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अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा: कैबिनेट मंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग, किसानों की बर्बादी पर जताया रोष

लुधियाना.  लुधियाना क्षेत्र में अवैध माइनिंग माफिया की सक्रियता ने स्थानीय किसानों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर डॉक्टर तेजपाल गिल ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध तरीके से की जा रही खुदाई के कारण न केवल उपजाऊ भूमि का क्षरण हो रहा है, बल्कि किसानों की तैयार फसलों को भी भारी क्षति पहुँच रही है। माफिया द्वारा की जाने वाली अनियंत्रित माइनिंग ने कृषि प्रधान क्षेत्र के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा दिए हैं। सरकारी संपत्ति को पहुँच रहा भारी नुकसान अवैध खनन का प्रभाव केवल फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी बुनियादी ढांचे को भी नुकसान हो रहा है। डॉक्टर गिल के अनुसार, भारी वाहनों की आवाजाही और अनियंत्रित खुदाई के कारण आसपास की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति जर्जर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया निजी लाभ के लिए सार्वजनिक संसाधनों का दोहन कर रहा है, जिसकी भरपाई अंततः आम जनता को ही करनी पड़ती है। यह स्थिति क्षेत्र के विकास के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। कैबिनेट मंत्री से सख्त हस्तक्षेप की गुहार समस्या की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर तेजपाल गिल ने कैबिनेट मंत्री से मुलाकात की और उन्हें विस्तार से जमीनी हकीकत से अवगत कराया। उन्होंने एक औपचारिक मांग पत्र सौंपते हुए आग्रह किया कि इस मामले में तुरंत उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए। उन्होंने मांग की कि जो लोग भी अवैध खनन में लिप्त हैं, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी मशीनों को जब्त किया जाए। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार अवैध माइनिंग को लेकर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगी। पर्यावरण और जनहित की रक्षा का संकल्प क्षेत्र में माइनिंग माफिया के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर भी लामबंदी शुरू हो गई है। डॉक्टर गिल ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा और किसानों के हितों को बचाना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन तेज किया जाएगा। यह मांग की गई है कि माइनिंग साइटों की नियमित निगरानी के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

कृतिका कामरा का बयान: ‘मटका किंग’ में 60-70 के दशक की मुंबई का अनुभव करना था अनूठा

मुंबई ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इन दिनों अलग-अलग दौर की कहानियों को दिखाने का चलन तेजी से बढ़ा है। खासकर ऐसी कहानी को, जो पुराने समय की जिंदगी और माहौल को सामने लाए। इस कड़ी में 'मटका किंग' सीरीज काफी चर्चा में है, जिसमें 1960 और 70 के दशक की मुंबई की कहानी देखने को मिलेगी। शो को लेकर एक्ट्रेस कृतिका कामरा ने आईएएनएस से बात करते हुए अपना अनुभव साझा किए। कृतिका कामरा इस शो में 'गुलरुख' नाम की पारसी महिला का किरदार निभा रही हैं। इसको लेकर उन्होंने बताया कि इस शो में काम करना उनके लिए एक अलग दौर को महसूस करने जैसा था। आईएएनएस संग बातचीत में कृतिका कामरा ने कहा, ''जब कोई कलाकार किसी ऐसे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनता है, जो पुराने समय पर आधारित होता है, तो सेट पर कदम रखते ही वह खुद को उस दौर में महसूस करने लगता है। जैसे ही मैं सेट पर जाती थी और उस समय के कपड़े पहनती थी, तो ऐसा लगता था, जैसे मैं सच में 60-70 के दशक की दुनिया में पहुंच गई हूं। उस दौर की भाषा, रहन-सहन और लोगों का व्यवहार आज से बिल्कुल अलग था, जिसे समझना और अपनाना मेरे लिए एक नया अनुभव रहा।'' उन्होंने कहा, ''उस समय की जिंदगी आज के मुकाबले काफी धीमी थी, क्योंकि तकनीक इतनी विकसित नहीं थी। हर काम में समय लगता था और लोगों के पास धैर्य ज्यादा होता था। शो में इन सभी चीजों को बारीकी से दिखाने की कोशिश की गई है, जिससे दर्शकों को उस समय का असली एहसास मिल सके।'' बातचीत के दौरान कृतिका ने एक दिलचस्प बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि शो में एक समय ऐसा आता है, जब मटका के नंबर फोन के जरिए आने लगते हैं। लेकिन उस दौर के फोन आज जैसे नहीं थे। उस समय कॉल जोड़ने के लिए ऑपरेटर होते थे, जो मैन्युअली लाइनों को कनेक्ट करते थे। उन्होंने कहा, ''आज की नई पीढ़ी शायद इन चीजों से पूरी तरह अनजान है, क्योंकि अब तकनीक काफी आगे बढ़ चुकी है।'' एक्ट्रेस के कहा, ''उस दौर की कई बातें मेरे लिए काफी रोचक थीं। भले ही समय बदल गया हो, लेकिन लोगों की भावनाएं और उम्मीदें आज भी वैसी ही हैं। इंसान हमेशा उम्मीद से जुड़ा रहता है, और यही भावना इस शो में भी देखने को मिलती है। इसी वजह से मैं अपने किरदार और कहानी से आसानी से जुड़ पाईं।'' 'मटका किंग' की कहानी एक ऐसे शख्स के इर्द-गिर्द घूमती है जो जुए की दुनिया में तेजी से आगे बढ़ता है और उस समय की मुंबई में अपनी पहचान बनाता है। इस कहानी में उस दौर की कपड़ा मिलों का भी अहम योगदान दिखाया गया है, जो उस समय शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा थीं। यह शो प्राइम वीडियो पर 17 अप्रैल को रिलीज होने जा रहा है।

