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12 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद दोनों हाथ प्रत्यारोपण सफल

नई दिल्ली दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक ऐसी सर्जरी हुई है, जिसने एक महिला की जिंदगी बदल दी. दो बच्चों की मां जिसने एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, अब फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रही है. अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका सफलतापूर्वक दोनों हाथों का ट्रांसप्लांट किया है. जानकारी के मुताबिक, महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. इस हादसे के बाद वह अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं कर पाती थी. खाना खाना, कपड़े पहनना, बच्चों की देखभाल करना, हर काम के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में हाथों का ट्रांसप्लांट उसके लिए नई जिंदगी जैसा साबित हुआ. ब्रेन-डेड व्यक्ति था डोनर यह सर्जरी तब संभव हो सकी जब एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिवार ने उसके हाथ दान करने की सहमति दी. उनके इस फैसले ने एक जरूरतमंद महिला को फिर से जीने का मौका दिया. अस्पताल ने इस परिवार के प्रति आभार जताया और इसे इंसानियत की मिसाल बताया. 12 घंटे तक चली सर्जरी डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी करीब 12 घंटे तक चली. इसमें डोनर के दोनों हाथ महिला के शरीर से जोड़े गए. दाहिना हाथ कोहनी के ऊपर से और बायां हाथ कलाई के पास से जोड़ा गया. डॉक्टरों ने हड्डियां, नसें, मांसपेशियां, खून की नलियां और टेंडन बहुत सावधानी से जोड़े, ताकि हाथों में फिर से ब्लड सर्कुलेशन और हरकत आ सके. अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि यह बेहद कठिन और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें हर मिनट की अहमियत होती है. अगर समय पर सही तरीके से काम न हो, तो ट्रांसप्लांट किए गए अंग को बचाना मुश्किल हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल होने के बाद भी असली सफर अब शुरू हुआ है. महिला को लंबे समय तक दवाएं लेनी होंगी ताकि शरीर नए हाथों को स्वीकार कर सके. इसके साथ ही उसे नियमित फिजियोथेरेपी और अभ्यास की जरूरत होगी, जिससे वह धीरे-धीरे हाथों का इस्तेमाल सीख सके. यह अस्पताल में किया गया दूसरा ऐसा ट्रांसप्लांट है. इस पूरी प्रक्रिया में प्लास्टिक सर्जरी, हड्डी रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोलॉजी, फिजियोथेरेपी और कई अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल थे.

खेत में संदिग्ध ड्रोन मिलने से सनसनी, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

दीनानगर/फिरोजपुर. दीनानगर विधानसभा क्षेत्र के तहत थाना दौरांगला के गांव वजीरपुर अफगाना में एक किसान के खेतों में एक छोटा ड्रोन मिला है। इस बारे में जानकारी देते हुए DSP दीनानगर राजिंदर मिन्हास ने बताया कि बॉर्डर के बिल्कुल पास बसे इस गांव के किसान हरजीत सिंह पुत्र राम सिंह जब अपने खेतों की तरफ घूमने गया तो उसने अपने खेत में एक छोटा ड्रोन पड़ा देखा तो इस दौरान हड़कंप मच गया। उसने तुरंत थाना दोरांगला पुलिस को सूचित किया। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर ड्रोन को जब्त कर लिया और जब पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया तो अभी तक किसी भी तरह की कोई संदिग्ध चीज बरामद नहीं हुई है, बाकी पूरे मामले की जांच जारी है। इसके पहले फिरोजपुर के नजदीकी गांव कोहाला में गेहूं की कटाई कर रहे किसान को अपने खेतों में एक ड्रोन और करीब सात किलो हेरोइन का पैकेट मिला। प्राप्त जानकारी के अनुसार किसान ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी के मुताबिक, जिस किसान के खेतों से यह बरामदगी हुई है, उसकी पहचान गुरजंट सिंह पुत्र थाना सिंह के रूप में हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ड्रोन सहित हेरोइन के पैकेट को अपने कब्जे में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह मामला सरहदी क्षेत्र से जुड़ा हुआ माना जा रहा है, जिसमें ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंका जताई जा रही है। पुलिस द्वारा मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

