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जीनोमिक्स क्रांत,AIIMS में भविष्य की चिकित्सा पर चर्चा

 नई दिल्ली बीमारियों का उपचार अब सबके लिए एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि अब यह हर मरीज के जीन (DNA) के आधार पर तय किया जाएगा। इसे प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जिसमें उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और व्यक्तिगत होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा उन्नत तथा प्रभावी हो जाएंगी। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ‘डीएनए डे 2026’ पर आयोजित संगोष्ठी में सामने आई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीनोमिक्स (डीएनए आधारित विज्ञान) के उपयोग से भविष्य में उपचार का तरीका बदलने वाला है। चिकित्सक मरीज की जेनेटिक जानकारी के आधार पर बीमारी का बेहतर निदान और सही उपचार कर सकेंगे। जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर संगोष्ठी में जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर दिया गया। संगोष्ठी का आयोजन डीएनए सोसायटी आफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस-एम्स) ने संयुक्त रूप से कराया। संगोष्ठी में 1953 में डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज और 2003 में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की पूर्णता को भी रेखांकित किया गया। उद्घाटन सत्र डीएनए सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. अशोक शर्मा ने प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आईजीआईबी) के मुख्य वैज्ञानिक प्रो. अभय शर्मा ने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान पर न‌ई जानकारी साझा की। उन्होंने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान के उभरते आयामों को समझाया। कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत मुख्य व्याख्यान में शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो. संजीव गलांडे ने 'कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत किया। डीएसआइ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य प्रो. श्रीकांत कुकरेती ने जीनोमिक्स अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। प्रीमास लाइफ साइंसेज के डा. भास्कर मैती ने स्पैटियल बायोलॉजी और मल्टीओमिक्स तकनीकों के उपयोग को समझाया। 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पहलों को देश में किफायती और सुलभ जीनोमिक चिकित्सा के लिए अहम बताया।

