samacharsecretary.com

ट्रंप का चेतावनी भरा बयान: ईरानी विदेश मंत्री की रूस यात्रा से भड़के, 3 दिन का वक्त दिया

वाशिंगटन ईरान के विदेश मंत्री की रूस की यात्रा से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भड़क गए हैं। उन्होंने धमकी देते हुए कहा है कि अगर तीन दिन के अंदर ईरान समझौता नहीं करता है तो फिर उसकी तेल की पाइपलाइनों में भयंकर विस्फोट होगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान तेल निर्यात करने के लायक ही नहीं बचेगा। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी की वजह से ईरान जहाजों के जरिए निर्यात नहीं कर पा रहा है। वहीं पाइपलाइन ध्वस्त होने के बाद उसका निर्यात एकदम से बंद हो जाएगा। बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान से एक बार फिर रूस पहुंचे हैं और वह अब पुतिन से वार्ता करने वाले हैं। रूसी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। ईरानी विदेश मंत्री के रूस दौरे से नाराज ट्रंप? दरअसल ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए पाकिस्तान गए थे। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अराघची भी रूस और ओमान की यात्रा पर निकल गए। रूस के दौरे से वह एक बार फिर पाकिस्तान लौटे। उधर ट्रंप ने कहा कि अब उनकी टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी बल्कि जो भी बात होगी, फोन पर ही होगी। ईरान ने भेजा अपना प्रस्ताव ईरान ने एक लिखित प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रंप को भेजा था जिसे उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि पहले प्रस्ताव खारिज होने के बाद ईरान ने दूसरा प्रस्ताव भेजा जो कि उससे बेहतर है। उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए आने-जाने में सफर बहुत करना पड़ता है और अब सारी बातें फोन पर होंगी। ईरान जब चाहें उन्हें फोन कर सकता है। जानकारी के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्री एक बार फिर रूस चले गए हैं और ईरान का कहना है कि मॉस्को में अब आगे की बातें होंगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा है कि उसकी तेल की पाइपलाइन को इस तरह तबाह किया जाएगा कि दोबारा वह वैसी पाइपलाइन नहीं बना पाएगा। जियो टीवी' ने ईरानी समाचार एजेंसी 'आईएसएनए' के हवाले से बताया कि अराघची ''युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के ढांचे पर ईरान के रुख और विचारों'' से अवगत कराएंगे। ग्यारह और बारह अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा। शनिवार को अराघची के ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। रविवार को ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं।

राघव चड्ढा का अटका बिल: अगर पास होता तो AAP की टूटन और BJP में जाने की बात न होती