Anil Tuteja की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा— सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के डिस्टि्रक्ट मिनरल फंड से जुड़े फंड के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की तुरंत जमानत दिए जाने पेश आवेदन को खारिज कर दिया, कोर्ट ने कहा कि जुर्म की गंभीरता, आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में आवेदक की स्थिति पर गौर किया गया, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. आर्थिक अपराध जानबूझकर और सोच-समझकर किया जाता है, जिसमें निजी फ़ायदे को ध्यान में रखा जाता है, चाहे समुदाय पर इसका कोई भी नतीजा हो, जिससे समुदाय का भरोसा और आस्था खत्म हो जाती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को नुकसान होता है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई. ईओडब्ल्यू एवं एसीबी ने कोरबा जिले में डीएमएफ फंड घोटाला मामले में तत्कालीन इंडस्ट्रीयल डिपोर्टमेंट के एडिशनल सिक्रेटरी अनिल टुटेजा को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल किया है. जेल में बंद अधिकारी ने हाईकोर्ट में स्थाई जमानत दिए जाने आवेदन दिया था. आवेदन में सह आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने, मामले की सुनवाई में विलंब के आधार पर जमानत की मांग की गई थी. आवेदन पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की कोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध करने में आवेदक की संलिप्तता साबित करते हैं. केस डायरी को और देखने पर, यह साफ़ पता चलता है कि सतपाल सिह छाबड़ा को उन फर्मों से गैर-कानूनी कमीशन के तौर पर 16 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें से आवेदक को पेमेंट किया गया है, इसलिए पहली नज़र में, आवेदक के इस अपराध में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता. आवेदक ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके प्राइवेट कंपनियों द्बारा पब्लिक फंड का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे पब्लिक के हित को बहुत नुकसान हुआ है. सतपाल सिह छाबड़ा के 18.02.2025 को पुलिस के सामने दिए गए बयान में लगाए गए आरोपों के बारे में सच्चाई सामने लाने के लिए, आवेदक की कस्टडी ज़रूरी है. आवेदक का यह भी कहना है कि दूसरे सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई है, इसलिए, मौजूदा आवेदक को पैरिटी बेसिस पर ज़मानत दी जा सकती है. इस पर कहा कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी दीपेश टांक 8 महीने से एक साल से ज़्यादा जेल में रहा, इसी तरह रानू साहू और सौम्या चौरसिया 2 साल से ज़्यादा जेल में रहे, जबकि आवेदक 23.02.2026 से यानी सिर्फ़ दो महीने जेल में रहा, इसलिए आवेदक इन आरोपियों के साथ पैरिटी का दावा नहीं कर सकता है. आवेदक का यह भी कहना है कि ट्रायल में ज़्यादा समय लग सकता है क्योंकि प्रॉसिक्यूशन को कई गवाहों से पूछताछ करनी है और चार्जशीट के साथ बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स फाइल किए गए हैं. इस पाइंट पर कोर्ट ने कहा ट्रायल में देरी हमेशा आरोपी को बेल पर रिहा होने का कोई हक नहीं देती. कोर्ट को जुर्म की गंभीरता, एप्लीकेंट की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में एप्लीकेंट की स्थिति पर गौर करना होगा, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और एप्लीकेंट ने सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. एप्लीकेंट पहले भी एक असरदार पद पर था, इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि अगर उसे इस कोर्ट ने बेल पर रिहा किया तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच में रुकावट डाल सकता है. इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की जमानत आवेदन को खारिज किया है.

थरूर ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर उठाए सवाल, आतंकवाद पर सख्त रुख जरूरी बताया

