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गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक

गौठान से बदली तस्वीर: धोवाताल बना आत्मनिर्भर मॉडल गांव, पलायन पर लगी रोक मनेन्द्रगढ़/एमसीबी छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र का छोटा सा गांव धोवाताल आज आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनकर उभर रहा है। जहां कई स्थानों पर गौठान योजनाएं निष्क्रिय हैं, वहीं इस गांव की 60 महिलाओं ने गौठान को किराए पर लेकर उसे आजीविका के सशक्त केंद्र में बदल दिया है। लगभग 150 घरों और 510 की आबादी वाले इस गांव में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिखी है। पांच समूहों ने संभाली जिम्मेदारी गांव में पांच महिला समूह मिलकर विभिन्न आजीविका गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं। बजरंगबली समूह बकरी पालन, सिद्धबाबा समूह मुर्गी पालन, महिला सशक्तिकरण समूह किराना दुकान, सीता महिला समूह बहुआयामी गतिविधियों (सुअर, बटेर व मछली पालन) तथा दुर्गा महिला समूह किराना व मनिहारी दुकान संचालित कर रहे हैं। इन गतिविधियों से महिलाओं की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। सहायता राशि को बनाया निवेश महिलाओं को क्लस्टर स्तर से मिली 60-60 हजार रुपये की सहायता राशि को खर्च करने के बजाय व्यवसाय में निवेश किया गया। आज उनके उत्पाद स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश तक पहुंच रहे हैं, जिससे आय के नए स्रोत विकसित हुए हैं। पलायन पर लगी रोक इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव गांव में पलायन रुकने के रूप में सामने आया है। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में रायपुर, गुजरात और मेरठ जैसे शहरों की ओर जाते थे, अब उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। NRLM से मिली दिशा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से मिले मार्गदर्शन और सहयोग ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की राह दिखाई। समूह की महिलाओं का कहना है कि अब पशुपालन और दुकान संचालन से उन्हें नियमित आय प्राप्त हो रही है। युवाओं को मिला स्थानीय रोजगार गांव के युवाओं ने बताया कि अब उन्हें रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता। गांव में ही काम मिलने से आय के साथ संतोष भी मिल रहा है। प्रशासन ने सराहा पहल ग्राम सरपंच गोकुल प्रसाद परस्ते ने बताया कि गौठान आधारित गतिविधियों से गांव में आर्थिक समृद्धि आई है और पलायन पर प्रभावी रोक लगी है। जनपद भरतपुर के अधिकारियों ने भी धोवाताल मॉडल को प्रेरणादायक बताया है। प्रेरणादायक बना धोवाताल धोवाताल की यह पहल दर्शाती है कि सही दिशा, सामूहिक प्रयास और संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसी भी गांव की तस्वीर बदली जा सकती है।

आत्मानंद स्कूल में एडमिशन की शुरुआत: सीमित सीटों पर लॉटरी से मिलेगा मौका

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, मनेंद्रगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित इस विद्यालय में इच्छुक छात्र-छात्राएं अब निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन प्रक्रिया 10 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुकी है, जो 5 मई 2026 को शाम 5:00 बजे तक जारी रहेगी। अभ्यर्थी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन के लिए अभिभावक CGSchool Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। विद्यालय द्वारा जारी सीटों के विवरण के अनुसार कक्षा 1वीं में 50 सीटें उपलब्ध हैं। वहीं कक्षा 3वीं, 4वीं और 5वीं में 1-1 सीट, कक्षा 7वीं में 2 सीटें तथा कक्षा 8वीं में 6 सीटें रिक्त हैं। इसके अलावा कक्षा 11वीं में कॉमर्स, जीव विज्ञान और गणित संकायों में 5-5 सीटें निर्धारित की गई हैं। सभी कक्षाओं में बालक एवं बालिकाओं के लिए समान रूप से प्रवेश की सुविधा उपलब्ध रहेगी। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कक्षा में उपलब्ध सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं, तो पात्र अभ्यर्थियों का चयन पारदर्शी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसकी सूचना अभ्यर्थियों को पूर्व में ही दे दी जाएगी। अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील की गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कर लें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्र के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर प्रदान करने की दिशा में यह पहल अहम मानी जा रही है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख: ध्वनि प्रदूषण पर जागरूकता जरूरी, डीजे की तेज आवाज है खतरे की घंटी

