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Patiala Police Under Scanner: CCTV न लगाने पर हाईकोर्ट सख्त, मांगा स्पष्टीकरण

पटियाला. थाने में सी.सी.टी.वी. कैमरे न लगाने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में दायर एक कंटेम्प्ट पटीशन के चलते पंजाब पुलिस घिरती नजर आ रही है। हाई कोर्ट ने इस मामले में पंजाब पुलिस के डी.जी.पी. सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस संबंध में पटियाला जेल में बंद कैदी अमन प्रजापत ने अपने वकील एडवोकेट मयूर करकड़ा के माध्यम से पटीशन दायर की थी। नोटिस जारी होने के बाद एडवोकेट मयूर करकड़ा ने बताया कि उनके क्लाइंट अमन प्रजापत ने पंजाब पुलिस के खिलाफ पटीशन दायर कर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों का गंभीर उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। पटीशन में दावा किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के हर पुलिस थाने और चौकी में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाना अनिवार्य किया था, लेकिन पटियाला पुलिस ने इन आदेशों की अवहेलना करते हुए कैमरे नहीं लगाए। पटीशनर की ओर से वकील मयूर करकड़ा ने अदालत में पक्ष रखा। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने नोटिस ऑफ मोशन जारी करते हुए पंजाब पुलिस को 30 अप्रैल 2026 तक अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। करकड़ा ने बताया कि यह मामला एफआईआर नंबर 28 दिनांक 28.03.2024 से संबंधित है, जो एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत थाना सदर पटियाला में दर्ज हुई थी। पटीशनर का आरोप है कि पुलिस पोस्ट बहादुरगढ़ में सी.सी.टी.वी. कैमरे नहीं लगे थे, जिसके कारण उसके केस से जुड़े अहम सबूत उपलब्ध नहीं हो सके। ट्रायल के दौरान पुलिस गवाहों ने भी स्वीकार किया कि संबंधित पुलिस पोस्ट पर सी.सी.टी.वी. कैमरे मौजूद नहीं थे, जिससे कंप्लायंस रिपोर्ट पर सवाल खड़े होते हैं। पटीशनर ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन बताते हुए पटियाला जिले में सी.सी.टी.वी. व्यवस्था की व्यापक जांच की मांग की है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस केस की पैरवी पटियाला की अदालत में आपराधिक मामलों के वरिष्ठ वकील सतीश करकड़ा कर रहे हैं और मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरजीत सिंह की अदालत में विचाराधीन है।

Chess Rising Stars: नक्सलगढ़ के मयंक और अयांश ने अंडर-15 और अंडर-11 में मारी बाजी

बस्तर. जगदलपुर के निर्मल विद्यालय में आयोजित द चेस नेशन शतरंज चैम्पियनशिप 2026 का भव्य समापन हुआ, जहां प्रदेशभर से खिलाड़ियों ने हिस्सा लेकर बस्तर की बदलती तस्वीर को नई पहचान दी। ओपन वर्ग में रायपुर के सालिक नवाज मणिहार ने पहला स्थान हासिल कर ₹11 हजार जीते। बिलासपुर के रूपेश कुमार मिश्रा दूसरे और दुर्ग के यशद बंबेश्वर तीसरे स्थान पर रहे। महिला वर्ग में अलंक्रुता मोहराना ने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनकर बाजी मारी। अंडर-15 वर्ग में कोंडागांव के मयंक श्रीवास्तव विजेता रहे, जबकि जगदलपुर के एजीकियल सर्विन एक्का दूसरे और अथर्व मेश्राम तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में आयुषी राठी सर्वश्रेष्ठ रहीं। अंडर-11 वर्ग में जगदलपुर के अयांश दीक्षित ने पहला स्थान पाया। वेदांत शुक्ला दूसरे और सिद्धार्थ राव तीसरे स्थान पर रहे। बालिका वर्ग में बृष्टि साहा ने शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बस्तर एसपी शलभ कुमार सिन्हा मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि बस्तर अब हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। यह आयोजन साबित करता है कि बस्तर की नई पीढ़ी अब बंदूक नहीं, बुद्धि की ताकत से पहचान बना रही है।

राज्यपाल पटेल का बयान: प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण में ही सेवा का असली उद्देश्य