नई दिल्ली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भारत की विदेश नीति, विशेष रूप से पाकिस्तान और अमेरिका के साथ संबंधों पर अपनी बेबाक राय रखी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अगर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता किया भी है तो इससे भारत का कद छोटा नहीं होगा। आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी अक्सर पाकिस्तान की मध्यस्थता के बहाने केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करती है और मोदी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाती है। शशि थरूर ने पाकिस्तान को लेकर भारत के रुख पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह तब तक नहीं बदलेगा जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती। शशि थरूर ने एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों ने पाकिस्तान को ओसामा बिन लादेन जैसे मामले में माफ कर दिया, जबकि वह वर्षों तक उनकी नाक के नीचे छिपा रहा। थरूर ने इसे पाकिस्तान का 'दोहरा चरित्र' करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत तब तक पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता या कूटनीतिक नरमी नहीं दिखाएगा, जब तक वह अपनी धरती पर पनप रहे आतंकी समूहों को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता। उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि पर्याप्त सबूत होने के बावजूद पाकिस्तान ने आज तक किसी भी दोषी को सजा नहीं दी है। ईरान-अमेरिका तनाव पर भारत की भूमिका जब उनसे पूछा गया कि भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका क्यों नहीं निभाई तो थरूर ने कहा, "भारत के संबंध सभी प्रमुख देशों के साथ अच्छे हैं। पाकिस्तान का ऐसा हाल नहीं है। अगर पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की तो इससे भारत का कद कम नहीं होता है।" ट्रंप की टिप्पणी पर चुप्पी की सलाह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के संदर्भ में की गई विवादास्पद 'नरक' वाली टिप्पणी पर थरूर ने भारत सरकार को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया पोस्ट जैसी छोटी बातों पर भारत को आक्रामक होने की जरूरत नहीं है। यह हमारी कूटनीति के स्तर के अनुकूल नहीं है। अगर मैं सरकार में होता तो इसे पूरी तरह नजरअंदाज कर देता।" आपको बता दें कि 2016 के ऊरी हमले और 2019 के पुलवामा हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान के प्रति 'आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते' की नीति अपनाई है। भारत का वैश्विक मंचों पर हमेशा यह रुख रहा है कि पाकिस्तान जब तक लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी गुटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करता तब तक कूटनीतिक सुधार संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री के सम्मान से आरक्षियों में जोश, DGP ने दिलाई सेवा और ईमानदारी की शपथ

लखनऊ दीक्षांत परेड में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कार पाकर आरक्षियों का हौसला भी बढ़ा। महिला आरक्षी नेहा यादव को तीन, सोनम को दो व रिया सिंह कुशवाहा को एक पुरस्कार प्रदान किया गया। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्मृति चिह्न प्रदान किया। डीजीपी ने दीक्षांत परेड में आरक्षियों को शपथ भी दिलाई।  परेड कमांडर प्रथम- महिला रिक्रूट आरक्षी नेहा यादव  परेड कमांडर द्वितीय- महिला रिक्रूट आरक्षी रिया सिंह कुशवाहा परेड कमांडर तृतीय- महिला रिक्रूट आरक्षी कुमारी सोनम  अंतः विषय टॉपर (समग्र कोर्स)- कुमारी नेहा यादव वाह्य विषय टॉपर (समग्र कोर्स)-कुमारी सोनम  सर्वांग सर्वोत्तम पुरस्कार- कुमारी नेहा यादव

