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मौलाना को पड़ा भारी: CM योगी के खिलाफ अपशब्द कहने पर यूपी पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया

पूर्णिया  गौमाता और योगी आदित्यनाथ की मां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले मौलाना अब्दुल्ला सलीम को उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने मौलाना को पूर्णिया जिले से हिरासत में लिया और अब उसे यूपी ले जाया जा रहा है. गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा के बीच उसे ट्रांजिट प्रक्रिया पूरी कराकर उत्तर प्रदेश रवाना किया गया. इस कार्रवाई के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।  मौलाना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे एक मजहबी जलसे के दौरान मुख्यमंत्री और उनकी मां को लेकर विवादित टिप्पणी करते नजर आए थे. इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भारी आक्रोश देखने को मिला. कई संगठनों ने इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके में युवाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया. परिवर्तन चौक और गांधी पार्क के आसपास मौलाना के खिलाफ पोस्टर लगाए गए थे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठी थी. स्थिति को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन पोस्टर हटवा दिए और इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया।  120 से ज्यादा हुईं थीं FIR बताया जा रहा है कि मौलाना ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश में लागू गौकशी कानूनों की आलोचना करते हुए तीखी भाषा का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया. गिरफ्तारी की आशंका के बीच उन्होंने अपने समर्थकों से सोशल मीडिया और सड़कों पर विरोध करने की अपील भी की थी, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया. लखनऊ के वीवीआईपी गेस्ट हाउस, नगर निगम, अलीगंज, आलमबाग, गोमतीनगर समेत पूरे शहर में पोस्टर लगे थे. मौलाना सलीम पर उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं।  बिहार से यूपी ला रही पुलिस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायतों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है. मौलाना को उत्तर प्रदेश लाकर आगे की पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस पूरे घटनाक्रम के बाद दोनों राज्यों की पुलिस सतर्क है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त निगरानी की जा रही है। 

सानिया मिर्जा का दिलचस्प खुलासा: बेटे को तलाक के बारे में किस तरह बताया

हैदराबाद  भारतीय टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने निजी जीवन को लेकर हमेशा ही गरिमापूर्ण चुप्पी बनाए रखी है, खासकर शोएब मलिक से अलग होने के बाद से। हालांकि, हाल ही में, पूर्व विश्व नंबर 1 ने तलाक और एकल मातृत्व के अपने सफर के बारे में दिल को छू लेने वाले विचार साझा करना शुरू कर दिया है, जिससे कोर्ट के बाहर उनके जीवन की एक दुर्लभ और ईमानदार झलक मिलती है। फिलहाल अपने पेशेवर दायित्वों और बेटे इज़हान मिर्ज़ा मलिक की परवरिश पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सानिया अपने टॉक शो 'सर्व इट अप विद सानिया' के माध्यम से खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रही हैं। हाल ही के एक एपिसोड में उद्यमी मसाबा गुप्ता के साथ बातचीत में, दोनों ने तलाक से निपटने और पालन-पोषण पर इसके प्रभाव के बारे में खुलकर चर्चा की। सानिया मिर्जा ने बेटे के साथ तलाक की बातचीत पर अपनी राय व्यक्त की। अपने जीवन के सबसे कठिन अनुभवों में से एक को याद करते हुए, सानिया ने बताया कि अपने छोटे बेटे से अलगाव के बारे में बात करने से पहले उन्होंने पेशेवर सलाह ली थी। उन्होंने साझा किया, “व्यक्तिगत रूप से, जब मैं अपने जीवन में एक कठिन दौर से गुज़र रही थी, तो मैंने एक बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह ली थी कि इज़हान से इस बारे में कैसे बात करूं क्योंकि वह छोटा था।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें जो सबसे महत्वपूर्ण सलाह मिली, वह ईमानदारी और सामान्यता के बारे में थी। “एकमात्र सलाह जो मुझे वास्तव में याद रही, वह यह थी कि उसे बाहर से कुछ भी पता नहीं चलना चाहिए। आपको उसे खुद ईमानदारी से बताना होगा, और यह उसके लिए सामान्य बात होनी चाहिए। उसे अजीब महसूस नहीं करना चाहिए,” उन्होंने बच्चों के साथ खुले संवाद के महत्व पर जोर देते हुए कहा। जब उसे पैनिक अटैक आने लगे फिल्म निर्माता और करीबी दोस्त फराह खान के साथ एक और भावुक एपिसोड में, सानिया ने अपने तलाक के बाद आने वाली चुनौतियों के बारे में बात की, जिनमें पैनिक अटैक भी शामिल थे। फराह ने एक ऐसे पल को याद किया जब सानिया एक लाइव शो से पहले संघर्ष कर रही थीं, और कहा, "मैंने आपको कभी पैनिक अटैक से गुजरते नहीं देखा था। मैं बहुत डर गई थी।" सानिया ने उस दौर की अपनी कमजोरी को स्वीकार करते हुए कहा, "मैं कांप रही थी… अगर तुम नहीं आते, तो मैं वह शो नहीं करती," यह इस बात को उजागर करता है कि अलगाव ने उन पर भावनात्मक रूप से कितना गहरा प्रभाव डाला था। बातचीत में तलाक का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा हुई। यह मानते हुए कि अलगाव बच्चे को प्रभावित कर सकता है, सानिया ने एक स्वस्थ वातावरण चुनने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने समझाया, “बच्चे पर असर तो पड़ेगा ही। इसलिए आपको समझना होगा और एक बेहतर स्थिति चुननी होगी। अगर बच्चा दो बेहद दुखी लोगों को देखेगा, तो आपको एक फैसला लेना ही होगा।” उन्होंने आगे कहा कि एक आदर्श परिवार होने का दिखावा करना फायदे से ज्यादा नुकसानदायक होता है। उन्होंने कहा, "अगर आपको लगता है कि आप दिखावा कर सकते हैं, तो आप खुद को धोखा दे रहे हैं क्योंकि बच्चा यह बात समझ जाता है।" कई महीनों की अटकलों के बाद, सानिया मिर्जा और शोएब मलिक ने जनवरी 2024 में अपनी 14 साल की शादी खत्म कर दी। उनका बेटा इज़हान, जिसका जन्म अक्टूबर 2018 में हुआ था, फिलहाल सानिया के साथ दुबई में रहता है।

