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रसोई में इंडक्शन चूल्हा रखने की सही दिशा क्या है? वास्तु के इन नियमों का पालन करने से घर में आएगी सुख-समृद्धि

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच LPG गैस आपूर्ति से लोगों में चिंता बढ़ी है, जिससे इंडक्शन की मांग बढ़ रही है. लेकिन इंडक्शन चूल्हे पर खाना पकाते समय वास्तु शास्त्र के ये नियम जानना जरूरी है. इंडक्शन के लिए वास्तु नियम अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के बाद पश्चिमी एशिया (Middle East War) में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. हमले और जंग के बीच भारत में भी संकट मंडराने लगा है और यह संकट है LPG गैस सिलेंडर का. एलपीजी की आपूर्ति के पैनिक के बीच लोग अपने घरों में इंडक्शन चूल्हे का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं और बाजार में भी इंडक्शन की डिमांड बढ़ने लगी है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और एलपीजी संकट के बीच लोग इंडक्शन चूल्हे को विकल्प के तौर पर अपना रहे हैं. वहीं कुछ परिवार पहले से ही खाना पकाने के लिए रसोई में इंडक्शन का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इंडक्शन चूल्हे पर खाना बनाते समय आपको वास्तु शास्त्र से जुड़े कुछ नियम जरूर जान लेने चाहिए. वास्तु से जुड़ी इन नियमों की अनदेखी करने पर रसोई की सकारात्मक ऊर्जा बाधित हो सकती है. आइए जानते हैं Induction चूल्हा पर खाना पकाते समय किन बातों का रखें ध्यान और किन नियमों का करें पालन. सही दिशा में रखें इंडक्शन चूल्हा वास्तु शास्त्र के अनुसार, रसोईघर में आग से जुड़े (अग्नि तत्व) उपकरणों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा यानी अग्नि कोण को शुभ माना जाता है. इसलिए इंडक्शन चूल्हा भी इसी दिशा में रखना बेहतर होता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है. सकारात्मक ऊर्जा के सर्वोत्तम प्रवाह के लिए आप आदर्श रूप से रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में इंडक्शन रख सकते हैं. लेकिन किसी कारण इस दिशा में स्थान न हो या इस दिशा में चूल्हा रखना संभव न हो तो विकल्प के तौर पर उत्तर-पश्चिम में भी रखा जा सकता है.     इस बात का खास ध्यान रखें कि, इंडक्शन पर खाना पकाने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा में होना चाहिए. इससे सेहत अच्छी रहती है और सकारात्मकता का संचार बढ़ता है.     साथ ही इंडक्शन को ठीक सिंक या पानी वाले स्थान (जल तत्व) के बगल में भी नहीं रखें. क्योंकि इससे आग और पानी का टकराव होता है.     इंडक्शन को उत्तर-पूर्व (शांत या पानी वाला जोन) या दक्षिण-पश्चिम (स्थिरता/पृथ्वी वाला जोन) में नहीं रखना चाहिए.     वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिस स्थान पर इंडक्शन चूल्हा रखा गया हो, वहां साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें. इंडक्शन के आस-पास गंदनी न करें और जूठे बर्तन न रखें. ऐसा करने से रसोई की ऊर्जा खराब होती है.  

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना: ससौली-छिरोपारा के ग्रामीणों को मिली सुगम आवागमन की सुविधा

रायपुर मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों के ग्रामीणों के लिए आवागमन का सशक्त माध्यम बन रही है। सरगुजा जिले के विकासखंड लुण्ड्रा के ग्राम ससौली और छिरोपारा के निवासियों के लिए अब जिला मुख्यालय अंबिकापुर तक की राह न केवल आसान हुई है, बल्कि उनके समय और श्रम की भी बड़ी बचत हो रही है। कई किलोमीटर का पैदल सफर अब हुआ समाप्त ग्राम ससौली छिरोपारा निवासी  गिरवर यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के प्रारंभ होने से पहले उन्हें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था। मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को लगभग 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर लुण्ड्रा आना पड़ता था। उन्होंने बताया कि पहले बस पकड़ने के लिए घंटों पैदल चलना पड़ता था। कई बार देरी होने पर बस छूट जाती थी, जिससे पूरा दिन खराब हो जाता और जरूरी काम भी रुक जाते थे। लेकिन जब से ’अंबिकापुर से कोरांधा-उरदरा’ मार्ग पर मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू हुई है, हमारी जिंदगी बदल गई है।“ समय पर काम और सुरक्षित वापसी योजना के तहत संचालित बस अब सीधे गांव के करीब से होकर गुजर रही है। ग्रामीण अब आसानी से बस में सवार होकर समय पर जिला मुख्यालय पहुंचते हैं, दिनभर अपना काम निपटाते हैं और उसी बस से सुरक्षित अपने घर वापस लौट आते हैं। इस सुविधा ने न केवल आर्थिक रूप से राहत दी है, बल्कि बुजुर्गों, महिलाओं और छात्रों के लिए आवागमन को बेहद सुविधाजनक बना दिया है। योजना के लिए शासन का जताया आभार पहुंचविहीन क्षेत्रों को जिला मुख्यालय से जोड़ने की इस सार्थक पहल के लिए क्षेत्र के ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की है। ससौली और छिरोपारा के  गिरवर यादव ने इस संवेदनशील निर्णय के लिए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सोनारडीह मामले के बाद एक्शन में धनबाद एसडीएम, आधा दर्जन ठिकानों पर छापेमारी कर अवैध मुहाने भरने के दिए निर्देश