वैशाली टॉप पर, मधुबनी दूसरे स्थान पर; टॉप-10 जिलों की सूची जारी

पटना बिहार में जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। 17 अप्रैल से शुरू हुई जनगणना की प्रक्रिया में अब तक 24 लाख 35 हजार 105 लोगों ने स्व-गणना किया है। भारतीय जनगणना निदेशालय की ओर से टॉप 10 जिलों की सूची भी जारी कर दी है। इसके अनुसार, वैशाली जिला 4,12,716 स्व-गणना के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि मधुबनी 3,97,059 के साथ दूसरे स्थान पर है। सूची में तीसरे स्थान पर खगड़िया (1,28,813), चौथे पर गोपालगंज (1,26,194), पांचवें पर भोजपुर (1,26,113) और छठे स्थान पर पटना (1,25,944) शामिल हैं। औरंगाबाद में 97383, पश्चिम चंपारण में 79722, दरभंगा में 77223 और रोहतास में लोगों ने 66311 स्व-गणना करवाया। सभी 38 जिलों को मिलाकर कुल 24,35,105 लोगों ने स्व-गणना पूरी की है। नगणना निदेशालय की ओर से कहा गया कि 17 अप्रैल से एक मई तक स्व-गणना का काम चलेगा। बिहारवासी आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से OTP सत्यापन करके खुद अपने परिवार और घर से संबंधित जानकारी दर्ज कर सकते हैं। बिहारवासी घर बैठे ही स्व-गणना कर सकते हैं। स्व-गणना करने की अंतिम तिथि एक मई रात 12 बजे तक है। यह प्रक्रिया आसान और पूरी तरह से सुरक्षित है। परिवार के मुखिया के नाम से पंजीकरण करना होगा जनगणना निदेशालय की डायरेक्टर रंजिता ने कहा कि स्व-गणना के लिए परिवार के मुखिया के नाम और किसी एक सदस्य के मोबाइल नंबर से पंजीकरण करना होगा। स्व-गणना पूरी होने के बाद नागरिकों को एक स्व-गणना आईडी प्राप्त होगी, जिसे सुरक्षित रखना आवश्यक होगा और गणनाकर्मी के घर आने पर उसे दिखाना होगा। यह प्रक्रिया सुरक्षित, सरल और समय की बचत करने वाली है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो लोग मोबाइल से अपनी गणना नहीं कर सकते हैं, वह घबराएं नहीं। दो मई से प्रगणक आपके घर आएंगे, वह गणना का काम कर कसते हैं। साथ ही जो लोग बिहार से बाहर रहते हैं वह भी नहीं घबराएं। आपके जिस राज्य में रह रहे हैं वहां जब जनगणना की प्रकिया शुरू होगी तब आप इसमें शामिल हो सकते हैं। आपकी गणना मान्य वैद्य मानी जाएगी। आपके डाटा को पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और डिजिटल माध्यम में एन्क्रिप्टेड सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस बार पूरी तरह अलग है जनगणना 2027 जनगणना 2027 के लिए कागजी फॉर्म और रजिस्टरों की जगह अब इलेक्ट्रोनिक डिवाइस, जियो-टैगिंग मैपिंग टूल और एक केंद्रीकृत वेब आधारित प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। सरकार ने साल 2027 की जनगणना को देश की पहली डिजिटल जनगणना बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। मोबाइल एप के जरिए डेटा इकट्ठा किया जाएगा। ऐप हिंदी, अंग्रेजी और सभी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इसके अलावा सेंसस मॉनिटरिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएमएस) नाम का एक केंद्रीय पोर्टल बनाया गया है, जो पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम निगरानी करेगा। हर घर और इलाके का जियो-टैगिंग भी किया जाएगा

