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एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा, 31 मार्च से जगदलपुर-रायपुर के बीच उड़ान सेवा शुरू

जगदलपुर. लंबे समय से बंद जगदलपुर-रायपुर सेक्टर पर एलायंस एवर ने फ्लाइट शुरू करने की घोषणा कर दी है। 29 मार्च से शुरू हो रहे समर शेड्यूल में हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर सेक्टर पर 31 मार्च से फ्लाइट शुरू होगी। बीते लंबे समय से इस सेक्टर पर विमान सेवा की मांग लोग कर रहे थे। इधर जगदलपुर-जबलपुर-दिल्ली फ्लाइट को एलायंस एयर ने बंद कर दिया है। सोमवार को आखिरी बार दिल्ली के लिए एलायंस एयर के विमान ने जगदलपुर से उड़ान भरी। हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर सेक्टर में में फ्लाइट हैदराबाद-जगदलपुर, जगदलपुर-रायपुर, रायपुर-रीवा, रीवा-रायपुर, रायपुर-जगदलपुर व जगदलपुर-हैदराबाद के बीच चलेगी। हैदराबाद से एलायंस एयर की फ्लाइट सुबह 7.50 बजे टेकऑफ करेंगी, जो 9.10 बजे जगदलपुर में लैंड होगी। जगदलपुर से 9.35 बजे रायपुर के लिए टेकऑफ करने के बाद विमान 10.30 बजे रायपुर में लैंड होगी। वापसी में रायपुर से दोपहर 2.25 बजे उड़ान भरकर विमान 3.20 बजे जगदलपुर और यहां से 3.45 बजे टेकऑफ कर शाम 5.05 बजे हैदराबाद जाएगी। बिलासपुर से जबलपुर और जगदलपुर की उड़ान बंद बिलासपुर। आगामी 28 मार्च से लागू होने वाले नए समर शेड्यूल में जबलपुर और जगदलपुर हवाई सेवा को बंद कर दिया गया है. प्रयागराज के लिए चलने वाली फ्लाइट अब सप्ताह में सिर्फ एक दिन तक सीमित कर दी गई है. वहीं कोलकाता और दिल्ली की विमान व्हाया अंबिकापुर होकर चलेगी.समर शेड्यूल में पहले से सप्ताह में दो दिन चलने वाली बिलासपुर – प्रयागराज फ्लाइट को घटाकर सिर्फ एक दिन कर दिया गया है. प्रयागराज रूट धार्मिक, शैक्षणिक और न्यायिक कारणों से महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन इसे सीमित कर देना यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. वहीं एलाइंस एयर ने जबलपुर की हवाई सेवा को बंद करने का निर्णय लिया है. साथ ही बिलासपुर जगदलपुर हवाई सेवा को भी बंद करने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा कोलकाता – बिलासपुर की सीधी हवाई सेवा को व्हाया अंबिकापुर चलाने का निर्णय लिया है . इसी तरह सप्ताह में दो दिन दिल्ली की फ्लाइट व्हाया अंबिकापुर जाएगी. जिससे उक्त फ्लाइट में यात्रियों की संख्या कम होना तय है. हैदराबाद फ्लाइट एक बार फिर से लटकी हैदराबाद- बिलासपुर-हैदराबाद फ्लाइट चलाने की मांग का समर्थन केन्द्रीय विमानन मंत्री किंजरापु राम मोहन नायडू ने दिल्ली में आंदोलन करने पहुंचे हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति को हैदराबाद उड़ान शुरू कराने का आश्वासन दिया था. लेकिन एक बार फिर से हैदराबाद विमान लटक गया है. उसका ट्रायल भी डेढ़ साल पहले हो चुका है. जो काफी सफल रहा था. पांच साल से चल रही जबलपुर फ्लाइट बंद एलाइंस एयर कंपनी ने फिर से पर्याप्त यात्रियों के साथ चलने वाली बिलासपुर-जबलपुर फ्लाइट को बंद किया गया है. उसको बंद करने का कारण नहीं बताया जा रहा है. इसके पहले भोपाल और इंदौर फ्लाइट भी चलाने के कुछ समय बाद बंद कर दी गई थी.