पहले नरेन का जादू, फिर रिंकू का फिनिश—सिर्फ 4 गेंदों में जीता सुपर ओवर

लखनऊ  इकाना स्टेडियम में रविवार की रात आईपीएल 2026 का सबसे रोमांचक मुकाबला खेला गया। लखनऊ सुपर जायंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच आखिरी गेंद तक खिंचा और अंततः टाई रहा। इसके बाद हुए सुपर ओवर में वो ड्रामा देखने को मिला जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सुनील नारायण की जादुई गेंदबाजी और रिंकू सिंह के विजयी चौके की बदौलत कोलकाता ने न केवल यह मैच जीता, बल्कि खुद को अंक तालिका के सबसे निचले पायदान से भी बाहर निकाला। मैच का रोमांच, शमी के छक्के ने मुकाबले को किया टाई 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ की टीम एक समय हार की कगार पर थी। आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रनों की जरूरत थी। कार्तिक त्यागी की गेंदबाजी और रिंकू सिंह के शानदार कैचों ने मैच को फंसा दिया था। अंतिम गेंद पर लखनऊ को जीत के लिए 7 रनों की दरकार थी और स्ट्राइक पर थे मोहम्मद शमी। शमी ने त्यागी की स्लॉट बॉल को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्के के लिए भेजकर स्कोर बराबर कर दिया और मैच को सुपर ओवर में धकेल दिया। सुपर ओवर का ड्रामा, नारायण ने लखनऊ को 1 रन पर समेटा सुपर ओवर में लखनऊ पहले बल्लेबाजी करने उतरी, लेकिन उनके सामने सुनील नारायण की चुनौती थी। नारायण ने पहली ही गेंद पर निकोलस पूरन को बोल्ड कर लखनऊ को तगड़ा झटका दिया। अगली गेंद पर ऋषभ पंत ने एक रन लिया, जिससे मार्करम स्ट्राइक पर आए। मार्करम ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन बाउंड्री पर खड़े रोवमैन पॉवेल ने गजब की सूझबूझ दिखाई। पॉवेल ने बाउंड्री के बाहर जाने से ठीक पहले गेंद को हवा में उछाला और पास खड़े रिंकू सिंह ने कैच लपक लिया। इस तरह लखनऊ की पूरी टीम सुपर ओवर में महज 1 रन पर ऑलआउट हो गई। आपको बता दें कि सुपर ओवर में सिर्फ दो ही विकेट मिलते हैं। रिंकू सिंह का फिनिशिंग टच, पहली गेंद पर खत्म किया खेल मैच के असली हीरो रिंकू सिंह रहे। पहले मुख्य मैच में उन्होंने 51 गेंदों पर 83 रनों की शानदार पारी खेलकर केकेआर को 155 रन तक पहुंचाया और फील्डिंग में भी चार शानदार कैच पकड़े। जब सुपर ओवर में जीत के लिए सिर्फ 2 रनों की जरूरत थी, तो रिंकू सिंह स्ट्राइक पर आए। प्रिंस यादव की पहली ही गेंद को रिंकू ने कवर-पॉइंट के बीच से बाउंड्री की राह दिखाई और चौका जड़कर कोलकाता को एक यादगार जीत दिला दी। शमी ने आखिरी गेंद पर छक्का जड़ टाई कराया मैच टारगेट का पीछा करने उतरी LSG की आधी टीम 93 रन पर ही सिमट गई थी। मिचेल मार्श (2), एडन मारक्रम (31), कप्तान ऋषभ पंत (42), निकोलस पूरन (9) और मुकुल चौधरी (1) पवेलियन लौट चुके थे। यहां से आयुष बदोनी और इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतरे हिम्मत सिंह ने मोर्चा संभाला और LSG की उम्मीदें जगाईं। हालांकि KKR ने बदोनी (24) को चलता कर मेजबान टीम को फिर से बैकफुट पर धकेल दिया। LSG को आखिरी 2 ओवर में 28 रन बनाने थे। 19वां ओवर लेकर आए वैभव अरोड़ा ने सिर्फ 11 रन खर्चे और जॉर्ज लिंडे (8) का विकेट भी चटकाया। अब LSG को आखिरी ओवर में 17 रन की जरूरत थी। KKR की ओर से आखिरी ओवर लेकर आए कार्तिक त्यागी ने दो नो-बॉल डालने के बावजूद 5 गेंद में 11 रन ही दिए और साथ ही हिम्मत का विकेट भी झटक लिया। मुकाबला KKR की मुट्ठी में लग रहा था लेकिन मोहम्मद शमी ने आखिरी गेंद पर छक्का जड़ स्कोर बराबर कर दिया, जिससे LSG को वापसी का मौका मिला लेकिन उसने सुपर ओवर में हथियार डाल दिए। रिंकू सिंह ने खेली 83 रन की धाकड़ पारी इससे पहले KKR ने पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाए जाने पर 93 रन पर 7 विकेट खो दिए थे। KKR की पारी 120 के नीचे सिमटती दिख रही थी लेकिन रिंकू सिंह ने एक छोर पर खड़े रहकर उसे लड़ने लायक स्कोर तक पहुंचा दिया। रिंकू ने 51 गेंद में 83 रन की नाबाद पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 7 चौके और 5 छक्के निकले, जिसमें 4 छक्के उन्होंने दिग्वेश राठी के खिलाफ आखिरी ओवर में जड़े। रिंकू ने धाकड़ बल्लेबाजी करने के बाद फील्ड में भी फुर्ती दिखाते हुए 4 महत्वपूर्ण कैच लपके। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।