महोबा में बैडमिंटन कोर्ट पर खेलते हुए खिलाड़ी की मौत, 5 सेकंड में हुआ दर्दनाक हादसा

महोबा  महोबा जिला स्टेडियम में बैडमिंटन खेल रहे पस्तोर गली निवासी 58 वर्षीय सुधीर गुप्ता की सडन कार्डियक अरेस्ट से अचानक मौत हो गई. रोजाना की तरह स्टेडियम पहुंचे सुधीर अपने साथियों के साथ पूरी ऊर्जा में खेल रहे थे. लगातार तीन शॉट खेलने के महज 11 सेकंड बाद उन्हें सीने में बेचैनी महसूस हुई. उन्होंने अपना हाथ दिल की तरफ ले जाने की कोशिश की, लेकिन 5 सेकंड के भीतर ही वह अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े. साथी खिलाड़ी उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।  सीसीटीवी में कैद हुआ खौफनाक मंजर स्टेडियम के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि सुधीर गुप्ता पूरी तरह फिट लग रहे थे. खेल के दौरान अचानक उनके कदम लड़खड़ाए और वह संभल नहीं पाए।  डॉक्टरों का प्राथमिक अनुमान है कि यह साइलेंट हार्ट अटैक का मामला है. इस घातक अटैक ने उन्हें संभलने या मदद मांगने तक का मौका नहीं दिया. खेल का मैदान देखते ही देखते मातम के सन्नाटे में बदल गया।  परिवार में कोहराम, वीडियो वायरल सुधीर गुप्ता की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार और पस्तोर गली मोहल्ले में कोहराम मच गया है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. सोशल मीडिया पर अब यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जो लोगों को फिटनेस और जीवन की अनिश्चितता पर सोचने पर मजबूर कर रहा है. एक हंसते-खेलते इंसान का इस तरह अचानक चले जाना हर किसी को हैरान कर रहा। है।   

राजस्थान रॉयल्स की धमाकेदार जीत: CSK को 8 विकेट से रौंदा, वैभव सूर्यवंशी का तूफानी अर्धशतक