नवजातों की सुरक्षा पर फोकस: झारखंड में 60 से ज्यादा NBSU खुलेंगे, स्वास्थ्य विभाग का बड़ा कदम

मेदिनी नगर/पलामू. झारखंड में शिशु मृत्यु दर अब भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर 1000 जीवित जन्म पर करीब 25 नवजातों की मौत हो रही है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यभर के 60 से अधिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने का फैसला किया है। इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में परेशानी जैसे कारणों से अधिकांश नवजातों की मौत जीवन के पहले सप्ताह में ही हो जाती है। ऐसे में यदि जन्म के तुरंत बाद ही विशेष निगरानी और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो जाए, तो बड़ी संख्या में बच्चों की जान बचाई जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए एनबीएसयू को अस्पतालों के मैटरनिटी वार्ड या लेबर रूम के पास स्थापित किया जाएगा, ताकि आपात स्थिति में नवजात को बिना समय गंवाए तत्काल उपचार मिल सके। इससे गंभीर स्थिति वाले बच्चों के इलाज में देरी नहीं होगी और रेफरल पर निर्भरता भी कम होगी। एमएमसीएच में रोज पहुंचते हैं 10 गंभीर नवजात मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में प्रतिदिन औसतन 10 गंभीर नवजात उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्थित एसएनसीयू में पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, लेकिन कई बार मरीजों के देर से पहुंचने के कारण डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद नवजातों को बचाना मुश्किल हो जाता है। यहां आने वाले अधिकांश मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से रेफर होकर आते हैं। आधुनिक उपकरणों से लैस होंगी इकाईयां प्रस्तावित एनबीएसयू को रेडिएंट वार्मर, सक्शन मशीन, फोटोथेरेपी यूनिट और स्पॉट लाइट जैसे आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। इसके साथ ही संक्रमण नियंत्रण के मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा। बायो-मेडिकल कचरे के सुरक्षित निपटान की विशेष व्यवस्था भी होगी, जिससे संक्रमण का खतरा कम किया जा सके। पलामू जिले में फिलहाल हुसैनाबाद और छत्तरपुर अनुमंडलीय अस्पतालों में एनबीएसयू संचालित है, लेकिन जिले के 10 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन केंद्रों में एनबीएसयू कब और कहां स्थापित होंगे, इसकी स्पष्ट घोषणा अभी तक नहीं हुई है। गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा राज्य सरकार ने 60 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (एनबीएसयू) स्थापित करने की घोषणा की है, लेकिन किन केंद्रों में यह सुविधा शुरू होगी, इसका स्पष्ट विवरण अभी नहीं दिया गया है। हालांकि, इस पहल से गंभीर नवजातों को समय पर इलाज मिल सकेगा और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। – डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, पलामू

शाम ढलते ही न करें ये 5 गलतियां, धन की देवी हो सकती हैं अप्रसन्न

दिनभर की भागदौड़ के बाद जब सूरज ढलता है, तो वह समय प्रकृति के शांत होने और घर में सकारात्मक ऊर्जा के आगमन का होता है। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में शाम के समय को 'संध्या काल' कहा जाता है, जो देवताओं की आराधना का समय है। अक्सर हमारे घर के बड़े-बूढ़े हमें शाम के समय सोने या झाड़ू लगाने से टोकते हैं। क्या यह सिर्फ अंधविश्वास है? या फिर इसके पीछे गहरे वास्तु और वैज्ञानिक कारण छिपे हुए हैं। 1. घर में झाड़ू-पोछा करना वास्तु के अनुसार, शाम के समय घर की सफाई करना यानी मां लक्ष्मी को घर से बाहर निकालना है। माना जाता है कि सूर्यास्त के समय मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। अगर आप उस समय झाड़ू लगाते हैं, तो आप घर की सकारात्मक ऊर्जा और बरकत को बाहर धकेल देते हैं। 2. पैसों का लेन-देन शाम के समय किसी को उधार देना या कर्ज लेना, दोनों ही शुभ नहीं माने जाते। ऐसा कहा जाता है कि सूर्यास्त के बाद धन का आदान-प्रदान करने से लक्ष्मी दूसरे के पास चली जाती है और आपके घर में आर्थिक तंगी आने लगती है। 3. पेड़-पौधों को छूना या पानी देना पौधों में भी जीवन होता है और सूर्यास्त के बाद वे सो जाते हैं। शाम को उन्हें छूना, उनके पत्ते तोड़ना या उन्हें पानी देना उन्हें कष्ट पहुंचाने जैसा है, जिससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है। 4. दही या सफेद चीजों का दान वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्यास्त के बाद दही, दूध या नमक जैसी सफेद चीजों का दान नहीं करना चाहिए। सफेद चीजों का संबंध शुक्र और चंद्रमा से होता है। शाम को इनका दान करने से घर की सुख-समृद्धि कम होने लगती है। 5. शाम के समय सोना बीमार या बुजुर्गों को छोड़कर, स्वस्थ व्यक्ति का शाम के समय सोना आलस्य और दरिद्रता को आमंत्रण देता है। यह समय ध्यान और पूजा-पाठ का होता है, सोने का नहीं।

