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रायपुर: बंदूक से विकास की ओर, सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी

रायपुर : बंदूक से विकास की ओर: सुकमा के तुंगल इको-पर्यटन केंद्र की प्रेरक कहानी रायपुर सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री  केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।

बड़ी खबर: निशांत कुमार की सुरक्षा बढ़ी, विजय सिन्हा की घटी, श्रवण कुमार को Y+ सुरक्षा मिली

पटना जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जदयू नेता निशांत को अब जेड श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी। वहीं, पिछली नीतीश सरकार में डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा घटा दी गई है। उन्हें भी अब जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की जाएगी। पहले उनकी सुरक्षा श्रेणी जेड प्लस थी। इसके अलावा जदयू के वरीय नेता एवं पूर्व मंत्री श्रवण कुमार की सुरक्षा में भी इजाफा किया गया है। उन्हें एस्कॉर्ड के साथ वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया है। बिहार के गृह विभाग ने राज्य सुरक्षा समिति की अनुशंसा पर इन सभी नेताओं की सुरक्षा में बदलाव के लिए डीजीपी विनय कुमार और डीजी विशेष शाखा को पत्र लिखा है। हाल ही में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद लगातार बड़े नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। दोनों नए डिप्टी सीएम को जेड सुरक्षा एक दिन पहले ही खबर आई थी कि सम्राट चौधरी सरकार में डिप्टी सीएम बनाए गए जदयू के दोनों वरीय नेता विजय कुमार चौधरी एवं बिजेंद्र प्रसाद यादव की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। दोनों उपमुख्यमंत्रियों को जेड श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला लिया गया। अब जदयू के नेता निशांत कुमार भी इसी स्तर के सुरक्षा घेरे में रहेंगे। जेड श्रेणी की सुरक्षा में कुल 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। इनमें से 4-6 एनएसजी, सीआरपीएफ या आईटीबीपी के कमांडों भी शामिल हैं। इसके अलावा, जेड श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले नेताओं को एस्कॉर्ट की सुविधा भी मिलती है। विजय सिन्हा की सुरक्षा घटी पूर्ववर्ती नीतीश सरकार में सम्राट के साथ डिप्टी सीएम रहे विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा जेड प्लस से घटाकर जेड कर दी गई है। नई सरकार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने के चलते उन्हें फिर से डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया है। इस कारण उनकी सुरक्षा घटाई गई है। नीतीश कुमार को जेड प्लस सुरक्षा लगभग दो दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को सरकार ने जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला पिछले दिनों लिया गया था। नीतीश अभी राज्यसभा सांसद हैं। मुख्यमंत्री रहते उनकी सीएम वाली विशेष सुरक्षा रहती थी। 14 अप्रैल को उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। अब वे जेड प्लस श्रेणी के सुरक्षा कवर में रहेंगे। यह श्रेणी सुरक्षा व्यवस्था की सबसे उच्चतम श्रेणी मानी जाती है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

