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यूथ फेस्ट-2026: सौरभ द्विवेदी का संदेश—फिटनेस, पॉजिटिविटी और परिवार का साथ

यूथ फेस्ट-2026: सौरभ द्विवेदी का मंत्र—फिट रहें, पॉजिटिव सोचें, परिवार संग आगे बढ़ें संस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य,स्टार्टअप, एजुकेशन एवं स्किल डेवलपमेंट वर्कशॉप की रही धूम रायपुर  जिले में आयोजित “यूथ फेस्ट-2026” के अंतर्गत आज शाम एक विशेष प्रेरक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें देश के वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं, विशेषकर छात्र-छात्राओं एवं महिलाओं को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों पर केंद्रित रहते हुए आगे बढ़ने का संदेश दिया।    गौरतलब है कि “यूथ फेस्ट-2026” के तहत बीते दो दिनों 24-25  को जिले के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में विभिन्न रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य प्रस्तुतियां, स्टार्टअप, एजुकेशन एवं स्किल डेवलपमेंट से संबंधित वर्कशॉप, फूड स्टॉल्स, कला एवं संस्कृति से जुड़ी प्रदर्शनियां तथा युवाओं की प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाले अनेक कार्यक्रम शामिल रहे। अंतिम दिवस पर दायरा बैंड (जादू बस्तर) की प्रस्तुति ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिए और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।    अपने विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि आज के बदलते दौर में निरंतर सीखना, स्वयं को अपडेट रखना और सकारात्मक सोच बनाए रखना ही सफलता की असली कुंजी है। उन्होंने विशेष रूप से शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य (मेंटल हेल्थ) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस समय में संतुलित जीवनशैली अपनाना अत्यंत आवश्यक है।   सौरभ द्विवेदी ने युवाओं से कहा कि वे बाहरी दुनिया की अनावश्यक आलोचनाओं और भ्रामक बातों से प्रभावित न हों, बल्कि अपने मन की सुनें और परिवार की सलाह को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि परिवार ही व्यक्ति का सबसे बड़ा शुभचिंतक होता है, इसलिए अपने माता-पिता, बहनों और परिवारजनों की चिंता करना और उनका ख्याल रखना हर युवा का दायित्व है।   महिलाओं की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के निर्माण में माताओं और बहनों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब महिलाएं घर की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, तब समाज और देश की प्रगति को नई गति मिलती है। उन्होंने महिलाओं को घर और कार्य के बीच संतुलन बनाते हुए अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की भी सलाह दी।   उन्होंने युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों को अनावश्यक विज्ञापनों और भ्रामक प्रचार से सतर्क रहने का संदेश देते हुए कहा कि सही जानकारी, जागरूकता और विवेकपूर्ण निर्णय ही उन्हें सशक्त बनाएंगे। साथ ही उन्होंने सभी से प्रतिदिन कुछ नया सीखने और अपने कौशल को निरंतर निखारने का आह्वान किया। आयोजन के लिए    कार्यक्रम में  महापौर श्री रामू रोह कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा डीएफओ श्री कृष्ण जाधव एवं शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धमतरी के प्राचार्य श्री विनोद पाठक सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक, गणमान्य नागरिक, मीडिया प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।     युवा फेस्ट-2026 का यह आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास, उनकी रचनात्मकता को मंच देने और उन्हें सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने की दृष्टि से अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।      महापौर श्री रामू रोहरा ने युवा फेस्ट-2026 विभिन्न  प्रतियोगिता में विजय प्रतिभागियों को ट्राफी और प्रशस्ति  पत्र देकर सम्मानित किया ।

