samacharsecretary.com

शराब प्रेमियों के लिए खुशखबरी, सस्ते रेट पर बिक रही शराब, ठेकों के बाहर मेला सा माहौल

जालंधर  नई एक्साइज पॉलिसी 1 अप्रैल से लागू होने जा रही है, इससे पहले शहर में शराब के ठेकों पर सस्ती दरों पर बिक्री ने लोगों को आकर्षित किया, जिसके चलते दिनभर और देर रात तक ठेकों पर भारी भीड़ देखने को मिली। पुराने ठेकों की समयावधि समाप्त होने के कारण ठेकेदारों द्वारा स्टॉक निकालने के लिए शराब कम कीमतों पर बेची गई, जिसका लोगों ने जमकर फायदा उठाया। शहर के विभिन्न इलाकों में ठेकों पर ऐसा माहौल देखने को मिला मानो मेला लगा हो। सुबह से ही ठेकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं और शाम होते-होते यह भीड़ और बढ़ गई। कई स्थानों पर लोगों ने बिना किसी रोक-टोक के पेटियों के हिसाब से शराब खरीदी। दोपहिया वाहनों पर भी लोग शराब की पेटियां ले जाते नजर आए। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग ग्रुपों के ठेके समाप्त होने के कारण शराब बेहद सस्ते दामों पर उपलब्ध थी। हालांकि, एक्साइज नियमों के तहत एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही शराब बेचने का प्रावधान है, लेकिन कई स्थानों पर इन नियमों की पालना होती नजर नहीं आई। इससे यह साफ हुआ कि सस्ती शराब के कारण मांग अचानक बढ़ गई। एक्साइज विभाग द्वारा ढोल या अन्य प्रचार माध्यमों पर पहले ही पाबंदी लगाई जा चुकी थी, जिसके चलते ठेकों पर किसी प्रकार का औपचारिक प्रचार नहीं किया गया। इसके बावजूद भारी भीड़ इस बात का संकेत दे रही थी कि सस्ती शराब की जानकारी लोगों तक अपने आप पहुंच गई थी। विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया, लेकिन हालात को देखते हुए व्यवस्था बनाए रखने और नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

यात्रियों से ठगी: स्टेशन पर महंगे दामों में पानी बेचकर वेंडर भर रहे जेब

सागर   बीना. रेलवे स्टेशन पर स्टॉल संचालकों व वेंडरों की दबंगई से यात्री परेशान हैं। स्टॉल पर बिकने वाली वस्तुओं के दाम उनकी मर्जी से तय होते हैं। स्टेशन पर 14 रुपए वाली पानी की बोतल बीस रुपए की कीमत पर बिकती है। ठंडा करने के नाम पर यात्रियों से छ: रुपए अधिक लेना उनकी आदत में शुमार है। यात्रा की तकलीफों से जूझते यात्री उनसे उलझने के बजाय खामोश रहना ही बेहतर समझते हैं। यही स्थिति अन्य वस्तुओं के लेनदेन में भी चलती है। यह सारा खेल अधिकारियों की शह पर स्टॉल संचालक व वेंडर करते हैं। पंजीयन के समय एग्रीमेंट में रेलवे की सभी शर्तों को मानना जरूरी होता है। उसमें स्टॉल पर रेट लिस्ट लगाना प्रमुख शर्त होती है। स्टॉल संचालक उसे पूरा करने का वादा भी करते हैं लेकिन मनमानी कीमत वसूलने के लिए उसे अमल में नहीं लाते। हद तो यह है कि निरीक्षण के दौरान आला अधिकारी भी डांट फटकार कर दिखावे की कार्रवाई पूरी कर लेते हैं। रेलवे स्टेशन पर चार व पांच नंबर प्लेटफॉर्म के बीच में स्थित स्टॉल पर यात्री से ठंडे पानी की बोतल के 14 की बजाय बीस रुपए व कोल्ड ड्रिंक की बोतल के चालीस की बजाय 45 रुपए लिए गए। भोपाल से गोरखपुर की यात्रा कर रहे यात्री इंद्रेश नागले ने बताया कि उसकी बहिन की शादी के बाद उसे लेने के लिए जा रहा था, जिसने स्टेशन वेंडर से पानी की बोतल खरीदी जो उसे 14 की बजाए बीस रुपए में दी व कोल्ड ड्रिंक की बोतल के चालीस की जगह 45 रुपए लिए। इसी प्रकार विदिशा से ललितपुर जा रहे विवेक रघुवंशी से भी वेंडर ने पानी की बोतल के बीस रुपए लिए। ऑनलाइन में भी ज्यादा रुपए लेने से नहीं डरते वेंडर बीना से भोपाल की दो दिन की यात्रा के दौरान यात्री वरुण मुदगल ने एक नंबर प्लेटफॉर्म पर बुकिंग ऑफिस के सामने स्थित स्टॉल से खरीदी। जिसमें वेंडर ने दोनों ही दिन यात्री से 14 की जगह 15 रुपए ऑनलाइन लिए। इसकी शिकायत यात्री ने रेलवे अधिकारियों से की है।

