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मध्यप्रदेश में सड़कों के कायाकल्प के लिए ‘4 करोड़’ का बजट, अधिकारियों को निर्देश

बड़वानी  शहर के करीब सभी वार्ड में नगर पालिका जल्द ही सड़कों का कायाकल्प करने जा रही है। जहां सडक़ें नहीं है। वहां निर्माण किया जाएगा और जहां स्थिति खराब है। वहां सडक़ों का रिपेयर करने का लक्ष्य रखा है। नपा अध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि नगर के सभी वार्ड में स्थिति की समीक्षा करके आम लोगों की परेशानी को दूर करें। इन कार्यों के लिए करोड़ों रुपए का आवंटन किया गया है। नपा अधिकारियों ने बताया कि 4 करोड़ से अधिक की लागत से नगर की विभिन्न सड़कों का कायाकल्प किया जाएगा। अधिकारियों ने उन सड़कों का चिह्नित करना शुरू कर दिया है, जहां पर रिपेयर किया जाना है। वहीं नगर के विभिन्न वार्डों की गलियों में सडक़ निर्माण होगा। जहां पर अभी तक सडक़ें नहीं बनाई जा सकी। खास बात है कि जिन सडक़ों की स्थिति खराब हो रही है। वहां डामरीकरण का लक्ष्य रखा है। अभिनव कॉलोनी, श्याम बाजार में डामरीकरण की सफलता से अधिकारी उत्साहित है। कार्य के लिए टेंडर नोटिस जारी किए जा चुके है। परिषद की बैठकों में पार्षदों से की थी चर्चा सूत्रों ने बताया कि नपा के पदाधिकारी और अधिकारियों ने विभिन्न वार्ड के पार्षदों से चर्चा कर सडक़ निर्माण के प्रस्ताव बुलाए है। हालांकि अभी ये जानकारी नहीं दी गई है कि किन वार्डों में निर्माण कार्य होना है और किन वार्डों में रिपेयर कार्य किए जाएंगे। हालांकि अधिकारियों को कहना है कि जहां भी कमी होगी उसे पूरा करेंगे।  पिछले वर्ष भी करोड़ों रुपयों के टेंडर निकाल सडक़ों के कायाकल्प का कार्य किया था, जिससे आम लोगों को राहत मिली थी। वर्तमान में पटेल कॉलोनी, इंदिरा कॉलोनी, महावीर नगर, मोतीबाग, देवझिरी, पुराना आरटीओ बेड़ी पर सडक़ निर्माण कार्य हुए है। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दीवारों पर पेंटिंग स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 को लेकर नगर पालिका अपनी तैयारी कर रही है विभिन्न कैटेगरी में ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। खास बात है कि इस वर्ष दीवारों पर पेंटिंग करने को लेकर बड़े स्तर पर अभियान चल रहा है। पिछले 5 वर्षों में स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सबसे अधिक वॉल पेंटिंग इसी वर्ष की गई है। सूत्रों ने बताया कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में गंदी गलियों की सफाई कैटेगरी में अंक कम मिले थे, जिससे नपा पिछड़ गई थी, लेकिन इस बार नपा अधिकारी उसी तरह ध्यान दे रहे हैं। पेंटिंग के माध्यम से सफाई, कचरा संग्रहण सहित पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जहां गंदी दीवारें थी। अब वहां पेंटिंग बनाने से सुंदरता बढ़ी है।

रेलवे ने मंजूरी दी 15 समर स्पेशल ट्रेनों को, भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन में बढ़ेगा यात्री लाभ

