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‘4 मई के बाद भाजपा के शपथ ग्रहण समारोह में वापसी करूंगा’, बंगाल में जीत को लेकर पीएम मोदी का भरोसा

बैरकपुर  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान से पहले बैरकपुर में एक विजय संकल्प रैली को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने राज्य के साथ अपने लंबे जुड़ाव पर प्रकाश डाला और 4 मई को नतीजों के बाद भाजपा की जीत का भरोसा जताया।  उन्होंने कहा, "इस चुनाव में यह मेरी आखिरी रैली है और पश्चिम बंगाल में मैं जहां भी गया हूं, मैंने लोगों का मूड देखा है. मैं इस भरोसे के साथ लौट रहा हूं कि 4 मई को नतीजों के बाद मुझे भाजपा के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए वापस आना होगा।  पीएम ने कहा, बैरकपुर ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को शक्ति प्रदान की थी; आज यही भूमि बंगाल में बदलाव का मार्ग प्रशस्त कर रही है। पीएम ने कहा कि ओडिशा और बिहार के बाद इस बार पश्चिम बंगाल में कमल खिलेगा. उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत का विकास राष्ट्र की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है; तृणमूल के पास बंगाल के विकास के लिए कोई दूरदृष्टि नहीं है. साथ ही उन्होंने कहा कि स्वयं को बंगाल की सेवा करने, सुरक्षा सुनिश्चित करने और राज्य की रक्षा करने के लिए समर्पित मानता हूं. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करके, भाजपा ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संकल्पों में से एक को पूरा किया. बंगाल में नई भाजपा सरकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राज्य की समृद्धि के सपने को पूरा करेगी और शरणार्थी मुद्दे का समाधान करेगी।  बैरकपुर की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- एक ओर मिलें बंद हो रही हैं, दूसरी ओर कच्चे बम बनाने की फैक्ट्रियां खुल रही हैं, गुंडों को नौकरियां मिल रही हैं, टीएमसी का गिरोह फल-फूल रहा है. उन्होंने कहा- टीएमसी का फॉर्मूला है गाली दो, धमकी दो, झूठ बोलो, इन्होंने सेना, संवैधानिक संस्थाएं सब को गालियां दी. वहीं रोजगार की कमी के कारण बंगाल ने दशकों तक पलायन का दर्द सहा है, बीजेपी सरकार की प्राथमिकता युवाओं को रोजगार प्रदान करना होगी. दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा और वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 

जबलपुर: कॉन्स्टेबल द्वारा वकील को पीटे जाने के 14 दिन बाद FIR, अफसरों पर समझौते का दबाव, हाईकोर्ट में याचिका