महिला शक्ति का परचम: पुलिस ट्रेनिंग में बेटियों ने दिखाई तत्परता और मजबूती, सीएम योगी का बयान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आरक्षी प्रशिक्षण के दौरान बेटियों ने जिस मजबूती, तत्परता, समर्पण व अनुशासन का परिचय दिया है, वह सराहनीय है। अनुशासन व टीमवर्क का उत्कृष्ट भाव सबसे बड़ी ताकत है। इन सबको समाहित करते हुए देश के लिए सर्वोत्कृष्ट योगदान देने की भावना वर्दीधारी बल का सबसे महत्वपूर्ण अंग होती है। प्रशिक्षण में जितना पसीना बहेगा, बाद के जीवन में उतना ही कम खून बहाने की नौबत आती है। सीएम योगी रविवार को 60,244 आरक्षी नागरिक पुलिस सीधी भर्ती के अंतर्गत वर्ष 2025 बैच के पुलिस आरक्षियों के दीक्षांत परेड समारोह को संबोधित कर रहे थे। रिजर्व पुलिस लाइन में हुए आयोजन में सीएम ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी भी ली।  कानून अपराधी के लिए कठोर और नागरिकों के लिए संवेदनशील होना चाहिए सीएम ने प्रशिक्षण पूर्ण कर दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनने वाली महिला आरक्षियों को बधाई दी और कहा कि सभी ने लगन व अनुशासन के साथ कठोर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। अब आप सबको जनपदों की फील्ड ड्यूटी में जाना है। याद रखिए, कानून अपराधी के लिए जितना कठोर हो, नागरिकों के प्रति उतना ही संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी आरक्षी प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, कौशल व मूल्यों का उपयोग करते हुए निष्ठा, ईमानदारी व कर्तव्य परायणता से यूपी पुलिस की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।  कई प्रशिक्षण केंद्रों में जाकर देखा, अब बेहतर प्रशिक्षण व सुविधाएं सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश के 10 पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, 73 जनपदों की पुलिस लाइंस, 29 पीएसी बटालियनों, 112 रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटरों में एक साथ आरक्षी दीक्षांत परेड आयोजित की जा रही है। 15 जून 2025 को लखनऊ के डिफेंस एक्सपो ग्राउंड में केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए थे। 21 जुलाई से इनका प्रशिक्षण प्रारंभ हुआ। इस दौरान मैं भी विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में गया और देखा कि प्रशिक्षण व सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं।  हमने यूपी को देश के बेहतरीन पुलिस बल के रूप में स्थापित किया सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले यूपी पुलिस के सामने चुनौती व संकट था, लेकिन हमने इसे देश के बेहतरीन पुलिस बल के रूप में स्थापित किया। हमने 2.18 लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती और 1 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों का प्रमोशन किया। 2017 में पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता महज 3 हजार थी, लेकिन हमने 60244 पुलिस आरक्षियों का प्रशिक्षण यूपी के केंद्रों में ही एक साथ संपन्न किया है, जो 9 वर्ष में अर्जित की गई प्रगति को दर्शाता है।  2017 में टूटे-फूटे बैरक थे, अब 55 जनपदों में हाईराइज भवन सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले पुलिस के बैरक टूटे-फूटे, खपड़ैल व टीनशेड के होते थे, लेकिन अब 55 जनपदों में पुलिस कार्मिकों के बैरक व आवासीय सुविधा के हाईराइज भवन दिखाई देते हैं। प्रशिक्षण केंद्र उत्कृष्ट हो रहे हैं। हर प्रशिक्षु को आधारभूत प्रशिक्षण देने के साथ ही व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया गया। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल भी लांच किया गया। शारीरिक प्रशिक्षण को वैज्ञानिक व आधुनिक बनाने के लिए स्मार्ट पीटी प्रोग्राम लागू किया गया। आउटडोर प्रशिक्षण में पुरानी 303 नॉट राइफल के स्थान पर आधुनिक इंसास व एसएलआर राइफल द्वारा प्रशिक्षण दिया गया।  मिशन कर्मयोगी में यूपी का उत्कृष्ट प्रदर्शन सीएम योगी ने इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम मोदी के मार्गदर्शन में मिशन कर्मयोगी के तहत कर्मयोगी पोर्टल पर 5 विशेष मॉडयूल तैयार किए गए। 32 विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। हाल में संचालित साधना सप्ताह में शासकीय कर्मचारियों ने 1.25 करोड़ कोर्स पूर्ण कर यूपी को देश में पहला स्थान दिलवाया है। यूपी पुलिस ने इसमें 28 लाख कोर्स पूरे किए। यूपी पुलिस देश भर के सभी राज्यों-विभागों में चौथे स्थान पर रही है।  यूपी एटीएस को अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मानक के अनुरूप दिया जा रहा प्रशिक्षण सीएम योगी ने कहा कि यूपी एटीएस के अधिकारियों व जवानों को एनआईए और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के मानक के अनुरूप प्रशिक्षण देने का कार्य चल रहा है। पुलिस बल को व्यावहारिक दक्षता व सॉफ्ट स्किल पर आधारित विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है। 75 जनपदों में साइबर थानों की स्थापना के साथ ही पुलिस कर्मियों को आधुनिक साइबर अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लखनऊ में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस की स्थापना की गई है। यहां पुलिस बल को वैज्ञानिक जांच की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।  अब अपराधियों में भय, पुलिस का मनोबल ऊंचा सीएम योगी ने कहा कि यूपी पुलिस देश में मॉडल व ‘स्मार्ट’ है। यूपी पुलिस आमजन को सुरक्षा, सुविधा उपलब्ध कराने में योगदान दे रही है। अब यूपी में दंगे नहीं होते, सत्ता के समानांतर कोई राज नहीं चलता, गुंडा टैक्स व अवैध वसूली भी नहीं होती। अब यूपी में अपराधियों के मन में भय और पुलिस का मनोबल ऊपर है। पहले प्रदेश की छवि अराजकता-अस्थिरता का पर्याय बनी था, लेकिन अब स्पष्ट नीति व साफ नीयत का परिणाम साफ दिखाई देता है। 2017 के पहले की स्थिति बयां करते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश में दंगे और महीनों कर्फ्यू लगता था। कोई खुद को सुरक्षित नहीं महसूस करता था, लेकिन यूपी पुलिस अब दंगे से पहले ही उसे रोकने में सफल है। अब यूपी में महिला कार्यबल 13 से बढ़कर 36 फीसदी से अधिक हुआ है। यूपी पुलिस ने खुद को आर्थिक प्रगति की रीढ़ के रूप में भी तैयार किया है। इस कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है।  2019-20 से चल रहा ‘मिशन शक्ति’ सीएम योगी ने कहा कि 2019-20 से अनवरत मिशन शक्ति के अंतर्गत महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए कार्यक्रम बढ़ रहे हैं। हर थाने में मिशन शक्ति केंद्र बने हैं। तीन महिला पीएसी बटालियनों (लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी, गोरखपुर में झलकारी बाई कोरी व बदायूं में अवंती बाई लोधी) का गठन किया गया है। तीन अन्य नई बटालियन के गठन की प्रक्रिया को बढ़ाया गया है। 17 नगर निगम व गौतमबुद्ध नगर में सेफ सिटी परियोजना को लागू किया है।  यूपी पुलिस की बेहतरी के लिए लगातार कार्य … Read more