सशक्त होंगी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता: कैबिनेट मंत्री ने सुनीं समस्याएं, प्राथमिकता के आधार पर समाधान का आश्वासन

चंडीगढ़.  पंजाब सरकार समाज के हर वर्ग के उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और हेल्परों का कल्याण विशेष प्राथमिकता है। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार इन कार्यकर्ताओं की समस्याओं को हल करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। सरकार का उद्देश्य इन महिला कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण और उनके हक प्रदान करना है। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक चंडीगढ़ स्थित पंजाब भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान डॉ. बलजीत कौर ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आंगनवाड़ी प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया। इस बैठक में सामाजिक सुरक्षा विभाग की निदेशक शेना अग्रवाल और उप-निदेशक सुमनदीप कौर भी मौजूद रहीं। मंत्री ने जोर देकर कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता विभाग की रीढ़ हैं, जो बच्चों और महिलाओं तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने में सेतु का काम करती हैं। प्राथमिकता के आधार पर होगा समस्याओं का निपटारा बैठक में उठाई गई विभिन्न मांगों को सुनने के बाद कैबिनेट मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो मुद्दे प्रशासनिक स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि जो मांगें सीधे सरकार के नीतिगत फैसलों से जुड़ी हैं, उन्हें हाल ही में गठित उप-समिति के समक्ष रखा जाएगा। इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए प्राथमिकता के आधार पर समाधान निकाला जाएगा ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे। समाज की नींव मजबूत करने में अहम योगदान डॉ. बलजीत कौर ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को बेहतर बनाने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि गाँवों और शहरों में घर-घर जाकर दी जा रही सेवा समाज की मजबूत नींव तैयार करने में सहायक है। पंजाब सरकार कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को बरकरार रखने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए आवश्यकतानुसार उचित और बड़े फैसले लेने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है।