बिजली संकट खत्म! योगी सरकार का बड़ा ऐलान—प्रदेश को मिलेगी 34 हजार मेगावॉट पावर

लखनऊ.  योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को भीषण गर्मी में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर ऊर्जा विभाग ने इस वर्ष पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई है। इसके लिए सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। वहीं, पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू से पूरी की जाएगी। इसके अलावा अतिरिक्त मांग को बिजली एक्सचेंज के जरिये पूरा किया जाएगा। पीक डिमांड 33 हजार मेगावाट के पार जाने का अनुमान यूपीपीसीएल के एमडी पंकज कुमार ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अप्रैल से सितंर के बीच बिजली की मांग बढ़ेगी। पिछले वर्षों की डिमांड को देखते हुए इस वर्ष जून में पीक डिमांड लगभग 33,375 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जो अब तक के उच्चतम स्तरों में से एक होगी। मई और जुलाई में भी मांग 31 से 32 हजार मेगावाट के बीच रहने की संभावना है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने अग्रिम तैयारी करते हुए उत्पादन और आपूर्ति के सभी स्रोतों को सक्रिय कर दिया है। वहीं पीक डिमांड को ध्यान में रखते हुए लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने की रणनीति तैयार कर ली गयी है। उन्होंने बताया कि सभी नए थर्मल पावर प्लांट यूनिट्स को चालू कर दिया गया है। घाटमपुर, खुर्जा, पनकी, ओबरा और जवाहरपुर जैसे प्रमुख परियोजनाओं से उत्पादन शुरू हो चुका है। इन परियोजनाओं के चालू होने से प्रदेश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं घाटमपुर की तीसरी यूनिट 30 अप्रैल तक चालू हो जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति को और मजबूती मिलेगी। 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से तय एमओयू से होगी पूरी एमडी ने बताया कि पीक आवर्स में करीब 80 प्रतिशत बिजली की मांग पहले से किए गए एमओयू (लॉन्ग टर्म टाई-अप) के जरिए पूरी की जाएगी। इससे अचानक मांग बढ़ने की स्थिति में भी स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही शेष मांग को पूरा करने के लिए बिजली एक्सचेंज प्लेटफॉर्म जैसे आईईएक्स, पीएक्सआईएल और एचपीएक्स की मदद ली जाएगी। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से जरूरत के समय अतिरिक्त बिजली खरीदी जाएगी। इससे न केवल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहेगा, बल्कि उपभोक्ताओं को कटौती से भी राहत मिलेगी। इसके अलावा कुछ राज्यों के साथ लगभग 4,663 मिलियन यूनिट (एमयू)बिजली की बैंकिंग व्यवस्था की गई है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर अन्य राज्यों से बिजली ली जा सकेगी और बाद में वापस की जाएगी। यह व्यवस्था भी आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर मॉनिटरिंग की गई तेज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उच्च स्तरीय बैठक में बिजली आपूर्ति को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि किसी भी स्थिति में उपभोक्ताओं को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नियमित समीक्षा बैठकों के जरिए तैयारियों की निगरानी बढ़ा दी है। साथ ही ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि तकनीकी खराबियों के कारण बाधा न आए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिये। इसके लिए फीडर स्तर पर निगरानी बढ़ाई गई है और लाइन लॉस कम करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। स्मार्ट मीटरिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को भी तेजी से लागू किया जा रहा है।

झारखंड के दलमा में वन्यजीवों की वापसी: 38 हाथियों का झुंड पुराने रास्ते से पहुंचा

जमशेदपुर. दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में तीन वर्षों के लंबे अंतराल के बाद 38 हाथियों का झुंड अपने पारंपरिक एलीफेंट कोरिडोर से वापस पहुंचा है। 38 हाथियों के झुंड में पांच बच्चा शामिल है। इससे वन विभाग के अधिकारियों और कर्मियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। लंबे समय बाद दलमा जंगल में हाथियों की चिंघाड़ गूंजने लगी है, जो प्राकृतिक संतुलन के लिहाज से भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हाथियों का यह यह झुंड पश्चिम बंगाल सीमा के पास स्थित काकराझोर-बुरूडीह-नरसिंहपुर-सुकलाड़ा-डालापानी-आमदा पहाड़ी मार्ग से होते हुए दलमा के अंदर जलस्रोत मंझला बांध के पास पहुंच गया। यह वही पुराना रास्ता है, जिससे होकर हाथी वर्षों से अपने प्राकृतिक आवास तक आते-जाते रहे हैं। जमशेदपुर वन प्रमंडल के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हाथियों के भटकने के कारण चाकुलिया, बहरागोड़ा और घाटशिला के रिहायशी इलाकों में जान-माल का नुकसान बढ़ गया था। हाथियों का अपने पारंपरिक मार्ग से विचलित होना ही मानव-हाथी संघर्ष की बड़ी वजह बना। उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों से वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम लगातार सक्रिय थी। रात के समय मशाल, धुआं, पटाखे और ड्रैगन टार्च का इस्तेमाल कर हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की गई। अब जब हाथियों का झुंड अपने पुराने कोरिडोर से दलमा लौट आया है, तो उम्मीद है कि भविष्य में जान-माल का नुकसान में कमी आएगी। स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी – तीन साल बाद एक साथ 38 हाथियों का अपने प्राकृतिक मार्ग पर लौटना न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। यदि प्राकृतिक मार्ग सुरक्षित और संरक्षित रहें, तो वन्यजीव अपने आप संतुलन बनाए रखते हैं। – सबा आलम अंसारी, डीएफओ, जमशेदपुर