भोपाल  गर्मियों के मौसम में बढ़ने वाली यात्रियों की भीड़ को देखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे ने इस बार पहले से व्यापक तैयारी की है। 15 अप्रैल से 15 जुलाई तक चलने वाले समर स्पेशल ट्रेनों के प्लान के तहत यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी। रेलवे का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और लंबी दूरी की यात्रा को अधिक सुगम बनाना है। रेलवे द्वारा तैयार योजना के अनुसार कुल 15 समर स्पेशल ट्रेनें चलाई जाएंगी, जिनके जरिए 288 ट्रिप्स संचालित होंगे। इनमें से पांच ट्रेनों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है। भोपाल, जबलपुर और कोटा को बड़ा फायदा इस योजना का सबसे अधिक लाभ भोपाल, जबलपुर और कोटा डिवीजन के यात्रियों को मिलेगा। इन शहरों से देश के प्रमुख महानगरों और पर्यटन स्थलों के लिए सीधी कनेक्टिविटी बेहतर होगी। दक्षिण भारत के मैसूर और कोयंबटूर जैसे शहरों के लिए सीधी ट्रेन सुविधा मिलने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। हर दिन हजारों यात्रियों को राहत रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस व्यवस्था से प्रतिदिन करीब पांच से सात हजार यात्रियों को लाभ मिलेगा। गर्मियों में उत्तर भारत से महाराष्ट्र, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह योजना बनाई गई है। 10 नई ट्रेनों का प्रस्ताव तैयार रेलवे ने 10 नई समर स्पेशल ट्रेनों का प्रस्ताव भी तैयार किया है, जिनके जरिए 158 अतिरिक्त ट्रिप्स संचालित करने की योजना है। इनमें रानी कमलापति से मैसूर, जबलपुर से येलहंका और कोटा से मथुरा व धनबाद के लिए ट्रेनें शामिल हैं। कुछ ट्रेनें साप्ताहिक होंगी, जबकि कुछ सप्ताह में दो बार चलाई जाएंगी। यात्रा होगी आसान और सुविधाजनक रेलवे का मानना है कि इन अतिरिक्त ट्रेनों से यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी और वेटिंग की समस्या कम होगी। इससे सफर अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बन सकेगा।

भारत का बड़ा कदम: होर्मुज नाकेबंदी के बीच रूसी तेल की खरीद अब सरल, 2030 तक की किचकिच खत्म

नई दिल्ली अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी से उभरे तेल-गैस संकट के बीच भारत ने बड़ा रणनीतिक दांव खेला है. भारत सरकार ने रूसी तेल की सप्लाई को निर्बाध बनाए रखने के लिए समुद्री बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या बढ़ा दी है, जिससे आने वाले वर्षों तक तेल आयात में आने वाली बाधाएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी।  डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के फैसले के मुताबिक, अब 8 की जगह 11 रूसी बीमा कंपनियों को भारत के बंदरगाहों पर आने वाले जहाजों को कवर देने की मंजूरी दी गई है. ये कंपनियां प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी (P&I) कवर प्रदान करेंगी, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए बेहद जरूरी होता है।  भारत ने खत्म किया सबसे बड़ा रोड़ा दरअसल, रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते यूरोप की बड़ी बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ढोने वाले जहाजों को कवर देना कम कर दिया था. ऐसे में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि वह अपने लिए वैकल्पिक इंश्योरेंस व्यवस्था तैयार करे. अब रूसी कंपनियों को मंजूरी देकर भारत ने इस समस्या का बड़ा समाधान निकाल लिया है।  गज़प्रोम इंश्योरेंस और रोसगोस्त्राख जैसी प्रमुख कंपनियों को फरवरी 2027 तक बीमा सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, जबकि VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी जैसी कुछ कंपनियों को 2030 तक की लंबी मंजूरी मिल गई है. यह संकेत है कि भारत ने सिर्फ तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान पर भी काम किया है।  इसके अलावा सोग्लासिए, स्बरबैंक इंश्योरेंस, उगोरिया इंश्योरेंस ग्रुप और ASTK इंश्योरेंस जैसी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन भी बढ़ाया गया है. वहीं दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब को भी फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति देकर भारत ने गैर-पश्चिमी विकल्पों का दायरा और बढ़ा दिया है।  होर्मुज की टेंशन पर लगाम यह फैसला ऐसे समय आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी ने दुनियाभर में तेल सप्लाई की चिंता बढ़ा दी है. दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है, और किसी भी बाधा का सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ता है।  भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है. हाल के वर्षों भारत ने सस्ते रूसी तेल का आयात काफी बढ़ा दिया है. ऐसे में बीमा कवर की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी था, क्योंकि बिना बीमा के कोई भी जहाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेट नहीं कर सकता।  विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह कदम वैश्विक अस्थिरता के बीच एक ‘सेफ्टी कवच’ की तरह काम करेगा. इससे न सिर्फ रूसी तेल की सप्लाई बनी रहेगी, बल्कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को भी बिना रुकावट पूरा कर सकेगा. कुल मिलाकर, होर्मुज संकट और पश्चिमी दबाव के बीच भारत ने एक ऐसा रास्ता निकाल लिया है, जिससे 2030 तक तेल सप्लाई से जुड़ी बड़ी ‘किचकिच’ खत्म होती नजर आ रही है। 