7 करोड़ कैश मिलने के बाद ED का एक्शन तेज, भुल्लर के 11 ठिकानों पर रेड

चंडीगढ़ रिश्वतखोरी के केस में गिरफ्तार पंजाब के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर के 11 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) तलाशी अभियान चला रही है. यह कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू हुई. भुल्लर के चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में स्थित 11 ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. ये जगहें आरोपी भुल्लर और उसके साथियों और संदिग्ध बेनामीदारों से जुड़ी हैं. मालूम हो कि डीआईजी भुल्लर को पिछले साल 8 लाख रुपए के रिश्वत से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में 7 करोड़ से ज्यादा रुपए कैश मिले थे।  आज भुल्लर के ठिकानों पर चल रही ईडी की रेड CBI, ACB द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराधों से जुड़ी है। इन अपराधों में एक बिचौलिए के ज़रिए किसी आपराधिक मामले को निपटाने के लिए अवैध रिश्वत मांगने के आरोप शामिल हैं, साथ ही आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति का पता भी चला है।  चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा, जालंधन में चल रही तलाशी मिली जानकारी के अनुसार भुल्लर और उसके करीबियों के चंडीगढ़ में स्थित दो, लुधियाना में स्थित 5, पटियाला में स्थित दो के साथ-साथ नाभा और जालंधर में स्थित एक-एक ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. इन तलाशी अभियानों का मकसद अपराध से हासिल हुई और संपत्ति का पता लगाना, बेनामी संपत्तियों की पहचान करना और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत इकट्ठा करना है।  बताते चले कि पिछले साल चंडीगढ़ में भुल्लर के आवास पर तलाशी के दौरान सीबीआई ने 7.36 करोड़ रुपये से अधिक नकदी, 2.32 करोड़ रुपये से अधिक के आभूषण, 26 ब्रांडेड घड़ियां और परिवार के सदस्यों के नाम अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए थे।  इन 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी ईडी की टीमें पीएमएलए की धारा 17 के तहत कुल 11 जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं. ये अभियान 5 शहरों में चल रहे हैं।      चंडीगढ़ – 2 ठिकाने     लुधियाना जिला – 5 ठिकाने     पटियाला – 2 ठिकाने     नाभा – 1 ठिकाना     जालंधर – 1 ठिकाना जानकारी के अनुसार ये छापे आरोपी, उसके सहयोगियों और संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर मारे जा रहे हैं. इस दौरान मनी ट्रेल और बेनामी संपत्तियों की जांच की जा रही है।  ईडी की कार्रवाई का ये है उद्देश्य     . अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) का पता लगाना     . भुल्लर से संबंधित बेनामी संपत्तियों की पहचान करना     . मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना फिलहाल ईडी की तलाशी की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है।  सीबीआई ने क्‍यों क‍िया था गि‍रफ्तार  पंजाब पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक यानी DIG हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने पिछले साल गिरफ्तार किया था और वे तभी से जेल में बंद हैं. भुल्लर के साथ बिचौलिए कृष्ण शारदा को भी 8 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा था. हाल ही में भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।   

केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में नहीं होंगे पेश, सत्याग्रह शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे।  उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है।  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है।  अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?  जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है। दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी। मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

Madhya Pradesh सरकार का बड़ा तोहफा, 75%+ अंक लाने वाले छात्रों को मिलेगा लैपटॉप अनुदान

भोपाल. प्रदेश में इस साल भी 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की संख्या बढ़ी है। इसका असर मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना पर भी पड़ा है। इस साल इस योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 26 हजार ज्यादा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल से उन सभी विद्यार्थियों की सूची मांगी है, जिन्होंने 12वीं परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। विभाग द्वारा सूची के सत्यापन के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी। जून व जुलाई में विद्यार्थियों को लैपटाप की राशि प्रदान करने की तैयारी है। इस योजना पर इस साल सरकार करीब 302 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने जा रही है। हर साल बढ़ रहा आंकड़ा वर्ष लैपटॉप पाने वालों की संख्या 2023 – 78000 2024 – 90,000 2025 – 94,500 16 साल पहले शुरू हुई थी योजना मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की शुरुआत वर्ष 2009-10 में की गई थी। प्रारंभ में इस योजना के तहत केवल 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को ही पात्र माना जाता था। उस समय लाभार्थियों की संख्या करीब 20 से 25 हजार के बीच रहती थी। बाद में इसे घटाकर 70 प्रतिशत किया गया। कुछ वर्षों से 75 प्रतिशत अंक का मानक तय किया गया है। स्कूल टॉपर को स्कूटी मिलती है राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य योजनाएं भी चला रही है। शासकीय स्कूलों में 12वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी लागू है। इसमें स्कूल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला छात्र या छात्रा पात्र होता है। 1.21 लाख विद्यार्थियों को राशि इस बार मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। मंडल से ऐसे विद्यार्थियों की सूची मांगी गई है। – धर्मेंद्र शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय।

