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कुल्हाड़ी से हमला: गाली-गलौज का विरोध करने पर पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि पर जानलेवा वार

बिलासपुर सकरी थाना से लगे पेंडारी क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि परमानन्द बघेल पर उनके ही पड़ोसी द्वारा कुल्हाड़ी से हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि घटना गाली-गलौज का विरोध करने पर हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, परमानन्द बघेल अपने घर के पास मौजूद थे, तभी पड़ोसी लक्ष्मण बघेल किसी बात को लेकर गाली-गलौज करने लगा। जब परमानन्द बघेल ने इसका विरोध किया और उसे ऐसा करने से मना किया, तो विवाद अचानक बढ़ गया। इसी दौरान आक्रोशित लक्ष्मण बघेल ने कुल्हाड़ी उठाकर उन पर हमला कर दिया। हमले में परमानन्द बघेल को गंभीर चोटें आई हैं। परिजनों और आसपास के लोगों ने तत्काल उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, समय रहते इलाज मिलने से उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आरोपी लक्ष्मण बघेल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेजी से की जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अफवाहों से दूर रहने की अपील की है।

कुशवाह ने किया औचक निरीक्षण, अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल

प्रभारी मंत्री कुशवाह ने किया औचक निरीक्षण कार्यपालन यंत्री जल संसाधन को निलंबित करने के दिए निर्देश भोपाल सामाजिक न्याय एवं दिव्यांजन कल्याण तथा निवाड़ी जिले के प्रभारी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने निवाड़ी जिले में जल संसाधन विभाग के निर्माण कार्य में लापरवाही पाये जाने पर कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग निवाड़ी को निलंबित करने के निर्देश दिये हैं। प्रभारी मंत्री कुशवाह से निवाड़ी जिले में विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान स्थानीय प्रतिनिधियों द्वारा जल संसाधन विभाग के कार्यों में लापरवाही की शिकायत की गई थी। इस शिकायत के आधार पर स्थानीय जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ उन्होंने जनपद पंचायत पृथ्वीपुर की ग्राम पंचायत लुहरगुवां स्थित नहर के निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। प्रभारी मंत्री कुशवाह ने निरीक्षण में कार्यपालन यंत्री हेमन्त गुप्ता द्वारा बैठक में बताये अनुसार कार्य नहीं पाये जाने पर कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े को निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिये। उन्होंने जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को ई.ई. जल संसाधन के समस्त कार्यों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा है। कलेक्टर श्रीमती भिड़े द्वारा कार्यपालन यंत्री का निलंबन का प्रस्ताव आयुक्त सागर संभाग को भेज दिया गया है।  

राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2025 के लिये प्रविष्टियों के आमंत्रण की अंतिम तिथि 20 अप्रैल

भोपाल.  प्रदेश में जैव-विविधता संरक्षण को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव विविधता पुरस्कार-25 के लिये प्रविष्टियाँ 20 अप्रैल 2026 तक आमंत्रित की गई हैं। विभिन्न श्रेणियों में जैव-विविधता पुरस्कार के लिये जैव-विविधता स्वामित्व रखने वाले वन, कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन, जल संसाधन विभाग और जैव-विविधता प्रबंधन समिति ग्राम पंचायत/जनपद पंचायत / नगर पंचायत / नगर पालिका/नगर निगम स्तर पर गठित जैव-विविधता प्रबंधन समितियाँ। संस्थागत (अशासकीय), व्यक्तिगत (अशासकीय), व्यक्तिगत (शासकीय) पहुंच एवं लाभ प्रभाजन के अधिकतम अनुबंध पहुंच एवं लाभ प्रभाजन की अधिकतम राशि श्रेष्ठ वनमंडल एवं श्रेष्ठ वनवृत्त के अंतर्गत विशिष्ट कार्य करने वाले अपनी प्रविष्टियाँ जमा कर सकते हैं। प्रविष्टियों का निर्धारित प्रारूप एवं अन्य जानकारियॉ बोर्ड की वेबसाईट www.mpforest.gov.in/mpsbb से डाउन लोड करें। जिन संस्था द्वारा राज्य स्तरीय वार्षिक जैव-विविधता पुरस्कार-2024 के लिये प्रविष्टियाँ प्रेषित की गई हैं, वो प्रविष्टि प्रेषित ना करें।  

जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस जमा कराने का निर्देश दिया सीएम ने

जनता दर्शन: गोरखनाथ मंदिर में 200 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस जमा कराने का निर्देश दिया सीएम ने इस्टीमेट भिजवाएं, इलाज में सरकार करेगी भरपूर मदद: सीएम योगी अधिकारियों को दिए त्वरित व संतुष्टिपरक निस्तारण के निर्देश गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बेटियों के प्रति संवेदनशीलता का एक और उदाहरण  जनता दर्शन में देखने को मिला। सीएम से मिलने पहुंची एक बेटी ने जब उन्हें बताया कि पैसों की दिक्कत के चलते वह अपनी फीस नहीं जमा कर पा रही है, मुख्यमंत्री ने अविलंब अधिकारियों को बिटिया की फीस जमा कराने का निर्देश दिया। सीएम ने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग करने पहुंचे लोगों को भी आश्वस्त किया कि वे उच्चीकृत अस्पताल से इस्टीमेट मंगवा लें, इलाज के खर्च में सरकार भरपूर मदद करेगी।  सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों से मुलाकात की। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में कुर्सियों पर बैठाए गए लोगों तक मुख्यमंत्री पहुंचे और एक-एक कर सबकी समस्याएं सुनीं। सीएम ने सभी को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं का उचित, विधिसम्मत, समयबद्ध एवं संतुष्टिपरक निस्तारण कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में आए लोगों के प्रार्थना-पत्रों को संबंधित अधिकारियों को हस्तगत करते हुए इस संबंध में निर्देश भी जारी किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी को भी परेशान होने या घबराने होने की आवश्यकता नहीं है। सरकार हर मुश्किल में आपके साथ खड़ी है। हर समस्या का प्रभावी समाधान कराया जाएगा।  जरूरतमंद बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था होगी जनता दर्शन में एक बेटी ने मुख्यमंत्री को बताया कि वह पढ़ना चाहती है, लेकिन परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति की वजह से फीस जमा करने में बाधा आ रही है। इस पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अविलंब बिटिया की स्कूल फीस की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक दिक्कत की वजह से किसी बेटी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। हर बेटी को सुरक्षा के साथ-साथ उसका सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। जब एक बेटी शिक्षित होती है तो पूरे समाज पर सकारात्मक असर पड़ता है। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर पीड़ित के साथ संवेदनशील रवैया अपनाया जाए और उसकी समस्या का समाधान कर उसे संतुष्ट किया जाए। इसमें किसी भी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। यदि कोई पात्र व्यक्ति शासन की कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है तो उसे तत्काल योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। कैंसर से पीड़ित अपने परिजन के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंची एक महिला से मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्चीकृत सरकारी अस्पताल में मरीज को दिखाकर इस्टीमेट मंगवा लीजिए। इलाज में पूरी मदद की जाएगी। सीएम योगी ने इसे लेकर अफसरों को निर्देशित भी किया कि जिन लोगों को उपचार में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है, उनके इस्टीमेट की प्रक्रिया को जल्द से पूरा कराकर शासन को उपलब्ध कराया जाए। हर जरूरतमंद को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने सिद्धार्थनगर से आई एक गरीब महिला को पेंशन और अन्य योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिए।

करिश्मा तन्ना और वरुण बंगेरा के परिवार में आने वाला है नन्हा बच्चा, जोड़े में छाई खुशी