जबलपुर जबलपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में अधिवक्ता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस आरक्षक पर घर में घुसकर हमला करने के आरोप के बाद पहले पुलिस की निष्क्रियता और फिर देरी से दर्ज एफआईआर ने पूरे घटनाक्रम को विवादों में ला दिया है। अब मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 29 अप्रैल को सुनवाई प्रस्तावित है। मामूली विवाद से शुरू हुआ हिंसक घटनाक्रम-समीक्षा टाउन निवासी अधिवक्ता पंकज शर्मा के अनुसार 11 अप्रैल की शाम बच्चों के शोर को लेकर हुए विवाद के बाद मदनमहल थाने में पदस्थ आरक्षक साकेत तिवारी उनके घर पहुंचे और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करने लगे। बीच-बचाव करने आई महिलाओं और पड़ोसियों के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया। सबूत होने के बावजूद नहीं हुई तत्काल कार्रवाई-घटना के बाद पीड़ित अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से पूरी घटना की जानकारी दी। आरोप है कि पुलिस ने स्पष्ट सबूत होने के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में रुचि नहीं दिखाई और समझौते के लिए दबाव बनाया। कोर्ट की शरण के बाद हरकत में आई पुलिस-कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। इसके बाद 25 अप्रैल को, घटना के लगभग 14 दिन बाद, सिविल लाइन थाने में आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल-पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता धर्मेंद्र सोनी ने दर्ज एफआईआर की प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि एफआईआर जल्दबाजी में और त्रुटिपूर्ण तरीके से दर्ज की गई, जिसमें न तो आवेदक को सूचित किया गया और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। आरोपी ने खाली किया मकान, दबाव के आरोप-एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी आरक्षक ने अपना किराए का मकान खाली कर दिया। वहीं, पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत वापस लेने के लिए पुलिस द्वारा दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर काउंटर केस की धमकी दी गई। 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई-अब इस पूरे मामले पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ 29 अप्रैल को सुनवाई करेगी, जिसमें मारपीट और कथित तौर पर त्रुटिपूर्ण एफआईआर से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। बच्चों के शोर से आगबबूला हुआ आरक्षक सिविल लाइन समीक्षा टाउन में रहने वाले अधिवक्ता पंकज शर्मा 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे घर पर आराम कर रहे थे। बाहर बच्चों का शोर हो रहा था, जिस पर उनकी पत्नी ने उन्हें शांत होकर खेलने के लिए कहा। यह बात पास में ही किराए से रहने वाले पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी को पता चली। वह शहर के मदन महल थाने में पदस्थ है। आरक्षक अधिवक्ता के घर पहुंचा और गाली-गलौच करने लगा। पास खड़े पड़ोसियों ने विवाद को शांत कराने की कोशिश की। इसी बीच अचानक आरक्षक साकेत तिवारी ने वकील पर हमला कर दिया। पड़ोसी वकील को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन आरक्षक लगातार हमला करता रहा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई। घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और टीआई को वीडियो फुटेज के जरिए सिपाही साकेत तिवारी की करतूत बताई, लेकिन पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया। पीड़ित का कहना था कि कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उस पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा था। वकील बोले- 3 घंटे तक थाने में बैठे रहे अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना था कि बहुत ही मामूली बात पर वर्दी का रौब दिखाते हुए पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी ने उनके साथ मारपीट की। साकेत पड़ोस में प्रकाश सराठे के घर किराए से रहते हैं। वकील पंकज शर्मा का आरोप है कि वे रात में तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने FIR दर्ज नहीं की, बल्कि उस पुलिसकर्मी को भी वहां से अलग कर दिया, जो रिपोर्ट दर्ज करता है, ताकि वह शिकायत न लिख सके। पंकज शर्मा ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपे, जिसमें विवाद होता दिख रहा है। मारपीट की जानकारी मिलते ही साथी अधिवक्ता सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी और टीआई ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जांच की बात कही। लगातार शिकायतें कीं, कार्रवाई नहीं हुई अधिवक्ता पंकज शर्मा का कहना है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी के खिलाफ लगातार शिकायत की गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में 23 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर 29 अप्रैल को सुनवाई होनी है। पीड़ित को नहीं दी जानकारी याचिकाकर्ता पंकज शर्मा के वकील धर्मेंद्र सोनी का कहना है कि साकेत तिवारी के खिलाफ जल्दबाजी में जो एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें कई खामियां हैं, जिन्हें सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया जाएगा। उनका कहना है कि जब एफआईआर दर्ज की जा रही थी, तब आवेदक को न तो इसकी जानकारी दी गई और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। जहां पंकज शर्मा के हस्ताक्षर होना थे, वहां किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए। धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि एफआईआर की कंडिका 7 में आरोपी साकेत तिवारी का नाम होना था, वहां उसके अलावा एक और नाम शैलेंद्र सिंह मार्को का भी लिखा है। वह सिविल लाइन थाने में एएसआई के पद पर पदस्थ हैं और उनका इस केस से कोई ताल्लुक नहीं है। अधिवक्ता ने बताया कि जानबूझकर एफआईआर इस तरह लिखी गई है, ताकि बाद में उस पर सवाल खड़े हो सकें।