 गुवाहाटी बाएं हाथ के तूफानी वैभव सूर्यवंशी हिटिंग मशीन के तौर पर अपनी पहचान बना रहे हैं. पहले उन्होंने आईपीएल 2025 में तहलका मचाया और अब 19वें सीजन के पहले ही मैच में 15 बॉल पर 50 रन ठोक तबाही मचा दी. उन्होंने इस पारी के दम पर एक तरह से ऐलान कर दिया है कि सामने कोई भी गेंदबाज हो, उन्हें फर्क नहीं पड़ता. 30 मार्च की शाम जब वो गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में बैटिंग करने आए तो छक्कों की बारिश कर दी. उनकी 17 बॉल पर 52 रनों की तूफानी पारी के दम पर राजस्थान ने चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से रौंद दिया. जीत के हीरो वैभव ने मैच के बाद अपने गेम प्लान और माइंडसेट के बारे में बड़ा खुलासा किया।  चेन्नई ने पहले बैटिंग करते हुए 128 रनों का टारगेट सेट किया था, जिसका पीछा करने उतरे वैभव ने पहले ओवर से पिटाई शुरू की. उन्होंने 4 चौके और 5 छक्कों की मदद से 17 बॉल पर 52 रन ठोके. मैच के बाद वैभव ने अपनी शानदार पारी और जन्मदिन के जश्न पर मजेदार बातें साझा कीं. उन्होंने बताया कि 27 मार्च को बर्थडे के दिन कुछ खास सेलिब्रेशन नहीं किया. उन्होंने बताया, 'सच कहूं तो मैंने कुछ खास नहीं किया. केक कटिंग होने वाली थी, लेकिन चेहरे पर केक मलने से बचने के लिए मैं जल्दी सो गया था।  वैभव ने आखिर क्या कहा? अपनी बैटिंग के तरीके के बारे में वैभव ने चेहरे पर एक शरारती स्माइल लेकर कहा कि मैं डिफेंस के बारे में सोचता तो हूं, लेकिन आज हमारा प्लान पावरप्ले में गेम को कंट्रोल करना था, क्योंकि छोटे टारगेट का पीछा करते समय यह दौर बहुत अहम होता है. अगर बॉलिंग टीम वहां अच्छा करती है, तो गेम उनकी तरफ झुक सकता है, लेकिन हमारा पावरप्ले बहुत अच्छा रहा।  चेन्नई के खिलाफ 128 रनों के टारगेट को चेज करने की सोच के बारे में वैभव ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि शुरुआत में विकेट थोड़ा चिपचिपा (Sticky) था, लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी हुई, वह बल्ले पर अच्छी तरह आने लगी. वैभव सूर्यवंशी ने अपने गेम प्लान और मानसिकता के बारे में बताया कि कोचिंग स्टाफ ने मुझसे बस इतना कहा कि वे मुझ पर भरोसा करते हैं और मुझे अपना नेचुरल गेम खेलना चाहिए. मेरे ओपनिंग पार्टनर यशस्वी जायसवाल हर गेंद के बाद मुझसे बात कर रहे थे. वह मुझे स्ट्राइक रोटेट करने और अच्छे शॉट्स खेलने के लिए लगातार गाइड कर रहे थे।  मैच का लेखा-जोखा अगर मैच की बात करें तो बरसापारा स्टेडियम में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी चेन्नई सुपर किंग्स की टीम 19.4 ओवरों में सिर्फ 127 रन बना सकी थी. राजस्थान के लिए वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल की जोड़ी ने पावरप्ले में तेज शुरुआत दिलाई और पहले 6 ओवरों में ही मैच चेन्नई की पकड़ से दूर कर दिया. राजस्थान ने मात्र 12.1 ओवर में 2 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।  ऐतिहासिक जीत यह जीत राजस्थान रॉयल्स के आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी जीत (गेंद शेष रहने के मामले में) साबित हुई. राजस्थान ने 47 गेंद बाकी रहते जीत हासिल की और 12 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा. इससे पहले राजस्थान ने 2014 में आरसीबी के खिलाफ 42 गेंद रहते जीत दर्ज की थी. 

राजस्थान बोर्ड 12वीं परिणाम: बेटियों की शानदार सफलता, दीपिका ने 99.8% और नव्या मीणा ने 99.6% अंक प्राप्त किए