नायब सरकार की इंडस्ट्री पॉलिस,रोजगार, सब्सिडी और टेक्नोलॉजी पर जोर

चंडीगढ़  बहुत जल्द नायब सरकार अपनी नई उद्योग पालिसी-2026 लेकर आ रही है। ड्राप्ट तैयार हो चुका है। पिछले सप्ताह दो दिन उद्यमियों के साथ नई दिल्ली में बैठक कर पालिसी को लेकर सुझाव और निवेश पर चर्चा करने के बाद उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। पॉलिसी बनने के बाद कैबिनेट की मंजूरी लेने के बाद उसे लागू कर दिया जाएगा। नई पॉलिसी में रोजगार, निवेश और नई तकनीक के साथ-साथ बेहतर उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। नायब सरकार का दावा है कि देश की सबसे बेहतर उद्योग पॉलिसी होगी। युवाओं और महिलाओं को मिलेगी और अधिक नौकरी नई पॉलिसी में हरियाणा के युवाओं को अधिक रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए सरकार से मिलने वाली सालाना प्रोत्साहन राशि में बढ़ोत्तरी हो सकती है। कंपनी अगर दिव्यांग और स्थानीय महिलाओं को नौकरी देगी तो सरकार की ओर से उसे प्रति वर्ष 1.2 लाख रुपये की प्राेत्साहन राशि देगी। जो कंपनी सबसे अधिक हरियाणा के युवाओं को लगाएगी उसे अधिक सब्सिडी मिल सकती है। रिसर्च सेंटर बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी लार्ज इंडस्ट्री को दस करोड़ तो मेगा कंपनियों को पसास करोड़ रुपये तक देने का भी प्रविधान बन सकता है। यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद का नेशनल स्तर पर पेटेंट कराती है तो उसे 50 लाख और विश्व स्तर पर कराने पर बतौर इनाम एक करोड़ की राशि राज्य सरकार देगी। ऐसे होगा निगरानी तंत्र पॉलिसी के तहत एक उच्चस्तरीय समिति होगी जिसके मुख्यमंत्री खुद होंगे। यह समिति अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगी। हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन बोर्ड का गठन होगा जिसे अध्यक्ष उद्योग मंत्री होंगे जो मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगा। एक उद्योग विभाग की समिति होगी हो छोटी औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी देगी। नई पॉलिसी की खसियत     कंपनियों को निवेश पर नहीं बल्कि प्रदर्शन के आधार पर लाभ मिलेगा     कोर क्षेत्र में 30 प्रतिशत इंटरमीडिएट में 60 सब प्राइम में 75 और प्राइम क्षेत्र में 100 स्टांप डयूटी पर छूट मिलेगी     सिंगल विंडो सिस्टम होगा। एक पोर्टल पर सभी सुविधा मिलेगी, जिसमें आनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग सिस्टम और तय समय में स्वीकृत मिलना शामिल है।     आटोमोबाइल, ऑटो पार्टस, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रानिक्स, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी, ईवी, केमिकल, तथा पेट्रोकेमिकल इन्हें पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रविधान बनाया जा सकता है।  

मरीजों और परिजनों को राहत, एम्स भोपाल में 400 वाहनों की नई पार्किंग बनेगी

एम्स भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मुख्य द्वार पर नई पार्किंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से न केवल अस्पताल परिसर व्यवस्थित नजर आएगा, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को वाहन सुरक्षित खड़े करने की बड़ी सुविधा मिलेगी। फिलहाल पार्किंग स्थल पर फिनिशिंग का काम चल रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं एम्स भोपाल में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। एम्स के पीआरओ डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि नई पार्किंग में 400 से अधिक वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। फिनिशिंग कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी व्यवस्थित पार्किंग होने से अस्पताल परिसर में यातायात भी सुचारू रहेगा और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी। वर्तमान में एम्स की ओपीडी रोजाना चार हजार से अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को वाहन खड़ा करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। जगह के अभाव में लोग अपने वाहन बाहर मैदान या सड़कों के किनारे खड़े करने को मजबूर थे, जिससे अक्सर वाहन चोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई पार्किंग शुरू होने के बाद इस समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।  