AI से सपनों पर कंट्रोल का दावा! स्टार्टअप ने लॉन्च किए अनोखे वियरेबल डिवाइस

AI की मदद से लेटर, कोटिंग और कैलकुलेशन आदि तक कराई जा सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि AI की मदद से अपने सपनों को भी कंट्रोल किया जा सकता है. ये दावा एक स्टार्टअप प्रोफेटिक AI ने किया है. स्टार्टअप ने अपने वियरेबल डिवाइस लॉन्च किए हैं, जिनको लेकर दावा किया है कि आप क्या सपने में देखना चाहते हैं, इस डिवाइस की मदद से कंट्रोल किया जा सकती है. इनकी शुरुआती कीमत $449 (लगभग 42,300 रुपये) है. स्टार्टअप ने दो नए वियरेबल डिवाइस को पेश किया है, जिनके नाम डुअल और फेस है. ये आम लोगों के सपने देखने के तरीके को बदलने का काम करते हैं. वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है इन वियरेबल प्रोडक्ट को सिर पर लगाया जाता है, जिनसे एक तार जुड़ा होता है. कंपनी के पोर्टल पर लिस्ट डिवाइस देखने में एक जैसे लगते हैं. ये डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम को ट्रिगर कर सकते हैं, जो एक ऐसी स्थिति होती है, जब आप जानते हैं कि आपप सपना देख रहे हैं और उसको कंट्रोल किया जा सकता है. यह कैसे काम करता है? X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर प्रोफेटिक AI ने बताया कि यह पूरा सिस्टम कैसे काम करते हैं. ये डिवाइस सिर के जरिए सुरक्षित अल्ट्रासोनिक ऊर्जा को प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स तक भेजते हैं और फ्रंटोपैरिएटल नेटवर्क को एक्टिव कर देते हैं. ये सिस्टम आमतौर पर सपने देखते समय डिएक्टिव रहते हैं, जिससे ल्यूसिड अवेयरनेस की कमी होती है. स्टार्टअप का दावा है कि इस नेटवर्क को एक्टिव करके ये डिवाइस उस गतिविधि को संतुलित करने में मदद करते हैं. Prophetic Pulse में इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG) सेंसर भी लगे हैं, जिनका उपयोग मेंटल एक्टिविटी को समझने में किया जाता है. दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क का स्टार्टअप Neuralink भी अपने ब्रेन इम्प्लांट चिप्स में EEG सेंसर का उपयोग करती है. ये टेक्नोलॉजी ट्रांस्क्रानियल फोक्स्ड अल्ट्रा साउंड पर और AI आधारित है. डिवाइस ल्यूसिड ड्रीम जनरेट कर सकते हैं और सपनों की याददाश्त, स्पष्टता और कंट्रोल को बेहतर बना सकते हैं. इसकी कीमत कितनी होगी? ऑफिशियल पोर्टल पर Prophetic Dual की कीमत 449 अमेरिकी डॉलर (लगभग 43,200 रुपये) है. इसकी डिलीवरी इस साल के अंत तक शुरू होगी. Prophetic Phase की कीमत 1,299 डॉलर  (करीब 1,22,000 रुपये) होगी और इसकी डिलीवरी 2027 के मध्य से शुरू होगी.

दिनदहाड़े अपहरण और फिरौती, बारां की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल

बारां बारां में ग्लास व्यापारी के अपहरण के मामले में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने प्रशासन को फटकार लगाई है. उन्होंने पुलिस एसपी से बात कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए. पूर्व मुख्यमंत्री ने इस मामले में चिंता जाहिर करते हुए पुलिस प्रशासन को चेताया. प्रकरण शहर के ग्लास व्यापारी सतीश गौड़ के अपहरण से जुड़ा है. व्यापारी को अगवा कर फिरौती की डिमांड की गई थी. इस मामले ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वहीं, व्यापारियों में भी गुस्सा देखने को मिल रहा है. व्यापारी को बंधक बनाकर खेत में रखा जानकारी के अनुसार, व्यापारी सतीश गौड़ को दिनदहाड़े कार में अगवा कर खेत में बंधक बनाकर रखा गया. बदमाशों ने बंदूक की नोक पर मारपीट की और उनका वीडियो बनाकर पहले 1 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. बाद में आरोपियों ने 6 लाख रुपये नकद और 8 लाख रुपये के चेक लेकर व्यापारी को छोड़ दिया. मामले के सामने आने के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश है. सांसद दुष्यंत सिंह ने भी लिया संज्ञान घटना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और सांसद दुष्यंत सिंह ने संज्ञान लिया है. दोनों नेताओं ने एसपी अभिषेक अंदासु से बात कर जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. राजे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अपराधियों के खिलाफ किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी. पुलिस ने भी मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.