जयपुर   राजस्थान बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 की घोषणा कर दी गई है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) 12वीं आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स का रिजल्ट Link आज 31 मार्च को सुबह 10 बजे एक्टिव कर दिया गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने ऑनलाइन माध्यम से रिजल्ट जारी किया है। इस दौरान बोर्ड के प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ भी बोर्ड कार्यालय से कार्यक्रम में शामिल रहे। रिजल्ट जारी हो गया है और Rajasthan Board 12th Result 2025 Direct Link ऑफिशियल वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर एक्टिव है। छात्र सबसे पहले रोल नंबर से यहीं अपना रिजल्ट देख सकेंगे। यहां राजस्थान बोर्ड बारहवीं परिणाम 2026 से जुड़ी लेटेस्ट अपडेट्स देखते रहें। इस साल राजस्थान बोर्ड 12वीं की परीक्षा में कुल 9 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनमें से 96.23 छात्र सफल घोषित किए गए हैं. पिछले साल की तरह इस बार भी [लड़कियों/लड़कों] का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने सफलता का परचम लहराया. बोर्ड मुख्यालय से प्रशासक शक्ति सिंह राठौड़ और सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी नतीजों की पुष्टि की है।  तीनों स्ट्रीम का पास प्रतिशत (Stream-wise Data) विज्ञान (Science): 97.52 प्रतिशत वाणिज्य (Commerce): 93.64 प्रतिशत कला (Arts): 97.54 प्रतिशत साइंस में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं साइंस रिजल्ट में लड़कों से ज्यादा लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं.  साइंस में कुल 287068 स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन किया था. इसमें से 285299 स्टूडेंट परीक्षा में बैठे थे. साइंस का परीक्षा परिणाम 97.52 प्रतिशत रहा. 97.02 प्रतिशत छात्र और 98.34 छात्राएं पास हुई हैं. 178051 में से 146644 छात्र और 107248 में से 98836 छात्राएं फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  कॉमर्स में लड़कों का दिखा जलवा राजस्थान 12वीं बोर्ड  कॉमर्स में लड़कों का रिजल्ट बेहतर रहा. कॉमर्स में कुल 30798 स्टूडेंट रजिस्टर्ड थे, जिसमें से 30580 स्टूडेंट परीक्षा हिस्सा लिया था. कॉमर्स का परिणाम 93.64 प्रतिशत रहा.  छात्रों के पास होने का प्रतिशत 94.04 और छात्राओं का पास होने का प्रतिशत 92.82 रहा. 20666 छात्रों में से 13976 लड़के और 9914 लड़कियों में से 8096 लड़कियां फर्स्ट डिवीजन से पास हुई हैं।  आर्ट्स में लड़कियों ने मारी बाजी राजस्थान बोर्ड 12वीं आर्ट्स में बेटियां आगे रहीं. आट्‌र्स में कुल 591023 स्टूडेंट रजिस्टर्ड हैं, जिसमें से 583201 स्टूडेंट परीक्षा में शामिल हुए। परिणाम 97.54 प्रतिशत रहा. लड़कों के पास होने का प्रतिशत 96.68 और लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 98.29 रहा।  कैसे चेक करें अपना रिजल्ट: सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in पर जाएं. होमपेज पर 'Main Examination Results 2026' के लिंक पर क्लिक करें. अब अपनी स्ट्रीम (Science/Arts/Commerce) का चुनाव करें. अपना रोल नंबर दर्ज करें और 'सबमिट' बटन दबाएं. आपका रिजल्ट स्क्रीन पर होगा, इसे भविष्य के लिए डाउनलोड कर लें. रिजल्ट का डायरेक्ट लिंक: rajeduboard.rajasthan.gov.in, rajresults.nic.in राजस्थान बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित करने के साथ ही उन छात्रों के लिए भी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जो अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं. यदि किसी विद्यार्थी को लगता है कि उसे उसकी मेहनत के अनुरूप अंक नहीं मिले हैं, तो वह 'स्क्रूटनी' या कॉपियों की 'री-चेकिंग' के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है. इसके लिए बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रति विषय शुल्क जमा करना होगा. स्क्रूटनी की प्रक्रिया परिणाम जारी होने के 15 दिनों के भीतर पूरी करनी अनिवार्य होती है, जिसके बाद संशोधित अंकतालिका जारी की जाती है।  वहीं, जो छात्र एक या दो विषयों में न्यूनतम 33 प्रतिशत अंक प्राप्त करने में असफल रहे हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है. राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ऐसे विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षा का आयोजन करेगा. बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, सप्लीमेंट्री परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी अगले 48 घंटों में आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी जाएगी. इससे छात्रों को अपना कीमती साल बचाने का एक और अवसर मिलेगा। 

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल: मुख्यमंत्री साय ने दिव्यांग चंदूलाल की सुनी पुकार, मिनटों में मिला समाधान रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संवेदनशील और जनहितकारी शासन की एक भावुक झलक आज चंदखुरी में देखने को मिली, जब उन्होंने एक दिव्यांग ग्रामीण की समस्या को न केवल सुना, बल्कि मौके पर ही उसका समाधान सुनिश्चित कर मानवता और उत्तरदायी नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत किया। चंदखुरी निवासी दिव्यांग चंदूलाल वर्मा के लिए यह दिन जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया। वे मुख्यमंत्री से मिलने की आशा लेकर कायस्थ मंगल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम समाप्ति के बाद जब वे मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आगे बढ़े, तो सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया।इसी दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वर्मा को मंच पर बुलाया जाए। यह एक छोटा-सा निर्णय था, लेकिन चंदूलाल के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मिलते ही चंदूलाल ने अपनी व्यथा साझा की। उन्होंने बताया कि वे पहले राजमिस्त्री का कार्य करते थे, लेकिन शुगर की बीमारी और डायबिटिक फुट के कारण उनके पैरों में गंभीर समस्या हो गई, जिससे चलना-फिरना कठिन हो गया। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे अब कोई कार्य नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें बैटरी संचालित ट्राईसिकल की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री साय ने अत्यंत संवेदनशीलता के साथ उनकी पूरी बात सुनी और तत्काल सहायता राशि प्रदान करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शीघ्र मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देशों का त्वरित पालन सुनिश्चित किया गया। नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतीक बैस ने तत्काल प्रक्रिया पूर्ण कर चंदूलाल वर्मा को मोटराइज्ड ट्राईसिकल उपलब्ध कराया। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए चंदूलाल भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि “मैंने सोचा भी नहीं था कि मुख्यमंत्री मुझसे मिलेंगे और मेरी समस्या का इतना जल्दी समाधान हो जाएगा। मैं उनका दिल से आभारी हूँ। धन्यवाद विष्णु भईया।” यह घटना केवल एक व्यक्ति की सहायता भर नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि राज्य सरकार का उद्देश्य हर नागरिक तक संवेदनशीलता, पहुंच और त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सुशासन के उस मॉडल को मजबूत करता है, जिसमें हर जरूरतमंद की आवाज सीधे शासन तक पहुंचती है और समाधान भी उतनी ही तेजी से मिलता है।

ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

मुंबई  ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 30 मार्च 2026 को 116.4 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. ये पिछले सेशन से 3.41% बढ़ गई है. WTI क्रूड भी 103.1 डॉलर पर पहुंच गया है. इस महीने ब्रेंट में 59% की तेज उछाल आया है, जो 1990 के गल्फ वॉर के बाद सबसे तेज मंथली उछाल है. ईरान युद्ध में हूती विद्रोहियों के शामिल होने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरे और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में सैनिक बढ़ाने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है।  भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर बड़ा खतरा बन गया है. ब्रेंट क्रूड विश्व का सबसे मेन ऑयल बेंचमार्क है, जिसकी कीमत पर दुनिया भर के तेल के दाम निर्भर करते हैं।  क्यों ब्रेंट क्रूड के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल अहम लेवल है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘मिडफ्लाइट टर्बुलेंस’ जैसा होता है. सामान्य व्यापार ठप पड़ जाता है और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो बड़ा नुकसान हो सकता है. इस बार स्थिति पहले से अलग है. मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय ब्रेंट 117.2 डॉलर था और डॉलर 76.24 रुपये पर था, तो एक बैरल तेल की कीमत भारतीय रुपए में 8,935 रुपये थी. मार्च 2026 में ब्रेंट 118.4 डॉलर पर था लेकिन डॉलर 93.35 रुपये पर पहुंच गया, जिससे एक बैरल तेल 11,052 रुपये का हो गया, यानी 23.6% महंगा. तेल डॉलर में खरीदा जाता है, इसलिए रुपए की कमजोरी भारत को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए यह कीमत सीधे इंपोर्ट बिल बढ़ाती है. 100 डॉलर तेल दुनियाभर में महंगाई को कैसे प्रभावित करता है? जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार करता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ जाती है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत बढ़ जाती है. इससे हर चीज का दाम ऊपर जाता है – खाना, सफर और सामान. कई देशों में मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) 4-5% या उससे ज्यादा पहुंच सकती है।  भारत में भी यही असर पड़ता है. अगर तेल की औसत कीमत 100 डॉलर पर बनी रही तो GDP ग्रोथ 6% से नीचे आ सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करनी पड़ सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि 100 डॉलर तेल भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 1.9-2.2% तक बढ़ा सकता है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो फैक्टरियां प्रभावित होंगी, रोजगार पर असर पड़ेगा और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा।  ब्रेंट क्रूड की कीमत भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को कैसे प्रभावित कर सकती है? भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रूड की कीमत, डॉलर की दर, रिफाइनरी मार्जिन और सरकार की ड्यूटी पर निर्भर करती हैं. 100 डॉलर से ऊपर क्रूड होने पर रिफाइनरी को कच्चा तेल महंगा पड़ता है, जिसका असर अंत में पेट्रोल पंप पर पड़ता है।  पिछले सालों में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखीं, जिससे जब क्रूड सस्ता था तो फायदा हुआ, लेकिन अब महंगा होने पर नुकसान हो रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें क्रूड बढ़ने के अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पूर्ण रूप से महंगाई से बचना मुश्किल है. अगर क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिका रहा तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं या सरकार को ड्यूटी काटनी पड़ सकती है, जिससे राजस्व कम होगा. भारत सरकार के पास 60 दिनों का तेल स्टॉक है, इसलिए तुरंत कमी नहीं होगी. लेकिन लंबे समय तक युद्ध चला तो आयात बिल 20-25 बिलियन डॉलर अतिरिक्त बढ़ सकता है. इससे रुपया और कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ेगी।  इस बार 100 डॉलर तेल पहले से ज्यादा दर्द दे रहा है क्योंकि रुपया कमजोर है और तेल डॉलर में महंगा पड़ रहा है. आम लोगों को पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर असर दिखेगा. सरकार को सतर्क रहना होगा. ड्यूटी में बदलाव, स्टॉक मैनेजमेंट और ऑप्शन ऊर्जा पर जोर देकर इस चुनौती से निपटना होगा. अगर युद्ध जल्दी थमा तो राहत मिल सकती है, वरना अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। 

