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सुनील वर्मा को मिला ‘लोक संपर्क सम्मान’, भोपाल में जनसंपर्क विभाग में उत्साह

भोपाल पब्लिक रिलेशंस सोसाइटी ऑफ इंडिया की भोपाल इकाई द्वारा ‘राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस-2026’ के अवसर पर 26 अप्रैल को जेके अस्पताल के सीएमई हॉल में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पत्रकारिता-जनसंपर्क क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इस श्रृंखला में जनसंपर्क विभाग के उप संचालक सुनील वर्मा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘लोक संपर्क सम्मान’ प्रदान किया गया। गौरतलब है कि, जनसंपर्क विभाग के उप-संचालक सुनील वर्मा ने अपने कार्यों के जरिए जनसंपर्क के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। उनका व्यक्तित्व सरल, सौम्य और विनम्र है। यह व्यवहार उन्हें सभी वर्गों में लोकप्रिय बनाता है। वे अपने व्यवहार और कार्यशैली से यह सिद्ध करते हैं कि जनसंपर्क केवल सूचना का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि लोगों के साथ संवेदनशील और भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करने की प्रक्रिया भी है। वे एक ऐसे अधिकारी के रूप में पहचाने जाते हैं, जो अपने सहयोगियों और आमजन दोनों के प्रति समान रूप से संवेदनशील रहते हैं और सभी का ध्यान रखते हैं। समर्पण और नवाचार के लिए सम्मान जनसंपर्क के प्रति वर्मा की निष्ठा और समर्पण उनके कार्यों में स्पष्ट झलकता है। संवाद को सशक्त बनाने, सूचनाओं को प्रभावी ढंग से प्रसारित करने और शासन तथा जनता के बीच मजबूत कड़ी बनने में उनकी भूमिका सराहनीय रही है। यही वजह है कि वे विभाग में एक विश्वसनीय और प्रेरणास्रोत नाम बन चुके हैं। उन्हें यह सम्मान जनहित के प्रति प्रतिबद्धता, उत्कृष्ट कार्यशैली और जनसंपर्क के क्षेत्र में किए गए नवाचारों के लिए दिया गया। नारी शक्ति का भी वंदन गौरतलब है कि, कार्यक्रम में जनसंपर्क विभाग की सहायक संचालक निहारिका मीणा और हिमांशी बजाज को भी सम्मानित किया गया। मंच पर सभी हस्तियों को वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक गिरिजा शंकर, प्रख्यात साहित्यकार उर्मिला शिरीष और एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के कुलगुरू डॉ. नरेंद्र कुमार थापक ने सम्मानित किया। बदलते जनसंपर्क पर हुई चर्चा बता दें, कार्यक्रम के दौरान जनसंपर्क और पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, डिजिटल प्लेटफॉर्म की बढ़ती भूमिका और समाज के साथ प्रभावी संवाद की जरूरत जैसे अहम विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह तक सीमित था, बल्कि अनुभवों के आदान-प्रदान और नए विचारों को साझा करने का मंच भी था।

