने आएगी, जब चयनित अभ्यर्थी किसी एक स्थान पर ज्वॉइन करेंगे। ऐसे में जिन अन्य स्थानों पर वे चयनित हैं, वहां पद स्वतः थाली हो जाएंगे। हाईकोर्ट बोला- वेटिंग लिस्ट से भरे जाएं खाली पद हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद कहा कि यह स्पष्ट है कि केवल चयन सूची से सभी पद नहीं भर पाएंगे। ऐसे में राज्य शासन को आदेश दिया जाता है कि पहले चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और जॉइनिंग की प्रक्रिया पूरी करे। इसके बाद जो पद खाली रह जाते हैं, उन्हें नियमानुसार प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों से भरा जाए। इस आदेश के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में गर्मी का कहर, अगले 3 दिन में पारा 2 से 4 डिग्री तक चढ़ेगा, राजनांदगांव सबसे गर्म

रायपुर  छत्तीसगढ़ में मौसम अब धीरे-धीरे गर्मी की ओर बढ़ता नजर आ रहा है. प्रदेश में फिलहाल मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और अधिकतम तापमान सामान्य से 2 से 3 डिग्री सेल्सियस कम दर्ज किया गया है. हालांकि मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन दिनों में तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी का असर महसूस होने लगेगा. इसके बाद कुछ दिनों तक तापमान में विशेष बदलाव नहीं होगा और मौसम शुष्क ही बना रहेगा. अभी कैसा है प्रदेश का मौसम प्रदेश में वर्तमान में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है और कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है. अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा कम होने के कारण दिन में हल्की राहत महसूस हो रही है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें बदलाव होगा. तापमान में होगी बढ़ोतरी मौसम विभाग के मुताबिक अगले तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है. इसके बाद तापमान स्थिर रहेगा और किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं. कहां कितना तापमान दर्ज हुआ प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 37.5°C राजनांदगांव में दर्ज किया गया, जबकि सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.0°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया. इससे साफ है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तापमान में अंतर बना हुआ है. वर्षा और चेतावनी की स्थिति प्रदेश में कहीं भी वर्षा दर्ज नहीं की गई है और मौसम विभाग ने किसी प्रकार की चेतावनी भी जारी नहीं की है. आने वाले दिनों में भी मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है. रायपुर का मौसम अपडेट राजधानी रायपुर में 24 मार्च को आकाश मुख्यतः साफ रहने की संभावना है. यहां अधिकतम तापमान 36°C और न्यूनतम तापमान 21°C के आसपास रहने का अनुमान है, जिससे दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक महसूस हो सकती है. कोंडागांव में देखने को मिला शिमला-मनाली जैसा नजारा इससे पहले शनिवार को कोंडागांव जिले में शिमला-मनाली जैसा नजारा दिखा। जिले में जमकर ओले गिरे। बड़ेराजपुर विकासखंड के टेवंसा, छोटेराजपुर, पाडोकी और बड़ेराजपुर गांवों के खेतों में बर्फ की मोटी चादर बिछ गई। ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान हुआ है। वहीं, जशपुर जिले के दुलदुला में बिजली गिरने से मजदूर सनऊ राम (51) की मौत हो गई, जबकि 25 वर्षीय रेखा घायल हो गईं। दूसरी ओर रायगढ़ में बिलासपुर जलाशय का गेट टूटने से पानी NH और पास के खेतों में फैल गया।