Realme 16: भारत का पहला सेल्फी मिरर स्मार्टफोन 2 अप्रैल को होगा लॉन्च

 नई दिल्ली Realme भारत में नया स्मार्टफोन लॉन्च करने जा रहा है, जिसका नाम रियलमी 16 5G होगा. कंपनी ने ऑफिशियल पोर्टल पर इस हैंडसेट की जानकारी दी है और बताया है कि यह भारत में 2 अप्रैल को लॉन्च होगा।  रियलमी 16 5G को लेकर कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला सेल्फी मिरर फोन है. इसमें बैक पैनल पर कैमरा सेंसर के पास एक रिफ्लेक्टिव मिरर है. ऐसे में यूजर्स बैक कैमरा सेटअप की मदद से भी सेल्फी ले सकेंगे।  रियलमी इंडिया के ऑफिशियल पोर्टल पर अपकमिंग हैंडसेट को लेकर कुछ डिटेल्स को शेयर किया गया है. इसमें कैमरा, डिजाइन, डिस्प्ले और आईपी रेटिंग की जानकारी शेयर की है।  Realme 16 का डिस्प्ले  Realme 16 में 6.57 Inch का डिस्प्ले दिया गया है और इसका वजन 183 ग्राम वजनी है. इसकी थिकनेस 8.1 एमएम की है. कंपनी इस हैंडसेट को दो कलर वेरिएंट में लेकर आ रही है, जिसका नाम एयर व्हाइट और एयर ब्लैक कलर है।  Realme 16 की बैटरी और फास्ट चार्जर  Realme 16 में 7000mAh की बैटरी दी जाएगी, जिसके साथ 60W का फास्ट चार्जर मिलता है. ऑफिशियल वेबसाइट पर लिस्टेड डिटेल्स में बताया है कि 3 साल के लिए एंड्रॉयड ओएस अपडेट और 4 साल के लिए एंड्रॉयड सिक्योरिटी अपडेट है।  रियलमी इंडिया का पोस्ट  Realme 16 का कैमरा सेटअप  Realme 16 में हॉरिजोन्टली कैमरा एलाइनमेंट दिया गया गया है, जो काफी कुछ गूगल पिक्सल 10 सीरीज के जैसा लगता है. रियलमी के इस हैंडसेट में 50MP का मेन कैमरा सेंसर दिया गया है. इसमें एक सर्कुलर LED Flash लाइट दी गई है. हालांकि अन्य कैमरा सेंसर क जानकारी शेयर नहीं की गई है और सेल्फी के लिए भी 50MP का फ्रंट कैमरा मिलेगा।  क्या है सेल्फी मिरर फीचर? बैक पैनल पर ही कैमरा के पास एक रिफ्लेक्टिव सर्कुलर सरफेस दिया गया है, जिसको कंपनी ने सेल्फी मिरर का नाम दिया है. इसकी मदद से यूजर्स रियर कैमरे से हाई क्वालिटी सेल्फी क्लिक कर सकेगा। 