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा झटका दे चुके हैं. आम आदमी पार्टी में बगावत करने वाले राघव चड्ढा अब भाजपाई हो चुके हैं. उनके साथ छह अन्य सांसद भी आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं. अब वे सभी भाजपा में हैं. राघव चड्ढा आज भले ही दल बदलकर भाजपा में जा चुके हैं. मगर राघव चड्ढा का ही लाया बिल पास हो गया होता तो वह आज आम आदमी पार्टी छोड़कर अलग नहीं हो पाते. न ही वह बगावत कर पाते. राघव चड्ढा की यह खबर सिर्फ एक नेता के पार्टी बदलने की नहीं है. इसमें एक बड़ी विडंबना छिपी है. चार साल पहले राघव चड्ढा ने खुद एक बिल लाया था, जो दल-बदल को बहुत सख्ती से रोकता. अगर वह बिल कानून बन गया होता तो आज राघव चड्ढा की कहानी कुछ और होती।  जी हां, चार साल पहले राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर अगस्त 2022 में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाया था. उस बिल का मकसद दल-बदल कानून को और सख्त बनाना था. वह कानून बन गया होता तो राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर नहीं जा पाते. न ही वह सदन के अपने छह अन्य पार्टी सदस्यों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल हो पाते. दो दिन पहले ही उन्होंने यह घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदन में मौजूद 10 सदस्यों की कुल संख्या में से दो-तिहाई बहुमत होने का हवाला दिया था।  राघव चड्ढा ने चार साल पहले लाया था बिल  खबर के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा का प्रस्तावित बिल कानून बन गया होता तो पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के लिए राघव चड्ढा को अपनी पार्टी के छह नहीं, बल्कि सात सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ती. इतना ही नहीं पार्टी तोड़ने के आरोप में इस मौजूदा टीम पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती।  उस बिल में क्या था? ऐसा इसलिए, क्योंकि संविधान संशोधन बिल में दलबदल विरोधी कानून को और अधिक सख़्त बनाने की मांग की गई थी. यह बिल उन्होंने राज्यसभा में शामिल होने के तीन महीने बाद पेश किया था. इस बिल के तहत पार्टी में वैध रूप से टूट या विभाजन करने के लिए दो-तिहाई नहीं, बल्कि तीन-चौथाई बहुमत की जरूरत होती. इस बिल को राघव चड्ढा ने 5 अगस्त 2022 को एक ‘निजी सदस्य बिल’ के तौर पर सदन में पेश किया था. तब राघव आप चीफ अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी थे।  बिल में क्या मांग की गई थी? ‘विधायकों द्वारा पूरी तरह से लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी करते हुए गलत इरादे से पार्टी बदलने’ का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के प्रस्तावित बिल में संविधान की दसवीं अनुसूची के लिए और भी अधिक सख़्त प्रावधानों के जरिए दलबदल विरोधी नियमों को मजबूत करने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि दसवीं अनुसूची में दलबदल के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े नियम शामिल हैं।  दसवीं अनुसूची में क्या है वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य मिलकर दूसरी पार्टी में चले जाएं तो उन्हें अयोग्य नहीं माना जाता. राघव चड्ढा के बिल ने इसे बढ़ाकर तीन-चौथाई (3/4) कर दिया था. मतलब 10 सदस्यों वाली पार्टी में कम से कम 8 सदस्यों का सहमत होना जरूरी होता. सिर्फ 7 से काम नहीं चलता।  जानिए बिल में क्या-क्या?     इस प्रस्तावित कानून का मकसद संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 में संशोधन करके और दसवीं अनुसूची में बदलाव करके पार्टी के भीतर विलय के लिए ज़रूरी सदस्यों की संख्या को 2/3 से बढ़ाकर 3/4 करके  लोकतंत्र को मज़बूत करना और जन प्रतिनिधियों को राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बजाय जानकार कानून निर्माता बनने में मदद करना था।      बिल में यह भी लिखा था कि अगर कोई सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलता है तो उसे छह साल तक कोई चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी. साथ ही ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ रोकने के लिए अगर कोई सरकार से समर्थन वापस लेता है तो उसे सात दिन के अंदर स्पीकर या चेयरमैन के सामने हाजिर होना पड़ता. अगर वह नहीं करता तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता था।      बिल में साफ लिखा था कि दल-बदल कानून का मकसद विधायकों-सांसदों के खरीद-फरोख्त को रोकना था, लेकिन आज भी यह समस्या बदस्तूर जारी है. दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग हो रहा है. यह हमारे लोकतंत्र पर कलंक है. बिल ने अनुच्छेद 102 और 191 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा था ताकि सांसद या विधायक अयोग्य होने पर सदन की सदस्यता चली जाए।  और यह विडंबना तब राघव चड्ढा ने बिल पेश करते समय कहा था कि जनता ने जिस उम्मीद से विधायकों को चुना है, उसके खिलाफ फ्लोर क्रॉसिंग (दल-बदल) करना गलत है. लेकिन आज वही राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की दो-तिहाई बहुमत का हवाला देकर भाजपा में चले गए हैं. अगर उनका 2022 वाला बिल कानून बन जाता तो आज उन्हें सात सदस्यों (न कि छह) का समर्थन चाहिए होता और पूरी टीम को छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता। 

‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ फिनाले में भावुक हुए अक्षय कुमार, ट्रिब्यूट वीडियो देख छलके आंसू

