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नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन, लोगों के स्वास्थ्य पर डाल रहा विपरीत प्रभाव

मिलावटखोरों का सरदार जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी  नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री के उपयोग से लोगों के पूरे स्वास्थ्य पर पड रहा विपरीत प्रभाव  गांधी के फेर में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जिम्मेदारों ने मूंदी आंख सबसे सरोकार खबरें धारदार। ब्योहारी ब्यूरो चीफ वेदप्रकाश बेदांति ब्योहारी नगरीय क्षेत्र में मिलावट खोरों की चांदी, यहां कभी नहीं होती जांच और कार्यवाही। मिलावटखोरों को संरक्षण दे रहा खाद्य सुरक्षा विभाग का तथाकथित अधिकारी आर के सोनी, सूत्रों की मानें तो जिले में बैठकर यहां खाद्य सुरक्षा विभाग का प्रभार देख रहे साहब के द्वारा हर महीने यहां के होटल रेस्टोरेंट डेयरी नमकीन फैक्ट्री किराना दुकानों व पानी सप्लाई फैक्ट्री बर्फ आइसक्रीम फैक्ट्री व अन्य एजेंसियों से मासिक वसूली की जाती है। जिससे खाद्य सुरक्षा अधिकारी यहां कभी किसी पर कोई कार्यवाही नहीं करते और न कभी किसी का फोन उठाते हैं।  ब्योहारी-नगरीय क्षेत्र में दिनांक 27/03/2026 को विनायक पैलेस में आयोजित विवाह समारोह  बब्बू खान के लड़की की शादी में राजू गुप्ता की दुकान से पताजंली कम्पनी का सरसों तेल खरीदा गया जिसे सब्जी बनाने के लिए जब कड़ाही में डालकर गर्म किया तभी वह पूरा तेल हरे रंग में बदल गया जैसे डाबर आंवला का तेल हो। आनन फानन आयोजक दूसरी कम्पनी का तेल लाकर दावत का खाना बनाया गया।यदि उस तेल का उपयोग कर खाना बनाया जाता तो निसंदेह अनेक लोग  फ्रूडप्वाजिनिंग के शिकार हो सकते थे। गनीमत रही कि खाना बनाने वाले मिस्त्री ने तत्काल तेल के कलर बदलने से उसकी गुणवत्ता परख तेल ही बदलवा दिया।पतांजली कम्पनी का सरसों तेल जिसे गर्म करने पर उसका पूरा रंग ही बदल कर गाढ़ा हरे रंग का हो  जाता है। जिससे यह साफ है कि इसमें किसी तेज कैमिकल का उपयोग किया जाता है। जब इसे उपयोग के लिए कड़ाही में डालकर गर्म किया जाता है तो पूरा तेल ही हरे कलर में बदल जाता है। जैसे डाबर आंवला का तेल हो। पतांजली का कमाल सरसों तेल गरम करते ही बन गया डाबर आंवला का तेल  खाद्य पदार्थों में इतनी मिलावट खोरी से लोगों की जान जोखिम में बनी रहती है। मिलावटखोरों को लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की यहां खुली छूट खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोनी द्वारा दी गई है। जिसके बदले साहब हर महीने अपनी जेब खूब गर्म करते हैं।  यहां नकली मावा,दूध,पनीर, सहित ज्यादातर खाद्य पदार्थ नकली और मिलावटी रहता है।खाद्य सुरक्षा कानून लागू है। लेकिन जिले में बैठे ज़िला खाद्य अधिकारी आरके सोनी के बारे में यहां चर्चा है कि उनका एजेंट यहां की लगभग सभी होटल डेयरी रेस्टोरेंट एजेंसी कारखाने और अन्य खाद्य पदार्थ सप्लाई बाली जगहों से हर महीने एक निश्चित तय राशि की बसूली करता है।जिससे यहां का ज्यादातर बाजार नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री से पटा हुआ है। कार्यवाही से बेखबर व्यापारी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए ब्रांडेड कम्पनी का लेबल लगा मनमानी दाम पर बाजार में खुलेआम नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री बेंच रहे हैं। जिससे जिले में बैठे खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी पर लोग तमाम तरह के गम्भीर आरोप लगा रहे हैं। जबसे साहब ने जिले का प्रभार संभाला है तब से केवल साल में एकाध बार अपने स्थानीय एजेंटों के साथ नगरीय क्षेत्र के सभी व्यापारी बंधुओं से मिलकर मिलावटखोरी तेजकर जेब का बजन बढ़ाने की मिन्नत करने यहां जरुर आते हैं। जांच और कार्यवाही के नाम यहां हो रही केवल बसूली! ऐसा यहां के कुछ लोगों का कहना है। दिखाबा के लिए मात्र कागजी कार्यवाही कार्यालय में बैठकर ही साहब पूरी करते हैं। खाद्य सुरक्षा के नाम पर विभाग में बैठा अमला केवल बसूली ही करता है। नाम न छापने की शर्त पर एक रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया कि जिलाखाद्य विभाग केवल ब्योहारी में हर महीने लाखों रुपए की बसूली करता है। लोगों का कहना है कि शहडोल जिले में जबसे जिला खाद्य विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके. सोनी पदस्थ हुए हैं। तबसे स्थानीय व्यापारियों पर इनकी बसूली का दबाव कुछ अधिक ही बढ़ गया है।  यहां के कई व्यापारी इनकी इस अबैध बसूली से बहुत परेशान हैं। और सरकार से अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शहडोल आरके सोनी कथन -इस सम्बन्ध में जब इनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया लेकिन फोन नहीं उठा।

