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रायपुर: ग्राम माकड़ी में आयोजित हुआ जनसमस्या निवारण शिविर, 13 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की शुरुआत

रायपुर : ग्राम माकड़ी में जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन विधायक सुउसेण्डी ने 13 करोड़ रूपए की लागत के विकास कार्यों की दी सौगात शासकीय महाविद्यालय सहित 18 निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन रायपुर  राज्य शासन के निर्देशानुसार जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों का लगातार आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दूरस्थ अंचलों के गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को  कोंडागांव जिले के ग्राम माकड़ी में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष और कोंडागांव विधायक सुलता उसेंडी उपस्थित रहीं।  विधायक सुउसेंडी ने शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विकास कार्यों के साथ-साथ आम नागरिकों को व्यक्तिगत योजनाओं का लाभ भी सुनिश्चित किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक गांव के सर्वांगीण विकास हेतु योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से क्षेत्र स्वस्थ बस्तर की दिशा में अग्रसर है, जिसके तहत विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य जांच की जा रही है। उन्होंने सभी ग्रामवासियों से अपील की कि स्वास्थ्य विभाग की टीम जब घर-घर पहुंचे, तो उन्हें सही जानकारी प्रदान करें, ताकि सभी के लिए स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कुपोषण एवं एनीमिया मुक्त समाज के निर्माण के लिए महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार हेतु सामूहिक सहभागिता पर जोर दिया। साथ ही युवाओं सहित सभी नागरिकों से अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया, ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके। कलेक्टर ने कहा कि माओवादमुक्त होने के पश्चात शासन द्वारा बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए अनेक योजनाएं प्रारंभ की गई हैं। मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के माध्यम से सघन स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु बस्तर मुन्ने अभियान के साथ सुशासन तिहार का आयोजन किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, योजनाओं के शत-प्रतिशत सेचुरेशन सुनिश्चित करने के लिए ‘नियद नेल्लानार 2.0’ की भी शुरुआत की जा रही है। विधायक ने प्री. मेट्रिक आश्रम में क्लास रूम निर्माण कार्य लागत 19 लाख रूपए, कन्या आश्रम में क्लास रूम निर्माण कार्य लागत 19.39 लाख रूपए, प्री. मे. बालक छात्रावास में क्लासरूम निर्माण लागत 19.39 लाख रूपए, लैब निर्माण कार्य लागत 22.89 लाख रूपए, नीति आयोग द्वारा लाइब्रेरी निर्माण कार्य 42 लाख रूपए, हीरावण्डी से बालेंग तक पुल पुलिया सहित निर्माण कार्य लंबाई 6.50 किलोमीटर लागत 685.29 लाख रूपए और शासकीय महाविद्यालय माकड़ी निर्माण कार्य लागत 465.84 लाख रूपए सहित कुल लागत 13 करोड़ 79 लाख रूपए के 18 विकास कार्यो का भूमिपूजन किया   27 हितग्राहियों को मिली आवास की चाबी शिविर में ग्रामवासियों से विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर कुल 57 आवेदन प्राप्त हुए। शिविर स्थल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 27 हितग्राहियों को आवास निर्माण पूर्ण होने पर प्रतीकात्मक चाबी वितरित, समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को 07 छड़ी और 10 हितग्राहियों को पेंशन स्वीकृति, शिक्षा विभाग द्वारा 12 जाति प्रमाण पत्र और गणवेश वितरण, श्रम विभाग द्वारा 07 श्रम कार्ड, खाद्य विभाग द्वारा 46 राशन कार्ड, उद्यान विभाग द्वारा  वर्मी बेड प्रदान किए गए। राजस्व विभाग द्वारा  किसान किताब, कृषि विभाग द्वारा  05 हितग्राहियों को उड़द बीज वितरण, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 04 हितग्राहियों को पोषण किट और 02 गोद भराई कार्यक्रम संपन्न कराया गया। इसी प्रकार पशुधन विभाग द्वारा श्रीमती योगश्वरी प्रधान को राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता योजना से 70 हजार, उन्नत मादा वत्स पालन योजना अंतर्गत दीपेन्द्र साहू को 14 हजार 625 रूपए और श्रीमती सुपोती मरकाम को 17 हजार 550 रूपए, त्रयी सुकर योजना अंतर्गत मंगलु मरकाम और मुकेश नेताम 09-09 हजार रूपए की अनुदान राशि दी गई। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य विभाग द्वारा 10 हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, सहकारी समिति द्वारा 06 नवीन केसीसी धारक किसानों को ऋण स्वीकृति और राजस्व विभाग द्वारा 09 किसानों को डिजिटल किसान किताब का वितरण किया गया। इस अवसर पर पूर्व विधायक सेवकराम नेताम, दीपेश अरोरा, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जुगबती पोयाम, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती रदमा बघेल एवं श्रीमती भगवती नेताम, जनपद उपाध्यक्ष बैसाखु कोर्राम, दीपेश अरोरा, जनपद सदस्य पन्नालाल नेताम, पूजा शर्मा, विरेन्द्र प्रधान, श्रीमती रूखमणी पोयाम, जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, जनपद पंचायत सीईओ गजेंद्र धुरडे, सरपंचगण, स्थानीय जनप्रतिनिधिगण एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पंजाब किंग्स का अजेय अभियान जारी, लखनऊ पर 54 रन से शानदार जीत – रिकॉर्ड्स की हुई बारिश