जबलपुर  ध्वनि प्रदूषण के कारण बढ़ती बीमारियों तथा डीजे की तेज आवाज से लोगों को हार्ट अटैक आने और ब्लड प्रेशर बढ़ने को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश किए गए जवाब में बताया गया कि कान फाड़ देने वाली डीजे की तेज आवाज जनसमस्या बन गई है। कोलाहल एक्ट के तहत निर्धारित सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए तल्ख टिप्पणी की कि इस समस्या के समाधान के लिए नागरिकों का जागरूक होना आवश्यक है। नाना देशमुख वेटनरी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति गोविंद प्रसाद मिश्रा (उम्र 83 वर्ष), सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आर.पी. श्रीवास्तव (उम्र 100 वर्ष) सहित अन्य चार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि शादियों व धार्मिक आयोजनों के दौरान बहुत तेज आवाज में डीजे बजाए जाते हैं। मानव शरीर 75 डेसिबल तक की आवाज की तीव्रता सहन कर सकता है। इससे अधिक आवाज ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आती है। डीजे की आवाज की तीव्रता 100 डेसिबल से अधिक होती है, जिससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है। तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा लोग बहरेपन और उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश जवाब में इसे जनसमस्या बताते हुए कहा गया कि कोलाहल एक्ट के तहत जुर्माने की कार्रवाई की जाती है। याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए युगलपीठ को बताया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी ध्वनि प्रदूषण को गंभीर समस्या माना है, जिसका प्रतिकूल असर मानव जीवन पर पड़ रहा है और लोग विभिन्न बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। डीजे की तेज आवाज के कारण हार्ट अटैक से कई लोगों की मौत भी हुई है। केवल जुर्माने की कार्रवाई से इस समस्या पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगाया जा सकता।

विकास के मार्ग पर श्रमिकों का योगदान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से बढ़ी उम्मीदें

रायपुर : विकास की नींव रखने वाले हाथों का सम्मान, श्रमिक सम्मेलन में योजनाओं की सौगात से खिले श्रमिकों के चेहरे रायपुर  जगदलपुर के स्थानीय वीर सावरकर भवन में  निर्माण श्रमिकों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से एक श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्रम विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल के मार्गदर्शन में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में विकास की रीढ़ कहे जाने वाले श्रमिकों का न केवल सम्मान किया गया, बल्कि उन्हें विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस सम्मेलन में समूचे जिले के सुदूर अंचलों से आए बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा परिसर उनकी उत्साहजनक उपस्थिति से सराबोर नजर आया।        कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद बस्तर महेश कश्यप और नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने दीप प्रज्वलित कर आयोजन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर जन प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में श्रमिकों को राष्ट्र का असली निर्माता बताते हुए कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार लाना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद महेश कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि नए भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने श्रमिकों को उनके अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान करते हुए विश्वास दिलाया कि सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है। कश्यप ने शासन द्वारा श्रमिकों के लिए चलाए जा रहे विभिन्न 31 योजनाओं की जानकारी और अन्य सुरक्षा योजनाओं के लाभ पर जोर देते हुए कहा कि हर श्रमिक का पंजीकरण होना अनिवार्य है ताकि शासन की मदद उन तक बिना किसी बाधा के पहुँच सके। इस अवसर पर नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।        मंच से जनप्रतिनिधियों के कर-कमलों द्वारा पात्र हितग्राहियों को विभिन्न विभागीय योजनाओं के तहत सहायता राशि के चेक वितरित किए गए, जिसे पाकर श्रमिकों के चेहरों पर संतोष और खुशी के भाव स्पष्ट नजर आए। इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता मौके पर ही समाधान की रही, जहाँ श्रम विभाग द्वारा लगाए गए विशेष पंजीकरण शिविरों के माध्यम से नए श्रमिकों का तत्काल पंजीयन किया गया। श्रम पदाधिकारी भूपेंद्र नायक ने बताया कि इस मुहिम का उद्देश्य बस्तर के उन मेहनतकश लोगों को विभागीय योजनाओं के दायरे में लाना है जो अब तक जागरूकता के अभाव में लाभ से वंचित थे। इस सार्थक प्रयास से बस्तर के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक भी अब सरकार की कल्याणकारी नीतियों से सीधे जुड़ सकेंगे। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित थे।