प्रकृति और स्थानीय जीवन के कल्याण प्रयासों में ही सेवा की सार्थकता : राज्यपाल पटेल राज्यपाल से भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारी मिले लोकभवन में भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय वन सेवा, महज प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता, प्रकृति, वन्य जीव, सांस्कृतिक धरोहर और भावी पीढ़ियों के प्रति भी एक उत्तरदायित्व है। आप सभी सौभाग्यशाली है, जिन्हें जीवन भर प्रकृति की गोद में रहकर उसके संरक्षण और संवर्धन का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी, वन कानूनों और जनजातीय कल्याण के प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें, उन्हें समझे और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करें। प्रशिक्षण की सीख को प्रकृति, वन, वन्य जीव और स्थानीय जन जीवन की बेहतरी में उपयोग करें। उनके कल्याण प्रयासों में ही आपकी सेवा की सार्थकता है। यह याद रखें कि आपका आत्मीय व्यवहार, वंचितों के प्रति समानुभूति और संवेदनशीलता ही आपकी सफलता का अंतिम पैमाना होगी। राज्यपाल पटेल सोमवार को भारतीय वन सेवा के 2024-26 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के सौजन्य भेंट कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को अखिल भारतीय सेवा में चयन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। लोकभवन के बैंक्वेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। पर्यावरण संरक्षण के लिए सोच, संकल्प और सेवा भाव जरूरी राज्यपाल पटेल ने कहा कि प्राकृतिक असंतुलन, पर्यावरणीय चुनौतियों आदि के कारण वन एवं वन्य जीवन के संकट का समाधान अत्यंत जरूरी है। वन अधिकारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन आपका प्राथमिक दायित्व है। इसके लिए आपकी सोच, संकल्प और सेवा का भाव सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ हमेशा आत्मीय, सरल और सहज व्यवहार करें। अपने अच्छे व्यवहार और सहयोग से उनका विश्वास जीते। वनों की अवैधानिक कटाई, शिकार आदि समस्याओं के समाधान में स्थानीय लोगों का सहयोग प्राप्त करें। राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “एक पेड़-माँ के नाम” अभियान की चर्चा की। इसे स्थानीय सहभागिता से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन की सराहनीय पहल बताया। राज्यपाल पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध राज्य है। यहाँ की वन भूमि प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर होने के साथ हमारी गौरवशाली सभ्यता, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी संजोए हुए हैं। प्रदेश में विस्तृत और विश्व प्रसिद्ध वन, अनेक राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य है। मध्यप्रदेश बाघ, चीतल, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और चीता स्टेट के रूप में प्रसिद्ध है। राज्य में गैंडा, हाथी आदि वन्य जीवों के पुनर्वास के अभूतपूर्व प्रयास भी चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग के वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों के फलस्वरूप मध्यप्रदेश आज वन-वन्य जीव प्रबंधन में अग्रणी राज्य है। सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण, आपकी जिम्मेदारी राज्यपाल पटेल ने कहा कि देश में जनजातीय आबादी और वनों में मध्यप्रदेश प्रथम है। यहाँ की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सतत्-समावेशी विकास और संरक्षण के द्वारा और अधिक समृद्ध बनाना आपकी जिम्मेदारी है। जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, विश्वास, मान्यताओं और मौलिकता के प्रति सम्मान के भाव के साथ कार्य करना, आपका नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय के प्राकृतिक और संवैधानिक अधिकारों के रक्षक के रूप में उनके सशक्तिकरण और कल्याण में आपकी भूमिका बहुत प्रभावी है। अपनी प्रतिभा और ज्ञान का उपयोग पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र, जैव विविधता के संकटों के समाधान में करें। राज्यपाल पटेल ने कहा कि आउट ऑफ बॉक्स थिंकिंग के साथ वन, वन्य जीवों और स्थानीय लोगों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करें। जनजातीय समुदाय की प्रकृति आधारित जीवन शैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और कला की मौलिकता से आधुनिक जगत को परिचित कराएं। उनके लिए सतत आजीविका के प्रयासों में सहयोग करें। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा का महत्व बताएं राज्यपाल पटेल ने कहा कि जब भी मैदानी भ्रमण पर जाएं तो स्थानीय लोगों से उनके बच्चों की शिक्षा की जानकारी जरूर लें। उन्हें शिक्षा का महत्व बताएं। अभिभावकों और बच्चों के साथ शिक्षा से जीवन में होने वाले बदलावों के संबंध में प्रेरक संवाद करें। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय की नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल उन्नयन तथा स्वास्थ्य और आजीविका की कल्याणकारी योजनाओं, कानूनों और प्रावधानों का लाभ लेने प्रेरित और प्रोत्साहित करें। राज्यपाल पटेल का प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। उनका यादव और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल पटेल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया। स्वागत उद्बोधन प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एच.आर.डी.) डॉ. बी.एस अन्निगेरी ने दिया। प्रशिक्षु अधिकारी सुसौम्या ने प्रशिक्षण के अनुभवों को साझा किया। उप वन संरक्षक मयंक सिंह गुर्जर ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन, वन विभाग-लोकभवन के अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।  