‘एक जगह बैठना इनके बस की बात नहीं’ — हरभजन सिंह ने आशीष नेहरा पर खोला राज

नई दिल्ली हरभजन सिंह ने गुजरात टाइटंस (जीटी) के हेड कोच आशीष नेहरा के कोचिंग स्टाइल की तुलना एक फुटबॉल कोच से की है। उन्होंने नेहरा की लगातार एनर्जी और खिलाड़ियों के साथ बातचीत करने के तरीके का खास तौर पर जिक्र किया। जियो स्टार के एक्सपर्ट हरभजन ने जियो हॉटस्टार के 'चैंपियंस वाली कमेंट्री' पर कहा, "आशीष नेहरा ही एकमात्र ऐसे इंसान हैं जो कहीं भी, कभी भी माहौल को आरामदायक बना देते हैं। वह जहां भी जाते हैं, अपने आस-पास मौजूद हर किसी को सहज महसूस कराते हैं। सिर्फ खुद को ही नहीं, बल्कि हर उस इंसान को जो उनके साथ काम करता है। वह उन बेहतरीन इंसानों में से एक हैं जिनसे आप कभी मिलेंगे। अगर आप उनके साथ हैं, तो आपका समय अच्छा बीतेगा, इसकी पूरी गारंटी है। 'आशीष नेहरा एक जगह टिककर नहीं बैठते' हरभजन ने आगे कहा, ''गुजरात टाइटंस में उनका सबसे बड़ा योगदान सभी को एकजुट रखना है। यही हैं आशीष नेहरा। वह एक फुटबॉल कोच की तरह हैं। वह कभी एक जगह टिककर नहीं बैठते। पूरे मैच के दौरान वह किसी न किसी खिलाड़ी को ढूंढ़ लेते हैं और उससे बात करते रहते हैं। नेहरा जी को खेल की बहुत अच्छी समझ है। गुजरात टाइटंस के साथ उन्होंने जो काम किया है, वह तारीफ के काबिल है।" जियो स्टार के एक्सपर्ट सुरेश रैना ने आईपीएल में कार्तिक त्यागी और अशोक शर्मा की सफलता के पीछे की कड़ी मेहनत और कुर्बानियों पर बात करते हुए कहा,"कार्तिक त्यागी ने अपने खेल पर बहुत कड़ी मेहनत की है। पिछले साल उन्हें चोट लगी थी, लेकिन उन्होंने जोरदार वापसी की और यूपी टी20 लीग के दूसरे सीजन में बहुत अच्छी गेंदबाजी की। उनकी फिटनेस और काम करने का तरीका बहुत बढ़िया है और अब उनकी वह मेहनत रंग ला रही है।'' 'दोनों युवा भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा संकेत' रैना ने कहा, ''मिनी-ऑक्शन में केकेआर ने त्यागी को चुना और वह टीम के मुख्य गेंदबाज बन गए हैं। फिर हैं अशोक शर्मा, जो इस आईपीएल सीजन में गेंदबाजी के क्षेत्र में एक नई खोज हैं। उनके बड़े भाई ने अपने क्रिकेट खेलने के सपने को छोड़ दिया, क्योंकि परिवार के पास दोनों को सहारा देने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे। बड़े भाई ने इसलिए कुर्बानी दी ताकि अशोक अपने सपने को पूरा कर सकें। अब इसके नतीजे सबके सामने हैं। अशोक शर्मा टी20 क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर गुजरात टाइटंस के लिए अपना हुनर दिखा रहे हैं। ये दोनों युवा तेज गेंदबाज भारतीय क्रिकेट के लिए एक बहुत अच्छा संकेत हैं। भारत के तेज गेंदबाज़ी आक्रमण का भविष्य बहुत उज्ज्वल नजर आ रहा है।" उमेश यादव ने बताया कि कार्तिक त्यागी ने चोट की समस्याओं से निपटने के लिए अपने खेल में किस तरह के बदलाव किए। '145-150 की रफ्तार से गेंदबाजी आसान नहीं' उमेश ने कहा, "चोटें हर तेज गेंदबाज के सफर का एक हिस्सा होती हैं। 145-150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करना शरीर के लिए आसान नहीं होता। कार्तिक त्यागी ने चोट से जुड़ी अपनी समस्याओं को संभालने के लिए अपने खेल में कई बदलाव किए हैं। उन्होंने अपने गेंदबाजी के एक्शन को सुधारा है और अपने रनअप पर काम किया है। मुझे याद है जब मैं उनसे पहली बार 2021 में मिला था। उनकी स्ट्राइड (कदमों की लंबाई) बहुत ज्यादा थी। लेकिन बाद में उन्होंने उसे छोटा कर लिया। उन्हें पिंडली में बार-बार चोट की समस्या होती थी और उन्हें काफी दर्द सहना पड़ता था। इस वजह से, वह कई मैच नहीं खेल पाए और अक्सर उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें देखिए। वह केकेआर के गेंदबाजी आक्रमण की अगुवाई कर रहे हैं। उन सभी बदलावों से कार्तिक त्यागी को साफ तौर पर बहुत फायदा हुआ है। किसी युवा भारतीय तेज गेंदबाज को इस तरह से वापसी करते देखना बहुत अच्छा लगता है।"