सीएम योगी लखीमपुर में 331 परिवारों को देंगे जमीन का मालिकाना हक

लखीमपुर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में आज यानी कि शनिवार को बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण किया जाएगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण करेंगे. साथ ही 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण भी करेंगे. इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री के एक्स पर पोस्ट करके दी गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक्स से किए गए पोस्ट में कहा गया है कि लखीमपुर खीरी की पावन धरती पर आज अधिकार, विकास और अपने पक्के आवास का स्वप्न एक साथ साकार होंगे. बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदू परिवारों को संक्रमणीय/असंक्रमणीय भूमिधरी अधिकार पत्र का वितरण एवं 213 परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया जाएगा. साथ ही, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत लाभार्थियों को उनके आवास की चाबियां भी प्रदान की जाएंगी. ये सभी कार्य डबल इंजन सरकार के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक सम्मान और सुविधा पहुंचाने के संकल्प का प्रतीक हैं. आजादी के बाद से इन परिवारों को नहीं मिली थी जमीन आजादी के बाद से अब तक बांग्लादेश से आए हिंदू परिवारों को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला था. लखीमपुर खीरी, धौरहरा और मोहम्मदी में 417 करोड़ की 213 पर 8 योजनाओं का सीएम लोकार्पण, शिलान्यास करेंगे. चंदन चौकी पलिया में सीएम थारू जनजाति के 4556 परिवारों को भौमिक अधिकार पत्तों का आवंटन करेंगे. साथ ही पलिया, श्रीनगर, निघासन और गोला में 817 करोड़ की 314 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी करेंगे. पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों को भी मिलेगी जमीन आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी. जिसके तहत विभाजन के समय पाकिस्तान से विस्थापित होकर राज्य के चार ज़िलों में बसे 12000 से ज़्यादा परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक दिया जाएगा. योग्य परिवारों को एक एकड़ तक की ज़मीन पर मालिकाना हक मिलेगा, बशर्ते कि वह ज़मीन सीलिंग सीमा के अंदर न हो और खलिहान, चरागाह या तालाब जैसी श्रेणियों में न आती हो. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह फ़ैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया. खन्ना ने कहा कि कैबिनेट ने 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) 2026' के तहत 'उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006' में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी है. खन्ना ने बताया कि इस संशोधन के तहत इन परिवारों को ज़मीन का मालिकाना हक देने के लिए धारा 76(1) में नए प्रावधान जोड़े गए हैं. मंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पलायन करके पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर ज़िलों में बसे 12,380 परिवारों को इस कदम से फ़ायदा होगा. खन्ना के अनुसार लाभार्थियों में वे लोग शामिल हैं जो 'नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019' के तहत भारतीय नागरिकता के योग्य हैं, साथ ही अनुसूचित जनजाति समुदायों से जुड़े परिवार या विभिन्न योजनाओं के तहत पुनर्वासित किए गए परिवार भी इसमें शामिल हैं. इस प्रकार है पाकिस्तान से आए हिंदू परिवारों की आबादी ज़िलावार ब्योरा देते हुए मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी में ऐसे 2,350 परिवार हैं, पीलीभीत में 4,000, बिजनौर में 3,856 और रामपुर में 2,174 परिवार हैं. उन्होंने कहा कि ये परिवार, जो लगभग 70 वर्षों से राज्य में रह रहे हैं, ज़मीन का मालिकाना हक न होने के कारण काफ़ी मुश्किलों का सामना कर रहे थे; इनमें खेती के लिए बैंक से कर्ज़ लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने में आने वाली दिक्कतें भी शामिल थीं.