बदले पैटर्न ने बढ़ाई मुश्किल, अभ्यर्थियों ने बताया पेपर रहा कठिन

अंबाला  हरियाणा लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित हरियाणा सिविल सेवा (एचसीएस) की प्रारंभिक परीक्षा रविवार को हुई। परीक्षा देकर केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थियों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बातचीत में अधिकांश परीक्षार्थियों ने स्वीकार किया कि इस बार का पेपर न सिर्फ कठिन था बल्कि सवालों का पैटर्न पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। वहीं एलाइड सर्विस के प्रश्नपत्र से विद्यार्थी खुश नजर आए। इस परीक्षा के लिए दोनों पालियों में 8712 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था। यह आया कठिन अभ्यर्थियों के मुताबिक, सामान्य अध्ययन के पेपर में सीधे सवाल पूछने के बजाय कथन और निष्कर्ष और जोड़े मिलाओ वाले सवालों की भरमार थी। भूगोल में महासागरीय धाराओं और खनिज क्षेत्रों कुद्रेमुख, बालाघाट पर आधारित सवालों ने अभ्यर्थियों को परेशानी में डाला। रसायन विज्ञान में मेथनॉल की विषाक्तता और कोलाइड्स से जुड़े तकनीकी सवालों का स्तर काफी ऊंचा रहा। वहीं राज्य की संस्कृति से जुड़े सवालों में लूर नृत्य और झाड़ू फिरी जैसी रचनाओं के मिलान ने भी परीक्षार्थियों को उलझाए रखा। पेपर काफी विस्तृत था। खासकर कथन-1 और कथन-2 वाले सवालों में बहुत समय बर्बाद हुआ। अगर कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं है, तो तुक्का लगाना नामुमकिन था।  अमित कुमार, अभ्यर्थी उकलाना एचपीएससी अब पूरी तरह यूपीएससी के पैटर्न को फॉलो कर रहा है। इकोनॉमिक्स में बेरोजगारी और जीडीपी से जुड़े सवाल बेसिक लग रहे थे लेकिन उनके विकल्प बहुत उलझाने वाले थे।  स्नेहा, अभ्यर्थी पिंजौर नेगेटिव मार्किंग का डर परीक्षा में 0.25 अंकों की नेगेटिव मार्किंग और पांचवें विकल्प (ई) की अनिवार्यता ने भी छात्रों पर मानसिक दबाव बनाए रखा। कई छात्रों ने बताया कि समय कम होने के कारण वे भूगोल और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कुछ सवाल हल नहीं कर पाए। वहीं कोचिंग विशेषज्ञ हेमंत कुमार ने बताया कि पेपर का स्तर काफी कठिन श्रेणी में था। ऐसे में इस बार सामान्य श्रेणी की कट-ऑफ पिछली बार के मुकाबले कम रहने का अनुमान है। कुल 100 सामान्य अध्ययन के प्रश्नों के उत्तर के लिए 2 घंटे का समय निर्धारित किया गया था। इस बार की परीक्षा में हरियाणा की संस्कृति और वैश्विक पर्यावरण समझौतों पर अधिक ध्यान दिया गया। प्रशासन ने की थी हाई-टेक व्यवस्था जिले के 31 केंद्रों पर रविवार को एचसीएस की प्रारंभिक परीक्षा तकनीक के चक्रव्यूह में संपन्न हुई। फर्जीवाड़े को रोकने के लिए प्रशासन ने इस बार हाई-टेक व्यवस्था अपनाई। केंद्रों के गेट पर अभ्यर्थियों का पहले फेस स्कैन किया गया, फिर बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान मिलने के बाद ही एंट्री दी गई। केंद्रों के पास धारा 163 लागू रही और फोटोस्टेट की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं। चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस बल और कंट्रोल रूम के जरिए परीक्षा पर नजर रखी गई। एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा रही आसान जिले में रविवार को आयोजित एलाइड सर्विसीज की प्रारंभिक परीक्षा उम्मीद से कहीं ज्यादा सरल रही। प्रश्नपत्र का स्तर आसान होने के कारण अधिकतर अभ्यर्थियों ने निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले ही अपनी ओएमआर शीट जमा कर दी। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही युवा अपने साथियों के साथ उत्तरों का मिलान करने और अंकों का गणित जोड़ने में व्यस्त हो गए। अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रश्नपत्र काफी संतुलित था। विशेषकर इतिहास और डाक विभाग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों ने परीक्षार्थियों को बड़ी राहत दी। बंगाल का विभाजन और सुभाष चंद्र बोस के नारे जैसे सीधे सवालों ने स्कोरिंग को आसान बना दिया। वहीं, डाक नियमों से जुड़े तकनीकी सवाल भी विभागीय तैयारी करने वाले छात्रों के लिए सरल रहे।  

‘AAP में घुटन महसूस हो रही थी’, राघव चड्ढा ने बताए अलग होने के कारण

चंडीगढ़. सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है, पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है और ये पार्टी आज चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं। राघव ने गिनाए तीन विकल्प तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे? आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं, अगर आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक बन जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस जगह को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया। आप में से कई लोगों ने पूछा कि क्या मैं आम लोगों के मुद्दे वैसे ही उठाता रहूंगा? तो मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी समस्याओं को लगातार और जोश के साथ उठाऊंगा, और अच्छी बात यह है कि अब हम उन दिक्कतों के हल भी ढूंढ पाएंगे। कुछ दिन पहले बीजेपी में हुए थे शामिल कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे।  