बागेश्वर धाम की सभा में महाभारत कलाकारों के बयान, हिंदू राष्ट्र पर जोर

  प्रयागराज के बागेश्वर धाम में धीरेंद्र शास्त्री की आयोजित कथा और सभा इन दिनों चर्चाओं में बनी हुई है. हाल ही में वो छत्रपति शिवाजी महाराज पर दिए बयान से सुर्खियों में आए थे, लेकिन अब उनकी सभा में बीआर चोपड़ा की महाभारत की कास्ट पहुंची. शो में युधिष्ठिर, दुर्योंधन, और श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले एक्टर्स ने मंच से हिंदू धर्म की रक्षा और देश के हिंदू राष्ट्र बनाने पर जोर दिया. उनके फायर बोल ने सभी के कान खड़े कर दिए हैं. आइये जानते हैं इन्होंने क्या कुछ कहा. पुनीत ने दी लव-जिहाद से बचने की सलाह बागेश्वर धाम की सभा में पहुंचे 'दुर्योधन' का किरदार निभाने वाले पुनीत इस्सर ने कहा कि- ऐसी सभाओं को देखकर लगता है कि हमारा हिंदू जागृत है और हिंदू राष्ट्र जरूर बनेगा. मैं अपनी माताओं-बहनों और भाईयों से ये जरूर कहना चाहूंगा कि अपने बच्चों को धर्म के प्रति अवगत जरूर कराएं. आसपास के लोगों से सतर्क रहें. जिस तरह से ये जबरदस्ती के धर्म परिवर्तन हो रहे हैं, हमारी बहू-बेटियों को बहलाया जा रहा है, उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है. उनसे बचकर रहे, और किसी भी कीमत पर ये नहीं होना चाहिए. इसी के साथ पुनीत ने आगे कहा कि- मैं समझता हूं कि शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्र विद्या भी आवश्यक होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने सभी के व्यायाम पर भी जोर दिया. गजेंद्र की दहाड़- राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं बाबा बागेश्वर की इस कथा का हिस्सा युधिष्ठिर यानी गजेंद्र चौहान भी बने. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि- महाभारत देखी सबने लेकिन किया हमने. हमने उन पापियों का सत्यानाश किया जो धर्म के खिलाफ थे. अपनी बात को आगे समझाते हुए गजेंद्र ने कहा कि- धर्म के विरोध में काम करने वालों का सत्यानाश होना ही चाहिए. इस देश को अगर हिंदू राष्ट्र बनाना है तो महाभारत के इस एक लाइन को याद कर लीजिए- कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार-परंपरा, कोई भी प्रतिज्ञा राष्ट्र से बड़ी नहीं हो सकती. जहां राष्ट्र की बात आती है सबकुछ समर्पण है. नितीश बोले- हिंदू धर्म सर्वोपरि इसी के साथ श्रीकृष्ण का किरदार निभाने वाले नितीश भारद्वाज ने भी हिंदू राष्ट्र बनाने की बात पर जोर देते हुए कहा कि- जब से आया हूं सबने कहा महाभारत बहुत देखी. मित्रों, महाभारत आज भी चल ही रही है. लेकिन अलग तरह की चल रही है. धर्म की रक्षा की आवश्यकता फिर से पड़ गई है. ये कलियुग है. जब द्वापर में धर्म की रक्षा की जरूरत पड़ी, तो कलियुग में तो पड़नी ही है. नितीश ने आगे भगवद् गीता का श्लोक याद दिलाते हुए कहा कि- इस समय जब धर्म रक्षा और विजय की आस लेकर तुम्हारे सामने खड़ा है, ऐसे समय में निराशा के भाव को अपने मन में आने नहीं देना है. आज परिस्थितियां वैसी ही हैं. भारत और विदेशों में भी. तरह-तरह की शक्तियां काम कर रही हैं. हिंदू धर्म पर आक्रमण हो रहा है. जो आदि-अनादि काल से चला आ रहा है वो केवल एक धर्म है- हिंदू धर्म. इस संस्कृति का रहना बहुत आवश्यक है. अगर हमारा व्यवहार सनातन वैदिक हिंदू नहीं होता तो ये दूसरे धर्म यहां आकर नहीं पनपते. न ही आज इनकी हिंदू धर्म के ऊपर टीका-टिप्पणी करने की हिम्मत होती. नितीश ने आगे भगवद् गीता का एक उपदेश कहते हुए समझाया कि हिंदू धर्म बांटने का काम नहीं करता है. इसलिए हमारे बीच सिर्फ प्रेम होना चाहिए. जो हमसे प्रेम करेगा हम उन्हीं से करेंगे, वरना हमें छत्रपति शिवाजी महाराज भी बनना आता है. क्योंकि धर्म की रक्षा हमारा कर्तव्य है.    