मोनालिसा गर्भवती, केरल से खाली हाथ लौटी MP पुलिस, पेशी की संभावना नहीं

खंडवा  प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान वायरल हुई मोनालिसा भोंसले और उसके पति मोहम्मद फरमान को हिरासत में लेने के लिए कुछ दिन पहले केरल के कोच्चि पहुंची मध्य प्रदेश पुलिस की एक टीम को वहां से खाली हाथ लौटना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार फरमान ने पुलिस को बताया कि मोनालिसा गर्भवती है इसलिए वह पुलिस के सामने तुरंत पेश होने में असमर्थ है। जिसके बाद मध्य प्रदेश पुलिस फिलहाल वहां से लौट गई। इस टीम में एक महिला अधिकारी सहित कुल पांच सदस्य थे। मनोरमा न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार MP पुलिस की टीम 17 मार्च को यहां पहुंची थी और इस जोड़े का पता लगाने में नाकाम रही। इसके अलावा पुलिस को फरमान के एक दोस्त जोशुआ की तलाश थी, हालांकि उसे खोज पाने में भी पुलिस नाकाम रही। जोशुआ पर आरोप है कि उसने शादी कराने से लेकर वहां रहने का इंतजाम करने तक में इस जोड़े की मदद की। फरमान ने दी MP पुलिस को जानकारी रिपोर्ट के अनुसार MP से आई महेश्वर पुलिस एक महिला सब-इंस्पेक्टर को मोहम्मद फरमान ने अपनी पत्नी के गर्भवती होने की जानकारी दी। इस जोड़े ने 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में शादी की थी। इसके तुरंत बाद, लड़की के पिता ने मध्य प्रदेश में एक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दावा किया गया कि लड़की की उम्र सिर्फ 16 साल है। इसके बाद मोहम्मद फरमान के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। हालांकि, लड़की का दावा है कि वह बालिग है। मोनालिसा ने सरकार से की थी सुरक्षा की मांग मध्य प्रदेश पुलिस के कोच्चि पहुंचने के बाद मोनालिसा ने केरल के मुख्यमंत्री और कोच्चि शहर के पुलिस प्रमुख को पत्र लिखकर सुरक्षा की मांग की थी। वहीं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा जारी फरमान के गिरफ्तारी वारंट पर केरल हाई कोर्ट ने पहले ही आगे की कार्यवाही तक रोक लगा दी थी। यह रोक 20 मई तक के लिए लगाई गई है। ST आयोग की जांच में नाबालिग निकली थी मोनालिसा मध्य प्रदेश की रहने वाली मोनालिसा भोसले ने पिछले महीने तिरुवनंतपुरम के एक मंदिर में यूपी के पालरा के रहने वाले फरमान खान से शादी कर ली थी। इस मामले ने उस वक्त तूल पकड़ लिया था, जब राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में मोनालिसा को नाबालिग पाया गया था। उधर लड़की के माता-पिता ने भी दावा किया था कि उनकी बेटी की उम्र अभी सिर्फ 16 साल है, जिसके बाद फरमान के खिलाफ महेश्वर पुलिस ने मोनालिसा के अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था। मोनालिसा खुद को बता रही 18 साल का MP पुलिस के कोच्चि पहुंचने पर मोनालिसा ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और कोच्चि के पुलिस कमिश्नर को एक आवेदन सौंपकर सुरक्षा की मांग की थी। उस आवेदन में मोनालिसा ने दावा किया है कि उसकी उम्र 18 साल है और आरोप लगाया था कि उसे जबरन मध्य प्रदेश ले जाने की कोशिशें की जा सकती हैं। ऐसे में उसने ऐसी किसी भी कोशिश को रोकने के लिए अपने और फरमान के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। इससे पहले लड़की के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 25 मार्च को मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में खान के खिलाफ कथित अपहरण और पॉक्सो अधिनियम और एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। 

CJI सूर्यकांत का बंगाल में सख्त कदम, कलकत्ता HC से तुरंत मांगी रिपोर्ट; वोटिंग में रुकावट?

