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इंदौर का मेट्रो सफर सपना बनकर रह गया, सरकारी औपचारिकताएं और ‘अतिथि’ का इंतजार

इंदौर इंदौर की जनता का अपनी मेट्रो ट्रेन में सफर करने का सपना अब सरकारी औपचारिकताओं और 'अतिथि' के इंतजार में उलझकर रह गया है। गांधीनगर से रेडिसन चौराहे तक मेट्रो ट्रेन चलाने की सारी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) से क्लियरेंस मिलने के 23 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रेन का पहिया आम जनता के लिए नहीं घूम सका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार निर्माण कार्य और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया तो समय पर पूरी कर ली गई थी, लेकिन उद्घाटन की तारीख तय न होने से शहरवासियों की उत्सुकता अब निराशा में बदल रही है। मार्च में ही अनुमति ले ली थी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने बीते 26 मार्च को ही सुरक्षा आयुक्त से संचालन की अनुमति प्राप्त कर ली थी। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद थी कि पहले रामनवमी और फिर हनुमान जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को मेट्रो की सौगात मिल जाएगी, लेकिन यह दोनों ही बड़े अवसर बीत गए और स्टेशनों पर सन्नाटा पसरा रहा। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो के संचालन की अंतिम मुहर अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के स्तर से लगनी है। राज्य शासन की ओर से पीएमओ को मेट्रो संचालन का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें प्रधानमंत्री द्वारा वर्चुअली हरी झंडी दिखाने या फिर किसी केंद्रीय मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में इंदौर भेजने की अनुमति मांगी गई है। हांलाकि सूत्रों का कहना है कि इंदौर में मेट्रो का संचालन पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के परिणाम आने के बाद ही हो पाएगा। चुनाव परिणाम के बाद ही इंदौर मेट्रो की तारीख की घोषणा की जाएगी। 4 मई के बाद ही शुरू होने की उम्मीद सांसद शंकर लालवानी ने इस मामले में कहा कि मेट्रो का संचालन कब शुरू होगा, यह शासन को तय करना है। आवासन एंव शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा इसके शुभारंभ की योजना बनाई जा रही है। लालवानी ने कहा कि वे केंद्र और राज्य स्तर पर बातचीत कर जल्द से जल्द ट्रेन शुरू कराने का प्रयास करेंगे। सूत्रों की मानें तो इंदौर मेट्रो की तारिखों की घोषणा 4 मई के बाद की जाएगी। इंदौर मेट्रो फेज-2 के स्टेशन सुपर कॉरिडोर स्टेशन 2, 1, भोरासला चौराहा, एमआर 10 रोड, आईएसबीटी, चंद्रगुप्त चौराहा, हीरा नगर, बापट चौराहा, मेघदूत गार्डन, विजय नगर चौराहा और मालवीय नगर चौराहा (रेडिसन होटल)।  

अन्नदाता के लिए मुस्तैद पंजाब सरकार: 48 घंटे में भुगतान और सुचारू लिफ्टिंग के साथ गेहूं खरीद जारी

