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योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश

योगी सरकार के 9 वर्षों में यूपी टूरिज्म ने तय किया ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से ‘टेंपल इकोनॉमी’ का सफर योगी सरकार में बदली यूपी टूरिज्म की पहचान, वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा उत्तर प्रदेश तीर्थ स्थलों का विकास और धार्मिक उत्सवों का भव्य आयोजन, यूपी बना देश में पर्यटन का सिरमौर लखनऊ, उत्तर प्रदेश में पिछले 9 वर्षों के दौरान योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र ‘ग्रेवयार्ड इकोनॉमी’ से निकलकर ‘टेंपल इकोनॉमी’ में बदल चुका है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने लोकभवन में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान योगी सरकार की 9 वर्षों की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल सोच का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं का भी प्रतीक बनकर उभरा है। जहां वर्ष 2017 के पहले राज्य सरकार के बजट का बड़ा हिस्सा कब्रिस्तानों की दीवारें बनाने में खर्च होता था, वहीं अब योगी सरकार में प्रदेश के तीर्थ स्थलों, धार्मिक गलियारों, सांस्कृतिक मार्गों और पर्यटन अवसंरचना के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इस बदलाव ने उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्द्धन को पर्यटन के विकास से जोड़ा है। यूपी के आस्था के केंद्र,  तीर्थस्थल बने पर्यटन अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर्यटन मंत्री ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप पिछले 9 वर्षों में राज्य में आस्था, संस्कृति और पर्यटन का संगम अब आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन चुका है। योगी सरकार में तीर्थ विकास परिषदों का निर्माण कर प्रदेश के तीर्थों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विकास किया गया है। अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा के साथ ही मीरजापुर, चित्रकूट, नैमिषारण्य और सहारनपुर स्थित मां शाकुंभरी देवी शक्तिपीठ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल आज प्रदेश के पर्यटन की नई पहचान बन चुके हैं। इस क्रम में विशेष रूप से काशी विश्वनाथ धाम के कॉरिडोर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में 4-5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं राम मंदिर अयोध्या में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सांस्कृतिक उत्सव और आयोजन से बढ़ा यूपी में धार्मिक पर्यटन उत्तर प्रदेश में आयोजित सांस्कृतिक आयोजनों ने भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। दीपोत्सव अयोध्या ने 2025 में 26 लाख से अधिक दीप जलाकर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं देव दीपावली वाराणसी को प्रांतीय मेले का दर्जा दिया गया है। 2017 में दीपोत्सव की शुरुआत, प्रयागराज में आयोजित होने वाला माघ, कुंभ और महाकुंभ मेला, ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजनों ने पर्यटन को तेज गति से बढ़ावा दिया है। महाकुंभ-2025 का आयोजन इस यात्रा का ऐतिहासिक शिखर माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश की ये सांस्कृतिक परंपराएं और उत्सव अब आर्थिक गतिविधियों का बड़ा स्रोत बन रहीं हैं। इन आयोजनों से स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन, प्रसाद, फूल, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों को व्यापक लाभ मिला है। पर्यटन नीति-2022 का सफल क्रियान्वयन, हुआ 5 लाख रोजगार का सृजन उत्तर प्रदेश में पर्यटन का नीतिगत विस्तार करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में पर्यटन नीति-2022 को लागू किया गया। इसका परिणाम है कि अब तक उत्तर प्रदेश में ₹36,681 करोड़ से अधिक निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिससे करीब 5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। 1,757 पर्यटन इकाइयों का पंजीकरण भी किया गया है। युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए शोध, प्रचार और मॉनिटरिंग कार्यों में ₹40,000 मासिक स्टाइपेंड देने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में पर्यटक सुरक्षा और सुविधाएं हुईं सुदृढ़, मिला पर्यटन को बढ़ावा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख शहरों—आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, झांसी और लखनऊ में पर्यटन पुलिस तैनात की गई है। साथ ही 850 प्रशिक्षित गाइडों की नियुक्ति की गई है, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 234 गांवों का चयन किया गया है और 2026-27 तक 50,000 होम-स्टे कमरे विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 16 वन्यजीव क्षेत्रों में इको-टूरिज्म को विकसित किया जा रहा है। साथ ही तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाओं का विस्तार करते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा हेतु ₹1 लाख तथा सिंधु दर्शन यात्रियों को ₹20 हजार का अनुदान प्रदान किया जा रहा है। पर्यटक आगमन में रिकॉर्ड वृद्धि, घरेलू पर्यटन में यूपी बना प्रथम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि एक पर्यटक कम से कम 6 लोगों की आय का माध्यम बनता है। प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन पर विशेष ध्यान का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश में घरेलू पर्यटक आगमन के मामले में प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है। वर्ष 2025 में प्रदेश में कुल 1 अरब 56 करोड़ से अधिक पर्यटक आए, जिनमें लगभग 36 लाख विदेशी पर्यटक शामिल रहे। केवल अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज में ही वर्ष 2025 के दौरान लगभग 116 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आगमन हुआ, जो राज्य के कुल पर्यटन का करीब 90 प्रतिशत है।  पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पत्रकार वार्ता में कहा कि योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने यह सिद्ध कर दिया है कि सांस्कृतिक विरासत और आस्था को आर्थिक शक्ति में बदला जा सकता है। उत्तर प्रदेश अब तीर्थ, पर्यटन और परंपरा के समन्वय से विकास का एक नया मॉडल बनकर देश और दुनिया के सामने आध्यात्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है।