धनबाद धनबाद में सोनारडीह भूधसान के बाद प्रशासन अवैध कोयला खनन के खिलाफ सख्त हो गया है. एसडीएम लोकेश बारंगे के नेतृत्व में कई स्थानों पर छापेमारी कर कोयला और वाहनों की जब्ती की गई और अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए.  झारखंड के धनबाद में सोनारडीह भूधसान मामले धनबाद एसडीएम (सदर अनुमंडल दंडाधिकारी) लोकेश बारंगे के नेतृत्व में अवैध कोयला खनन और संबंधित गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की गई. अभियान में कौन कौन थे शामिल इस अभियान में माइनिंग अधिकारी, बाघमारा अंचल अधिकारी गिरजनंद किस्कू, बीसीसीएल कतरास क्षेत्र के महाप्रबंधक सुधाकर प्रसाद, उमंग ठक्कर, अशोक कुमार, प्रेम शर्मा, कतरास थाना प्रभारी प्रवीण कुमार, तेतुलमारी थाना प्रभारी विवेक चौधरी और अन्य पुलिस बल शामिल थे. कई स्थानों पर छापेमारी, कोयला और वाहन जब्त धनबाद एसडीएम ने गजली टांड, रामकनाली के सूर्य मंदिर और तेतुलमारी के खास सिजुआ सहित आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर कोयला और वाहन जब्त करने के आदेश दिए. उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध मुहाने को भराई करवाकर फोटो और वीडियो सहित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए. एसडीएम श्री बारंगे ने कहा कि 100 प्रतिशत कार्रवाई होनी चाहिए.

पठानकोट के जसनूर सिंह ने CDS-2 परीक्षा में ऑल इंडिया 1 रैंक हासिल कर बढ़ाया मान, एयरफोर्स और नेवल एकेडमी में चयन

