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आस्था और रहस्य से घिरा पुरी का जगन्नाथ मंदिर

 ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर एक बार फिर चर्चा में है. कारण है उसका रत्न भंडार. मंदिर के रत्न भंडार की जांच शुरू हो गई है, जिसकी जांच अलग-अलग चरणों में की जा रही है और इसके लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है. इस विशेष खोज के बाद मंदिर से जुड़े रहस्य और भी गहरे हो गए हैं. जगन्नाथ मंदिर की पौराणिक मान्यता पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर हर साल से हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता आ रहा है. यह भारत के चार धामों में से एक माना जाता है और अपनी भव्य रथ यात्रा के लिए खास पहचान रखता है. मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान विष्णु के आशीर्वाद के बाद कराया था. कहा जाता है कि भगवान ने उन्हें स्वप्न में नील माधव को खोजने का आदेश दिया था. एक और कथा के मुताबिक, जब पांडव यमराज की ओर अपनी अंतिम यात्रा पर निकले, तो सप्त ऋषियों ने उन्हें मोक्ष के करीब पहुंचने के लिए चार धाम की यात्रा करने की सलाह दी थी. पुरी का जगन्नाथ मंदिर इन्हीं पवित्र धामों में शामिल है. तब से इस मंदिर की कई परंपराएं आज भी वैसी ही चली आ रही हैं, जिनमें भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं भी शामिल हैं. इसके अलावा, यह मंदिर कई ऐसी बातों के लिए भी जाना जाता है, जो सामान्य वैज्ञानिक तर्कों से परे मानी जाती हैं. आखिर ये रहस्य क्या हैं, आइए जानते हैं. लाल झंडे का रहस्य मंदिर के ऊपर हमेशा एक लाल झंडा लहराता रहता है. यह आम बात लग सकती है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह झंडा हवा के उल्टी दिशा में लहराता है. हर बार ऐसा ही होता है. कई लोग इसे भगवान का संकेत मानते हैं, जैसे वह बता रहे हों कि उन्हें पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है. इसके साथ ही एक खास परंपरा भी जुड़ी है. हर दिन एक पुजारी करीब 200 फीट ऊंचे मंदिर पर बिना किसी सुरक्षा के चढ़कर इस झंडे को बदलता है. मान्यता है कि अगर किसी दिन यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो मंदिर कई सालों तक बंद रह सकता है. समुद्र की आवाज जो अंदर जाते ही गायब हो जाती है जगन्नाथ मंदिर समुद्र से करीब 2 किलोमीटर दूर है. लेकिन हैरानी की बात ये है कि जैसे ही आप मंदिर के मुख्य द्वार के अंदर कदम रखते हैं, समुद्र की लहरों की आवाज बिल्कुल सुनाई नहीं देती. बाहर आते ही फिर वही आवाज सुनाई देने लगती है. इसलिए लोग कहते हैं कि ये सिर्फ मंदिर नहीं, एक अलग अनुभव है. मान्यता है कि भगवान हनुमान को मंदिर की रक्षा के लिए रखा गया था और उन्होंने ही समुद्र की आवाज को रोक दिया, ताकि भगवान जगन्नाथ शांतिपूर्वक विश्राम कर सकें. प्रसाद का अनोखा तरीका यहां रोज भगवान का प्रसाद सात मिट्टी के बर्तनों में एक के ऊपर एक रखकर पकाया जाता है. आमतौर पर नीचे वाला बर्तन पहले पकना चाहिए, लेकिन यहां उल्टा होता है- सबसे ऊपर वाला बर्तन पहले तैयार हो जाता है. इतना ही नहीं, जितने भी लोग दर्शन के लिए आते हैं, प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न ही बचता है. हर दिन बिल्कुल सही मात्रा में ही बनता है. मंदिर की परछाई नहीं पड़ती कहा जाता है कि इस मंदिर की बनावट ऐसी है कि दिन के किसी भी समय इसकी छाया दिखाई नहीं देती. यह बात लोगों को आज भी हैरान करती है. लकड़ी की मूर्तियां, जो हैं सबसे अलग जगन्नाथ मंदिर की एक और खास बात है यहां की मूर्तियां. जहां ज्यादातर मंदिरों में भगवान की मूर्तियां पत्थर या धातु की होती हैं. यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनी होती हैं. और सबसे अनोखी बात यह है कि इन मूर्तियों को हर 12 से 19 साल में एक खास और गुप्त प्रक्रिया के तहत बदला जाता है, जिसे नवकलेवर कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान एक रहस्यमयी तत्व, जिसे ब्रह्म पदार्थ कहा जाता है. पुरानी मूर्ति से नई मूर्ति में स्थानांतरित किया जाता है. इस प्रक्रिया को केवल कुछ चुनिंदा पुजारी ही देख सकते हैं, बाकी सब कुछ आज भी रहस्य बना हुआ है.  