अक्षय कुमार के रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' को शुरुआत से ही दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. अब 27 अप्रैल को शो का ग्रैंड फिनाले होने वाला है. फिनाले एपिसोड को धमाकेदार बनाने के लिए फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन फर्नांडीस ने शिरकत की. लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अक्षय कुमार कैमरे पर ही इमोशनल हो गए. नम हुईं अक्षय की आंखें शो का एक नया प्रोमो वीडियो सामने आया है. फिनाले एपिसोड में मेकर्स ने अक्षय के लिए एक खास 'ट्रिब्यूट वीडियो' तैयार किया, जिसे देखकर खिलाड़ी कुमार अपने आंसू नहीं रोक पाए. नेशनल टीवी पर उनकी आंखें नम हो गईं. ट्रिब्यूट वीडियो में अक्षय की शो में शानदार जर्नी दिखाई गई. वीडियो में शो के दौरान अक्षय के हंसते-खेलते और मस्ती-मजाक के पलों को भी दिखाया गया. साथ में खिलाड़ी कुमार के लिए एक दिल को छू लेने वाला मैसेज भी शेयर किया गया. वीडियो में अक्षय के लिए कहा गया- कल से ये मंच नहीं होगा. लेकिन आपकी मुस्कुराहट याद रहेगी. आपकी शरारतें, नादानियां और शैतानियां याद रहेंगी. आप याद रहेंगे. शायद ही पहले कभी किसी ने अक्षय कुमार को कैमरों पर रोते हुए देखा होगा. अक्षय को इमोशनल देखकर उनके फैंस की आंखें भी भर आई हैं. अक्षय ने मामा को किया इंट्रोड्यूस ट्रिब्यूट वीडियो देखकर अक्षय काफी इमोशनल हो गए. उनकी आंखें नम हो गईं. इमोशनल होते हुए अक्षय ने अपने मामा से भी मिलवाया. मामा को इंट्रोड्यूस करते हुए खिलाड़ी कुमार ने कहा- मेरे मामा जी भी यहां आए हैं, उन्होंने एक भी शो मिस नहीं किया है. वो मुझे बताते हैं- बेटा, जैसे ही रात के 9 बजते हैं, मैं शो देखने बैठ जाता हूं. इस शो को इतना प्यार देने के लिए शुक्रिया इंडिया. फिनाले एपिसोड होगा धमाकेदार फिनाले एपिसोड में फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन संग अक्षय कुमार खूब मस्ती मजाक भी करते दिखेंगे. चारों सितारों ने मिलकर स्टेज पर धमाका करते दिखेंगे. अक्षय और फराह और एक दूसरे को टीज करते हुए भी नजर आएंगे. प्रोमो वीडियो में दोनों का बॉन्ड और खट्टी-मीठी नोकझोंक फैंस को काफी एंटरटेनिंग लग रही है. आप भी मिस मत करिएगा 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' का फिनाले एपिसोड.

फर्जी लिंक से हो रही ठगी, टाटा पावर ने ग्राहकों को किया सतर्क

जमशेदपुर देश भर में बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘वॉट्सऐप स्कैम’ को लेकर टाटा पावर ने अपने ग्राहकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. कंपनी ने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि यह आपकी जमा-पूंजी और निजी डेटा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि ​हाल के दिनों में देखा गया है कि जालसाज ग्राहकों को वॉट्सऐप पर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. इन संदेशों में बिजली कटने का डर दिखाकर या केवाईसी अपडेट करने के बहाने संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं. जैसे ही कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है. उसका फोन हैक होने या बैंक खाते से पैसे चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है. ​ टाटा पावर की ग्राहकों को  सलाह ​कंपनी ने स्पष्ट किया है कि टाटा पावर कभी भी वॉट्सऐप, एसएमएस, कॉल या ईमेल के जरिए आपसे ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड नहीं मांगता है. किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. ये लिंक आपके फोन और व्यक्तिगत डेटा से समझौता कर सकते हैं. ऐसे किसी भी संदेश के जवाब में अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें. ​केवल आधिकारिक ऐप का उपयोग करें. ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. किसी अन्य सोर्स से भेजे गये ऐप डाउनलोड लिंक पर क्लिक न करें. सुरक्षा के लिए ग्राहक इन बातों का कड़ाई से पालन करें. ​ संदिग्ध गतिविधि होने पर क्या करें? ​टाटा पावर ने अपील की है कि यदि आपको कोई संदिग्ध मैसेज प्राप्त होता है या आपके साथ कोई अनधिकृत लेनदेन होता है. तो तुरंत ​हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. ​साइबर पोर्टल नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें. सिर्फ टाटा पावर के आधिकारिक संचार माध्यमों से ही संपर्क करें. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें. आपकी जागरूकता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सोलिया गांव से आरोपी दबोचा गया