अमेरिकी प्रतिबंधों की आहट, चाबहार प्रोजेक्ट पर भारत के विकल्पों पर मंथन

नई दिल्ली   ईरान के चाबहार पोर्ट और रूस से तेल आयात को लेकर भारत जटिल कूटनीतिक स्थिति का सामना कर रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों की समयसीमा समाप्त होने के करीब है, जिससे भारत के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वह अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को कैसे सुरक्षित रखे। अगर पाबंदियों में छूट नहीं मिलती है तो चाबहार परियोजना में भारत की भूमिका प्रभावित हो सकती है, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए बेहद अहम मानी जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत चाबहार पोर्ट में अपनी भागीदारी को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें अस्थायी रूप से संचालन अधिकार किसी तीसरे पक्ष को सौंपना या निवेश ढांचे में बदलाव करना शामिल हो सकता है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों से सीधे टकराव से बचा जा सके। हालांकि, यह भी साफ किया गया है कि भारत इस प्रोजेक्ट से पूरी तरह बाहर निकलने का इरादा नहीं रखता, बल्कि किसी भी तरह अपनी रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखना चाहता है। चाबहार पोर्ट भारत के लिए कितना अहम चाबहार पोर्ट भारत के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उसे पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच मुहैया कराता है। यह बंदरगाह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है, जो भारत के व्यापारिक विस्तार और भू-राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने में मदद करता है। ऐसे में इस परियोजना से दूरी बनाना भारत के दीर्घकालिक हितों को नुकसान पहुंचा सकता है और क्षेत्र में उसकी भूमिका कमजोर कर सकता है। जानकारों का कहना है कि भारत को अमेरिकी दबाव में आकर चाबहार प्रोजेक्ट से बाहर नहीं निकलना चाहिए। नई दिल्ली की विदेश नीति हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित रही है और उसे अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार फैसले लेने चाहिए। अगर भारत इस परियोजना से पीछे हटता है, तो इससे न केवल उसकी विश्वसनीयता प्रभावित होगी बल्कि क्षेत्रीय साझेदारों के साथ उसके संबंध भी कमजोर हो सकते हैं। रूस से तेल की खरीद कितनी जरूरी इसी तरह रूस से तेल खरीद का मुद्दा भी भारत के लिए बेहद अहम है। रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत अमेरिकी दबाव में आकर रूस से तेल खरीद कम करता है, तो इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत के सामने चुनौती यह है कि वह अमेरिका, ईरान और रूस के बीच संतुलन कैसे बनाए रखे। एक ओर अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी अहम है, वहीं दूसरी ओर ईरान और रूस के साथ आर्थिक व भू-राजनीतिक संबंध भी उतने ही जरूरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को संतुलित और स्वतंत्र नीति अपनाते हुए अपने दीर्घकालिक हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि वह बदलते वैश्विक हालात में अपनी स्थिति मजबूत बनाए रख सके।