  पंजाब के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री लाल चंद कटारूचक ने टांडा की अनाज मंडी में गेहूं की खरीद व्यवस्था का निरीक्षण किया। राज्य की विभिन्न मंडियों में अब तक कुल 28 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है। विभागीय मुस्तैदी के चलते इसमें से 24 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा फसल की खरीद का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य किसानों को बिना किसी देरी के उनकी मेहनत का फल दिलाना है, जिसके लिए मंडियों में व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए हैं। किसानों को सीधा आर्थिक लाभ और पारदर्शी भुगतान कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तहत अब तक किसानों के बैंक खातों में 647 करोड़ रुपये की राशि सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। सरकार ने नियमों के अनुसार खरीद के 48 घंटों के भीतर भुगतान प्रक्रिया सुनिश्चित की है। इस कदम से किसानों को अपनी अगली फसल की तैयारी और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में काफी मदद मिल रही है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि फसल की लिफ्टिंग में तेजी लाई जाए ताकि मंडियों में अनावश्यक भीड़ जमा न हो। प्रशासनिक मुस्तैदी और बुनियादी सुविधाएं अनाज मंडी के दौरे के दौरान मंत्री ने स्थानीय अधिकारियों और खरीद एजेंसियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने सुनिश्चित किया कि मंडियों में बारदाना, लेबर और परिवहन की कोई कमी न रहे। होशियारपुर जिले में 78 खरीद केंद्र सक्रिय हैं, जिनमें से 65 स्थायी और 13 अस्थायी केंद्र हैं। प्रशासन का अनुमान है कि अकेले इस जिले में 3,16,000 मीट्रिक टन गेहूं की आवक होगी। किसानों की सुविधा के लिए पीने के पानी और छाया के भी उचित प्रबंध किए गए हैं। फसल अवशेष प्रबंधन और बेमौसम बारिश की राहत सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे गेहूं की कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को जलाने के बजाय कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई मशीनरी का उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और प्रदूषण भी नहीं फैलेगा। हाल ही में हुई बेमौसम बारिश से प्रभावित फसलों के संदर्भ में मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार विशेष गिरदावरी (फसल निरीक्षण) शुरू कर दी गई है। फसल के नुकसान की पूरी भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जाएगी ताकि किसानों पर आर्थिक बोझ न पड़े। भविष्य की रणनीति और सरकारी प्रतिबद्धता स्थानीय विधायक जसवीर सिंह राजा गिल ने भी भरोसा दिलाया कि प्रशासन और सरकार मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि मंडी में आने वाला फसल का एक-एक दाना समय पर खरीदा जाए। खरीद केंद्रों पर किसी भी प्रकार की धांधली या अव्यवस्था को रोकने के लिए उच्चाधिकारी लगातार निगरानी कर रहे हैं। पंजाब सरकार की यह सक्रियता दिखाती है कि राज्य में कृषि और किसान कल्याण उनकी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। आने वाले दिनों में आवक बढ़ने के साथ ही खरीद और लिफ्टिंग की गति को और तेज करने की योजना तैयार है।

8वीं पास को मिलेगा बिना ब्‍याज 10 लाख तक का लोन, सरकार की योजना से कैसे उठाएं लाभ

भोपाल  केंद्र सरकार और राज्‍य सरकारों की तरफ से युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं. इसी में से एक राज्‍य सरकार की ओर से भी एक योजना चलाई जा रही है, जिसका नाम मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना 2026 है. इस योजना को राजस्‍थान सरकार की ओर से शुरू किया गया है।  मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत राज्‍य के 30,000 युवाओं लोन देने का लक्ष्‍य रखा गया है. यह योजना राज्य के उद्योग और वाणिज्य विभाग द्वारा लागू की जा रही है. इस योजना के तहत युवा अपने खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना साकार कर सकते हैं।  क्‍या है ये स्‍कीम?  इस स्‍कीम की खास बात है कि इसके तहत बिना ब्‍याज के कर्ज दिया जाता है. इस योजना को जनवरी 2026 में शुरू किया गया, जो 3 मार्च 2029 तक लागू रहेगा. इस योजना के तहत सरकार का मकसद है कि रोजगार की दर का बढ़ाया जाए और कुल सालों में 1 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाए।  कितनी मिलेगी मदद?  इस योजना के तहत ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है. इसपर कोई भी ब्‍याज देना नहीं होता है, क्‍योंकि सरकार 100 फीसदी ब्‍याज सब्सिडी देती है. यह लोन अमाउंट बीमा कवर भी होता है और बैंक की ओर से गारंटी भी दी जाती है।    कौन ले सकता है ये लोन?  अधिकार‍िक गाइडलाइन के अनुसार, राजस्‍थान का कोई भी स्‍थायी निवासी इस लोन को उठा सकता है. इसके लिए उम्र 18 से 45 वर्ष होनी चाहिए. कम से कम एजुकेशन 8वीं पास तो होनी ही चाहिए. साथ ही बैंक द्वारा आप डिफॉल्‍टर घोषित नहीं होने चाहिए. व्यक्तिगत और संस्थागत दोनों आवेदन कर सकते हैं।  किन कामों के लिए मिलेगा ये लोन?  अगर आप खुद का बिजनेस मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में शुरू कर रहे हैं, सर्विस सेक्‍टर में या फिर अन्‍य ट्रेड सेक्‍टर में कर रहे हैं तो ही आपको लोन द‍िया जाएगा. इसका मतलब है कि आप दुकान, स्‍टार्टअप, सर्विस बिजनेस, छोटा उद्योग आदि के तहत अप्‍लाई करके लोन ले सकते हैं।  किसे कितना मिलेगा लोन अमाउंट? अगर आप 8वीं-12वीं पास हैं तो आपको ₹3.5 लाख – ₹7.5 लाख रुपये दिया जाएगा. लेकिन अगर आप ग्रेजुएट, डिप्लोमा की डिग्री ले चुके हैं तो आपको ₹5 लाख -₹10 लाख  रुपये का अमाउंट मिल सकता है।  कैसे करें अप्‍लाई?  इस योजना के तहत अप्‍लाई करने के लिए आपको पहले राजस्थान SSO पोर्टल पर लॉगिन करना होगा. फिर मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का ऑप्‍शन सेलेक्‍ट करना होगा. अब फॉर्म भरें और दस्‍तावेजों को अपलोड कर दें, फिर सबमिट बटन क्लिक करें।   किन दस्‍तावेजों की जरूरत?  आवेदन करने के लिए आपके पास कुछ डॉक्‍यूमेंट होने आवश्‍यक हैं. आपके पास आधार कार्ड, जन आधार, बैंक पासबुक, निवास प्रमाण पत्र, प्रोजेक्ट रिपोर्ट और एजुकेशन सर्टिफिकेट होनर जरूरी है. 