एमपी में इलाज के खर्चे के मुकाबले केरल से 4 गुना सस्ते, बावजूद इसके 43% लोग खुद कर रहे हैं ट्रीटमेंट का खर्च

भोपाल  मध्यप्रदेश में इलाज का खर्च भारत के अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है, खासकर केरल के मुकाबले। आम धारणा के विपरीत कि बेहतर स्वास्थ्य प्रणाली का मतलब महंगा इलाज है, आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश के लोग औसतन अपनी जेब से केवल ₹1,739 सालाना खर्च कर रहे हैं, जबकि केरल में यह आंकड़ा ₹7,889 है। इस कमी के बावजूद, मध्यप्रदेश की जनता को स्वास्थ्य सेवाओं के कुल खर्च का लगभग 43% अपनी जमा-पूंजी या उधारी से निकालना पड़ता है। 10 साल में स्वास्थ्य खर्च में उल्लेखनीय कमी लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का स्वरूप काफी बदल गया है। 2014-15 में हर व्यक्ति को अपने इलाज के लिए कुल स्वास्थ्य खर्च का 72% खुद वहन करना पड़ता था। सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज के दायरे के विस्तार ने इस भार को 43% तक घटा दिया है। केरल और मध्यप्रदेश की तुलना केरल को अक्सर देश का सबसे मजबूत स्वास्थ्य मॉडल माना जाता है, लेकिन वहां के लोग अभी भी अपने इलाज के लिए ज्यादा पैसा खर्च कर रहे हैं। केरल में आम व्यक्ति को सालाना ₹7,889 खर्च करना पड़ता है, जबकि मध्यप्रदेश में यह खर्च केवल ₹1,739 है। यह आंकड़ा यह स्पष्ट करता है कि कम संसाधनों के बावजूद मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य योजनाएं आम आदमी के लिए अधिक सुलभ साबित हो रही हैं। आम आदमी की जेब पर कितना भार?     मध्यप्रदेश: यहां कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल 43.3% ही जनता को अपनी जेब से देना पड़ रहा है ।     केरल: केरल की जनता को आज भी इलाज पर कुल खर्च का 59.1% हिस्सा खुद वहन करना पड़ता है ।     उत्तर प्रदेश: यूपी में स्थिति और भी गंभीर है, वहां लोग अपने इलाज का 63.7% पैसा खुद भर रहे हैं। दस साल पहले 72% पैसा खुद खर्च करना पड़ता था लोकसभा में सामने आए आंकड़ों को देखें तो मध्यप्रदेश में 2014-15 के दौरान हालात चिंताजनक थे। तब हर व्यक्ति को इलाज के लिए 72% पैसा खुद के बैंक खाते या उधारी से चुकाना पड़ता था । लेकिन पिछले 7-8 वर्षों में सरकारी दखल ने इस आंकड़े को 43.3% पर लाकर खड़ा कर दिया है । आम आदमी की जेब पर असर मध्यप्रदेश में कुल स्वास्थ्य खर्च का 43.3% जनता अपनी जेब से देती है। उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 63.7% है, जबकि केरल में यह 59.1% है। इस तुलना से यह स्पष्ट होता है कि मध्यप्रदेश के लोग देश के कई राज्यों की तुलना में कम आर्थिक बोझ उठाते हैं। सरकारी पहल और भविष्य की संभावनाएं मध्यप्रदेश में सरकारी योजनाओं के प्रभाव ने आम जनता पर खर्च का बोझ कम किया है। स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और मुफ्त इलाज के दायरे में विस्तार ने इसे संभव बनाया है। यदि इसी तरह योजनाओं को आगे बढ़ाया गया, तो आने वाले वर्षों में जनता पर खर्च और भी घट सकता है। जेब से खर्च की स्थिति ताजा आंकड़ों (2021-22) के मुताबिक, मध्यप्रदेश में एक व्यक्ति को साल भर में अपने स्वास्थ्य पर औसतन ₹1,739 अपनी जेब से खर्च करने पड़ रहे हैं। 2014-15 में प्रति व्यक्ति यह खर्च ₹1,808 था, जो कुल हेल्थ बजट का 72% होता था। आज की स्थिति मेंअब यह हिस्सा घटकर 43.3% रह गया है। अफसरों का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और मुफ्त इलाज का दायरा बढ़ा है। केरल के मुकाबले एमपी के लोग 'किस्मत वाले' अगर तुलना करें, तो हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल स्टाफ के मामले में समृद्ध केरल जैसे राज्य में भी लोगों को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसा देना पड़ रहा है। केरल में प्रति व्यक्ति अपनी जेब से ₹7,889 खर्च करने पड़ते हैं। मध्यप्रदेश में यह खर्च महज ₹1,739 है । राष्ट्रीय औसत: देश का औसत खर्च ₹2,600 है, यानी मध्यप्रदेश के लोग राष्ट्रीय औसत से भी कम पैसा अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं।