स्प्रिट पीने से मची चीख-पुकार,4 की मौत, SHO सस्पेंड और चौकीदार गिरफ्तार

मोहतिहारी मोतिहारी रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में जहरीली स्प्रिट (शराब) पीने से लोगों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। कल एक व्यक्ति की मौत हुई थी, वहीं दो अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इसके अलावा एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी चले जाने की खबर ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। मृतकों की संख्या बढ़ी, कई लोग अभी भी बीमार मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है। कल जहरीली शराब पीने से चंदू की मौत हुई थी। वहीं आज सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया परसौना निवासी प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो की मौत हो गई। उनका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो जहरीली शराब पीने से बीमार हैं और चोरी-चुपके इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने शराब समझकर स्प्रिट का सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अन्य कई पीड़ितों का इलाज जारी है। आंखों की रोशनी प्रभावित, मामले की गंभीरता बढ़ी डॉक्टरों के अनुसार, इस जहरीली शराब के सेवन से पहले आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। गांव में भय और आक्रोश, अवैध शराब पर सवाल घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और स्प्रिट का कारोबार चल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। साथ ही अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में लागू शराबबंदी कानून और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौकीदार भरत रॉय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तुरकौलिया थाना के SHO उमाशंकर मांझी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रघुनाथपुर में हुई हत्या के मामले में भी केस दर्ज कर लिया गया है. हीरालाल भगत के परिजनों के आवेदन पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।  