Punjab Politics: सांसद अमृतपाल पर केंद्र से गुहार, CM मान बोले—सुरक्षा के चलते न हो ट्रांसफर

चंडीगढ़. राज्य सरकार ने खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह को लेकर एक अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत उनकी हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें असम की डिब्रूगढ़ सेंट्रल जेल में ही रखा जाए। सरकार ने इसके पीछे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला दिया है। सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार ने केंद्रीय गृह सचिव से अनुरोध किया है कि वे असम सरकार की सहमति लेकर ‘ट्रांसफर ऑफ प्रिजनर्स एक्ट, 1952’ तथा पंजाब संशोधन अधिनियम 2025 के प्रावधानों के तहत अमृतपाल को डिब्रूगढ़ जेल में ही रखने की अनुमति दिलाएं। राज्य सरकार ने इस संबंध में जल्द निर्णय लेने की अपील की है, ताकि आगे की कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले वह करीब एक महीने तक फरार रहा था। उसके खिलाफ 24 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला थाने में मामला दर्ज किया गया था, जब उसने अपने साथियों के साथ मिलकर पुलिस स्टेशन पर धावा बोला था और एक सहयोगी को छुड़ा लिया था। घटना के बाद पंजाब पुलिस ने बड़े स्तर पर कार्रवाई शुरू की थी। डिब्रूगढ़ जेल में बंद है अमृतपाल सिंह गिरफ्तारी के बाद से ही अमृतपाल को एनएसए के तहत डिब्रूगढ़ जेल में रखा गया है। उसकी हिरासत अवधि को अप्रैल 2024 और फिर अप्रैल 2025 में बढ़ाया गया था। अब यह अवधि 22 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है।ऐसे में पंजाब पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि उसकी रिहाई से राज्य की कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। सूत्र बताते हैं कि पंजाब के डीजीपी और अमृतसर (देहात) के एसएसपी की रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग ने यह सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनएसए समाप्त होने के बाद 23 अप्रैल को अमृतपाल को दोबारा गिरफ्तार किया जा सकता है, लेकिन राज्य की सुरक्षा के मद्देनजर उसे पंजाब से बाहर ही रखा जाना अधिक उचित होगा। पंजाब गृह विभाग ने दिया खुफिया इनपुट यह भी सामने आया है कि पहले डिब्रूगढ़ जेल में बंद अमृतपाल के नौ साथियों को एनएसए की अवधि समाप्त होने के बाद पंजाब वापस लाया जा चुका है। हालांकि, अमृतपाल के मामले को अलग मानते हुए सरकार ने उसके लिए विशेष व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत जताई है। पंजाब गृह विभाग ने खुफिया इनपुट और सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि अमृतपाल को पंजाब के बाहर ही रखना राज्य और सार्वजनिक शांति के हित में है। अब इस पूरे मामले में अंतिम फैसला केंद्र सरकार और असम सरकार की सहमति के बाद लिया जाएगा।