खिवनी अभयारण्य में बाघ परिवार का दुर्लभ दृश्य, सड़क पर निकले, टूरिस्ट की सांसें 20 मिनट तक थमी रहीं

खिवनी खिवनी अभयारण्य में ऐसा नजारा सामने आया, जिसने जंगल सफारी के रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया। घनी घास के बीच से अचानक निकला बाघ युवराज सड़क पर आकर ठहर गया और कुछ ही क्षणों में उसके पीछे बाघिन मीरा अपने तीनों शावकों के साथ नजर आई। देखते ही देखते पूरा बाघ परिवार एक साथ सडक़ पार करता दिखा, एक ऐसा दुर्लभ दृश्य, जिसे देख पर्यटक रोमांच और उत्साह से भर उठे। 20 मिनट तक थमा रहा रोमांच शाम करीब 5.30 बजे का समय था, जब यह अद्भुत दृश्य सामने आया। पर्यटकों के वाहन सुरक्षित दूरी पर रुक गए और सभी ने करीब 20 मिनट तक इस शाही परिवार के दीदार किए। इस दौरान एक पर्यटक ने पूरे परिवार को एक ही फ्रेम में कैद कर लिया, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। दिन में विश्राम, शाम को शिकार की तैयारी देवास के खिवनी अभयारण्य के अधीक्षक विकास माहोरे के अनुसार, बाघ युवराज दिन में नाले के पास वाले क्षेत्र में अपने परिवार के साथ आराम करता है और शाम होते ही सक्रिय हो जाता है। बुधवार को भी वह अचानक सडक़ पर आकर रुका, मानो अपने साम्राज्य का निरीक्षण कर रहा हो, और फिर अपने परिवार के साथ आगे बढ़ गया। जंगल का ‘रॉयल मोमेंट’ बना यादगार बाघ परिवार का इस तरह एक साथ नजर आना बेहद दुर्लभ होता है। खिवनी अभयारण्य में यह दृश्य पर्यटकों के लिए किसी ‘रॉयल मोमेंट’ से कम नहीं रहा, जिसने उनके सफारी अनुभव को यादगार बना दिया। यह नजारा दुर्लभ और खास क्यों? वन विशेषज्ञों का कहना है, कि आमतौर पर बाघों को जंगलों में अकेले घूमते देखना आसान है, लेकिन परिवार के साथ खुले में रास्ता पार करते देखना एक बेहद दुर्लभ नजारा है। उनका कहना है कि सड़क पार कराते समय खास तौर पर बाघिन अपने बच्चों को लेकर सतर्क रहती है। नर बाघ अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आगे चलकर जहां तक नजर जाती है, वहां तक के पूरे एरिया को स्कैन कर लेता है। वन विभाग ने टूरिस्ट से की अपील शांत रहें इस दौरान वन विभाग के कर्मचारियों ने टूरिस्ट को अलर्ट कर दिया कि वे शांत रहें, उनकी जरा सी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है या फिर ये दुर्लभ दृश्य देखने का मजा किरकिरा हो सकता है। ये भी जानें -विकास माहोरे बताते हैं कि खिवनी अभयारण्य मध्य प्रदेश के देवास और सीहोर जिले में फैला हुआ है। वहीं सतपुड़ा लैंडस्कैप का हिस्सा माना जाता है। इसका क्षेत्रफल करीब 130-140 वर्ग किमी है। -यहां ड्राय डेसिड्डुअस यानी पर्णपाती जंगल है। यहां स्थायी टाइगर रिजर्व जैसा आधिकारिक आंकड़ा नहीं होता है। लेकिन सतपुड़ा और आसपास के जंगलों से बाघों का मूवमेंट यहां तक हो जाता है। -मोहरे का कहना है कि यहां पिछले कुछ वर्षों में बाघों का मूवमेंट बढ़ा है। इसे बेहतर संरक्षण और सुरक्षित आवास का संकेत माना जाता है। वन्य जीव प्रेमियों के लिए खिवनी भी अब एक उभरता हुआ या कहें कि हिडन टाइगर स्पॉट बनता जा रहा है। जहां अचानक दुर्लभ नजारे वाइल्डलाइफ लवर्स को रोमांच से भर देते हैं।   

