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यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प

योगी सरकार 142 बीपीएचयू के जरिए उपलब्ध कराएगी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं यूपी में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लॉक स्तर तक होगा व्यापक कायाकल्प हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपए से बनाया जाएगा हाईटेक-योगी  इंचार्ज, रजिस्ट्रेशन रूम से लेकर वेटिंग रूम और सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब बनाई जाएंगी पीएचसी और सीएचसी के अंदर कराया जाएगा निर्माण लखनऊ  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ब्लॉक स्तर तक मजबूत और आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। योगी सरकार राज्य के विभिन्न ब्लॉकों में 142 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) स्थापित करने जा रही है। इन यूनिटों के जरिये ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जांच, पंजीकरण और प्राथमिक उपचार की बेहतर सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। हर ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट को करीब 50 लाख रुपये की लागत से हाईटेक बनाया जाएगा। इनमें इंचार्ज कक्ष, रजिस्ट्रेशन रूम, वेटिंग रूम, सेंट्रल इंटीग्रेटेड लैब समेत कई आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी। इनका निर्माण मौजूदा पीएचसी और सीएचसी के भीतर ही कराया जाएगा, ताकि पहले से उपलब्ध स्वास्थ्य ढांचे को और अधिक सक्षम बनाया जा सके। ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि योगी सरकार की योजना केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इन इकाइयों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इससे ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच आसान होगी और मरीजों को जिला अस्पतालों पर निर्भरता कम रहेगी। सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों को अब छोटी-बड़ी जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। ब्लॉक स्तर पर सुविधाएं बढ़ने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में भी सुधार आएगा। गांव के करीब मिलेगी बेहतर स्वास्थ्य सेवा पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि बीपीएचयू मॉडल के लागू होने के बाद ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा। इससे मरीजों को पंजीकरण से जांच तक की कई सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगी। जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में होगा काम जनपद स्तर पर जिला पंचायतों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय कर निर्माण के लिए समस्त कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप जिलाधिकारी की समग्र देख-रेख में किए जाएंगे। ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को उनके क्षेत्राधिकार में आने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की इन घटकों की योजना बनाने एवं निगरानी में शामिल किया जाएगा।

एमपी सरकार ने 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण पूरा किया, बड़ी पहल

भोपाल   मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी पहल करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से कार्य प्रणाली में नवाचार का नया अध्याय जोड़ा है। विभाग ने यह महसूस किया कि सड़कों, पुलों और भवनों से संबंधित पूर्ण एवं प्रमाणिक डेटा के अभाव में योजनाओं का निर्माण अक्सर अनुमान के आधार पर करना पड़ता है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह संकल्प लिया कि सुधार की शुरुआत प्रमाणिक डेटा से की जाएगी। “आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है” इस कहावत को चरितार्थ करते हुए “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” का विकास किया गया, जिससे विभाग की परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक और डिजिटल सर्वे संभव हो सका। इसके अंतर्गत अब तक राज्य की 71210 किलोमीटर सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण कराया जा चुका है। ऐप के माध्यम से प्रदेश में तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान संचालित किया गया, जिसमें विभाग के अभियंता स्वयं मैदान में उतरकर अपने-अपने क्षेत्रों की सड़कों का विस्तृत सर्वेक्षण करने में जुटे। सर्वेक्षण के दौरान सड़क की चौड़ाई, पेवमेंट का प्रकार, राइट ऑफ वे (ROW), शोल्डर तथा सड़क की वर्तमान स्थिति सहित विभिन्न तकनीकी मापदंडों का डिजिटल रूप से डेटा संकलित किया गया। 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया व्यापक सर्वेक्षण में अब तक 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों का डिजिटल सर्वेक्षण किया जा चुका है। इसके साथ ही 2975 शासकीय भवनों तथा 1426 पुलों का सर्वे भी किया गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सड़कों की सीमाएं भी स्पष्ट रूप से चिन्हित की गई हैं। इससे विभाग के पास अपनी प्रत्येक परिसंपत्ति का अद्यतन, डिजिटल और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है, जिसके आधार पर अब निर्णय अनुमान के बजाय तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकेंगे। प्रमाणिक GIS आधारित डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने समग्र रोड नेटवर्क प्लानिंग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पहले योजनाएं पारंपरिक पद्धति से कागजों पर तैयार की जाती थीं, किंतु अब पहली बार भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से विभाग के इंजीनियरों द्वारा प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर GIS आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। इस मॉड्यूल के जरिए यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि किन पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के अधोसंरचना विकास के लिए तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। GIS, डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनेंगी। यह पहल प्रदेश में तकनीक आधारित सुशासन और सुदृढ़ अधोसंरचना विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।