पठानकोट  पठानकोट के जसनूर सिंह ने यूपीएससी की सीडीएस-2 परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है। जसनूर सिंह ने इंडियन मिलिट्री अकादमी में सातवां, इंडियन एयरफोर्स अकादमी और इंडियन नेवल अकादमी में पहला स्थान हासिल किया है। परिवार और टीचर्स ने बढ़ाया हौसला जसनूर की शुरूआती स्कूलिंग सैंट जोसेफ कान्वेंट स्कूल पठानकोट और फिर महाराजा रणजीत सिंह आर्म फोर्सर्सेस प्रिपरेटरी इंस्टट्यूट में हुई। जसनूर अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार और टीचर्स को देते हैं। उन्होंने बताया कि डायरेक्टर मेजर जनरल एचएस चौहान ने उनका काफी स्पोर्ट किया। जसनूर का मानना है कि काफी यूथ डिफेंस में जाना चाहते हैं, पढ़ने के टाइम उन्हें पढ़ना चाहिए। खेलने के टाइम खेलना चाहिए। बाहर की दुनिया से बात करनी चाहिए। एक्सपोज़र लेना चाहिए। मेहनत करें सफलता जरूर मिलेगी। एनडीए में मिली थी असफलता अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए जसनूर ने बताया कि उनका यह सफर पांच साल पहले शुरू हुआ था। उन्होंने पहले एनडीए परीक्षा भी उत्तीर्ण करने का प्रयास किया था, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली। एयरफोर्स ज्वाइन करेंगे जसनूर ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद उन्होंने सीडीएस परीक्षा दी और पूरे देश में एयरफोर्स और नेवी में पहला स्थान प्राप्त किया। उन्होंने एयरफोर्स ज्वाइन करने की बात कही और अन्य युवाओं से भी कड़ी मेहनत करने की अपील की। बेहद खुश हैं जसनूर के माता-पिता जसनूर सिंह के माता-पिता, दविंदर सिंह और सुखजीत कौर ने अपने बेटे की लगातार मेहनत पर गर्व व्यक्त किया। माता-पिता जसनूर सिंह का सफलता से काफी खुश हैं और कामना करते हैं कि वह सफलता की बुलंदियों को छुएगा। जसनूर ने यह भी बताया कि उनके बड़े भाई ने भी इस सफर में उनका बहुत साथ दिया। बचपन से था जसनूर का सपना – पिता जसनूर के पिता और दवा कारोबारी दविंदर सिंह का कहना है कि सबसे पहले हम उस परमात्मा वाहेगुरु का धन्यवाद करते हैं,जिन्होंने हमें यह खुशी दी। उन्होंने कहा कि शुरू से ही जसनूर का सपना था कि वह इंडियन डिफेंस जॉइन करे। इसके लिए वह प्लस वन से ही प्रयास कर रहा था। उसने NDA की परीक्षा 2 बार दी और दोनों बार लिखित परीक्षा पास की। लेकिन इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाया। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई जसनूर के पिता ने बताया कि उसने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई शुरू की और साथ ही CDS की तैयारी भी जारी रखी। इसके लिए उसने ऑनलाइन क्लासेस और कोचिंग भी ली। CDS की लिखित परीक्षा पास करने के बाद उसका एयरफोर्स इंटरव्यू देहरादून में हुआ, जो 3 दिन चलता है। उसने SSB इंटरव्यू भी पास कर लिया। 3 दिन देहरादून में चला इंटरव्यू इसके बाद उसका मेडिकल हुआ, जो एयरफोर्स पायलट के लिए सबसे कठिन माना जाता है और वह भी उसने दिल्ली में सफलतापूर्वक पास कर लिया। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के अंकों को मिलाकर ऑल इंडिया स्तर पर मेरिट लिस्ट बनती है। जिसमें जसनूर सिंह ने पूरे भारत में रैंक नंबर 1 प्राप्त किया। यह पठानकोट और पूरे पंजाब के लिए गर्व का क्षण है।  

राजभवन में रेडक्रॉस प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट, सेवा कार्यों को लेकर संवाद

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका राज्यपाल   रमेन डेका के आज सरायपाली प्रवास के दौरान रेडक्रास एवं एन सी सी के पदाधिकारियों ने भेंट की। कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष विनय कुमार लंगेह एवं अनुपमा आनंद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सरायपाली के दिशा-निर्देशन एवं सभापति संदीप दीवान (इंडिया रेडक्रॉस सोसाइटी, जिला शाखा महासमुंद) के मार्गदर्शन तथा जिला संगठक डा अशोक गिरि गोस्वामी के नेतृत्व में  भारतीय रेडक्रास सोसायटी ज़िला शाखा महासमुन्द अन्तर्गत पदाधिकारियों ने मुलाकात की।              सभी ने रेडक्रास गीत गाकर राज्यपाल  का स्वागत किया। रेडक्रॉस काउंसलर्स एवं वालेंटियर्स की टीम ने राज्यपाल एवं पदेन अध्यक्ष इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी (राज्य शाखा, रायपुर) का स्वागत किया। राज्यपाल ने किया पौध रोपण             इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने रेस्ट हाउस परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पीपल का पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

पाकिस्तान में पेट्रोल 458 रुपए और डीजल 520 के पार, तेल की बढ़ी कीमतों से आम जनता परेशान