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अवैध हथियार के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार युवक के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच गहराई से कर रही है. सूचना के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल की रात लगभग 8 बजे पुलिस अधीक्षक रामगढ़ को सूचना मिली थी कि पतरातू थाना क्षेत्र के ग्राम सोलिया निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है. सूचना के सत्यापन के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पतरातू राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया. छापामारी के दौरान पुलिस ने तालाताड़ पंचायत के सोलिया गांव से अनीश अंसारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. हथियार बरामदगी और मामला दर्ज पूछताछ के दौरान उसके बताए गए स्थान पर उसके घर से तुर्की मेड जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि उक्त पिस्टल उसे राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य द्वारा फायरिंग की घटना के बाद रखने के लिए दिया गया था. इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आरोपी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कई धाराओं में मामला दर्ज है.छापामारी दल में पतरातू अंचल पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता, भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली, पुलिस अवर निरीक्षक अफजल अंसारी के साथ अन्य पुलिस बल के जवान शामिल थे.

सियासी परिवार में मातम, पूर्व विधायक के पुत्र की आत्महत्या; घरेलू कलह की आशंका

रायपुर. राजधानी रायपुर से दुखद खबर सामने आई है, जहां पूर्व विधायक धनीराम साहू के पुत्र जय साहू ने आत्महत्या कर ली। इस घटना से इलाके में शोक का माहौल है। 45 वर्षीय जय साहू ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दी। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, जिससे आत्महत्या के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ सकी है। शुरुआती तौर पर घरेलू विवाद की आशंका जताई जा रही है। पंडरी थाना पुलिस जांच में जुटी: पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव घटना की सूचना मिलते ही पंडरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है, ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके। परिवार और परिचितों से पूछताछ: कारणों की तलाश जारी पुलिस अब परिवार के सदस्यों और करीबी लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जय साहू ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। राजनीतिक पृष्ठभूमि: पिता रहे चुके हैं विधायक बताया जा रहा है कि जय साहू के पिता धनीराम साहू वर्ष 1977 में कसडोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार में राज्य मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। संवेदनशील मामला: सच्चाई सामने आने का इंतजार यह मामला फिलहाल संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सकेगी।