भारत और सिंगापुर के सेमीकंडक्टर सहयोग में वृद्धि, उद्योग लगाएंगे नए निवेश की उम्मीद

नई दिल्ली   सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने सिंगापुर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एसएसआईए) के साथ मिलकर शुक्रवार को सिंगापुर में एक उच्च स्तरीय उद्योग बैठक आयोजित की। इस बैठक में भारत और सिंगापुर के प्रमुख हितधारकों ने हिस्सा लिया और सेमीकंडक्टर तथा इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन में सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की। बैठक में दोनों देशों की पूरक ताकतों पर जोर दिया गया। जहां सिंगापुर सेमीकंडक्टर निर्माण, उपकरण और वैश्विक सप्लाई चेन में अग्रणी है, वहीं भारत अपनी बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नीतिगत समर्थन और बड़े बाजार के कारण एक मजबूत साझेदार के रूप में उभर रहा है। यह पहल आईसीईए और एसएसआईए के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बाद आगे बढ़ी है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग के लिए एक संरचित ढांचा तैयार करना है।बैठक में दोनों देशों की कंपनियों के बीच साझेदारी, निवेश के अवसर और तकनीकी सहयोग पर सीधी बातचीत हुई। इस दौरान भारत-सिंगापुर के बीच एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर कॉरिडोर विकसित करने पर भी जोर दिया गया। चर्चा में सप्लाई चेन को मजबूत करने, तकनीकी सह-विकास, संयुक्त उपक्रम (जॉइंट वेंचर), निवेश प्रवाह और फैब्रिकेशन, उपकरण, सामग्री तथा प्रिसिजन इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अवसरों पर फोकस किया गया।उद्योग जगत के नेताओं ने नीतिगत समर्थन, कौशल विकास और पूरे इकोसिस्टम की तैयारी पर भी विचार-विमर्श किया।आईसीईए के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि यह साझेदारी दोनों देशों के बीच मजबूत तालमेल को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि जहां सिंगापुर उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक सप्लाई चेन विशेषज्ञता लाता है, वहीं भारत पैमाना, मांग और नीतिगत गति प्रदान करता है, जो एक मजबूत और विविध सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को पहले ही गति मिल चुकी है।  