कम्युनिकेशन क्राइसिस: जालंधर के कई क्षेत्रों में इंटरनेट-फोन सेवा ठप, लोगों की बढ़ीं मुश्किलें

जालंधर. जालंधर में आज कई इलाकों में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद हो गई हैं। मिली जानकारी के अनुसार, नागरा रोड पर मौजूद भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) एक्सचेंज में भीषण आग लग गई। शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। आग इतनी तेज़ी से फैली कि धुएं और लपटों ने पूरे एक्सचेंज को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। शहर के बड़े हिस्से में कम्युनिकेशन सर्विस बुरी तरह प्रभावित हुईं। आग लगने की वजह से मकसूदां, लिधरा, विधिपुर और नूसी समेत कई इलाकों में इंटरनेट, लीज्ड लाइन और टेलीफोन सर्विस पूरी तरह से बंद कर दी गईं, जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। आग लगने की वजह से शहर के बड़े हिस्से में कम्युनिकेशन सर्विस बुरी तरह प्रभावित हुईं। मकसूदां, लिधरा, विधिपुर और नूसी समेत कई इलाकों में इंटरनेट, लीज्ड लाइन और टेलीफोन सर्विस पूरी तरह से बंद कर दी गईं। कई तरह की रुकावटें आईं, जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। घटना की जानकारी मिलते ही, SDO मनीष कुमार, JTO चमकौर और प्रीत मोगल अपनी टीमों के साथ मौके पर पहुंचे और तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। काफी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया। अधिकारियों के मुताबिक, आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।

बर्ड फ्लू से हड़कंप: बिलासपुर में हजारों मुर्गियों की मौत, प्रशासन ने 10 किमी क्षेत्र में जारी किया अलर्ट

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के कोनी स्थित सरकारी पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू के प्रकोप से हड़कंप मच गया है। बीते 19 से 24 मार्च के बीच यहां करीब 4,400 मुर्गियों की मौत हो गई। फार्म में कुल 5,037 मुर्गियां मौजूद थीं। अब प्रशासन ने फार्म के एक किलोमीटर क्षेत्र में अलर्ट जारी किया है। 10 किलोमीटर के दायरे में अलर्ट इस मामले की जानकारी देते हुए बिलासपुर के पशु चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. जीएस तंवर ने बताया कि मृत पक्षियों के सैंपल भोपाल और पुणे की लैब में भेजे गए थे, जिनमें से भोपाल लैब ने एवियन इन्फ्लुएंजा यानी बर्ड फ्लू की पुष्टि कर दी है। संक्रमण की पुष्टि के बाद जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से रोकथाम और नियंत्रण के निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने फार्म के एक किलोमीटर के दायरे को ‘संक्रमित क्षेत्र’ और 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया है। सीलिंग भी होगी प्रोटोकॉल के तहत संक्रमित क्षेत्र में सभी पोल्ट्री पक्षियों, अंडों और चारे को नष्ट किया जाएगा और इनके आवागमन पर पूरी तरह रोक रहेगी। प्रभावित पोल्ट्री मालिकों को पशुपालन विभाग की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। कूलिंग (पक्षियों को मारने) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फार्म को सील कर दिया जाएगा। स्थिति को संभालने के लिए टीम गठित स्थिति को संभालने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमें गठित की गई हैं, जो कूलिंग, निस्तारण, निगरानी और सैनिटाइजेशन का काम करेंगी। साथ ही इलाके में चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे और पोल्ट्री की बिक्री के साथ उनकी आवाजाही पर भी सख्त नजर रखी जाएगी। कर्मचारियों की भी हो रही जांच पोल्ट्री फार्म के कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच भी की जा रही है। किसी में लक्षण मिलने पर जांच और जरूरत पड़ने पर एंटीवायरल दवा दी जाएगी। फिलहाल इंसानों में संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। जिला प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और सतर्क रहते हुए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।

CM मोहन यादव का दावा: MP नक्सलमुक्त, अब निवेश और विकास में सबसे आगे होगा राज्य

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य आज सुशासन, विकास, निवेश, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण के समन्वित मॉडल के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान स्थापित कर रहा है। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जहां एयर एंबुलेंस सेवा प्रारंभ की गई है, जिससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को नई गति मिली है। राज्य “चीता स्टेट” के रूप में भी पहचान बना चुका है और वर्तमान में चीतों की संख्या 53 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने में सफलता मिली है, जो शांति और विकास के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को नई दिल्ली में एक निजी चैनल द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे ।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ- 2028 का आयोजन केवल प्रदेश ही नहीं पूरे देश के लिए गौरव का विषय है, जिसमें 30 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की सुविधा लिए क्षिप्रा नदी के किनारे 30 किलोमीटर तक नवीन घाटों का निर्माण किया जा रहा है। उज्जैन में महाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद धार्मिक पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए नवीन और स्थाई रूप के कई नवाचार और निर्माण सिंहस्थ के दृष्टिगत उज्जैन में किए जा रहे हैं  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य की न्याय व्यवस्था, सुशासन को उल्लेखित करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य वीरता, न्यायप्रियता और उदारता की कहानियां जैसे बेताल पच्चीसी और 32 पुतलियां आज भी जनमानस में लोकप्रिय हैं। राज्य सरकार सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन के सिद्धांत से प्रेरणा लेकर कार्य कर रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा  सुशासन के लिए पुरस्कार भी प्रदान किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में त्वरित न्याय के उनके सिद्धांतों को शासन में लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “न्याय में देरी, न्याय की आत्मा के साथ अन्याय है” और सुशासन के लिए कठोर निर्णय लेना आवश्यक होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में पारदर्शिता और जवाबदेहिता को प्राथमिकता दी जा रही है तथा अच्छे कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।  म.प्र. को इन्वेस्टमेंट हब बनाने लगातार किये जा रहे हैं प्रयास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 को “उद्योग और रोजगार वर्ष” के रूप में मनाया गया। राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने नवीन नीतियां लागू की। उन्होंने कहा कि निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए डीबीटी से उद्योगपतियों को सब्सिडी हस्तांतरित की जा रही है। मध्यप्रदेश को इन्वेस्टमेंट हब बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उद्योग एवं रोजगार में नवाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्राप्त 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों में से 30 प्रतिशत से अधिक धरातल पर आ चुके हैं। म.प्र. के धार जिले में देश का सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क स्थापित किया जा रहा है और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सबसे अधिक निवेश मध्यप्रदेश में आ रहा है। नारी सशक्तिकरण की दिशा में “लाड़ली बहना योजना” का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब तक 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। राज्य सरकार द्वारा प्रतिमाह 1 करोड़ 25 लाख से अधिक बहनों को  1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। युवाओं के लिए रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नवीन उद्योग स्थापित करने पर को प्रति श्रमिक को 5000 रुपये तक की सहायता राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी। राज्य में बेरोजगारी दर अन्य राज्यों की तुलना में कम है। प्रदेश में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की जा रही हैं । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में नशे के कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। राज्य में 19 धार्मिक स्थलों पर शराब की बिक्री पर पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने कहा कि पशुपालन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है तथा 5 लाख से अधिक गौमाताओं के संरक्षण की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को मिड-डे मील में दूध देने की योजना लागू की गई है, जिससे बच्चों को पोषणयुक्त आहार मिल सके। उन्होंने कहा कि नदी जोड़ो परियोजना के तहत मध्यप्रदेश में पार्वती लिंक परियोजना (राजस्थान के साथ) और बेतवा लिंक परियोजना (उत्तर प्रदेश के साथ) पर कार्य किया जा रहा है। इस योजना में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही है, जिससे सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सकारात्मक आलोचना लोकतंत्र की आधारशिला है और राज्य सरकार सुशासन के विजन से प्रेरणा लेकर हर क्षेत्र में विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान –CM योगी

