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IAS अधिकारी की 20 करोड़ की संपत्ति जब्त, करप्शन केस में बड़ी स्ट्राइक, प्रशासनिक हलचल

रायपुर  छतीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां IAS अधिकारी पर एक बड़ी कार्रवाई हुई है। दरअसल भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे IAS समीर विश्नोई के खिलाफ अहम कार्रवाई करते हुए 20 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली गई है। जानकारी के मुताबिक आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी समीर विश्नोई के खिलाफ कड़ा एक्शन अमल में लाया गया है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा है मामला आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विश्नोई के खिलाफ की गई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई के बाद अफरा-तफरी मच गई है। ACB/EOW की जांच के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, रायपुर ने विश्नोई और पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर अर्जित करीब 20 करोड़ रुपए की बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने के आदेश से हलचल है।राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है और अब बेनामी अचल संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई  हुई है। कोयला लेवी स्कैम से जुड़ा मामला राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने अपराध क्रमांक 23/2024 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 13(1)(बी) एवं 13(2) के अंतर्गत मामला दर्ज किया था। समीर विश्नोई को कोयला लेवी घोटाले का प्रमुख आरोपी माना गया है। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं एसीबी/ईओडब्ल्यू की जांच में करीब 4 करोड़ रुपए मूल्य की 9 अतिरिक्त संपत्तियों का खुलासा हुआ, जिनके अटैचमेंट के लिए विशेष अदालत में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद सख्ती 17 अप्रैल 2026 को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के बाद अब इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लग गई है। पहले भी हुई है कार्रवाई उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी इसी मामले में आरोपी रहीं सौम्या चौरसिया की अवैध संपत्तियों की कुर्की न्यायालय के आदेश से की जा चुकी है। समीर विश्नोई ने पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम पर फर्म बनाकर की अवैध कमाई जांच में सामने आया है कि समीर विश्नोई ने अपनी पत्नी प्रीति विश्नोई के नाम परफर्म बनाकर अवैध कमाई को उसमें निवेश किया और फिर कई संपत्तियां खरीदीं। करप्शन के मामले मे महासमुंद जिले में करीब 22 एकड़ जमीन, नया रायपुर में प्लॉट, जैसे अचल संपत्तियां शामिल हैं। यही नहीं रिश्तेदारों और परिचितों के नाम पर भी निवेश करके प्रापटी कमाई गई है। वहीं आपको बता दें कि इससे पहले भी ED द्वारा कोयला लेवी स्कैम में विश्नोई की 5 अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैच किया जा चुका है। वहीं अब पिछले कल यानीकि 17 अप्रैल को विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद सभी चिन्हित संपत्तियों को अटैच करने का आदेश जारी किया गया है। लिहाजा आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित आईएएस विश्नोई के खिलाफ यह  बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