पंजाब में गर्मी का तांडव, तापमान 40°C पार; मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया

लुधियाना  रविवार को पंजाब के विभिन्न जिलों में मौसम ने गर्मी का कहर बरपाया। लू के चलते तापमान लगातार तीसरे दिन 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना रहा। बठिंडा में सुबह 1.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, लेकिन इसके बाद तेज धूप ने तापमान को 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा दिया। लुधियाना और पटियाला में तापमान 42.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि फरीदकोट में 42.8 डिग्री सेल्सियस, रूपनगर में 41.4 डिग्री सेल्सियस, चंडीगढ़ में 40.8 डिग्री सेल्सियस, एसबीएस नगर में 40.5 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 39.3 डिग्री सेल्सियस, फिरोजपुर में 39.0 डिग्री सेल्सियस और होशियारपुर में 38.0 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया। अन्य जिलों में तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को पंजाब के कुछ जिलों में लू चलने की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी तेज हवाएं चल सकती हैं। 28 से 30 अप्रैल तक धूल भरी हवाओं और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना जताई गई है। एक मई को मौसम साफ रहेगा, जबकि दो मई को फिर से धूल भरी हवा और गरज के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। पंजाब और हरियाणा में लू के थपेड़े पंजाब और हरियाणा के ज्यादातर जिलों में दोपहर 12 बजे से देर शाम तक गर्म हवाएं चल रही हैं। हरियाणा के रोहतक, पानीपत और फरीदाबाद जैसे जिलों में गर्मी ने लोगों का बुरा हाल कर दिया है। राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है और मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहां न केवल गर्मी, बल्कि खराब वायु गुणवत्ता (AQI 222) ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और राजस्थान में पारा 46 के पार उत्तर प्रदेश के बांदा में पारा 46.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा। वहीं, राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर में भी तापमान 46 डिग्री दर्ज किया गया है। ओडिशा के झारसुगुड़ा में भी तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि तटीय इलाकों में लोग उमस से परेशान हैं। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग (IMD) ने भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर भी दी है। 28 अप्रैल से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और हल्की बारिश हो सकती है। यह मौसम 2 मई तक बना रह सकता है, जिससे तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश की संभावना अधिक जताई गई है।  

नक्सलमुक्त जिले में बदली तस्वीर, जगरगुंडा में पुलिस की वापसी से फिर बसने लगी जिंदगी

सुकमा. कभी शाम होते ही बंद हो जाने वाला जगरगुंडा अब रात में भी जाग रहा है। दो दशकों तक भय के साए में जीने वाला इलाका अब बदलता नजर आ रहा है। सड़कों के निर्माण से बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से संपर्क आसान हुआ है। बाजारों में फिर से चहल-पहल लौटने लगी है। कभी इमली मंडी के लिए मशहूर क्षेत्र फिर व्यापार की राह पकड़ रहा है। महुआ, इमली और चिरौंजी का कारोबार दोबारा गति पकड़ रहा है। जनवरी 2026 में वर्षों बाद बैंक शाखा खुलना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। सैकड़ों ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। अब लोग पैसे निकालने दूर-दराज नहीं जा रहे। रात में भी लोगों का बेखौफ बाहर निकलना बदलाव का संकेत है। हालांकि नेटवर्क और अधूरी सड़कें अब भी चुनौती बनी हुई हैं। जगरगुंडा अब खौफ नहीं, विकास की नई कहानी लिख रहा है। नक्सलमुक्त जिले में पुलिस लौटी खाकी पहचान में कोंडागांव को नक्सलमुक्त घोषित किए जाने के बाद बड़ा बदलाव दिखा है। जिला पुलिस ने ड्यूटी में पारंपरिक खाकी वर्दी पहनने के निर्देश दिए हैं। पहले संवेदनशील इलाकों में कैमफ्लाज वर्दी का उपयोग किया जाता था। यह वर्दी ऑपरेशन और सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से जरूरी थी। अब फोकस कानून व्यवस्था और जनसेवा पर केंद्रित किया गया है। खाकी वर्दी से पुलिस आमजन के बीच अधिक सहज दिखेगी। जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। पहचानने योग्य पुलिसिंग से पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों ने नागरिकों से सहयोग की अपील की है। सूचना या शिकायत पर नजदीकी थाने से संपर्क करने कहा गया है। यह बदलाव शांति और सामान्य हालात का प्रतीक माना जा रहा है। कोंडागांव अब सुरक्षा से विकास की ओर कदम बढ़ा रहा है।