छात्रों के लिए जरूरी अपडेट: PAT-PPVT के फॉर्म 27 अप्रैल तक, 21 जून को एग्जाम

रायपुर. छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा अकादमी सत्र 2026 में प्रवेश हेतु (पी.ए.टी एवं पी.पी.वी.टी) 21 जून को परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. 33 कृषि महाविद्यालयों, 4 कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों, 17 उद्यानिकी महाविद्यालयों के साथ ही 1-1 वानिकी महाविद्यालय में प्रवेश दिया जाएगा. व्यावसायिक परीक्षा मण्डल द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय तथा दाऊ वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 33 कृषि महाविद्यालयों, 4 कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालयों, 17 उद्यानिकी महाविद्यालयों के साथ ही 1-1 वानिकी महाविद्यालय, खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, पशु चिकित्सा महाविद्यालय, दुग्ध प्रौद्योगिकी महाविद्यालय एवं मत्स्य पालन महाविद्यालय में अकादमी सत्र 2026 में प्रवेश हेतु (पी.ए.टी एवं पी.पी.वी.टी) 21 जून को परीक्षा का आयोजन किया जाएगा. इन प्रवेश परीक्षाओं के लिए 27 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है. इन परीक्षाओं का आयोजन छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिला मुख्यालयों में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर किया जाएगा. आवेदकों द्वारा ऑनलाइन आवेदन करते समय परीक्षा शुल्क का भुगतान ऑनलाइन व्यवस्था से किया जाएगा. शासन के नियमानुसार छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय निवासी आवेदक, जो परीक्षा में उपस्थित होते हैं, उनका परीक्षा शुल्क व्यापम द्वारा वापस कर दिया जाएगा.

भीषण लू का खतरा: प्रदेश के जिलों में तापमान 44°C तक जाने का अनुमान, रतलाम सबसे गर्म