स्मृति मंधाना ने रोहित शर्मा का रिकॉर्ड तोड़ा, बनीं भारत की शीर्ष T20I रन स्कोरर

 डरबन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना इंटरनेशनल क्रिकेट में बल्ले से शानदार प्रदर्शन करती रही हैं. 17 अप्रैल (शुक्रवार) को साउथ अफ्रीका के खिलाफ डरबन में खेले गए टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में स्मृति ने 13 रन बनाए, लेकिन इस छोटी सी इनिंग्स के दौरान उन्होंने एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. स्मृति भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल (T20I) में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली खिलाड़ी बन गईं।  इस मुकाबले में स्मृति मंधाना ने एक रन लेते ही स्मृति ने रोहित शर्मा को पछाड़ दिया, जिन्होंने टी20 इंटरनेशलन में भारत के लिए 4231 रन बनाए थे. स्मृति के नाम पर 161 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 30.31 की औसत से 4244 रन दर्ज हो चुके हैं. इस दौरान उन्होंने एक शतक और 33 अर्धशतक लगाए हैं।  यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि स्मृति मंधाना ने यह रिकॉर्ड ऐसे खिलाड़ी को पीछे छोड़कर बनाया है, जिसने भारतीय टी20 क्रिकेट में लंबे समय तक दबदबा बनाया था. रोहित ने वर्ल्ड कप 2024 जीतने के बाद टी20 इंटरनेशनल से संन्यास लिया था. रोहित शर्मा ने 159 टी20 इंटरनेशनल मैचों में 32.05 के एवरेज से 4231 रन बनाए, जिसमें 5 शतक और अर्धशतक शामिल रहे।  हालांकि, रिकॉर्ड बनाने के बाद स्मृति मंधाना अपनी पारी को बड़ा नहीं बना सकीं. वह अच्छी लय में दिख रही थीं और शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करने की कोशिश की. स्मृति मंधाना ने शेफाली वर्मा के साथ मिलकर भारत को तेज शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए सिर्फ पांच ओवर में 46 रन जोड़ दिए।  स्मृति मंधाना की पारी का सबसे शानदार पल तब आया, जब उन्होंने क्लो ट्रायोन की गेंद पर बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर जोरदार छक्का लगायाय. उस शॉट में उनकी टाइमिंग और क्लास दोनों नजर आई. हालांकि, शेफाली वर्मा के आउट होने के बाद स्मृति भी ज्यादा देर टिक नहीं सकीं. अयाबोंगा खाका की गेंद पर कवर में कैच देकर वह आउट हो गईं।  मुकाबले में भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका के हाथों 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा. फिर भी, यह दिन पूरी तरह स्मृति मंधाना के नाम रहा. भारतीय महिला क्रिकेट में वह पहले ही सबसे बड़े नामों में शामिल हैं, लेकिन अब उन्होंने टी20 इंटरनेशल में रोहित शर्मा को पीछे छोड़कर बड़ा मुकाम हासिल किया. अब उनकी नजरें सीरीज के दूसरे टी20 मुकाबले पर होगी, जहां वह बड़ी पारी खेलकर टीम को जीत दिलाना चाहेंगी। 

पैडल मारकर भगाएंगे नशा: जालंधर जिला प्रशासन की अनोखी पहल, युवाओं ने ली पंजाब को नशामुक्त बनाने की शपथ

जालंधर  पंजाब सरकार के 'नशे के विरुद्ध युद्ध' अभियान के तहत जालंधर जिला प्रशासन ने एपीजे स्कूल के सहयोग से 'साइक्लोथॉन 4.0' का आयोजन किया। इस मेगा इवेंट का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को नशीले पदार्थों के खिलाफ लामबंद करना और युवाओं को एक स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था। इस आयोजन में लगभग 2000 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, जो नशामुक्त पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ। डीसी ने खुद संभाली कमान डिप्टी कमिश्नर वरजीत वालिया ने एपीजे स्कूल से हरी झंडी दिखाकर साइक्लोथॉन को रवाना किया। खास बात यह रही कि डीसी ने न केवल इस कार्यक्रम की शुरुआत की, बल्कि खुद भी अन्य अधिकारियों के साथ साइकिल चलाकर लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार नशे के खिलाफ जंग लड़ रही है, लेकिन कोई भी लड़ाई बिना जन-सहयोग के नहीं जीती जा सकती। जालंधर के लोगों ने इस कार्यक्रम में भारी संख्या में पहुँचकर यह साबित कर दिया है कि वे इस बुराई को खत्म करने के लिए सरकार के साथ हैं। तीन श्रेणियों में हुआ रोमांचक सफर यह साइक्लोथॉन तीन अलग-अलग श्रेणियों—5 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 21 किलोमीटर—में आयोजित की गई थी। 21 किलोमीटर की मुख्य दौड़ एपीजे स्कूल से शुरू होकर गीता मंदिर, शहीद मेजर कपिल विनायक चौक और शाहपुर कैंपस जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस स्कूल पर समाप्त हुई। रास्ते में प्रतिभागियों का लोगों ने जोरदार स्वागत किया। प्रतिभागियों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, जिससे एकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बहुआयामी रणनीति और समाज सुधार प्रशासन केवल जागरूकता तक ही सीमित नहीं है। डीसी वालिया ने स्पष्ट किया कि जहां एक ओर नशे के कारोबारियों पर सख्त कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर नशे की लत के शिकार मरीजों का मुफ्त इलाज और उनके पुनर्वास के प्रयास भी जारी हैं। पीड़ितों को व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साइकिल चालकों और सहयोगियों को सम्मानित किया गया, जबकि लोक गायक दलविंदर दयालपुरी ने गीतों के माध्यम से युवाओं को नशों से दूर रहने का आह्वान किया।

शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ: झारखंड में TET नियम नहीं हुए रद्द, 21 अप्रैल से फॉर्म

रांची. राज्य सरकार ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली, 2026 को अभी रद नहीं किया है। इस नियमावली की स्वीकृति के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का प्रस्ताव कैबिनेट में रखा गया था, जिसमें भाषा का लेकर मामला उठने के बाद प्रस्ताव को स्थगित रखा गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के एक जिम्मेदार पदाधिकारी के अनुसार, भाषा को लेकर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। इसका समाधान निकलने के बाद प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद कैबिनेट की स्वीकृति की प्रत्याशा में यह नियमावली अधिसूचित कर दी गई थी। इसके बाद जैक ने इस पात्रता परीक्षा का विज्ञापन जारी किया। इसके तहत इस परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 21 अप्रैल से आवेदन भरे जाने हैं। इधर, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने न तो नियमावली को रद किया है और न ही आवेदन प्रक्रिया रोकने का कोई आदेश ही झारखंड एकेडमिक काउंसिल को दिया है। ऐसे में 21 अप्रैल से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। बताते चलें कि कैबिनेट की बैठक में इस नियमावली में क्षेत्रीय भाषा की सूची में भोजपुरी और अंगिका को शामिल नहीं किए जाने पर दो मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय ने आपत्ति की थी। इससे पहले पलामू एवं अन्य जिलों में भोजपुरी, मगही और अंगिका को शामिल नहीं करने का विरोध हो रहा था। अब कैबिनेट की बैठक में इन भाषाओं को शामिल करने की मांग का भी विरोध हो रहा है। स्पष्ट नियमावली गठित कर ली जाए जेटेट परीक्षा : सुदेश आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश महतो ने स्पष्ट नीति और नियमावली गठित कर जेटेट परीक्षा आयोजित करने की मांग की है। उन्हाेंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि राज्य में वर्ष 2016 से यह पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं हुई है, जिससे लाखों बीएड उत्तीर्ण अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जेटेट के अलावा अन्य सभी प्रतियोगिता परीक्षाएं भी समय पर पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने का अनुरोध किया है।

वर्कशॉप के बाहर भीषण आग: मोगा में कटर की चिंगारी से कई वाहन जले

मोगा. पंजाब के मोगा शहर के बुगीपुरा चौक के निकट शनिवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक वर्कशॉप के बाहर कटर से काम करते समय निकली चिंगारी ने भीषण आग का रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही पलों में वर्कशॉप के बाहर खड़ी कई गाड़ियां इसकी चपेट में आ गईं और देखते ही देखते जलकर राख हो गईं। इस हादसे में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार बुगीपुरा चौक स्थित मेडिसिटी के पास सिंह मोटर नाम की वर्कशॉप में शनिवार को रोजाना की तरह काम चल रहा था। इसी दौरान एक कर्मचारी पुरानी गाड़ी की मरम्मत के लिए कटर से कटिंग कर रहा था। अचानक कटर से निकली चिंगारी ने पास में मौजूद ज्वलनशील सामान को पकड़ लिया और आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने लिया विक्राल रूप शुरुआत में आग छोटी थी, लेकिन तेज हवा और आसपास खड़ी गाड़ियों के कारण कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वहां मौजूद लोग घबरा गए। अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते आग ने पास खड़ी कई गाड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वे पूरी तरह जलकर खाक हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घंटों प्रयास के बाद बुझी आग आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि उसे काबू करने में काफी समय लग गया। खबर लिखे जाने तक दमकल कर्मी आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। गनीमत यह रही कि घटना के समय सड़क पर आवाजाही जारी थी, लेकिन समय रहते लोगों ने दूरी बना ली, जिससे कोई बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ। आसपास खड़े अन्य वाहनों को भी लोगों ने हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया, जिससे नुकसान कुछ हद तक कम हो सका। प्रशासन द्वारा घटना के कारणों की जांच की जा रही है, वहीं स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भय का माहौल बना हुआ है।

रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का आयोजन

रायपुर : छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी रायपुर में मिशन कर्मयोगी के तहत संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित 40 विभागों के अधिकारियों की सहभागिता प्रशिक्षण और नवाचार पर हुआ गहन मंथन रायपुर क्षमता विकास आयोग, भारत सरकार के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ प्रशासन अकादमी, रायपुर द्वारा मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत  एक दिवसीय संस्थागत क्षमता निर्माण कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ शासन के लगभग 40 विभागों के नोडल अधिकारी, सचिव स्तर के अधिकारी तथा क्षमता विकास आयोग, नई दिल्ली के पर्यवेक्षक ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला को चार थीम आधारित सत्रों में विभाजित किया गया था। उद्घाटन सत्र में सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग अविनाश चंपावत ने कार्यशाला के औचित्य, उद्देश्य एवं लक्ष्यों पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए क्षमता निर्माण की आवश्यकता और प्रशासनिक दक्षता के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में विभिन्न विषय विशेषज्ञों द्वारा महत्वपूर्ण व्याख्यान दिए गए। आईएएस अधिकारी कार्तिकेय गोयल ने “रोल आधारित क्षमता निर्माण एवं प्रदर्शन” विषय पर अपने विचार साझा किए। प्रशासन अकादमी के महानिदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुब्रत साहू ने “प्रशिक्षण संस्थानों की शक्ति आधारित भूमिका” पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। ट्रिपल आईटी रायपुर के डायरेक्टर प्रोफेसर ओ.पी. व्यास ने “AI टेक्नोलॉजी के उपयोग एवं शिक्षण पद्धति” विषय पर नवीन तकनीकी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। वहीं, आई-गॉट कर्मयोगी की स्टेट नोडल ऑफिसर एवं अवर सचिव श्रीमती अंजू सिंह ने राज्य में कैडर आधारित प्रशिक्षण व्यवस्था की जानकारी दी। द्वितीय सत्र में सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को चार समूहों में विभाजित कर थीम आधारित प्रेजेंटेशन तैयार करने के निर्देश दिए गए। इसके पश्चात तृतीय सत्र में समूहों द्वारा अपने-अपने प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए, जो इस कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण रहा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की नोडल अधिकारी डॉ. अनुराधा दुबे ने अन्य विभागीय अधिकारियों के साथ मिलकर “संस्थागत प्रशिक्षण की भूमिका, उद्देश्य, लक्ष्य, चुनौतियां एवं समाधान” विषय पर एक समग्र प्रस्तुति दी। इस प्रेजेंटेशन में पर्यटन विभाग के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी प्रमील वर्मा, आईएचएम रायपुर की प्रोफेसर श्रीमती  प्रिया शर्मा, सीनियर मैनेजर आईटी विकेश ऊके सहित महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मत्स्य, पशुपालन, खेल एवं युवा कल्याण, वाणिज्य एवं उद्योग तथा परिवहन विभाग के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यशाला का समापन चतुर्थ सत्र में प्रशासन अकादमी के महानिदेशक सुब्रत साहू के प्रेरक समापन उद्बोधन के साथ हुआ। कार्यक्रम के अंत में डायरेक्टर महावर ने सभी प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला प्रशासनिक क्षमता विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है, जिससे विभागों के बीच समन्वय, नवाचार और दक्षता को नई दिशा मिलेगी।

मानसून से पहले एक्शन में पंजाब सरकार: नदियों की डीसिल्टिंग के लिए कैबिनेट का अहम फैसला

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य की प्रमुख नदियों, सहायक नदियों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई यानी डीसिल्टिंग के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य नदियों के तल में जमा सिल्ट और कचरे को हटाना है, ताकि पानी की निकासी सुचारू रूप से हो सके और आस-पास के इलाकों में जलभराव का खतरा टल सके। खेती और बुनियादी ढांचे की सुरक्षा नदियों और नालों की समय पर सफाई न होने के कारण हर साल पंजाब के कई जिलों में भारी बारिश के दौरान पानी खेतों और रिहायशी इलाकों में घुस जाता है। इससे फसलों को भारी नुकसान होता है और सार्वजनिक संपत्ति भी क्षतिग्रस्त होती है। कैबिनेट के इस नए फैसले के बाद, सिंचाई और जल संसाधन विभाग को उन संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ गाद जमा होने के कारण बहाव बाधित हो रहा है। इस परियोजना के पूरा होने से किसानों की भूमि को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक का उपयोग डीसिल्टिंग की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक मशीनों और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया के उपयोग पर जोर दिया है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सफाई का काम मानसून की दस्तक से पहले अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। सरकार का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से की गई डीसिल्टिंग न केवल बाढ़ को रोकेगी, बल्कि नदियों की प्राकृतिक जल संग्रहण क्षमता को भी पुनर्जीवित करेगी। प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम कैबिनेट द्वारा दी गई इस मंजूरी के बाद संबंधित जिलों के प्रशासन को सतर्क कर दिया गया है। स्थानीय निकायों और ड्रेनेज विभाग के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि काम की गुणवत्ता और समय सीमा के साथ कोई समझौता न हो। पंजाब सरकार का यह प्रयास राज्य के बुनियादी ढांचे को आपदाओं के प्रति अधिक लचीला बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