मुंबई  टेलीविजन और सिनेमा की दुनिया में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाली मशहूर अभिनेत्री करिश्मा तन्ना और उनके पति वरुण बंगेरा जिंदगी के नए पड़ाव की ओर बढ़ रहे हैं। दरअसल, अभिनेत्री जल्द ही मां बनने वाली हैं। सोमवार को करिश्मा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पर एक खास पोस्ट की। इसमें उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी की खुशखबरी खुद कंफर्म की। इस पोस्ट में कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं। पहली तस्वीर में करिश्मा और उनके पति वरुण बंगेरा कैप पहने हुए नजर आ रहे है, दोनों की कैप पर करिश्मा की कैप पर “मॉम” और उनके पति की कैप पर “डैड” लिखा हुआ है। दूसरी तस्वीर में दोनों छोटे-से बच्चे का जूता हाथ में लिए मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं। ये तस्वीरें देखते ही समझ में आ जाता है कि उनके घर जल्द ही एक नन्हा मेहमान आने वाला है। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में बताया कि उनके घर पर नन्हा मेहमान अगस्त में आने वाला है। अभिनेत्री ने पोस्ट कर लिखा, "एक छोटा सा चमत्कार, हमारा सबसे बड़ा उपहार अगस्त 2026 ।" पोस्ट शेयर करने के बाद करिश्मा के इंडस्ट्री के दोस्तों और साथी कलाकारों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कमेंट सेक्शन में प्यार और शुभकामनाओं की बौछार कर दी। कई लोगों ने हार्ट और फायर के इमोजी कमेंट किए। अभिनेता मनीष पॉल ने कमेंट सेक्शन पर यश लिखने के साथ हार्ट इमोजी से प्रतिक्रिया दी। ताहिरा कश्यप, महीप कपूर, कृतिका कामरा, अनिता हसंनदानी ने मिलकर कमेंट सेक्शन पर "बधाई हो" लिखा, तो बाकी सेलेब्स ने अभिनेत्री को इमोजी के द्वारा प्रतिक्रिया दी। करिश्मा तन्ना ने 5 फरवरी 2022 को दुबई-आधारित व्यवसायी वरुण बंगेरा से मुंबई में शादी की थी। उनकी शादी एक निजी समारोह में हुई, जिसमें गुजराती और दक्षिण भारतीय परंपराओं का संगम था। दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए 'न्यू ईयर ईव' पर एक पार्टी में हुई थी। मुलाकात के बाद दोनों में दोस्ती हुई और फिर प्यार। करीब एक साल तक डेटिंग करने के बाद उन्होंने नवंबर 2021 में सगाई कर ली थी।