यूथ कांग्रेस नेताओं पर FIR, 25 नामजद; केन-बेतवा लिंक परियोजना आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचे थे छतरपुर में

छतरपुर   केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन के दौरान हुए विवाद के मामले में बमीठा थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार सहित करीब 50 अन्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने यह कदम शासकीय कर्मचारियों के साथ अभद्रता और सरकारी काम में बाधा डालने के बाद उठाया है।  वन कर्मचारियों व यूथ कांग्रेस नेताओं के बीच बहस बिजावर क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत ढोडन बांध पर उचित मुआवजा को लेकर पिछले 10 दिन से आंदोलन पर बैठे आदिवासी, किसानों, ग्रामीणों से मिलने पहुंचे यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार को वन विभाग के अधिकारियों ने भुसोर गेट के अंदर नही जाने दिया. आरोप है कि इसके बाद यूथ कांग्रेस नेताओं ने भुसोर गेट तोड़कर अधिकारिओ से अभद्रता की. यहां बाहरी लोगों के प्रवेश पर आने-जाने पर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने प्रतिबंध लगाया था।  पुलिस ने वीडियो को बनाया साक्ष्य प्रदर्शन के दौरान हुए घटनाक्रम का वीडियो यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अभिषेक परमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड किया. इसके बाद पुलिस ने रेंजर की शिकायत पर कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि वीडियो साक्ष्य में प्रदर्शनकारियों द्वारा शासकीय संपत्ति के साथ छेड़छाड़ और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार स्पष्ट दिख रहा है. वहीं, फिलहाल धरना 10 दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है. अगर प्रशासन ने आन्दोलनकारियो की मांगें नही मानी तो फिर आंदोलन होनी की चेतावनी है।  25 लोगों की शिनाख्त, जल्द होगी गिरफ्तारी टीआई बमीठा बाल्मीक चौबे ने बताया "राजेन्द्र कुमार सोलंकी वन परिक्षेत्र अधिकारी द्वारा थाना में आवेदन दिया गया. अभिषेक परमार एवं उसके 50 से अधिक लोगों के खिलाफ भुसोर गेट पर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियो के कार्य मे बाधा डालना एवं शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने पर के मामले में धारा 223,132,191(2),190 बीएनएस 3(1) लोक सम्पत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है. 20 से 25 लोगों की पहचान कर ली है. सभी की गिरफ्तारी  होगी।  इस मामले में यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया का कहना है "गरीब,आदिवासियों और किसानों के साथ हमेशा से यूथ कांग्रेस खड़ी है. उनकी हम लड़ाई लड़ रहे हैं. प्रशासन ने हमारे साथियों को रोकने का काम किया है. हम गरीबों की आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। 

वर्ल्ड लिवर डे 2026: पंजाब ने ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत लिवर रोग की स्क्रीनिंग को किया और व्यापक