इंदौर में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं, प्रशासन का भरोसा, पंपों पर होगा अनाउंसमेंट

इंदौर पेट्रोल-डीजल को लेकर बीते दिन भी अफरा-तफरी जारी रही। सुबह लगभग 5 बजे से ही पेट्रोल पंपों पर भीड़ लगने लगी, जो शाम तक वैसी ही बनी रही। दिन में पेट्रोल के दाम बढऩे की अफवाह को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो भी वायरल हुआ। सामान्य पेट्रोल नहीं होने को लेकर प्रशासन ने पुष्टि की तो दाम बढऩे जैसी बातों को अफवाह बताया। सुबह से शाम तक प्रशासन के कई अधिकारी लोगों से स्थिति सामान्य होने व घबराहट में भीड़ नहीं लगाने को लेकर अपील करते रहे। यह भी कहा गया कि जिले में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। प्रशासन ने कई पंपों को देर रात तक खुले रखने के निर्देश दिए। बुधवार सुबह 6 बजे से डिपो पर टैंकर पहुंचे व 8 बजे से सप्लाई शुरू कराई गई। मांगलिया डिपो से लगातार आपूर्ति जारी मांगलिया डिपो से ईंधन आपूर्ति जारी है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल के डिपो पर ईंधन भरने का कार्य तेज गति से कराया। सुबह 8 बजे तक हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 25, भारत पेट्रोलियम के 17 और इंडियन ऑयल के 19 टैंकर पेट्रोल पंपों के लिए रवाना कराए गए थे। रोज 10 लाख लीटर पेट्रोल खपत, पर्याप्त स्टॉक जिला आपूर्ति नियंत्रक एमएल मारू ने बताया, इंदौर जिले में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक है। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 10 लाख लीटर पेट्रोल और 15 लाख लीटर डीजल की खपत हो रही है। पंपों पर करीब 42 लाख लीटर पेट्रोल और 65 लाख लीटर डीजल का भंडारण है। 3-4 घंटे में कई पंप पर हुआ खत्म पेट्रोल जिले में 270 पेट्रोल पंप हैं। सुबह से प्रशासन की तरफ से लगातार टैंकरों से सप्लाई जारी रखी गई, लेकिन लोगों की भीड़ इतनी अधिक रही कि दो से तीन घंटे में ही पंप पर पेट्रोल खत्म होने लगा। तीन दिन की खपत एक दिन में हुई जितनी खपत तीन दिन में होती है उतनी एक दिन में हुईै। कई पंप में पेट्रोल-डीजल की लिमिट तक तय कर दी। किसी ने 300 तो किसी ने 500 से अधिक का पेट्रोल नहीं दिया। भीड़ कम होने पर भी लिमिट हटा ली। पुलिस ने संभाली व्यवस्था अलग-अलग थाना क्षेत्रों में स्थित पंपों पर पुलिस ने व्यवस्था संभाली। एयरपोर्ट रोड स्थित पंप पर रात को विवाद की स्थिति बनी जिसे पुलिस ने नियंत्रण में लिया। बुधवार को भी अधिकतर पंप पर भीड़ को नियंत्रित करते हुए व्यवस्था बनाई। पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं, अफवाहों से दूर रहें इंदौर संभाग में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कहीं भी ईंधन की कमी नहीं है। संभागायुक्त सुदामा खाड़े ने सभी जिलों के कलेक्टर और तेल कंपनियों के वितरकों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की। प्रतिनिधियों ने बताया, वर्तमान में उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और आगे की जरूरतों के लिए भी भंडार सुरक्षित है। संभागायुक्त ने निर्देश दिए कि जिलों में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहे। बढ़ती मांग को देखते हुए सप्लाई चेन को और मजबूत करने पर जोर दिया है। कंपनियां साझा करेंगी स्टॉक की जानकारी बैठक में तय किया गया कि तेल कंपनियां जिलों में उपलब्ध स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से जिला प्रशासन से साझा करेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों के पंपों पर भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया जाए। सभी पंपों पर अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का कहा है। प्रशासन ने साफ किया है कि यदि किसी भी डीलर ने ब्लैक मार्केटिंग की तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