HRRL रिफाइनरी में आग के बाद मरम्मत तेज, मई में उत्पादन की तैयारी

बाड़मेर  राजस्थान के बालोतरा (पचपदरा) में अग्निकांड के बाद खुशखबरी मिली है। देश की महत्वाकांक्षी परियोजना एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में फिर से जल्द ही सुचारू होगी। हाल ही में हुई अग्नि दुर्घटना को लेकर कंपनी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। रिफाइनरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग के बाद अब मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। कंपनी का लक्ष्य है कि मई 2026 के अंत तक यूनिट को दोबारा चालू कर उत्पादन शुरू कर दिया जाए। जांच में खुलासा: लीकेज बना हादसे की वजह कंपनी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह आग सीडीयू यूनिट के हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही। दुर्घटना का मुख्य कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हाइड्रोकार्बन का रिसाव माना जा रहा है। राहत की बात यह रही कि सुरक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने से आग पूरे प्लांट में नहीं फैली। इस हादसे में कुल छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े सहायक उपकरणों को नुकसान पहुंचा है, जिन्हें अब बदला या दुरुस्त किया जा रहा है। मई 2026 से मिलेगा स्वदेशी ईंधन एचआरआरएल प्रबंधन के अनुसार, प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का काम अगले 3 से 4 सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी की योजना के मुताबिक मई 2026 का दूसरा पखवाड़ा से सीडीयू यूनिट को दोबारा शुरू किया जाएगा। कंपनी ने इसके लिए मई के तीसरे- चौथे सप्ताह की समयसीमा रखी है। इसी महीने के दौरान एलपीजी, पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) और नैफ्था जैसे उत्पादों का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। अन्य सहायक इकाइयां पहले से ही कमीशनिंग के अंतिम चरण में हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थिर किया जाएगा। राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग, PM मोदी करने वाले थे उद्घाटन पढ़िये पदपचरा रिफाइनरी अग्निकांड से जुड़ी प्रमुख बातें     कंपनी की प्रारम्भिक जांच के अनुसार आग लगने की मुख्य वजह हाइड्रोकार्बन का रिसाव था।     यह रिसाव वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे एक प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हुआ था।     पदपचरा रिफाइनरी 80,000 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना है, जिसकी ल क्षमता 9 मिलियन टन प्रति वर्ष है।  

HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और चाइल्ड एजुकेशन भत्ते में बढ़ोतरी की मांग तेज

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके तहत वेतन आयोग लगातार बैठकों का दौर कर रहा है। बीते 24 अप्रैल को देहरादून में बैठक हुई तो अब दिल्ली में भी बैठकों का दौर शुरू होने वाला है। इसी कड़ी में अलग-अलग संगठनों की ओर से वेतन आयोग को डिमांड लिस्ट दी जा रही है। प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) की भी वेतन आयोग से कुछ डिमांड है। बता दें कि यह केंद्र सरकार के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है। क्या है डिमांड? वेतन आयोग से लेवल 1 (ग्रुप D) के कर्मचारी के लिए न्यूनतम मूल वेतन 50,000 रुपये और 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। इसके अलावा, PSNM चाहता है कि वेतन आयोग बच्चों के शिक्षा भत्ते यानी चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस को कम से कम 2,812.59 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति माह कर दे। बता दें कि केंद्र सरकार के शिक्षकों को बच्चे की 12वीं कक्षा तक की शिक्षा के लिए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस मिलता है लेकिन संगठन इसे ग्रेजुएशन तक के लिए मांग कर रहा है। इसके अलावा, हर महीने 2,000 रुपये के डिजिटल सपोर्ट अलाउंस (ब्रॉडबैंड और AI सपोर्ट) की भी मांग की गई है। यह पहली बार है जब वेतन आयोग के सामने इस तरह के अलाउंस की मांग हुई है। 7वां वेतन आयोग ऐसा कोई अलाउंस नहीं देता है। एचआरए में बदलाव कर्मचारी संगठन ने प्रस्ताव दिया है कि अलग-अलग शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA को मौजूदा दरों 10%, 20% और 30% से बढ़ाया है। नई दर 12%, 24% और 36% किए जाने की मांग है। कर्मचारी संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बढ़ाकर बेसिक पे का 12 से 15% किया जाए। इसे कम से कम 9,000 रुपये + महंगाई भत्ता यानी डीए प्रतिशत के हिसाब से बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। बता दें कि कर्मचारियों के अलग-अलग लेवल के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस की दरें 1,800 रुपये, 3,600 रुपये और 7,200 रुपये हैं। लीव में भी बदलाव की मांग प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच हर साल 14 दिनों की कैजुअल लीव (CL) की मांग कर रहा है। वहीं 30 दिनों की अर्नड लीव (EL) और 20 दिनों की मेडिकल लीव की डिमांड है। अगर केंद्रीय कर्मचारी रिटायर होते हैं तो 400 दिनों तक की EL एनकैशमेंट होनी चाहिए। बता दें कि यह अभी 300 दिन है। कर्मचारियों का संगठन चाहता है कि 8वां वेतन आयोग नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को 6,908 रुपये से बढ़ाकर 27,640 रुपये कर दे। यह 5-दिन का वर्क वीक (45 घंटे) चाहता है।