नई दिल्ली  भारत में चुनाव सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है इसे जनता के अधिकारों का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. लेकिन जब इसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है. पश्चिम बंगाल के SIR केस में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जिस तरह सख्ती दिखाई है, उसने इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया है. सवाल यह है कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे तो क्या हजारों-लाखों लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं? यह चिंता सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोकतंत्र के मूल ढांचे से जुड़ी है।  अब CJI की टिप्पणी और तुरंत रिपोर्ट मांगने का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. कलकत्ता हाई कोर्ट से आज ही स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. यह दिखाता है कि अदालत इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. चुनाव से ठीक पहले ऐसी गड़बड़ियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है. अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सीधे मतदान पर पड़ सकता है. यही वजह है कि अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी है।  ट्रिब्यूनल पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट सख्त     पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनलों के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तुरंत रिपोर्ट मांगी गई है. अदालत यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में आदेशों की अनदेखी हो रही है और क्या नागरिकों को न्याय पाने में दिक्कत हो रही है।      वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में दलील दी कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं. लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति नहीं दी जा रही. यहां तक कि वकीलों को भी पक्ष रखने का मौका नहीं मिल रहा. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।      कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में हर दिन नए मुद्दे सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि अब हाईकोर्ट से सीधे रिपोर्ट लेकर स्थिति साफ करने का फैसला लिया गया है. अदालत का यह कदम इस बात का संकेत है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है।  SIR मामला क्या है और विवाद क्यों बढ़ा? SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक प्रक्रिया है, इसमें चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है. इसमें नाम जोड़ने और हटाने का काम होता है. विवाद तब बढ़ा जब आरोप लगा कि कई लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और अपील के लिए बने ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे. इससे हजारों लोगों के वोट देने का अधिकार प्रभावित हो सकता है।  सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन होना जरूरी है. अदालत ने कहा कि जिन लोगों की अपील मतदान से दो दिन पहले तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी तो नहीं हो रही।  क्या सच में लोग वोट देने से वंचित हो सकते हैं? अगर ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं करते और अपील समय पर नहीं सुनी जाती, तो यह संभावना बन सकती है. कई लोग अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं. यही वजह है कि अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और तुरंत हस्तक्षेप किया है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।  आगे क्या हो सकता है? अब सबकी नजर कलकत्ता हाईकोर्ट की रिपोर्ट पर टिकी है. अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आती है, तो सुप्रीम कोर्ट कड़े निर्देश जारी कर सकता है. इससे ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली में बदलाव हो सकता है. चुनाव से पहले यह मामला और भी अहम हो गया है, क्योंकि इसका सीधा असर मतदाताओं के अधिकार पर पड़ता है. अदालत का यह रुख साफ करता है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

IAS ऋचा शर्मा जिम की लिफ्ट में फंसी, घुटन से तबीयत बिगड़ी, हुआ बड़ा हादसा

रायपुर   आईएएस ऋचा शर्मा के साथ सोमवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां जिम के लिए पहुंची अधिकारी करीब 20 मिनट के लिए लिफ्ट में फंसीं रहीं। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई। हालांकि समय रहते उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। कुछ देरी हो जाती तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। घटना रायपुर जिले के एयरपोर्ट मार्ग स्थित श्रीराम मंदिर चौक के पास बने करेंसी टावर की है। यहां छत्तीसगढ़ शासन की असिस्टेंट चीफ सेक्रेटरी (ACS) सुबह लगभग 6:30 बजे लिफ्ट में फंस गई। ऋचा शर्मा रोज की तरह करेंसी टावर स्थित साईकस जिम जाने के लिए पहुंची थीं और लिफ्ट से ऊपर जा रही थीं। इसी दौरान तकनीकी खराबी के चलते लिफ्ट अचानक बीच में रुक गई और वे अंदर ही फंस गईं। बताया जा रहा है कि लिफ्ट के अंदर न तो पर्याप्त रोशनी और न ही वेंटिलेशन की व्यवस्था थी। इतना ही नहीं लिफ्ट में इमरजेंसी अलार्म या हेल्पलाइन जैसी आवश्यक सुविधाएं भी नहीं थी। ऐसे में तत्काल मदद मिलना मुश्किल हो गया और वे अंदर लॉक हो गई। घुटन और घबराहट की वजह से कुछ ही मिनटों में उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। ऐसे में स्थिति को देखते हुए ऋचा शर्मा ने अपने मोबाइल से अधिकारियों को सूचना दी। उन्होंने राज्य के ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव को भी कॉल लगाया घटना की सूचना मिलते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। इसके बाद लिफ्ट का दरवाजा मैन्युअली खोलकर करीब 20 मिनट बाद उन्हें बाहर निकाला गया। इतने में उनकी तबीयत बिगड़ चुकी थी। हालांकि कुछ देर बाद अधिकारी की हालत स्थिर हुई और सबने राहत की सांस ली। वही घटना के बाद ऋचा शर्मा ने नाराजगी जाहिर करते हुए बिल्डिंग प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज कराने की चेतावनी दी है। 