घर में मकड़ी के जाले सिर्फ गंदगी नहीं, वास्तु में माने जाते हैं अशुभ संकेत

गर्मियों का मौसम शुरू हो चुका है. इस मौसम में घरों के कोनों या छिपी हुई जगहों पर मकड़ी के जाले तेजी से नजर आने लगते हैं. गर्म और सूखे मौसम में मकड़ियां ज्यादा दिखने लगती हैं, जिससे घर के कोनों, दीवारों और छत पर जाले बनना आम हो जाता है. अक्सर लोग इन्हें मामूली गंदगी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार, मकड़ी के ये जाले नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी माने जाते हैं. यही बात हम अक्सर अपने बड़े-बुजुर्गों से भी सुनते आए हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के अलग-अलग स्थानों पर लगे मकड़ी के जाले जीवन पर अलग-अलग तरह से असर डालते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में. बेडरूम में मकड़ी का जाला वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके बेडरूम में मकड़ी का जाला है, तो इसे तुरंत साफ कर देना चाहिए. बेडरूम में जाले होने से दांपत्य जीवन में भी तनाव बढ़ सकता है. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली कम होती है और रिश्तों में खटास आ सकती है. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना भी बढ़ जाती है. घर के कोनों में मकड़ी का जाला अक्सर घर के ऊंचे कोनों में मकड़ी के जाले लग जाते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं क्योंकि वे आसानी से साफ नहीं हो पाते हैं. लेकिन वास्तु के अनुसार, घर के कोनों में जाले होना आर्थिक परेशानियों का संकेत माना जाता है. यह धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है, इसलिए समय-समय पर इन्हें साफ करना जरूरी है. मंदिर में मकड़ी का जाला घर के मंदिर को साफ-सुथरा रखना बहुत जरूरी होता है. कई बार सफाई की अनदेखी के कारण मंदिर में भी मकड़ी के जाले लग जाते हैं. वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मंदिर में जाला लगना दुर्भाग्य का संकेत माना जाता है. इसलिए रोजाना पूजा से पहले मंदिर की साफ-सफाई करना बेहद जरूरी है. किचन में मकड़ी का जाला किचन घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जहां अन्नपूर्णा विजारती हैं और भोजन तैयार किया जाता है. अगर यहां मकड़ी का जाला लगा हुआ है, तो यह सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है. वैज्ञानिक रूप से भी यह सही नहीं है, क्योंकि जाले और गंदगी से बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे घर के लोग बीमार पड़ सकते हैं. इसलिए किचन की नियमित सफाई बेहद जरूरी है. क्या करें उपाय? वास्तु शास्त्र के मुताबिक, अगर आपके घर में मकड़ी के जाले लगते हैं, तो रोजाना उनकी सफाई करें और उन्हें तुरंत कूड़े में फेंक दें. रोज या हफ्ते में 2-3 बार झाड़ू-पोंछा करें. छत, कोनों और फर्नीचर के पीछे भी सफाई करें. पुराने जाले तुरंत हटा दें. मकड़ी के जाले हटाने के लिए आप चाहें तो घर में रोजाना धूप और दीपक जला सकते हैं, इस एक उपाय को करने से नकारात्मक ऊर्जा और कीट-पतंगे दूर रहते हैं.