पुलिस अधिकारी की पहचान निष्पक्षता, ईमानदारी और संवेदनशीलता में है – पुलिस महानिदेशक मकवाणा

निष्पक्षता, ईमानदारी एवं संवेदनशीलता ही पुलिस अधिकारी की पहचान : पुलिस महानिदेशक मकवाणा  प्रशिक्षु पुलिस उप अधीक्षकों से संवाद कर दी टिप्स भोपाल  मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी भोपाल में प्रशिक्षणरत  44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का संबोधन सत्र पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा के मुख्य आतिथ्य में नवीन पुलिस मुख्‍यालय क्रॉफ्रेंस हॉल में आयोजित किया गया। इस अवसर पर कुल 49 प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक उपस्थित रहे। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने चयनित अधिकारियों को बधाई देते हुए उन्हें ईमानदारी, निष्पक्षता एवं पूर्ण समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है, अतः अधिकारियों को अपनी व्यावसायिक दक्षताओं एवं तकनीकी कौशल को निरंतर अद्यतन करते रहना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को iGOT Karmayogi platform India पर उपलब्ध एआई, साइबर एवं अन्य व्यावसायिक कोर्सों का अधिकतम लाभ लेकर अपनी दक्षता निरंतर बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। पुलिस महानिदेशक मकवाणा ने पुलिस सेवा को समाज सेवा का सशक्त माध्यम बताते हुए विशेष रूप से गरीब एवं जरूरतमंद वर्ग के प्रति संवेदनशीलता एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने पर बल दिया, वहीं अपराधियों के विरुद्ध दृढ़ता एवं कठोरता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कानून एवं प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने, नए आपराधिक कानूनों की समुचित जानकारी रखने तथा भ्रष्टाचार एवं किसी भी प्रकार के दुराचार से दूर रहने की सलाह दी।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि वर्तमान में मीडिया, सोशल मीडिया, न्यायालय एवं विभिन्न आयोगों द्वारा सतत निगरानी की जाती है, ऐसे में प्रत्येक कार्रवाई पूर्ण पारदर्शिता एवं नियमसम्मत होना आवश्यक है, क्योंकि एक छोटी सी त्रुटि भी संपूर्ण करियर को प्रभावित कर सकती है। डीजीपी मकवाणा ने अपने अनुभव साझा करते हुए निष्पक्ष विवेचना, धैर्यपूर्वक सुनवाई एवं तथ्यों के आधार पर निर्णय लेने के महत्व को रेखांकित किया तथा निर्देशित किया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को अनावश्यक रूप से प्रकरण में न फंसाया जाए। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले कर्मियों को उचित प्रोत्साहन एवं पुरस्कार मिलना चाहिए, जबकि त्रुटि करने वालों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फील्ड में पदस्थापना के दौरान विभिन्न माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का समुचित सत्यापन करते हुए त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे आमजन का विश्वास सुदृढ़ किया जा सके।  डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस की सकारात्मक छवि उसके निरंतर व्यवहार एवं कार्यशैली से निर्मित होती है, जिसे स्थापित करने में लंबा समय लगता है, जबकि एक छोटी सी चूक से वह प्रभावित हो सकती है। समापन पर उन्होंने अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि वे पूर्ण ईमानदारी, निष्ठा एवं संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे, तो न केवल अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, बल्कि आमजन के साथ विश्वासपूर्ण संबंध भी विकसित होंगे तथा समाज में पुलिस के प्रति सकारात्मक छवि और अधिक सुदृढ़ होगी। अतिरिक्‍त पुलिस महानिदेशक एवं निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी  मोहम्‍मद शाहिद अबसार ने बताया कि 44वें एवं 45वें बैच के प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षकों का प्रशिक्षण चरणबद्ध रूप से संचालित किया जा रहा है, जिसमें प्रथम सेमेस्टर पूर्ण हो चुका है एवं द्वितीय सेमेस्टर प्रगति पर है। प्रशिक्षण के अंतर्गत कानून एवं व्यवस्था, अपराध अनुसंधान, नवीन आपराधिक कानून, पुलिस प्रक्रियाएं, आईटी एवं साइबर अपराध सहित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। साथ ही पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में ओरिएंटेशन, फील्ड एक्सपोजर एवं नवरात्रि जैसे आयोजनों के दौरान लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी का व्यावहारिक अनुभव भी दिया गया है। प्रशिक्षण में शारीरिक दक्षता एवं कौशल विकास हेतु पीटी, ड्रिल, योग, वेपन हैंडलिंग, फायरिंग एवं खेल गतिविधियों को शामिल किया गया है। प्रशिक्षु अधिकारी उच्च शिक्षित, अनुशासित एवं उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं तथा आगामी चरणों में उनका मूल्यांकन एवं फील्ड प्रशिक्षण निर्धारित है। प्रशिक्षु अधिकारियों विशेषता यह है कि इनमें से कई  अधिकारियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से तकनीकी और उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं, जिनमें बी.