लाहौर   पाकिस्तान ने  डीजल और पेट्रोल की कीमतें 50% से ज्यादा बढ़ा दीं। एक महीने से भी कम समय में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। यह बढ़ोतरी मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में हो रही तेज वृद्धि के चलते की गई है। डीजल की कीमत 55% से ज्यादा बढ़ाकर 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जबकि पेट्रोल की कीमत लगभग 55% बढ़ाकर 458.40 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। अमेरिकी तेल कीमतों में 11% से ज्यादा की उछाल आई, जबकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7% से ज्यादा बढ़ गईं। यह बढ़ोतरी तब हुई जब एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि सैन्य अभियान और तेज किए जाएंगे। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार पेट्रोलियम मंत्री मलिक ने कहा कि नई कीमतें शुक्रवार से प्रभावी होंगी. दरअसल ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध के बाद से पाकिस्तान ईंधन संकट में डूबा हुआ है और ऐसा पहली बार नहीं है जब 28 फरवरी को शुरू जंग के बाद पाकिस्तान में तेल के दाम बढ़ाए गए हैं।  अपनी ही बात से पलटे शहबाज डॉन की रिपोर्ट के अनुसार एक सप्ताह पहले ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि उन्होंने युद्ध शुरू होने के बाद से पेट्रोल की कीमत में 95 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 203 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की तीसरी सिफारिश को खारिज कर दिया है. इससे पहले, पीएम ने कहा था कि उन्होंने डीजल की कीमत में 177 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत में 76 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी को खारिज कर दिया है. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि 13 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद उन्होंने पहले भी इसी तरह की सिफारिश को खारिज कर दिया था. लेकिन अब पहले से ही आर्थिक संकट से जूझती पाक सरकार बेबस दिख रही है।  युद्ध शुरू होने के बाद, पाकिस्तान सरकार ने शुरुआत में 6 मार्च को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. अब एक बार फिर यह बढ़ोतरी की गई है।   आखिर क्यों लगी पाकिस्तान में 'महंगाई की आग'? पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा संकट से घिरा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:     वैश्विक तनाव : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को आग लगा दी है। दुबई क्रूड $128.52 प्रति बैरल तक पहुंच गया है।     रुपए की बदहाली : डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे तेल का आयात करना बेहद महंगा हो गया है।     IMF की शर्तें : कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों को मानना पड़ रहा है, जिसके कारण सरकार चाहकर भी सब्सिडी नहीं दे पा रही। आम आदमी पर क्या होगा असर? यह सिर्फ पेट्रोल की कीमत नहीं है, यह एक 'महंगाई का चक्रवात' है जो हर चीज को निगल जाएगा:     किराया आसमान पर : बस, रिक्शा और ट्रक का भाड़ा बढ़ने से दफ्तर जाने वाले और छात्रों की जेब खाली हो जाएगी।     थाली से गायब होगी रोटी : जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, तो आटा, दाल, दूध और सब्जियों की कीमतें भी दोगुनी हो जाएंगी।     धंधा चौपट : डिलीवरी बॉय, टैक्सी ड्राइवर और छोटे व्यापारियों के लिए अब अपना काम जारी रखना नामुमकिन सा हो गया है। भारत vs पाकिस्तान : एक बड़ी तुलना जहां भारत में आज पेट्रोल औसतन ₹100-₹110 के बीच स्थिर है, वहीं पाकिस्तान में यह 4 गुना ज्यादा महंगा हो चुका है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति और मजबूत पेट्रोलियम रिजर्व के दम पर अपनी जनता को इस वैश्विक संकट से बचा लिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और कर्ज पर निर्भरता ने उसे इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। आगे क्या? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल-ईस्ट में युद्ध के हालात नहीं सुधरे, तो अगली समीक्षा में पेट्रोल ₹500 का आंकड़ा भी पार कर सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि लागत तो ₹544 होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने 'थोड़ी राहत' दी है। मगर जनता पूछ रही है कि ऐसी राहत का क्या करें जिससे चूल्हा जलाना ही मुश्किल हो जाए?  

योगी सरकार में आज़मगढ़ की चमकी पहचान, निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी को मिला वैश्विक सम्मान