बस्तर में हिंसा के अंत का संकेत, नक्सली पापाराव और 17 साथी करेंगे सरेंडर

जगदलपुर इंद्रावती के घने जंगलों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जो बस्तर के दशकों पुराने हिंसक अध्याय के अंत का संकेत देती नजर आ रही है। लंबे समय से सक्रिय शीर्ष माओवादी कमांडर पापा राव के आत्मसमर्पण की तैयारी ने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क कर दिया है। बताया जा रहा है कि पापा राव अपने 17 साथियों के साथ हथियारों सहित समर्पण के लिए जंगल से बाहर निकल चुका है। उसे सुरक्षित लाने के लिए सुरक्षा बलों की विशेष टीम इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान के भीतर रवाना हो चुकी है। यदि यह आत्मसमर्पण सफल होता है, तो इसे बस्तर में माओवादी हिंसा के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जा रहा है। पापाराव उर्फ मंगू (56) ये छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में DKSZCM मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी। देवा के सरेंडर करने के बाद अब पापाराव ही एक मात्र ऐसा नक्सली बचा है जो फाइटर है। बाकी बचे हुए अन्य टॉप कैडर्स के नक्सली उम्र दराज हो चुके हैं। पापाराव के सरेंडर करते ही बस्तर से माओवाद का सफाया तय माना जा रहा है। पापा राव का समर्पण     करीब 25 लाख रुपये के इनामी पापा राव वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का अहम सदस्य रहा है। लंबे समय तक बस्तर में माओवादी गतिविधियों की कमान उसके हाथों में रही।     ऐसे में उसका आत्मसमर्पण केवल एक व्यक्ति का सरेंडर नहीं, बल्कि पूरे संगठनात्मक ढांचे के कमजोर पड़ने का प्रतीक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इससे शेष कैडर का मनोबल भी टूटेगा और वे भी आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित होंगे। साल भर में ऐसे बिखरा संगठन पिछले साल ही नक्सल संगठन के सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन का सचिव बसवाराजू, गणेश उइके समेत 17 बड़े कैडर्स का एनकाउंटर किया गया। भूपति, रूपेश, रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं। जबकि मिशिर बेसरा और गणपति ये 2 बड़े टॉप के नक्सली बचे हैं, जो वर्तमान में संगठन चला रहे हैं। बस्तर में बटालियन नंबर 1 का कमांडर देवा ने भी हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है। अब केवल पापाराव ही एक ऐसा नक्सली बचा है जो लड़ाकू है। अगर इसका एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तारी और सरेंडर होता है तो निश्चित ही नक्सल संगठन खत्म है। लगातार ऑपरेशन से टूटा नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों ने माओवादी नेटवर्क पर लगातार सर्जिकल और रणनीतिक हमले किए हैं। बसव राजू, गुडसा उसेंडी, कोसा, हिड़मा और सुधाकर जैसे बड़े कमांडरों के मारे जाने से संगठन की रीढ़ पहले ही टूट चुकी थी। इसके अलावा भूपति, देवजी, मल्लाजी रेड्डी, रुपेश और सुजाता समेत करीब 2700 माओवादियों के आत्मसमर्पण ने संगठन को बिखेर दिया है। अब बस्तर में करीब 50 माओवादी ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जिनमें कोई बड़ा नेतृत्वकर्ता नहीं बचा है। विकास ने बदली तस्वीर माओवाद के कमजोर होने का सबसे बड़ा कारण ग्रामीणों का घटता समर्थन भी रहा है। जिन क्षेत्रों में कभी ‘जनताना सरकार’ का प्रभाव था, वहां अब सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षा कैंप स्थापित हो चुके हैं। सरकार की पुनर्वास नीति और रोजगार के अवसरों ने युवाओं को मुख्यधारा की ओर आकर्षित किया है। इससे माओवादियों का सामाजिक आधार लगभग समाप्त हो गया है। झारखंड में बची अंतिम चुनौती हालांकि बस्तर, ओडिशा और तेलंगाना में माओवादी प्रभाव काफी हद तक खत्म हो चुका है, लेकिन झारखंड अब भी एक चुनौती बना हुआ है। वहां पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा अपने 70-80 साथियों के साथ सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसकी लोकेशन का पता लगाया जा चुका है, लेकिन उसने अपने ठिकानों के आसपास बारूदी सुरंगों का जाल बिछा रखा है, जिससे ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लक्ष्य के करीब सुरक्षा एजेंसियां केंद्रीय गृहमंत्री द्वारा 31 मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म करने के लक्ष्य के बीच तेजी से बदले हालात सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि माने जा रहे हैं। पापा राव का संभावित आत्मसमर्पण इस लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है। यदि झारखंड में भी अंतिम अभियान सफल रहता है, तो देश माओवादी हिंसा के लंबे दौर से पूरी तरह मुक्त हो सकता है। जिनके सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म होगा एंटी नक्सल ऑपरेशन 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति उर्फ रमन्ना उर्फ राजन्ना, 3.5 करोड़ का इनाम 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सर्निमल उर्फ सुनील, 1.30 करोड़ का इनाम 1. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति, 3.6 करोड़ का इनाम गणपति भाकपा (माओवादी) का पूर्व महासचिव था। 1992 में वो पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) का महासचिव बना और 2004 में CPI (माओवादी) बनने के बाद 2018 तक इसकी कमान संभाली। पोलित ब्यूरो मेंबर और सेंट्रल कमेटी में एडवाइजर है। 1992 से लेकर 2018 तक जितने नक्सली हमले हुए, सब इसी के नेतृत्व में हुए। गणपति पर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने 1-1 करोड़ का इनाम रखा है। जबकि आंध्र ने 25 लाख, झारखंड ने 12 लाख और NIA ने 15 लाख का इनाम रखा है। ओडिशा, प. बंगाल और तेलंगाना ने भी गणपति पर इनाम की घोषणा कर रखी है। 2003 में आंध्र प्रदेश के CM रहे चंद्रबाबू नायडू पर हमले का आइडिया और स्ट्रैटजी दोनों गणपति की थी। नक्सलियों के संगठन में मौजूद हमारे सोर्स के मुताबिक, नायडू पर हमले का आइडिया पोलित ब्यूरो के कई मेंबर्स को जोखिम भरा लगा था। कई लोग इसके सपोर्ट में भी नहीं थे। हालांकि गणपति इससे पीछे हटने को राजी नहीं हुआ। नायडू पर हमले ने केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक को बड़ा झटका दिया था। ये सिर्फ अकेली घटना नहीं है, जो गणपति के नेतृत्व में अंजाम दी गई हो। ऐसी 10 बड़ी घटनाएं हैं, गणपति जिनका मास्टरमाइंड रहा। 2. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर, 1.30 करोड़ का इनाम बेसरा झारखंड … Read more