जीनोमिक्स क्रांत,AIIMS में भविष्य की चिकित्सा पर चर्चा

 नई दिल्ली बीमारियों का उपचार अब सबके लिए एक जैसा नहीं रहेगा, बल्कि अब यह हर मरीज के जीन (DNA) के आधार पर तय किया जाएगा। इसे प्रिसिजन मेडिसिन कहा जाता है, जिसमें उपचार अधिक सटीक, प्रभावी और व्यक्तिगत होता है। इससे स्वास्थ्य सेवाएं और ज्यादा उन्नत तथा प्रभावी हो जाएंगी। यह बात अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में ‘डीएनए डे 2026’ पर आयोजित संगोष्ठी में सामने आई। विशेषज्ञों ने बताया कि जीनोमिक्स (डीएनए आधारित विज्ञान) के उपयोग से भविष्य में उपचार का तरीका बदलने वाला है। चिकित्सक मरीज की जेनेटिक जानकारी के आधार पर बीमारी का बेहतर निदान और सही उपचार कर सकेंगे। जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर संगोष्ठी में जीनोमिक विज्ञान को क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़ने पर जोर दिया गया। संगोष्ठी का आयोजन डीएनए सोसायटी आफ इंडिया और सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट्स (एसवाईएस-एम्स) ने संयुक्त रूप से कराया। संगोष्ठी में 1953 में डीएनए की डबल हेलिक्स संरचना की खोज और 2003 में ह्यूमन जीनोम प्रोजेक्ट की पूर्णता को भी रेखांकित किया गया। उद्घाटन सत्र डीएनए सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. अशोक शर्मा ने प्रिसिजन मेडिसिन में जीनोमिक्स की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि, सीएसआईआर इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलाजी (आईजीआईबी) के मुख्य वैज्ञानिक प्रो. अभय शर्मा ने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान पर न‌ई जानकारी साझा की। उन्होंने मानव जीनोमिक्स और रोग विज्ञान के उभरते आयामों को समझाया। कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत मुख्य व्याख्यान में शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो. संजीव गलांडे ने 'कैंसर: एपिजीनोम की बीमारी' पर शोध प्रस्तुत किया। डीएसआइ के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य प्रो. श्रीकांत कुकरेती ने जीनोमिक्स अनुसंधान और क्लिनिकल उपयोग के बीच सेतु बनाने की आवश्यकता बताई। प्रीमास लाइफ साइंसेज के डा. भास्कर मैती ने स्पैटियल बायोलॉजी और मल्टीओमिक्स तकनीकों के उपयोग को समझाया। 300 से अधिक प्रतिभागियों की उपस्थिति वाले इस आयोजन में विशेषज्ञों ने ‘जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट’ और ‘आयुष्मान भारत’ जैसी पहलों को देश में किफायती और सुलभ जीनोमिक चिकित्सा के लिए अहम बताया।