चुनावी माहौल में ED का एक्शन: 3 दिन में दो बड़े आप नेताओं के घर छापेमारी, सीएम मान ने बताया ‘चुनावी खेल’

चंडीगढ़ पंजाब की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता ने बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने महज तीन दिनों के भीतर आम आदमी पार्टी के दो प्रमुख नेताओं के आवासों पर छापेमारी की। इस अचानक हुई कार्रवाई से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। जहाँ एक तरफ एजेंसियां इसे अपनी नियमित जांच का हिस्सा बता रही हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई मान रहा है। मुख्यमंत्री मान का केंद्र पर तीखा हमला इन छापों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा अपनी हार के डर से केंद्रीय जांच एजेंसियों को आगे कर देती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक 'चुनावी खेल' है जिसका मकसद आम आदमी पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकना और नेताओं के मनोबल को तोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी धमकियों से उनकी सरकार और पार्टी झुकने वाली नहीं है। लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल आम आदमी पार्टी के नेतृत्व ने इस मुद्दे को लोकतंत्र की गरिमा से जोड़ते हुए कहा है कि विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का अनुचित प्रयोग किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि तीन दिनों के भीतर दो नेताओं को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि एजेंसियां किसके इशारे पर काम कर रही हैं। पार्टी का तर्क है कि जनता सब देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। इस घटनाक्रम ने पंजाब में केंद्र और राज्य सरकार के बीच के तनाव को और गहरा कर दिया है। चुनावी समीकरणों पर छापों का असर राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन छापों का असर आने वाले चुनावों के प्रचार और समीकरणों पर पड़ना तय है। जहाँ आम आदमी पार्टी इसे 'विक्टिम कार्ड' के रूप में पेश कर जनता की सहानुभूति बटोरने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल भ्रष्टाचार के मुद्दों को हवा देंगे। फिलहाल, राज्य में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद पंजाब की सियासत को और अधिक गरमा सकता है।

रायपुर : महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकें, नारी शक्ति वंदन सम्मेलन और रोड-शो होंगे आयोजित