महाष्टमी के दिन यहां दीप जलाने से मिलता है मां दुर्गा का आशीर्वाद

2026 में महाष्टमी का पावन पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन मां महागौरी को समर्पित है और आध्यात्मिक रूप से अपनी ऊर्जा को जागृत करने और घर में सुख-समृद्धि के आह्वान के लिए सबसे शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में दीपक को ज्ञान और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। महाष्टमी के दिन विशेष स्थानों पर दीपक प्रज्वलित करने से न केवल घर की नकारात्मकता दूर होती है बल्कि मां दुर्गा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि महाष्टमी पर आपको कहां-कहां दीपक जलाने चाहिए ताकि आपका घर खुशियों के भंडार से भर जाए। अष्टमी तिथि को महाष्टमी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन मां दुर्गा ने असुरों का संहार करने के लिए अपनी दिव्य शक्तियों का पूर्ण प्रकटीकरण किया था। इस दिन दीपदान करने का अर्थ है अपने जीवन के अंधकार को मिटाकर प्रकाश का स्वागत करना। इन 9 स्थानों पर जरूर जलाएं दीपक घर का मुख्य द्वार घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से देवी लक्ष्मी और मां दुर्गा का आगमन होता है। अष्टमी की शाम को द्वार के दोनों ओर घी के दीपक जलाएं। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती और सुख-शांति बनी रहती है।  मां दुर्गा के समक्ष आपके पूजा कक्ष में मां दुर्गा की मूर्ति या कलश के सामने एक बड़ा दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो इसमें कपूर की एक टिक्की डाल दें। यह आपकी भक्ति को सिद्ध करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।  तुलसी का पौधा हिंदू धर्म में तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का रूप माना गया है। अष्टमी की शाम को तुलसी के क्यारे में दीपक जलाने से घर की दरिद्रता दूर होती है। ध्यान रहे कि दीपक की लौ उत्तर या पूर्व दिशा की ओर हो। रसोई घर रसोई वह स्थान है जहां मां अन्नपूर्णा का वास होता है। अष्टमी पर रसोई में पीने के पानी के स्थान के पास दीपक जलाएं। इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती।  पीपल के वृक्ष के नीचे शास्त्रों के अनुसार, पीपल के पेड़ में त्रिदेवों और देवी-देवताओं का वास होता है। अष्टमी की रात पीपल के नीचे दीपक जलाने से ग्रह दोष शांत होते हैं। पीपल के पास दीपक जलाकर पीछे मुड़कर न देखें। घर का ब्रह्म स्थान अगर आपके घर में खुला आंगन है, तो उसके बीचों-बीच एक दीपक रखें। फ्लैट में रहने वाले लोग अपने हॉल के मध्य में एक सुरक्षित स्थान पर दीपक रख सकते हैं। यह पूरे घर के वास्तु दोषों को मिटाने की क्षमता रखता है। पास के किसी मंदिर में अष्टमी की रात अपने घर के नजदीकी देवी मंदिर में जाकर दीपदान करना अत्यंत फलदायी होता है। सामूहिक ऊर्जा वाले स्थान पर दीप जलाने से आपकी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। तिजोरी या धन रखने के स्थान के पास जहां आप अपना धन या गहने रखते हैं, वहां दूर से एक दीपक की रोशनी पड़नी चाहिए।  यह आपके खर्चों पर नियंत्रण रखता है और आय के नए स्रोत खोलता है। बेलपत्र के पेड़ के नीचे अष्टमी के दिन बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने से मां पार्वती और भगवान शिव दोनों प्रसन्न होते हैं।  इससे संतान सुख और पारिवारिक एकजुटता बढ़ती है।