मध्य प्रदेश में आईपीएस तबादलों का दौर शुरू, मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश जारी होने की उम्मीद, प्रशासनिक हलचल

भोपाल  IAS अधिकारियों के तबादलों के बाद मध्य प्रदेश में IPS अफसरों की ट्रांसफर घड़ी बिल्कुल पास आ चुकी है। अब किसी भी समय ऐलान हो सकता है। काफी समय से ये तबादला लिस्ट तैयार है।   दरअसल मध्य प्रदेश में मोहन सरकार पुलिस विभाग में बड़ी सर्जरी करने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय पुलिस सेवा के लगभग 25 अधिकारियों के तबादले की सूची लगभग तैयार है। इस फेरबदल की खास बता ये है कि करीब 20 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के बदलने पर सहमति बन चुकी है। वहीं जानकारी सामने आ रही है कि  इस बार तबादलों का आधार कई पहलू हैं , इनमें परफॉर्मेंस से लेकर फीडबैक जैसे अहम फैक्टर्स भी भूमिका निभाएंगे। मतलब की अधिकारियों की परफार्मेंस पर नजर है और यही आधार अगली पोस्टिंग के लिए कारगर होगा। जानकारी ये है कि करीब 8 जिलों के कप्तानों का काम मुख्यमंत्री मोहन यादव की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। वही 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों के खिलाफ से शिकायतें मिलने की सूचना है। वहीं इसके अलावा 5 जिलों में तैनात आईपीएस अधिकारियों का प्रमोशन हो चुका है, जिसके चलते उन्हें नई जिम्मेदारी मिलेगी। जानकारी के मुताबिक शाजापुर, शिवपुरी, डिंडौरी, मंडला, छतरपुर, बुरहानपुर, निवाड़ी और नीमच के एसपी को हटाने पर काम हो चुका है। वही दमोह, सिवनी, आगर मालवा, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर जैसे जिलों के लिए प्रभावशाली चेहरों की जरुरत है। जिनके नाम फाइनल होने वाले हैं। प्रशासनिक गलियारों में हलचल तबादलों की आहट ने पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक बेचैनी बढ़ गई है। ये सूची किसी भी वक्त मुख्यमंत्री कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद जारी हो सकती है। लिहाजा हलचल तेज है।  

मध्यप्रदेश में ‘इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी’ लागू, 6 जिलों और 2510 गांवों को मिलेगा लाभ