योगी सरकार में चमकी आज़मगढ़ की पहचान: निज़ामाबाद की ब्लैक पॉटरी को मिला वैश्विक सम्मान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना बनी वैश्विक ब्रांड, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी मांग कॉमन फैसिलिटी सेंटर की सुविधा मिलने के बाद ब्लैक पॉटरी का व्यापार तेजी से बढ़ा आजमगढ़  आज़मगढ़ जनपद अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां के निज़ामाबाद क्षेत्र की ब्लैक पॉटरी (काली मिट्टी की कारीगरी) विश्वभर में अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए है। इस शिल्प में प्रयुक्त विशेष प्रकार की चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध होती है, जो इस कला को और भी विशिष्ट बनाती है।      निज़ामाबाद क्षेत्र में 200 से अधिक कारीगर परंपरागत शिल्प से जुड़े हुए हैं। ये कारीगर अपने हुनर से विभिन्न प्रकार के उत्पाद जैसे फूलदान, बर्तन, चायदान, शक्करदान और सजावटी वस्तुएँ तैयार करते हैं। इन उत्पादों की मांग देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि ये वस्तुएं उपयोगी होने के साथ-साथ सौंदर्य की दृष्टि से भी बेहद आकर्षक होती हैं।      आज़मगढ़ का यह शिल्प उद्योग न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक रूप से भी स्थानीय लोगों के जीवन का एक मजबूत आधार है। जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ-साथ यह प्राचीन उद्योग भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। निज़ामाबाद की फैंसी पॉटरी विशेष रूप से अपनी नक्काशी और चमकदार काले रंग के लिए प्रसिद्ध है।      कुम्हार समुदाय द्वारा बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तन और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं जैसे गणेश, लक्ष्मी, शिव, दुर्गा और सरस्वती मेलों और त्योहारों के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय रहती हैं। इन कलाकृतियों में पारंपरिक आस्था और कलात्मकता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।     ब्लैक पॉटरी की सबसे खास विशेषता इसका गहरा काला रंग है, जो एक विशेष प्रक्रिया से प्राप्त किया जाता है। कारीगर पहले तैयार बर्तन को मिट्टी और वनस्पति के घोल में डुबोते हैं, जिससे उसका आधार रंग बनता है। इसके बाद उसे विशेष तकनीक से पकाया जाता है और आकर्षक चमक देने के लिए पारा, रांगा और सीसा जैसे तत्वों का उपयोग किया जाता है।    इस दिशा में योगी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में “एक जिला एक उत्पाद” योजना के माध्यम से आज़मगढ़ की ब्लैक पॉटरी को नई पहचान और व्यापक बाजार मिला है, जिससे कारीगरों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन अवसर प्राप्त हो रहे हैं तथा उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। यही कारण है कि यह पारंपरिक कला आज के आधुनिक समय में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखते हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर है। इस अनमोल धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयासरत है और कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है, ताकि यह कला आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और जीवंत बनी रह सके।  निज़ामाबाद के ब्लैक पॉटरी फाउंडेशन के निदेशक संजय कुमार यादव बताते हैं कि योगी सरकार के कारण उन्हें कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) की सुविधा प्राप्त हुई। इस सुविधा के मिलने के बाद उनका व्यापार तेजी से बढ़ा है। आधुनिक मशीनों की उपलब्धता के कारण अब वे अपने ऑर्डर समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पूरा कर पा रहे हैं। वे कहते हैं कि यह सब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना का परिणाम है। आज ब्लैक पॉटरी न केवल देश में, बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना चुकी है। कॉमन फैसिलिटी सेंटर से मिली सुविधा   कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना से उत्पादन प्रक्रिया काफी आसान हो गई है। यहां कच्चे माल से लेकर सभी आधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। कारीगर वहां आकर अपने उत्पाद तैयार करते हैं, उन्हें पैक करते हैं और फिर बाजार में अपने निर्धारित मूल्य पर बेचते हैं। इस सुविधा के कारण वे बड़े से बड़े ऑर्डर को सफलतापूर्वक पूरा करने में सक्षम हुए हैं, जिससे उनके व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ईरान-अमेरिका जंग के बीच फिल्ममेकर जफर पनाही की स्वदेश वापसी, नरसंहार और अमेरिकी कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा

ईरान-अमेरिका के बीच जंग खतरनाक मोड़ ले चुकी है. दोनों देश झुकने को तैयार नहीं हैं. तेल और ताकत की लड़ाई में होर्मुज की लहरों में हड़कंप मचा है. हालात और भी बिगड़ने का अंदेशा है. लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त फिल्ममेकर जफर पनाही ने ईरान में वापसी करके दुनिया को चौंका दिया. उन्होंने ईरान लौटने से पहले कहा कि उनके देश में हालात नरसंहार जैसा है. उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा भी की. अंतरराष्ट्रीय फिल्म बिरादरी जफर के इस कदम को बहुत ही सराहनीय और साहसी मान रही है. अमेरिका से युद्ध के बीच ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’ जैसी बहुप्रशंसित फिल्म बनाने वाले जफर पनाही ने स्वदेश से प्यार का इजहार किया. गौरतलब है कि जफर पनाही की ईरानी सरकार की सेंसरशिप से अदावत की कहानी किसी से छुपी नहीं है. उन्होंने पूर्व ईरानी सत्ता के खिलाफ खुली बगावत की थी. ईरानी सरकार को क्रूर और तानाशाह करार दिया, पूर्व सरकार की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ी और ऐसी फिल्में बनाईं जो सीधे-सीधे सत्ता की आलोचना करती थीं. राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की पीड़ा को व्यक्त करने वाली उनकी फिल्मों में दमन के खिलाफ आवाज बुलंद की गई थी. कोई हैरत नहीं कि जफर पनाही को अपने बागी तेवर की वजह से खामियाजा भी भुगतना पड़ा. नामो-निशान मिटाने वालों के खिलाफ जंग जंगी हालात में भी जफर पनाही ने ईरान की राह चुनी. अमेरिका, फ्रांस या अन्य यूरोपीय देशों में नहीं रुकना चाहा बल्कि वतन वापसी की. स्वदेश लौटने से पहले उनका एक बयान जो मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आया है, वह ध्यान देने वाला है. उन्होंने एक समारोह में कहा था कि आज ईरान में नरसंहार हो रहा है, ईस्लामी गणराज्य अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है, जो भी खून-खराबा हो रहा है, वह नामो-निशान मिटाने वालों के इरादों के खिलाफ है. पता चला है कि चारों ओर लाशों का ढेर है, जो बचे हैं वे अपने चाहने वालों की निशानियां खोज रहे हैं. ऐसे हालात में जफर ने ईरान में वापसी की. फिल्म बिरादरी से बोलने की अपील जफर पनाही ने इसके आगे जो कहा, वह और भी भावुक कर देने वाला है. उन्होंने कहा कि ये हालात कोई कहानी नहीं है. यह कोई फिल्म भी नहीं है. गोलियों से छलनी कठोर वास्तविकता है. इसी के साथ जफर पनाही ने कलाकारों और सिनेमा की विश्व बिरादरी से अपना-अपना कर्तव्य निर्वाह करने की भी अपील की. जफर ने अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों से इस ज्वलंत मुद्दे पर खूब बोलने और खुल के बोलने का आह्वान किया. जानकारी के मुताबिक जफर पनाही अपनी हालिया फिल्म ‘इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट’ के प्रचार अभियान के लिए ईरान से बाहर थे. इस फिल्म के लिए उनको मई 2025 में 78वें कान फिल्म फेस्टिवल में प्रतिष्ठित पाल्मे डी’ओर पुरस्कार मिला था. वहीं 98वें ऑस्कर अवॉर्ड में फ्रांस द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ पटकथा के लिए नामांकन भी मिला. इसके अलावा इस फिल्म को दुनिया भर के फिल्मोत्सवों में बीसियों अवॉर्ड मिल चुके हैं. ईरान पर हमले की कड़े शब्दों में निंदा ईरानी फिल्म निर्माता ने पहले कहा ही था कि तमाम दुश्वारियों के बावजूद ऑस्कर समारोह संपन्न होने के बाद वो ईरान लौट जाएंगे. उड़ान पर प्रतिबंध की वजह से जफर पहानी वाया तुर्की सड़क मार्ग से 31 मार्च को ईरान पहुंचे. उन्होंने तमाम समारोह के संबोधनों में ईरान में हिंसा और दमन के खिलाफ आवाजें उठाई. ईरान पर हमले की कठोर शब्दों में निंदा भी की. उन्होंने अमेरिकी हमले के बाद उपजे हालात को नरसंहार करार दिया. आपको बताते हैं कि आखिर क्यों अमेरिका से जंग के बीच जफर पनाही का ईरान लौटना काफी अहमियत रखता है. जफर पनाही ऐसे निर्माता-निर्देशक हैं जिनको ईरान सरकार के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा था. क्योंकि उन्होंने अपनी फिल्मों में ईरान की तानाशाह सत्ता की कुरीतियों और बर्बर नीतियों की जमकर आलोचना की थी. जिसकी वजह से उन्हें एक साल जेल की सजा, दो साल तक यात्रा प्रतिबंध के अलावा उनकी फिल्ममेकिंग को भी बैन कर दिया गया था. जरा सोचिए कि फिल्ममेकर पर अगर फिल्म बनाने का प्रतिबंध लग जाए तो वह भी क्या करेगा. बैन के बावजूद छुपकर फिल्में बनाई लेकिन तमाम कड़े प्रतिबंधों के बावजूद जफर पनाही ने ईरान में रहते हुए, ईरानी सरकार के अत्याचार और दमन को सहते हुए, एक विद्रोही क्रांतिकारी की तरह छुपकर फिल्में बनाईं. उन फिल्मों में सेंसरशिप की नीतियों को जमकर धज्जियां उड़ाईं. महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ सामाजिक दमन को दिखाया. राजनीतिक विरोधियों को कुचलने की कहानी दिखाई. उन फिल्मों को प्रसिद्ध इंटरनेशनल फेस्टिवल तक लेकर पहुंचे, उनका प्रदर्शन कराया और वाहवाहियां बटोरीं. अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किए. सीमित संसाधनों में बनाई गई उनकी फिल्मों का विषय और प्रस्तुतिकरण काफी सराहा गया. उनकी फिल्मों का विषय प्रमुख तौर पर सामाजिक और राजनीतिक ही होते थे. उन फिल्मों में जफर ने खास तौर पर हिरासत और निगरानी में रहने के दौरान के कठोर अनुभवों को यथार्थवादी शैली में अभिव्यक्त किया था. उनकी फिल्ममेकिंग की शैली ने संवेदना बटोर ली. जफर पनाही की प्रमुख फिल्में साल 2025 की इट वाज़ जस्ट एन एक्सीडेंट के अलावा उनकी कई और प्रमुख फिल्में हैं जो ईरान में राजनीतिक विरोधियों के दमन की कहानी कहती हैं. साल 2015 में उन्होंने द टैक्सी बनाई थी, जिसने बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गोल्डन बियर पुरस्कार जीता. 1995 की द व्हाइट बैलून उनकी पहली फिल्म थी. इसने भी कान्स में ‘कैमरा डी’ओर’ अवॉर्ड जीता था. इनके अलावा साल 2000 की ‘द सर्कल’ एक ऐसी फिल्म थी, जो ईरान में महिलाओं के दमन की कहानी कहती है, इसने वेनिस फिल्म महोत्सव में ‘गोल्डन लायन’ जीता था तो 2006 की ऑफसाइड ऐसी फिल्म थी, जो कि स्टेडियम में लड़कों का भेष बदलकर फुटबॉल मैच देखने जाने वाली लड़कियों की कहानी है. गौरतलब है कि ईरान में तब स्टेडियम में महिलाओं का जाना मना था.