नईदिल्ली  आईपीएल 2026 का 29वां मुकाबला रविवार को पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जॉयंट्स के बीच खेला गया. इस मुकाबले में पंजाब किंग्स ने 54 रनों से शानदार जीत हासिल की. इस मैच में लखनऊ के कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया था. पंजाब ने प्रियांश आर्य और कॉनली के तूफानी फिफ्टी के दम पर 254 रन बनाए थे. इसके जवाब में लखनऊ की टीम 5 विकेट खोकर 200 रन ही बना सकी।  चेज नहीं कर सकी लखनऊ की टीम 255 रनों के जवाब में उतरी लखनऊ को शुरुआत ठीक ठाक मिली थी. मिचेल मार्श और आयुष बडोनी ने 61 रन जोड़ लिए थे. लेकिन फिर छठे ओवर में आयुष अपना विकेट गंवा बैठे. इसके बाद ऋषभ पंत ने मार्श के साथ अच्छी पारी खेली. लेकिन मार्श 40 और पंत 23 गेंद में 43 रन बनाकर आउट हो गए. इनका विकेट गिरते ही लखनऊ की पारी लड़खड़ा गई।  आखिरी ओवरों में एडम मार्करम और मुकुल चौधरी ने कोशिश जरूर की . लेकिन पंजाब की टीम ने इस मैच को आसानी से जीत लिया है. इस जीत के साथ ही 6 मैचों में पंजाब के पास 11 अंक हो गए हैं. वहीं, लखनऊ की टीम 6 मैच में केवल 4 अंक ही बंटोर सकी है।  प्रियांश आर्य-कॉनली के तूफान से कई रिकॉर्ड ध्वस्त पंजाब और लखनऊ के बीच रविवार को खेले गए मुकाबले में खूब चौके-छक्के देखने को मिले. पंजाब की ओर से प्रियांश आर्य और कूपर कॉनली ने तीसरे विकेट के लिए 182 रनों की साझेदारी की. उनकी खतरनाक बैटिंग देखकर हर कोई सन्न रह गया. जिसकी बदौलत पंजाब ने इस मैच में 254 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।  पंजाब की शुरुआत खराब रही थी, जब प्रभसिमरन सिंह गोल्डन डक पर आउट हो गए. इसके बाद प्रियांश और कॉनली ने पारी को संभालते हुए आक्रामक बल्लेबाज़ी की और महज 80 गेंदों में 182 रन जोड़ दिए. प्रियांश आर्य ने 37 गेंदों में 93 रन बनाए और शतक से चूक गए, जबकि कोनोली ने 46 गेंदों में 87 रन की शानदार पारी खेली. दोनों बल्लेबाज़ों ने मिलकर 16 छक्के और 12 चौके लगाए।  बन गया ये रिकॉर्ड यह साझेदारी पंजाब किंग्स के इतिहास की तीसरी सबसे बड़ी साझेदारी है. इससे आगे सिर्फ शॉन मार्श और एडम गिलक्रिस्ट (206 रन, 2011) और मयंक अग्रवाल और केएल राहुल (183 रन) की जोड़ियां हैं. दोनों बल्लेबाज़ों ने लखनऊ के गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की. साझेदारी का रन रेट 13.65 रहा, जो PBKS के लिए 100+ रन की साझेदारियों में चौथा सबसे तेज है।  मैच का सबसे महंगा ओवर 12वां रहा, जब Aiden Markram के ओवर में 32 रन बने. इस ओवर में कोनोली और प्रियांश दोनों ने दो-दो छक्के लगाए. यह Lucknow Super Giants के किसी भी गेंदबाज़ का सबसे महंगा ओवर बन गया, जिसने Ravi Bishnoi के 2022 एलिमिनेटर में दिए गए 27 रन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।  पंजाब की यह विस्फोटक बल्लेबाज़ी एक बार फिर दिखाती है कि टीम इस सीजन खिताब की प्रबल दावेदार क्यों मानी जा रही है।  प्रियांश ने मारे 9 छक्के इस मुकाबले में प्रियांश ने 37 गेंदों में 93 रन जड़े. अपनी पारी में उन्होंने 4 चौके और 9 छक्के लगाए. वहीं, कूपर कॉनली ने 46 गेंद में 87 रन बनाए और उन्होंने 7 छक्के और 8 चौके लगाए।  ऐसे रही पंजाब की बैटिंग पहले बल्लेबाजी के लिए उतरी पंजाब की शुरुआत अच्छी नहीं रही. और पहले ही ओवर में शमी ने प्रभसिमरन सिंह का विकेट झटक लिया. लेकिन इसके बाद प्रियांश आर्य और कूपर कॉनली ने तूफान मचा दिया. दोनों ने चंडीगढ़ में छक्के-चौकों की बारिश की. दोनों के बीच कमाल की साझेदारी हुई. लेकिन ये खतरनाक साझेदारी तोड़ी प्रिंस यादव ने जिन्होंने कॉनली का विकेट झटका. लेकिन दोनों के बीच 80 गेंदों में 182 रनों की साझेदारी हुई. कॉनली ने 46 गेंद में 87 रन बनाए और 7 छक्के लगाए।  इसके बाद प्रियांश आर्य भी अगले ही ओवर में चलते बने. लेकिन प्रियांश ने 37 गेंद में 93 रन ठोके. अपनी पारी में प्रियांश ने 4 चौके और 9 छक्के लगाए. इसके बाद नेहाल वढेरा ने 13 और शशांक सिंह ने 17 रन बनाए, जिसके दम पर पंजाब किंग्स ने 7 विकेट खोकर 254 रन बनाए।   