हाथों में बार-बार झुनझुनी और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज, यह शरीर में छिपी इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है? कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शरीर का एक संकेत भी हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है.  अक्सर यह समस्या तब महसूस होती है जब हम गलत पोजीशन में सो जाते हैं या लंबे समय तक एक ही स्थिति में हाथ रखते हैं. ऐसे में नसों पर दबाव पड़ता है या खून का प्रवाह कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे झुनझुनी होने लगती है. कब होती है दिक्कत? लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे कोई खास कारण भी हो सकता है. theheartysoul की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम वजहों में से एक है कार्पल टनल सिंड्रोम, जिसमें कलाई की नस दब जाती है और अंगूठे, उंगलियों में झुनझुनी या दर्द होने लगता है. कभी-कभी समस्या कलाई में नहीं, बल्कि कोहनी या गर्दन से भी जुड़ी हो सकती है. नसों में कहीं भी दबाव आने से हाथ तक इसका असर पहुंच सकता है, जिससे झुनझुनी और कमजोरी महसूस होती है. ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीड भी कारण खराब ब्लड सर्कुलेशन भी इसका एक कारण हो सकता है.  ठंड में या अचानक तापमान बदलने पर उंगलियां सुन्न पड़ सकती हैं और रंग भी बदल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. जब नसें कमजोर होने लगती हैं, तो हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है. विटामिन B12 की कमी विटामिन B12 की कमी भी एक अहम कारण है, जो धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार लोग थकान या कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. कुछ मामलों में थायरॉयड की समस्या भी हाथों में झुनझुनी का कारण बन सकती है. शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने से नसों पर असर पड़ता है और यह समस्या बढ़ सकती है. ये भी होता है कारण कंधे और गर्दन के बीच नसों या ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ने से भी हाथों में झुनझुनी हो सकती है. खासतौर पर जब हाथ लंबे समय तक ऊपर रखा जाए या भारी वजन उठाया जाए.  अगर झुनझुनी के साथ कमजोरी, चीजें गिरना, या दर्द बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा है या कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है. अचानक एक तरफ हाथ सुन्न हो जाना, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसी स्थिति स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

एमपी की पूर्व आइएएस अधिकारी की अवैध संपत्ति में संलिप्तता, ईडी ने दायर किया पूरक अभियोग

भोपाल   मध्यप्रदेश के आइएएस पति पत्नी अवैध संपत्ति मामले में ऐसे फंसे हैं कि सालों बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एमपी कैडर के पूर्व आइएएस दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ ईडी ने पूरक अभियोग पेश किया है। पूर्व आइएएस दंपत्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह कार्यवाही की गई है। ईडी ने दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (SPC) दाखिल की। भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय में 31 मार्च को इस संबंध में शिकायत पेश की गई थी। ईडी का आरोप है कि जोशी दंपत्ति ने 41.87 करोड़ रुपए की अवैध चल अचल संपत्ति जुटाई। दिवंगत आइएएस अधिकारी अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके आधार पर सन 2002 में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच की शुरुआत की। ईडी ने जांच में पाया कि दोनों अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बनाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आइएएस दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। ईडी ने लोकायुक्त में जोशी दंपति के खिलाफ दर्ज मामले के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें उन पर 41.87 करोड़ की चल- अचल संपत्ति रखने का आरोप था। जो उनकी वैध आय से कई गुना ज्यादा थी। इसके बाद ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि अरविंद जोशी और टीनू जोशी ने अपने नाम और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों की चल और अचल संपत्ति जमा कर रखी थी। इससे पहले ईडी ने अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए ईडी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि अरविंद जोशी ने कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी संपत्तियां बनाई। इस दौरान संपत्ति के स्वामित्व को छिपाने के लिए जानबूझकर तीसरे पक्ष को शामिल किया। बता दें इससे पहले ईडी ने अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद 28 जनवरी को एक और अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया। जिसमें जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 5 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गईं।

LPG की किल्लत में इलेक्ट्रिक चूल्हा है तगड़ा विकल्प, जानें 1 घंटे इस्तेमाल करने पर कितना आएगा बिजली बिल

 LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है. कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है. 1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा? इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा. इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है. कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.

लुधियाना एयरपोर्ट से एक टिकट पर विदेश यात्रा, Air India दिल्ली से करेगा कनेक्टिंग फ्लाइट की सुविधा

लुधियाना लुधियाना के हलवारा से एक ही टिकट पर विदेश का सफर किया जा सकेगा। एयर इंडिया ने लुधियाना एयरपोर्ट से फ्लाइट्स का टाइम ऐसे शेड्यूल किया है ताकि विदेश जाने वाले दिल्ली एयरपोर्ट से कनेक्टिंग फ्लाइट ले सकें। एयर इंडिया ने विदेश जाने वाले यात्रियों को सलाह दी है कि वो लुधियाना से सुबह की फ्लाइट पकड़ें और कनेक्टिंग फ्लाइट में अपनी टिकट साथ ही करवा दें। ऐसा करने से उन्हें बैगेज का बार-बार चेकइन करवाने की जरूरत नहीं होगी। तीन से चार घंटे में सारी फॉर्मेलिटी होगी पूरी एयर इंडिया ने तर्क दिया है कि विदेश जाने वालों को दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन व अन्य फॉर्मेलिटी को पूरा करने के लिए तीन से चार घंटे का समय लग जाता है। अगर लुधियाना एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाले यात्री सुबह की फ्लाइट से दिल्ली पहुंचते हैं तो उन्हें एयरपोर्ट पर फार्मेलिटीज पूरी करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा। सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स जाएगी दिल्ली हलवारा से सुबह और दोपहर दो फ्लाइट्स दिल्ली के लिए उपलब्ध होंगी, लेकिन इंटरनेशनल यात्रा के लिए सुबह वाली फ्लाइट सबसे बेहतर मानी जा रही है। यह फ्लाइट यात्रियों को सुबह दिल्ली पहुंचा देती है, जिससे वे उसी दिन शाम की अंतरराष्ट्रीय उड़ान आसानी से पकड़ सकते हैं। एयरलाइन ने शेड्यूल इस तरह तैयार किया है कि यात्रियों को दिल्ली में 4 से 8 घंटे का ट्रांजिट टाइम मिल सके। यह समय इमिग्रेशन, सिक्योरिटी और बोर्डिंग के लिए पर्याप्त होता है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें बैगेज को लेकर भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। लुधियाना फ्लाइट से कंपनी बैगेज को अपने आप कनेक्टिंग फ्लाइट में ट्रांसफर हो जाएगा और यात्री आसानी से एयरपोर्ट पर अपनी बाकी फॉर्मेलिटीज पूर कर सकेगा। किन-किन देशों के लिए मिलेगी सुविधा एयर इंडिया का कहना है कि इस कनेक्टिविटी के जरिए यात्री यूनाइटेड किंगडम और यूरोप के प्रमुख शहरों तक सफर कर सकेंगे। इनमें लंदन, बरमिंगम,रोम, मिलन और पैरिस शामिल हैं।इसके अलावा अन्य देशों की कनेक्टिंग फ्लाइट्स भी ली जा सकेगी। एक टिकट पर पूरी यात्रा कर सकेंगे एयर इंडिया ने बताया है कि यात्री हलवारा से अपने अंतिम विदेशी गंतव्य तक एक ही टिकट (सिंगल PNR) पर यात्रा कर सकते हैं। इस सुविधा में सबसे बड़ा फायदा यह है कि यात्री का बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक चेक-इन हो जाता है और दिल्ली में दोबारा चेक-इन की जरूरत नहीं पड़ती। अगर यात्री अलग-अलग टिकट बुक करते हैं, तो उन्हें दिल्ली में बैगेज लेकर फिर से चेक-इन करना होगा, जिससे समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते हैं। दिल्ली से मिलेंगी एयर इंडिया की फ्लाइट कनेक्टिंग यात्रा में दिल्ली से आगे की उड़ान भी एयर इंडिया की ही होती है। हालांकि, कुछ रूट्स पर एयर इंडिया की पार्टनर एयरलाइंस (कोडशेयर) भी ऑपरेट कर सकती हैं। ऐसे मामलों में टिकट एक ही रहता है, लेकिन फ्लाइट दूसरी एयरलाइन की हो सकती है। इसके बावजूद, यदि बुकिंग एक ही टिकट पर है तो यात्रा सहज बनी रहती है और बैगेज सीधे अंतिम गंतव्य तक पहुंचता है। वेबसाइट, मोबाइल ऐप व ट्रैवल एजेंट के जरिए करें टिकट बुक यात्री एयर इंडिया की वेबसाइट, मोबाइल ऐप या ट्रैवल एजेंट के जरिए टिकट बुक कर सकते हैं। बुकिंग के समय लुधियाना से फाइनल डेस्टिनेशन डालना होगा। ताकि आपको कनेक्टिंग फ्लाइट का विकल्प मिल जायेंगे। टिकट एक ही बुकिंग में लिया जाए, ताकि यात्रा आसान और बिना परेशानी के हो सके। दिल्ली एयरपोर्ट पर कितना इंतजार हलवारा से सुबह पहुंचने वाले यात्रियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर औसतन 4 से 8 घंटे का इंतजार करना पड़ सकता है। यह इंटरनेशनल कनेक्शन के लिए सामान्य और सुरक्षित समय माना जाता है। दिल्ली से किसी भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान के लिए यात्रियों को कम से कम 3 से 4 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी होता है। हालांकि, कनेक्टिंग यात्रियों के लिए यह प्रक्रिया आसान हो जाती है क्योंकि वे पहले से चेक-इन रहते हैं। यात्रियों के लिए बड़ा फायदा इस नई सेवा से लुधियाना और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को अब सड़क या रेल से दिल्ली जाने की जरूरत कम होगी। हलवारा एयरपोर्ट से सीधी उड़ान और दिल्ली से कनेक्टिविटी के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रा तेज, सुविधाजनक और कम झंझट वाली हो जाएगी। यह पहल लुधियाना को ग्लोबल एयर नेटवर्क से जोड़ देगी। एयर इंडिया लुधियाना से दिल्ली के लिए चलाएगा A320 फेमिली क्राफ्ट एयर इंडिया लुधियान से दिल्ली के बीच A320 फेमिली एयर क्राफ्ट चलाएगा। यह मुख्य रूप से घरेलू और शॉर्ट-हॉल इंटरनेशनल रूट्स पर इस्तेमाल होते हैं। इन विमानों को हाल के वर्षों में अपग्रेड किया गया है ताकि यात्रियों को बेहतर अनुभव मिल सके। इनके प्रमुख फीचर्स इस प्रकार हैं A320 फेमिली एयरक्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं 1. शॉर्ट-हॉल और हाई-फ्रीक्वेंसी रूट्स के लिए डिजाइन किया गया है। 2. तीन क्लास की केबिन, बिजनेस क्लास में आरामदायक और ज्यादा स्पेस, प्रीमियम इकोनमी में अतिरिक्त लेगरूम और बेहतर सीटिंग और इकोनमी में किफायती और आरामदायक यात्रा। इसमें कुल 160 से 180 सीटें हैं जिसमें से 8 बिजनेस क्लास, 24 प्रीमियम और बाकी इकोनमी सीट होंगी। 3. USB चार्जिंग और डिजिटल सुविधा है। यात्री अपने मोबाइल/लैपटॉप चार्ज कर सकते हैं। इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट मोबाइल पर देख सकते हैं। 4. इन-फ्लाइट इंटरटेनमेंट के लिए वाइफाई की सुविधा मिलेगी।