भोपाल  मेट्रोपॉलिटन रीजन प्रोजेक्ट का सबसे ज्यादा फोकस रोजगार और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत नर्मदापुरम रोड नया आर्थिक क्षेत्र, एमपी नगर मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री, पचमढी-रातापानी में टूरिज्म इंडस्ट्री जैसे प्लान शामिल किए जा रहे हैं। नगरीय प्रशासन विभाग ने भोपाल विकास प्राधिकरण को भोपाल सहित विदिशा, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम एवं राजगढ़ में ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने का काम सौंपा जहां नए उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। प्रारंभिक सर्वे में भोपाल शहर की नर्मदापुरम रोड पर नए आर्थिक क्षेत्र विकसित करने एवं एमपी नगर में मोबाइल असेंबली इंडस्ट्री बनाने और नर्मदापुरम, रायसेन के पचमढ़ी, रातापानी जैसे पर्यटक स्थलों पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के बिंदु को शामिल किया गया है। भोपाल सहित अन्य जिलों में तेजी से हो रहे डेवलपमेंट के पैटर्न को समझने के बाद विकास की रूपरेखा तय होगी। इन क्षेत्रों पर फोकस रहवासी विकास: सिंगल विंडो के जरिए रेसीडेंशियल अनुमतियां मिल सकेंगी। अभी चार से पांच विभाग के चक्कर काटने होते हैं। औद्योगिक विकास: मंडीदीप, गोविंदपुरा, अचारपुरा, पीलूखेड़ी, कोकता, बंगरसिया के बाद अब नॉलेज हब, मोबाइल हब, स्टार्टअप हब बनाने की योजना है। धार्मिक पर्यटन: सलकनपुर, कंकाली माता मंदिर, नर्मदा नदी धर्म स्थल, सिहोर गणेश मंदिर सहित अन्य प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का सर्किट बनाया जाएगा। वन्य पर्यटन: रातापानी, पचमढ़ी, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, वन विहार, केरवा, कलियासोत के जंगलों तक सफारी का दायरा बढ़ाकर नए टूरिस्ट सुविधा वाले उपक्रम स्थापित होंगे। परिवहन सुविधा: मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को सिहोर, मंडीदीप, विदिशा से नर्मदापुरम से कनेक्ट करने, 200 ई बसों को चलाने, रेलवे की मेमू ट्रेन चलाने की प्लानिंग डेटा एनालिसिस का हिस्सा है। शामिल होंगे 2510 गांव भोपाल के मेट्रोपॉलिटन एरिया का दायरा 12, 098 वर्ग किलोमीटर का होगा। इसमें 6 जिलों के 2510 गांवों को शामिल किया गया है। भूमि के सबसे कम क्षेत्रफल की बात करें तो इसमें सबसे कम हिस्सा नर्मदापुरम जिले से लिया गया है, जबकि बड़ा हिस्सा यहां तक की भोपाल से अधिक सीहोर और राजगढ़ का क्षेत्र से लिया गया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। भोपाल मेट्रोपॉलिटन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही, अब प्रतिनियुक्ति पर अधिकारी और कर्मचारियों को लिया जाएगा। 6 जिलों में तहसीलवार गांवों की जारी की गई अधिसूचना में भोपाल जिले में बैरसिया तहसील के 210 गांव, हुजूर तहसील के 257 गांव और कोलार तहसील के 60 गांव शामिल किए गए हैं। इसी तरह सीहोर जिले की 8 तहसीले आष्टा, बुधनी, दोराहा, इच्छावर, जावर, श्यामपुर, रेहटी और सीहोर रहेंगी।

54 बाघों की मौत के बाद सिस्टम में हड़कंप, रिजर्व के बाहर मिलेगा स्पेशल प्रोटेक्शन, जानें नई TOTR स्कीम