मुख्यमंत्री सैनी का दावा,81 लाख मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद पूरी

चंडीगड़ हरियाणा के किसानों को अगले सीजन से अपनी फसल बेचने के लिए मंडी में बैठकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा। हरियाणा सरकार जल्द ही किसान ई-खरीद एप लॉन्च करेगी। इस एप की मदद से किसानों को जे-फॉर्म, भुगतान की स्थिति, भूमि बुवाई एवं उपज सत्यापन की स्थिति, गेट पास शेड्यूलिंग (अगली सरसों फसल से प्रारंभ), भूमि सत्यापन की स्थिति व सभी सूचनाएं किसान ई-खरीद एप पर ही उपलब्ध होंगी। इससे खरीद कार्य में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी। वहीं, अगले सप्ताह से सभी किसानों को व्हाट्सएप पर क्यूआर कोड आधारित जे फार्म भेजा जाएगा ताकि उन्हें ऋण या अन्य सुविधाओं के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ें। यह एलान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेसवार्ता में किए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में अब तक हुई गेहूं खरीद का ब्योरा देते हुए कहा कि रबी सीजन 2026-27 में प्रदेश की मंडियों में गेहूं की बंपर आवक हुई है। इसने पिछले चार साल के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार ने खरीद प्रबंधों को लेकर पुख्ता इंतजाम किए जिसके चलते प्रदेश में गेहूं खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है और किसानों को समय पर भुगतान भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा अब तक प्रदेश की मंडियों में 21 हजार 44 करोड़ रुपये मूल्य की 81 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले 4 वर्षों में सर्वाधिक है। अकेले 11 अप्रैल को एक ही दिन में 7 लाख 71 हजार मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड आवक हुई। उन्होंने कहा कि अब तक 5 लाख 80 हजार किसान अपनी उपज लेकर मंडियों में पहुंच चुके हैं। हर किसान की पहचान डिजिटल गेट पास के माध्यम से की जा रही है। इसके साथ ही 79 लाख 14 हजार मीट्रिक टन गेहूं का बायोमेट्रिक सत्यापन हो चुका है, जो लगभग 97 प्रतिशत है। प्रदेश की मंडियों में 70 लाख 23 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद पूरी हो चुकी है, साथ ही प्रदेश की मंडियों से 34 लाख 56 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उठान हो चुका है। पहले ढाई महीने का सीजन होता था, अब 15 दिन का मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि पहले गेहूं की कटाई और फसल बेचने का सीजन ढाई महीने का होता था। अब यह सीजन सिमटकर 15 दिन में आ गया है। इससे थोड़ी बहुत परेशानी आती है। उन्होंने कहा कि 18 अप्रैल से उठान प्रक्रिया में और तेजी आई है। अब प्रतिदिन साढ़े 3 लाख मीट्रिक टन का उठान हो रहा है। पिछले वर्ष से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि रबी सत्र 2025-26 में जहां कुल 72 लाख 89 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। वहीं, इस वर्ष अब तक 81 लाख 48 हजार मीट्रिक टन की आवक हो चुकी है। किसानों को नहीं, सिर्फ विपक्ष को दिक्कत विपक्ष पर निशाना साधते हुए सैनी ने कहा कि पूर्व की सरकारों के समय न डिजिटल व्यवस्था थी, न पारदर्शिता थी, न समय पर भुगतान होता था। किसानों को मंडियों में लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। कागजी टोकन बनते थे और भुगतान के लिए हफ्तों, कभी-कभी महीनों का इंतजार करना पड़ता था। बोले-मंडियों में सब व्यवस्थाएं ठीक हैं। किसी भी किसान को दिक्कत नहीं है, सिवाय विपक्ष को।  