पहले नरेन का जादू, फिर रिंकू का फिनिश—सिर्फ 4 गेंदों में जीता सुपर ओवर

लखनऊ  इकाना स्टेडियम में रविवार की रात आईपीएल 2026 का सबसे रोमांचक मुकाबला खेला गया। लखनऊ सुपर जायंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच मैच आखिरी गेंद तक खिंचा और अंततः टाई रहा। इसके बाद हुए सुपर ओवर में वो ड्रामा देखने को मिला जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। सुनील नारायण की जादुई गेंदबाजी और रिंकू सिंह के विजयी चौके की बदौलत कोलकाता ने न केवल यह मैच जीता, बल्कि खुद को अंक तालिका के सबसे निचले पायदान से भी बाहर निकाला। मैच का रोमांच, शमी के छक्के ने मुकाबले को किया टाई 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए लखनऊ की टीम एक समय हार की कगार पर थी। आखिरी ओवर में जीत के लिए 13 रनों की जरूरत थी। कार्तिक त्यागी की गेंदबाजी और रिंकू सिंह के शानदार कैचों ने मैच को फंसा दिया था। अंतिम गेंद पर लखनऊ को जीत के लिए 7 रनों की दरकार थी और स्ट्राइक पर थे मोहम्मद शमी। शमी ने त्यागी की स्लॉट बॉल को लॉन्ग-ऑफ के ऊपर से छक्के के लिए भेजकर स्कोर बराबर कर दिया और मैच को सुपर ओवर में धकेल दिया। सुपर ओवर का ड्रामा, नारायण ने लखनऊ को 1 रन पर समेटा सुपर ओवर में लखनऊ पहले बल्लेबाजी करने उतरी, लेकिन उनके सामने सुनील नारायण की चुनौती थी। नारायण ने पहली ही गेंद पर निकोलस पूरन को बोल्ड कर लखनऊ को तगड़ा झटका दिया। अगली गेंद पर ऋषभ पंत ने एक रन लिया, जिससे मार्करम स्ट्राइक पर आए। मार्करम ने बड़ा शॉट खेलने की कोशिश की, लेकिन बाउंड्री पर खड़े रोवमैन पॉवेल ने गजब की सूझबूझ दिखाई। पॉवेल ने बाउंड्री के बाहर जाने से ठीक पहले गेंद को हवा में उछाला और पास खड़े रिंकू सिंह ने कैच लपक लिया। इस तरह लखनऊ की पूरी टीम सुपर ओवर में महज 1 रन पर ऑलआउट हो गई। आपको बता दें कि सुपर ओवर में सिर्फ दो ही विकेट मिलते हैं। रिंकू सिंह का फिनिशिंग टच, पहली गेंद पर खत्म किया खेल मैच के असली हीरो रिंकू सिंह रहे। पहले मुख्य मैच में उन्होंने 51 गेंदों पर 83 रनों की शानदार पारी खेलकर केकेआर को 155 रन तक पहुंचाया और फील्डिंग में भी चार शानदार कैच पकड़े। जब सुपर ओवर में जीत के लिए सिर्फ 2 रनों की जरूरत थी, तो रिंकू सिंह स्ट्राइक पर आए। प्रिंस यादव की पहली ही गेंद को रिंकू ने कवर-पॉइंट के बीच से बाउंड्री की राह दिखाई और चौका जड़कर कोलकाता को एक यादगार जीत दिला दी। शमी ने आखिरी गेंद पर छक्का जड़ टाई कराया मैच टारगेट का पीछा करने उतरी LSG की आधी टीम 93 रन पर ही सिमट गई थी। मिचेल मार्श (2), एडन मारक्रम (31), कप्तान ऋषभ पंत (42), निकोलस पूरन (9) और मुकुल चौधरी (1) पवेलियन लौट चुके थे। यहां से आयुष बदोनी और इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर उतरे हिम्मत सिंह ने मोर्चा संभाला और LSG की उम्मीदें जगाईं। हालांकि KKR ने बदोनी (24) को चलता कर मेजबान टीम को फिर से बैकफुट पर धकेल दिया। LSG को आखिरी 2 ओवर में 28 रन बनाने थे। 19वां ओवर लेकर आए वैभव अरोड़ा ने सिर्फ 11 रन खर्चे और जॉर्ज लिंडे (8) का विकेट भी चटकाया। अब LSG को आखिरी ओवर में 17 रन की जरूरत थी। KKR की ओर से आखिरी ओवर लेकर आए कार्तिक त्यागी ने दो नो-बॉल डालने के बावजूद 5 गेंद में 11 रन ही दिए और साथ ही हिम्मत का विकेट भी झटक लिया। मुकाबला KKR की मुट्ठी में लग रहा था लेकिन मोहम्मद शमी ने आखिरी गेंद पर छक्का जड़ स्कोर बराबर कर दिया, जिससे LSG को वापसी का मौका मिला लेकिन उसने सुपर ओवर में हथियार डाल दिए। रिंकू सिंह ने खेली 83 रन की धाकड़ पारी इससे पहले KKR ने पहले बल्लेबाजी के लिए बुलाए जाने पर 93 रन पर 7 विकेट खो दिए थे। KKR की पारी 120 के नीचे सिमटती दिख रही थी लेकिन रिंकू सिंह ने एक छोर पर खड़े रहकर उसे लड़ने लायक स्कोर तक पहुंचा दिया। रिंकू ने 51 गेंद में 83 रन की नाबाद पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 7 चौके और 5 छक्के निकले, जिसमें 4 छक्के उन्होंने दिग्वेश राठी के खिलाफ आखिरी ओवर में जड़े। रिंकू ने धाकड़ बल्लेबाजी करने के बाद फील्ड में भी फुर्ती दिखाते हुए 4 महत्वपूर्ण कैच लपके। उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच के अवॉर्ड से नवाजा गया।