नई गाइडलाइन के तहत प्रदेश में LPG गैस सिलेंडर वितरण, कोटा निर्धारित

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने गैस सिलेंडरों के वितरण का कोटा तय कर दिया है। घरेलू उपभोक्ताओं को पहले की तरह 100 प्रतिशत आपूर्ति मिलती रहेगी। वहीं, शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्रों को संबंधित जिले में उपलब्ध कमर्शियल गैस के कुल स्टॉक में से 30 प्रतिशत आपूर्ति देने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का मानना है कि ऐसे में दोनों क्षेत्रों की जरूरत पूरी हो सकेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप सचिव बीके चंदेल ने सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी किए। इससे पहले विभागीय मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी ने गैस व पेट्रोल-डीजल आपूर्ति की समीक्षा की। सरकार ने कहा कि जमाखोरी या कालाबाजारी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। तय कर दिया गया सबका कोटा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, सुरक्षा एजेंसियां, पुलिस, एयरपोर्ट, रेलवे, दीनदयाल रसोई, जेल, सामाजिक न्याय विभाग और महिला-बाल विकास को 35 प्रतिशत सिलेंडर मिलेगा। होटल क्षेत्र को 9 प्रतिशत, रेस्टोरेंट व केटरिंग को भी समान आपूर्ति तथा ढाबा व स्ट्रीट फूड वेंडरों को 7 प्रतिशत आपूर्ति होगी। उद्योगों में फार्मास्यूटिकल, फूड प्रोसेसिंग, पोल्ट्री फीड व सीड प्रोसेसिंग क्षेत्र को 5 प्रतिशत और अन्य उद्योगों को भी इतनी ही मात्रा में सिलेंडर दिए जाएंगे। किया जाएगा निरिक्षण सरकार ने स्पष्ट किया है कि जमाखोरी, अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण किया जाएगा। आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित कानूनों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार ने संस्थानों और प्रतिष्ठानों को अस्थायी रूप से वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया है, ताकि गैस की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखा जा सके। यह नई व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी, जिससे आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देते हुए आम आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखा जा सके। कमर्शियल गैस सिलिंडरों की दिक्कत राजधानी में अभी भी कमर्शियल गैस सिलिंडरों की किल्लत हो रही है। बीते दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी है। अब इसका सीधा असर होटल, रेस्तरां और छोटे ढाबा संचालकों पर पड़ रहा है। कारोबार चौपट होने की कगार पर पहुंच चुका है, जिससे व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है।