गौतम अडाणी ने सीएम योगी से मुलाकात की, डेढ़ घंटे तक निवेश और प्रोजेक्ट्स पर हुई चर्चा, अयोध्या में परिवार संग रामलला के दर्शन

लखनऊ  प्रख्यात उद्योगपति गौतम अदाणी ने उत्तर प्रदेश के एकदिवसीय दौरे पर गुरुवार को अयोध्या में दिन में सपरिवार राम दरबार में दर्शन-पूजन के बाद देर शाम लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद गौतम अदाणी ने उनके 'विकसित उत्तर प्रदेश' के रोडमैप को बेहद प्रभावशाली बताया। मुख्यमंत्री से भेंट करने के बाद गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया पर अपने विचार को पोस्ट भी किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने के बाद जाने माने उद्योगपति गौतम अदाणी ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया “कुछ दूरदृष्टियां राष्ट्रों का स्वरूप बदल देती हैं। मुख्यमंत्री योगी जी द्वारा विकसित उत्तर प्रदेश के रोडमैप को सुनना एक अविस्मरणीय क्षण था। 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था, 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था। यह उत्तर प्रदेश की क्षमता का प्रमाण है। अदाणी समूह को बिजली, रक्षा, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्कों और डेटा केंद्रों में निवेश के माध्यम से उत्तर प्रदेश के परिवर्तन में योगदान देने पर गर्व है। हम उस भविष्य के निर्माण में सहयोग करने के लिए यहां हैं। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश के भविष्य को लेकर उनके बड़े विजन की सराहना की। मुलाकात के बाद उन्होंने साफ किया कि उनका अदाणी ग्रुप उत्तर प्रदेश के कायाकल्प में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस ट्वीट ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य को वर्ष 2030 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और वर्ष 2047 तक छह ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अडानी ने अपने ट्वीट में कहा कि यह केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं है। यह उत्तर प्रदेश की क्षमताओं और संभावनाओं का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने यह भी लिखा कि राज्य में तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर नीतियां और निवेश के अनुकूल वातावरण इसे उद्योगों के लिए आकर्षक बना रहे हैं।अडानी समूह ने उत्तर प्रदेश के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी का भरोसा जताया है। समूह बिजली, रक्षा, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक पार्क और डेटा सेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में निवेश कर रहा है। इन परियोजनाओं से रोजगार के नए अवसर सृजित होने के साथ साथ राज्य की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।इसी बीच अडानी गुरुवार को परिवार समेत अयोध्या भी पहुंचे। वहां उन्होंने रामलला के दर्शन और पूजन किए। अपने परिवार के साथ उन्होंने मंदिर परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने परंपरा और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने गुरुकुल को एआई आधारित लैब विकसित करने में सहयोग देने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण भारत की आस्था और विकास का प्रतीक है और यह देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।अडानी ने स्पष्ट किया कि उनका समूह उत्तर प्रदेश के इस परिवर्तनकारी सफर में एक मजबूत साझेदार के रूप में काम करेगा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत यह पहल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी। गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'विकसित उत्तर प्रदेश' के रोडमैप को बेहद प्रभावशाली बताया है। अदाणी ग्रुप उत्तर प्रदेश में केवल इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर ही नहीं, बल्कि रक्षा और तकनीक जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भी भारी निवेश कर रहा है। कंपनी के निवेश पोर्टफोलियो में एनर्जी, पावर, एयरपोर्ट, डिफेंस और लॉजिस्टिक्‍स जैसे सेक्‍टर शामिल हैं। अदाणी ग्रुप ने वर्ष 2022 के इन्वेस्टर्स समिट में उत्तर प्रदेश में 70,000 करोड़ के निवेश का ऐलान किया था, जिससे कम से कम 30,000 रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की गौतम अडाणी ने अयोध्या के गुरुकुल महाविद्यालय में छात्रों से मुलाकात की। उन्हें सम्मानित किया। गुरुकुल की पुरानी और आधुनिक परंपरा के बारे जाना। उन्होंने कहा कि मैंने बच्चों के साथ समय बिताया। गुरुकुल आज के युग में हमारी संस्कृति को जागृत रखने का काम कर रहा है। अडाणी फाउंडेशन AI के इस दौर में इस गुरुकुल संस्कृति को संरक्षित करने में हर संभव सहयोग देगा। लखनऊ में योगी से मुलाकात करेंगे इसके बाद, गौतम अडाणी लखनऊ के लिए रवाना हो गए। यहां सीएम योगी से मुलाकात करेंगे। इससे पहले गौतम अडानी 22 जनवरी 2024 को अयोध्या आए थे। रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे।