रोजगार में डिजिटल क्रांति: हरियाणा में ITI युवाओं को ऑनलाइन पोर्टल से मिलेगा जॉब

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। आईटीआई से पास होने वाले युवाओं का पूरा डाटा डिजिटल पोर्टल लांच होगा। इस पोर्टल के माध्यम से उद्योगों को प्रशिक्षित युवाओं की जानकारी मिलेगी, जिससे उन्हें सीधे रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग की समीक्षा बैठक में निर्देश दिए है। सीएम ने कहा कि हर जिले में बड़े स्तर पर रोजगार मेले आयोजित किए जाएंगे और इसके लिए विभाग कैलेंडर भी जारी करेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए कि आईटीआई पास युवाओं और इंटर्नशिप करने वाले छात्रों की ट्रैकिंग की जाए, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें रोजगार मिला या नहीं। बैठक में विभाग के मंत्री गौरव गौतम भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान आईटीआई संस्थानों के उन्नयन, भवन मरम्मत, नई लैब, प्रशिक्षकों की ट्रेनिंग और उद्योगों के साथ समझौते जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं में पढ़ाई के साथ-साथ हुनर होना जरूरी है, ताकि वे रोजगार के योग्य बन सकें। स्किल पर जोर, ट्रेनिंग लेने वालों को मिलेगा प्राथमिकता से काम : सीएम सैनी ने कहा कि आने वाले समय में स्किल्ड युवाओं की मांग बढ़ेगी, इसलिए आईटीआई में नई तकनीक और एआई से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएं। पुरानी मशीनरी को बदलने और इंस्ट्रक्टरों को नई तकनीक की ट्रेनिंग देने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि सक्षम योजना के तहत ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर काम और कॉन्ट्रैक्ट दिए जाएंगे।

इंडक्शन चूल्हा कहां रखें? किचन के लिए ये वास्तु टिप्स हैं जरूरी

अगर आप भी गैस स्टोव के विकल्प के तौर पर इंडक्शन इस्तेमाल करने जा रहे हैं, तो वास्तु के अनुसार इंडक्शन रखने के लिए कुछ नियमों का विशेष पालन करना चाहिए। वास्तु के अनुसार, सही नियम अपनाएं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी और मां अन्नपूर्णा प्रसन्न रहेंगी। इंडक्शन रखने के लिए सबसे शुभ दिशा वास्तु में अग्नि तत्व का स्वामी दक्षिण-पूर्व दिशा है। इंडक्शन चूल्हा इसी दिशा में रखने से अग्नि तत्व संतुलित रहता है, खाना जल्दी और अच्छे से पकता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इस दिशा में इंडक्शन रखने से परिवार के स्वास्थ्य में सुधार होता है और अनावश्यक खर्च कम होता है। यदि जगह ना हो, तो अग्नि कोण के सबसे नजदीक रखें। उत्तर-पश्चिम दिशा भी है शुभ अगर दक्षिण-पूर्व में जगह ना हो, तो उत्तर-पश्चिम (वायु कोण) में इंडक्शन रख सकते हैं। यह दिशा वायु तत्व की है, जो खाना बनाने में सहायक होती है। इस दिशा में इंडक्शन रखने से खाना हल्का और पचने में आसान रहता है। लेकिन ध्यान रखें कि दक्षिण-पूर्व हमेशा प्राथमिकता रहे। उत्तर-पश्चिम में रखने से घर में हल्की हवा का प्रवाह बना रहता है। सबसे अशुभ दिशाएं ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) देवताओं का स्थान है। यहां इंडक्शन रखने से कुल देवता रुष्ट होते हैं, संतान कष्ट और मानसिक अशांति होती है। दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) में रखने से राहु-केतु सक्रिय होते हैं, जिससे रिश्तों में कलह और धन हानि होती है। ये दोनों दिशाएं अग्नि तत्व के लिए सबसे घातक हैं। गलती से भी इनमें इंडक्शन ना रखें। खाना बनाते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करें इंडक्शन पर खाना बनाते समय व्यक्ति का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। पूर्व से सूर्य की ऊर्जा और उत्तर से कुबेर की ऊर्जा मिलती है, जिससे खाना पौष्टिक और पचने में आसान होता है। दक्षिण या पश्चिम की ओर मुंह करके खाना बनाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है। हमेशा दिशा का ध्यान रखें। सिंक और जल तत्व से दूरी वास्तु में अग्नि और जल तत्व का टकराव बहुत अशुभ होता है। इंडक्शन चूल्हा सिंक या जल स्रोत से कम से कम 3–4 फीट दूर होना चाहिए। अगर बहुत पास है, तो बीच में लकड़ी का बोर्ड या वास्तु यंत्र रखें। जल और अग्नि का संघर्ष होने से स्वास्थ्य और धन दोनों पर बुरा असर पड़ता है। इंडक्शन के आसपास हमेशा साफ-सफाई इंडक्शन चूल्हे के आसपास गंदगी, जूठे बर्तन या कचरा ना रखें। रोज सफाई करें। इंडक्शन के ऊपर या पास में कोई नकारात्मक चित्र न लगाएं। हर बार इस्तेमाल के बाद साफ करें और 'ॐ श्रीं ह्रीं अन्नपूर्णायै नमः' बोलकर धन्यवाद कहें। इससे रसोई में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और खाना अमृत समान हो जाता है। सही वास्तु से रसोई बनेगी धन और स्वास्थ्य का स्रोत दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पश्चिम में इंडक्शन रखें, सिंक से दूर रखें, पूर्व-उत्तर मुंह करके खाना बनाएं, साफ-सफाई रखें और मंत्र बोलें। ये छोटे-छोटे नियम अपनाने से मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं और घर में धन की कमी नहीं रहती है। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों के पूर्णतया सत्य एवं सटीक होने का हम दावा नहीं करते हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