Ram Navami 2026: ग्रहों का शुभ संयोग, रामनवमी पर इन राशियों को मिलेगा विशेष लाभ

पंचांग के अनुसार, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है. इस बार तिथि दो दिन पड़ने के कारण लोगों में कन्फ्यूजन है कि रामनवमी कब मनाई जाए. धार्मिक मान्यता है कि भगवान राम का जन्म दोपहर में हुआ था, इसलिए 26 मार्च 2026 को रामनवमी मनाना अधिक शुभ माना जा रहा है. हालांकि, उदयातिथि के अनुसार, कुछ लोग 27 मार्च को भी रामनवमी मनाने की बात कर रहे हैं. इस दिन कई खास ज्योतिषीय योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है।  रामनवमी पर ये रहेगी ग्रहों की स्थिति इस दिन ग्रहों की स्थिति भी खास रहने वाली है. शुक्र ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेंगे, वहीं गुरु और चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनेगा. इसके अलावा गुरु और मंगल के साथ आने से नवपंचम राजयोग का निर्माण होगा. साथ ही कुछ राशियों में त्रिग्रही योग भी बन रहा है. इन सभी योगों का असर अलग-अलग राशियों पर देखने को मिलेगा. तो आइए जानते हैं कि रामनवमी किन राशियों के लिए शुभ रहेगा।  इन राशियों के लिए शुभ रहेगा रामनवमी इस बार रामनवमी का दिन खासतौर पर मेष, वृषभ और कन्या राशि वालों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. इन लोगों को लंबे समय से चल रही परेशानियों से राहत मिल सकती है और जीवन में खुशियां बढ़ सकती हैं. परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं. रिश्तों में मिठास आएगी. कार्यक्षेत्र में आपके काम की तारीफ होगी, जिससे प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के योग बन सकते हैं. व्यापार में भी अच्छा लाभ मिलने की संभावना है. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और पुराने कर्ज से छुटकारा मिल सकता है।  इसके अलावा मिथुन, कुंभ, तुला, मकर और सिंह राशि के लोगों को भी इस दिन कुछ सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. वहीं वृश्चिक और मीन राशि वालों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है, खासकर सेहत के मामले में. हालांकि कामकाज पर इसका ज्यादा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।  रामनवमी पर करें ये उपाय अगर आप इस दिन भगवान राम की कृपा पाना चाहते हैं, तो कुछ सरल उपाय कर सकते हैं. रामचरितमानस के बालकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है. तुलसी के पत्तों की माला भगवान राम को अर्पित करें. हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी सकारात्मक फल मिल सकते हैं। 