भोपाल  मध्य प्रदेश में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है. तपिश बढ़ने से कई जिलों में गर्मी बढ़ गई है. सोमवार को प्रदेश के कई शहरों में दिन का तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया. रतलाम में सबसे ज्यादा तापमान रहा. यहां 41.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. वहीं पारा 41 डिग्री के पार पहुंचते ही प्रदेश के कई इलाकों में हीट जोन का असर दिखने लगा है. राजधानी भोपाल समेत इंदौर, उज्जैन और जबलपुर में भी तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ दी।  3-5 डिग्री तक पारा में उछाल  मौसम विभाग के अनुसार, 15 अप्रैल से मध्य प्रदेश के कई जिलों में लू चलने की संभावना है. इसके अलावा प्रदेश के तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक उछाल आने की संभावना है।  41 डिग्री के पार पहुंचा MP का पारा बीते 24 घंटे में सबसे अधिक तापमान रतलाम का 41.2 डिग्री दर्ज किया गया. वहीं नर्मदापुरम का 40.8 डिग्री सेल्सियस, धार में तापमान 40. 4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया. इसके अलावा खरगोन और मंडला में तापमान 40 डिग्री,  बैतूल में 39.5 डिग्री, शाजापुर में 39.3 डिग्री, खजुराहो, छिंदवाड़ा में 39.2 डिग्री, खंडवा में 39.1 डिग्री मलाजखंड और रायसेन में 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया. वहीं बड़े शहरों की बात करे तो जबलपुर सबसे गर्म रहा. यहां तापमान 39.2 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि राजधानी भोपाल और इंदौर में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस रहा. उज्जैन में 39 डिग्री दर्ज हुआ।  इन जिलों में चलेगी लू, IND ने जारी किया अलर्ट  मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए लू चलने की चेतावनी जारी की है. 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट में लू चलने की संभावना है. इसके अलावा राजधानी भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी गर्म हवाओं की चपेट में रहेंगे।   इन जिलों में चलेगी लू, अलर्ट जारी 16 और 17 अप्रैल को रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, खंडवा, सीधी, सिंगरौली, मंडला और बालाघाट में लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे बड़े शहर भी गर्म हवाओं की चपेट में रहेंगे। इन शहरों में 40 के आसपास पहुंचा तापमान रतलाम: 41.2 डिग्री नर्मदापुरम: 40.8 डिग्री धार: 40.4 डिग्री खरगोन, मंडला: 40 डिग्री बैतूल: 39.5 डिग्री शाजापुर: 39.3 डिग्री खजुराहो, छिंदवाड़ा: 39.2 डिग्री खंडवा: 39.1 डिग्री मलाजखंड, रायसेन: 39 डिग्री बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा (39.2 डिग्री), जबकि भोपाल और इंदौर में 38.8 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री दर्ज हुआ। 15 अप्रैल से नया सिस्टम सक्रिय, पर नहीं मिलेगी राहत 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम बन तो रहा है, लेकिन वह काफी कमजोर है। इसका मतलब है कि अब गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा ऐतिहासिक रूप से सबसे गर्म रहता है। ग्वालियर में तो तापमान 45°C और भोपाल में 44°C तक जाने का रिकॉर्ड रहा है। अप्रैल में लगातार 9 दिन तक बारिश बता दें कि अप्रैल में अब तक भीषण गर्मी पड़ने के बजाय आंधी-बारिश और ओले वाला मौसम रहा। 1 से 9 अप्रैल तक प्रदेश में कहीं न कहीं मौसम बदला। 15 से ज्यादा जिलों में ओलावृष्टि हुई तो करीब 45 जिलों में पानी गिरा। ग्वालियर में सबसे ज्यादा पानी गिरा। एमपी में अप्रैल के दूसरे पखवाड़े से गर्मी का असर तेज होने लगता है। महीने के आखिरी दिनों में तो तापमान रिकॉर्ड तोड़ देता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर की 10 साल की डेटा बेस्ड स्टडी में सामने आया कि भोपाल-इंदौर में पारा 43 डिग्री, जबकि जबलपुर में 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ग्वालियर में तो तापमान 45 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका है। भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है। 20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था।  कमजोर सिस्टम भी नहीं देगा राहत 15 अप्रैल से एक नया मौसम सिस्टम एक्टिव जरूर होगा, लेकिन यह इतना कमजोर रहेगा कि गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। उल्टा, इसके बाद तापमान और चढ़ने के आसार हैं। यानी आने वाले दिनों में ‘हीट वेव’ का लंबा दौर देखने को मिल सकता है।  अप्रैल की शुरुआत रही अलग, अब बदला मिजाज इस बार अप्रैल के पहले 9 दिन सामान्य से अलग रहे। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने गर्मी को थामे रखा। करीब 45 जिलों में बारिश दर्ज हुई, जबकि 15 से ज्यादा जिलों में ओले गिरे। ग्वालियर में सबसे ज्यादा वर्षा हुई। लेकिन अब मौसम ने करवट बदल ली है और अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में परंपरागत तेज गर्मी का दौर शुरू हो गया है। लू से बचाव के लिए एडवाइजरी – दिनभर पर्याप्त पानी पिएं – दोपहर में धूप से बचें – हल्के और सूती कपड़े पहनें – बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें – बाहर निकलते समय सिर और चेहरे को ढककर रखें 

हेमंत खंडेलवाल ने बैलगाड़ी पर चढ़कर ‘गांव-बस्ती चलो अभियान’ को दिया नया आयाम, घर-घर पहुंचने का दिया संदेश