गर्मियों में अंडा खाना सुरक्षित या नहीं? एक्सपर्ट्स ने बताया पूरा सच

 भारत के कई हिस्सा में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया है और सुबह 7 बजे से ही गर्माहट समझ आने लगी है. ऐसे में गर्मी के मौसम में अक्सर लोग खान-पान को लेकर सचेत रहते हैं ताकि उनका डाइजेशन और सेहत सही रहे. लेकिन जो लोग रोजाना अंडे खाते हैं, उन लोगों को भी चिंता होने लगती है कि रोजाना अंडा खाएं या नहीं? अंडा जिसे सुपरफूड माना जाता है, उसे लेकर एक बड़ा भ्रम यह है कि इसकी तासीर गर्म होती है और गर्मियों में इसे खाने से पेट खराब या शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. लेकिन क्या वाकई ऐसा है? हार्वर्ड हेल्थ और इंटरनेशनल रिसर्च डेटा के अनुसार, अंडा गर्मियों में भी उतना ही सुरक्षित है जितना सर्दियों में, बस शर्त यह है कि उसे खाने का तरीका सही होना चाहिए. तो आइए जान लीजिए कि इस तपती गर्मी में आपको अंडे का सेवन कैसे करना चाहिए. गर्मियों में अंडे और शरीर की गर्मी का सच हॉवर्ड न्यूट्रिशन सोर्स के अनुसार, अंडा विटामिन D और कोलीन का बेहतरीन सोर्स है. अगर आप इसे सही हाइड्रेशन यानी पर्याप्त पानी के साथ लेते हैं, तो यह शरीर में गर्मी पैदा नहीं करता. अक्सर माना जाता है कि अंडे खाने से शरीर का तापमान बढ़ जाता है. हालांकि, एक्सपर्ट्स के मुताबिक अंडे में हाई क्वालिटी वाला प्रोटीन और अमीनो एसिड होते हैं जिन्हें पचाने के लिए शरीर को अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है. इस प्रोसेस को थर्मिक इफेक्ट ऑफ फूड कहा जाता है. क्या है अंडा खाने का सबसे सही समय? ऑस्ट्रेलिया एग्स की रिपोर्ट बताती है कि सुबह अंडा खाने से दिनभर एनर्जी बनी रहती है और बार-बार भूख नहीं लगती. दरअसल, गर्मी के मौसम में मेटाबॉलिज्म दोपहर और रात के समय थोड़ा धीमा हो जाता है इसलिए इस समय भारी भोजन को पचाना मुश्किल होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अंडों का सेवन सुबह के नाश्ते में करना सबसे बेहतर रहेगा. सुबह शरीर का मेटाबॉलिज्म सबसे अधिक होता है जिससे अंडे का प्रोटीन आसानी से पच जाता है. दोपहर की कड़ी धूप या रात को सोने से ठीक पहले अंडा खाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है. गर्मियों में इन 2 बातों का रखें ख्याल गर्मियों में सबसे बड़ा खतरा साल्मोनेला (Salmonella) बैक्टीरिया का होता है. अधिक तापमान में अंडे जल्दी खराब हो सकते हैं. इसलिए हमेशा अंडों को फ्रिज में 4°C से कम तापमान पर स्टोर करें. इसके अलावा गर्मियों में भारी तेल-मसाले वाले ऑमलेट या एग करी के बजाय उबले हुए अंडे या कम तेल वाली पोच्ड एग को प्राथमिकता दें. अंडे को इसे खीरे, पुदीने या ताजी सब्जियों के सलाद के साथ खाएं ताकि शरीर का हाइड्रेशन लेवल बना रहे. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, किसी स्वस्थ व्यक्ति गर्मियों में भी रोज 1 से 2 अंडे सुरक्षित रूप से खा सकता है.