भोपाल  मध्य प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव प्रेमियों और सरकार की नींद उड़ा दी है। साल 2025 में रिकॉर्ड 54 बाघों की मौत के मामले में नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया है। इसमें बाघों को बचाने के लिए एक नई और हाईटेक सुरक्षा नीति का खुलासा किया गया है, जो अब रिजर्व की सीमाओं से बाहर भी लागू होगी। रिजर्व के बाहर भी टाइगर की सुरक्षा NTCA ने कोर्ट को बताया कि अब केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि उनसे सटे जंगलों, गलियारों और क्षेत्रीय डिवीजनों में भी वही सुरक्षा मिलेगी जो रिजर्व के अंदर उपलब्ध होती है। इसके लिए टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व योजना शुरू की गई है। सबसे अहम बात यह है कि साल 2025-26 के पहले चरण के लिए मध्य प्रदेश के 8 फॉरेस्ट डिविजन को चुना गया है। AI और आधुनिक हथियारों से होगी घेराबंदी बाघों के अंगों की तस्करी और शिकार रोकने के लिए अब पुराने तरीके नहीं चलेंगे। NTCA ने राज्यों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और वायरलेस संचार को मजबूत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, इंटेलिजेंस गैदरिंग, स्ट्राइक फोर्स की तैनाती और अपराध का पता लगाने के लिए आधुनिक हथियारों के उपयोग पर जोर दिया गया है। इन्वायलेट रहेगा कोर एरिया हाईकोर्ट में दायर हलफनामे में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 38 V (4)(i) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया कि नेशनल पार्क और अभयारण्यों के कोर क्षेत्रों को इन्वायलेट रखा जाना अनिवार्य है। यानी बाघों के संरक्षण के लिए इन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप पूरी तरह वर्जित रहेगा। प्रोजेक्ट टाइगर के तहत हम अब उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां बाघ रिजर्व से बाहर निकलकर जा रहे हैं। इन कॉरिडोर क्षेत्रों में सुरक्षा को अभेद्य बनाना और AI का उपयोग करना हमारी प्राथमिकता है। नंदकिशोर काले, सहायक महानिरीक्षक (वन), NTCA गौरतलब है कि भारत फिलहाल दुनिया में बाघों का सबसे बड़ा गढ़ है, जहां 3,682 बाघ मौजूद हैं। एमपी में बाघों की संख्या 6% सालाना की दर से बढ़ रही है, लेकिन हालिया 54 मौतों ने सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है।  

टेक कंपनियों ने 2026 में 73,000 कर्मचारियों को क्यों निकाला? वजह है चिंता का विषय