चंडीगढ़ 19 अप्रैल को दुनिया भर में ‘सॉलिड हैबिट्स, स्ट्रॉन्ग लिवर’ थीम के साथ मनाए जाने वाले वर्ल्ड लिवर डे के मौके पर, ‘द लैंसेट’ की एक चेतावनी में लिवर की बीमारियों में दुनिया भर में तेज़ी से बढ़ोतरी पर रोशनी डाली गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2050 तक ‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोइक लिवर डिज़ीज़’ (MASLD) के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस खतरनाक स्थिति के बीच, पंजाब इस चुनौती का डटकर सामना करने के लिए आगे बढ़ रहा है। राज्य ने बढ़ी हुई स्क्रीनिंग और कैशलेस ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के ज़रिए अपनी हेल्थ सेवाओं को मज़बूत किया है, जिससे मॉडर्न लाइफस्टाइल से जुड़ी इस तेज़ी से बढ़ती ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में यह लीडिंग रोल निभा रहा है। लिवर की बीमारियाँ दुनिया भर में एक ‘साइलेंट एपिडेमिक’ के तौर पर उभर रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि लगभग तीन में से एक एडल्ट इससे प्रभावित है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण अक्सर तभी दिखते हैं जब गंभीर नुकसान पहले ही हो चुका होता है। ‘द लैंसेट’ की एक स्टडी में चेतावनी दी गई है कि 2023 में मरीज़ों की संख्या 1.3 बिलियन से बढ़कर 2050 तक 1.8 बिलियन हो सकती है, जो 42 परसेंट की बढ़ोतरी है। भारत में भी ऐसा ही ट्रेंड देखा जा रहा है, खासकर शहरी आबादी और हाई-रिस्क ग्रुप्स में। पंजाब के डॉक्टरों के मुताबिक, ‘हेपेटाइटिस-C’ इंफेक्शन, शराब पीने और खाने की बदलती आदतों की वजह से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कहा, “भारत में शराब लिवर की गंभीर बीमारियों का एक बड़ा कारण है और वायरल हेपेटाइटिस के साथ मिलकर यह हालत और खराब कर देती है। फैटी लिवर की बीमारी अब शराब और हेपेटाइटिस-C के साथ एक बड़ा कारण बनकर उभर रही है। लंबे समय तक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना, फ्राइड खाना और ट्रांस-फैट खाने से यह समस्या और बढ़ रही है।” डॉक्टर यह भी चिंताजनक ट्रेंड देख रहे हैं कि कम उम्र के मरीज़ों में लिवर की बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसका मुख्य कारण शराब का बढ़ता सेवन और हेपेटाइटिस-C का फैलना है, जो राज्य में बदलती लाइफस्टाइल और व्यवहार के ट्रेंड को दिखाता है। हेल्थ सर्विसेज़ के बारे में उन्होंने कहा, “पंजाब ने अपने रेफरल सिस्टम को मज़बूत किया है, जिससे लिवर की बीमारियों का पहले पता चल रहा है। गांवों में स्क्रीनिंग और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ तक पहुंच भी बेहतर हुई है, हालांकि फैटी लिवर के ‘साइलेंट’ नेचर की वजह से देर से पता चलने की समस्या अभी भी है।” फाइनेंशियल और पहुंच से जुड़ी रुकावटों को दूर करने के लिए, राज्य ने चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम के तहत कवरेज बढ़ाया है, जो सरकारी और लिस्टेड प्राइवेट अस्पतालों में हर परिवार को हर साल 10 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज देती है। डॉ. सिंह बताते हैं कि एक बार मरीज़ के भर्ती होने के बाद, ज़्यादातर टेस्ट और दवाएं इस स्कीम के तहत कवर हो जाती हैं, जिससे मरीज़ का जेब से होने वाला खर्च कम हो जाता है। इस स्कीम में टेस्टिंग, हॉस्पिटल में भर्ती होना और स्पेशलिस्ट सर्विसेज़ शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चीफ मिनिस्टर हेल्थ स्कीम ने कई मरीज़ों को बेहतर इलाज दिलाने में मदद की है और यह कई जानें बचाने में अहम साबित हुई है। पंजाब के हेल्थ मिनिस्टर डॉ. बलबीर सिंह ने यह भी कहा, “यह स्कीम जेब से होने वाले खर्च को कम करती है, साथ ही डायग्नोसिस और इलाज में देरी को भी रोकती है।” पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के तहत स्क्रीनिंग बढ़ाने से उम्मीद है कि जल्दी पता लगाने में सुधार होगा और बीमारी का बढ़ना धीमा हो जाएगा। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लिवर की बीमारी के शुरुआती स्टेज को अक्सर लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे अच्छी डाइट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी और शराब कम पीने से ठीक किया जा सकता है।