रायपुर : महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकें, नारी शक्ति वंदन सम्मेलन और रोड-शो होंगे आयोजित नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी निकायों को जारी किए निर्देश महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण हेतु गहन जन-जागरूकता अभियान के आयोजन और समन्वय के लिए दिए निर्देश रायपुर  नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने महिला सशक्तीकरण के लिए टाउन-हॉल बैठकों, नारी शक्ति वंदन सम्मेलनों और रोड-शोज के आयोजन एवं आवश्यक समन्वय के लिए राज्य के सभी नगरीय निकायों को निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने मंत्रालय से सभी नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को जारी परिपत्र में कहा है कि महिलाओं के सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राज्य शासन द्वारा एक विशेष अल्पकालिक एवं गहन जन-जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। जिला कलेक्टरों के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में ये अभियान संचालित किए जाएंगे। नगरीय प्रशासन विभाग ने परिपत्र के माध्यम से इन जन-जागरूकता अभियानों के आयोजन एवं समन्वय के संबंध में सभी निकायों को जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार आवश्यक बुनियादी ढांचा (छाया, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्था) और स्थल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया है। महिला सशक्तीकरण से संबंधित जन-जागरूकता अभियान के प्रथम चरण में संबंधित निकायों को विशेष सामान्य सभा आहूत कर कार्यक्रम की महत्ता पर विशेष चर्चा एवं संकल्प पारित करने को कहा गया है। राज्य शासन की प्रमुख फ्लैगशिप योजनाओं को आमजनों तक पहुंचाने एवं इसके लिए जागरूक करने महिला हितग्राहियों, स्वसहायता समूहों (SHGs) और स्थानीय जमीनी नेटवर्क को सक्रिय कर हितग्राहियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने विभागीय अभिसरण के जरिए जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में विभिन्न योजनाओं के लाभ की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने सभी विभागों से आवश्यक समन्वय स्थापित कर स्टॉल व अन्य उपाय करने के निर्देश निकायों को दिए हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य शासन की इस सर्वोच्च प्राथमिकता के अंतर्गत संचालित कार्यो का संपादन कर किए गए कार्यों एवं कार्यवाहियों की जानकारी संचालनालय को भेजना सुनिश्चित करने को कहा है।

मरीजों के लिए बड़ी राहत: PGI में आधुनिक सुविधाएं, न्यूरो विभाग नए सेंटर में शिफ्ट

चंडीगढ़. PGI ने मरीजों को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। संस्था ने 20 अप्रैल, 2026 से अपनी न्यूरोलॉजी और न्यूरोसर्जरी OPD सर्विस (ट्रॉमा OPD को छोड़कर) को एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर में शिफ्ट करने का फैसला किया है। PGI प्रशासन के मुताबिक नए ओ.पी.डी. ब्लॉक में इस समय चल रही ये सेवाएं 18 अप्रैल को दोपहर बाद बंद कर दी जाएंगी ताकि नई जगह पर उचित कार्रवाइयों को सुविधाजनक बनाया जा सके। नई OPD एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर के लेवल 2 पर काम करेगी। PGI के डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ जगह का बदलाव नहीं है, बल्कि मरीजों को एक ही छत के नीचे कंसल्टेशन, डायग्नोसिस और एडवांस्ड ट्रीटमेंट देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे इलाज प्रक्रिया में तेजी आएगी और मरीज को बेहतर अनुभव मिलेगा। OPD का समय और दिन वही रहेंगे। न्यूरोलॉजी आउटपेशेंट डिपार्टमेंट OPD सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी, जबकि गुरुवार को सुबह 11:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक स्पेशल क्लिनिक लगेगा। न्यूरोसर्जरी आउटपेशेंट डिपार्टमेंट मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक काम करेगा। मरीज़ गेट नंबर 3 के जरिए एडवांस्ड न्यूरोसाइंस सेंटर जा सकेंगे। प्रशासन का दावा है कि मरीज़ों की सुविधा के लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए गए हैं। 

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत, DA में 2% की वृद्धि को मिली कैबिनेट की मंजूरी

नई दिल्ली जिस पल का लंबे समय से सरकारी कर्मचारी इंतजार कर रहे थे, वो पल आज आ गया है. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) में 2% बढ़ोतरी को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इससे पहले अक्टूबर में DA को 55% से बढ़ाकर 58% किया गया था, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुआ था. बाद में इसका एरियर भी दिया गया था, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स दोनों को फायदा मिला था।  केंद्र सरकार समय-समय पर अपने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनर्स की महंगाई राहत (DR) बढ़ाती रहती है. आपको बता दें कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) साल में दो बार बढ़ाती है. अब कितनी मिलेगी सैलरी? मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है. अभी 58% डीए के हिसाब से उसे हर महीने 29,000 रुपये डीए मिल रहा है. अगर इसमें 2% की बढ़ोतरी होती है, तो डीए 60% हो जाएगा और उसे 30,000 रुपये मिलने लगेंगे. यानी हर महीने 1,000 रुपये की बढ़ोतरी होगी, साथ ही जनवरी से एरियर का भी फायदा मिलेगा।  यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठनों की ओर से प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग में वेतन स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की मांग की गई. नेशनल काउंसिल–जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज्म (NC-JCM) ने अपने प्रस्ताव में 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक हो सकती है. सरकार के इस फैसले से करीब 1.19 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को फायदा मिलेगा।  अब कितनी बढ़ेगी सैलरी? बता दें कि अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी का बेसिप पे 36 हजार 500 रुपए है तो 60 फीसदी के हिसाब से अब उसका डीए   21 हजार 900 रुपए हो जाएगा. बड़ी बात यह है कि अब कर्मचारियों को जनवरी से एरियर भी मिलेगा. नया नियम 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा. इसका मतलब यह है कि कर्मचारियों को केवल अगले महीने की बढ़ी हुई सैलरी ही नहीं मिलेगी, बल्कि पिछले तीन महीनों यानी जनवरी फरवरी और मार्च का बकाया एरियर  भी एकमुश्त दिया जाएगा।  लंबे समय से इंतजार कर रहे थे कर्मचारी केंद्र सरकार के इस कदम से उन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है जो पिछले कुछ समय से इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे और बढ़ती महंगाई के बीच अपनी आय बढ़ाने की मांग कर रहे थे. यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग के तहत वेतन संरचना में बड़े बदलावों की मांग कर रहे हैं।  क्यों बढ़ाया जाता है महंगाई भत्ता? बढ़ती महंगाई के कारण सरकारी कर्मचारियों के खर्चों की भरपाई के लिए सरकार साल में दो बार जनवरी और जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ाती है. इसकी गणना श्रम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों (CPI-IW) के आधार पर की जाती है, जो यह बताते हैं कि जरूरी चीजों के दाम कितने बढ़े हैं. आसान शब्दों में जैसे-जैसे बाजार में कीमतें बढ़ती हैं, आपकी सैलरी की वैल्यू बनाए रखने के लिए सरकार इस भत्ते में बढ़ोतरी करती है।  साल में दो बार बढ़ता है डीए सरकार आमतौर पर साल में दो बार जनवरी और जुलाई के लिए DA (महंगाई भत्ता) बढ़ाती है, और इसकी घोषणा अक्सर त्योहारों के समय जैसे होली या दिवाली के आसपास की जाती है. पिछले साल मार्च के अंत में DA बढ़ोतरी की घोषणा हुई थी, जबकि जुलाई की बढ़ोतरी का ऐलान अक्टूबर में किया गया था।  इस साल कर्मचारियों को उम्मीद थी कि होली यानी मार्च की शुरुआत तक DA बढ़ जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसी वजह से यह मामला पिछले 10 सालों में सबसे ज्यादा देरी वाला भी माना जा रहा था, क्योंकि आमतौर पर सरकार मार्च के अंत तक DA बढ़ोतरी की घोषणा कर देती है. हालांकि, एक्सपर्ट के अनुसार, यह देरी मुख्य रूप से प्रशासनिक प्रक्रियाओं और मंजूरी के अलग-अलग चरणों की वजह से हो रही थी।  सॉवरेन मेरिटाइम फंड को भी मंजूरी कैबिनेट ने प्रस्ताव में ‘परिवार’ की परिभाषा को बढ़ाकर आश्रित माता-पिता को भी शामिल करने की बात कही गई है. साथ ही वेतन में ज्यादा अंतर पर लीमिट तय करने, ज्यादा इंक्रीमेंट देने और महंगाई से जुड़े भत्तों को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. कैबिनेट ने 13,000 करोड़ रुपये के फंड के साथ एक सॉवरेन मेरिटाइम फंड (Sovereign Maritime Fund) को भी मंजूरी दी है. इसका मकसद भारतीय जहाजों के लिए सस्ता और स्थिर बीमा कवर उपलब्ध कराना है. इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ा दिया गया है और इसके लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट भी मंजूर किया गया है।  58% से बढ़कर 60% हो जाएगा DA केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल DA के तौर पर मूल वेतन के 58% की दर से राशि मिलती है. अब 2% बढ़ोतरी को मंजूरी दिए जाने के बाद अब ये 60% हो जाएगा. कर्मचारियों को उनकी बेसिक सैलरी का 60% DA मिलेगा, जबकि पेंशनर्स को उनके मूल पेंशन का 60% DR मिलेगा।  महंगाई भत्ते या महंगाई राहत का सीधा संबंध महंगाई से होता है. सरकार, साल में दो बार, जनवरी और जुलाई में इसमें बदलाव किया जाता है, यानी बढ़ाया जाता है. इसका कैलकुलेशन AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है, जिसे श्रम ब्यूरो (श्रम मंत्रालय) हर महीने जारी करता है. AICPI-IW के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 से DA में 2% की बढ़ोतरी तय मानी जा रही थी. हालांकि कुछ वर्ग को 3% बढ़ोतरी की भी उम्‍मीद थी। 

बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक बना कानून, गजट में प्रकाशित

रायपुर. छत्तीसगढ़ में जबरन और प्रलोभन से धर्मांतरण पर रोक लगाने 19 मार्च को विधानसभा में पारित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है. विधेयक पर 6 अप्रैल को राज्यपार रमेन डेका के हस्ताक्षर करने के बाद अब छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित कर दिया गया है. बता दें कि छत्तीसगढ़ विधानसभा में 19 मार्च को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 को विस्तृत चर्चा और विचार-विमर्श के बाद पारित किया गया था. विधेयक का उद्देश्य राज्य में धर्मांतरण से संबंधित गतिविधियों को सुव्यवस्थित करना और नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करना है. उपमुख्यमंत्री शर्मा ने विधेयक के संबंध में कहा था कि वर्ष 1968 से लागू प्रावधान वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गए थे. बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में धर्मांतरण से जुड़े विवादों के कारण सामाजिक तनाव और वर्ग संघर्ष की स्थितियां बनीं, जो कई बार प्रशासन और न्यायालय तक पहुंचीं. ऐसे परिदृश्य में एक स्पष्ट, पारदर्शी और प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे समाज में बार-बार उत्पन्न होने वाले विवादों को रोका जा सके और समरसता को बनाए रखा जा सके. विधेयक में धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं. अब धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष आवेदन देना होगा, जिसके बाद निर्धारित समय-सीमा में सूचना सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी. जांच के उपरांत ही प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म चुनने की पूर्ण स्वतंत्रता रहे, लेकिन यह परिवर्तन किसी दबाव, प्रलोभन या भय के कारण न हो, इसकी जांच अनिवार्य होगी. इस कानून में धर्मांतरण कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए पंजीयन अनिवार्य किया गया है. इसके लिए प्राधिकृत अधिकारी को हर वर्ष विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें धर्मांतरण से संबंधित जानकारी का विवरण शामिल होगा. ग्राम सभा को भी इस प्रक्रिया में भागीदारी दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके. विवाह को धर्मांतरण का आधार नहीं माना गया है, और विवाह के बाद भी धर्म परिवर्तन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा. अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए विधेयक में कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं. जिसमें अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सामान्य अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 5 लाख रुपए तक जुर्माना, विशेष वर्ग जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, जनजाति, नाबालिग आदि शामिल है, के अवैध धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक कारावास एवं न्यूनतम 10 लाख रुपए जुर्माना, सामूहिक अवैध धर्मांतरण पर 10 वर्ष से आजीवन कारावास एवं न्यूनतम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान है. इसी तरह लोक सेवक द्वारा इस प्रकार का अपराध किया जाता है तो उसे 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 10 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है, वैसे ही धन के माध्यम से धर्मांतरण किए जाने संबंधित व्यक्ति को 10 से 20 वर्ष कारावास एवं 20 लाख रुपए तक जुर्माना का प्रावधान किया गया है. भय या प्रलोभन द्वारा धर्मांतरण पर 10 से 20 वर्ष कारावास एवं न्यूनतम 30 लाख रुपए जुर्माना का भी प्रावधान है. इन अपराधों की पुनरावृत्ति किए जाने पर संबंधित को आजीवन कारावास और पीड़ितों के लिए प्रतिकार व्यवस्था विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है. इस विधेयक में प्रतिकार व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन दबाव, प्रलोभन या धोखे से किया गया हो, तो उसे स्पष्ट रूप से पीड़ित माना जाएगा. ऐसे मामलों में न्यायालय आरोपी को पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दे सकता है. इसका भी प्रावधान किया गया है. इस अधिनियम के तहत मामलों की जांच उप निरीक्षक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जाएगी. ऐसे मामलों में प्रमाण का भार आरोपी पर होगा. मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायालयों को अधिसूचित किया जाएगा.