कोलंबिया का मिलिट्री प्लेन पेरू बॉर्डर के पास क्रैश, 66 सैनिकों की जान चली गई

बोगोटा कोलंबिया के दक्षिणी अमेजन इलाके में बीते दिन सोमवार को सेना का एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इसमें सवार 125 लोगों में से कम से कम 66 लोगों की मौत हो गई है। यह घटना कोलंबियाई वायु सेना के हाल के इतिहास की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक थी। दुर्घटना के मलबे और राख के बीच अभी भी लगभग दो दर्जन लोग लापता हैं। पुटुमायो विभाग के गवर्नर जॉन गैब्रियल मोलिना ने स्थानीय समाचार आउटलेट को बताया कि 66 लोग मारे गए, कई लोग घायल हुए और 21 लोग लापता हैं। कब और कैसे हुई दुर्घटना? रक्षा मंत्री पेड्रो सांचेज ने एक्स पर बताया कि यह दुर्घटना तब हुई, जब लॉकहीड मार्टिन द्वारा निर्मित हरक्यूलिस C-130 परिवहन विमान पेरू की सीमा पर स्थित प्यूर्टो लेगुइजामो से उड़ान भर रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि मरने वालों और घायल लोगों के आंकड़े बदल भी सकते हैं। फायरफाइटर एडुआर्डो सैन जुआन कैलेजास ने बताया कि माना जा रहा है कि जब विमान उड़ान भर रहा था तो रनवे के आखिर के पास उसे किसी चीज से टक्कर लगी। इसके बाद जब विमान नीचे गिर रहा था तो उसका एक पंख एक पेड़ से टकरा गया। उन्होंने आगे बताया कि इस दुर्घटना के कारण विमान में आग लग गई और उसमें रखे कुछ विस्फोटक उपकरण फट गए। घटना का वीडियो वायरल इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दूरदराज के इस इलाके के रहने वाले लोग सबसे पहले बचाव कार्य के लिए आगे आते हुए और कुछ लोग अपनी मोटरसाइकिलों पर घायल सैनिकों को बिठाकर कच्ची सड़क पर तेजी से दौड़ते हुए देखे जा सकते हैं। बाद में सेना के वाहन भी वहां पहुंचे, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटनास्थल तक पहुंचना काफी मुश्किल था और इसकी वजह से बचाव कार्यों में बाधा आ रही थी।

चुनाव न कराने पर NSUI सख्त, चरणबद्ध आंदोलन के साथ विश्वविद्यालयों का घेराव करेगा

रायपुर छात्रसंघ चुनाव बहाल कराने की मांग को लेकर नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। राजधानी रायपुर स्थित राजीव भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में NSUI पदाधिकारियों ने कहा, लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव नहीं होने से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर संगठन अब प्रदेशभर में आंदोलन करेगा। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष नीरज पांडेय ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत 27 मार्च से होगी। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद 6 अप्रैल को प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों का एक साथ घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इन मुद्दों को लेकर होगा आंदोलन     छात्रसंघ चुनाव की बहाली     छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का संरक्षण     बढ़ती फीस और छात्रवृत्ति में देरी     शिक्षकों की कमी     परीक्षा और परिणाम में अनियमितता     प्लेसमेंट, हॉस्टल, परिवहन और डिजिटल संसाधनों की समस्याएं     प्रशासन की उदासीनता NSUI का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

पवैया बने राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष, डिप्टी CM, मंत्रियों और दिग्गजों की फौज रही मौजूद

भोपाल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिग्गज नेता जयभान सिंह पवैया ने आज सोमवार पांचवे नवरात्र को मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष के तौर पर पदभार ग्रहण कर लिया है। पवैया ने वल्लभ भवन में पूरे विधि विधान से पूजन करके मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाला है। जयभान पवैया के पदभार ग्रहण करने के मौके पर  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा,  राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री प्रहलाद पटेल, विजय शाह, संपतिया उइके, नारायण सिंह कुशवाह के साथ ही विश्वास सारंग मौजूद रहे। इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पराशर के साथ ही त भाजपा पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। पवैया ने पदभार के बाद वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री यादव से की मुलाकात वहीं पदभार ग्रहण करने के बाद पवैया ने वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात की। इसके बाद  पवैया ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा है कि अपनी जिम्मेवारी को वो पूरी क्षमता के साथ निभाएंगे ।पवैया ने कहा कि उन्होंने  आयोग की कार्यप्रणाली को समझने के बाद दौरा करने का प्लान बनाया है। राज्य के करों का वितरण नगरीय और पंचायत निकायों के बीच अच्छे और सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए इस बाबत काम किया जाएगा।  राज्य सरकार ने 6 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष के रूप में जयभान सिंह पवैया Jaibhan Singh Pavaiya की नियुक्ति के साथ सदस्य सचिव की नियुक्तियों की भी घोषणा की। आयोग में पूर्व आईएएस केके सिंह और विधानसभा के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी वीरेंद्र कुमार को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। वीरेंद्र कुमार राज्य वित्त सेवा के अधिकारी रह चुके हैं। मप्र वित्त विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी का दायित्व भी निभा चुके हैं