BJP चुनावी मोड में, MP की 70 कमजोर सीटों पर मंत्रियों की तैनाती, रणनीति में बड़ा बदलाव

भोपाल मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी अभी से सक्रिय हो गई है। पार्टी ने साल 2026 में ही खुद की मजबूती और मैदानी रणनीती के लिए काम करना शुरु कर दिया है।दरअसल विधानसभा की सभी 230 सीटें जीतने का लक्ष्य तय करके भाजपा ने मिशन 2028 के लिए रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत भाजपा कमजोर सीटों पर सबसे अधिक फोकस करने वाली है।  रणनीति के तहत करीब 70 सीटों को चिह्नित करके भाजपा ने जहां संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ा दिया है, वहीं यहां मंत्रियों को भी मैदान में उतारने की फैसला भाजपा ने कर लिया है। कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की जिम्मेदारी मंत्रियों पर जानकारी के मुताबिक पार्टी की रणनीति कमजोर सीटों पर भाजपा को मजबूत करने की है और इसके लिए मंत्रियों को जिम्मा सौंप दिया है। मंत्रियों को लगातार वहां पर रात बिताने के साथ ही बैठकें करने का निर्देश दिया गया है।साथ ही  हार के कारणों को तलाशने का भी जिम्मा सौंपा गया है। भाजपा इस काम में निकाय और त्रि स्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले ही जुट गई है। इस काम के लिए भाजपा ने प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग प्रभारी एवं जिला प्रभारियों को टाइम लाइन थमा दी गई है। जिसमें प्रदेश अध्यक्ष से लेकर बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को जनता व कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने की बात कही गई है।  पार्टी की  नई गाइडलाइन के तहत प्रदेशाध्यक्ष से लेकर दिग्गज नेताओं को महीने भर का शैड्यूल समझा दिया गया है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए पन्ना प्रमुखों को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। वहीं अल्पसंख्यक और जातिगत समीकरण को देखते हुए इन सीटों पर नजदीकी विधायकों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।भाजपा की नई रणनीति को लेकर पार्टी मुख्यालय में संभाग और जिला प्रभारियों की बैठक में टारगेट सेट किए गए हैं। लिहाजा इस लक्ष्य की प्राप्ति को हासिल करने के लिए सबको सामूहिक जिम्मेदारी और धरातल पर काम करने के लिए कहा गया है।

बीजेपी की महिला आरक्षण रैली आज, सीएम ने कहा- विधानसभा का विशेष सत्र होगा, कांग्रेस पर महिलाओं का हक छीनने का आरोप