स्वास्थ्य सेवाओं को मिली नई ताकत: केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने एनटीपीसी सीपत के 7.19 करोड़ रुपये के सीएसआर कार्यों का किया लोकार्पण

बिलासपुर जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्यमंत्री श्री तोखन साहू ने एनटीपीसी सीपत द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत लगभग 7.19 करोड़ रुपये की लागत से विकसित विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं का लोकार्पण किया। इस पहल के तहत एनटीपीसी की सीपत इकाई द्वारा बिलासपुर के दो प्रमुख संस्थानों कुमार साहब स्व श्री दिलीप सिंह जूदेव सुपरस्पेशलिटी एवं सिम्स अस्पताल को अत्याधुनिक उपकरणों एवं सुदृढ़ अधोसंरचना की सौगात प्रदान की गई। कार्यक्रम के दौरान लगभग 4.27 करोड़ रुपये की लागत से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में स्थापित अत्याधुनिक रक्त कोष (ब्लड बैंक), सूक्ष्मजीव विज्ञान प्रयोगशाला, हार्मोन परीक्षण प्रयोगशाला तथा एआई पॉवर्ड माइक्रोस्कोपी का उद्घाटन किया गया। यह रक्त केंद्र छत्तीसगढ़ का अपनी तरह का पहला आधुनिक ब्लड बैंक है, जिसमें विश्वस्तरीय मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे जांच और उपचार सेवाएं अधिक सटीक, त्वरित एवं पारदर्शी होंगी। वहीं, सिम्स बिलासपुर में लगभग 2.92 करोड़ रुपये की सीएसआर राशि से क्रय की गई मशीनों का भी लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर एनटीपीसी सीपत और सिम्स के मध्य मशीनों के हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेजों का औपचारिक आदान-प्रदान भी हुआ। इस सहायता से सिम्स के लगभग 8 विभागों के लिए 26 आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जिनमें उच्च स्तरीय रंगीन डॉप्लर, स्वचालित केमिल्यूमिनेसेंस प्रणाली, उच्च दक्षता तरल क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी), सी-आर्म मशीन, ऑपरेशन टेबल, दंत चिकित्सा कुर्सी, शवगृह फ्रीजर, एमओ2 फ्रैक्शनल लेजर प्रणाली तथा एसीटी मशीन शामिल हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने एनटीपीसी सीपत के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किया गया यह सहयोग छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक ब्लड बैंक और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं से मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार मिलेगा तथा यह पहल जनसेवा के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति देगी। उन्होंने स्व श्री दिलीप कुमार जूदेव को भी याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा से समाज के लिए काम किया,लोगों की सेवा की।  इस अवसर पर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. भानु प्रताप सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि यह ब्लड बैंक पूर्णतः कंप्यूटरीकृत एवं ऑनलाइन प्रणाली से संचालित होगा, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों सुनिश्चित होंगी। यहां एकल दाता प्लेटलेट (एसडीपी) की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे कैंसर, डेंगू जैसे गंभीर रोगों के मरीजों को एक ही दाता से प्लेटलेट्स उपलब्ध कराई जा सकेंगी। उन्होंने बताया कि एफेरेसिस मशीन, उन्नत सूक्ष्मजीव विज्ञान उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सूक्ष्मदर्शी के माध्यम से ब्लड कैंसर जैसी जटिल बीमारियों की त्वरित और सटीक जांच संभव होगी। यह सुविधा देश के चुनिंदा संस्थानों में ही उपलब्ध है। सिम्स के डीन श्री रमणेश मूर्ति ने कहा कि एनटीपीसी सीपत के सहयोग से अस्पताल में आधुनिक मशीनों की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे जटिल बीमारियों का इलाज अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगा और मरीजों को बड़े शहरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। कार्यक्रम में बिल्हा विधायक श्री धरम लाल कौशिक, बिलासपुर विधायक श्री अमर अग्रवाल, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, एनटीपीसी सीपत से परियोजना प्रमुख श्री स्वपन कुमार मंडल, सिम्स अधीक्षक डॉ लखन सिंह, एनटीपीसी के श्री जयप्रकाश सत्यकाम,सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों ने एनटीपीसी सीपत के सीएसआर कार्यों की सराहना करते हुए इसे सामुदायिक विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया। उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी सीपत द्वारा किया गया यह प्रयास क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे बिलासपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