रायपुर: बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण के लिए शुरू हुआ विशेष अभियान

रायपुर : बैगा बहुल ग्रामों में महिला सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं रायपुर  खैरागढ़, छुईखदान, गंडई जिले के कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के निर्देशानुसार बीते दिनों विकासखंड छुईखदान के बैगा बहुल ग्राम सरई पतेरा एवं लालपुर में महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु विशेष अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बैगा जनजाति की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आर्थिक रूप से सक्षम बनाना एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करना रहा। कार्यक्रम के दौरान पद्मफुलबासन यादव के मार्गदर्शन में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के महत्व एवं उससे होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि समूह से जुड़कर वे अपनी आय में वृद्धि कर सकती हैं, साथ ही सामाजिक रूप से भी सशक्त बन सकती हैं। इस दौरान महिलाओं को समूह की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। अभियान में लगभग 150 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें से कई महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़ने की इच्छा व्यक्त की। इसके लिए संभावित सदस्यों की सूची तैयार कर आगे समूह गठन की प्रक्रिया को गति देने की पहल की गई। कार्यक्रम में जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के अधिकारी-कर्मचारी, डीपीएम, बीपीएम, एसी, पीआरपी, एफएलसीआरपी, सक्रिय महिलाएं, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

एमपी कांग्रेस में फिर से संगठनात्मक बदलाव की प्रक्रिया, ओंकार और सिद्धार्थ समेत कई जिलाध्यक्षों की बारी