11 मिनट में फुल चार्ज, चीनी कंपनी ने पेश की गजब की बैटरी, बैटरी संकट का समाधान

 नई दिल्ली इलेक्ट्रिक कार्स को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जा रहा है. हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह बैटरी को चार्ज होने में लगने वाला वक्त और ईवी की रेंज है. जहां पेट्रोल या डीजल कार में कहीं भी फ्यूल डलवाया जा सकता है. वहीं ईवी के चार्जिंग स्टेशन कम है।  इसके अलावा ईवी को चार्ज होने में भी वक्त लगता है. इसका समाधान चीनी ऑटोमोबाइल कंपनी BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) ने खोज लिया है. बीएआईसी ने सोडियम-आयन बैटरी टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट में एक महत्वपूर्ण सफलता का ऐलान किया है. BAIC चीन का एक प्रमुख कार निर्माता है. कंपनी इलेक्ट्रिक और ICE दोनों तरह की कार्स बनाती है।  कंपनी के रिसर्च डिविजन के मुताबिक, एक प्रोटोटाइप सोडियम-आयन बैटरी विकसित की गई है, जिसकी एनर्जी डेंसिटी 170 Wh/kg है. ये बैटरी 4C फास्ट चार्जिंग सपोर्ट करती है. इसे फुल चार्ज होने में सिर्फ 11 मिनट का वक्त लगेगा. ये चार्जिंग टाइम टेस्टिंग कंडीशन का है. रियल वर्ल्ड में चार्जिंग का वक्त ज्यादा हो सकता है. इस सिस्टम को अलग-अलग टेम्परेचर पर काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।  लो टेम्परेचर में भी करेगी काम इसे -40 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. कंपनी का दावा है कि -20 डिग्री सेल्सियस पर भी बैटरी रिटेंशन लगभग 92 परसेंट है. ये दिखाता है कि कम तापमान में भी इसे इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी ने बताया है कि बैटरी ने इंटरनल वैलिडेशन टेस्टिंग को पास कर लिया है।  थर्मल टेस्टिंग में 200 डिग्री सेल्सियस तक के टेम्परेचर पर भी बैटरी स्टेबल थी. ये सोडियम-आयन बैटरी कंपनी की अरोरा बैटरी प्रोग्राम का हिस्सा है. इसमें लिथियम आयन बैटरी, सॉलिड स्टेट और सोडियम आयन बैटरी शामिल हैं. कंपनी ने प्रिजमैटिक सोडियम-आयन सेल्स के लिए मास प्रोडक्शन प्रॉसेस वैलिडेशन भी पूरा कर लिया है.  पूरे चीन में सोडियम आयन बैटरियों को एडिशनल सॉल्यूशन के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर कम लागत और ठंडे मौसम वाले यूजेज के लिए. लिथियम-आयन फॉस्फेट बैटरियों की तुलना में, सोडियम-आयन बैटरियों में रॉ मैटेरियल आसानी से मिल जाता है. साथ ही इनकी कोल्ड-वेदर परफॉर्मेंस बेहतर होती है. हालांकि एनर्जी डेंसिटी के मामले में ये अभी पीछे हैं।  कई कंपनियां कर रही हैं काम बीएआईसी (BAIC) ने इस प्रोग्राम से जुड़े लगभग 20 पेटेंट फाइल किए हैं. ये पेटेंट्स मटेरियल, सेल डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेस और टेस्टिंग से जुड़े हैं. कंपनी चार्जिंग स्ट्रैटेजी, इलेक्ट्रोकेमिकल मॉडलिंग और बैटरी डिग्रेडेशन पर भी काम कर रही है. दूसरी चीनी कंपनियां भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रही हैं।  फरवरी 2026 में चांगान ऑटोमोबाइल और सीएटीएल ने पहली मास-प्रोड्यूस्ड सोडियम-आयन इलेक्ट्रिक कार पेश की. इसमें 45 kWh की बैटरी और 400 किमी से ज्यादा की रेंज का दावा किया गया है. ये कार 2026 मिड तक बाजार में लॉन्च हो सकती है।  BAIC (बीजिंग ऑटोमोटिव ग्रुप कंपनी लिमिटेड) की बात करें, तो कंपनी ने अभी तक अपनी सोडियम-आयन बैटरी के कमर्शियल लॉन्च की जानकारी नहीं दी है. फिलहाल ये टेक्नोलॉजी प्री-कमर्शियल स्टेज में है। 