लखनऊ में आयोजित गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ताओं के सम्मान समारोह में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण अभियान – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि मानव का सेवा भाव ही उसे सभी जीवों में ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ कृति बनाता है उपचार से भी अधिक महत्वपूर्ण बचाव और जागरूकता है, इस सेवा यात्रा ने स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है – सीएम योगी मुख्यमंत्री ने मातृ-शिशु मृत्यु दर नियंत्रण के बारे में जागरूकता फैलाने को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी अपने कर्तव्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है – सीएम योगी आदित्यनाथ लखनऊ,  गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान बताते हुए इसकी सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के उपेक्षित और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को राजधानी में गुरु गोरखनाथ स्वास्थ्य सेवा यात्रा के कार्यकर्ता सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (एनएमओ) के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने 2019 से इस सेवा यात्रा को निरंतर विस्तार देते हुए आज इसे एक बड़े जन-आंदोलन का रूप देने की दिशा में कार्य किया है। यह यात्रा विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की नेपाल सीमा से सटे सात जिलों महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में संचालित हो रही है, जहां जनजातीय समुदायों और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी रही है। लगभग 550 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा के इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे स्वयंसेवक समर्पण के साथ निभा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मानव के सेवा भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि “प्राणिनामार्थ नाशनम्” का भाव यह है कि मनुष्य अन्य जीवों की तुलना में ईश्वर की श्रेष्ठ कृति माना गया है, क्योंकि वही अन्य प्राणियों की सेवा कर सकता है और अपने सेवा भाव से दूसरों को प्रेरित भी कर सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि वे यही कार्य कर रहे हैं और उनकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से न केवल इलाज किया जा रहा है, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “उपचार से अधिक महत्वपूर्ण बचाव है” और जागरूकता के जरिए कई गंभीर बीमारियों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में त्वचा रोग, जलजनित बीमारियां, एनीमिया और तपेदिक जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं, जिनके प्रति जागरूकता बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने अभियान के कार्यकर्ताओं को मातृ-शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए जागरूकता फैलाने के कार्य को भी अभियान से जोड़ने की सलाह दी और कहा कि यदि मां और बच्चा स्वस्थ हैं, तो समाज भी स्वस्थ रहता है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2007-08 के नेपाल के खूनी संघर्ष का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले थारू समुदाय के लोगों ने किस प्रकार अपनी राष्ट्रभक्ति और आत्मसम्मान का परिचय देते हुए माओवादी प्रभाव से दूरी बनाए रखी और भारत की मुख्यधारा से जुड़े रहे। उन्होंने इस कार्य के लिए पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की भी सराहना की। साथ ही बताया कि वर्तमान में सरकार और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। सीएम योगी ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद राज्य सरकार ने वनटांगिया गांवों और अत्यंत पिछड़े समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के लिए व्यापक कार्य किए हैं। इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर वहां पक्के मकान, बिजली, पानी, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही पात्र लोगों को पेंशन, राशन कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल थारू ही नहीं, बल्कि प्रदेश की अन्य जनजातियों मुसहर, कोल, सहरिया, बुक्सा, चेरो आदि को भी विकास योजनाओं से जोड़ते हुए उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वह अगले दिन बहराइच के भरतापुर गांव का दौरा करेंगे, जहां थारू जनजातीय समुदाय के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाकर उन्हें जमीन, आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई समाज एकजुट होकर किसी कार्य में पूरी निष्ठा के साथ जुटता है, तो उसके परिणाम भी व्यापक और सकारात्मक होते हैं। इसी का परिणाम है कि स्वास्थ्य सेवा यात्रा का यह अभियान, जो वर्ष 2019 में छह जिलों में 27 हजार मरीजों तक सीमित था, अब सात जिलों में लगभग 2.66 लाख लोगों तक पहुंच चुका है। उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं की सेवा भावना और समर्पण का परिणाम बताते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से आह्वान किया कि वे अपने दायित्वों को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के जरूरतमंद वर्गों तक स्वयं पहुंचें। प्रत्येक चिकित्सक को महीने में कम से कम एक दिन ऐसे सेवा कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। इससे न केवल समाज को लाभ मिलेगा, बल्कि चिकित्सकों को भी विविध अनुभव प्राप्त होंगे। राष्ट्रभक्ति की परिभाषा स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदारी और समर्पण ही सच्ची राष्ट्रभक्ति है। चाहे छात्र हो, शिक्षक, सरकारी कर्मचारी या चिकित्सक हर व्यक्ति अपने कार्य को निष्ठा से निभाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। राज्य सरकार ने भी इसे विस्तार देते हुए अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है। मातृ मृत्यु … Read more

निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि

मिशन ज़ीरो पॉवर्टी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से यूपी में समावेशी विकास को मिली नई रफ्तार निराश्रित महिलाओं, वृद्ध और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में हुई पांच गुना की वृद्धि मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख, जबकि लखपति महिला योजना से 18.55 लाख महिलाएं हुईं लाभान्वित दिव्यांगजनों के लिए प्रदेश में चलाए जा रहे हैं 21 विशेष विद्यालय, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था अल्पसंख्यक समुदाय के कल्याण के उद्देश्य से प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम को किया गया पूरे राज्य में विस्तारित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समावेशी विकास के विजन को सफल बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में गरीब, वंचित और कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी योजनाएं लागू की हैं। इनमें योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” ने विशेष रूप से उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। जिसके सफल क्रियान्वयन से उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले 9 वर्षों में लगभग 6 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से मुक्ति दिलाने में सफलता हासिल की है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश की महिला, वृद्ध, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यक समुदाय के समुचित विकास को सुनिश्चित करने के कई सार्थक प्रयास किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश से गरीबी के समूल उन्मूलन के उद्देश्य से गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर, 2024 से “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” को लागू किया है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में गरीब परिवारों की पहचान कर उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। “मिशन ज़ीरो पॉवर्टी” के तहत प्रदेश में अब तक 13.57 लाख परिवारों को चिन्हित किया जा चुका है, जिन्हें 17 विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि इन परिवारों को ऐसे आर्थिक कार्यों से जोड़ा जाए, जिससे उन्हें दीर्घकाल में न्यूनतम ₹1.25 लाख की स्थायी वार्षिक आय प्राप्त हो सके। योगी सरकार ने प्रदेश में समावेशी विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। इस दिशा में प्रदेश की निराश्रित महिलाओं, वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को दी जाने वाली पेंशन राशि में पिछले 9 वर्षों में लगभग पांच गुना वृद्धि की जा चुकी है। योगी सरकार के पहले वर्ष 2017 में जहां मात्र ₹300 प्रतिमाह पेंशन दी जाती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर ₹1000 प्रतिमाह किया गया है, जिसे अप्रैल 2026 से ₹1500 प्रतिमाह किए जाने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में प्रदेश के 67.50 लाख से अधिक वृद्धजनों, 26.81 लाख निराश्रित महिलाएं और 11.57 लाख दिव्यांगजन नियमित पेंशन का लाभ उठा रहे हैं। इसके साथ ही कुष्ठ रोगियों की पेंशन भी ₹2500 से बढ़ाकर ₹3000 प्रतिमाह की जा चुकी है।  