कलियुग के अंत की भविष्यवाणी, कल्कि अवतार से होगा अधर्म का नाश

 हिंदू धर्म के अनुसार, जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है, तब भगवान विष्णु अलग-अलग अवतार लेकर संतुलन स्थापित करते हैं.  उनका अंतिम और दसवां अवतार कल्कि अवतार माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, जब कलयुग में पाप अपने चरम पर पहुंच जाएगा, नदियां सूखने लगेंगी और इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार के रूप में प्रकट होंगे. विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण में बताया गया है कि यह अवतार कलयुग और सतयुग के संधिकाल में होगा, जिसका उद्देश्य धर्म की पुनः स्थापना करना होगा. कहां होगा कल्कि अवतार का जन्म? धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, कल्कि अवतार का जन्म शंभल नामक स्थान पर होगा. उनके पिता का नाम विष्णुयशा बताया गया है, जो एक तपस्वी ब्राह्मण होंगे. कैसा होगा कल्कि अवतार का स्वरूप? पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान कल्कि एक सफेद घोड़े पर सवार होकर प्रकट होंगे, जिसका नाम देवदत्त बताया गया है. उनके हाथ में एक चमकदार तलवार होगी और उनकी गति बिजली से भी अधिक तेज मानी जाती है.  उनका रूप अत्यंत दिव्य और प्रभावशाली होगा. कौन देंगे उन्हें शिक्षा? मान्यता है कि भगवान परशुराम उनके गुरु होंगे. वे कल्कि को युद्ध कला और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देंगे, जिससे वे अधर्म का नाश कर सकें. किससे होगा कल्कि अवतार का युद्ध? कल्कि अवतार का मुख्य उद्देश्य अधर्म, पाप और अन्याय का अंत करना होगा.  वे उन दुष्ट शासकों और लोगों का विनाश करेंगे, जो समाज में बुराई फैलाते हैं. यह युद्ध सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई के बीच एक बड़ा संघर्ष माना जाता है. कौन होगा सबसे बड़ा शत्रु? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्कि अवतार का सबसे बड़ा शत्रु 'कलि' होगा, जो कलियुग की नकारात्मक शक्तियों का प्रतीक है. इसी शक्ति का अंत करके कल्कि धर्म की पुनः स्थापना करेंगे. कौन देगा इस युद्ध में साथ? मान्यता है कि इस धर्मयुद्ध में हनुमान, अश्वत्थामा और कृपाचार्य जैसे चिरंजीवी भी उनका साथ देंगे. कैसे होगा कलियुग का अंत? जब अधर्म पूरी तरह फैल जाएगा, तब कल्कि अवतार प्रकट होकर उसका अंत करेंगे.  उनके अवतरण के साथ ही धरती पर फिर से शुद्धता आएगी और सतयुग की शुरुआत मानी जाएगी. यह घटना अच्छाई और बुराई के बीच अंतिम विजय का प्रतीक होगी.

पंजाब सरकार का ऐतिहासिक कदम, 201 गांवों में किसानों को धान की अग्रिम बिजाई करने की मिली अनुमति

 कलानौर  पंजाब सरकार ने सेमग्रस्त घोषित किए राज्य के 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। इनमें गुरदासपुर जिले के तीन गांव शामिल हैं, जिनके करीब 200 एकड़ जमीन सेमग्रस्त है। पंजाब सरकार ने यह छूट दो साल के लिए दी है। गौर हो कि पंजाब में किसान दस मई से पहले धान की पनीरी की बिजाई नहीं कर सकते हैं। इसका उद्देश्य राज्य में घटते भू-जल स्तर को रोकना है। निकटवर्ती निज्जरपुर गांव के सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि ब्लाक डेरा बाबा नानक से संबंधित सरपंचों की मांग पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब भर में सेमग्रस्त घोषित किए 201 गांवों में अग्रिम धान बीजने की छूट दी है। अब इन खेतों के किसान साल भर में कभी भी धान की बिजाई कर सकते हैं। इस फैसले से डेरा बाबा नानक ब्लाक के सेमग्रस्त गांवों के सरपंचों व किसानों में खुशी की लहर है। इस संबंध में गांव निज्जरपुर के सरपंच रणदीप सिंह, प्रकाश सिंह, कुलविंदर सिंह, कर्मजीत सिंह, जगजीत सिंह आदि ने बताया कि पिछले साल अगस्त में सक्की किरण नाले और रावी दरिया के पानी से आई बाढ़ में उनकी धान की फसल तबाह हो गई थी। इसके बाद विभिन्न संगठनों के सहयोग से उन्होंने गेहूं की बिजाई की, लेकिन गेहूं वाले खेतों में सेम आ जाने के कारण उनकी गेहूं की फसल भी नष्ट हो गई थी। सरपंच रणदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव अठवाल, कोटली सूरत मल्ली, अर्लीभन्न के रकबे में सेम पड़ जाने और गेहूं की फसल नष्ट होने पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इन सेम प्रभावित खेतों में अग्रिम धान लगाने की मांग की थी। इस मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने कृषि विभाग और विभिन्न टीमों को सेमग्रस्त खेतों की जांच के लिए भेजा था। टीमों ने जांच के बाद पाया कि इन खेतों में डेढ़ से दो फुट मिट्टी खोदने के बाद सेम का पानी आ जाता है। पंजाब सरकार ने किसानों की मांग स्वीकार करते हुए जिला गुरदासपुर के गांव भुल्लर, अठवाल, कोटली सूरत मल्ली के अलावा पूरे पंजाब के विभिन्न जिलों के कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया है। इनमें श्री मुक्तसर साहिब के 95, फरीदकोट के 19, फाजिल्का के 81, बठिंडा के दो और मानसा के एक गांव शामिल हैं। सरकार ने इन गांवों के क्षेत्र को धारा 3(3)(सी) के तहत 'पंजाब प्रिजर्वेशन ऑफ सब-सायल वाटर एक्ट, 2009' के दायरे से अगले दो सालों की अवधि के लिए छूट दे दी है। इस छूट के बाद अब ये किसान निर्धारित तिथि से पहले अग्रिम धान की बिजाई कर सकेंगे। किसानों का कहना है कि इस फैसले से उनकी आर्थिक को काफी राहत मिलेगी। सरपंच रणदीप सिंह ने सेमग्रस्त जमीनों के मालिक किसानों से अपील की कि वे धान की बिजाई के लिए नर्सरियों की तैयारी करें ताकि सेमग्रस्त खेतों में धान की बिजाई की जा सके। सरपंच रणजीत सिंह और प्रभावित किसानों ने बताया कि पिछले साल अगस्त महीने में बाढ़ के पानी से जहां उनकी धान की फसल पूरी तरह तबाह हो गई थी, वहीं देर से खेतों में किसानों द्वारा बिजाई की गई गेहूं की फसल भी खेतों में सेम की मार पड़ जाने के कारण नष्ट हो गई है। उन्होंने बताया कि कई किसानों के खेतों में से डेढ़ से तीन क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं की पैदावार ही निकली है, जो सामान्य से काफी कम है। किसानों ने कहा कि पंजाब सरकार को सेमग्रस्त जमीनों पर खराब हुई गेहूं की फसल का भी किसानों को तुरंत मुआवजा देना चाहिए ताकि समय-समय पर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे किसानों की आर्थिक सहायता हो सके। जिला गुरदासपुर के कृषि अधिकारी डा. ठाकुर रणधीर सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा पंजाब के विभिन्न जिलों के अलावा जिला गुरदासपुर के तीन गांवों आदि सहित कुल 201 गांवों को सेमग्रस्त घोषित किया गया है। इसके तहत इन सेमग्रस्त गांवों के किसानों को अग्रिम धान बिजाई की छूट मिली है, जबकि दूसरी जमीनों में धान की पनीरी की बिजाई और धान की रोपाई पंजाब सरकार के खेतीबाड़ी विभाग के आदेशों पर होगी।