जमीन कब्जा और फाइनेंशियल फ्रॉड केस में कारोबारी रडार पर, जांच तेज

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में जारी विधानसभा चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों ने  फरार अपराधी 'सोना पप्पू' से जुड़े कथित जमीन कब्जाने और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में कोलकाता के कई स्थानों पर छापे मारे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने आनंदपुर और अलीपुर क्षेत्रों में दो कारोबारियों के आवासों पर छापे मारे। ईडी अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया, ''ये छापे वित्तीय अनियमितताओं और फरार आरोपी सोना पप्पू से संभावित संबंधों की जारी जांच का हिस्सा हैं।" सोना पप्पू को जमीन कब्जाने और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामलों का प्रमुख आरोपी माना जाता है और वह पिछले कुछ समय से फरार है। अधिकारियों का मानना है कि उसके कई कारोबारियों से करीबी संबंध थे, जिसके कारण एजेंसी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया है। ईडी अधिकारी ने कहा, ''पूछताछ के दौरान हमें कुछ अहम सुराग मिले, जिनके आधार पर हम इन परिसरों तक पहुंचे।'' उन्होंने बताया कि ईडी दो कारोबारियों की कथित वित्तीय गड़बड़ियों में भूमिका की जांच कर रही है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या उन्होंने अवैध लेनदेन के माध्यम के रूप में काम किया। ईडी सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है तथा आने वाले दिनों में और भी छापेमारी हो सकती है। गेहूं घोटाले में भी ईडी की छापेमारी इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत गेहूं घोटाले से जुड़े मामले में कोलकाता, बर्दवान और हाबरा स्थित नौ ठिकानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई निरंजन चंद्र साहा और अन्य आरोपियों से जुड़े आपूर्तिकर्ताओं तथा निर्यातकों के परिसरों पर की जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय ने यह जांच धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत शुरू की है, जो पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा बशीरहाट थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की गयी है। यह मामला घोजाडांगा भूमि सीमा शुल्क केंद्र के उप आयुक्त की शिकायत पर दर्ज हुआ था, जिसमें कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाया गया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से लाभार्थियों के लिए निर्धारित गेहूं को अवैध रूप से आपूर्ति श्रृंखला से बाहर निकालकर कम कीमत पर प्राप्त किया और फिर उसे खुले बाजार में ऊंची कीमत पर बेच दिया। इस प्रक्रिया में आपूर्तिकर्ताओं, अधिकृत वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत बतायी गयी है।

मुगलकालीन विज्ञान की अनमोल धरोहर: एस्ट्रोलेब में विज्ञान और संस्कृति का अनोखा संगम