रॉयल एनफील्ड का खेल बिगाड़ने आई Triumph, सस्ती 350 सीसी बाइक्स लॉन्च, कीमत जानें

मुंबई  Triumph 350 Bike Launch: ब्रिटिश मोटरसाइकिल कंपनी ट्रायम्फ ने आज भारतीय बाजार में अपनी सबसे किफायती 350 सीसी बाइक रेंज को आधिकारिक तौर पर बिक्री के लिए लॉन्च किया है. 350 सीसी इंजन के साथ मिड-साइज़ सेगमेंट में आने वाली इन बाइक्स का नाम अभी भी 400 सीरीज ही रखा गया है. जीएसटी नियमों में बदलाव के बाद उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करेगा, क्योंकि अब ये बाइक्स पहले से सस्ती हो गई हैं।  GST ने बदला गेम दरअसल, सरकार के नए जीएसटी नियम के तहत 350 सीसी से ज्यादा इंजन वाली दोपहिया गाड़ियों पर 40 प्रतिशत टैक्स लागू हो गया. इस फैसले से कंपनियों के लिए हैवी इंजन वाली बाइक्स की कीमतों को कम रखना मुश्किल हो गया था. इसी चुनौती से निपटने के लिए Triumph ने अपनी 400 सीरीज के इंजन को घटाकर 350 सीसी कर दिया. इससे बाइक्स कम टैक्स स्लैब में आ गईं और कंपनी को कीमत कम करने का मौका मिल गया. बता दें कि, 350 सीसी से कम इंजन क्षमता वाली बाइक्स 18% स्लैब में आती हैं।  कीमतों में बड़ी कटौती  ट्रायम्फ के इस नए 350 सीरीज के लॉन्च के बाद पिछले मॉडल के मुकाबले कीमतों में भारी कटौती देखने को मिली है. दिल्ली में एक्स-शोरूम कीमतों की बात करें तो Speed T4 अब 1,95,000 रुपये में मिल रही है. Speed 400 की कीमत 2,31,890 रुपये हो गई है. Scrambler 400 की कीमत 2,59,241 रुपये तय की गई है. Thruxton 400 अब 2,65,538 रुपये में उपलब्ध है. वहीं Scrambler 400 XC की कीमत 2,89,534 रुपये रखी गई है।   इंजन छोटा, लेकिन कैरेक्टर बरकरार नई रेंज में सबसे बड़ा बदलाव इंजन का है. अब इन बाइक्स में 350 सीसी का इंजन दिया गया है, जिसे पुराने इंजन बोर और स्ट्रोक्स में बदलाव करते हुए थोड़ा छोटा किया गया है. इससे इंजन के पावर आउटपुट में भी कमी आई है, हालांकि कंपनी का कहना है कि राइडर को बाइक के परफॉर्मेंस में कोई ज्यादा कमी महसूस नहीं होगी।  Triumph Speed 400 और Scrambler 400X में दिया गया इंजन अब 36.50 बीएचपी की पावर और 32 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है. यह पहले के मुकाबले करीब 3 बीएचपी और 3.5 एनएम कम है. वहीं Speed T4 का इंजन 29 बीएचपी पावर और 31 एनएम टॉर्क जेनरेट करता है, जो पहले से थोड़ा कम है. ट्रायम्फ का कहना है कि पावर कम होने के बावजूद बाइक का असली कैरेक्टर और राइडिंग फील बरकरार रखा गया है।  परफॉर्मेंस में मामूली गिरावट इंजन छोटा होने का असर परफॉर्मेंस पर भी दिखता है. Speed 400 पहले 0 से 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार करीब 7.4 सेकंड में पकड़ लेती थी. अब नई 350 सीरीज को यही स्पीड पाने में लगभग 8.1 सेकंड लगते हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि टॉप स्पीड और 0 से 60 किमी प्रति घंटा की रफ्तार में ज्यादा फर्क नहीं आया है. यानी शहर और डेली राइडिंग में आपको ज्यादा अंतर महसूस नहीं होगा।  चर्चा में नया Tracker 400  कंपनी ने इसी के साथ भारत में Tracker 400 नाम का नया मॉडल भी पेश किया है. दिलचस्प बात यह है कि इंटरनेशनल मॉडल के मुकाबले भारत में इसे छोटे 350 सीसी प्लेटफॉर्म पर लाया गया है. यह बाइक Thruxton 400 के साथ सबसे ज्यादा पावरफुल ट्यून में आती है, जिसका इंजन 40 एचपी की पावर और 32 एनएम का टॉर्क जेनरेट करता है।  इंजन में बदलाव के अलावा बाकी बाइक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले जैसा ही फ्रेम, सस्पेंशन, ब्रेक और व्हील्स दिए गए हैं. इसका मतलब है कि राइडिंग स्टेबिलिटी, हैंडलिंग और ओवरऑल बिल्ड क्वालिटी पहले जैसी ही बनी रहेगी. भारत जैसे बाजार में प्राइस एक बड़ा फैक्टर होती है, ऐसे में Triumph की यह रणनीति काफी हद तक सफल हो सकती है. खासकर उन ग्राहकों के लिए जो कम खर्च में प्रीमियम ब्रांड का मजा लेना चाहते हैं. कंपनी का कहना है कि, भारत की सड़कों पर अब 1 लाख से ज्यादा Triumph बाइक्स दौड़ रही हैं।  मॉडल   कीमत (एक्स-शोरूम) Speed T4  1,95,000 रुपये Speed 400  2,31,890 रुपये Scrambler 400 2,59,241 रुपये  Thruxton 400 2,65,538 रुपये  Scrambler 400 XC 2,89,534 रुपये 