टेक, एम.टेक, एम.एससी,  एलएलबी तथा 'ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन' जैसे विषय में पीएचडी जैसी डिग्रियां प्रमुख हैं। कुछ अधिकारी  Indian Institutes of Technology (IIT) , National Institutes of Technology (NIT) तथा BHU जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षित है। इस प्रकार के उच्च शिक्षित और बहुमुखी प्रतिभा के धनी युवा अधिकारियों का पुलिस बल में शामिल होना, मध्यप्रदेश पुलिस की आधुनिक पुलिसिंग और तकनीकी दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में एक मील का पत्थर साबित होगा इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक डॉ. विनीत कपूर, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी संजय कुमार अग्रवाल, एसओ टू डीजीपी मलय जैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, संस्कार निर्माण की पाठशाला बने – मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों को केवल पोषण और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रखते हुए उन्हें ‘संस्कार निर्माण की पाठशाला’ के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि 3 से 6 वर्ष की आयु बच्चों के सर्वांगीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें दिए गए संस्कार जीवनभर उनकी सोच और व्यवहार को दिशा देते हैं। आंगनबाड़ी केवल पोषण नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की पाठशाला बने : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े मंत्री श्रीमती राजवाड़े अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में राज्य शैक्षणिक अनुसंधान केंद्र के ईसीसीई के राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन एवं विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। बैठक में प्रदेश के 52,518 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को संस्कारपरक शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस पहल करने पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे का पहला विद्यालय उसका घर और आंगनबाड़ी होता है, इसलिए यहां दी जाने वाली शिक्षा में भारतीय जीवन मूल्यों का समावेश अत्यंत आवश्यक है। संस्कारपरक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में प्रारंभिक अवस्था से ही बड़ों का सम्मान, सत्य बोलना, स्वच्छता, अनुशासन, प्रकृति प्रेम तथा ‘धन्यवाद’ और ‘क्षमा’ जैसे व्यवहारिक गुणों का विकास करना है। मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों में इस प्रकार की शिक्षा को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई व्यवहारिक सुझाव दिए। उन्होंने दिन की शुरुआत प्रार्थना, योग और प्राणायाम से करने, पंचतंत्र एवं लोककथाओं के माध्यम से नैतिक शिक्षा देने, त्योहारों और महापुरुषों की जयंती के जरिए सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ाने, तथा दैनिक व्यवहार में ‘नमस्ते’, स्वच्छता और अनुशासन को शामिल करने पर बल दिया। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान और प्रकृति प्रेम विकसित करने के लिए पौधारोपण एवं स्वच्छता जैसे छोटे-छोटे कार्यों को दिनचर्या का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने अभिभावकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महीने में ‘संस्कार सभा’ आयोजित कर माता-पिता को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा जाए, ताकि घर और आंगनबाड़ी दोनों स्थानों पर बच्चों को समान वातावरण मिल सके। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इस पहल से बच्चों में आत्मविश्वास, भाषा कौशल और सामाजिक व्यवहार का विकास होगा, साथ ही कुपोषण के साथ ‘चरित्र पोषण’ भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि संस्कारित बच्चे आगे चलकर अनुशासित विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनते हैं, जिससे समाज और राष्ट्र की मजबूत नींव तैयार होती है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘दूसरी माँ’ की भूमिका निभाते हुए बच्चों को प्रेमपूर्वक संस्कार देने का आह्वान किया। वर्तमान सामाजिक परिवेश में बढ़ती सामाजिक बुराइयों और मानवीय मूल्यों में गिरावट को देखते हुए उन्होंने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र को ‘संस्कार-केन्द्र’ के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