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर कहा कि लोकतंत्र एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह बेहद निंदनीय और कष्टकारी है। बता दें कि महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन बिल मोदी सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। सीएम यादव ने आगे कहा कि द्रौपदी का चीरहरण तो हमने 5000 साल पहले का सुना था, लेकिन बहनों की इज्जत के साथ खेलने का घटनाक्रम संसद में जिस प्रकार हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत कष्टकारी और निंदनीय है। प्रधानमंत्री मोदी जी और अमित शाह जी ने प्रस्तावक बनकर जो निर्णय लिया, उसमें शुरुआत से ही हर दल को सुझाव देने का अवसर दिया गया। मोदी जी ने सभी को खुला पत्र भी लिखा, ताकि कोई यह न कहे कि हमें बोलने का अवसर नहीं मिला या हमसे चर्चा नहीं की गई। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा, मंत्री कृष्णा गौर, महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे, विधायक अर्चना चिटनिस और मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल भी मौजूद रहे। विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि इस विषय पर विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी है, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस मुद्दे को जनता की अदालत में लेकर जाएगे। जन-जन तक बात को पहुंचाएंगे। सोमवार को आक्रोश रैली निकाली जाएगी। हम बहनों को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे और जिन्होंने गलत किया है, उनका पर्दाफाश करेंगे। आने वाले दिनों में जिलों में प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी। हम रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संसद में जो घटनाक्रम हुआ, वह लोकतंत्र के लिए दुखद और निंदनीय है। यह महिलाओं को अधिकार देने का ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष के रवैये ने प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकार का प्रश्न है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस गंभीर मुद्दे को भी राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया। उन्होंने कहा कि देश नारी शक्ति के अपमान को नहीं भूलेगा।  डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2023 में जब यह विधेयक आया था, तब सभी दलों ने इसका समर्थन किया था, लेकिन अब इसे आगे बढ़ाने के समय विपक्ष पीछे हट गया। उन्होंने इसे अवसरवाद करार दिया।    कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ 2023 के बिल को लागू करने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 2023 में ही स्पष्ट किया गया था कि 2029 तक महिलाओं को उनका अधिकार दिया जाएगा। इसके लिए 2029 के चुनावों में जनगणना के आधार की आवश्यकता थी, इसलिए मजबूरी में 2011 की जनगणना को आधार बनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान जनगणना के आधार पर आकलन किया जाए, तो यह प्रक्रिया 2034 के बाद ही संभव हो पाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का रवैया लगातार महिलाओं के खिलाफ रहा है। सीएम ने कहा कि हमारा एकमात्र राज्य हैं, जहां 17 महिला कलेक्टर हैं। दिव्यांग संभागायुक्त हैं। 10 से ज्यादा जिले ऐस है, जहां एसपी और कलेक्टर महिला है। एक संभाग ऐसा है, जहां संभागायुक्त, कलेक्टर, एसपी, जिला पंचायत, जनपद पंचायत सभी महिलाएं हैं।  70 साल से अधिकार की लड़ाई भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने कहा कि देश की महिलाएं पिछले 70 वर्षों से अपने राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं। 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग लंबे समय से उठती रही, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में विपक्षी दलों ने केवल चुनावी मजबूरी में इस बिल का समर्थन किया, लेकिन अब इसके लागू होने की प्रक्रिया शुरू होते ही विरोध करने लगे।  विपक्ष की मानसिकता महिला विरोधी  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि लोकसभा में हुआ घटनाक्रम केवल संसदीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी से जुड़ा मुद्दा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, खासकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों की मानसिकता महिला विरोधी है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक मुद्दे पर विपक्ष का रुख उसकी वास्तविक सोच को दर्शाता है और बिल के गिरने पर जश्न मनाना महिलाओं का अपमान है।  आज  निकलेगी नारी शक्ति वंदन यात्रा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार और पार्टी अब जनता के बीच जाएगी। उन्होंने बताया कि आज सोमवार को नारी शक्ति वंदन पदयात्रा निकाली जाएगी और पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन होगा। सभी जिलों में प्रदर्शन किए जाएंगे। नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और निंदा प्रस्ताव भी लाया जाएगा। सीएम ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ अन्याय किया है, जिसका पर्दाफाश जनता के बीच किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह अभियान प्रेस कॉन्फ्रेंस से शुरू हो चुका है और अब हर स्तर पर इसे आगे बढ़ाया जाएगा, सरकार इस मुद्दे पर रुकने वाली नहीं है। चुनाव में समय है, तो विपक्ष विरोध कर रहा सीएम ने कहा कि 2023 में जिस अधिनियम को सभी ने पास किया था और समर्थन दिया था, उसी मामले में अब विपक्ष पलट गया। जब चुनाव नजदीक थे तो समर्थन किया, लेकिन अब जबकि चुनाव में समय है, तो विरोध कर रहे हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मानसिकता लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि अलगाववादी नजर आती है और मैं इसकी कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। सीएम ने कहा कि आज जब बहनों को अधिकार देने की बात आई, तो विपक्ष ने किंतु-परंतु लगाकर उन्हें अपमानित करने का काम किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले भी तीन तलाक जैसे मुद्दों पर गलत निर्णय लिए और महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की। उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह खड़ा किया जा रहा सीएम ने कहा कि 1971 में देश की आबादी 55-54 करोड़ थी और आज 140 करोड़ से ज्यादा हो गई है, तो उसी अनुपात में सीटें भी बढ़नी चाहिए। गृहमंत्री ने इस विषय पर हर सवाल का जवाब दिया और स्पष्ट किया कि उत्तर-दक्षिण का विवाद बेवजह … Read more