लिव-इन कपल्स को मिलेगा मैरिड का दर्जा, जनगणना के नए नियम में चौंकाने वाली घोषणा

नई दिल्ली आज के बदलते समाज में रिश्तों की परिभाषाएं तेजी से बदल रही हैं. जो रिश्ते कभी सामाजिक स्वीकृति के लिए तरसते थे, अब वे सरकारी दस्तावेजों में भी अपनी जगह बनाने लगे हैं. जनगणना 2027 से जुड़ा एक नया FAQ इसी बदलाव की झलक देता है. अगर कोई लिव-इन कपल खुद को ‘स्थिर संबंध’ में मानता है, तो उसे ‘मैरिड’ यानी विवाहित के रूप में गिना जाएगा. यह फैसला सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि समाज की बदलती सोच का संकेत भी है. हालांकि इस पर बहस भी तेज हो गई है कि क्या बिना शादी के ऐसे रिश्तों को शादी के बराबर मान लेना सही है या इससे पारंपरिक मूल्यों पर असर पड़ेगा।  रिपोर्ट के अनुसार दूसरी तरफ यह कदम उन लोगों के लिए राहत की तरह देखा जा रहा है जो लंबे समय से लिव-इन में रह रहे हैं लेकिन सामाजिक या कानूनी मान्यता के अभाव में कई सुविधाओं से वंचित रहते थे. सरकार का यह रुख दर्शाता है कि वह अब लोगों की निजी पसंद और जीवनशैली को ज्यादा सम्मान देने की दिशा में बढ़ रही है. लेकिन सवाल यह भी उठता है कि ‘स्थिर रिश्ता’ की परिभाषा क्या होगी और इसका दुरुपयोग कैसे रोका जाएगा. यही वजह है कि यह फैसला चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।  जनगणना 2027 को लेकर केंद्र सरकार की ओर से बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक पहले भी अगर साथ रह रहे अविवाहित कपल्स खुद को मैरिड बताते थे, तो उनकी जानकारी उसी आधार पर दर्ज की जाती थी. जनगणना के हाउस लिस्टिंग फेज में घर में रहने वाले शादीशुदा कपल की संख्या से जुड़ा सवाल भी शामिल है. यह स्टेज कुल 45 दिनों तक चलेगा. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ एन्यूमरेशन और उसके बाद 30 दिन एन्यूमरेटर के जरिए जानकारी जुटाई जाएगी. सेल्फ एन्यूमरेशन की शुरुआत 1 अप्रैल से दिल्ली के NDMC इलाके से होगी, जहां कोई भी जिम्मेदार वयस्क OTP के जरिए लॉग इन कर अपने घर के सभी सदस्यों की जानकारी भर सकता है।  क्या है नया नियम, क्यों मचा है विवाद, कैसे होगा असर?     जनगणना 2027 के लिए तैयार किए गए सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई कपल खुद को एक स्थिर संबंध में मानता है, तो उसे विवाहित के रूप में गिना जाएगा. खास बात यह है कि इसके लिए किसी तरह का कानूनी दस्तावेज या प्रमाण देना जरूरी नहीं होगा. जो भी जानकारी दी जाएगी, उसे व्यक्ति के ‘ज्ञान और विश्वास’ के आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी और लोग खुद ही अपने परिवार का डेटा पोर्टल पर भर सकेंगे।      इस नई व्यवस्था में 45 दिनों का हाउसलिस्टिंग फेज रखा गया है. इसमें पहले 15 दिन सेल्फ-एन्यूमरेशन के होंगे और बाकी 30 दिन एन्यूमरेटर द्वारा सत्यापन के लिए होंगे. यह सुविधा 15 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगी और इसमें घर की लोकेशन को जियो-टैग करना भी जरूरी होगा. इससे डेटा अधिक सटीक और व्यवस्थित तरीके से एकत्र किया जा सकेगा।  क्या लिव-इन कपल को अब पूरी तरह शादीशुदा माना जाएगा? नहीं, यह मान्यता केवल जनगणना के डेटा संग्रह के लिए है. इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें कानूनी तौर पर पति-पत्नी का दर्जा मिल जाएगा. यह सिर्फ आंकड़ों को सही तरीके से दर्ज करने की एक प्रक्रिया है ताकि वास्तविक सामाजिक संरचना को बेहतर तरीके से समझा जा सके।  ’स्थिर संबंध’ की पहचान कैसे होगी? इसका कोई सख्त कानूनी पैमाना तय नहीं किया गया है. अगर कपल खुद को स्थिर और लंबे समय के रिश्ते में मानता है, तो उसे उसी आधार पर दर्ज किया जाएगा. यह पूरी तरह व्यक्ति की घोषणा पर आधारित है, जिससे कुछ लोग इसे लचीला तो कुछ लोग इसे अस्पष्ट मान रहे हैं।  क्या इस फैसले का सामाजिक असर पड़ेगा? संभावना है कि इसका असर पड़ेगा. इससे लिव-इन रिश्तों को सामाजिक स्वीकृति मिल सकती है और ऐसे रिश्तों में रहने वाले लोग ज्यादा खुलकर सामने आ सकते हैं. वहीं, पारंपरिक सोच रखने वाले लोग इसे परिवार व्यवस्था के लिए चुनौती के रूप में भी देख सकते हैं।  जनगणना में डिजिटल बदलाव और नई प्रक्रिया इस बार जनगणना पूरी तरह तकनीक पर आधारित होगी. लोग घर बैठे पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी भर सकेंगे. OTP वेरिफिकेशन, जियो-टैगिंग और डिजिटल फॉर्म जैसी सुविधाएं इसे आसान बनाएंगी. हालांकि, गलत जानकारी या लोकेशन डालने पर डेटा में गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। 

अमेरिका ने ईरान पर छोड़ी 29,750 करोड़ की टॉमहॉक मिसाइल, ये क्यों है खास?