भोपाल  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में है। पार्टी के भीतर 'शौक' के लिए पद पर काबिज नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्त रुख अपनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के 71 जिला अध्यक्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार हो चुका है, संगठन सृजन अभियान की लंबी प्रक्रिया के बाद एमपी में बनाए गए कांग्रेस के जिलाध्यक्षों में कई दिग्गज उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे हैं। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी की ओर से एमपी भेजे गए वामसी रेड्‌डी की समीक्षा में करीब 12 जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट चिंताजनक पाई गई है। अब एआईसीसी यानी राष्ट्रीय नेतृत्व को जिलाध्यक्षों की रिव्यू रिपोर्ट भेजी जाएगी। दिल्ली की हरी झंडी मिलने के बाद पुअर परफॉरमेंस वाले जिला अध्यक्षों को हटाया जा सकता है। बडे़ नेता भी जिलाध्यक्ष के तौर पर कमजोर साबित हुए पार्टी सूत्रों की मानें तो जिन जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट रिव्यू में कमजोर मिली है। उनमें सीनियर लीडर भी बतौर जिलाध्यक्ष फेल साबित हुए हैं। पूर्व मंत्री और कांग्रेस की सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) के मेंबर ओमकार सिंह मरकाम(जिलाध्यक्ष डिंडोरी) , सतना विधायक और ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह(जिलाध्यक्ष सतना), मंडला के पूर्व विधायक डॉ अशोक मर्सकोले(जिलाध्यक्ष मंडला) जैसे नेता भी जिलों में अपेक्षा पर खरे नहीं उतरे। इंदौर शहर अध्यक्ष को भी बदला जा सकता है कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि पार्टी आलाकमान इंदौर के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के निर्णयों और बयानों से संगठन नाराज है। दिग्विजय सिंह के इंदौर में एक प्रदर्शन को लेकर चिंटू चौकसे ने बयान दिया था। पार्षदों के वंदे मातरम विवाद पर पार्टी आलाकमान से चर्चा किए बिना की गई बयानबाजी के बाद अब इंदौर में शहर अध्यक्ष को बदला जा सकता है। आठ महीने पहले हुई थी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पिछले साल जून 2025 में भोपाल में राहुल गांधी ने संगठन सृजन अभियान की शुरुआत की थी। करीब दो महीनों के लंबे मंथन और बैठकों के बाद जिला अध्यचों के नाम तय किए गए थे। अब सिर्फ पद नहीं, काम जरूरी बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों को साफ शब्दों में संदेश दिया गया कि अब जिम्मेदारी मिलने का मतलब केवल पद संभालना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से काम करना है। उन्हें निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मंडल, ब्लॉक, गांव और वार्ड स्तर तक संगठन का मजबूत ढांचा खड़ा करें और हर स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि अब केवल कागजों पर कमेटियां बनाकर सूची भेजना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि हर नियुक्ति और हर इकाई का फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाएगा। यदि कोई पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से अनजान पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।  परफॉर्मेंस पर टिकेगा भविष्य, समीक्षा तय बैठक में संगठन के भीतर जवाबदेही तय करने पर विशेष जोर दिया गया। जिला अध्यक्षों के काम का मूल्यांकन पहले से जारी है। ब्लॉक अध्यक्षों के काम की भी छह महीने बाद समीक्षा की जाएगी। इससे साफ संकेत मिला कि आने वाले समय में संगठन में परफॉर्मेंस बेस्ड सिस्टम लागू होगा, जहां सक्रिय और काम करने वाले नेताओं को ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। जन संवाद के जरिए जनता से सीधा संपर्क बढ़ाने की रणनीति संगठन प्रभारी संजय कामले ने कहा कि अब हर ब्लॉक स्तर पर जन संवाद कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए कि वे रोजाना लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें पार्टी की विचारधारा से जोड़ें। नेताओं का मानना है कि जनता से सीधा संवाद ही संगठन को मजबूत करने का सबसे प्रभावी तरीका है और इससे पार्टी की पकड़ फिर से मजबूत होगी।   2028 चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा संगठन पूरे सम्मेलन में यह साफ दिखा कि कांग्रेस अब 2023 की हार के बाद संगठन को दोबारा मजबूत करने में जुटी है। ब्लॉक स्तर से लेकर बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर 2028 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश की जा रही है। हर परिवार से 100 रुपए लेने का प्रस्ताव भी चर्चा में बैठक के दौरान एक अहम प्रस्ताव यह भी सामने आया कि हर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक परिवार से 100 रुपए सहयोग राशि ली जाए। इस राशि को जिला और ब्लॉक स्तर पर ही खर्च किया जाएगा, ताकि संगठन को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सके और स्थानीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो सकें। नेताओं का मानना है कि इससे न केवल संसाधन जुटेंगे, बल्कि आम लोगों के साथ पार्टी का सीधा जुड़ाव भी बढ़ेगा। 

पचमढ़ी में गर्म जलवायु में सेब के बागान, मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे स्थान पर पर्यटकों का आकर्षण