बिहार सरकार का बड़ा फैसला: महिला रोजगार योजना में अब ₹20,000 की दूसरी किस्त मिलेगी

गयाजी. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के अंतर्गत रोजगार शुरू करने वाली पात्र महिलाओं को जल्द ही द्वितीय किस्त का भुगतान किया जाएगा। बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति ने सभी जिला परियोजना इकाइयों को इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। जिला परियोजना प्रबंधक आचार्य मम्मट ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को पात्र लाभुकों का चयन कर विवरण शीघ्र भेजने का निर्देश दिया है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को स्वरोजगार के लिए आर्थिक सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत प्रथम किस्त के रूप में 10,000 रुपया पहले ही दिए जा चुके हैं। अब निर्धारित शर्तें पूरी करने वाली महिलाओं को द्वितीय किस्त के रूप में 20,000 रुपया प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए लाभुकों को राशि का सही उपयोग, एमआईएस में प्रविष्टि, वित्तीय साक्षरता प्रशिक्षण, समूह बैठकों में भागीदारी, नियमित बचत और व्यवसायिक योजना तैयार करना अनिवार्य है। द्वितीय किस्त का भुगतान तीन चरणों में किया जाएगा। ग्राम संगठन द्वारा सत्यापन के बाद प्रखंड स्तर पर मूल्यांकन होगा और अंततः डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभुकों के खाते में राशि भेजी जाएगी। जिले में अब तक 6 लाख 89 हजार से अधिक महिलाओं को 10,000 रुपया की प्रारंभिक राशि दी जा चुकी है। जांच के बाद पात्र लाभुकों को चरणबद्ध तरीके से पांच चरणों में 2 लाख 10 तक की सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें लाभुकों का अंशदान भी शामिल होगा। डीपीएम मम्मट ने बताया कि योजना के तहत महिलाएं फल-सब्जी, किराना, सिलाई, नाश्ता दुकान, पशुपालन व कृषि जैसे विभिन्न रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

मुश्किल वक्त में मिला साथ: मुख्यमंत्री सेहत योजना से पटियाला की महिला ने जीती कैंसर की जंग