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत: MP में पूरी टैक्स छूट योजना बढ़ सकती है 2 साल

भोपाल प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ा सकती है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने परिवहन विभाग को अभिमत के लिए पत्र लिखा है। यहां से अभिमत मिलने के बाद प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। पहले दी गई थी एक साल की छूट पिछले वर्ष मार्च 2025 में राज्य सरकार ने ईवी नीति लागू करते हुए इलेक्ट्रिक दो पहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहनों पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में एक वर्ष की छूट दी थी। यह छूट 27 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। अब इसे दो वर्ष तक बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। रेट्रोफिटिंग पर भी मिल सकती है राहत ईवी नीति में 15 साल पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर दी गई छूट भी समाप्त हो गई है। इसके तहत दो पहिया पर 5 हजार, तीन पहिया पर 10 हजार और कार पर 25 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान था। इस छूट को बढ़ाने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा गया है। पांच शहरों को बनाया जाएगा मॉडल शहर नीति के तहत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन को मॉडल इलेक्ट्रिक व्हीकल शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही नीति अवधि के अंत तक 80 प्रतिशत सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। कमर्शियल वाहनों को 2027 तक छूट कमर्शियल इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे ई-बस, ट्रक, ट्रैक्टर और एंबुलेंस को वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दी गई छूट 2027 तक जारी रहेगी। अधिकारियों का क्या कहना आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे का कहना है कि ईवी पर वाहन कर और पंजीयन शुल्क में दो वर्ष के लिए 100 प्रतिशत छूट बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है। इससे पहले परिवहन विभाग से अभिमत लिया जा रहा है।

चार चुनावी राज्यों में महिलाओं के लिए 24 हजार करोड़, तमिलनाडु में समर पैकेज, असम में बिहू बोनस