   नई दिल्ली दुनिया भर की टेक कंपनियों में इस समय एक बड़ा बदलाव चल रहा है और इसका सबसे बड़ा असर नौकरियों पर दिख रहा है. 2026 की शुरुआत से अब तक 73,000 से ज्यादा लोगों की नौकरी जा चुकी है. यह आंकड़ा सिर्फ एक-दो कंपनियों का नहीं, बल्कि करीब 90 से ज्यादा टेक कंपनियों का है।  सबसे बड़ी बात यह है कि यह सिर्फ एक नॉर्मल फायरिंग नहीं है. इसे टेक इंडस्ट्री का रीसेट कहा जा रहा है. कई कंपनियां सिर्फ AI के नाम पर ही छंटनी कर रही हैं. यानी कंपनियां अपने काम करने का तरीका बदल रही हैं और उसी के हिसाब से कर्मचारियों की जरूरत भी बदल रही है।  इस पूरे बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI. पहले जिन कामों के लिए बड़ी टीम की जरूरत होती थी, अब वही काम AI टूल्स की मदद से कम लोगों में हो रहा है. कंपनियां अब ज्यादा तेज, सस्ती और इफिशिएंट बनने की कोशिश कर रही हैं।  Meta से लेकर Oracle तक.. अगर इस आंकड़े को ध्यान से समझें, तो सबसे पहले नजर जाती है Meta Platforms पर. रिपोर्ट्स के मुताबिक Meta करीब 8,000 कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है. यह उसकी कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है।  यह छंटनी एक ही बार में नहीं, बल्कि अलग-अलग फेज में की जा रही है, जिससे साफ है कि कंपनी लंबे समय के लिए अपने खर्च को कम करना चाहती है।  इसके बाद बात आती है ऐमेजॉन की, जहां पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नौकरियां कम की गई हैं. रिपोर्ट्स में यह संख्या करीब 30,000 तक बताई जा रही है।  ऐमेजॉन का यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि यह अकेले इस पूरे 73,000 के आंकड़े का बड़ा हिस्सा कवर करता है. इसी तरह Block Inc. ने भी करीब 4,000 कर्मचारियों को हटाया है. कंपनी ने अपने बिजनेस को लीन बनाने और खर्च कम करने के लिए यह फैसला लिया। सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने भी करीब 1,000 कर्मचारियों को निकालने का फैसला किया है. Snap ने साफ कहा है कि वह AI और ऑटोमेशन पर ज्यादा फोकस कर रही है, जिससे कुछ रोल्स की जरूरत कम हो गई है।  Oracle ने हाल ही में की है छंटनी इन बड़ी कंपनियों के अलावा Oracle और दूसरी कई टेक कंपनियों में भी हजारों की संख्या में कटौती की गई है, हालांकि हर कंपनी ने सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं. हाल ही में ओरैकल ने भारत से ही 10 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया और आगे चल कर 20,000 और जॉब्स जा सकती हैं।  अब अगर इन सभी को एक साथ देखें, तो तस्वीर साफ हो जाती है. Amazon के करीब 30,000, Meta के लगभग 8,000, Block के 4,000 और Snap के 1,000 के साथ बाकी 80-90 कंपनियों में हुई छोटी-बड़ी छंटनी मिलाकर कुल आंकड़ा 73,000 के पार पहुंच जाता है. इसमें ओरैकल द्वाारा फायर किए गए लोग भी हैं।  यह भी समझना जरूरी है कि यह सिर्फ उन नौकरियों का आंकड़ा है जो आधिकारिक तौर पर सामने आए हैं. कई कंपनियां बिना ऐलान के भी टीम कम कर रही हैं, हायरिंग रोक रही हैं या कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर रही हैं. ऐसे मामलों को जोड़ दिया जाए, तो असली संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  कोरोना में हुई ज्यादा हायरिंग? इस पूरे ट्रेंड के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे पहले, कोरोना के समय कंपनियों ने बहुत तेजी से हायरिंग की थी. उस समय डिजिटल सर्विसेज की मांग बढ़ी थी, लेकिन अब ग्रोथ धीमी हो गई है. ऐसे में कंपनियां एक्स्ट्रा स्टाफ को कम कर रही हैं।  दूसरा बड़ी वजह है खर्च कम करना. ग्लोबल इकॉनमी लगातार बदल रही है, महंगाई और निवेश में कमी ने कंपनियों को ज्यादा सतर्क बना दिया है. अब वे हर खर्च को ध्यान से देख रही हैं और जहां जरूरत नहीं है, वहां कटौती कर रही हैं।  तीसरा और सबसे बड़ा कारण है AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल. अब कंपनियां यह समझ चुकी हैं कि कई काम मशीन से कराए जा सकते हैं. इससे उन्हें कम लोगों में ज्यादा काम करने का मौका मिल रहा है। 

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की गति से यात्रा करेंगे वाहन

गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगे वाहन   एक्सप्रेसवे के जरिए मेरठ से प्रयागराज तक सीधा संपर्क स्थापित होगा 02 मुख्य टोल प्लाजा और 19 रैम्प टोल प्लाजा के माध्यम से सुगम होगा आवागमन परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर और रामगंगा नदी पर 720 मीटर लंबे पुल का निर्माण एक्सप्रेसवे पर यात्रियों के लिए 09 जन-सुविधा परिसर भी किए गए हैं विकसित शाहजहांपुर के पास एक्सप्रेसवे पर 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी भी, एयरफोर्स कर चुकी है इमरजेंसी लैंडिंग ड्रिल 29 अप्रैल को पीएम मोदी करेंगे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण, यूपी को मिलेगी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी लखनऊ  उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक और बड़ा अध्याय जुड़ने जा रहा है। बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पण प्रस्तावित है। यह परियोजना प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों को सीधे जोड़ते हुए आवागमन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली मानी जा रही है। गंगा एक्सप्रेसवे को 120 किमी/घंटा की स्पीड के अनुसार डिजाइन किया गया है। इसका मतलब है कि मेरठ से प्रयागराज की लंबी दूरी अब पहले के मुकाबले काफी कम समय में तय की जा सकेगी। जहां पहले यह सफर 10-12 घंटे लेता था,  अब 6-7 घंटे में पूरा हो सकेगा। इससे आम यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई करने वाले वाहनों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। तकनीकी रूप से आधुनिक और भविष्य उन्मुख उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के एसीईओ हरि प्रताप शाही के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे 6 लेन में तैयार किया गया है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इसकी कुल लंबाई लगभग 594 किमी है और राइट ऑफ-वे 120 मीटर चौड़ा रखा गया है, जिससे यातायात सुगम और सुरक्षित रहेगा। परियोजना को 4 समूहों में बांटकर विकसित किया गया है, जिससे निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सका। इसमें आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और उच्च गुणवत्ता मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। टोल व यात्री सुविधाओं का बेहतर प्रबंधन एक्सप्रेसवे पर 2 मुख्य टोल प्लाजा (मेरठ और प्रयागराज) के साथ 19 रैम्प टोल प्लाजा बनाए गए हैं। इससे वाहन चालकों को विभिन्न कट्स पर एंट्री और एग्जिट में आसानी होगी और जाम की स्थिति कम होगी। इसके अलावा यात्रियों के लिए 9 जन-सुविधा परिसरों का निर्माण किया गया है, जहां ईंधन, खानपान, शौचालय और विश्राम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक आरामदायक बन सकेगी। इस परियोजना में गंगा नदी पर लगभग 960 मीटर लंबा और रामगंगा नदी पर करीब 720 मीटर लंबा पुल बनाया गया है। ये पुल न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ और जल प्रवाह को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक डिजाइन पर आधारित हैं। रणनीतिक दृष्टि से अहम् एयरस्ट्रिप शाहजहांपुर के पास लगभग 3.5 किमी लंबी हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है, जो इस एक्सप्रेसवे की खास पहचान बन चुकी है। यहां इंडियन एयर फोर्स द्वारा इमरजेंसी लैंडिंग का सफल परीक्षण किया जा चुका है। यह सुविधा किसी भी आपात स्थिति जैसे प्राकृतिक आपदा या सैन्य जरूरत में बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे एक्सप्रेसवे की सामरिक महत्ता भी बढ़ जाती है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा बल गंगा एक्सप्रेसवे के चालू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र और पूर्वी यूपी के कृषि प्रधान क्षेत्रों के बीच सीधा और तेज संपर्क स्थापित होगा। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पाद के परिवहन में समय और लागत की बचत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, खासकर धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी। यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का इंजन है। बेहतर कनेक्टिविटी से निवेश आकर्षित होगा, नए रोजगार सृजित होंगे और प्रदेश ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में और मजबूत होगा।

केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह 8 बजे होंगे खुलेंगे, भक्तों की भीड़ लगनी शुरू