पंजाब मंडियों में 28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक, 24 लाख से ज्यादा की हुई खरीदारी: लाल चंद कटारूचक्क

चंडीगढ़/ टांडा  पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने आज यहां दाना मंडी में गेहूं की खरीद प्रबंधों का जायजा लेते हुए कहा कि राज्य की मंडियों में गेहूं की खरीद निर्विघ्न जारी है और अब तक हुई 28 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आमद में से 24 लाख मीट्रिक टन से अधिक फसल खरीदी जा चुकी है। दाना मंडी में विधायक जसवीर सिंह राजा गिल और संबंधित अधिकारियों के साथ पहुंचे कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने निकटवर्ती गांव बस्ती के किसान जैला की ढेरी की खरीद करवाते हुए बताया कि पंजाब सरकार द्वारा मंडियों में खरीद के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिसके कारण किसानों को फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि गेहूं की खरीद के बदले न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपए के हिसाब से अब तक किसानों के खातों में 647 करोड़ रूपए की अदायगी की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार किसानों की फसल का एक-एक दाना उठाने के लिए वचनबद्ध है, जिसके नतीजे के रूप में मंडियों में निर्विघ्न खरीद जारी है। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार खरीद के 48 घंटों के अंदर किसानों को बनती अदायगियां की जा रही हैं और इसके साथ ही लिफ्टिंग भी तेज हो रही है। कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से कहा कि किसानों को मंडियों में किसी प्रकार की दिक्कत पेश न आए। मंडियों में बोरे, मंडी मजदूर और ढुलाई के प्रबंधों की बात करते हुए लाल चंद कटारूचक्क ने बताया कि पूरे राज्य की मंडियों में सभी जरूरी प्रबंध अमल में हैं और गेहूं की खरीद सुचारू ढंग से जारी है। उन्होंने किसानों द्वारा अपने खून-पसीने और मेहनत से पैदा किए गए एक-एक दाने को खरीदने की राज्य सरकार की वचनबद्धता को दोहराते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में किसानों की फसल न्यूनतम समय में खरीदकर निर्धारित समय में उनके खातों में अदायगियां की जा रही हैं। कैबिनेट मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे गेहूं के अवशेष को आग न लगाएं, बल्कि कृषि विभाग की टीमों के माध्यम से उपलब्ध मशीनरी से इसका खेतों में ही प्रबंधन करें। पिछले दिनों बेमौसमी बारिश के कारण फसल को हुए नुकसान के बारे में कैबिनेट मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने पहले ही विशेष गिरदावरी के निर्देश दे दिए थे और किसानों के नुकसान की भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जाएगी। विधायक जसवीर सिंह राजा गिल ने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल को पिछले सालों की तरह सुचारू ढंग से साथ-साथ खरीदकर लिफ्ट करवाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लगातार किसानों का साथ दिया है और कई बड़े किसान हितैषी फैसले लिए हैं, जिससे राज्य भर में किसानों को बेहद लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार किसानों की फसल की खरीद के बदले निर्धारित समय के अंदर-अंदर अदायगियां सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी ताकीद की गई है कि मंडियों में किसानों की फसल की समय पर खरीद की जाए। वर्णनीय है कि जिला होशियारपुर में कुल 78 मंडियां स्थापित की गई हैं, जिनमें से 65 मंडियां पक्की और 13 स्थानों पर खरीद के अस्थायी प्रबंध किए गए हैं, जबकि जिले में कुल 3,16,000 मीट्रिक टन गेहूं की आमद की संभावना है। इस मौके पर एस.डी.एम. लवप्रीत सिंह, मार्केट कमेटी के चेयरमैन राजविंदर सिंह, मार्केट कमेटी सचिव हरप्रीत सिंह, डिप्टी डायरेक्टर खाद्य एवं आपूर्ति रजनीश कुमारी, डी.एफ.एस.सी. प्रीतकमल सूद आदि भी मौजूद थे।