ड्रग्स माफिया के खिलाफ मोगा पुलिस का अभियान, गांव-गांव में छापेमारी

मोगा. मोगा जिले के निहाल सिंह वाला क्षेत्र में नशा तस्करों के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए विशेष अभियान चलाया। यह अभियान पंजाब पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार वीरवार को चलाया गया, जिसमें क्षेत्र के कई गांवों में व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया। थाना निहाल सिंह वाला पुलिस की अगुआई उप पुलिस अधीक्षक अनवर अली द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार तथा मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आदेशों के तहत पूरे इलाके में नशा तस्करों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। इस दौरान पुलिस की अलग-अलग टीमें बनाकर विभिन्न गांवों और संदिग्ध स्थानों पर तलाशी ली गई। उप पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में नशे के कारोबार को जड़ से खत्म करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस दौरान किसी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री या नशे से संबंधित वस्तु बरामद होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कई थानों की पुलिस ने किया जॉइंट सर्च इस विशेष अभियान में थाना निहाल सिंह वाला के अलावा मोगा, बधनी कलां और अजीतवाल थानों की पुलिस टीमों ने भी भाग लिया। सभी टीमों ने मिलकर समन्वय के साथ अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई की, जिससे अभियान को प्रभावी बनाया जा सके। अधिकारियों ने नशा तस्करों और अन्य अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वे तुरंत ऐसे कार्य बंद कर दें। यदि कोई व्यक्ति इन गतिविधियों में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में जारी रहेंगे सर्च ऑपरेशन इस मौके पर थाना निहाल सिंह वाला के प्रभारी निरीक्षक राज सिंह, बधनी कलां के प्रभारी निरीक्षक गुरमेल सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह के अभियान जारी रहेंगे, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत किया जा सके और नशे के नेटवर्क पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