लंदन जयपुर के शाही संग्रह की सबसे बेशकीमती वैज्ञानिक विरासतों में से एक 17वीं शताब्दी का एक विशाल ‘एस्ट्रोलेब’ (खगोलीय गणना यंत्र) आगामी 29 अप्रैल को लंदन के सोथबी नीलामी घर में वैश्विक बोली के लिए तैयार है। पीतल से बने इस अद्भुत यंत्र को विशेषज्ञ अपनी बहुमुखी क्षमताओं के कारण उस दौर का ‘सुपरकंप्यूटर’ और ‘प्राचीन स्मार्टफोन’ करार दे रहे हैं। सोथबी के ‘इस्लामिक एंड इंडियन आर्ट’ विभाग के प्रमुख बेनेडिक्ट कार्टर ने इस यंत्र को अब तक का सबसे विशाल और दुर्लभ खगोलीय उपकरण बताया है। इसकी ऐतिहासिक जड़ें जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय के निजी संग्रह से जुड़ी हैं। महाराजा के निधन के बाद यह उनकी पत्नी और विश्वप्रसिद्ध महारानी गायत्री देवी के पास रहा, जहां से यह कालांतर में एक निजी संग्रह का हिस्सा बन गया। अब पहली बार इसे सार्वजनिक मंच पर प्रदर्शित और नीलाम किया जा रहा है। टूट सकता है वर्ल्ड रिकॉर्ड तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टि से यह यंत्र अपने समय की कला का शिखर है। इसका वजन 8.2 किलोग्राम और ऊंचाई लगभग 46 सेंटीमीटर है, जो सामान्य एस्ट्रोलेब की तुलना में चार गुना बड़ा है। इसकी दुर्लभता और शाही जुड़ाव को देखते हुए, विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह 1.5 से 2.5 मिलियन पाउंड (लगभग 15 से 25 करोड़ रुपए) के बीच बिक सकता है, जो खगोलीय यंत्रों की नीलामी के पिछले सभी विश्व रिकॉर्ड तोड़ सकता है। इस यंत्र की सबसे बड़ी खूबी इसका ‘ऑल-इन-वन’ गैजेट होना है। ऑक्सफोर्ड की इतिहासकार डॉ. फेडेरिका गिगेंटे के अनुसार, इसके जरिए 17वीं सदी में खगोलशास्त्री सूर्योदय-सूर्यास्त का समय, तारों की सटीक स्थिति, किसी कुएं की गहराई और इमारतों की ऊंचाई माप सकते थे। इसके अलावा, इसका उपयोग मक्का की दिशा निर्धारित करने और पंचांग की सहायता से सटीक कुंडलियां तैयार करने के लिए भी किया जाता था। विज्ञान और संस्कृति का समन्वय सांस्कृतिक रूप से यह यंत्र मुगलकालीन भारत की मिली-जुली विरासत का जीवंत प्रमाण है। इसे 17वीं सदी की शुरुआत में लाहौर (अब पाकिस्तान) के मशहूर ‘लाहौर स्कूल’ के दो भाइयों कायम मुहम्मद और मुहम्मद मुकीम ने बनाया था। इस यंत्र पर तारों के नाम फारसी में अंकित हैं, जिनके ठीक बगल में उनके संस्कृत समकक्ष नाम देवनागरी लिपि में उकेरे गए हैं। यह उस दौर में विज्ञान और संस्कृति के अद्भुत समन्वय को दर्शाता है। आज भी बिल्कुल सटीक गणना यह एस्ट्रोलेब लाहौर के तत्कालीन प्रशासक आका अफजल के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया था, जो मुगल सम्राट जहांगीर और शाहजहां के शासनकाल में ऊंचे पदों पर तैनात थे। इसमें 94 शहरों के अक्षांश और देशांतर के साथ-साथ 38 तारों के पॉइंटर्स दिये गये हैं, जो आज भी इतने सटीक हैं कि किसी भी खगोलीय पिंड की ऊंचाई की एकदम सही डिग्री बता सकते हैं। विश्व भर के संग्रहालय और निजी संग्रहकर्ता इस अनूठी वैज्ञानिक धरोहर को हासिल करने के लिए उत्सुक हैं।