आज रात 8.30 बजे पीएम मोदी का संबोधन, ‘नारी शक्ति बिल’ पर हो सकती है अहम बात

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8.30 बजे देश को संबोधित करेंगे। उनका ये संबोधन ऐसे समय हो रहा है, जब एक दिन पहले ही लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत न हो पाने की वजह से एनडीए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा में पास नहीं करवा पाई है। पिछले 12 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है, जब मोदी सरकार का कोई बिल वोटिंग के बाद संसद में गिर गया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस बिल को लेकर ही देश को संबोधित कर सकते हैं। विपक्ष ने जमकर किया था विरोध बता दें कि एक दिन पहले ही लोकसभा में विपक्ष के विरोध के बाद महिला आरक्षण को लेकर लाया गया बिल गिर गया था। तब विपक्षी पार्टियों ने मिलकर इस बिल का विरोध किया था। इस दौरान संसद में हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली थी। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल के दौरान परिसीमन का खेल खेलना चाहती है। इससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। पीएम मोदी ने की थी ये खास अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर वोटिंग से पहले ट्वीट पर एक संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि जो भ्रम फैलाए गए, उनको दूर करने के लिए तर्कबद्ध जवाब दिया गया है। हर आशंका का समाधान किया गया है। जिन जानकारियों का अभाव था, वो जानकारियां भी हर सदस्य को दी गई हैं। किसी के मन में विरोध का जो कोई भी विषय था, उसका भी समाधान हुआ है। महिला आरक्षण के इस विषय पर देश में चार दशक तक बहुत राजनीति कर ली गई है। अब समय है कि देश की आधी आबादी को उसके अधिकार अवश्य मिलें। सरकार ने किया था ये अनुरोध. शुक्रवार को लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका। इसके चलते संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण मिलने का इंतज़ार अभी जारी है। इस बिल का उद्देश्य था कि साल 2029 से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाए और लोकसभा की सीटों की संख्या भी बढ़ाई जाए। लेकिन इस प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया। वोटिंग के दौरान कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। इनमें से 298 सदस्यों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया। संविधान संशोधन बिल पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, जिसके लिए कम से कम 352 वोट चाहिए थे, जो इस बिल को नहीं मिल सके। बिल पास न होने के बाद सरकार ने ओम बिरला से यह भी अनुरोध किया कि वे दो अन्य प्रस्तावित कानूनों पर फिलहाल आगे कार्रवाई न करें। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम पर प्रधानमंत्री ने आगे कहा था कि आजादी के इतने दशकों बाद भी भारत की महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व रहे, ये ठीक नहीं। अब कुछ ही देर लोकसभा में मतदान होने वाला है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं, अपील करता हूं। कृपया करके सोच-विचार करके पूरी संवेदनशीलता से निर्णय लें, महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करें। मैं देश की नारी शक्ति की तरफ से भी सभी सदस्यों से प्रार्थना करूंगा। कुछ भी ऐसा ना करें, जिनसे नारीशक्ति की भावनाएं आहत हों। देश की करोड़ों महिलाओं की दृष्टि हम सभी पर है, हमारी नीयत पर है, हमारे निर्णय पर है। कृपया करके नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का साथ दें।  

केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के मुआवजे पर छतरपुर में विरोध, प्रशासन के आश्वासन से खत्म हुआ आंदोलन