गौरीकुंड  ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा अपने सबसे पावन पड़ाव पर पहुंच चुकी है. बम-बम भोले के जयकारों और आर्मी बैंड की सुरीली धुन के बीच बाबा केदारनाथ की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली अब केदारपुरी के बिल्कुल करीब है. केदारनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले पूरी केदारपुरी को कई क्विंटल फूलों से किसी दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है।   फाटा से गौरीकुण्ड तक भक्ति का सैलाब बाबा केदारनाथ की डोली सोमवार को फाटा से अपने सफर पर निकली और बड़ासू, शेरसी, रामपुर, सीतापुर होते हुए शाम करीब 4 बजे गौरीकुण्ड पहुंची. सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुण्ड तक श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं और अक्षत के साथ बाबा की पालकी का जोरदार स्वागत किया।  सोमवार की रात बाबा की डोली ने गौरी माई मंदिर, गौरीकुण्ड में विश्राम किया.  इससे पहले डोली शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना होकर गुप्तकाशी पहुंची थी, जहां आर्मी बैंड की धुन ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया।  शाम धाम पहुंचें बाबा, आज होगा महा-अभिषेक कल सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद डोली गौरीकुण्ड से केदारनाथ धाम के लिए रवाना .  हजारों की संख्या में पैदल यात्री इस डोली के पीछे-पीछे चल रहे हैं.  उम्मीद है कि शाम तक डोली मंदिर परिसर में पहुंची .  वहीं, भक्तों की नजरें आज सुबह 8:00 बजे के उस ऐतिहासिक पल पर टिकी हैं, जब मंत्रोच्चार के बीच केदारनाथ मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खोल दिए जाएंगे।  पैदल मार्ग पर भारी जाम और अव्यवस्था आस्था के इस महाकुंभ में जहां जोश हाई है, वहीं व्यवस्थाएं पस्त नजर आ रही हैं.  गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक के संकरे पैदल मार्ग पर इस वक्त पैर रखने की जगह नहीं है.  हजारों यात्रियों का हुजूम एक साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे रास्ते में जगह-जगह भयंकर जाम की स्थिति बनी हुई है।  यात्रा मार्ग पर सबसे बड़ी मुसीबत घोड़े-खच्चर बन गए हैं. इनकी बेतरतीब आवाजाही और संकरे रास्तों पर इनके कारण पैदल चल रहे यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यात्रियों का कहना है कि पशुओं के दबाव के कारण जाम खुल नहीं रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों की सांसें फूल रही हैं।  केदारघाटी हुई शिवमय बेशक रास्ते कठिन हैं और जाम की चुनौती बड़ी है, लेकिन भक्तों का हौसला कम नहीं हुआ है. गुप्तकाशी से लेकर गौरीकुण्ड तक पूरा इलाका शिव के रंग में रंगा नजर आ रहा है।  तीन दिन पहले बाबा केदार ने छोड़ा शीतकालीन गद्दीस्थल बाबा केदारनाथ की पंचमुखी डोली रविवार, 19 अप्रैल को अपने शीतकालीन गद्दीस्थल उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर से रवाना हुई थी। 20 किलोमीटर का सफर तय कर डोली फाटा पहुंची, जहां आर्मी बैंड की धुन और स्कूली बच्चों के जयकारों के साथ डोली का स्वागत किया गया। इसके बाद डोली सोमवार सुबह फाटा से निकली और शाम को गौरीकुंड पहुंची। यहां से मंगलवार सुबह बाबा की पंचमुखी डोली केदारनाथ धाम के लिए रवाना हो चुकी है। बाबा केदार की डोली 178 दिन ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ में विराजमान रही। इससे पहले, 23 अक्टूबर 2025 (भैया दूज) को सुबह 8:30 बजे केदारनाथ धाम के कपाट बंद किए गए थे। कपाट बंद होने के बाद बाबा की डोली रामपुर और गुप्तकाशी होते हुए तीन दिनों की पैदल यात्रा पूरी कर 25 अक्टूबर 2025 को ऊखीमठ पहुंची थी, जहां छह महीने तक उनकी शीतकालीन पूजा-अर्चना हुई। 149 दिन बाद बद्रीनाथ धाम पहुंचेंगे भगवान बद्री विशाल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं। इसे देखते हुए चमोली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। धाम में आतंकवादी निरोध दस्ता (एटीएस) की तैनाती भी की गई है। भगवान बद्री विशाल की डोली मंगलवार, 21 अप्रैल को जोशीमठ से धाम के लिए रवाना होगी। करीब 42 किलोमीटर का सफर तय करके डोली बुधवार शाम बद्रीनाथ धाम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। भगवान बद्रीनाथ की गद्दी करीब 6 महीने तक जोशीमठ के नरसिंह मंदिर में विराजमान रही। बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर करीब 2:56 बजे बंद हुए थे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की गद्दी पांडुकेश्वर होते हुए अपने शीतकालीन प्रवास जोशीमठ पहुंची थी, जहां पूरी सर्दियों में उनकी विशेष पूजा-अर्चना हुई। दो दिन पहले खुले थे कपाट रविवार से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर गंगोत्री और 12 बजकर 35 मिनट पर यमुनोत्री के कपाट खोल दिए गए थे। इससे पहले गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 (अन्नकूट, गोवर्धन पूजा) को सुबह 11:36 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। वहीं, यमुनोत्री धाम के कपाट भाई दूज पर 23 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:30 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे।