samacharsecretary.com

पंजाब में सब्सिडी योजनाएं जारी रखने का वित्तमंत्री हरपाल चीमा का बड़ा ऐलान

 चंडीगढ़  वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने एक बार फिर से स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की दी जा रही सब्सिडी वापस नहीं होगी और सभी सब्सिडियां जारी रहेंगी। वीरवार को यहां अपने निवास पर कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बातचीत करते हुए वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार की एक सामाजिक जिम्मेवारी भी होती है जो समाज के सभी वर्गों को एक समान लाने के लिए निभानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी सब्सिडी की जरूरत को पूरा करने के लिए आमदनी को लगातार बढ़ा रही है। मार्च के महीने में जीएसटी की ग्रोथ 12.5 प्रतिशत बढ़ने का उदाहरण देते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि राजस्व के हर सेक्टर के निर्धारित लक्ष्यों को हमने पूरा किया है। विपक्षी पार्टियों की ओर से पंजाब की आर्थिक हालत को लेकर की जा रही आलोचना का जवाब देते हुए वित्तमंत्री ने पूर्व वित्तमंत्रियों को पंजाब के वित्तीय हालात पर बहस करने की खुली चुनौती दी। चीमा ने दावा किया कि देश में वित्तीय सुधारों के मामले में पंजाब ने कई पहलकदमियां की हैं की है, जिसके चलते राज्य को हाल ही में संपन्न हुए वित्त वर्ष में 400 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। मां-बेटी सत्कार योजना के तहत जनरल कैटेगरी की महिलाओं को 1,000 रुपये और अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये देने के लिए रजिस्ट्रेशन 13 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स देने वालों, सरकारी कर्मचारियों, सांसदों, विधायकों आदि की पत्नियों को इस योजना से बाहर रखा गया है, जबकि आंगनवाड़ी, मिड-डे मील वर्कर और प्राइवेट जाब करने वाली महिलाओं को इस योजना का फायदा मिलेगा। सरकारी कर्मचारियों को डीए की किस्त देने के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान लंबित 14,191 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं और सरकार अपनी सरकार के दौरान डीए देने और पुरानी पेंशन स्कीम पर विचार कर रही है। सरकार की ओर से कर्ज लेने पर चीमा ने कहा कि दूसरे राज्य भी लगातार कर्ज ले रहे हैं। केंद्र सरकार पर 2014 में 55 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था जो अब बढ़कर 212 लाख करोड़ रुपये हो गया है। चीमा ने कहा कि जब आप सरकार सत्ता में आई थी, तो कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड में 2,980 करोड़ रुपये थे और अब यह 10,738 करोड़ रुपये हो गया है। चीमा ने कहा कि आप सरकार के दौरान खजाना कभी बंद नहीं हुआ।

बिजली ऑफिस के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, रक्सौल में हर सोमवार और शुक्रवार को दर्ज करा सकेंगे अपनी समस्याएं

रक्सौल रक्सौल जिले में लोगों की बिजली बिल से जुड़ी समस्याएं सिर्फ तीन दिनों में ही निपटा दिए जायेंगे. इसके लिए कैंप लगाया जाएगा, जहां कंज्यूमर अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा.  बिजली बिल से जुड़ी काफी समस्याएं लोगों को झेलनी पड़ रही है. इस बीच रक्सौल जिले में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) ने खास पहल की है. इसके साथ ही कंज्यूमर्स की समस्या के समाधान के लिए कैंप लगाए जाने का फैसला लिया है. कंज्यूमर्स के लिए यह कैंप सुबह के 11 बजे से दोपहर के 2 बजे तक आयोजित किया जाएगा. हफ्ते में 2 दिन लगाए जायेंगे कैंप जानकारी के मुताबिक, हफ्ते में दो दिन सोमवार और शुक्रवार को कैंप लगाए जायेंगे. इसके बाद तय समय पर कंज्यूमर्स कैंप में पहुंच कर अपनी-अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे. रक्सौल विद्युत प्रमंडल के सभी ऑफिसों में अप्रैल महीने से यह सुविधा कंज्यूमर्स के लिए शुरू की गई है. इस कैंप का उद्देश्य बिजली बिल से जुड़ी गलतियों या फिर शिकायतों को जल्द से जल्द का निपटारा करना है. ये सभी शिकायतें करा सकेंगे दर्ज इलेक्ट्रिकल एग्जीक्यूटिव इंजीनियर की माने तो, कैंप में नया कनेक्शन, बिजली बिल में सुधार, स्मार्ट प्री-पेड मीटर, ‘पीएम सूर्य घर योजना’ से जुड़े एप्लीकेशन समेत कई अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें कंज्यूमर्स दर्ज करा सकते हैं. खास बात यह भी है कि सिर्फ 3 दिनों में ही समस्या का समाधान कर दिया जाएगा. लेकिन कुछ ऐसे मामले, जिसके लिए किसी जगह पर जाकर जांच करने की जरुरत होगी, वैसे मामलों में तीन दिन से ज्यादा का समय लग सकता है. लोगों से की गई ये अपील जानकारी के मुताबिक, कैंप से जुड़ी प्रोग्रेस रिपोर्ट मुख्यालय को भेजी जाएगी. ऐसे में स्थानीय लोगों से कैंप में आने और शिकातय दर्ज कराने की अपील की है. इससे कंज्यूमर्स को भी यह फायदा हो सकेगा कि उन्हें बार-बार ऑफिस का चक्कर नहीं काटना पड़ेगा. साथ ही राजस्व वसूली में भी तेजी आ सकती है.