छतरपुर  केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित होने वाले 14 गांवों के ग्रामीणों का आंदोलन फिलहाल थम गया है। मुआवजे और पुनर्वास में अनियमितताओं के आरोपों के बीच छतरपुर जिला प्रशासन ने झुकते हुए दोबारा सर्वे कराने का फैसला लिया है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल द्वारा गठित विशेष संयुक्त टीमों ने  ही जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन और विसंगतियों की जांच शुरू कर दी है। 7 दिन की डेडलाइन प्रशासन ने इस री-सर्वे को कैंपेन मोड में चलाने के निर्देश दिए हैं। संयुक्त टीमों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और नए प्रस्ताव पेश करें। इस कदम का उद्देश्य उन पात्र लाभार्थियों को शामिल करना है जो पहले छूट गए थे और उन अपात्रों को बाहर करना है जिन्होंने गलत तरीके से लाभ लेने की कोशिश की है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है: किसी भी पात्र व्यक्ति का हक नहीं छिनना चाहिए और किसी भी अपात्र को सूची में जगह नहीं मिलनी चाहिए। पारदर्शिता ही हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता के लिए दूसरे क्षेत्र के अधिकारियों की ड्यूटी मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने एक अनूठी पहल की है। री-सर्वे की जिम्मेदारी उन स्थानीय कर्मचारियों को नहीं दी गई है जिन पर पहले पक्षपात के आरोप लगे थे। इसके बजाय, बिजावर सब-डिवीजन और अन्य तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों को मैदान में उतारा गया है। ये टीमें स्वतंत्र रूप से वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल और स्कूल रिकॉर्ड के जरिए पात्रता की जांच करेंगी। प्रभावितों के लिए क्या है खास? कुल प्रभावित गांव 14 गांव सर्वे की समय सीमा 7 कार्य दिवस (रिपोर्ट सबमिशन) जांच का आधार वोटर लिस्ट, बीपीएल कार्ड, बिजली बिल, स्कूल रिकॉर्ड टीम का गठन एसडीएम, तहसीलदार और पटवारियों की संयुक्त टीम अतिरिक्त लाभ भूमिहीन परिवारों के लिए सरकारी कल्याणकारी योजनाएं

तुंगल बना इको-पर्यटन हब: वन मंत्री की पहल से बदली तस्वीर

सुकमा/रायपुर. सुकमा जिले में वन विभाग की एक सराहनीय पहल ने विकास और पुनर्वास की नई मिसाल पेश की है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में तैयार किया गया तुंगल इको-पर्यटन केंद्र आज आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन गया है। सुकमा नगर से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान पहले उपेक्षित और जर्जर था, लेकिन वन विभाग के प्रयासों से इसे एक सुंदर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया। यहाँ बनाए गए आकर्षक टापू और प्राकृतिक वातावरण अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ पड़ोसी राज्य ओडिशा से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इस केंद्र की सबसे खास पहल है “तुंगल नेचर कैफे”, जिसे ‘आत्मसमर्पण पुनर्वास महिला स्वयं सहायता समूह’ की 10 महिलाएँ संचालित कर रही हैं। इनमें 5 महिलाएँ वे हैं जिन्होंने नक्सलवाद का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है, जबकि 5 महिलाएँ नक्सल हिंसा से प्रभावित रही हैं। इन सभी को जगदलपुर और सुकमा के संस्थानों में विशेष प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया गया है। आज ये महिलाएँ आत्मविश्वास के साथ पर्यटकों का स्वागत कर रही हैं और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। जो महिलाएँ कभी संघर्ष और भय के माहौल में थीं, वे अब स्वावलंबन और आत्मसम्मान की मिसाल बन गई हैं। इस पर्यटन केंद्र की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 दिसंबर 2025 को शुरू होने के बाद केवल तीन महीनों में, 30 मार्च 2026 तक यहाँ 8 हजार 889 पर्यटक आए। इस दौरान केंद्र ने लगभग 2.92 लाख रूपए की आय भी अर्जित की। पर्यटक यहाँ स्वादिष्ट स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेने के साथ-साथ तुंगल डैम में कयाकिंग, पैडल बोटिंग और बाँस राफ्टिंग जैसी रोमांचक गतिविधियों का भी अनुभव कर रहे हैं। यह पहल साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। तुंगल इको-पर्यटन केंद्र न केवल पर्यटन का केंद्र है, बल्कि यह उन महिलाओं के साहस, आत्मविश्वास और वन विभाग की दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। यह कहानी हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति संरक्षण के साथ-साथ मानव विकास को जोड़कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। बस्तर की बदलती तस्वीर में यह केंद्र एक उज्ज्वल उदाहरण बनकर उभरा है।