नई दिल्ली अगले महीने भारत के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से चार प्रमुख राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने चुनावी रणनीति के तहत सीधे कैश ट्रांसफर करने का बड़ा निर्णय लिया है। ये चारों राज्य महिलाओं के बैंक खातों में कुल 24,500 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने का वादा कर रहे हैं। इन राज्यों का कहना है कि अगर वे सत्ता में आए, तो यह सहायता चालू रहेगी। तमिलनाडु का समर पैकेज और बिहार बोनस तमिलनाडु में, DMK सरकार ने विशेष समर पैकेज के तहत महिलाओं के खातों में 2-2 हजार रुपये डाल दिए हैं। इस कार्यक्रम को लेने के पीछे सरकार का लक्ष्य है कि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हों। वहीं, असम की भाजपा सरकार ने बिहू समारोह के लिए महिलाओं को 4-4 हजार रुपये देने का ऐलान किया है, ताकि त्योहार का आनंद बढ़ सके। केरल और बंगाल की योजनाएं केरल में वामपंथी सरकार ने ‘स्त्री सुखम’ नकद योजना शुरू की है, जिसके तहत 10 लाख महिलाएं हर महीने 1,000 रुपये प्राप्त कर रही हैं। दूसरी ओर, बंगाल की तृणमूल सरकार ने लक्ष्मी भंडार स्कीम को लागू करते हुए फरवरी में 500 रुपये की वृद्धि की थी। ममता बनर्जी की सरकार का यह प्रयास अगले चुनाव में एक बार फिर से लाभ हुनाने का है। महिलाओं का प्रभाव और वोटिंग ट्रेंड इन चारों राज्यों में लगभग 4.1 करोड़ महिलाएं इन योजनाओं की लाभार्थी हैं, जो कुल वोटरों का 23% हैं। इसलिए ये योजनाएं चुनावी गणित में काफी महत्वपूर्ण मानी जा रहीं हैं। पिछले 5 साल में देखा गया है कि महिलाओं को नकद सहायता देने वाले राज्यों की संख्या 1 से बढ़कर 15 हो गई है। इन राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा महिलाएं लाभ उठा रही हैं। राज्य बजट और कैश ट्रांसफर की रुख इतना ही नहीं, झारखंड जैसा राज्य तो अपने ग्रामीण विकास बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर करने में खर्च कर रहा है। ये सभी योजनाएं जबकि खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बावजूद लागू हो रही हैं। हालांकि, यह भी देखने को मिल रहा है कि कई राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर ध्यान दे रहे हैं। अब 15 राज्य दे रहे महिलाओं को नगद सहायता बीते 5 साल में हुए चुनावों का ट्रेंड देखें तो पता चला है कि महिलाओं को कैश ट्रांसफर देने वाले राज्यों की संख्या एक से बढ़कर 15 हो गई है। ये राज्य 13 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को 2.46 लाख करोड़ रु. तक सालाना नकद पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं, जो इन राज्यों के कुल बजट का 0.7% है। झारखंड जैसा राज्य अपने ग्रामीण विकास के कुल बजट का 81% हिस्सा महिलाओं को कैश ट्रांसफर में दे रहा है। लेकिन, ट्रेंड ये भी है कि जो राज्य विकास योजनाओं को रोककर नकद स्कीमों पर खर्च कर रहे हैं, वहां कई योजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं। नकद स्कीमों के चलते महाराष्ट्र-कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों को अपने अहम खर्चों में कटौती करनी पड़ी है। मुफ्त योजनाएं और अन्य लाभ महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कैश ट्रांसफर योजनाएं केवल महिलाओं के लिए नहीं हैं। तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशन कार्डधारकों को मुफ्त फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस सिलेंडर मुफ्त प्रदान किए जा रहे हैं। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम अब 62 लाख लोगों को लाभ पहुंचा रही है, और पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। बेरोजगारी से निपटने के प्रयास बंगाल में करीब 1,500 करोड़ रुपये बेरोजगार युवाओं के लिए पेंशन योजना पर खर्च किए जा रहे हैं। इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें नौकरी की तलाश में मदद करना है। इस समय चारों राज्यों में महिलाओं को केन्द्रित करके चुनावी जंग लड़ी जा रही है। इन राज्यों में गेमचेंजर बनीं कैश ट्रांसफर वाली योजनाएं     मध्य प्रदेश: (2023): ‘लाड़ली बहना’ योजना के तहत 1.31 करोड़ महिलाओं को 1250 रुपए/माह; कई सीटों पर बढ़त।     कर्नाटक (2023): ‘गृह लक्ष्मी’ योजना (2000 रु./माह) ने कांग्रेस को जीत दिलाई।     ओडिशा (2024): ‘सुभद्रा’ योजना से भाजपा को पहली बार सत्ता।     महाराष्ट्र (2024): ‘लाड़की बहिन’ योजना (1500 रुपए/माह), बड़ा महिला वोट आधार।     झारखंड (2024): ‘मैया सम्मान’ योजना का चुनावी असर। हेमंत सोरेन की वापसी हुई। चुनावी राज्यों में ये भी ‘मुफ्त’ योजनाएं… तमिलनाडु में 2.22 करोड़ राशनकार्डधारकों को मुफ्त ​फ्रिज, एजुकेशन लोन वेवर और हर साल तीन गैस ​सिलेंडर मुफ्त। केरल में कल्याण पेंशन स्कीम में अब 62 लाख लोग। पेंशन भी 600 रु. बढ़ाकर 2 हजार रु. की। बंगाल में 1500 करोड़ रु. बेरोजगार युवा पेंशन पर खर्च हो रहे हैं।