29 अप्रैल को पीएम मोदी गंगा एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करेंगे, यूपी की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया गति

लखनऊ.  उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 29 अप्रैल को जनपद हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाएगा। यह अवसर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिसका सीधा लाभ करोड़ों लोगों को मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जिस तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है, गंगा एक्सप्रेसवे उसी का एक सशक्त उदाहरण है। वर्ष 2020 में मंत्रिपरिषद से स्वीकृति मिलने के बाद इस परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया गया और रिकॉर्ड समय में इसे साकार करने की दिशा में कार्य हुआ। यह एक्सप्रेसवे “नए उत्तर प्रदेश” के निर्माण का मजबूत आधार बन रहा है। पश्चिम से पूर्व तक मजबूत कनेक्टिविटी गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई 594 किलोमीटर है, जो मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा। यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी हिस्से से जोड़ते हुए प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करेगा और यात्रा को तेज, सुरक्षित व सुगम बनाएगा। 12 जिलों के विकास को मिलेगी रफ्तार इस एक्सप्रेसवे से मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, सम्भल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जैसे 12 प्रमुख जिलों को सीधा लाभ मिलेगा। इन जिलों के 519 गांव इस परियोजना से जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में यूपी का दबदबा वर्तमान में देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत है। गंगा एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ यह हिस्सेदारी बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी, जिससे यूपी देश में एक्सप्रेसवे विकास का अग्रणी राज्य बनकर और मजबूत स्थिति में आ जाएगा। निवेश, उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा बेहतर कनेक्टिविटी के चलते लॉजिस्टिक्स की लागत कम होगी, जिससे उद्योगों और व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। यह एक्सप्रेसवे नए औद्योगिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होकर निवेश आकर्षित करेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। कृषि और व्यापार को मिलेगा सीधा फायदा प्रदेश के किसानों के लिए यह परियोजना वरदान साबित होगी। अब कृषि उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंच सकेंगे, जिससे उनकी गुणवत्ता और कीमत बेहतर होगी। जल्दी खराब होने वाले कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन मजबूत होने से किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई गति गंगा एक्सप्रेसवे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। प्रयागराज सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से “एक्सप्रेसवे प्रदेश” के रूप में उभर रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश के समग्र विकास को नई दिशा दे रहे हैं। आर्थिक विकास की नई धुरी बनेगा एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला इंजन है, जो प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मध्यप्रदेश में अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई, शहर और गांव में खत्म होगा भेदभाव, समान नियम होंगे लागू