रणवीर सिंह के मुरीद हुए आमिर खान, उधर विंदू दारा सिंह ने नितेश तिवारी की ‘रामायण’ को बताया आदिपुरुष से बेहतर

 एंटरटेनमेंट की दुनिया में हर रोज कुछ ना कुछ नये अपडेट्स आते रहते हैं. शुक्रवार 3 अप्रैल तो भी मनोजरंजन जगत में काफी हलचल दिख रही है. जहां कई नई फिल्में सिनेमाघरों में पहुंची हैं तो कई ओटीटी पर रिलीज हुई हैं. इन सबके बीच रणबीर कपूर की मच अवेटेड रामायण के टीजर को लेकर भी लोग मिक्स्ड रिएक्शन दे रहे हैं. जबकि रणवीर सिंह की धुरंधर दो हफ्ते बाद भी बॉक्स ऑफिस पर गर्दा उड़ा रही है. तो चलिए आज की सारी एंटरटेनमेंट की खबरों के अपडेट यहां जानते हैं.  आमिर खान भी हुए धुरंधर 2 के फैन आमिर खान भी उन मशहूर हस्तियों की लंबी लिस्ट में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' की तारीफ़ की है. जैसे-जैसे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी ज़बरदस्त पकड़ बनाए हुए है और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है, आमिर ने भी टीम की मेहनत की तारीफ करने के लिए कुछ पल निकाले.  आमिर खान प्रोडक्शंस के अपने इंस्टाग्राम स्टोरीज़ हैंडल पर जाकर, उन्होंने फिल्म का एक पोस्टर शेयर किया. इस पोस्टर में उन्होंने फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर के साथ-साथ अर्जुन रामपाल, आर. माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकारों को भी टैग किया है.  सोनू सूद ने पंजाब बाढ़ पीड़ितों की मदद की सोनू सूद एक बार फिर संकट की घड़ी में आगे आए हैं. इस बार उन्होंने अपना ध्यान उन घरों को फिर से बनाने पर केंद्रित किया है जो हाल ही में पंजाब के कुछ हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ में तबाह हो गए थे. सूद ने उन प्रभावित परिवारों को मदद पहुंचाई है जो बाढ़ के कारण पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर हुई तबाही के बाद बेघर हो गए थे. उन्होंने बताया कि हालांकि वे 100 से ज़्यादा घरों को फिर से बनाने में कामयाब रहे हैं, लेकिन अभी भी ऐसे कई और घर हैं.  सोनम कपूर ने बेबी बॉय के साथ शेयर की पहली तस्वीर सोनम कपूर और आनंद आहूजा ने 29 मार्च, 2026 को अपने बेटे का वेलकम किया. वहीं अपने बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद, सोनम ने सोशल मीडिया पर अपने नन्हे प्रिंस एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वह उसे अपनी गोद में लिए हुए हैं; इसके साथ ही उन्होंने डिलीवरी से पहले की अपनी एक तस्वीर भी शेयर की. एक्ट्रेस ने अपनी इस पोस्ट के साथ एक लंबा-सा नोट भी लिखा है.  