मिडिल ईस्ट के तनाव से रियल एस्टेट प्रभावित, बढ़ सकते हैं घरों के दाम

मुंबई  रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठनों क्रेडाई (Credai) और नारेडको (Naredco) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान के बीच लंबे समय तक चलने वाला युद्ध निर्माण लागत को बढ़ा सकता है. ईंधन और माल ढुलाई की बढ़ती कीमतों के कारण स्टील और टाइल्स जैसी प्रमुख सामग्रियां महंगी हो सकती हैं. जिससे प्रोजेक्ट की समय-सीमा में देरी हो सकती है और घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं।  यह प्रभाव मुख्य रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाओं के कारण है, जिसका असर स्टील और अन्य निर्माण सामग्रियों पर पड़ रहा है. इससे डेवलपर्स के मुनाफे पर भी दबाव बढ़ रहा है।  लगभग 20,000 डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों संगठनों ने निर्माण सामग्री की संभावित कमी के कारण रियल एस्टेट परियोजनाओं को पूरा करने में होने वाली देरी पर भी चिंता व्यक्त की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक "स्टील, तार, पाइप और यहां तक कि कांच जैसी प्रमुख सामग्रियों की वर्तमान में कमी है. इसके अलावा, ईंधन से जुड़ी चुनौतियों के कारण सिरेमिक निर्माण जैसे क्षेत्र भी प्रभावित हुए हैं।  प्रोजेक्ट को पूरा करने में भी हो सकती है देरी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह "संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे निर्माण लागत में और वृद्धि हो सकती है और प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है।  इससे पहले, एनारॉक (Anarock) द्वारा किए गए एक विश्लेषण में कहा गया था कि मार्च की शुरुआत से हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने रियल एस्टेट क्षेत्र को प्रभावित किया है. इसकी वजह से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ गई है, सप्लाई चेन बाधित हुई है और परियोजनाओं में देरी या उनके रुकने का जोखिम बढ़ गया है।  स्टील की छड़ों की बढ़ती कीमतों का असर मुंबई, दिल्ली-एनसीआर और हैदराबाद जैसे ऊंची इमारतों वाले बाजारों में निर्माण कार्य पर पड़ने की आशंका है. साथ ही, इससे लग्जरी घरों की कीमतें भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि डेवलपर्स द्वारा दरों में 5% से अधिक की वृद्धि किए जाने की संभावना है। 

चालान जमा करने का तरीका बदला, 1 अप्रैल से खत्म होगा मैनुअल सिस्टम

रायपुर  राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार राज्य में 1 अप्रैल से मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने का काम पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा. जिला कोषालयों में केवल ऑनलाइन ही चालान जमा होंगे. नई व्यवस्था की अफसरों और कर्मचारियों को जानकारी देने के लिए सोमवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. इसमें जिला कोषालय अधिकारी गजानन पटेल ने आहरण संवितरण अधिकारियों, स्टांप वेंडर एवं बैंक प्रतिनिधियों को ओटीसी (ओवर द काउंटर ) ऑनलाइन चालान जमा करने की विस्तार से जानकारी दी. शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक बैरनबाजार में आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला में पटेल ने बताया कि मैनुअल सिस्टम से चालान जमा करने में जो गलती होने की संभावना होती थी, वह ओटीसी ऑनलाइन चालान से नहीं होगी. इसमें सही मद का चयन करना सुविधाजनक होगा, जिससे बैंक एवं कोषालय में पारदर्शिता बढ़ेगी. कार्यशाला में बताया गया कि संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा नए वित्तीय साल में 1 अप्रैल से मैनुअल चालान सिस्टम को खत्म कर ऑनलाइन चालान जमा करने की सुविधा शुरू की जा रही है. ऑनलाइन चालान ई-कोष ऑनलाइन पोर्टल के अंतर्गत ई-चालान मॉड्यूल से जमा किया जा सकता है. इस प्रक्रिया में चालान का डाटा सीधे बैंक को ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाएगा.