चंडीगढ़/पटियाला. पटियाला के रहने वाले गुरपिंदर जीत सिंह की जिंदगी पांच महीने पहले अचानक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई, जहां हर रास्ता मुश्किल नजर आने लगा था। उनकी 65 वर्षीय माता बलजीत कौर ने गंभीर बीमारी के कारण धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया था। मजबूर और बेबस बेटे के लिए यह सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि रोज टूटती जा रही उम्मीदों का दर्द था। गुरपिंदर जीत के अनुसार पहले निजी डॉक्टरों के पास दौड़-भाग की गई, फिर मां को राजिंद्रा अस्पताल, पटियाला रेफर कर दिया गया। दवाइयां चलीं, टेस्ट हुए, लेकिन हालत सुधरने की बजाय और गंभीर हो गई। जब रिपोर्ट आई तो जैसे आसमान ही ढह पड़ा- मां को बच्चेदानी का कैंसर था। गुरपिंदर के लिए यह बहुत मुश्किल घड़ी थी, यह उस मां की जिंदगी का सवाल था जिसने उसे जन्म दिया और पाला-पोसा। आज वह जिंदगी और मौत से जूझ रही थी। बिना देरी किए वह मां को संगरूर के टाटा कैंसर अस्पताल ले गया। इलाज शुरू हुआ, लेकिन पहले ही झटके में 60 हजार रुपये से अधिक खर्च हो गए। एक ड्राइवर की सीमित आय के सामने यह राशि पहाड़ जैसी थी। गुरपिंदर के मन में एक ही सवाल था- “मां को कैसे बचाऊं?” कर्ज लेने की नौबत भी आ गई थी। तभी, जैसे अंधेरे में एक रोशनी की किरण उसके सामने आई। अस्पताल में उसे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के बारे में पता लगा। बिना और देरी किए गुरपिंदर ने वहीं रजिस्ट्रेशन करवा लिया। कुछ समय बाद ही उसके मोबाइल पर मैसेज आ गया और स्मार्ट कार्ड बन गया। इसके बाद जो हुआ, वह उसके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। लाखों रुपये का इलाज- जिसमें महंगे टेस्ट, बार-बार कीमोथेरेपी, दवाइयां, ऑपरेशन, आईसीयू, वेंटिलेटर और अस्पताल में रहने-खाने तक का खर्च शामिल था- सारा खर्च सरकार ने उठाया। गुरपिंदर की आंखें भर आती हैं जब वह कहता है, “मां तो मां होती है… उसे हर हाल में बचाना था। पैसे नहीं थे, लेकिन रब ने इस योजना के रूप में रास्ता दिखा दिया।” डॉक्टरों के लिए भी यह केस बहुत चुनौतीपूर्ण था। कैंसर बच्चेदानी से आगे बढ़कर लीवर और फेफड़ों तक फैल गया था। पहले तीन बार कीमोथेरेपी दी गई, लेकिन शरीर कमजोर होने के कारण साइड इफेक्ट सामने आए। फिर धीरे-धीरे डोज कम करके नौ बार और कीमोथेरेपी दी गई। इलाज के बाद ट्यूमर एक जगह सिमट गया और डॉक्टरों ने लगभग आठ घंटे लंबा ऑपरेशन करके उसे निकाल दिया। 35 से 40 टांकों के साथ मां ने दर्द सहते हुए भी जिंदगी की डोर थामे रखी। मां ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिनों के लिए आईसीयू में और वेंटिलेटर पर रहीं, फिर उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। गुरपिंदर हर वक्त मां के पास बैठा रहता—कभी दवाई देता, कभी सिर सहलाता। आठ दिन अस्पताल में बिताने के बाद जब मां की हालत सुधरने लगी, तो जैसे उनकी दुनिया वापस आ गई। 24 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह सफर अभी भी जारी है। अगले इलाज और जांच के लिए वे मुल्लांपुर स्थित अस्पताल में फॉलोअप के लिए जाएंगे। कुछ दवाइयां जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं, उनका खर्च गुरपिंदर ने खुद उठाया, लेकिन बाकी सारा इलाज योजना के तहत मुफ्त हुआ। अस्पताल में गायनेकोलॉजी की डॉ. शिवाली ने सर्जरी के डॉक्टरों के साथ मिलकर ऑपरेशन किया। टाटा मेमोरियल के डॉक्टरों के अनुसार, इस सर्जरी पर दवाइयों को मिलाकर कम से कम 8 से 10 लाख रुपये का खर्च हुआ है। दो बच्चों के पिता और एक साधारण ड्राइवर गुरपिंदर के लिए यह राहत शब्दों से परे है। वह कहता है, “अब सुकून है कि मां बिना इलाज के नहीं मरेगी… सरकार ने हमें उम्मीद दी है।” यह सिर्फ इलाज की कहानी नहीं, बल्कि एक बेटे के संघर्ष, मां के लिए प्यार और एक ऐसी योजना की कहानी है, जिसने मुश्किल वक्त में सहारा बनकर एक परिवार को टूटने से बचा लिया। यह सफर इस परिवार के लिए गंभीर बीमारी की कठोर हकीकत को बयान करता है, साथ ही यह भी दर्शाता है कि सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और प्रभावशाली सरकारी मदद कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह यकीनी बनाता है कि आर्थिक तंगी किसी भी व्यक्ति के जीवन बचाने वाले इलाज के रास्ते में रुकावट न बने।