1000 करोड़ी बनेगी धुरंधर 2 फिल्म क्रिटिक तरण आदर्शने पोस्ट कर लिखा है कि धुरंधर 2 बॉलीवुड की पहली 1000 करोड़ी फिल्म बनने वाली है. पोस्ट में तरण ने लिखा है, " 900 नॉट आउट ‘धुरंधर 2’ 1000 करोड़ की ओर बढ़ चली है… धुरंधर द रिवेंज लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है… दूसरे हफ़्ते का ज़बरदस्त बिज़नेस साफ़ दिखाता है कि धुरंधर 2 पहली ऐसी हिंदी फ़िल्म बनने की राह पर है जो 1000 करोड़ का आँकड़ा पार करेगी. भूत बंगला के आने तक कोई बड़ी फ़िल्म रिलीज़ नहीं हो रही है, इसलिए इस फ़िल्म के पास इस ऐतिहासिक मुकाम को आसानी से हासिल करने का पूरा मौक़ा है. विंदू दारा सिंह ने 'रामायण' के टीजर को बताया 'आदिपुरुष' से बेहतर दिवंगत दारा सिंह ने रामानंद सागर की मशहूर सीरीज़ 'रामायण' में पवनपुत्र के किरदार से टीवी पर भगवान हनुमान को अमर कर दिया था. वहीं उनके बेटे विंदु दारा सिंह ने नितेश तिवारी की 'रामायण' का टीज़र देखने के बाद अपना रिएक्शन दिया है और इसे 'आदिपुरुष' से बेहतर बताया है. इसके साथ ही उन्होंने मेकर्स को सलाह दी कि उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. वीर पहाड़िया ने भाई शिखर को किया बर्थडे विश 3 अप्रैल को जाह्नवी कपूर के बॉयफ्रेंड शिखर पहाड़िया 29वां जन्मदिन मना रहे हैं. इस मौके पर बॉलीवुड एक्टर वीर ने अपने भाई शिखर को खास अंदाज में विश किया. उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कुछ पुराने फोटो एल्बम की झलकियां शेयर की. इनमें से एक तस्वीर में शिखर बेहद छोटे नज़र आ रहे हैं और उन्होंने रेड कलर की डंगरी पहनी हुई है. तस्वीर में उनकी मासूमियत साफ झलक रही थी. इस फोटो के साथ उन्होंने एक 'हैप्पी' स्टिकर का भी इस्तेमाल किया. डायरेक्टर संजय गुप्ता ने 'रामायण' पर साधा निशाना डायरेक्टर संजय गुप्ता अपकमिंग इंडियन एपिक फिल्म 'रामायण' में भगवान राम के पहले लुक से ज़्यादा खुश नहीं हैंय गुरुवार को, डायरेक्टर ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, "साफ़-साफ़ दिख रहा है वीएफएक्स कंपनियां ऑस्करr नहीं जीततीं.टेक्नीशियन जीतते हैं."डायरेक्टर ने VFX की दिग्गज कंपनी DNEG का ज़िक्र किया, जिसने 97वें एकेडमी अवॉर्ड्स में फ़िल्म 'ड्यून पार्ट 2' के लिए बेस्ट विजुअल इफेक्ट्स का ऑस्कर जीता था.  'रामायण' के टीजर को मिल रहे मिक्स्ड रिएक्शन 'रामायण' का टीज़र ऑनलाइन रिलीज़ होने के बाद, कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने कमेंट सेक्शन में जाकर फ़िल्म के बारे में अपनी राय दी। एक यूज़र ने कमेंट किया, "इनमें से कुछ शॉट्स बहुत ज़्यादा पॉलिश किए हुए लग रहे हैं और AI जैसे दिख रहे हैं।" एक अन्य यूज़र ने लिखा, "इस पर 'अवतार' से भी ज़्यादा पैसे खर्च किए गए हैं, लेकिन इसकी दुनिया काफ़ी निराशाजनक लग रही है।"

जयपुर में विदेशी इन्फ्लुएंसर के फोटोशूट पर बवाल, हथिनी ‘चंचल’ की मौत से उठा रंगों पर सवाल

जयपुर जयपुर की पहचान ‘पिंक सिटी’ के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसी पहचान को दर्शाने के लिए किया गया एक फोटोशूट अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। एक विदेशी सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर द्वारा हाथी और एक महिला मॉडल को गुलाबी रंग में रंगकर किया गया फोटोशूट सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। शुरुआत में यह वीडियो आकर्षण का केंद्र बना, लेकिन कुछ ही समय बाद उसी हाथी की मौत की खबर सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। जानकारी के मुताबिक, यह फोटोशूट जयपुर के पास स्थित हाथी गांव में किया गया था। जानकारी के अनुसार, रूस की इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने ‘पिंक सिटी’ की थीम पर यह शूट कराया था। इसमें 65 वर्षीय हथिनी ‘चंचल’ और मॉडल यशस्वी को गुलाबी रंग से रंगा गया था। यह वीडियो करीब तीन महीने पहले पोस्ट किया गया था, लेकिन डेढ़ महीने पहले हाथी की मौत के बाद यह मामला दोबारा चर्चा में आ गया। पशु प्रेमियों और पशु अधिकार संगठनों ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि हाथी जैसे संवेदनशील जानवर को किसी भी तरह के रंग या केमिकल से रंगना उसकी त्वचा और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। कई कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यह रंग ही हाथी की मौत का कारण हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवाद बढ़ने के बाद वन विभाग हरकत में आया है और जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ जाकर जानवर के साथ क्रूरता की गई है, तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बबलू खान ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि हाथी को केवल कुछ समय के लिए ही रंगा गया था और इसमें किसी भी हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हथिनी पहले से ही वृद्ध थी और उसकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है। दूसरी ओर, इनफ्लुएंसर जूलिया बुरुलेवा ने भी सोशल मीडिया पर सफाई दी है। उन्होंने दावा किया कि शूट के दौरान ऑर्गेनिक और स्थानीय पेंट का इस्तेमाल किया गया था, जो त्योहारों में भी प्रयोग होता है और जानवरों के लिए सुरक्षित होता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने जयपुर में कई सप्ताह बिताए और सभी प्रक्रियाओं का ध्यान रखा। इस बीच, पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि राजस्थान में पर्यटकों का स्वागत है, लेकिन सभी को नियमों का पालन करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रकार का उल्लंघन पाया जाता है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक स्तर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक तरफ पशु अधिकार संगठनों की सख्ती की मांग है।  

डीडीसी का बड़ा एक्शन,घोषी नगर पंचायत की निविदा रद्द, कार्यपालक पदाधिकारी से मांगा जवाब

जहानाबाद जहानाबाद जिले में सैरात (हाट-बाजार) की बंदोबस्ती को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। “माल महाराज के, मिर्जा खेले होली” वाली कहावत यहां चरितार्थ होती नजर आ रही है, जहां एक ही जमीन पर नगर पंचायत और जिला परिषद दोनों ने बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है और दोनों निकायों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एक ही जमीन पर दो-दो बंदोबस्ती मामला घोषी नगर पंचायत का है, जहां जिला परिषद जहानाबाद की सैरात की जमीन पर नगर पंचायत द्वारा भी निविदा निकालकर बंदोबस्ती कर दी गई। वहीं, जिला परिषद पहले से ही उसी सैरात की बंदोबस्ती के लिए प्रक्रिया चला रहा था। ऐसे में एक ही जमीन पर दो अलग-अलग बंदोबस्ती होने से स्थिति असाधारण हो गई और विवाद गहरा गया। DDC प्रीति एक्शन मोड में मामला सामने आते ही जिला परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी और उप विकास आयुक्त (DDC) डॉ. प्रीति एक्शन मोड में आ गईं। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए नगर पंचायत घोषी द्वारा की गई बंदोबस्ती को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही, 24 घंटे के भीतर नगर पंचायत घोषी के कार्यपालक पदाधिकारी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। जिला परिषद की जमीन पर वर्षों से लग रहा सैरात जानकारी के मुताबिक, घोषी नगर पंचायत मुख्यालय में जिला परिषद की खतियानी जमीन पर कई वर्षों से सैरात लगता आ रहा है। हर साल की तरह इस वित्तीय वर्ष में भी जिला परिषद ने विधिवत विज्ञापन निकालकर बंदोबस्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन इसी बीच नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी ने भी उसी जमीन पर सैरात के लिए निविदा जारी कर दी, जिसे नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है। कानून क्या कहता है? जिला परिषद के अधिकारियों का कहना है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा 100 के अनुसार, जिला परिषद की परिसंपत्ति नगर निगम, नगर परिषद या नगर पंचायत के अधीन नहीं होती। इसका साफ मतलब है कि जिला परिषद की स्वामित्व वाली जमीन पर नगर निकाय किसी भी तरह का बाजार या सैरात की बंदोबस्ती नहीं कर सकते। वहीं, नगर पंचायत घोषी के मुख्य पार्षद का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र के अंदर जो भी खाली जमीन है, वह नगर पंचायत की मानी जाती है और इस संबंध में पहले से आदेश भी जारी है।  

नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन, लोगों के स्वास्थ्य पर डाल रहा विपरीत प्रभाव

मिलावटखोरों का सरदार जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी  नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री के उपयोग से लोगों के पूरे स्वास्थ्य पर पड रहा विपरीत प्रभाव  गांधी के फेर में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जिम्मेदारों ने मूंदी आंख सबसे सरोकार खबरें धारदार। ब्योहारी ब्यूरो चीफ वेदप्रकाश बेदांति ब्योहारी नगरीय क्षेत्र में मिलावट खोरों की चांदी, यहां कभी नहीं होती जांच और कार्यवाही। मिलावटखोरों को संरक्षण दे रहा खाद्य सुरक्षा विभाग का तथाकथित अधिकारी आर के सोनी, सूत्रों की मानें तो जिले में बैठकर यहां खाद्य सुरक्षा विभाग का प्रभार देख रहे साहब के द्वारा हर महीने यहां के होटल रेस्टोरेंट डेयरी नमकीन फैक्ट्री किराना दुकानों व पानी सप्लाई फैक्ट्री बर्फ आइसक्रीम फैक्ट्री व अन्य एजेंसियों से मासिक वसूली की जाती है। जिससे खाद्य सुरक्षा अधिकारी यहां कभी किसी पर कोई कार्यवाही नहीं करते और न कभी किसी का फोन उठाते हैं।  ब्योहारी-नगरीय क्षेत्र में दिनांक 27/03/2026 को विनायक पैलेस में आयोजित विवाह समारोह  बब्बू खान के लड़की की शादी में राजू गुप्ता की दुकान से पताजंली कम्पनी का सरसों तेल खरीदा गया जिसे सब्जी बनाने के लिए जब कड़ाही में डालकर गर्म किया तभी वह पूरा तेल हरे रंग में बदल गया जैसे डाबर आंवला का तेल हो। आनन फानन आयोजक दूसरी कम्पनी का तेल लाकर दावत का खाना बनाया गया।यदि उस तेल का उपयोग कर खाना बनाया जाता तो निसंदेह अनेक लोग  फ्रूडप्वाजिनिंग के शिकार हो सकते थे। गनीमत रही कि खाना बनाने वाले मिस्त्री ने तत्काल तेल के कलर बदलने से उसकी गुणवत्ता परख तेल ही बदलवा दिया।पतांजली कम्पनी का सरसों तेल जिसे गर्म करने पर उसका पूरा रंग ही बदल कर गाढ़ा हरे रंग का हो  जाता है। जिससे यह साफ है कि इसमें किसी तेज कैमिकल का उपयोग किया जाता है। जब इसे उपयोग के लिए कड़ाही में डालकर गर्म किया जाता है तो पूरा तेल ही हरे कलर में बदल जाता है। जैसे डाबर आंवला का तेल हो। पतांजली का कमाल सरसों तेल गरम करते ही बन गया डाबर आंवला का तेल  खाद्य पदार्थों में इतनी मिलावट खोरी से लोगों की जान जोखिम में बनी रहती है। मिलावटखोरों को लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने की यहां खुली छूट खाद्य सुरक्षा अधिकारी सोनी द्वारा दी गई है। जिसके बदले साहब हर महीने अपनी जेब खूब गर्म करते हैं।  यहां नकली मावा,दूध,पनीर, सहित ज्यादातर खाद्य पदार्थ नकली और मिलावटी रहता है।खाद्य सुरक्षा कानून लागू है। लेकिन जिले में बैठे ज़िला खाद्य अधिकारी आरके सोनी के बारे में यहां चर्चा है कि उनका एजेंट यहां की लगभग सभी होटल डेयरी रेस्टोरेंट एजेंसी कारखाने और अन्य खाद्य पदार्थ सप्लाई बाली जगहों से हर महीने एक निश्चित तय राशि की बसूली करता है।जिससे यहां का ज्यादातर बाजार नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री से पटा हुआ है। कार्यवाही से बेखबर व्यापारी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करते हुए ब्रांडेड कम्पनी का लेबल लगा मनमानी दाम पर बाजार में खुलेआम नकली और मिलावटी खाद्य सामग्री बेंच रहे हैं। जिससे जिले में बैठे खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके सोनी पर लोग तमाम तरह के गम्भीर आरोप लगा रहे हैं। जबसे साहब ने जिले का प्रभार संभाला है तब से केवल साल में एकाध बार अपने स्थानीय एजेंटों के साथ नगरीय क्षेत्र के सभी व्यापारी बंधुओं से मिलकर मिलावटखोरी तेजकर जेब का बजन बढ़ाने की मिन्नत करने यहां जरुर आते हैं। जांच और कार्यवाही के नाम यहां हो रही केवल बसूली! ऐसा यहां के कुछ लोगों का कहना है। दिखाबा के लिए मात्र कागजी कार्यवाही कार्यालय में बैठकर ही साहब पूरी करते हैं। खाद्य सुरक्षा के नाम पर विभाग में बैठा अमला केवल बसूली ही करता है। नाम न छापने की शर्त पर एक रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया कि जिलाखाद्य विभाग केवल ब्योहारी में हर महीने लाखों रुपए की बसूली करता है। लोगों का कहना है कि शहडोल जिले में जबसे जिला खाद्य विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरके. सोनी पदस्थ हुए हैं। तबसे स्थानीय व्यापारियों पर इनकी बसूली का दबाव कुछ अधिक ही बढ़ गया है।  यहां के कई व्यापारी इनकी इस अबैध बसूली से बहुत परेशान हैं। और सरकार से अंकुश लगाने की मांग कर रहे हैं। खाद्य सुरक्षा अधिकारी शहडोल आरके सोनी कथन -इस सम्बन्ध में जब इनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया लेकिन फोन नहीं उठा।

स्प्रिट पीने से मची चीख-पुकार,4 की मौत, SHO सस्पेंड और चौकीदार गिरफ्तार

मोहतिहारी मोतिहारी रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में जहरीली स्प्रिट (शराब) पीने से लोगों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है। कल एक व्यक्ति की मौत हुई थी, वहीं दो अन्य गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इसके अलावा एक व्यक्ति की आंखों की रोशनी चले जाने की खबर ने इलाके में हड़कंप मचा दिया। मृतकों की संख्या बढ़ी, कई लोग अभी भी बीमार मिली जानकारी के अनुसार, मृतकों की संख्या दो से बढ़कर चार हो गई है। कल जहरीली शराब पीने से चंदू की मौत हुई थी। वहीं आज सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया परसौना निवासी प्रमोद यादव, परीक्षण मांझी और हीरालाल महतो की मौत हो गई। उनका इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, अभी भी कई लोग ऐसे हैं जो जहरीली शराब पीने से बीमार हैं और चोरी-चुपके इलाज करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने शराब समझकर स्प्रिट का सेवन कर लिया। सेवन के कुछ ही देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों ने उन्हें तत्काल स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है। अभी अन्य कई पीड़ितों का इलाज जारी है। आंखों की रोशनी प्रभावित, मामले की गंभीरता बढ़ी डॉक्टरों के अनुसार, इस जहरीली शराब के सेवन से पहले आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में सभी घायलों का इलाज किया जा रहा है। गांव में भय और आक्रोश, अवैध शराब पर सवाल घटना के बाद पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध शराब और स्प्रिट का कारोबार चल रहा है, लेकिन इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। पुलिस प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारण का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। साथ ही अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य में लागू शराबबंदी कानून और उसकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौकीदार भरत रॉय को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तुरकौलिया थाना के SHO उमाशंकर मांझी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रघुनाथपुर में हुई हत्या के मामले में भी केस दर्ज कर लिया गया है. हीरालाल भगत के परिजनों के आवेदन पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है।  

हाथों में बार-बार झुनझुनी और सुन्नपन को न करें नजरअंदाज, यह शरीर में छिपी इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

क्या आपके हाथों में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होता है? कई लोग इसे मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह शरीर का एक संकेत भी हो सकता है, जिसे समझना जरूरी है.  अक्सर यह समस्या तब महसूस होती है जब हम गलत पोजीशन में सो जाते हैं या लंबे समय तक एक ही स्थिति में हाथ रखते हैं. ऐसे में नसों पर दबाव पड़ता है या खून का प्रवाह कुछ समय के लिए कम हो जाता है, जिससे झुनझुनी होने लगती है. कब होती है दिक्कत? लेकिन अगर यह परेशानी बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे, तो इसके पीछे कोई खास कारण भी हो सकता है. theheartysoul की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे आम वजहों में से एक है कार्पल टनल सिंड्रोम, जिसमें कलाई की नस दब जाती है और अंगूठे, उंगलियों में झुनझुनी या दर्द होने लगता है. कभी-कभी समस्या कलाई में नहीं, बल्कि कोहनी या गर्दन से भी जुड़ी हो सकती है. नसों में कहीं भी दबाव आने से हाथ तक इसका असर पहुंच सकता है, जिससे झुनझुनी और कमजोरी महसूस होती है. ब्लड सर्कुलेशन और डायबिटीड भी कारण खराब ब्लड सर्कुलेशन भी इसका एक कारण हो सकता है.  ठंड में या अचानक तापमान बदलने पर उंगलियां सुन्न पड़ सकती हैं और रंग भी बदल सकता है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, डायबिटीज जैसी बीमारियां भी नसों को प्रभावित कर सकती हैं. जब नसें कमजोर होने लगती हैं, तो हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन या सुन्नपन महसूस होने लगता है. विटामिन B12 की कमी विटामिन B12 की कमी भी एक अहम कारण है, जो धीरे-धीरे नसों को नुकसान पहुंचा सकती है. कई बार लोग थकान या कमजोरी को नजरअंदाज करते रहते हैं, लेकिन यह संकेत हो सकता है कि शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी है. कुछ मामलों में थायरॉयड की समस्या भी हाथों में झुनझुनी का कारण बन सकती है. शरीर का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने से नसों पर असर पड़ता है और यह समस्या बढ़ सकती है. ये भी होता है कारण कंधे और गर्दन के बीच नसों या ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ने से भी हाथों में झुनझुनी हो सकती है. खासतौर पर जब हाथ लंबे समय तक ऊपर रखा जाए या भारी वजन उठाया जाए.  अगर झुनझुनी के साथ कमजोरी, चीजें गिरना, या दर्द बढ़ने लगे, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. यह संकेत हो सकता है कि नसों पर लगातार दबाव पड़ रहा है या कोई गंभीर समस्या विकसित हो रही है. अचानक एक तरफ हाथ सुन्न हो जाना, बोलने में दिक्कत या चक्कर आना जैसी स्थिति स्ट्रोक का संकेत भी हो सकती है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है.

एमपी की पूर्व आइएएस अधिकारी की अवैध संपत्ति में संलिप्तता, ईडी ने दायर किया पूरक अभियोग

भोपाल   मध्यप्रदेश के आइएएस पति पत्नी अवैध संपत्ति मामले में ऐसे फंसे हैं कि सालों बाद भी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एमपी कैडर के पूर्व आइएएस दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ ईडी ने पूरक अभियोग पेश किया है। पूर्व आइएएस दंपत्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में यह कार्यवाही की गई है। ईडी ने दिवंगत अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (SPC) दाखिल की। भोपाल स्थित विशेष PMLA न्यायालय में 31 मार्च को इस संबंध में शिकायत पेश की गई थी। ईडी का आरोप है कि जोशी दंपत्ति ने 41.87 करोड़ रुपए की अवैध चल अचल संपत्ति जुटाई। दिवंगत आइएएस अधिकारी अरविंद जोशी और उनकी पत्नी टीनू जोशी के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस भोपाल द्वारा प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके आधार पर सन 2002 में ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की जांच की शुरुआत की। ईडी ने जांच में पाया कि दोनों अधिकारियों ने पद का दुरुपयोग कर अवैध संपत्ति बनाई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल क्षेत्रीय कार्यालय ने मध्यप्रदेश कैडर के पूर्व आइएएस दंपती अरविंद जोशी और टीनू जोशी के खिलाफ दूसरी पूरक अभियोग शिकायत दायर की है। ईडी ने लोकायुक्त में जोशी दंपति के खिलाफ दर्ज मामले के आधार पर जांच शुरू की थी। इसमें उन पर 41.87 करोड़ की चल- अचल संपत्ति रखने का आरोप था। जो उनकी वैध आय से कई गुना ज्यादा थी। इसके बाद ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि अरविंद जोशी और टीनू जोशी ने अपने नाम और अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों की चल और अचल संपत्ति जमा कर रखी थी। इससे पहले ईडी ने अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए ईडी की जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि अरविंद जोशी ने कुछ अन्य व्यक्तियों के नाम पर भी संपत्तियां बनाई। इस दौरान संपत्ति के स्वामित्व को छिपाने के लिए जानबूझकर तीसरे पक्ष को शामिल किया। बता दें इससे पहले ईडी ने अरविंद जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की अवैध रूप से अर्जित करीब 8.60 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त करने के लिए तीन अस्थायी कुर्की आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद 28 जनवरी को एक और अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया। जिसमें जोशी और उनके परिवार के सदस्यों की लगभग 5 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गईं।

LPG की किल्लत में इलेक्ट्रिक चूल्हा है तगड़ा विकल्प, जानें 1 घंटे इस्तेमाल करने पर कितना आएगा बिजली बिल

 LPG सिलेंडर की कमी के बीच अब लोग खाना बनाने के लिए अलग-अलग ऑप्शन तलाश रहे हैं. कई लोगों ने इंडक्शन कुकटॉप खरीद लिए हैं तो कुछ इंफ्रारेड चूल्हों से काम चला रहे हैं. गैस स्टोव का एक सस्ता ऑप्शन इलेक्ट्रिक चूल्हा भी है. यह एक इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर होता है, जो बिजली की मदद से चलता है. इसकी कीमत भी एकदम सस्ती होती है और इससे करंट आने का भी डर नहीं रहता. आज हम आपको बताएंगे कि यह काम कैसे करता है और एक घंटे तक यूज करने पर कितनी बिजली की खपत करता है. कोयले की मदद से काम करता है इलेक्ट्रिक चूल्हा इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर यानी बिजली की मदद से कोयले को जलाकर काम करने वाला चूल्हा. यह एक तरह का इलेक्ट्रिक स्टोव होता है, जो कोयले को गर्म करने के लिए बनाया गया है. यह बिजली से कोयले को गर्म करता है. कोयला गर्म होने पर यह हीट जनरेट करने लगता है, जिससे चाय बनाने से लेकर खाना तक पकाया जा सकता है. 1 घंटे में कितनी बिजली की खपत करेगा इलेक्ट्रिक चूल्हा? इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली खपत उसके बर्नर पर निर्भर करती है. मोटे तौर पर यह अंदाजा लगाया जाता है कि मीडियम से बड़े बर्नर वाले चूल्हे लगातार एक घंटे तक चलने पर एक यूनिट बिजली की खपत करते हैं. अगर ज्यादा बड़ा बर्नर होगा तो उसकी बिजली खपत भी बढ़ जाएगी. ऐसे में अगर आप एक यूनिट के 8 रुपये दे रहे हैं तो यह एक घंटे में 8 रुपये की बिजली की खपत करेगा. इन बातों का ध्यान रखना भी जरूरी इलेक्ट्रिक चूल्हे की बिजली की खपत का हिसाब देखते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बहुत ही कम मौकों पर ये लगातार एक घंटे तक चलते हैं. आमतौर पर 5-7 मिनट में कोयला गर्म हो जाता है, जिसके बाद चूल्हे को बिजली की जरूरत नहीं रहती. इसी तरह हीट सेटिंग को कम कर भी बिजली की बचत की जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो इलेक्ट्रिक चारकोल बर्नर पर खाना बनाना काफी सस्ता होता है. कम लागत के अलावा और भी हैं इलेक्ट्रिक चूल्हे के फायदे इलेक्ट्रिक चूल्हे पर इंडक्शन की तरह अलग से बर्तनों की जरूरत नहीं पड़ती. इस पर हर प्रकार के बर्तनों को यूज किया जा सकता है. इसे यूज करते समय आग की लपटें नहीं निकलती तो इसे यूज करना एकदम आसान है. कोयले का यूज होने के बावजूद इससे धुआं नहीं निकलता और यह खाना भी जल्दी पका देता है. हल्का होने के कारण इसे कहीं भी ले जाना आसान है.