सफलता की कहानी: ई-स्कूटर अनुदान योजना से दमोह की सायरा बी बनीं आत्मनिर्भर

सफलता की कहानी- ई-स्कूटर अनुदान योजना से दमोह की सायरा बी बनीं आत्मनिर्भर दमोह श्रम विभाग द्वारा संचालित ई-स्कूटर अनुदान योजना 2024 श्रमिकों के जीवन में परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। दमोह में गत दिनों महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रमिक महिला सायरा बी को ई-स्कूटर की चाबी प्रदान की। अब उनका जीवन रोज के कामकाज के लिये किसी सहारे का मोहताज नहीं रहा। भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल द्वारा संचालित इस योजना में सायरा बी को 40 हजार रूपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इस सहयोग से अब उनके लिए आवागमन आसान हो गया है, जिससे उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक सुधार आया है। ई-स्कूटर अनुदान योजना विशेष रूप से श्रमिक परिवारों, खासकर महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। इससे न केवल उनकी दैनिक जीवन की कठिनाइयाँ कम हो रही हैं, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी मजबूत पहचान भी स्थापित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की योजनाएं महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देती हैं और ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करती हैं। 'ई-स्कूटर अनुदान योजना-2024' श्रमिकों के जीवन में सुविधा, आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय जोड़ रही है। यह पहल ‘श्रमिक सशक्त, समृद्ध देश, विकसित मध्यप्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।  

MDU शोधार्थी का कमाल: नैनोसस्पेंशन से दमा और सीओपीडी का प्रभावी इलाज, कम डोज में अधिक असर

 रोहतक महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) की शोधार्थी निशा गुलाटी ने दमा (अस्थमा) और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के इलाज में कारगर नैनोपार्टिकुलेट ड्रग डिलीवरी सिस्टम तैयार किया है। नैनोसस्पेंशन तकनीक के इस्तेमाल से दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है। इससे दवा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है। यह तकनीक दवा के साइड इफेक्ट्स भी कम करती है।  प्रो. हरीश दुरेजा के मार्गदर्शन में शोध कर रहीं पीएचडी शोधार्थी निशा गुलाटी ने बताया कि दमा और सीओपीडी ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की नलियां संकुचित हो जाती हैं। इससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। धूल, धुआं, एलर्जी और मौसम के बदलाव से यह समस्या और बढ़ जाती है। श्वांस नलियां सिकुड़ने से दवा का असर कम हो जाता है और मरीज की हालत भी बिगड़ जाती है। इसी को ध्यान में रखकर उन्होंने रोफ्लूमिलास्ट दवा का नैनोसस्पेंशन तैयार किया। फिर इसे हाई शियर होमोजेनाइजेशन और अल्ट्रासोनिक तकनीक के जरिए विकसित किया। बताया कि नैनोसस्पेंशन तकनीक से सीधे दवा फेफड़ों तक पहुंचने में कारगर है। इससे मरीज को जल्द लाभ मिलता है।  साल 2022-24 में एनसीआर में मिले दो लाख से अधिक श्वास रोगी संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022-24 के बीच दिल्ली-एनसीआर में दो लाख से अधिक श्वास रोगी अस्पताल पहुंचे थे। द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन (2026) में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला है कि एशिया में करीब 43 फीसदी लोग श्वसन रोगों से पीड़ित हैं। जानें…सांस के रोगी के लक्षण लगातार खांसी आना श्वास रोग का सामान्य लक्षण है। इसके अलावा सूखी खांसी, बलगम वाली खांसी, सांस फूलना, सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज आना, सीने में जकड़न या दर्द होना भी शामिल है। इन बीमारियों के कारण सामान्य गतिविधियां जैसे चलना, सीढ़ियां चढ़ना या यहां तक कि बात करना भी मरीज के लिए थकाने वाला हो जाता है। हम अब नैनोपार्टिकुलेट ड्रग डिलीवरी सिस्टम पर आधारित नई नैनोसस्पेंशन दवा विकसित कर रहे हैं, जो सीओपीडी और अस्थमा के मरीजों के लिए अधिक प्रभावी साबित होगी। इस तकनीक से दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचेगी, जिससे कम डोज में बेहतर असर मिलेगा और साइड इफेक्ट्स भी काफी कम होंगे। -प्रो. हरीश दुरेजा, डीन रिसर्च और विकास, एमडीयू रोहतक।  

बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के आदेश

बाल विवाह पर सख्ती: अक्षय तृतीया से पहले सभी जिलों में कंट्रोल रूम और उड़न दस्ते बनाने के निर्देश भोपाल अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले सामूहिक विवाह में बाल विवाहों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सचिव महिला एवं बाल विकास श्रीमती जी वी रश्मि ने सभी कलेक्टरों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत प्रदेश में बाल विवाह की घटनाओं को शून्य करने और किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे(NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है, लेकिन कुछ जिलों में अभी भी यह समस्या बनी हुई है। अक्षय तृतीया इस वर्ष 20 अप्रैल 2026 को है और इस दिन प्रदेश में बड़ी संख्या में सामूहिक विवाह आयोजित होते हैं। ऐसे आयोजनों में बाल विवाह होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशानुसार स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। 20 अप्रैल को ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में पंच, सरपंच, सचिव और पार्षद बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ लेंगे तथा पंचायत और वार्ड कार्यालयों में इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसके अलावा स्कूलों और आंगनबाड़ी के बच्चों की जागरूकता रैलियां भी निकाली जाएंगी।       गांवों में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा समूह चर्चा आयोजित कर परिवारों को बाल विवाह न करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता, ग्राम कोटवार और पंचायत सचिव की मदद से 18 वर्ष से कम उम्र की किशोरियों की सूची तैयार कर संबंधित परिवारों को समझाइश दी जाएगी तथा उन पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। बाल विवाह की सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 1098 और 112 का व्यापक प्रचार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त बाल विवाह मुक़्त भारत पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बाल विवाह रोकने के लिए प्रत्येक ग्राम और वार्ड में सूचना दल बनाए जाएंगे, जिनमें शिक्षक, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व- सहायता समूह की महिलाएं और पंचायत प्रतिनिधि शामिल होंगे। सचिव श्रीमती रश्मि ने स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और दीवार लेखन के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे समाज में सही उम्र में विवाह के महत्व और कम उम्र में विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके।  