RCB पर संकट! टिम डेविड का विकेट गिरा, अक्षर पटेल ने दिलाई बड़ी सफलता

बंगलूरू आज गत चैंपियन आरसीबी का सामना दिल्ली कैपिटल्स से हो रहा है। आरसीबी का प्रदर्शन इस सीजन शानदार रहा है। टीम फिलहाल अंक तालिका में दूसरे स्थान पर है और इस मैच में अगर वह जीत हासिल करने में सफल रही तो शीर्ष पर पहुंच जाएगी। वहीं, पिछले दो मैच से हार रही दिल्ली की नजरें वापसी पर हैं। आरसीबी को पांचवां झटका आरसीबी को पांचवां झटका लगा है। अक्षर पटेल ने टिम डेविड को पवेलियन की राह दिखाई जो 17 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 26 रन बनाकर आउट हुए। पाटीदार पवेलियन लौटे मुकेश कुमार ने रजत पाटीदार को आउट कर आरसीबी को चौथा झटका दिया है। रजत चार गेंदों पर एक छक्के की मदद से आठ रन बनाकर आउट हुए।  सॉल्ट पवेलियन लौटे कुलदीप यादव ने फिल सॉल्ट को आउट कर पवेलियन की राह दिखाई है। सॉल्ट 38 गेंदों पर चार चौकों और तीन छक्कों की मदद से 63 रन बनाकर आउट हुए। आरसीबी को दूसरा झटका आरसीबी को देवदत्त पडिक्कल के रूप में दूसरा झटका लगा है। अक्षर पटेल ने पडिक्कल को अपना शिकार बनाया जो 13 गेंदों पर एक चौका और एक छक्के की मदद से 18 रन बनाकर आउट हुए। सॉल्ट का अर्धशतक फिल सॉल्ट ने दिल्ली के खिलाफ 30 गेंदों पर अर्धशतक जड़ दिया है। सॉल्ट ने शानदार बल्लेबाजी की है। उन्होंने पहले विराट कोहली के साथ अर्धशतकीय साजझेदारी की और अब देवदत्त पडिक्कल के साथ मिलकर साझेदारी कर रहे हैं। आरसीबी को पहला झटका आरसीबी को विराट कोहली के रूप में पहला झटका लगा है। लुंगी एनगिडी ने कोहली को आउट कर दिल्ली को राहत दिलाई। कोहली 13 गेंदों पर तीन चौकों की मदद से 19 रन बनाकर आउट हुए। कोहली और सॉल्ट के बीच पहले विकेट के लिए 52 रनों की साझेदारी हुई। 

प्रदेश में एक और प्रशासनिक सर्जरी: 20 CMO समेत 37 अधिकारियों के तबादले, लिस्ट जारी

रायपुर  छत्तीसगढ़ में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। बड़े स्तर पर अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए कुल 37 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले कर दिए हैं और साथ ही आदेश भी जारी किया गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की ओर से आदेश जारी हो गया है। नगर पालिकाओं एवं जिला मुख्यालयों में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। इसके साथ ही 6 सहायक राजस्व अधिकारियों एवं जूनियर कर्मचारियों, उन्हें उनके मूल पद पर वापस भेज दिया गया है। इस आदेश के तहत सबसे बड़ा फोकस नगर पालिकाओं और जिला मुख्यालयों में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) की तैनाती पर रखा गया है। लंबे समय से कई नगरीय निकायों में प्रभारी व्यवस्था के सहारे काम चल रहा था, जिससे विकास कार्यों की गति और जवाबदेही दोनों प्रभावित हो रही थीं। अब सरकार ने इन जगहों पर नियमित अधिकारियों की पदस्थापना कर प्रशासनिक स्थिरता लाने की कोशिश की है। वहीं, इस फेरबदल का एक अहम पहलू यह भी है कि 6 सहायक राजस्व अधिकारियों और जूनियर कर्मचारियों को, जो अब तक प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में काम कर रहे थे, उन्हें उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया गया है। यह कदम इस बात का संकेत देता है कि शासन अब जिम्मेदार पदों पर योग्य और नियमित अधिकारियों की नियुक्ति को प्राथमिकता दे रहा है, ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो सके। हालांकि, राज्य में नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की कमी अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए कुछ नगरीय निकायों में वरिष्ठ कर्मचारियों को प्रभारी CMO के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह एक अस्थायी व्यवस्था है, लेकिन इससे प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसकी कोशिश की गई है। नियमित मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की कमी को देखते हुए कुछ नगरीय निकायों में वरिष्ठ कर्मचारियों को प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया है। लिहाजा ये एक बड़ा प्रसासनिक  फेरबदल हुआ है। सूची इस तरह से है।