ताराचंडी धाम तक पहुंच रही फूलों की खुशबू, सरकारी मदद की उठी मांग

 गढ़वा जहां भीषण गर्मी और 43 डिग्री के टॉर्चर से आम जनजीवन बेहाल है और खेतों में फसलें दम तोड़ रही हैं, वहीं झारखंड के गढ़वा जिले के एक किसान ने अपनी मेहनत से गुल खिला दिए हैं. मझिआंव नगर पंचायत के पृथ्वी चक्र गढ़ौटा गांव के रहने वाले रमाशंकर माली फूलों की खेती के जरिए न केवल अपनी किस्मत बदल रहे हैं, बल्कि आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गए हैं. ताराचंडी धाम तक पहुंच रही खुशबू रमाशंकर के खेतों की खुशबू सात समंदर पार तो नहीं, लेकिन पड़ोसी राज्य बिहार के प्रसिद्ध मां ताराचंडी धाम (सासाराम) तक जरूर पहुंच रही है. रमाशंकर ने बताया कि हर दूसरे दिन करीब 400 से 500 गेंदे के फूलों की मालाएं बिहार के सासाराम भेजी जाती हैं. साधन न होने पर रमाशंकर खुद बाइक से सासाराम तक फूल पहुंचाने जाते हैं जिससे कि भक्तों को ताजे फूल मिल सकें. पारंपरिक खेती छोड़ अपनाई नई राह पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की राह चुनने वाले रमाशंकर ने बताते हैं  कि यह मुनाफे का सौदा है. एक बीघा खेत में बीज, खाद और सिंचाई मिलाकर करीब 25,000 रुपये खर्च होते हैं. सीजन के अंत तक करीब 2 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है. गर्मी में फूलों को बचाना बड़ी चुनौती रमाशंकर कहते हैं कि 43 डिग्री तापमान में फूलों को बचाना आसान नहीं है. पौधों को हर दो दिन में सींचना पड़ता है जिससे कि वे मुरझाएं नहीं. सरकारी सहायता की कमी रमाशंकर अपने तीन बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च इसी खेती से चला रहे हैं. हालांकि, उन्हें मलाल है कि इतनी मेहनत के बाद भी अब तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली. इधर क्षेत्र के अन्य किसान और करुआ कला के फूल उत्पादक बृजेश तिवारी भी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि गढ़वा को ‘बागवानी मिशन’ से जोड़ा जाए. किसानों का कहना है कि गढ़वा की भौगोलिक स्थिति (बिहार, यूपी और छत्तीसगढ़ की सीमा) इसे फूलों के व्यापार का बड़ा केंद्र बना सकती है, बस जरूरत है तो सरकार के थोड़े से सहयोग की. रामाशंकर का कहना है कि अगर सरकार आर्थिक या तकनीकी मदद दे, तो हम इस काम को और बड़े स्तर पर ले जा सकते हैं. पारंपरिक खेती के मुकाबले फूलों की खेती ने मुझे पहचान और बेहतर आजीविका दी है.