वाईफाई राउटर से हो सकती है हैकिंग और जासूसी, घर में इन गलतियों से बचें

  नई दिल्ली भारत सरकार ने हाल ही में चीनी CCTV कैमरों को लेकर सख्त कदम उठाया है और STQC सर्टिफिकेशन मैंडेटरी कर दिया है. इसका असर मोस्टली चीनी सीसीसीटीवी कैमरा कंपनियों पर पड़ा. इनमे Dahua और Hikvision हैं. साथ ही TP-Link के कैमरों पर भी शिकंज कसा जा सकता है. लेकिन इसी बहस के बीच एक और बड़ा खतरा चुपचाप हमारे घरों में मौजूद है, जिस पर अभी तक उतना ध्यान नहीं गया है. WiFi राउटर।  वाईफाई राउटर की सिक्योरिटी पर सवाल आज भारत में करोड़ों घरों में इंटरनेट कनेक्शन है. हर घर में एक राउटर है, जो सिर्फ इंटरनेट नहीं देता, बल्कि पूरे डिजिटल इकोसिस्टम का गेटवे होता है. आपके फोन से लेकर लैपटॉप, बैंकिंग ऐप से लेकर स्मार्ट टीवी और CCTV तक. सब कुछ इसी एक डिवाइस से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर यही डिवाइस कमजोर हो, तो पूरा सिस्टम खुला हुआ दरवाजा बन जाता है।  अमेरिका ने बाहर के राउटर को अमेरिका में बैन किया इंटरनेशनल लेवल पर भी राउटर को लेकर खतरा तेजी से बढ़ा है. अमेरिका में हाल ही में फेडरल कम्युनिकेशन कमिशन (FCC) ने विदेशी इलेक्ट्रोनिक्स, खासकर चीन में बने नेटवर्क डिवाइसेज़ को लेकर चिंता जताई है. FCC ने बार बने हुए राउटर्स पर रोक लगाने का भी फैसला किया है।  रिपोर्ट्स में बताया गया कि मलेशियस एक्टर्स राउटर्स में मौजूद सिक्योरिटी गैप का फायदा उठाकर पूरे नेटवर्क को एक्सेस कर लेते हैं. यह सिर्फ डेटा चोरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बड़े स्तर पर नेटवर्क डिसरप्शन और जासूसी तक पहुंच जाता है।  पिछले कुछ सालों में Volt Typhoon और Flax Typhoon जैसे साइबर ऑपरेशंस में राउटर और नेटवर्क डिवाइसेज़ को टारगेट किया गया, जिससे यह साफ हो गया कि अब युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि नेटवर्क पर भी लड़ा जा रहा है।  भारत में चीनी राउटर्स की भरमार भारत में समस्या और भी बड़ी है. यहां ज्यादातर लोग सस्ते और बजट राउटर खरीदते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या चीन या चीनी सप्लाई चेन से जुड़े ब्रांड्स की होती है।  इन डिवाइसेज़ में अक्सर सिक्योरिटी अपडेट्स समय पर नहीं मिलते, और कई बार फर्मवेयर में ही कमजोरियां होती हैं. यूज़र को इस बारे में जानकारी तक नहीं होती।  लोगों में राउटर सिक्योरिटी अवेयरनेस की कमी इससे भी बड़ी बात यह है कि इन राउटर्स को इंस्टॉल करने वाले टेक्निशियन ही कई बार डिफॉल्ट यूज़रनेम और पासवर्ड सेट करके छोड़ देते हैं. और वही क्रेडेंशियल्स उनके पास भी रहते हैं. यानी आपके घर का इंटरनेट सिर्फ आपका नहीं होता, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति के पास भी उसकी चाबी हो सकती है।  भारत में आम यूज़र राउटर की सेटिंग्स तक पहुंचना भी नहीं जानता. IP एड्रेस क्या होता है, एडमिन पैनल कैसे खुलता है, फर्मवेयर अपडेट कैसे किया जाता है. ये सब चीजें ज्यादातर लोगों के लिए तकनीकी और जटिल लगती हैं।  नतीजा यह होता है कि सालों तक एक ही पासवर्ड चलता रहता है, और सिक्योरिटी सेटिंग्स कभी बदली ही नहीं जातीं. लोगों को अक्सर ये लगता है कि अगर उनका वाईफाई कोई यूज कर भी ले तो कोई खास फर्क नहीं पड़ता।  