UP TET 2026 में सख्ती: बहुविवाह करने वाले नहीं भर पाएंगे फॉर्म

लखनऊ अगर आप भी उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचर बनने का ख्वाब देख रहे हैं और यूपी टीईटी (UP TET 2026) परीक्षा का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, तो आपके लिए एक बेहद अहम और जरूरी खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) पूरे पांच साल के लंबे इंतजार के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए 27 मार्च 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। हाल ही में जारी हुए नोटिफिकेशन के मुताबिक, इस बार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर होने जा रही इस बड़ी परीक्षा में 20 लाख से भी ज्यादा उम्मीदवारों और पहले से सेवा दे रहे शिक्षकों के शामिल होने की पूरी उम्मीद है। लेकिन आवेदन शुरू होने से ठीक पहले, आयोग ने कुछ ऐसे सख्त नियम और गाइडलाइन जारी की हैं, जिन्हें जानना हर उम्मीदवार के लिए बेहद जरूरी है खासकर उन लोगों के लिए जो शादीशुदा हैं। UP TET 2026: एक से ज्यादा शादी पर पाबंदी का नियम आयोग की तरफ से जारी की गई आधिकारिक गाइडलाइन में सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो शादीशुदा उम्मीदवारों से जुड़ा है। नोटिफिकेशन में बिल्कुल साफ कर दिया गया है कि ऐसे पुरुष अभ्यर्थी जो विवाहित हैं और जिनकी एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं, वे इस परीक्षा का फॉर्म भरने के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे। यह नियम सिर्फ पुरुषों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए भी उतना ही सख्त है। ऐसी महिला उम्मीदवार, जिसने किसी ऐसे पुरुष से शादी की है जिसकी पहले से ही एक पत्नी जीवित है, उन्हें भी इस परीक्षा से बाहर रखा जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो बहुविवाह (Polygamy) करने वाले उम्मीदवारों को यूपी टीईटी की रेस से सीधे तौर पर बाहर कर दिया गया है। पुरुष और महिला, दोनों ही वर्गों के लिए यह नियम एक समान लागू होगा। UP TET 2026: क्या इस नियम में मिल सकती है कोई छूट? हर कड़े नियम की तरह इस नियम में भी एक छोटी सी गुंजाइश छोड़ी गई है। आयोग के मुताबिक, अगर किसी विशेष मामले में राज्य के राज्यपाल महोदय खुद इस प्रतिबंध से किसी उम्मीदवार को खास छूट या मुक्ति दे देते हैं, तो केवल उसी सूरत में ऐसे उम्मीदवार यूपी टीईटी की परीक्षा में शामिल होने के हकदार बन सकेंगे। इसके अलावा किसी भी स्तर पर इस नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी। परीक्षा में बैठने का मतलब नौकरी की गारंटी नहीं आयोग ने उम्मीदवारों को एक और बात को लेकर आगाह किया है। गाइडलाइन में साफ लिखा है कि अगर किसी उम्मीदवार को यूपी टीईटी में बैठने की इजाजत मिल जाती है और उसका एडमिट कार्ड जारी हो जाता है, तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उसकी पात्रता पूरी तरह से प्रमाणित हो गई है। टीईटी पास करने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का कोई सीधा कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। नौकरी के समय भर्ती एजेंसी या नियोक्ता प्राधिकारी द्वारा ही उम्मीदवार की सभी योग्यताओं और दस्तावेजों को अंतिम रूप से जांचा और प्रमाणित किया जाएगा। इसलिए यह हर उम्मीदवार की अपनी जिम्मेदारी है कि वह फॉर्म भरने से पहले आयोग द्वारा तय किए गए योग्यता मानदंडों को अच्छी तरह से पढ़ ले और खुद को संतुष्ट कर ले। गलत जानकारी देने पर हो सकती है जेल अगर कोई उम्मीदवार नियमों के दायरे में नहीं आता है और फिर भी चालाकी से फॉर्म भर देता है, तो इसके लिए वह खुद जिम्मेदार होगा। आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि आवेदन में किसी भी तरह की भ्रामक, गलत या झूठी जानकारी देने पर उम्मीदवार का परीक्षा परिणाम तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उसका टीईटी प्रमाण पत्र जब्त कर लिया जाएगा और ऐसे गंभीर मामलों में उम्मीदवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुकदमा भी चलाया जा सकता है। ओएमआर शीट की दोबारा नहीं होगी चेकिंग परीक्षा देने के बाद अक्सर कई उम्मीदवारों को अपनी कॉपी दोबारा चेक कराने की इच्छा होती है। इस मुद्दे पर आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। उन्होंने बताया कि परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन अत्याधुनिक मशीनों (इलेक्ट्रॉनिक संसाधनों) के जरिए पूरी सावधानी से किया जाता है। इसकी स्कैनिंग में इतनी सटीकता होती है कि बार बार संवीक्षा की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसलिए, किसी भी उम्मीदवार के ओएमआर उत्तर पत्रक की दोबारा जांच, पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटनी के लिए किए गए किसी भी आवेदन पर बिल्कुल विचार नहीं किया जाएगा। इस संबंध में आयोग किसी भी तरह का पत्राचार स्वीकार नहीं करेगा। कब से कब तक भरे जाएंगे फॉर्म? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूपी टीईटी के लिए ऑनलाइन आवेदन 27 मार्च 2026 से शुरू होकर 26 अप्रैल 2026 तक चलेंगे। वहीं, आयोग ने इस बार की परीक्षाएं 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित करने का फैसला किया है। इसलिए, अगर आप सभी योग्यताओं को पूरा करते हैं, तो आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना फॉर्म सही सही जरूर भर लें।

एग्जाम कॉपी जांच का दूसरा फेज: 25 हजार उत्तर पुस्तिकाएं पहुंचीं, 300 टीचर कर रहे मूल्यांकन