क्या ऋषभ पंत पर कप्तानी का दबाव पड़ा भारी? खराब प्रदर्शन से बढ़ी चिंता

नई दिल्ली  हार हर टीम को मिलती है, लेकिन जब हार आदत बन जाए और उसके पीछे अपनी ही गलतियां हों, तब चिंता गहरी हो जाती है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) इस वक्त उसी दौर से गुजर रही है जहां मुकाबला विपक्ष से कम और खुद की उलझनों से ज्यादा है. लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) अब सिर्फ मैच नहीं हार रही है, बल्कि उन्हें खुद ही बिगाड़ रही है. ऋषभ पंत की कप्तानी वाली LSG अब तक बेहद निराशाजनक रही है. यह टीम हर बार डगआउट पर कैमरा जाने पर असमंजस में दिखती है. योजनाएं हर गेंद पर बदलती हैं, खिलाड़ियों के रोल हर मैच में बदलते हैं और जैसे ही दबाव आता है, फैसले बिखर जाते हैं. IPL 2026 की पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे बैठी LSG ने अपने 8 में से 6 मैच गंवा दिए हैं और लगभग टूर्नामेंट से बाहर हो चुकी है. जाहिर तौर पर कप्तान को ही आलोचना झेलनी पड़ती है और यहां भी वही हो रहा है.  पूर्व IPL कोच वसीम जाफर ने खुले तौर पर कप्तानी में बदलाव की बात कही है. उनका मानना है कि दक्षिण अफ्रीका के एडेन मार्करम को कप्तान बनाया जाना चाहिए ताकि पंत कप्तानी के दबाव से मुक्त होकर अपने खेल पर ध्यान दे सकें. जाफर ने कहा बदलो कप्तान जाफर ने कहा कि कप्तानी पंत पर बोझ बनती जा रही है. IPL 2025 में भी हमने यही देखा था, जब उन्होंने पहले 12 पारियों में सिर्फ 151 रन बनाए थे. इस साल भी उन्होंने सिर्फ एक मैच में बल्ले से टीम को जिताया है, बाकी प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है, खासकर 27 करोड़ रुपये की कीमत वाले खिलाड़ी के लिए. मुझे लगता है कि ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी को सिर्फ खिलाड़ी के तौर पर खेलना चाहिए जब आप उसे आजादी देते हैं, तो वह मैच अपने दम पर जिता सकता है. कप्तानी का बोझ उस पर नहीं डालना चाहिए. मार्करम बेहतर विकल्प मार्करम बेहतर कप्तान हैं शांत, मजबूत और टीम से सर्वश्रेष्ठ निकालने वाले हालांकि, यह सिर्फ मेरी राय है,” अगर आप इस सीजन में पंत की कप्तानी का एक उदाहरण देखना चाहते हैं, तो KKR के खिलाफ आखिरी 5 ओवर देख लीजिए. पहल गेंदबाजी का फैसला आखिरी ओवर में रिंकू सिंह जैसे सेट बल्लेबाज के सामने दिग्वेश राठी को गेंद देना. यह दांव पूरी तरह उल्टा पड़ गया चार छक्के और मैच पलट गया 93/7 से मैच 156 के सफल चेज़ तक पहुंच गया.आज के दौर में, जब टीमें तेजी से रन बनाकर दबाव हटाती हैं, LSG ने खुद को पीछे धकेल दिया.  यह तभी होता है जब टीम अपनी योजना को लेकर स्पष्ट नहीं होती और यही इस सीजन की सबसे बड़ी समस्या रही है. 27 करोड़ का दबाव ये कहने में कोई गुरेज नहीं कि कप्तानी करते समय उनका प्रदर्शन गिर जाता है स्ट्राइक रेट और औसत दोनों कम हो जाते हैं, और उनकी स्वाभाविक आक्रामकता भी प्रभावित होती है. हालांकि, LSG में पंत का सिर्फ खिलाड़ी बनकर खेलना आसान नहीं है. वह इस टीम का चेहरा हैं 27 करोड़ रुपये में खरीदे गए. IPL इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ी। इतनी बड़ी कीमत के साथ जिम्मेदारी भी आती है. उनसे उम्मीद की जाती है कि वह नेतृत्व करें, मुश्किल समय में टीम को संभालें और ऐसा लगता है कि पंत खुद भी कप्तानी करना चाहते हैं यही वजह है कि यह फैसला आसान नहीं है क्योंकि इस वक्त LSG के पास एक ऐसा कप्तान है जो नेतृत्व करना चाहता है, लेकिन एक ऐसी टीम भी है जिसे सही दिशा में नेतृत्व मिलता नहीं दिख रहा.

हरियाणा सरकार का अमृतसर के दुकानदारों के लिए बड़ा ऐलान, Dry Fruit, किराना और इलेक्ट्रिकल पर मिलेगा खास लाभ