मई-जून में संभावित स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज

रायपुर : आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज त्रुटिरहित एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें प्रेक्षक : राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई जून-2026 की तैयारियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में आज निर्वाचक नामावली प्रेक्षकों की ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने की।राज्य निर्वाचन आयुक्त  अजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए तथा सभी दावा-आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में उनका निराकरण किया जाए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य की सघन निगरानी और प्रभावी सुपरविजन पर विशेष बल दिया। बैठक में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 01 अप्रैल 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले तथा भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नागरिक ही स्थानीय चुनाव में मतदाता बनने के पात्र होंगे। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके पश्चात 20 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 27 अप्रैल 2026 तक उनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा। आयोग द्वारा बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।  बैठक में रिक्त पदों की जानकारी भी साझा की गई। नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 4पद एवं 60 पार्षद के पदों पर आम निर्वाचन तथा अध्यक्ष के 4 पद एवं 17 पार्षद पदों पर उप निर्वाचन प्रस्तावित है। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के अंतर्गत जनपद पंचायत सदस्य के 10 पद, सरपंच के 82 पद एवं पंचों के 1110 पद रिक्त हैं, जिन पर निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। इस अवसर पर आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें।

डायल-112 हीरोज की बहादुरी: विदिशा में सूखे कुएँ से मिली नवजात बच्ची को अस्पताल पहुँचाया

भोपाल  विदिशा जिले के थाना कुरवाई क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से सूखे कुएँ में परित्यक्त अवस्था में मिली नवजात बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। समय पर किए गए इस प्रयास से मासूम बच्ची को जीवनदान मिल सका। दिनांक 10 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कुरवाई क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसरी में एक सूखे कुएँ में नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कुरवाई थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री नेतराम अहिरवार एवं पायलट श्री नरेंद्र दांगी ने नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया।डायल-112 जवानों ने त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची को एफआरव्ही वाहन से तत्काल शासकीय चिकित्सालय, कुरवाई पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार उपरांत उसे जिला चिकित्सालय, विदिशा रेफर किया गया।  इस कार्रवाई में डायल-112 जवानों की सजगता एवं संवेदनशीलता से एक नवजात को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर असहाय एवं जरूरतमंदों की सुरक्षा हेतु सदैव तत्पर, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

रायपुर : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल

रायपुर : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल रायपुर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के माध्यम से महिलाओं को न केवल नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि वे आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से अग्रसर हो रही हैं। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। अब तक 26 किश्तों का 16 हजार 240 करोड़ रूपए का भुगतान पात्र हितग्राही महिलाओं को किया जा चुका है। इस योजना की नियमित किस्त मिलने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वह आर्थिक रूप से सक्षम हुई है।  कोरबा शहर के पोड़ीबहार निवासी श्रीमती श्यामा प्रजापति इसकी एक उदाहरण हैं। श्रीमती प्रजापति बताती हैं कि योजना से मिलने वाली राशि उनके जीवन में बदलाव लेकर आई है। पहले छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को स्वयं पूरा कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि नियमित सहायता से उन्हें आर्थिक राहत के साथ मानसिक संतोष और आत्मविश्वास भी मिला है। यह योजना उनके जैसे हजारों परिवारों के लिए सहारा बनी है। श्रीमती प्रजापति ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने महिलाओं को समाज में सशक्त पहचान दिलाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।