बैतूल मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने‘गांव-बस्ती चलो अभियान'के तहत घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों का दौरा कर जनसंपर्क अभियान को नई गति दी। दौरे के दौरान उनका अनोखा अंदाज उस समय देखने को मिला, जब वे ग्राम चिरापाटला में बैलगाड़ी पर सवार होकर पहुंचे। उनके इस सादगीपूर्ण और पारंपरिक रूप ने ग्रामीणों का ध्यान आकर्षित किया और क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। जानकारी के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चिरापाटला सहित आसपास के कई गांवों का भ्रमण किया। बैलगाड़ी से गांव में प्रवेश करते हुए उन्होंने ग्रामीण जीवनशैली और परंपराओं के प्रति अपने जुड़ाव का संदेश दिया। गांव पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों, ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और निराकरण का भरोसा दिलाया। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया और लोगों को जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक स्थलों का भी दौरा किया। ग्रामीणों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि‘गांव-बस्ती चलो अभियान'का उद्देश्य अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना, उसकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए पहल करना है। उन्होंने कहा कि पार्टी की नीतियां गांव, गरीब, किसान और वंचित वर्ग के उत्थान पर केंद्रित हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की वास्तविक ताकत उसकी सादगी और जनता के बीच सक्रिय मौजूदगी में होती है। सीधे संवाद से ही समस्याओं की सही पहचान और समाधान संभव है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। इस दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। हालांकि कार्यक्रम के दौरान कुछ स्थानों पर छोटे नेताओं में बैलगाड़ी पर सवार प्रदेश अध्यक्ष के साथ फोटो खिंचवाने की होड़ देखी गई, जिससे कुछ ग्रामीणों में नाराजगी भी सामने आई।

एमपी बीजेपी की महत्वपूर्ण बैठक, कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडल पर होगी चर्चा; जानें कौन होंगे शामिल

भोपाल आज यानी 14 अप्रैल को एमपी बीजेपी ने हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। भाजपा कोर कमेटी की यह बैठक भोपाल में आयोजित होने जा रही है। बैठक में कैबिनेट विस्तार और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को लेकर अहम चर्चा हो सकती है। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित प्रदेश के 16 दिग्गज नेता शामिल होंगे। इसी के साथ ही बीजेपी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल भी मौजूद रहेंगे। बैठक में वर्तमान मुद्दों और आगे की योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व की बड़ी बैठक आज मंगलवार को एमपी बीजेपी की बड़ी बैठक है। यह बैठक भोपाल में स्थित सीएम निवास में आयोजित की जाएगी। शाम करीब सात बजे बैठक शुरु होगी। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, पार्टी के राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल शामिल होंगे। इनके अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह व ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री भी बैठक में मौजूद रहेंगे। इन दो मुद्दों पर होगी खास चर्चा सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी प्रदेश कोर कमेटी की इस बैठक में राज्य के निगम-मंडलों में नियुक्तियों और मंत्रीमंडल के विस्तार जैसे मुद्दों पर भी बात हो सकती है। इन दोनों मामलों को लेकर पार्टी में काफी समय से असमंजस बना हुआ है। उम्मीद है कि आज की बैठक में शीर्ष नेता इन मुद्दों पर स्थिति साफ कर सकते हैं। प्रदेश कोर समिति के ये 16 सदस्य होंगे शामिल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, जगदीश देवड़ा और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, राकेश सिंह और सांसद वीडी शर्मा, सांसद लता वानखेड़े, नरोत्तम मिश्रा व अरविंद भदौरिया शामिल होंगे।

गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 5 सबसे अच्छे पानी वाले फल

गर्मियों में ताजे फल आपको कई फायदे पहुंचा सकते हैं। खासतौर से वह फल जिनमें पानी की मात्रा अच्छी होती हो। पानी वाले फल आपको डिहाइड्रेशन की समस्या से बचाते हैं। इस दिक्कत से बचना न केवल आपकी एनर्जी के लेवल को बनाए रखने के लिए जरूरी है, बल्कि यह आपके अंगों के सही कामकाज के लिए भी जरूरी है। हेल्थ कोच रायन फर्नांडो ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में पानी वाले फलों के बारे में बताया। एक्सपर्ट कहते हैं कि गर्मियों में ज्यादातर लोग पानी ज्यादा पीने लगते हैं, लेकिन फिर भी एनर्जी की कमी महसूस करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि शरीर में पानी की मात्रा का सही इस्तेमाल होना सिर्फ पानी की मात्रा पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर भी डिपेंड करता है कि शरीर उसका सही इस्तेमाल कैसे करता है। इसलिए ऐसे मौसमी फलों को डायट में शामिल करना चाहिए जिनमे पानी, इलेक्ट्रोलाइट्स, फाइबर और थोड़ी मात्रा में नेचुरल शुगर होती है। ऐसे फल शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेटेड रखने और अचानक थकान को रोकने में मदद करते हैं। एक्सपर्ट ने 5 पानी वाले फलों के बारे में बताया है जो गर्मियों के लिए बेस्ट हैं। जानिए- 1) तरबूज तरबूज में 92 प्रतिशत पानी होता है। इसमें लाइकोपीन भरपूर मात्रा में होता है,ये एक तरह का एंटीऑक्सिडेंट है। गर्मी में ये हीट स्ट्रेस कम करने का काम करता है। ये फल फ्लूयड बैलेंस करने में भी मदद करता है। मिड मॉर्निंग या फिर पोस्ट वर्कआउट के बाद इस फल को खाएं। एक दिन में 200 से 300 ग्राम खा सकते हैं। 2) ताड़गोला समुद्री जगहों पर मिलने वाला ताड़गोला में 90 प्रतिशत पानी होता है। शरीर से गर्मी निकालने का काम करता है और नेचुरली ठंडक बनाए रखता है। दोपहर के समय इसका एक या दो पीस खा सकते हैं। 3) खरबूजा बाकी फलों की तरह खरबूजे में भी 90 प्रतिशत पानी होता है। ये एक ठंडा फल है जो बॉडी के तापमान को रेगुलेट करने का काम करता है। पाचन के लिए भी ये फल हल्का होता है। दोपहर के समय इस फल को खाना सबसे अच्छा है। 4) आड़ू आड़ू में 89 प्रतिशत पानी होता है, ये गट हेल्थ को सपोर्ट करता है और हाइड्रेशन में मददगार होता है। इस फल को आसानी से पचा सकते हैं। एक्सपर्ट एक से दो छोटे साइज के आड़ू खाने की सलाह देते हैं। इसे मिड मॉर्निंग या मिड ईवनिंग में खा सकते हैं। 5) संतरा विटामिन सी से भरपूर संतरे में 86 से 87 पर्सेंट पानी होता है। इसमें पोटेशियम की मात्रा अच्छी होती है इसलिए ये इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस करने में भी मददगार होते हैं। ये थकान को कम करने में मदद करते हैं। मिड मॉर्निंग में इस एक या दो संतरा खा सकते हैं, इसके जूस को अवॉइड करें।

नोएडा विवाद साजिश का हिस्सा, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच शुरू: अनिल राजभर

साजिश के तहत नोएडा में भड़काया गया विवाद, पाकिस्तान कनेक्शन की भी हो रही जांच: अनिल राजभर नोएडा में हिंसा पर प्रदेश सरकार के श्रम मंत्री अनिल राजभर का बड़ा बयान मेरठ-नोएडा में पिछले दिनों 4 संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी से सरकार अलर्ट मंत्री ने की श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील सरकार बोली- श्रमिकों की हर मांग पर संवाद को तैयार, उग्र आंदोलन से बचें सीएम के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारी मौके पर, वार्ता से समाधान पर जोर लखनऊ  नोएडा में हिंसा को उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने सुनियोजित साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रदेश के विकास और शांति व्यवस्था को बाधित करने के उद्देश्य से कराई गई प्रतीत होती है। पिछले दिनों मेरठ और नोएडा से चार संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी हुई है, जिनके तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़े थे। ऐसे में प्रदेश में अस्थिरता फैलाने की साजिश की आशंका को बल मिलता है। एजेंसियां पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही हैं। मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम को विफल करने के इरादे से भी इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दिया गया हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की डबल इंजन सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर देश विरोधी ताकतें इस तरह के षड्यंत्र रच रही हैं। श्रम मंत्री ने श्रमिकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी भ्रामक सूचना या बहकावे में न आएं और शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि अराजकता और उग्र आंदोलन किसी समस्या का समाधान नहीं हैं। सरकार आपकी हर बात सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों को नोएडा भेजा गया है, जो श्रमिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं। पहले से भी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। अनिल राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास में श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और सरकार उनके हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। “श्रमेव जयते” के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए सरकार लगातार श्रमिक कल्याण के लिए काम कर रही है। उन्होंने दोहराया कि सरकार श्रमिकों की मांगों को लेकर संवेदनशील है और हर स्तर पर समाधान के लिए प्रयासरत है। साथ ही उन्होंने श्रमिकों से आग्रह किया कि वे संवाद का रास्ता अपनाएं और प्रदेश के विकास में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाते रहें।