नायब सरकार की इंडस्ट्री पॉलिस,रोजगार, सब्सिडी और टेक्नोलॉजी पर जोर

चंडीगढ़  बहुत जल्द नायब सरकार अपनी नई उद्योग पालिसी-2026 लेकर आ रही है। ड्राप्ट तैयार हो चुका है। पिछले सप्ताह दो दिन उद्यमियों के साथ नई दिल्ली में बैठक कर पालिसी को लेकर सुझाव और निवेश पर चर्चा करने के बाद उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है। पॉलिसी बनने के बाद कैबिनेट की मंजूरी लेने के बाद उसे लागू कर दिया जाएगा। नई पॉलिसी में रोजगार, निवेश और नई तकनीक के साथ-साथ बेहतर उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाई को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। नायब सरकार का दावा है कि देश की सबसे बेहतर उद्योग पॉलिसी होगी। युवाओं और महिलाओं को मिलेगी और अधिक नौकरी नई पॉलिसी में हरियाणा के युवाओं को अधिक रोजगार देने वाली कंपनियों के लिए सरकार से मिलने वाली सालाना प्रोत्साहन राशि में बढ़ोत्तरी हो सकती है। कंपनी अगर दिव्यांग और स्थानीय महिलाओं को नौकरी देगी तो सरकार की ओर से उसे प्रति वर्ष 1.2 लाख रुपये की प्राेत्साहन राशि देगी। जो कंपनी सबसे अधिक हरियाणा के युवाओं को लगाएगी उसे अधिक सब्सिडी मिल सकती है। रिसर्च सेंटर बनाने पर 50 प्रतिशत सब्सिडी लार्ज इंडस्ट्री को दस करोड़ तो मेगा कंपनियों को पसास करोड़ रुपये तक देने का भी प्रविधान बन सकता है। यदि कोई कंपनी अपने उत्पाद का नेशनल स्तर पर पेटेंट कराती है तो उसे 50 लाख और विश्व स्तर पर कराने पर बतौर इनाम एक करोड़ की राशि राज्य सरकार देगी। ऐसे होगा निगरानी तंत्र पॉलिसी के तहत एक उच्चस्तरीय समिति होगी जिसके मुख्यमंत्री खुद होंगे। यह समिति अल्ट्रा मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगी। हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन बोर्ड का गठन होगा जिसे अध्यक्ष उद्योग मंत्री होंगे जो मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी देगा। एक उद्योग विभाग की समिति होगी हो छोटी औद्योगिक इकाइयों को मंजूरी देगी। नई पॉलिसी की खसियत     कंपनियों को निवेश पर नहीं बल्कि प्रदर्शन के आधार पर लाभ मिलेगा     कोर क्षेत्र में 30 प्रतिशत इंटरमीडिएट में 60 सब प्राइम में 75 और प्राइम क्षेत्र में 100 स्टांप डयूटी पर छूट मिलेगी     सिंगल विंडो सिस्टम होगा। एक पोर्टल पर सभी सुविधा मिलेगी, जिसमें आनलाइन आवेदन, ट्रैकिंग सिस्टम और तय समय में स्वीकृत मिलना शामिल है।     आटोमोबाइल, ऑटो पार्टस, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग, इलेक्ट्रानिक्स, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी, ईवी, केमिकल, तथा पेट्रोकेमिकल इन्हें पांच प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रविधान बनाया जा सकता है।  