राजभवन से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी, गोपाल मीणा बने नए सचिव

पटना बिहार सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा के चार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राजभवन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्यपाल के सचिवालय में हुआ है, जहाँ प्रधान सचिव के पद पर नई तैनाती की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में चोंग्यू की विदाई बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्यू को राजभवन से स्थानांतरित कर दिया गया है। अब उनको अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया है। गोपाल मीणा इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे। आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा, राजभवन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में भी  रहेंगे।  मो. सोहैल बने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मो. सोहैल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है। गोपाल मीणा की तरह मो. सोहैल भी जांच आयुक्त के अपने अतिरिक्त प्रभार को पूर्ववत संभालते रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर में नीतीश, कैबिनेट विस्तार पर डिप्टी सीएम ने क्या कहा? लखीसराय को मिले नए डीएम सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव करते हुए 2013 बैच के आईएएस अधिकारी शैलेन्द्र कुमार को लखीसराय का नया समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी बनाया गया है। वह अब तक कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।  

सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता चलन,मेडिकल जरूरत या बड़ा बिज़नेस?

आज के दौर में मातृत्व का अनुभव कुदरती प्रक्रिया से हटकर व्यापारिक मोड़ ले चुका है। चिकित्सा जगत में अब प्रसूता को एक सामान्य महिला के बजाय मरीज की तरह देखा जा रहा है। आंकड़ों की मानें तो भोपाल जैसे बड़े शहरों के निजी अस्पतालों में हर दूसरा बच्चा सर्जरी के जरिए दुनिया में आ रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ का डर दिखाकर प्रसव जैसी स्वाभाविक प्रक्रिया को एक गंभीर बीमारी की तरह पेश किया जा रहा है, जिससे सामान्य डिलीवरी का चलन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों मे भर्ती होते ही शुरू होता खेल निजी अस्पतालों में जैसे ही कोई गर्भवती महिला दाखिल होती है, वहां के माहौल में एक मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का संचार शुरू कर दिया जाता है। वार्ड से लेकर लेबर रूम तक ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि घबराए हुए परिजन सुरक्षा के नाम पर सिजेरियन के लिए तुरंत तैयार हो जाते हैं। यही वजह है कि पिछले एक दशक में प्रदेश के भीतर सिजेरियन ऑपरेशन से होने वाले जन्मों की संख्या दोगुनी हो गई है, जो सीधे तौर पर व्यापारिक मानसिकता की ओर इशारा करती है। WHO के चौकाने वाले आंकड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा जारी चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि निजी अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का अनुपात 45 प्रतिशत के पार जा चुका है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 34 प्रतिशत के आसपास है। ये भिन्नताएं सवाल खड़ा करती हैं कि क्या अस्पताल बदलने मात्र से चिकित्सा की आवश्यकताएं भी बदल जाती हैं? यह विरोधाभास साफ करता है कि प्रसव का तरीका अब मां की सेहत से ज्यादा अस्पताल के मुनाफे और डॉक्टर की सुविधा पर निर्भर करने लगा है। परिवार में ऐसे बनाते है डर प्रसव के इस पूरे ‘बाजार’ को समझना हो तो उन परिवारों की कहानी देखनी होगी, जिनसे सामान्य स्थिति होने के बावजूद सिजेरियन की सहमति ली गई। अक्सर डॉक्टर तर्क देते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी में बहुत समय लगेगा और ऑपरेशन करना ज्यादा सुरक्षित और त्वरित विकल्प है। बच्चे की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की भावनाएं इतनी प्रबल होती हैं कि वे भारी-भरकम बिल के सामने सवाल पूछना भूल जाते हैं। एक सिजेरियन प्रसव का औसत खर्च 85 हजार से एक लाख रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह पूरा क्षेत्र करोड़ों के कारोबार में तब्दील हो गया है। सिजेरियन डिलीवरी में पैसों का खेल भारत में सिजेरियन (C-Section) प्रसव की दर अब 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 10-15 प्रतिशत के मानक से कहीं अधिक है। साल 2024-25 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में हुए कुल प्रसवों में से लगभग 54 लाख बच्चे ऑपरेशन के जरिए हुए। यदि एक ऑपरेशन का खर्च एक लाख रुपये माना जाए, तो यह 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक का एक संगठित ‘सी-सेक्शन बाजार’ बन चुका है। अकेले राजधानी भोपाल में ही इस माध्यम से करोड़ों का राजस्व पैदा हो रहा है। महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं; डॉक्टर के अपने तर्क दूसरी ओर, विशेषज्ञ और डॉक्टर अपनी दलील देते हुए कहते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और देर से होने वाली शादियां इसकी बड़ी वजह हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब महिलाएं प्रसव पीड़ा सहने को तैयार नहीं हैं और चिकित्सा संबंधी जोखिमों से बचने के लिए सिजेरियन का चुनाव किया जा रहा है। शहरी जीवन में बढ़ता तनाव, भय और शुभ मुहूर्त में बच्चे के जन्म की चाहत जैसे सामाजिक कारण भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रहे हैं। परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही परामर्श बेहद जरूरी- एक्स्पर्ट्स विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के प्रति महिलाओं के मन में बैठे डर को दूर करने की आवश्यकता है। गर्भावस्था के दौरान सही सलाह, भावनात्मक सहयोग और धैर्य की कमी के कारण महिलाएं ऑपरेशन का रास्ता चुनती हैं। यदि परिवारों और गर्भवती महिलाओं को सही जानकारी और मानसिक मजबूती दी जाए, तो इस बढ़ते हुए ‘सर्जरी कल्चर’ पर अंकुश लगाया जा सकता है।  

संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

भारत के Sujit Kalkal ने रचा इतिहास, वर्ल्ड नंबर-1 बनकर ओलंपिक की राह की मजबूत दावेदारी

चरखी दादरी. जिले के गांव इमलोटा निवासी पहलवान सुजीत कलकल लगातार सफलता के नए अध्याय लिखते जा रहे हैं। वे एक के बाद एक सफलता हासिल कर देश के लिए मेडल हासिल कर रहे हैं। उनके इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग की नई रैंकिंग में वे टॉप पर पहुंचे है और दुनिया के नंबर वन पहलवान बन गए हैं। खेल प्रेमियों में उनकी इस उपलब्धि से खुशी का माहौल है। उन्होंने इसे जिला दादरी व देश-प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया। उल्लेखनीय है कि भारतीय युवा पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए वर्ल्ड रेसलिंग रैंकिंग में नंबर-वन स्थान हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। 65 किलोग्राम भारवर्ग में खेलते हुए सुजीत कलकल ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर बड़े नामी पहलवानों को मैट पर पछाड़ते हुए अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित बड़ी प्रतियोगिताओं में गोल्ड मेडल हासिल किए। नंबर वन पहलवान बने सुजीत उसी का परिणाम है, जिसने उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पहलवानों की सूची में सबसे ऊपर पहुंचा दिया। उनकी इस खेल उपलब्धि पर खेल प्रेमियों और कुश्ती जगत से जुड़े लोगों ने खुशी जाहिर की है। कोचों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुजीत इसी तरह प्रदर्शन करते रहे, तो आने वाले दिनों में देश की झोली में अनेक गोल्ड मेडल डालने का काम करेंगे। सुजीत कलकल का नंबर-वन बनना न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय कुश्ती के बढ़ते स्तर और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी मजबूती का भी प्रतीक है। उनकी इस उपलब्धि से देशभर के युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। लगातार जीत चुके हैं 6 गोल्ड मेडल: कोच सुजीत कलकल के पिता एवं कोच दयानंद कलकल ने बताया कि सुजीत शानदार लय में चल रहे हैं। उन्होंने बीते करीब एक साल के दौरान जिस भी इंटरनेशनल चैंपियनशिप में शिरकत की है उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया है। उन्होंने बताया कि डबल लेग होल्ड, फीतले बांधना व भारंदाज उनके प्रमुख दांव-पेंज हैं। जिनके दम पर वे लगातार जीत हासिल करते हुए लगातार छह गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। उन्होंने बताया कि 2025 में सीनियर वर्ल्ड रैंकिंग में दो बार गोल्ड मेडल, अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड, वर्ल्ड सीनियर रैंकिंग चैंपियनशिप में दो गोल्ड और अब सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड सहित लगातार छह गोल्ड मेडल हासिल किए हैं। उम्मीद है कि वे जीत के इस सफर को जारी रखेंगे और अपनी खेल प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए मेडल हासिल कर देश, प्रदेश व दादरी जिले का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि सुजीत ने अपने खेल प्रदर्शन से साबित कर दिया है कि वे ओलिंपिक में मेडल जीतने का मादा रखते हैं। देश को सुजीत से बड़ी उम्मीदें: योगेश जिला कुश्ती संघ के सचिव योगेश इमलोटा ने कहा कि सुजीत कलकल ने जिस प्रकार का प्रदर्शन किया है उससे देश के खेल प्रेमियों को इस युवा पहलवान से बड़ी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार जीत हासिल कर जिस लय में आगे बढ़ रहे हैं उसको देखकर कहा जा सकता है कि ओलिंपिक का पदक अब उनसे दूर नहीं हैं। उन्होंने जिला कुश्ती संघ की ओर से सुजीत को नंबर वन रैंकिंग हासिल करने पर बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि यह देश, प्रदेश व जिले के लिए गर्व की बात है।