INS अरिदमन और INS तारागिरी के साथ समंदर में ताकतवर हुई इंडिया, दुश्मन को मिलेगा डर

विशाखापट्टनम  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट लिखकर INS अरिदमन नामक भारत के तीसरे स्वदेशी न्यूक्लियर पनडुब्बी के लॉन्च का संकेत दे दिया. उन्होंने लिखा कि यह कोई शब्द नहीं, यह ताकत है, ‘अरिदमन’. यह पनडुब्बी भारत की समुद्री न्यूक्लियर सुरक्षा को और मजबूत करेगी. इसके अलावा वो  विशाखापट्टनम में एडवांस्ड स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को भी नौसेना को सौपेंगे।  INS अरिदमन में लंबी दूरी की मिसाइलें लगाई गई हैं जो दुश्मन को ज्यादा दूर से निशाना बना सकेंगी. अब यह पनडुब्बी अंतिम समुद्री परीक्षण पूरा कर चुकी है. जल्द ही स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड में शामिल हो जाएगी. इससे पहले INS अरिहंत 2016 में और INS अरिघात अगस्त 2024 में सेवा में शामिल हो चुकी हैं।  राजनाथ सिंह का पोस्ट और विशाखापट्टनम दौरा राजनाथ सिंह इन दिनों विशाखापट्टनम में हैं जहां भारत की सभी न्यूक्लियर पनडुब्बियों को बनाया जाता है. आज वे यहां स्वदेशी बनी एडवांस्ड स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को कमीशन करेंगे. इसी दौरान उन्होंने अरिदमन के बारे में पोस्ट किया. नेवी चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने दिसंबर 2025 में ही कहा था कि अप्रैल-मई के बीच यह पनडुब्बी सेवा में आ जाएगी. अब अंतिम परीक्षण पूरे हो चुके हैं।  पिछली पनडुब्बियों से क्या फर्क है INS अरिहंत और INS अरिघात की तुलना में अरिदमन ज्यादा बेहतर है. इसमें आठ वर्टिकल लॉन्च ट्यूब लगाए गए हैं जबकि अरिहंत में सिर्फ चार थे. मतलब यह एक साथ ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगी. इसमें आठ K-4 मिसाइलें लगाई जा सकती हैं जिनकी रेंज 3500 किलोमीटर है या फिर 24 K-15 मिसाइलें जिनकी रेंज 750 किलोमीटर है. इससे भारत की समुद्री न्यूक्लियर ताकत बहुत बढ़ जाएगी. पनडुब्बी का हल्का डिजाइन इसे और चुपके से चलने में मदद करेगा।  समुद्री सुरक्षा में नई ताकत अरिदमन के शामिल होने से भारत कंटीन्यूअस एट-सी डिटेरेंस बना सकेगा. यानी हमेशा कम से कम एक न्यूक्लियर पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर रहेगी. इससे दुश्मन कभी भी हमला करने का सोचेगा तो सोच-समझकर सोचेगा. यह पनडुब्बी भारत की नो फर्स्ट यूज न्यूक्लियर नीति को मजबूत करती है. स्वदेशी रूप से बनी होने से विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता कम हुई है. देश की डिफेंस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिला है।  INS अरिदमन क्या है? INS अरिदमन एक एडवांस न्यूक्लियर-पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) है, जो अरिहंत-क्लास का हिस्सा है. इसे 'S4' कोडनेम के साथ विकसित किया गया है. इसकी लंबाई करीब 125 मीटर और वजन 7,000 टन है, जो इसे पहले मॉडलों से 1000 टन ज्यादा भारी बनाता है. यह पनडुब्बी भारतीय नौसेना के एडवांस्ड तकनीक वाहन (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में बनाई गई है।  यह क्यों खास है? बढ़ी हुई ताकत: INS अरिदमन में 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो इसे 24 छोटी रेंज की K-15 मिसाइलें (750 किमी रेंज) या 8 लंबी रेंज की K-4 मिसाइलें (3500 किमी रेंज) ले जाने की क्षमता देते हैं. यह पहले की पनडुब्बियों की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली है।  