लेकिन यहां प्रॉब्लम ये है कि अगर कोई आपका वाईफाई ऐक्सेस कर सकता है तो मुमकिन है आपके राउटर का कंट्रोल पैनल भी ओपन कर सकता है. अगर इसका ऐक्सेस मिल गया तो समझिए की वो आपको ब्लैकमेल आसानी से कर सकता है और नेटवर्क से जुड़े दूसरे डिवाइसेज को भी नुकसान पहुंचा चा सकता है या हैक कर सकता है।  हैकर्स के लिए सॉफ्ट टार्गेट होते हैं वाईफाई राउटर्स हैकर्स के लिए ऐसे राउटर सोने की खान होते हैं. वे इंटरनेट पर ऐसे डिवाइसेज़ को स्कैन करते हैं जिनमें डिफॉल्ट क्रेडेंशियल्स होते हैं या जिनका फर्मवेयर आउटडेटेड होता है।  एक बार एक्सेस मिलते ही वे राउटर को अपने कंट्रोल में लेकर उसे बॉटनेट का हिस्सा बना सकते हैं. इसका इस्तेमाल बड़े साइबर अटैक में किया जाता है. जैसे DDoS अटैक, जहां लाखों डिवाइसेज़ एक साथ किसी सर्वर पर ट्रैफिक भेजते हैं।  दरअसल 2016 में सामने आया Mirai बॉटनेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण था, जिसमें दुनिया भर के लाखों IoT डिवाइसेज़ और राउटर हैक करके बड़े पैमाने पर इंटरनेट सर्विसेज ठप कर दी गई थीं।  उसके बाद से ऐसे हमले और ज्यादा एडवांस हो गए हैं. अब अटैकर्स सिर्फ ट्रैफिक जाम नहीं करते, बल्कि लंबे समय तक नेटवर्क के अंदर छिपे रहते हैं और डेटा चुराते रहते हैं।  यूजर को मिलना चाहिए राउटर का पूरा कंट्रोल भारत के कॉन्टेक्स्ट में एक और गंभीर पहलू सामने आता है. यहां ISP (इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर) द्वारा दिए जाने वाले राउटर अक्सर कस्टम फर्मवेयर पर चलते हैं, जिनमें यूज़र को पूरा कंट्रोल नहीं मिलता।  कई बार रिमोट एक्सेस फीचर ऑन रहता है, जिससे कंपनी या टेक्नीशियन दूर से भी राउटर में लॉगिन कर सकते हैं. अगर यही एक्सेस गलत हाथों में चला जाए, तो यह एक बड़ा बैकडोर बन सकता है।  हाल के सालों में साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने यह भी पाया है कि कई राउटर में हार्डकोडेड क्रेडेंशियल्स होते हैं, जिन्हें बदला ही नहीं जा सकता. यानी भले ही यूज़र अपना पासवर्ड बदल दे, लेकिन डिवाइस के अंदर एक मास्टर एक्सेस पहले से मौजूद रहता है. यही वजह है कि कई देश अब टेलीकॉम और नेटवर्क उपकरणों के लिए सख्त टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन लागू कर रहे हैं।  आपका वाईफाई राउटर हैक हो गया तो क्या होगा? अगर राउटर कम्प्रोमाइज हो गया, तो हैकर आपके नेटवर्क के अंदर मौजूद हर डिवाइस को मॉनिटर कर सकता है. कौन सी वेबसाइट खुल रही है, कौन सा डेटा ट्रांसफर हो रहा है, यहां तक कि बैंकिंग डिटेल्स तक लीक हो सकती हैं. कई मामलों में DNS सेटिंग्स बदलकर यूज़र को फेक वेबसाइट पर रीडायरेक्ट किया जाता है, जहां से सीधे फ्रॉड होता है।  सिर्फ इतना ही नहीं, कई बार राउटर का इस्तेमाल जासूसी के लिए भी किया जा सकता है. अगर किसी घर या ऑफिस का नेटवर्क टारगेट हो जाए, तो बिना किसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किए पूरे डेटा ट्रैफिक को इंटरसेप्ट किया जा सकता है. यह तरीका पारंपरिक हैकिंग से ज्यादा खतरनाक माना जाता है, क्योंकि यूज़र को इसका पता तक नहीं चलता।  नेशनल सिक्योरिटी के लिए भी अहम है सेफ राउटर यह खतरा सिर्फ … Read more