सिख सेवा ने जीता न्यूजीलैंड वासियों का दिल: माओरी समुदाय ने जत्थेदार का किया भव्य स्वागत

वेलिंगटन न्यूजीलैंड की धरती पर सिख कौम ने एक बार फिर अपनी सेवा भावना से मानवता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। सुप्रीम सिख सोसाइटी ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा गुरुद्वारा श्री कलगीधर साहिब टाकाजीनी में आयोजित 'फ्री फूड ड्राइव' में श्री अकाल तख्त साहिब के कार्यकारी जत्थेदार और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने अरदास के साथ इस सेवा कार्य का शुभारंभ किया, जिसमें स्थानीय जरूरतमंदों के बीच एक हजार से अधिक भोजन की किट बांटी गईं। ऐतिहासिक 'सच्चा सौदा' की याद भोजन वितरण के अवसर पर जत्थेदार गड़गज्ज ने गुरु नानक देव जी द्वारा शुरू किए गए 'सच्चा सौदा' के सिद्धांत को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब ने 20 रुपयों से जिस लंगर की परंपरा शुरू की थी, उसकी बरकत आज पूरे विश्व में दिखाई दे रही है। न्यूजीलैंड की सिख सोसाइटी ने कोविड-19 के कठिन समय में भी मानवता की सेवा की थी, जिसकी सराहना वहां की सरकार ने भी की थी। यह सेवा बिना किसी भेदभाव के हर जाति और रंग के व्यक्ति के लिए समानता का प्रतीक है। माओरी समुदाय का विशेष सम्मान इस यात्रा के दौरान स्थानीय माओरी समुदाय ने जत्थेदार गड़गज्ज का अपनी सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार गर्मजोशी से स्वागत किया। माओरी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि वे सिख परंपराओं का गहरा सम्मान करते हैं और कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा की गई घटनाओं का उनके समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने सिखों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का संकल्प दोहराया। सम्मान के प्रतीक के रूप में, उन्होंने जत्थेदार को पारंपरिक तरीके से सम्मानित किया, जो दोनों समुदायों के बीच बढ़ते भाईचारे को दर्शाता है। स्थानीय नेताओं और सांसदों की सराहना न्यूजीलैंड के संसद सदस्य ग्रेग फ्लेमिंग ने भी इस आयोजन में भाग लिया और सिखों की उदारता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के मानवता की सेवा करना सिखों की पहचान है। कार्यक्रम में स्थानीय पार्षदों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। जत्थेदार ने न्यूजीलैंड में बसे सभी सिखों और अन्य समुदायों की प्रगति के लिए प्रार्थना की और विभिन्न गुरुद्वारा कमेटियों को एकजुट होकर अकाल तख्त साहिब से जुड़े रहने का संदेश दिया।