 भोपाल  मध्यप्रदेश में अब शहर और गांव की कॉलोनियों में कोई भेदभाव नहीं होगा, जिनमें एक समान नियम लागू होंगे। नगरीय सीमा से 16 किलोमीटर का क्षेत्र मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम-2026 में शामिल होगा। इससे पंचायतों में भी वही नियम लागू होंगे, जो अभी नगरीय निकायों में होते हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में कटने वाली अवैध कॉलोनियों पर रोक लग सकेगी। पांच साल की तय अवधि में कॉलोनी विकसित होने के बाद 45 दिन में कार्यपूर्ति प्रमाण-पत्र मिल जाएगा, जिससे डीम्ड परमिशन (स्वत: मंजूर) की व्यवस्था लागू मानी जाएगी। यह जानकारी भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा राष्ट्रीय शहरी प्रबंधन संस्थान में आयोजित दो दिवसीय प्रदेश के नगरीय निकायों के सेमिनार में अधिकारियों ने दी है। उन्होंने साफ किया है कि नया कानून लागू होते ही अवैध कॉलोनाइजरों पर सख्ती शुरू हो जाएगी। नए प्रावधान में सजा भी शामिल जानकारी के अनुसार नए प्रविधान के तहत अवैध कॉलोनी काटने वाले अब आसानी से नहीं बच पाएंगे। इसके तहत सजा को सात साल से बढ़ाकर 10 साल तक की कैद और दो करोड़ रुपये तक जुर्माना करने की तैयारी है। नया कानून लागू होते ही 10 लाख जुर्माना भरकर बचने वाले बिल्डरों के लिए रास्ता बंद हो जाएगा और दो करोड़ की मोटी राशि जमा करनी होगी। सरकार ने यह भी तय किया है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई तय समयसीमा में की जाएगी। इस नियम के तहत अवैध कॉलोनी का पता चलने पर तीन चरणों में प्रशासन कार्रवाई करेगा। इसमें पहला 15 दिन के अंदर नोटिस जारी होगा और संबंधित को खुद निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर प्रशासन अगले 15 दिन में खुद अतिक्रमण हटाएगा और जमीन जब्त कर लेगा। शहर व गांव के लिए मिलेगा एक ही लाइसेंस नये कानून में ईमानदार बिल्डरों को राहत देने की तैयारी है। एक ही लाइसेंस से शहर और गांव दोनों में कालोनी विकसित की जा सकेगी। पांच साल में विकास पूरा होने पर 45 दिन में कंप्लीशन सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। देरी होने पर स्वत: अनुमति लागू मानी जाएगी। प्रशासनिक अधिकारों में भी बड़ा बदलाव होगा। नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त और अन्य क्षेत्रों में कलेक्टर को सीधे कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। जरूरत पड़ने पर एसडीएम को भी अधिकृत किया जा सकेगा। दावा है कि इस कानून के बाद अवैध कालोनियों का नेटवर्क तोड़ा जाएगा और जवाबदेही तय होगी। इनका कहना है     दो दिवसीय प्रशिक्षण में मध्यप्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम 2026 को लेकर चर्चा हुई है। जिस पर अभी शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है, जैसे निर्देश मिलेंगे उसके आधार पर कार्य किया जाएगा- संकेत भोंडवे, आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग।  

Google Chrome यूजर्स सावधान! एक क्लिक से हो सकता है सिस्टम हैक, जारी हुआ हाई अलर्ट

नई दिल्ली  भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome उपयोगकर्ताओं के लिए गंभीर अलर्ट जारी किया है। एजेंसी ने ब्राउजर में पाई गई कई तकनीकी कमजोरियों को “हाई रिस्क” श्रेणी में रखा है। इन खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधी किसी भी यूजर के सिस्टम पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। ऐसे में यह चेतावनी हर इंटरनेट यूजर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। यह खतरा खासतौर पर उन लोगों के लिए ज्यादा गंभीर है जो विंडोज, मैकओएस और लिनक्स जैसे डेस्कटॉप प्लेटफॉर्म पर ब्राउजर का उपयोग करते हैं। व्यक्तिगत यूजर्स के साथ-साथ कंपनियां और संस्थाएं भी इस जोखिम के दायरे में हैं। यानी जो भी व्यक्ति अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इंटरनेट ब्राउजिंग करता है, उसे तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। कैसे होता है साइबर अटैक? एजेंसी के मुताबिक, ब्राउजर (Google Chrome) के कई अहम हिस्सों में गंभीर कमजोरियां पाई गई हैं। इनमें वेब ऑडियो, वेबआरटीसी और मीडिया कंपोनेंट्स में ‘यूज-आफ्टर-फ्री’ जैसी त्रुटियां शामिल हैं। इसके अलावा V8 JavaScript Engine और CSS प्रोसेसिंग में ‘टाइप कन्फ्यूजन’ जैसी समस्याएं सामने आई हैं। साथ ही रेंडरिंग इंजन Blink में ‘आउट-ऑफ-बाउंड्स रीड/राइट’ जैसी खामियां पाई गई हैं, जो सिस्टम की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक मानी जाती हैं। इन कमजोरियों का असर डाउनलोड, डेवलपर टूल्स और नेविगेशन जैसे फीचर्स पर भी देखा गया है। इन खामियों का फायदा उठाने के लिए हैकर्स को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। वे यूजर को किसी फर्जी या संदिग्ध वेबसाइट पर क्लिक करने के लिए प्रेरित करते हैं। जैसे ही यूजर उस लिंक पर जाता है, ब्राउजर की कमजोरियां सक्रिय हो जाती हैं और हमलावर सिस्टम में घुसपैठ कर सकता है। इसके बाद डेटा चोरी, सिक्योरिटी बायपास या सिस्टम क्रैश जैसी घटनाएं हो सकती हैं। तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि सभी यूजर्स तुरंत अपने ब्राउजर (Google Chrome) को अपडेट करें। कंपनी ने इन खामियों को ठीक करने के लिए नया अपडेट जारी कर दिया है। यूजर्स ब्राउजर की सेटिंग्स में जाकर “Check for Updates” विकल्प के जरिए लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर सकते हैं। साथ ही ऑटोमैटिक अपडेट को चालू रखना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य के सुरक्षा पैच समय पर मिलते रहें। तकनीकी अपडेट के अलावा डिजिटल व्यवहार में सावधानी भी जरूरी है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और संदिग्ध वेबसाइट्स से दूरी बनाए रखें। साइबर खतरों के इस दौर में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है।