सुरक्षा में हाईटेक कदम: टेकनपुर अकादमी के साथ 20 ड्रोन खरीद का बड़ा सौदा

ग्वालियर  पुनीत श्रीवास्तव, ग्वालियर. मप्र पुलिस अब अपनी एक्शन पावर को डिजिटल और आसमानी ऊंचाई देने जा रही है। दंगों और उपद्रव की स्थिति में अब पुलिसकर्मियों को भीड़ के करीब जाकर जोखिम लेने की जरूरत नहीं होगी। सेना और बीएसएफ की तर्ज पर प्रदेश पुलिस टीयर गैस लॉन्चर ड्रोन से लैस होने जा रही है। ग्वालियर के पास स्थित बीएसएफ अकादमी टेकनपुर की टीयर गैस यूनिट ने इन ड्रोन्स को खास तौर पर तैयार किया है। पुलिस मुख्यालय ने पहली खेप में 20 ड्रोन्स का सौदा किया है, जिनकी डिलीवरी का इंतजार अब अंतिम चरण में है। एडीजी प्लानिंग योगेश चौधरी ने बताया कि ड्रोन्स से प्रदेश में पुलिस की ताकत और तकनीक में इजाफा होगा। ड्रोन की डिलीवरी मिलने के बाद उन्हें संवेदनशीलता के आधार पर जिलों में वितरित करने के साथ ऑपरेटिंग का प्रशिक्षण भी दिलाएंगे। दंगाइयों पर काबू पाने का रामबाण इलाज साबित होगा पुलिस को दंगे या अन्य आपराधिक घटनाओं पर अंकुश के लिए परंपरागत उपायों के साथ ही अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेना जरूरी हो चुका है। इसके लिए ड्रोन बेहद कारगर साबित हो सकते हैं। इसकी मदद से भीड़ में छिपे बदमाशों की पहचान बहुत आसान हो जाएगी। इतना ही नहीं रात में भी उनके चेहरे पहचाने जा सकेंगे। ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी खास बात यह है कि ड्रोन की सहायता से 300 मीटर तक आंसू गैस छोड़ी जा सकेगी। इसमें पूरी घटना रिकॉर्ड होंगी और कई मीटर दूर से इसे संचालित किया जा सकेगा।

US-ईरान जंग के बीच पेट्रोल के दाम घटने की संभावना, जेडी वेंस ने शेयर किया प्लान

वॉशिंगटन  मिडिल ईस्ट में बरसते बारूद ने पूरी दुनिया का तेल पी लिया है. कई देशों में तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है और अमेरिका जैसे देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं. हर कोई सिर्फ एक सवाल पूछ रहा है कि ये जंग कब खत्म होगी और कब ईंधन के दाम गिरेंगे? इस सवाल का जवाब हाल ही में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दे दिया है. उन्होंने बताया है कि गैस के दाम कब गिरेंगे और जंग को लेकर उनका प्लान आखिर क्या है? वेंस ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर क्या कहा? वेंस का कहना है कि अमेरिका का मकसद ईरान पर कब्जा करना नहीं, बल्कि उसे इतना ‘शक्तिहीन’ कर देना है कि वह दोबारा कभी चुनौती न बन सके. जेडी वेंस ने एक हालिया इंटरव्यू में अमेरिकी जनता को बड़ी राहत देने की कोशिश की।  उन्होंने कहा कि अमेरिका, ईरान में एक या दो साल तक नहीं रुकने वाला है. राष्ट्रपति ट्रंप का मिशन साफ है, काम खत्म करो और बाहर निकलो. उन्होंने यह भी दावा किया कि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की समस्या सिर्फ कुछ समय के लिए है और जैसे ही ऑपरेशन सफल होगा, गैस के दाम फिर से नीचे आ जाएंगे।  ईरानी नौसेना पर आखिरी अटैक अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कुछ ऐसे वीडियो और तस्वीरें जारी की हैं, जिनमें ईरानी नौसेना के जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है. अमेरिका का कहना है कि दशकों से ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में जो दादागिरी मचा रखी थी, अब उसका अंत हो चुका है. अमेरिकी मिसाइलों ने ईरान के उन सैन्य ठिकानों को खंडहर बना दिया है जो व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा बने हुए थे।  जहां अमेरिका अपनी जीत के दावे कर रहा है, वहीं ईरान की तरफ से आने वाली खबरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं. ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने दावा किया है कि उन्होंने दुबई में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से जोरदार हमला किया है. रिपोर्टों के अनुसार, इस हमले में ‘सैकड़ों’ अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं और घंटों तक एम्बुलेंस और राहत दल शवों और घायलों को ढोते रहे। 