नर्मदापुरम  देश के चुनिंदा हिल स्टेशनों में शामिल पचमढ़ी विभिन्न वैरायटी के आमों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन अब यहां शासकीय पोलो उद्यान ने नया प्रयोग करके सभी को हैरान कर दिया है. पचमढ़ी में जल्द ही सेब बागान आकर्षण का केंद्र होंगे. क्योंकि यहां हिमाचल प्रदेश के सेब के पौधे लगाकर उत्पादन करने का प्रयोग सफल हो गया है. दो साल पहले गर्म वातावरण में भी फल देने वाले सेब की तीन वैरायटियों के पौधे लगाए गए थे, जिनमें फल आने लगे हैं. जिसका स्वाद अगस्त-सितंबर महीने में पकने पर मिल पाएगा. इसी के साथ ही प्रदेश की दूसरी सरकारी नर्सरियों में भी सेब के पौधे लगाने की तैयारी होगी. वहीं किसानों को पचमढ़ी के उद्यान में पौधे तैयार करके लगाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. जिससे गर्म वातावरण में पैदा होने वाले सेब किसानों की आय का जरिया बन सकें।  सभी वातावरण में मिलते हैं फल पचमढ़ी के शासकीय पोलो उद्यान में लगाए गए 500 पौधों में से 35% फलदार हो गए हैं. वहीं 40% पौधों में फूल लगे हैं, जो जल्द ही फल बनने की प्रक्रिया में पहुंच जाएंगे. दो साल पहले पोलो उद्यान की दो एकड़ जमीन पर हिमाचल प्रदेश की एचआर 99, अन्ना इजरायल और डोरसेट गोल्डन वैरायटी के पौधों का रोपण हुआ था. यह पौधे वहां की प्राइवेट नर्सरियों से लाए गए थे. जो अब चार से पांच फीट तक ऊंचाई के हो गए हैं. सेब की इन वैरियटयों का चुनाव गर्म और सर्द वातावरण में पौधों के पनपने और फल देने के कारण किया गया था. इन वैरायटी के सेब पौधों को ज्यादा ठंडे वातावरण की आवश्यकता नहीं होती है. सामान्य तापमान में भी सेबों की पैदावार होती है. पचमढ़ी के वातावरण में सेब के पौधों की उचित देखभाल और संरक्षण के कारण यह फल देने लगे हैं।  सेब से मिल सकता है लाखों का मुनाफा पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर बताया, "शुरुआत के 4 साल बाद एक सेब के पौधे से 25 से 30 किलो तक फल मिल सकते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे पौधा बड़े पेड़ का रूप लेगा तब उत्पादन दोगुना हो जाएगा. एचआर 99 प्रजाति के 800 पौधे एक एकड़ में लगाए जा सकते हैं. यदि किसान 1 एकड़ में 500 पौधे लगाकर उत्पादन लेता है तो एक पौधे से 25 किलो के हिसाब से कुल 12500 किलो सेब प्राप्त कर सकता है. जिसका थोक मूल्य 4 से 5 लख रुपए तक जा सकता है।  सेब लगाने का प्रयोग हुआ सफल पोलो उद्यान के प्रभारी राजू गुर्जर ने बताया, "2 साल पहले पचमढ़ी में सेब के उत्पादन का प्रयोग किया गया था. जो सफल हुआ है. हिमाचल प्रदेश से जो पौधे ले गए थे आज इनमें फूल और फल दोनों लग रहे हैं. प्रदेश में पचमढ़ी का वातावरण हिमाचल के सेब पौधों के लिए उपयुक्त था, क्योंकि यहां गर्मी में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री तक रहता है. सर्दी में एक डिग्री तक तापमान पहुंचता है. मिश्रित वातावरण के कारण सेब का बागान लगाने का प्रयोग सफल हुआ है।  उन्होंने आगे बताया, "अगस्त में जो फल लगे हैं वह पकना शुरू होंगे. तब यह देखा जाएगा कि कितने पौधों से कितना उत्पादन हुआ. इसके बाद पौधों की संख्या बढ़ाई जाएगी और मैदानी क्षेत्र की नर्सरी और किसानों को भी पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. किसानों को सेब के पौधे और उनका उत्पादन बढ़ाने का उन्नत प्रशिक्षण देने की भी हमारी तैयारी है. भविष्य में पचमढ़ी के साथ कई अन्य स्थानों पर भी सेब के बागान देखने को मिल सकते हैं। 

6.83 लाख महिलाओं को हर महीने मिल रही आर्थिक ताकत, डॉ. बलजीत कौर का बड़ा बयान

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने राज्य की विधवाओं और बेसहारा महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के मार्च महीने के लिए सरकार ने 102 करोड़ रुपये से ज़्यादा की रकम जारी की है। इस बारे में जानकारी शेयर करते हुए सोशल सिक्योरिटी, महिला और बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि सरकार समाज के कमजोर तबके, खासकर महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह फाइनेंशियल मदद हजारों महिलाओं के लिए एक सहारा बन रही है, जिससे वे अपनी रोज़ाना की ज़रूरतें पूरी कर सकती हैं और भरोसे के साथ ज़िंदगी जी सकती हैं। मंत्री ने कहा कि अभी राज्य की 6,83,004 विधवाएं और बेसहारा महिलाएं इस स्कीम का फायदा उठा रही हैं और उन्हें हर महीने रेगुलर पेंशन दी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए, सरकार ने हर योग्य बेनिफिशियरी को बिना किसी रुकावट के मदद मिले, यह पक्का करने के लिए 1200 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट प्रोविजन किया है। उन्होंने कहा कि 58 साल से कम उम्र की विधवा और बेसहारा महिलाएं, 30 साल से ज़्यादा उम्र की अविवाहित महिलाएं और 60,000 रुपये तक की सालाना इनकम वाली महिलाएं इस स्कीम के लिए एलिजिबल हैं। मिनिस्टर ने दोहराया कि पंजाब सरकार महिलाओं के एम्पावरमेंट और वेलफेयर के लिए पूरी तरह से कमिटेड है और ऐसी स्कीम महिलाओं को इज्ज़तदार ज़िंदगी जीने में मदद कर रही हैं।