यमुनानगर जेल में कैदी बना रहे फर्नीचर, फ्लिपकार्ट पर बिक्री से बढ़ेगी आमदनी

 यमुनानगर जिला जेल की फैक्ट्री में बने उत्पाद अब ऑनलाइन बिक सकेंगे। जेल प्रशासन इसके लिए ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट से एमओयू साइन करेगा। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। ऑनलाइन पोर्टल पर आने से आमदनी भी बढेगी। हर किसी की पहुंच में यह उत्पाद होंगे। जेल में फर्नीचर के अलावा एलोवेरा जूस, आंवला कैंडी, आंवला जूस, गुलाब जल और एलोवेरा जूस तैयार किया जा रहा है। कपालमोचन मेला, गीता जयंती समारोह व सूरजकुंड में क्राफ्ट मेले में इन उत्पादों की काफी मांग रहती है। वहां पर लगे स्टाल से लोग खरीददारी करते हैं। जेल में तैयार किए जाने वाले फर्नीचरों में सिंगल बेड, सोफा, डबल बेड, टेबल, कुर्सियां और महाराजा कुर्सियां तैयार की जाती है। इसके लिए लकड़ी वन विभाग से खरीदी जाती है। शुद्ध शीशम की लकड़ी से यह फर्नीचर तैयार किया जाता है। जिसकी मजबूती भी बाहर बिकने वाले उत्पाद से अधिक रहती है। यही कारण है कि कोर्ट परिसर, सरकारी कार्यालयों, विश्वविद्यालयों व स्कूलों के लिए जेल में तैयार फर्नीचर खरीदा जाता है। इन उत्पादों का दाम जेल प्रबंधन की ओर से निर्धारित किया जाता है। इसके लिए न तो किसी कोटेशन की जरूरत पड़ती है और न ही कोई अन्य प्रक्रिया होती है। अब जेल प्रबंधन के पेट्रोल पंप पर ही शोरूम भी बनाया गया है। जहां पर यह उत्पाद रखे हैं। ऐसे में लोग जेल के बाहर ही इन उत्पादों को देख सकते हैं और खरीद सकते हैं। शोरूम में फर्नीचर के अलावा अन्य उत्पाद भी रखे हुए हैं। एक वर्ष में बेचे 56 लाख रुपये के उत्पाद जेल प्रशासन ने वर्ष 2025 में 56 लाख रुपये के उत्पाद बेचे। इनमें फर्नीचर से लेकर जूस, कैंडी, गुलाब जल सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। पिछले दिनों सूरजकुंड क्राफ्ट मेले में लगभग 15 लाख रुपये के उत्पाद बेचे गए। जेल की फैक्ट्री में फिलहाल 110 कैदी उत्पाद तैयार करने में लगे हुए हैं। फैक्ट्री में अधिकतर कैदी ही कार्य करते हैं लेकिन उन बंदियों को भी लगा दिया जाता है जो पहले से फर्नीचर का कार्य जानते हैं और अपनी मर्जी से काम करना चाहते हैं। जिला जेल में बंद हैं 1150 कैदी जिला जेल में इस समय लगभग साढ़े 1100 कैदी हैं। इनमें लगभग 50 महिला कैदी व बंदी हैं। जेल में हार्डकोर अपराधियों के साथ-साथ जम्मू कश्मीर के आतंकियों को भी रखा गया है। इसके लिए सीआरपीएफ का अलग से पहरा लगाया गया है। हालांकि इनकी संख्या घटती बढ़ती रहती है। पिछले दिनों जेल से कुछ बंदियों की अदला बदली भी हुई है। कुछ को दूसरी जेलों में ट्रांसफर किया गया है। वहीं दूसरी जेलों से कुछ बंदियों को यहां पर भेजा गया है।     फ्लिपकार्ट के साथ जेल प्रबंधन की बातचीत चल रही है। जेल में बने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एमओयू साइन किया जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। – सतेंद्र सिंह, एसपी जेल।  