बार-बार चाबी खोना सिर्फ आदत नहीं, जानिए वास्तु और मान्यताओं का संकेत

घर की चाबियां छोटी सी चीज़ हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी भी. फिर भी कई लोग ऐसे होते हैं जिन्हें हर दिन चाबी ढूंढनी पड़ती है कभी टेबल पर, कभी बैग में, तो कभी घर के किसी कोने में. अगर आपके साथ भी ऐसा बार-बार हो रहा है, तो इसे सिर्फ लापरवाही मानकर नजरअंदाज न करें. कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह आपकी आदतों के साथ-साथ घर की ऊर्जा और जीवन की स्थिति से जुड़ा संकेत भी हो सकता है. धार्मिक मान्यताओं में क्या माना जाता है? धार्मिक दृष्टि से बार-बार चाबी खोना सामान्य बात नहीं माना जाता. इसे जीवन में चल रही अव्यवस्था या अस्थिरता का संकेत माना जाता है. चाबियां सुरक्षा और नियंत्रण का प्रतीक होती हैं, इसलिए उनका बार-बार खोना इस बात की ओर इशारा कर सकता है कि व्यक्ति अपने कामों या फैसलों पर पूरी पकड़ नहीं बना पा रहा है.  कुछ मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा या ग्रहों के असंतुलन से भी जोड़कर देखा जाता है, खासकर तब जब घर में चीज़ें लगातार खोने लगें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, चाबियों के लिए एक तय और सही स्थान होना बेहद जरूरी है.     चाबियां उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है.     घर के मुख्य दरवाजे के पास दीवार पर की-होल्डर लगाना अच्छा रहता है.     चाबियां हमेशा ऐसी जगह रखें जो आसानी से दिखे और पहुंच में हो.     ध्यान रखें कि चाबियाँ जमीन के बहुत पास या गंदी जगह पर न हों.  इन गलतियों से बचें     चाबियां किचन, गैस स्टोव या बाथरूम के पास न रखें     बेड या तकिए के नीचे चाबी रखना अशुभ माना जाता है     चाबियों को अलग-अलग जगहों पर बिखरा कर न रखें     पुरानी, टूटी या बेकार चाबियाँ घर में जमा न करें सिर्फ धार्मिक या वास्तु कारण ही नहीं, बल्कि बार-बार चाबी खोना आपकी दिनचर्या, तनाव और फोकस की कमी का भी संकेत हो सकता है.