आप अनपढ़ हैं, शक्तियां नहीं जानते: HC ने कलेक्टर को कड़ी फटकार लगाई

भरूच गुजरात हाई कोर्ट ने  भरूच के जिला कलेक्टर को जबरदस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको तो अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। मामला एक जनहित याचिका के जवाब से जुड़ा था। बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक जनहित याचिका के जवाब में एक अस्पष्ट हलफनामा दायर करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भरूच के जिला कलेक्टर को फटकार लगाई। याचिका में अमोनियम नाइट्रेट भंडारण इकाइयों द्वारा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन राय की बेंच ने कहा कि कलेक्टर अनपढ़ हैं। उन्हें संबंधित नियमों की जानकारी नहीं हैं। यहां तक कि उन्हें अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी कोई ज्ञान नहीं था। अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण से जुड़ा मामला चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है, जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिले में अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक पदार्थ) के भंडारण और प्रोसेसिंग में लगी औद्योगिक इकाइयां जरूरी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। इस मामले के केंद्र में मौजूद इस केमिकल को भारतीय कानून के तहत लंबे समय से एक खतरनाक पदार्थ माना जाता रहा है। इसे खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें भोपाल गैस त्रासदी के बाद बनाया गया था। यह अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 द्वारा भी शासित होता है। किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम होंगे याचिका के अनुसार, इन नियमों में सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही इसके निर्माण, भंडारण, परिवहन और संचालन के लिए विस्तृत सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि यह अत्यधिक विस्फोटक पदार्थ है। याचिका के अनुसार, इन नियमों का प्रवर्तन मुख्य रूप से पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के अधीन कार्यरत मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और स्थानीय पुलिस के अधीन है। याचिका में चेतावनी दी गई कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। विशेष रूप से उन सघन औद्योगिक क्षेत्रों में जहां अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा को अन्य खतरनाक कार्यों और रिहायशी इलाकों के बेहद करीब ही संभाला जाता है। कलेक्टर द्वारा पेश किया गया हलफनामा खारिज कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा पेश किए गए हलफनामे को खारिज कर दिया और यह टिप्पणी की कि 2012 के नियमों से पहले भी अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक नियम 2008 के नियामक दायरे में आता था। पुरानी इकाइयों के लिए सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या राज्य ने उन पिछली रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई की थी, जिनमें मानदंडों के उल्लंघन का खुलासा हुआ था। हलफनामे में दिया गया यह बयान अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह साफ नहीं है कि कौन सी इकाई निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही थी। ऐसा लगता है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है और न ही जिला कलेक्टर के शपथ-पत्र में ऐसा कुछ है जिससे यह पता चले कि 19 मार्च 2025 और 23 मार्च 2026 की रिपोर्टों पर जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई की गई हो। कोर्ट ने वकील की आलोचना की कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा पेश एक नई रिपोर्ट पर संदेह व्यक्त किया, क्योंकि यह बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के उल्लंघन से संबंधित पिछली निष्कर्षों के उलट थी। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य के एक वकील की आलोचना की, जिन्होंने उसके समक्ष इतना अस्पष्ट हलफनामा दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि आप अधिकारियों के मुखपत्र नहीं हैं। इस तरह का हलफनामा दायर करके आप अधिकारियों के मुखपत्र बन जाते हैं, जबकि आप एक वकील हैं। आप हमें हल्के में ले नहीं सकते कोर्ट ने कहा कि हम सब्र रख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें हल्के में ले सकते हैं। जब वकील ने हलफनामा वापस लेने और उसकी जगह नया हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी तो अदालत ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम आपको इसे यूं ही वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य मुद्दा केवल यह नहीं था कि कौन से नियम लागू होते हैं, बल्कि यह था कि क्या विस्फोटक के भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का वास्तव में पालन किया जा रहा था। कलेक्टर को निर्देश दिया इसके बाद कोर्ट ने अंकलेश्वर के मामलतदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रतिवादी इकाइयों का एक नया निरीक्षण करें। कोर्ट ने कलेक्टर को यह भी निर्देश दिया कि वे इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच करें। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ एक नया हलफनामा दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।

किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर कर रहा कार्य: कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल. किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों की आय बढ़ाना और खेती को लाभ का धंधा बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने खरीफ सीजन-2026 के मद्देनजर किसानों के लिए समसामयिक सलाह जारी करते हुए विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसानों को खरीफ की तैयारी के लिए कृषि विभाग युद्ध-स्तर पर तैयारी कर रहा है। किसानों के लिए समसामयिक सलाह मिट्टी परीक्षण कराएं : बोवनी से पहले खेत की मिट्टी की जांच अवश्य कराएं। सभी विकासखंडों में निःशुल्क मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाए जाते हैं। बीज उपचार जरूरी : सोयाबीन, मूंग, उड़द व मक्का की बोवनी से पहले फफूंदनाशक व राइजोबियम कल्चर से बीज उपचार करें। इससे 15-20 प्रतिशत उत्पादन क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी। मौसम आधारित बोवनी : 4 इंच बारिश के बाद ही बोवनी करें। ‘एमपी किसान ऐप’ पर 7 दिन का मौसम पूर्वानुमान देखकर निर्णय लें। अन्न को अपनाएं : कम पानी में तैयार होने वाली कोदो, कुटकी, रागी जैसी मिलेट फसलों का रकबा बढ़ाएं। सरकार समर्थन मूल्य पर खरीद करेगी। प्राकृतिक खेती : रासायनिक उर्वरकों की जगह जीवामृत, घन-जीवामृत व वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करें। लागत घटेगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी। कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे प्रमुख प्रयास मंत्री कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषि विभाग किसानों के कल्याण के लिए युद्ध-स्तर पर कार्य कर रहा है। खरीफ-2026 के लिए 28 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज, 45 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण पूरा कर लिया गया है। कालाबाजारी पर कड़ी नजर रखी जा रही है औरकंट्रोल रूम सक्रिय हैं। ‘पर ड्रॉप-मोर क्रॉप’ के तहत 75 हजार हेक्टेयर में सूक्ष्म सिंचाई के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। 25 हजार नए खेत तालाब स्वीकृत किए गए हैं। ‘ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल’ से 1.5 लाख किसानों को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर की संख्या 2500 की गई है। ‘मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना’ में लगभग 90 लाख किसानों को सालाना 6000 रुपये की सहायता दी जा रही है। ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ में नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। एफपीओ के माध्यम से किसानों को प्रोसेसिंग, ग्रेडिंग और निर्यात से जोड़ा जा रहा है। ‘ओडीओपी’ के तहत हर जिले का विशेष उत्पाद ब्रांड किया जा रहा है। मंत्री कंषाना ने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश का किसान देश में सबसे समृद्ध हो। विभाग का हर अधिकारी-कर्मचारी खेत तक पहुंचकर किसानों की समस्या का समाधान करेगा। किसान किसी भी समस्या के लिए कृषि विभाग के टोल-फ्री नंबर, ‘एमपी किसान ऐप’ या नजदीकी कृषि विकास अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

भारत को मिला बड़ा खजाना, तेल संकट के बीच 42.5 टन सोने का भंडार और डॉलर की बारिश का अनुमान