भोपाल के आदमपुर खंती में कचरे के पहाड़ को हटाकर बनेगा हाईवे, आयोध्या बायपास पर होगा उपयोग

भोपाल आदमपुर खंती में वर्षों से ठोस कचरा का ढेर जमा है। यह भोपाल शहर के लिए मुसीबत है। अब कचरे का यह ढेर विकास का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है। इसे लेकर एनएचआई ने एक प्रभावशाली पहल की है। साथ ही इस कचरे से मुक्ति के लिए स्थायी समाधान ढूंढा है। इस कचरे का इस्तेमाल अयोध्या बायपास के लगभग 16 किमी लंबे चौड़ीकरण कार्य में उपयोग किया जारहा है। साथ ही भोपाल–रायसेन से सागर तक NH-146 के निर्माण कार्यों में भी ऐसे पुनर्चक्रित मटेरियल के उपयोग को शामिल किया जा रहा है। इससे हरित और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा। ऐसे हो रहा है इस्तेमाल इस पहल के अंतर्गत आदमपुर खंती से प्राप्त ठोस कचरे का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जिसमें लगभग 10 लाख मीट्रिक टन सालिड वेस्ट के उपयोग का प्रावधान है। इसके साथ ही, कचरे के उपयोग से पूर्व उसके सैंपल लेकर लैब परीक्षण भी कराए गए हैं, ताकि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पूर्णतः पालन सुनिश्चित किया जा सके। बदबू और प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति आदमपुर खंती के आसपास रहने वाले लोगों को वर्षों से बदबू, प्रदूषण, धुएं और आग लगने जैसी समस्याओं से परेशान हैं। कचरे के निस्तारण से लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही कचरे से उत्पन्न स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम होंगे और आसपास का वातावरण अधिक स्वच्छ और सुरक्षित बन सकेगा। इस पहल के जरिए न केवल सालों से जमा कचरे के बड़े हिस्से को खत्म करने में मदद मिलेगी, बल्कि एक मिसाल भी पेश होगी। सड़क निर्माण में कचरे का उपयोग कैसे होता है? ऐसे खत्म होगा कचरे का ढेर कचरे की छंटाई- आदमपुर खंती से निकाले गए कचरे को अलग-अलग श्रेणियों-प्लास्टिक, धातु, कांच, जैविक और इनर्ट (मिट्टी/मलबा) में विभाजित किया जाता है, ताकि केवल उपयोगी सामग्री को आगे प्रोसेसिंग के लिए चुना जा सके। प्रोसेसिंग और ट्रीटमेंट- छांटे गए कचरे को प्रोसेस किया जाता है। प्लास्टिक वेस्ट को साफ कर छोटे-छोटे टुकड़ों में बदला जाता है, जबकि इनर्ट कचरे को छानकर निर्माण के लिए उपयुक्त बनाया जाता है। अनुपयोगी और हानिकारक तत्वों को अलग कर सुरक्षित रूप से निस्तारित किया जाता है। बिटुमिनस मिक्स तैयार करना- प्रोसेस्ड प्लास्टिक को गर्म बिटुमेन में मिलाकर मजबूत बिटुमिनस मिक्स तैयार किया जाता है। इससे सड़क की बाइंडिंग क्षमता बढ़ती है, दरारें कम होती हैं और पानी का असर कम होता है, जिससे सड़क अधिक टिकाऊ बनती है। सड़क की परतों में उपयोग- इनर्ट कचरा सड़क की निचली परत में उपयोग किया जाता है, जबकि बिटुमेन-प्लास्टिक मिश्रण को ऊपरी परत में बिछाया जाता है। इससे सड़क की लोड-बेयरिंग क्षमता और स्थायित्व दोनों बढ़ते हैं। गुणवत्ता जांच और निगरानी- निर्माण के प्रत्येक चरण में मटेरियल और कार्य की गुणवत्ता की जांच की जाती है, ताकि सड़क सुरक्षा और दीर्घकालिक उपयोग के सभी मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। 3R सिद्धांत पर आधारित सस्टेनेबल पहल इस पूरी पहल के तहत ‘3R – रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल’ की अवधारणा को अपनाकर कचरे का निरंतर और वैज्ञानिक निस्तारण किया जा रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि नया कचरा न्यूनतम उत्पन्न हो। हर दिन निकलने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें ‘प्लास्टिक वेस्ट टू रोड कंस्ट्रक्शन’ एक सफल और प्रभावी मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। पर्यावरण और विकास का संतुलन इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक सहित सभी शहरी ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रसंस्करण सुनिश्चित करना है, ताकि लैंडफिल में जाने वाले कचरे की मात्रा को शून्य के करीब लाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के अंतर्गत ‘प्लास्टिक वेस्ट से सड़क निर्माण’ की तकनीक स्वच्छता को टिकाऊ बुनियादी ढांचे से जोड़ते हुए सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Sariya Price Hike: युद्ध के कारण घर बनाना मुश्किल, सरिया और सीमेंट की कीमतों में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी

 नई दिल्ली घर बनवाना (House Construction) अब सस्ता सौदा नहीं रहा, ये आज के समय में सबसे महंगे सौदों में शामिल हो चुका है. जहां पहले जमीन खरीदने के लिए मोटी रकम खर्च करनी होती है, तो उस जमीन पर मनचाहा अपने सपनों का आशियाना खड़ा करने का खर्च भी तगड़ा है. ऐसे में घर बनवाने का प्लान करने वाले लोग हाउस कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले बिल्डिंग मैटेरियल्स के दाम घटने का इंतजार करते हैं, जिससे उनकी जेब को बोझ कुछ हल्का हो सके।  कभी-कभी ये इंतजार महंगा भी पड़ जाता है और ग्लोबल टेंशन के बीच कुछ ऐसा ही नजर आ रहा है. दरअसल, हाउस कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में बड़ा रोल निभाने वाले सरिया का भाव दनादन टूटने के बाद अब लगातार बढ़ता (Sariya Price Fall) जा रहा है और काफी महंगा हो गया है. इसकी कीमतों में मार्च महीने में तमाम बड़े शहरों में तगड़ी तेजी देखने को मिली है।  अचानक कीमतों में आया तगड़ा उछाल बीते कुछ महीनों से Sariya Price  में अच्छी खासी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन मार्च महीने में ये लगातार उछली है. अगर आप अपना घर बनवाने का प्लान कर रहे हैं, तो फिर इसकी अपडेटेड कीमत के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है. दरअसल, Sariya जहां घर की मजबूती के लिए खास बिल्डिंग मैटेरियल है, तो वहीं कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में भी इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है. इसकी कीमत में आने वाली कमी House Construction Cost में कमी लाता है, तो वहीं सरिया महंगा होने से ये कंस्ट्रक्शन का खर्च बढ़ जाता है।  मिडिल ईस्ट में युद्ध के चलते तेल-गैस की किल्लत और सप्लाई चेन प्रभावित होने का असर इस सेक्टर में देखने को मिल रहा है. हाउस कंस्ट्रक्शन में शामिल स्टील और सीमेंट दोनों ही ऊर्जा-इंटेंसिव सेक्टर हैं और किसी भी रुकावट से प्रभावित हो सकते हैं. बीते 9 फरवरी की तुलना में फिलहाल के Sariya Rates देखें, तो इनकी कीमत 4,000 रुपये प्रति मीट्रिक टन से ज्यादा बढ़ी है।  सरिया की कीमतें (18% GST के बिना) शहर (राज्य)     09 फरवरी 2026(मीट्रिक टन)     20 मार्च 2026(मीट्रिक टन) रायपुर                       45,300 रुपये                     46,200 रुपये रायगढ़                      45,000 रुपये                     45,300 रुपये भावनगर                    49,500 रुपये                   51,800 रुपये कोलकाता                 46,000 रुपये                   47,000 रुपये राउरकेला                 46,000 रुपये                   46,300 रुपये हैदराबाद                   49,000 रुपये                   49,500 रुपये चेन्नई                         49,000 रुपये                   50,200 रुपये मुंबई                         49,600 रुपये                   51,000 रुपये जालना                       49,500 रुपये                  51,300 रुपये गोवा                        50,200 रुपये                     54,200 रुपये अपने शहर का ऐसे चेक कर लेटेस्ट रेट Sariya Price में रोजाना आधार पर बदलाव होता है और आप अपने शहर की लेटेस्ट कीमतों को घर बैठे ही आसानी से चेक कर सकते हैं. इसके लिए आयरनमार्ट की वेबसाइट (ayronmart.com) पर जाना होगा और इसमें TMT सरिया के लेटेस्ट रेट अपडेट की पूरी जानकारी मिल जाएगी. बता दें कि वेबसाइट पर बताई गई कीमतें सरिया पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी से अलग होती हैं और इसके जुड़ने से ये बढ़ जाती हैं। 