हलवारा एयरपोर्ट से लुधियाना में अप्रैल से बुकिंग शुरू होगी, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा – मई में उड़ान संभव

लुधियाना  केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के लोगों को एक बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने बताया कि लुधियाना के हलवारा हवाई अड्डे से बहुत जल्द उड़ानें शुरू होने जा रही हैं। लंबे समय से लोग इस एयरपोर्ट के शुरू होने का इंतजार कर रहे थे और अब आखिरकार यह सपना पूरा होने जा रहा है। रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए इसे पंजाब के लिए गर्व का पल बताया। उन्होंने जानकारी दी कि अप्रैल महीने से ही हलवारा एयरपोर्ट से फ्लाइट्स की बुकिंग शुरू हो जाएगी। पहली उड़ान 10 से 15 मई के बीच शुरू होने की उम्मीद है। शुरुआत में यहां से 160 सीटों वाला ए320 इकोनॉमी एयरक्राफ्ट उड़ान भरेगा, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि शुरुआत में दिल्ली और हलवारा के बीच रोजाना दो फ्लाइट्स चलाई जाएंगी। एक फ्लाइट सुबह होगी और दूसरी दोपहर में। इससे न सिर्फ लोगों को सफर करने में आसानी होगी, बल्कि व्यापार और कारोबार को भी काफी फायदा मिलेगा। अब तक लुधियाना और आसपास के इलाकों के लोगों को हवाई यात्रा के लिए चंडीगढ़ या अमृतसर जाना पड़ता था, लेकिन हलवारा एयरपोर्ट शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी। बिट्टू ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी धन्यवाद किया और कहा कि उनके विजन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देने की वजह से ही ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स संभव हो पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कदम पंजाब के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा और राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। इस एयरपोर्ट के शुरू होने से सिर्फ यात्रा ही आसान नहीं होगी, बल्कि इसका असर पंजाब की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। व्यापार बढ़ेगा, नए निवेश आएंगे और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खासकर लुधियाना जैसे औद्योगिक शहर के लिए यह एक बहुत बड़ी सुविधा साबित होगी, क्योंकि यहां के कारोबारियों को अब देश के दूसरे हिस्सों में जाने के लिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। व्यापार और यात्रा को मिलेगा बड़ा बूस्ट बिट्टू ने कहा कि हलवारा एयरपोर्ट के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि पंजाब में व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। इसे राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। पीएम मोदी का जताया आभार बिट्टू ने इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। बिट्टू ने कहा कि उनके दूरदर्शी नेतृत्व और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की प्रतिबद्धता से ही ऐसे प्रोजेक्ट संभव हो पा रहे हैं। इस नई शुरुआत के साथ पंजाब अब देश-विदेश से बेहतर कनेक्टिविटी की ओर बढ़ रहा है और विकास की नई उड़ान भरने को तैयार है। ग्लाडा और AAI का ज्वाइंट वैंचर है एयरपोर्ट इसमें एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और पंजाब सरकार की 49 फीसदी है। पंजाब सरकार की तरफ से यह काम ग्लाडा ने करवाया है। इस तरह एयरपोर्ट ग्लाडा और एएआई का ज्वाइंट वेंचर है। एयरपोर्ट निर्माण पर खर्च की गई कुल राशि टर्मिनल बिल्डिंग आदि के निर्माण पर लगभग ₹70 करोड़ के करीब खर्च हुए। इसमें से ₹27 करोड़ मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग के लिए और ₹27 करोड़ विमानों के खड़े होने और टैक्सी-वे (Tarmac) के लिए खर्च किए गए हैं। इसके अलावा एप्रोच रोड के निर्माण पर भी 10 करोड़ के करीब खर्च किए गए। वहीं 161.27 एकड़ जमीन के बदले किसानों को लगभग ₹39.40 करोड़ का मुआवजा वितरित किया गया। किसानों को प्रति एकड़ मुआवजा लगभग ₹20.61 लाख (पुनर्वास भत्ते सहित) तय किया गया था।