आगरा में RTE दाखिले में लापरवाही, 18 स्कूलों पर कार्रवाई की तैयारी

 आगरा  यूपी के आगरा में निशुल्क शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब और कमजोर आय वर्ग के बच्चों को निजी स्कूल प्रवेश नहीं दे रहे हैं। 2213 बच्चे प्रवेश से वंचित हैं। स्कूल संचालक अभिभावकों को औपचारिकता पूरी कराने के लिए टाल मटोल करने में लगे हैं। शुक्रवार को जिला टास्क फोर्स (डीटीएफ) की बैठक में डीएम मनीष बंसल के सामने यह मामला आया तो उन्होंने ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है। आरटीई के तहत आगरा के 8112 बच्चों को प्रवेश लिए चयनित किया गया था। इनमें से 5899 बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिल चुका है। मगर 2213 बच्चे प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। उनके माता-पिता स्कूलों के चक्कर काट-काटकर परेशान हो चुके हैं। डीएम ने जब इस लापरवाही का कारण पूछा तो अधीनस्थों ने बताया कि 18 निजी स्कूल हैं जो कि अड़चन पैदा कर रहे हैं। हालांकि इन स्कूलों को नोटिस जारी कर दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद भी बच्चों को प्रवेश नहीं हुआ है। इस पर डीएम ने फटकार लगाते हुए इन स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। बीईओ जाकर कराएं प्रवेश: डीएम डीएम मनीष बंसल ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ऐसे स्कूलों में खुद जाकर देखें किन कारणों से बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहे हैं। जो औपचारिकताएं पूरी करा चुके हैं, उनके बच्‍चों को तत्काल प्रभाव से प्रवेश कराया जाए। प्रवेश नहीं देने के कारण जानकार उन्हें इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आरटीई में शत प्रतिशत प्रवेश कराया जाना चाहिए। जो प्रवेश में बाधा डाल रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। बीईओ रोजाना चखेंगे मिडडे मील नवागत डीएम मनीष बंसल ने स्कूल चलो अभियान को जनआंदोलन बनाने की बात कही है। स्कूलों में पंजीकरण की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ ये भी देखा जाए कि बच्चें प्रतिदिन स्कूल पहुंचे। इसके अलावा बच्चों को मिलने वाला मिड डे मील को बीईओ बच्चों के साथ बैठकर मिड डे मील खाएं। ऐसा करते हुए प्रतिदिन फोटो शेयर करें।  

BPSC परीक्षा में सॉल्वर गैंग का जाल, 8 FIR दर्ज

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) की परीक्षा में धांधली की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें एक बड़े संगठित गिरोह और 'सॉल्वर गैंग' की भूमिका सामने आ रही है। इस मामले में अब तक बिहार के 5 अलग-अलग जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, वहीं पुलिस ने अब तक कुल 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। EOU ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BPSC से कई अहम जानकारियां मांगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 5 जिलों में एक जैसा चीटिंग पैटर्न EOU की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और गया जैसे जिलों के परीक्षा केंद्रों पर धांधली का एक जैसा पैटर्न मिला है। कई अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के साथ रंगे हाथों पकड़े गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस धांधली के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जो अभ्यर्थियों को 25 से 30 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। SIT का गठन कर अब इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर क्यों मेहरबान था आयोग? जांच का सबसे बड़ा और विवादित पहलू परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी 'मेसर्स साई एजु केयर प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर' की भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर रखा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक दागी कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा का जिम्मा कैसे दिया गया? इसके अलावा, बायोमेट्रिक हाजिरी लेने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब कड़ी पूछताछ की जा रही है। 14 से 21 अप्रैल के बीच हुई थी परीक्षा BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच AEDO की परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से गड़बड़ी की खबरें आने लगी थीं, जिसके बाद EOU ने मोर्चा संभाला। अब EOU ने BPSC से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा है, जो परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी के चयन में शामिल थे।