गरीबों के लिए आवास और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता रही है। पिछले नौ वर्षों में प्रदेश में 62 लाख से अधिक लोगों को मुफ्त आवास उपलब्ध कराया जा चुका है। वहीं 15 करोड़ गरीबों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न, एक किलोग्राम दाल या साबुत चना, एक किलोग्राम आयोडाइज्ड नमक और एक किलोग्राम रिफाइंड तेल का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है। अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति माह एक किलोग्राम चीनी भी दी जा रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ से अधिक परिवारों को निःशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए हैं और होली तथा दीपावली पर दो मुफ्त एलपीजी सिलेंडर भी वितरित किए जा रहे हैं। योगी सरकार की समावेशी विकास की योजनाओं ने आधी आबादी, महिलाओं के जीवन को भी बेहतर बनाने की कई सार्थक पहल की हैं। इस दिशा में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित हुईं हैं, जबकि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत 1.05 लाख बच्चों को सहायता मिली है। मिशन वात्सल्य के तहत एक लाख से अधिक बच्चों को उनके अभिभावकों से मिलाया गया है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताओं को लाभ मिला है। जबकि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से अब तक 5.20 लाख से अधिक बेटियों के विवाह संपन्न कराए जा चुके हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 9.43 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 1.06 करोड़ से अधिक महिलाओं को जोड़ा गया है। लखपति महिला योजना के तहत 35 लाख से अधिक महिलाओं की पहचान की गई है, जिनमें से 18.55 लाख महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं। स्वयं सहायता समूहों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत 2,682 उचित मूल्य की दुकानों का आवंटन किया गया है और 60 हजार समूहों की महिलाओं के माध्यम से ड्राई राशन का वितरण किया जा रहा है। यही नहीं, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। इसका परिणाम है कि 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी लगभग 13 प्रतिशत थी, वह बढ़कर करीब 36 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यही नहीं, प्रदेश में दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए भी पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण योजना के तहत वर्ष 2024-25 तक 3,84,543, जबकि वर्ष 2025-26 में 17,454 दिव्यांगजन लाभान्वित हुए हैं। वहीं 1,679 कॉक्लियर सर्जरी तथा 845 श्रवण बाधित बच्चों के कॉक्लियर इम्प्लांट जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। साथ ही प्रदेश में 21 विशेष विद्यालय संचालित हैं, जिनमें से 16 में स्मार्ट क्लास की व्यवस्था है। वहीं मानसिक रूप से दिव्यांगों के लिए लखनऊ में ममता स्कूल और आजमगढ़ में समेकित विशेष माध्यमिक विद्यालय का निर्माण किया गया है। सरकारी नौकरियों में 4 प्रतिशत और शैक्षणिक संस्थानों में 5 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। अन्य पिछड़ा वर्ग की युवतियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही विवाह अनुदान योजना के तहत वर्ष 2025-26 तक कुल 6,47,863 लाभार्थियों को ₹1,295.72 करोड़ की विवाह अनुदान राशि प्रदान की गई। जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना के माध्यम से 9 वर्षों में 1,01,139 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं ट्रांसजेंडर समुदाय के कल्याण के लिए योगी सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय के वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम की सुविधा उपलब्ध कराई है। साथ … Read more