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर सियासी संग्राम, भाजपा लाएगी निंदा प्रस्ताव

चंडीगड़ हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शोक प्रस्ताव पढ़ रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने सदन का बहिष्कार कर दिया है।  नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विशेष सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाई। हुड्डा साढ़े 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। भाजपा नारी शक्ति वंदन विधेयक पर कांग्रेस की भूमिका के खिलाफ सदन में निंदा प्रस्ताव लेकर आएगी। कांग्रेस ने इसे नियमानुसार गलत बताते हुए विरोध करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच हंगामा तय है। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद के मुताबिक पार्टी देशभर में लोकसभा की 543 सीटों में से 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने और यही व्यवस्था सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी लागू करने का प्रस्ताव लाएगी। भाजपा सरकार कांग्रेस की इसी भूमिका को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। सरकार का तर्क है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम पहले ही महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का रास्ता साफ कर चुका है इसलिए कांग्रेस का रुख विरोधाभासी है। सत्र में एक अहम विधेयक भी पेश किया जाएगा। हरियाणा क्लेरिकल सर्विस बिल 2026 को कैबिनेट पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत ग्रुप-डी कर्मचारियों के लिए क्लर्क पद पर प्रमोशन का कोटा 20 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया जाएगा। साथ ही 5 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को पदोन्नति का पात्र माना जाएगा और 5 फीसदी एक्स-ग्रेशिया पद भी अनिवार्य होंगे। निलंबित विधायकों पर नजर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में निलंबित पांचों विधायक शैली चौधरी, रेनू बाला, मोहम्मद इसराइल, मोहम्मद इलियास और जरनैल सिंह को भी विधायक दल की बैठक में शामिल होने का संदेश भेजा गया है। इन पांचों विधायकों पर बैठक में शामिल होने से लेकर सदन तक में सभी नजर रहेंगी।