नर्मदा प्रदूषण पर सख्त कार्रवाई की तैयारी, जबलपुर हाई कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

जबलपुर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के पूर्व निर्देश के पालन में नर्मदा नदी को दूषित होने से बचाने के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से सुझाव पेश किए गए। सुझाव में कहा गया कि नर्मदा में मिलने वाले नालों की पहचान कर एसटीपी लगाए जाएं। उपचारित दूषित जल का कृषि, सिंचाई व औद्योगिक क्षेत्रों में उपयोग को गति दी जाए। हाईकोर्ट ने उक्त सुझावों को रिकॉर्ड पर ले लिया। इसी के साथ सभी पक्षों को युगलपीठ ने सुझावों के संदर्भ में जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 12 मई को निर्धारित की है। नालों के गंदे व हानिकारक दूषित पानी से सब्जी उगाने के संबंध में लॉ छात्र द्वारा लिखे गए पत्र को संज्ञान में लेते हुए हाईकोर्ट मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में कर रही है। इसके अलावा नर्मदा में मिलने वाले नालों और संक्रमित पानी की आपूर्ति के संबंध में भी दो अन्य याचिकाएं दायर की गई थीं। हाईकोर्ट ने विगत सुनवाई में सभी पक्षों को उक्त समस्याओं के समाधान के लिए ठोस उपाय सुझाने के निर्देश दिए थे। 'पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णतः अनुपयोगी' न्यायालय ने कहा था कि इंदौर में व्यवस्थाएं दुरुस्त हुई हैं, क्योंकि वहां जनता प्रशासन को पूरा सहयोग करती है। इस पर नर्मदा प्रदूषण रोकने के लिए दूरगामी और ठोस सुझाव देना चाहिए। मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने नालों के पानी की जांच रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया गया कि शहर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिला है, जिस कारण वह अत्यंत दूषित है। यह पानी पीने, निस्तार और सिंचाई के लिए पूर्णतः अनुपयोगी है। रिपोर्ट में कहा गया कि यदि नालों का यह पानी वाटर पाइपलाइन में मिल गया तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होंगी। वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दी ये दलील वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने दलील दी थी कि गौरीघाट में रोज सैकड़ों लोग तेल के दीये नर्मदा में विसर्जित करते हैं, जिससे पानी दूषित होता है। शहर में 174 मेगालीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है। डेमोक्रेटिक लायर्स फोरम के सचिव रविंद्र गुप्ता ने दलील दी थी कि शीघ्र ही साफ और बिना संक्रमित पानी पीने योग्य घरों में सप्लाई करने हेतु नगर निगम सक्षम नहीं है, इसलिए संपूर्ण मामले पर सही कार्रवाई के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जानी चाहिए। हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की चेयरमैनशिप में जबलपुर मेयर, जबलपुर कमिश्नर, जबलपुर कलेक्टर, पीएचई डिपार्टमेंट के हेड, किसी सीनियर सिटीजन, सोशल वर्कर और किसी सीनियर एडवोकेट को इसमें शामिल किया जाना चाहिए।