चुपके की तकनीक: इसमें बेहतर सोनार-एब्जॉर्बिंग कोटिंग और शोर-कम करने वाली तकनीक है, जिससे यह दुश्मन के लिए पता करना मुश्किल हो जाता है।  लंबी दूरी: K-4 मिसाइलों के साथ यह दुश्मन के गहरे इलाकों को निशाना बना सकती है, जो भारत की सुरक्षा के लिए जरूरी है।  स्वदेशी तकनीक: इस पनडुब्बी में करीब 70% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।  भारत को क्या फायदा होगा? न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत: INS अरिदमन के साथ भारत की जमीन, हवा और समुद्र से न्यूक्लियर हमले की क्षमता (न्यूक्लियर ट्रायड) और मजबूत होगी. यह भारत की 'नो फर्स्ट यूज' नीति को सपोर्ट करता है, यानी दुश्मन पहले हमला करे तो जवाबी कार्रवाई के लिए तैयार रहना।  चीन और पाकिस्तान के खिलाफ सुरक्षा: चीन की बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए यह पनडुब्बी एक मजबूत जवाबी ताकत होगी।  समुद्री सुरक्षा: अरब सागर और हिंद महासागर में भारत की मौजूदगी बढ़ेगी, जो क्षेत्रीय शांति के लिए जरूरी है।  रणनीतिक संतुलन: यह पनडुब्बी भारत को अपने दुश्मनों के खिलाफ दूसरा हमला (सेकंड स्ट्राइक) करने की क्षमता देती है, जो शांति बनाए रखने में मदद करेगी।  INS तारागिरी के फीचर्स  यह स्वदेशी रूप से बनी प्रोजेक्ट 17A की स्टील्थ फ्रिगेट है. इसका मतलब है कि यह दुश्मन के रडार में आसानी से नहीं पकड़ी जाती. यह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) मुंबई में बनाई गई है. इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा सामान भारत में ही बना है।  यह फ्रिगेट करीब 6670 टन वजन की है. इसकी लंबाई 149 मीटर है. यह 52 km/hr की स्पीड से चल सकती है. लंबी यात्रा के लिए इसका रेंज 10186 किलोमीटर तक है. इसमें दो डीजल इंजन और दो गैस टर्बाइन लगे हैं जो इसे तेज और लंबे समय तक चलने की ताकत देते हैं।  इसका डिजाइन बहुत चिकना और स्टील्थ टेक्नोलॉजी वाला है. रडार, इंफ्रारेड और आवाज को कम करने वाली खास सामग्री इस्तेमाल की गई है ताकि दुश्मन इसे आसानी से न देख सके. इसमें 225 नाविकों की टीम काम करती है।  इसमें क्या हथियार लगे हैं INS तारागिरी में दुनिया के बेहतरीन हथियार लगाए गए हैं. इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक सतह से सतह मारने वाली मिसाइलें हैं जो दुश्मन के जहाजों को दूर से नष्ट कर सकती हैं. मीडियम रेंज की सतह से हवा में मारने वाली मिसाइलें भी हैं. दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढने और मारने के लिए खास एंटी-सबमरीन सिस्टम है।  इसके अलावा 127 मिलीमीटर का बड़ा मुख्य तोप भी लगा है. सब कुछ आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा है ताकि पल भर में फैसला लिया जा सके. यह फ्रिगेट समुद्र, हवा और पानी के नीचे तीनों तरह की लड़ाई लड़ सकती है।  यह क्यों महत्वपूर्ण है तारागिरी प्रोजेक्ट 17A की सात फ्रिगेट्स में से चौथी है. इससे पहले वाली शिवालिक क्लास से यह ज्यादा बड़ी, बेहतर और स्टील्थ वाली है. इसका मकसद भारतीय नौसेना को और ताकतवर बनाना है खासकर हिंद महासागर में. यह न सिर्फ लड़ाई के लिए है बल्कि मानवीय मदद, आपदा राहत और डिप्लोमेसी के कामों में भी इस्तेमाल होगी। 

रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स में नया इतिहास रचा

रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने लंबी कूद में 7 मीटर की दूरी तय की लक्षद्वीप में कोई सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक नहीं है, इसलिए अब्दुल मिट्टी के गड्ढों में अपनी लंबी कूद का अभ्यास करते हैं रायपुर अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' 2026 में पहला मेडल दिलाया। कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।''  मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया। फताह ने कहा, '' कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।''  दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला। फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,”  लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता। मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं।   उन्होंने आगे कहा, '' खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.''

स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव का बड़ा फैसल,फतेहाबाद, हिसार और रोहतक समेत 5 जिलों में बनेंगे नए अस्पताल

चंडीगढ़ हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।  हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 8 नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पी.एच.सी.) के निर्माण के लिए 37.60 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन नए पी.एच.सी. के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह पी.एच.सी. फतेहाबाद जिले के बनगांव और समैण, हिसार जिले के लाडवा, रोहतक जिले के गिरावड़ और समर गोपालपुर, सोनीपत जिले के फरमाणा और सरगथल तथा सिरसा जिले के मल्लेकन गांव में स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सिरसा जिले के मल्लेकन गांव में मौजूदा पी. एच.सी. भवन को जर्जर और असुरक्षित घोषित किया जा चुका है, जिसके स्थान पर अब आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया भवन बनाया जाएगा। वहीं अन्य गांवों में पहली बार पी.एच.सी. भवनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उनके नजदीक ही मिल सकेंगी। वित्तीय प्रावधानों की जानकारी देते हुए आरती सिंह राव ने कहा कि इस परियोजना के लिए 1144 लाख रुपए की राशि 15वें वित्त आयोग के तहत और 2616.72 लाख रुपए राज्य बजट हेड 4210 से खर्च किए जाएंगे। इस प्रकार कुल परियोजना लागत 37.60 करोड़ रुपए आंकी गई है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इन पी.एच.सी. के निर्माण कार्य को पूरा करने में लगभग 18 से 24 महीने का समय लगेगा। परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए धनराशि चरणबद्ध तरीके से जारी की जाएगी।

मरुधरा में पश्चिमी विक्षोभ का असर, जैसलमेर से डीडवाना तक ओलों की सफेद चादर

जयपुर राजस्थान में एक बार फिर से मौसम ने अचानक करवट ले ली। शुक्रवार को प्रदेश के पश्चिमी व मध्य इलाकों में बारिश का दौर शुरू हो गया। जैसलमेर, नागौर, सीकर, डीडवाना और जालोर सहित कई जिलों में कहीं मूसलाधार तो कहीं हल्की बूंदाबांदी ने मौसम को एकदम खुशनुमा बना दिया। तेज हवाओं और बारिश ने प्रदेश के तापमान में गिरावट ला दी और फिलहाल लू का असर पूरी तरह खत्म हो गया है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट मौसम विभाग ने 3 अप्रैल को 8 जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट और बाकी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला नजारा जैसलमेर जिले में देखने को मिला,  जहां ग्रामीण इलाकों में बारिश के साथ-साथ ओलावृष्टि भी हुई। जिले के पिथोडाई गांव में सुबह साढ़े सात से आठ बजे के बीच करीब 15 मिनट तक जोरदार ओले गिरे। ओलों की सफेद चादर बिछते ही तापमान तेज़ी से लुढ़क गया। वहीं, डीडवाना में सुबह साढ़े पांच से छह बजे के बीच तेज बारिश हुई जिसने ठंडी हवाओं के साथ मिलकर लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दिलाई। जालोर में भी बादलों ने सुबह से डेरा जमाया और रुक-रुककर बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। क्यों बदला मौसम का मिजाज? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश में लगातार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टरबेंस की वजह से यह बदलाव आया है। इस सिस्टम के असर से अरब सागर की नमी राजस्थान तक पहुंच रही है, जिससे बारिश, आंधी और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है। अप्रैल का पहला सिस्टम गुरुवार से ही सक्रिय हो चुका था और इसका असर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में साफ नज़र आया। कई जगहों पर तूफानी बारिश के साथ ओले भी गिरे। उमस से मिली राहत मौसम विभाग के मुताबिक, 4 अप्रैल के बाद यह सिस्टम कमजोर पड़ सकता है, लेकिन राहत ज्यादा देर टिकने वाली नहीं है। 6 अप्रैल की शाम से एक और मजबूत सिस्टम दस्तक देगा। जिसके चलते 7 और 8 अप्रैल को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की आशंका जताई जा रही है। साथ ही विभाग ने यह भी चेताया है कि इस सिस्टम के गुजरने के बाद 10 अप्रैल तक हीटवेव की वापसी हो सकती है।