न्यूयॉर्क अमेरिकी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले चार हफ्तों में 850 से ज्यादा टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दाग दी हैं. यह किसी एक अभियान में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है. यह जानकारी अमेरिका की प्रसिद्ध थिंक टैंक सीएसआईएस (Center for Strategic and International Studies) की नई रिपोर्ट में दी गई है।  हर टॉमहॉक मिसाइल की कीमत करीब 3.6 मिलियन डॉलर (लगभग 35 करोड़ रुपये) है. इस हिसाब से इन 850 मिसाइलों की कुल कीमत लगभग 30,000 करोड़ की आंकी जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये मिसाइलें मुख्य रूप से दो गाइडेड मिसाइल पनडुब्बियों और डिस्ट्रॉयर जहाजों से छोड़ी गईं. इन जहाजों में वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) लगे हैं. इस अभियान में क्षेत्र में उपलब्ध लॉन्चरों का लगभग आधा हिस्सा इस्तेमाल किया जा चुका है. महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में इन लॉन्चरों को फिर से लोड नहीं किया जा सकता. जहाजों को मिसाइलें खत्म होने पर बंदरगाह वापस जाना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक, स्टॉक फिर से भरने में समय लगेगा।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने एपिक फ्यूरी 2026 में सिर्फ पहले 4 हफ्तों में 850 टॉमहॉक दागी हैं. यह इतिहास का रिकॉर्ड है. इस से पहले किसी भी एक अभियान में इतनी मिसाइलें नहीं दागी गई हैं. 2003 के पूरे इराक युद्ध (Iraqi Freedom) में अमेरिका ने 802 मिसाइलें दागी थीं. बाकी पुराने अभियान की बात करें तो 1991 के डेजर्ट स्टॉर्म में 288 मिसाइल दागी गईं थीं।  ऐसा क्या खास है इस मिसाइल में? टॉमहॉक अमेरिका की एक मध्यम दूरी की सबसोनिक क्रूज मिसाइल है. यह जमीन, जहाज और पनडुब्बी से छोड़ी जाती है और दुश्मन के अंदर गहराई तक हमला करने की ताकत रखती है. 1972 में अमेरिकी नौसेना ने इसका विकास शुरू किया था. यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे रडार इसे आसानी से नहीं पकड़ पाता. शुरू में इसमें न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार लगाए जा सकते थे, लेकिन अब न्यूक्लियर विकल्प खत्म कर दिया गया है. इसे TLAM, TASM, BGM-109G Gryphon जैसे कई नामों से भी जाना जाता है. यह 1983 से सेवा में है।  टॉमहॉक के वेरिएंट ब्लॉक 1: TLAM-N (न्यूक्लियर), TASM (एंटी-शिप) और ग्राउंड लॉन्च Gryphon ब्लॉक 2: TLAM-C (सख्त टारगेट) और TLAM-D (नरम टारगेट) थे ब्लॉक 3: GPS और बेहतर इंजन जोड़े गए, जिससे ईंधन कम लगता है और ज्यादा ताकत मिलती है ब्लॉक 4: सबसे आधुनिक है – इसमें उड़ते समय नया लक्ष्य बदला जा सकता है टॉमहॉक की खूबियां रेंज 1,250 से 2,500 किलोमीटर तक (ब्लॉक IV में 1,600 किमी). स्पीड सबसोनिक (लगभग 800 किमी/घंटा). ऊंचाई समुद्र की सतह से चिपककर या 450 मीटर तक. वजन 1,315 किलोग्राम (लॉन्च वजन), लंबाई 5.55 से 6.25 मीटर. इसमें 454 किलोग्राम का पारंपरिक या पहले न्यूक्लियर वारहेड लगता है. गाइडेंस सिस्टम में इनर्शियल, TERCOM, GPS और टू-वे डेटालिंक है. सटीकता 10 मीटर से भी कम।  यह मिसाइल 140 से ज्यादा अमेरिकी नौसेना के जहाजों (टिकॉन्डेरोगा क्रूजर, आर्ले बर्क डिस्ट्रॉयर) और पनडुब्बियों (Ohio क्लास SSGN और SSN) से छोड़ी जा सकती है. ब्रिटेन की Royal Navy की Astute, Swiftsure और Trafalgar पनडुब्बियों पर भी लगी है. पहले ग्राउंड लॉन्च वर्जन Gryphon भी था, लेकिन 1991 में INF संधि के तहत नष्ट कर दिया गया. मुख्य ऑपरेटर अमेरिका और ब्रिटेन हैं. यह Mark 41 वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम से लॉन्च होती है।  मिसाइल का इतिहास टॉमहॉक का पहला इस्तेमाल 1991 के गल्फ वॉर में हुआ, जहां 300 से ज्यादा दागी गईं. 2003 के इराक युद्ध में 800 से ज्यादा. 2018 में सीरिया में 59 मिसाइलें दागी गईं. अफगानिस्तान, सोमालिया, लिबिया और सीरिया में भी इस्तेमाल हुई. 2016 में 245 मिसाइलों को एंटी-शिप बनाने के लिए 434 मिलियन डॉलर का बजट दिया गया. अमेरिका की आर्मी अब इसे ग्राउंड लॉन्चर पर भी लगा रही है. यह मिसाइल बहुत महंगी लेकिन बेहद सटीक और सुरक्षित हमला करने वाली है, जो आधुनिक युद्ध में अमेरिका की सबसे अहम हथियारों में से एक है।