मरीजों और परिजनों को राहत, एम्स भोपाल में 400 वाहनों की नई पार्किंग बनेगी

एम्स भोपाल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल के मुख्य द्वार पर नई पार्किंग का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके शुरू होने से न केवल अस्पताल परिसर व्यवस्थित नजर आएगा, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को वाहन सुरक्षित खड़े करने की बड़ी सुविधा मिलेगी। फिलहाल पार्किंग स्थल पर फिनिशिंग का काम चल रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं एम्स भोपाल में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं। एम्स के पीआरओ डॉ. केतन मेहरा ने बताया कि नई पार्किंग में 400 से अधिक वाहनों को खड़ा करने की व्यवस्था की गई है। फिनिशिंग कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा। आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी व्यवस्थित पार्किंग होने से अस्पताल परिसर में यातायात भी सुचारू रहेगा और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को आने-जाने में कोई बाधा नहीं आएगी। वर्तमान में एम्स की ओपीडी रोजाना चार हजार से अधिक रहती है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों को वाहन खड़ा करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। जगह के अभाव में लोग अपने वाहन बाहर मैदान या सड़कों के किनारे खड़े करने को मजबूर थे, जिससे अक्सर वाहन चोरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई पार्किंग शुरू होने के बाद इस समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।  

HRRL रिफाइनरी में आग के बाद मरम्मत तेज, मई में उत्पादन की तैयारी

बाड़मेर  राजस्थान के बालोतरा (पचपदरा) में अग्निकांड के बाद खुशखबरी मिली है। देश की महत्वाकांक्षी परियोजना एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) में फिर से जल्द ही सुचारू होगी। हाल ही में हुई अग्नि दुर्घटना को लेकर कंपनी ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। रिफाइनरी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्से, क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) में लगी आग के बाद अब मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। कंपनी का लक्ष्य है कि मई 2026 के अंत तक यूनिट को दोबारा चालू कर उत्पादन शुरू कर दिया जाए। जांच में खुलासा: लीकेज बना हादसे की वजह कंपनी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, यह आग सीडीयू यूनिट के हीट एक्सचेंजर स्टैक तक ही सीमित रही। दुर्घटना का मुख्य कारण वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हाइड्रोकार्बन का रिसाव माना जा रहा है। राहत की बात यह रही कि सुरक्षा प्रणालियों के सक्रिय होने से आग पूरे प्लांट में नहीं फैली। इस हादसे में कुल छह एक्सचेंजर और उनसे जुड़े सहायक उपकरणों को नुकसान पहुंचा है, जिन्हें अब बदला या दुरुस्त किया जा रहा है। मई 2026 से मिलेगा स्वदेशी ईंधन एचआरआरएल प्रबंधन के अनुसार, प्रभावित हिस्सों की मरम्मत का काम अगले 3 से 4 सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। कंपनी की योजना के मुताबिक मई 2026 का दूसरा पखवाड़ा से सीडीयू यूनिट को दोबारा शुरू किया जाएगा। कंपनी ने इसके लिए मई के तीसरे- चौथे सप्ताह की समयसीमा रखी है। इसी महीने के दौरान एलपीजी, पेट्रोल (MS), डीजल (HSD) और नैफ्था जैसे उत्पादों का ट्रायल प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा। अन्य सहायक इकाइयां पहले से ही कमीशनिंग के अंतिम चरण में हैं, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से स्थिर किया जाएगा। राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग, PM मोदी करने वाले थे उद्घाटन पढ़िये पदपचरा रिफाइनरी अग्निकांड से जुड़ी प्रमुख बातें     कंपनी की प्रारम्भिक जांच के अनुसार आग लगने की मुख्य वजह हाइड्रोकार्बन का रिसाव था।     यह रिसाव वैक्यूम रेजिड्यू एक्सचेंजर की इनलेट लाइन पर लगे एक प्रेशर गेज टैपिंग पॉइंट से हुआ था।     पदपचरा रिफाइनरी 80,000 करोड़ रुपये की विशाल परियोजना है, जिसकी ल क्षमता 9 मिलियन टन प्रति वर्ष है।