राजनांदगांव. जिला मुख्यालय स्थित स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल इन दिनों दसवीं तथा बारहवीं बोर्ड के उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है. दूसरे चरण में भी मूल्यांकन के लिए 25000 उत्तर पुस्तिकाएं पहुंची है, जिनका मूल्यांकन आज से शुरू कर दिया गया है. मूल्यांकन कार्य में 300 से अधिक शिक्षक संलग्न किए गए हैं. स्कूल प्रबंधन की माने तो अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह तक मूल्यांकन का कार्य पूर्ण कराया जाना है. जिसके कारण मूल्यांकन कार्य में काफी तेजी देखने को मिल रही है. ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिला मुख्यालय स्थित स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल को ही एकमात्र मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की गई दसवीं तथा बारहवीं बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्टेट हाई स्कूल में ही सुनिश्चित किया जा रहा है. 16 मार्च से मूल्यांकन का कार्य शुरू हुआ है प्रथम चरण में 61000 उत्तर पुस्तिकाएं मूल्यांकन के लिए भेजी गई थी , जिसका मूल्यांकन पूर्ण कर लिया गया है. आज से दूसरे चरण में भेजी गई 25000 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी शुरू कर दिया गया है. प्रतिदिन 8000 से 10000 उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है. स्कूल प्रबंधन की माने तो अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह तक मूल्यांकन का कार्य पूर्ण किया जाना है. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के निर्देश के कारण मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जा रहा है.

X सर्विस फिर डाउन, अचानक ठप पड़ी और यूजर्स को नहीं मिल रही कोई जानकारी

नई दिल्ली सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) एक बार फिर तकनीकी दिक्कतों की वजह से चर्चा में है। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में यूजर्स ने शिकायत की कि यह प्लेटफॉर्म ठीक से काम नहीं कर रहा। लोगों को फीड लोड करने में परेशानी हुई, नई पोस्ट दिखाई नहीं दीं और कई मामलों में वे ऐप और वेबसाइट दोनों ही ठीक से एक्सेस नहीं कर पा रहे थे। अचानक आई इस दिक्कत ने लाखों यूजर्स के डिजिटल एक्सपीरियंस को प्रभावित किया। आउटेज की पुष्टि आउटेज ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Downdetector की ओर से भी की गई है। वहां पर कुछ ही समय में शिकायतों की संख्या तेजी से बढ़ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हजारों यूजर्स ने एक साथ दिक्कत दर्ज की, और शिकायतों का ग्राफ अचानक ऊपर चला गया। आमतौर पर इस तरह का स्पाइक इस बात का संकेत होता है कि समस्या डिवाइस या नेटवर्क की नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म के सर्वर या सिस्टम स्तर पर है। यूजर्स के सामने आईं ये दिक्कतें यूजर्स को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा, उनमें सबसे ज्यादा के लिए दिक्कत फीड का रिफ्रेश ना होना थी। कई लोगों ने बताया कि पोस्ट और कमेंट्स लोड नहीं हो रहे थे, जबकि कुछ को ‘Something went wrong’ जैसे एरर मेसेज दिखाई दिए। दिलचस्प बात यह रही कि कुछ यूजर्स को पुरानी पोस्ट तो दिख रही थीं लेकिन नई अपडेट नहीं आ रही थीं, जिससे लग जा रहा है कि बैकएंड सिंकिंग या सर्वर रिस्पॉन्स में गड़बड़ी हुई। दुनियाभर में सामने आए मामले रिपोर्ट्स की मानें तो आउटेज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और यूरोप सहित कई देशों से भी इसी तरह की रिपोर्ट्स सामने आईं, जिससे यह मामला ग्लोबल आउटेज का हो गया है। जब एक ही समय पर अलग-अलग देशों के यूजर्स एक जैसी समस्या रिपोर्ट करते हैं, तो यह संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म के इंफ्रास्ट्रक्चर में कोई बड़ी दिक्कत आई है। अच्छी बात यह है कि सीमित संख्या में ही यूजर्स इससे प्रभावित हुए हैं। फिलहाल, X की ओर से इस बारे में तुरंत कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस तरह के आउटेज के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। इनमें सर्वर ओवरलोड, अचानक बढ़ा ट्रैफिक, बैकएंड अपडेट या फिर किसी तकनीकी फेलियर की संभावना ज्यादा होती है। पहले भी X को ऐसे आउटेज का सामना करना पड़ा है, जो कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो गए। अगर आप भी इससे प्रभावित हुए हैं तो परेशान ना हों और कुछ वक्त इंतजार करें।