Humanity Story: कैथल के शिक्षक ने पेश की मिसाल, मजदूरों के बच्चों की पढ़ाई का उठाया जिम्मा

कैथल. जिला शिक्षा विभाग की तरफ से ईंट-भट्ठों पर रहने वाले मजदूरों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत जिले में 94 ईंट-भट्ठों के करीब 2000 बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसी कड़ी में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बलवंती के प्राचार्य व स्टाफ ने सराहनीय पहल करते हुए ईंट-भट्ठे के 32 बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाया। विद्यालय के प्राचार्य मामचंद ने बताया कि विभागीय आदेशों के तहत और स्टाफ की सामूहिक इच्छा से लगातार चार दिन तक ईंट-भट्ठों पर जाकर सर्वे किया गया। इस दौरान अभिभावकों को विश्वास दिलाया गया कि उनके बच्चों को स्कूल में बेहतर शिक्षा और सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। शिक्षकों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें स्कूल से जोड़ने का संकल्प लिया। प्रवेश उत्सव के दौरान स्कूल में बाल वाटिका से कक्षा सातवीं तक दाखिले के दौरान बच्चों का विशेष स्वागत किया गया। प्रार्थना सभा में सभी विद्यार्थियों ने तालियों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। बच्चों को प्रेरित करने के लिए डिजिटल रूम में प्रेरणादायक फिल्म दिखाई बच्चों को प्रेरित करने के लिए डिजिटल रूम में प्रेरणादायक फिल्म दिखाई गई और खेल सामग्री वितरित की गई। कुछ बच्चों के बाल कटवाए गए और उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया। इसके अलावा शिक्षकों ने अपनी निजी धनराशि से बच्चों को वर्दी, जूते, किताबें और पेन उपलब्ध करवाए। विद्यालय स्टाफ ने बच्चों को रोजाना स्कूल लाने के लिए अपने निजी वाहनों का भी उपयोग किया। दोपहर में सभी बच्चों को भोजन कराया गया और अन्य विद्यार्थियों के साथ खेल गतिविधियों में शामिल किया गया। करीब 28 बच्चों को वर्दी वितरित की गई, जबकि शेष बच्चों को भी जल्द वर्दी देने का आश्वासन दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी सुभाष कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए विद्यालय स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और अन्य स्कूलों के लिए भी प्रेरणा हैं। इस तरह से चली विभाग की कार्यवाही ईंट भट्ठा क्षेत्र से 32 बच्चों का दाखिला 10 बच्चों की बाल कटिंग, सभी को दोपहर का भोजन डिजिटल रूम में शैक्षणिक फिल्म, तालियों से स्वागत 28 बच्चों को वर्दी वितरण, खेल सामग्री व स्टेशनरी दी गई 4 बच्चों की नाप लेकर सोमवार को वर्दी देने का वादा 20 और बच्चों के आने की उम्मीद डीपीसी राजेंद्र आजाद ने बताया कि विभाग द्वारा समय-समय पर ईंट-भट्ठों पर रहने वाले बच्चों का सर्वे किया जा रहा है, ताकि शिक्षा से वंचित बच्चों की पहचान कर उन्हें नजदीकी स्कूलों में दाखिला दिलाया जा सके। उन्होंने बताया कि जिले के विभिन्न भट्ठों पर बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे हैं, जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ना विभाग की प्राथमिकता है। इस अवसर पर जगमिंदर सिंह, शिशपाल शर्मा, राजीव शर्मा, राजेश पंचाल, बलराज सिंह, कुसुम लता, रिम्पी देवी, संदीप, धर्मवीर, ओम प्रकाश, अंजू अरोड़ा, कविता देवी, सीतल देवी, सतनारायण, रमेश कुमार, सतीश कुमार, रवि व करमवीर मौजूद रहे।