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर कड़ा रुख, गृहमंत्री बोले—समयसीमा में होगा खात्मा

रायपुर. डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा जगदलपुर रवाना हुए, जहां उनके सामने कुख्यात नक्सली लीडर अपने साथियों के साथ सरेंडर करेंगे। रवानगी से पहले विजय शर्मा ने कहा, 8 एके 47 और अन्य हथियारों और साथियों के साथ आज पापाराव का पुनर्वास है। समाज के सामने आत्मसमर्पण होगा। मैं प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करूंगा। नियत समय 31 मार्च तक समूचे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म होगा। 30-35 जो छिटपुट नक्सली बचे हैं उनका भी पुर्नवास होगा। नक्सल लीडर गणपति अभी कहां है पता नहीं, मिशीर भी अभी बचा है। 31 मार्च की रात कोई हैप्पी न्यू ईयर नहीं है। 31 मार्च के बाद भी एहतियात तो बरतना ही होगा। सुप्रीम कोर्ट के धर्मांतरण को लेकर दिए आदेश पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया मगर यह प्रक्रिया पुरानी है। अगर कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई समाज में जाएगा तो उनको SC समाज के मिलने वाले बेनिफिट नहीं मिलेंगे इसलिए संस्कृति बहुत ही महत्वपूर्ण है। गांव-गांव में विभेद उत्पन्न हो गए हैं। माओवाद पहले वर्ग संघर्ष प्रारंभ करना चाहता था, मगर नहीं कर पाया, वहीं धर्मांतरण ने यह वर्ग संघर्ष खड़ा कर दिया। वर्ग संघर्ष के चलते आदिवासी समाज के बड़े तपके की मांग है कि डीलिस्टिंग होनी चाहिए। अब निर्णय क्या होता है संविधान के आधार पर यह न्यायालय बताएगा। अफीम मामले में बोले – व्यक्ति का नहीं कानून का होता है राज अफीम की खेती पर कलेक्टरों की रिपोर्ट को लेकर गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा, कबसे यह चल रहा है इसको निकालना है।व्यक्ति का राज नहीं होता, कानून का राज होता है। दुर्ग के बाद बलरामपुर और रायगढ़ में भी कार्रवाई हुई। सीएम साय ने कलेक्टरों को आदेश किया था कि जहां भी गड़बड़ी हुई हो वहां कार्रवाई करें। जल्द इसको इंटीग्रेटेड कर सोचा जाएगा कि यह कैसे हो रहा है। अगर कोई गैंग इसके पीछे है तो उसे नेस्तानाबूत किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की लताड़: जाति मुक्त समाज का वादा, अब हम खुद बांटने लगे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को जमकर लताड़ा। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि देश में हमें एक जाति मुक्त समाज बनाना था, लेकिन हम लगातार बंटते जा रहे हैं। इसके साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत ने 2027 की जनगणना में 'विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों' की अलग से गणना करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह एक नीतिगत निर्णय है और यह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखने की छूट दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, "भारत एक बहुत ही अनूठा देश है। एक जातिविहीन समाज विकसित करने के बजाय, हम अधिक से अधिक वर्गीकरण बनाना चाहते हैं।" जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि सरकार भी इसके पक्ष में है तो सीजेआई ने संदेह जताते हुए कहा, "ये बहुत ही नपे-तुले कदम हैं। ये कोई साधारण दावे नहीं हैं जो अचानक हमारे सामने आ गए हैं। यह समाज को विभाजित करने की एक बहुत ही गहरी साजिश है। ये एजेंसियां भारत के भीतर की नहीं हैं। यदि हम जांच करेंगे, तो पता चल जाएगा कि इन्हें कहां से रूट किया जा रहा है।" DNT समुदाय के नेता दक्षकुमार बजरंगे और अन्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि इन समुदायों ने ऐतिहासिक अन्याय सहा है। अंग्रेजों ने इन्हें आपराधिक जनजाति (Criminal Tribes) करार दिया था। वर्तमान जनगणना फॉर्म में केवल एससी, एसटी और 'अन्य' की श्रेणियां हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि एक अलग विकल्प दिया जाए ताकि इन समुदायों की सटीक जनसंख्या का पता चल सके। अंतिम गणना 1913 में दवे ने कोर्ट को बताया कि आखिरी बार इन समुदायों की गणना 1913 में हुई थी। इदाते आयोग (2017) और रेनके आयोग (2008) जैसी कई समितियों ने भी इनकी अलग से गिनती की सिफारिश की है। याचिका में कहा गया है कि भारत में लगभग 10 से 12 करोड़ की आबादी वाले इन समुदायों को आजादी के बाद कभी अलग से नहीं गिना गया। आंकड़ों के अभाव के कारण ये समुदाय कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ उठाने में असमर्थ हैं। 1871 के 'क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट' के कारण इन पर जो कलंक लगा था, वह कानून रद्द होने के बावजूद आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से इनका पीछा कर रहा है। कोर्ट का अंतिम फैसला पीठ ने मामले का निपटारा करते हुए कहा कि जनगणना की प्रक्रिया में वर्गीकरण या उप-वर्गीकरण करना पूरी तरह से केंद्र सरकार और विशेषज्ञों के कार्यक्षेत्र में आता है। कोर्ट ने कहा, "हमारी सुविचारित राय में याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई मांग नीतिगत दायरे में आती है, जिस पर निर्णय भारत सरकार के सक्षम प्राधिकारी को लेना है। यह न्यायसंगत मुद्दा नहीं है।" अदालत के इस फैसले के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है कि वह आगामी 2027 की जनगणना में इन समुदायों की पहचान के लिए क्या कदम उठाती है।