CM भजनलाल का मास्टर प्लान: 72 बीट्स, ज्यादा पुलिस और ITMS से बदलेगा जयपुर ट्रैफिक

 जयपुर जयपुर की सड़कों पर लगने वाले लंबे जाम और ट्रैफिक की किच-किच को खत्म करने के लिए राजस्थान सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के आदेश पर बनी इस योजना का मकसद सिर्फ ट्रैफिक रोकना नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को हाई-टेक और स्मार्ट बनाना है. अब जयपुर का ट्रैफिक सिस्टम पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नई तकनीक और ज्यादा पुलिस फोर्स के साथ चलेगा. अफसरों की संख्या बढ़ी, हर इलाके पर होगी पैनी नजर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए सरकार ने पुलिस अधिकारियों की टीम को काफी बड़ा कर दिया है. पहले निगरानी के लिए एडीसीपी ट्रैफिक के 2 पद थे जिन्हें अब बढ़ाकर 4 कर दिया गया है. इसी तरह एसीपी ट्रैफिक के पदों को 4 से बढ़ाकर 8 और ट्रैफिक इंस्पेक्टरों की संख्या 15 से बढ़ाकर 20 कर दी गई है. इससे फायदा यह होगा कि जयपुर के हर कोने में एक बड़ा अधिकारी मौजूद रहेगा और जमीनी स्तर पर काम बेहतर होगा. ड्रोन कैमरों से निगरानी, 72 बीट्स का शहर को बांटा अब ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चौराहों पर खड़ी नजर नहीं आएगी, बल्कि आसमान से भी ड्रोन के जरिए आप पर नजर रखी जाएगी. पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग टीमें तैनात रहेंगी ताकि पीक ऑवर्स में जाम की स्थिति न बने. इसके साथ ही ट्रैफिक पुलिस को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें दी गई हैं, ताकि पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाली तंग गलियों में भी तुरंत पहुंच सकें और जाम खुलवा सकें. टोंक रोड को बनाया जाएगा सबसे बेहतरीन रास्ता इस नए प्लान के तहत सबसे पहले टोंक रोड की सूरत बदली जाएगी. यादगार से लेकर सांगानेर तक के रास्ते को एक 'मॉडल रोड' के तौर पर विकसित किया जा रहा है. यहां सड़कों के डिजाइन को इस तरह ठीक किया जाएगा कि बेवजह के कट्स बंद हों और पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ साफ मिले. सड़क पर यू-टर्न और क्रॉसिंग को वैज्ञानिक तरीके से सेट किया जाएगा ताकि गाड़ियों की रफ्तार न थमे. अतिक्रमण और गलत पार्किंग पर चलेगा डंडा जाम की एक बड़ी वजह सड़कों पर होने वाले कब्जे और गलत तरीके से खड़ी गाड़ियां हैं. अब सरकार इसे लेकर बहुत सख्त है. सड़कों और फुटपाथों से अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और अवैध पार्किंग के खिलाफ अतिरिक्त क्रेनें तैनात की जाएंगी. शहर में पार्किंग और नो-पार्किंग जोन के बोर्ड साफ-साफ लगाए जाएंगे ताकि जनता को पता रहे कि गाड़ी कहां खड़ी करनी है. गाड़ियों की संख्या देखकर बदलेगी लाइट अब आपको लाल बत्ती पर बेवजह लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार 'इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम' लागू करने जा रही है, जिससे सिग्नल अब 'डायनेमिक' होंगे. यानी लाइटें खुद गाड़ियों की भीड़ को देखकर तय करेंगी कि किधर का रास्ता कितनी देर खोलना है. सरकार का मानना है कि अगर जनता और प्रशासन मिलकर साथ दें, तो जयपुर की सड़कों को वाकई में जाम मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है.