Punjab Alert: बठिंडा रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाने की धमकी, सुरक्षा एजेंसियों ने बढ़ाई चौकसी

बठिंडा. बठिंडा में एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। आज एक ईमेल के जरिए रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इसी ईमेल में चंडीगढ़ के एक कॉलेज को भी निशाना बनाने की बात कही गई है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। धमकी मिलने के बाद बठिंडा रेलवे स्टेशन पर पुलिस तैनात कर दी गई है और यात्रियों की चेकिंग भी की जा रही है। हालांकि मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि चेकिंग उस स्तर की नहीं है, जैसी गंभीर धमकी के बाद होनी चाहिए। इससे सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले भी बठिंडा के डाकघर और श्री मुक्तसर साहिब के डीसी कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। लगातार मिल रही ऐसी धमकियों के चलते प्रशासन की तैयारियों और कार्रवाई पर भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और ईमेल भेजने वाले की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध वस्तु या व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

Forest Protection Model: उदंती सीतानदी में 750 जल स्रोतों के साथ ‘फायर-वॉटर’ रणनीति, आग पर काबू

गरियाबंद. छत्तीसगढ़ स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) ने अपने सभी 143 फॉरेस्ट बीट में समर्पित ‘फायर वॉचर्स’ और ‘वॉटर वॉचर्स’ की टीमों को तैनात कर वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। ये प्रयास रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों में स्थित लगभग 120 गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। गर्मी की चुनौतियां और रणनीति गर्मी के मौसम में जंगलों में लगने वाली आग और पानी के स्रोतों के सूखने के कारण अक्सर भालू, तेंदुए, लकड़बग्घे और हाथी जैसे जंगली जानवर मानवीय बस्तियों की ओर पलायन करते हैं। इससे संघर्ष की संभावना बढ़ जाती है। इस चुनौती से निपटने के लिए USTR ने एक सक्रिय और एकीकृत रणनीति अपनाई है। फायर वॉचर्स टीम: यह टीम नियमित पैदल गश्त करती है और जंगल की आग का पता लगाने व उसे रोकने के लिए थर्मल ड्रोन निगरानी का उपयोग करती है। इनकी सतर्कता के कारण आग लगाने के आरोप में 23 व्यक्तियों को पकड़ा गया है, जिससे आग लगने की घटनाओं में भारी कमी आई है। वॉटर वॉचर्स टीम: जंगली जानवरों के लिए जंगल के भीतर ही पानी सुनिश्चित करने व्यापक प्रयास किए गए हैं। आंतरिक वन क्षेत्रों में 750 से अधिक छोटे जल स्रोत, जिन्हें स्थानीय रूप से “झिरिया” कहा जाता है, बनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में 26 सौर-संचालित पंप स्थापित किए गए हैं। पानी के इस विस्तृत नेटवर्क के कारण वन्यजीव जंगल की सीमाओं के भीतर ही रहते हैं। अवैध शिकार पर लगाम और तकनीक का उपयोग ये उपाय अवैध शिकार को रोकने में भी सहायक हैं, क्योंकि शिकारी अक्सर गर्मियों में सीमित जल स्रोतों को निशाना बनाते हैं। USTR की एंटी-पोचिंग टीम ने अंतर-राज्यीय शिकार नेटवर्कों पर कार्रवाई कर रिजर्व में सुरक्षा का माहौल बढ़ाया है। साथ ही सूखते जल स्रोतों और आग की आशंका वाले क्षेत्रों की निगरानी के लिए सैटेलाइट-आधारित मॉनिटरिंग का उपयोग किया जा रहा है। उल्लेखनीय परिणाम इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप, USTR में पिछले तीन गर्मी के मौसमों के दौरान शून्य (जीरो) मानव या वन्यजीव हताहत दर्ज किए गए हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी अवधि में स्थानीय समुदायों द्वारा महुआ, साल बीज, चिरौंजी और तेंदू पत्ता जैसे लघु वनोपज का संग्रहण किया जाता है। USTR का यह एकीकृत दृष्टिकोण पारिस्थितिक संरक्षण और सामुदायिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने का एक आदर्श मॉडल है, जो दर्शाता है कि कैसे लक्षित हस्तक्षेपों के माध्यम से संवेदनशील वन क्षेत्रों में संघर्ष को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।