योगी सरकार की पहल से बदली हमीरपुर की कीर्ति की जिंदगी

योगी सरकार की पहल से बदली हमीरपुर की कीर्ति की जिंदगी संगठन की शक्ति: प्रेरणा कैंटीन से कीर्ति  ने खड़ा किया खुद का व्यवसाय सरकारी पहल से बदली दिशा: आत्मनिर्भरता बनी पहचान लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की योजनाएं आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहीं हैं। हमीरपुर जनपद की कीर्ति इसकी जीवंत मिसाल बनकर उभरीं हैं। एक समय अध्यापिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करने वाली कीर्ति ने जब महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया, तो यह उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वर्ष 2018 में समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी, बल्कि समाज में खुद की एक नई पहचान भी बनाई। आज वही कीर्ति “प्रेरणा कैंटीन” के माध्यम से न सिर्फ खुद सशक्त हुईं हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर दे रहीं हैं। 'प्रेरणा कैंटीन: सामूहिक प्रयास से बना 1.25 करोड़ के टर्नओवर का मॉडल वर्ष 2025 अगस्त में कीर्ति ने 10 महिलाओं के साथ मिलकर हमीरपुर के दरियापुर स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय में “प्रेरणा कैंटीन” की शुरुआत की। लगभग 11 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ यह प्रयास आज उनके लिए सफल उद्यम बना, जिसका टर्नओवर 1.25 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वर्तमान में कैंटीन से 8 महिलाएं जुड़ीं हैं। हर महीने प्रत्येक महिला को लगभग ₹8,000 वेतन मिल जाता है। यह कैंटीन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि पोषण और स्वच्छता का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण है जहां 332 बच्चों को रोजाना पौष्टिक नाश्ता, दूध और भोजन बेहद किफायती दर पर उपलब्ध कराया जाता है। शिक्षकों के लिए भी भोजन की व्यवस्था है। कीर्ति का मानना है कि स्वच्छ और पौष्टिक भोजन ही स्वस्थ समाज की नींव है, और इसी सोच के साथ वह पूरी जिम्मेदारी से इस कार्य को आगे बढ़ा रही हैं। आत्मनिर्भरता से प्रेरणा तक: योगी सरकार की योजनाओं ने बदली दिशा कीर्ति सिंह की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं विशेषकर स्वयं सहायता समूह और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की उपयोगिता का प्रमाण है। कीर्ति ने पहले बैंक सखी के रूप में काम करते हुए अनुभव हासिल किया और अब उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखकर नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। कीर्ति का कहना है कि योगी सरकार की इस पहल ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत ऋण के लिए भी आवेदन किया है, जिससे वे अपने इस व्यवसाय को और विस्तार देना चाहतीं हैं। कीर्ति का यह सफर बताता है कि जब सरकार की योजनाएं सही हाथों तक पहुंचतीं हैं और उनमें मेहनत व संकल्प जुड़ जाता है, तो बदलाव निश्चित होता है। आज वह न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रहीं हैं।