पंजाब में कैंसर से महिलाएं प्रभावित, 4 साल में 13,299 मौतें, कारण क्या है?

 अमृतसर पंजाब में महिलाओं के बीच कैंसर रोग गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में कुल 13,299 महिलाओं की मौत विभिन्न प्रकार के कैंसर के कारण हुई है। इनमें सबसे अधिक 7,186 महिलाओं की मृत्यु स्तन कैंसर से हुई हैं। आंकड़े बताते हैं कि स्तन कैंसर के बाद सर्विकल कैंसर से सर्वाधिक मौतें हुई हैं, जिनकी संख्या 3,502 है। इसके अतिरिक्त ओवरी यानी अंडाश्य और गर्भाशय कैंसर से 2611 महिलाओं की जान गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि महिलाओं से जुड़े कैंसर के प्रकार पंजाब में तेजी से फैल रहे हैं और समय रहते प्रभावी कदम न उठाए गए तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में प्रतिदिन औसतन आठ महिलाओं की मौत कैंसर के कारण हो रही है। वहीं, कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां कैंसर के 39,251 मामले सामने आए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 43,196 हो गई है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डा. सुमित शर्मा एवं अमृतसर के वरिष्ठ सर्जन डॉ. मनदीप सिंह के अनुसार इस बढ़ती समस्या का एक बड़ा कारण समय पर जांच न करवाना और महिलाओं में जागरूकता की कमी है। 65 प्रतिशत मामलों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ जाती है। देरी होने से उपचार और जटिल हो जाता है और मरीज के बचने की संभावना कम होती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं अक्सर सामाजिक झिझक, डर या जानकारी के अभाव के कारण जांच करवाने से बचती हैं। कई बार शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। कैंसर का बड़ा कारण पर्यावरण को भी माना जा रहा है। वैसे पर्यावरण प्रदूषित करने का कसूरवार भी इंसान ही हैं। प्रदूषित पानी, औद्योगिक कचरा, और खेतों में रासायनों व कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। लंबे समय तक इन तत्वों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। डा. मनदीप के अनुसार बदलती जीवनशैली भी एक बड़ा कारण बनकर उभरी है। शारीरिक गतिविधियों की कमी, फास्ट फूड का बढ़ता चलन, मोटापा और तनाव जैसी समस्याएं महिलाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। पहले जहां कैंसर अधिकतर बुजुर्ग महिलाओं में देखा जाता था, वहीं अब 50 से 56 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते जांच कर ली जाए, तो स्तन और सर्विकल कैंसर जैसे रोगों का सफलतापूर्वक इलाज संभव है।