नई दिल्‍ली  भारत में सोने के प्रति दीवानगी सदियों पुरानी है. भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में से एक है. हम हर साल 800 टन से अधिक सोना विदेशों से आयात (Import) करते हैं. सोने के मामले में देश को आत्‍मनिर्भर बनाने के प्रयास कई सालों से हो रहे हैं. इसमें सफलता भी मिली है. इसी कड़ी में अब आंध्र प्रदेश के कर्नूल (Kurnool) जिले में देश की पहली प्राइवेट गोल्‍ड माइन मई में शुरू होने वाली है. जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (Geomysore Services India Pvt Ltd) की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान है।  इस परियोजना का प्रोसेसिंग प्लांट (Processing Plant) मई के पहले सप्ताह में पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है. वर्तमान में यहां प्री-कमर्शियल ऑपरेशंस चल रहे हैं. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा इस महत्वाकांक्षी परियोजना को राष्ट्र को समर्पित किए जाने की उम्मीद है. राज्य के खनन एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार मीना ने इसे भारत की व्यापक स्वर्ण खनन महत्वाकांक्षाओं के लिए एक ‘ऐतिहासिक क्षण’ करार दिया है।  42.5 टन सोना होने का अनुमान एक रिपोर्ट के अनुसार, जोन्नागिरी, एर्रागुडी (Erragudi) और पागिदिरायी (Pagidirayi) गांवों में 598 हेक्टेयर क्षेत्र में सोने का 13.1 टन प्रमाणित भंडार (Certified Reserves) है. यहां कुल 42.5 टन तक होने सोना होने की संभावना जताई गई है. जब यह खदान अपनी पीक क्षमता (Peak capacity) पर होगी, तब यहां से हर साल करीब 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा. यह सिलसिला अगले 15 वर्षों तक निरंतर जारी रहने की उम्मीद है।  400 करोड़ का निवेश इस पूरे प्रोजेक्ट में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है. इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स एंड इंफ्रा (Thriveni Earthmovers & Infra) और डेक्कन गोल्ड (Deccan Gold) जैसी दिग्गज कंपनियों का समर्थन प्राप्त है. जोन्नागिरी परियोजना अकेले इस विशाल आयात को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकती, लेकिन यह घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा संरचनात्मक बदलाव है।  हुट्टी गोल्ड माइंस (Hutti Gold Mines) जैसे वर्तमान सरकारी संयंत्र सालाना केवल 1.5 टन उत्पादन कर पाते हैं, जबकि प्रसिद्ध कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields – KGF) साल 2000 में ही बंद हो चुके हैं. ऐसे में जोन्नागिरी जैसी निजी परियोजनाओं का सफल होना एक सकारात्मक संदेश है।  अत्याधुनिक तकनीक से खनन जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड्स में इन दिनों आधुनिक मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों की गूंज सुनाई देती है. महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में इस प्रोसेसिंग प्लांट को तैयार किया गया है. त्रिवेणी अर्थमूवर्स के प्रबंध निदेशक बी. प्रभाकरन का मानना है कि यह प्रोजेक्ट भारत में ‘जिम्मेदार और प्रतिस्पर्धी खनन’ का एक वैश्विक मॉडल पेश करता है. जियोमैसूर के निदेशक हनुमा प्रसाद मोदाली का कहना है कि इस सफलता से भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी निजी निवेश का रास्ता साफ होगा। 

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वयं अपना स्वगणना फॉर्म भरा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने जनगणना–2027 अंतर्गत स्व-गणना प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए स्वयं कंप्यूटर के माध्यम से स्व-गणना फॉर्म भरकर नागरिकों को प्रेरित किया और यह संदेश दिया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सहज है। उप मुख्यमंत्री ने समस्त नागरिकों से इस डिजिटल सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रारंभ की गई यह आधुनिक डिजिटल सुविधा नागरिकों को घर बैठे सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक तरीके से जनगणना में भाग लेने का अवसर प्रदान करती है। कोई भी नागरिक पोर्टल पर लॉगिन कर कुछ आसान प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी एवं अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है। उप मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और जनगणना कार्य को सफल बनाने में अपनी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करें। सभी स्व-गणना करें और सशक्त, पारदर्शी एवं डेटा-संपन्न भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। उल्लेखनीय है कि जनगणना–2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य एक मई 2026 से 30 मई 2026 तक किया जाएगा। इसके पूर्व 16 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना हेतु पोर्टल पर विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस अवधि में नागरिक अपनी स्व-गणना समय रहते पूर्ण कर सकते हैं, जिससे आगामी प्रक्रिया और अधिक सुगम हो सके। इससे नागरिकों को घर, कार्यालय अथवा किसी भी स्थान से मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से सुरक्षित रूप से जानकारी दर्ज करने की सुविधा मिलती है। यह न केवल समय की बचत करता है, बल्कि डेटा संग्रहण को अधिक सटीक एवं प्रभावी भी बनाता है। जनगणना–2027 में पहली बार नागरिकों को स्व-गणना का विकल्प प्रदान किया गया है, जो एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सशक्त एवं समावेशी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगी और देश के विकास के लिए आवश्यक आंकड़ों का संकलन अधिक सुगमता से किया जा सकेगा। जनगणना का द्वितीय चरण, जिसमें जनसंख्या गणना की जाएगी, फरवरी 2027 में पूरे देश में संपन्न होगा। इस दृष्टि से वर्तमान स्व-गणना प्रक्रिया नागरिकों को प्रारंभिक चरण में ही जुड़ने और अपनी जिम्मेदारी निभाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा, जिला प्रभारी जनगणना अधिकारी शशिकांत शुक्ला उपस्थित रहे।