बालकनी का वास्तु बदल सकता है घर की ऊर्जा और भाग्य

 कई बार कड़ी मेहनत के बाद भी घर में पैसा नहीं टिकता या मानसिक तनाव बना रहता है.  तमाम कोशिश के बाद जब हमारा ध्यान घर के वास्तु पर जाता है तो हम कमरे, किचन और हॉल का वास्तु तो ठीक करते हैं लेकिन कई बार घर की बालकनी अछूती रह जाती है. हम अक्सर घर के कमरों का वास्तु तो ठीक कर लेते हैं, लेकिन बालकनी के वास्तु पर हमारा ध्यान नहीं जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, बालकनी में रखी कुछ चीजें और गलत दिशा आपकी तरक्की में ब्रेक लगा सकती हैं. अगर आप भी सुख-समृद्धि चाहते हैं, तो बालकनी से जुड़े इन नियमों को अनदेखा करने की गलती बिल्कुल न करें. बालकनी की सही दिशा बदल देगी किस्मत वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व है. बालकनी के लिए उत्तर और पूर्व दिशा को सबसे उत्तम माना गया है. इसे देव मार्ग कहा जाता है. अगर आपकी बालकनी इस दिशा में है, तो सूर्य की पहली किरणें घर की नकारात्मकता को खत्म कर देती हैं. कोशिश करें कि इस हिस्से को जितना हो सके खुला और साफ रखें, ताकि घर में ईश्वरीय ऊर्जा बनी रहे. इसके अलावा बालकनी में आप कुछ पौधे लगा कर पूरे घर के वास्तु दोष से निजात पा सकते हैं. बस इन्हें लगाते वक्त दिशा का ध्यान रखना जरूरी है. तुलसी: बालकनी के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में तुलसी का पौधा लगाएं. इसे साक्षात लक्ष्मी का रूप माना जाता है. मनी प्लांट: आर्थिक तंगी दूर करने के लिए इसे दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है. शमी: शनि दोष से मुक्ति और कार्यों में सफलता के लिए शमी का पौधा लगाएं. बालकनी में कभी भी कांटेदार या दूध निकलने वाले पौधे न लगाएं, ये घर में कलह और तनाव पैदा करते हैं. दीवारों का रंग और शाम का दीपक बालकनी की दीवारों पर हमेशा हल्के और सात्विक रंगों का चुनाव करें. सफेद, क्रीम या हल्का पीला रंग सबसे अच्छा माना जाता है. वास्तु के अनुसार, रोज शाम को बालकनी में एक दीपक जरूर जलाना चाहिए. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और घर से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं. अगर बैठने के लिए भारी फर्नीचर रखना है, तो उसे हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में ही रखें. भूलकर भी न रखें ये चीजें अक्सर लोग बालकनी को स्टोर रूम बना देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है. कबाड़ और टूटे बर्तन: बालकनी में पुराना सामान या कबाड़ रखने से 'राहु' का नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है, जिससे मानसिक अशांति होती है. सूखे पौधे: अगर आपकी बालकनी में कोई पौधा सूख गया है, तो उसे तुरंत हटा दें. सूखे पौधे दुर्भाग्य और आर्थिक हानि का संकेत हैं. गंदगी: बालकनी जितनी साफ होगी, माता लक्ष्मी के आने का रास्ता उतना ही साफ होगा.