अमृतसर  एकतरफ जहां अमृतसर की ड्राईफ्रूट व करियाना होल सेल मंडी (मजीठ मंडी व ढाब बस्ती राम) में कारोबारी सरकार की गलत नीतियों के कारण पलायन कर रहे हैं तो वहीं भाजपा शासित हरियाणा सरकार की तरफ से अमृतसर व दिल्ली के ड्राईफ्रूट-करियाना एवं इलैक्ट्रिकल दुकानदारों को 250 से ज्यादा दुकानों की अलाटमैंट की जा रही है, जिसमें व्यापारियों को हर प्रकार की सुविधा मिलेगी। जानकारी के अनुसार भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ पंजाब के उप-प्रधान एवं द फैडरेशन ऑफ करियाना एंड ड्राइफ्रूट कमर्शियल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मेहरा की तरफ से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुलाकात की गई और व्यापारियो को दरपेश आ रही समस्याओं के बारे में अवगत करवाया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अमृतसर के ड्राईफ्रूट व करियाना कारोबारियों को हरियाणा में दुकानें अलॉट करने का ऐलान किया। बकायदा एच.एच.आई.आई.डी.सी. (हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्टक्चर डिवैल्पमैंट कार्पोरेशन) की तरफ से अप्रूवल भी जारी किया गया है। 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर मिलेगा इंफ्रास्टक्चर हरियाणा सरकार की तरफ से 300 एकड़ से ज्यादा भूमि पर कारोबारियों के लिए इंफ्रास्टक्चर उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिसमें व्यापारियों की दुकानों के अलावा, लेबर के रहने के लिए क्वार्टर, खाना खाने के लिए हाल, सिक्योरिटी गार्डर्स व हर प्रकार की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। ड्राईफ्रूट मंडी मजीठ मंडी की बात करें तो आई.सी.पी. अटारी बार्डर के जरिए अफगानिस्तान से भारी मात्रा में अमृतसर व उत्तर भारत के कारोबार ड्राईफ्रूट का आयात करते रहे हैं, लेकिन पहले पुलवामा हमले व फिर पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ कारोबारी रिश्ते बिल्कुल खत्म हो चुके हैं और पाकिस्तान के रास्ते आई.सी.पी. अटारी पर आने वाले ड्राईफ्रूट के ट्रकों को भी पाकिस्तान रास्ता नहीं देता है, जिससे व्यापारियों को भारी नुक्सान हो रहा है और दुबई के रास्ते ड्राईफ्रूट आयात किया जा रहा है, जिससे खर्च बहुत ज्यादा आता है और इसका असर ग्राहक पर भी पड़ता है, क्योंकि जितना ज्यादा खर्च आएगा उतनी ज्यादा कीमत पर ग्राहकों को ड्राईफ्रूट बेचा जाएगा। वॉल्ड सिटी के अन्दर होने के कारण मजीठ मंडी में रास्ते तंग ढाब बस्ती राम व ड्राईफ्रूट की मजीठ मंडी की बात करें तो इस ऐतिहासिक मंडियों को वॉल्ड सिटी के अन्दर बसाया गया था और जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई, वैसे-वैसे वाल्ड सिटी के अन्दर बसी इन मंडियों में आना-जाना आसान नहीं रहा और लेबर को मंडी में जाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि यह व्यापारियों पर निर्भर करता है कि वह अमृतसर में ही काम करना चाहते हैं या फिर हरियाणा में दुकानें खरीदकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसका नाकारात्मक पक्ष यह भी जरुरी है कि यदि व्यापारियों को दूसरे राज्य में पलायन होता है तो शहर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है, क्योंकि पहले ही सरकार की गलत नीतियों के कारण अमृतसर की इंडस्ट्री हिमाचल व अन्य राज्यों में पलायन कर चुकी हैं। मोदी सरकार व्यापारी हितैशी : अनिल मेहरा अनिल मेहरा ने कहा कि मोदी सरकार व्यापारी हितैषी है और व्यापारियों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है। केन्द्र सरकार सबका साथ और सबका विकास के लक्षय पर काम कर रही है।

परिवारिक कलह बनी हत्या की वजह, पत्नी के न लौटने से परेशान पिता ने बेटी को मारा

पटियाला. पंजाब के पटियाला के अंतर्गत आते राजपुरा के नजदीक अलीपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के चलते एक पिता ने अपनी ही 12 साल की बेटी की हत्या कर दी। इस वारदात ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और लोगों में गहरा आक्रोश और दुख देखने को मिल रहा है। मिली जानकारी के अनुसार, आरोपित और उसकी पत्नी के बीच पिछले काफी समय से घरेलू झगड़ा चल रहा था। करीब डेढ़ साल पहले विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी अपने मायके जाकर अलग रहने लगी। इसके बाद से ही आरोपित लगातार पत्नी को वापस घर लाने के लिए दबाव बना रहा था। सूत्रों के अनुसार, आरोपित ने पत्नी को कई बार धमकियां दीं कि अगर वह वापस नहीं आई तो वह उनकी बेटी को नुकसान पहुंचा देगा। हालांकि इन धमकियों के बावजूद महिला वापस नहीं लौटी। गुस्साए आरोपित ने बेटी की कर दी हत्या आरोप है कि इसी गुस्से और मानसिक तनाव में आकर आरोपित ने अपनी ही 12 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी। इतना ही नहीं, हत्या के बाद आरोपित ने मामले को छिपाने के लिए बच्ची का अंतिम संस्कार भी कर दिया। इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित महिला ने पुलिस को शिकायत दी और पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपित के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू से जांच की जा रही है। आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाया जा सके। परिवार में था तनाव भरा माहौल स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार में लंबे समय से तनाव का माहौल था, लेकिन किसी ने इस बात की कल्पना नहीं की थी कि मामला इतना भयावह रूप ले लेगा। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक और डर का माहौल है। पुलिस का कहना है कि आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।