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चुनाव खत्म होने के बावजूद बंगाल में रहेंगे केंद्रीय सुरक्षा बल, क्या है अमित शाह का प्लान?

पश्चिम बंगाल केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार (27 अप्रैल) को कहा कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भी कम से कम 60 और दिन तक केंद्रीय सुरक्षा बल राज्य में तैनात रहेंगे। उन्होंने मतदाताओं से चुनाव के अंतिम चरण में "दीदी के गुंडों" से डरे बिना मतदान करने की अपील की। शाह बेहाला में रोड शो के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे, जहां 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण में मतदान होना है। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, जबकि मतगणना चार मई को होगी। शाह ने कहा, "भाइयों और बहनों, 29 तारीख को जाकर वोट दीजिए, गुंडों से डरने की जरूरत नहीं है। निर्वाचन आयोग ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं और मैं आपको बता दूं कि भाजपा के सत्ता में आने पर भी केंद्रीय बल यहां 60 दिन तक रहेंगे।" यह रोड शो बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम सीटों के भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार के अंतिम दिन आयोजित किया गया था। इस दौरान दक्षिण कोलकाता का यह इलाका भगवा रंग में रंग गया। खुले वाहन पर खड़े होकर शाह ने समर्थकों का अभिवादन किया। "जय श्री राम" तथा "भारत माता की जय" के नारे खुले वाहन पर सवार शाह ने समर्थकों का अभिवादन किया। इस दौरान भाजपा समर्थक "जय श्री राम" तथा "भारत माता की जय" के नारे लगाते रहे। बाद में शाह ने हुगली जिले के चंदननगर में भी एक और भव्य रोड शो किया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। इस मौके पर गृह मंत्री ने कहा कि राज्य में भाजपा के पक्ष में जबरदस्त लहर है और सत्ता में आने के बाद पार्टी "सभी घुसपैठियों और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी। मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश न की जाए चंदननगर में एक रोड शो के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि 29 अप्रैल को मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि चार मई के बाद दोषियों को सजा दी जाएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने का विरोध कर रही हैं और वोट बैंक की राजनीति के लिए अवैध प्रवासियों को संरक्षण दे रही हैं। शाह ने कहा कि चार मई के बाद सभी घुसपैठियों की पहचान करके उन्हें पश्चिम बंगाल से बाहर निकाल दिया जाएगा। भाजपा की सरकार बनने का दावा रोड शो के बाद शाह ने दावा किया कि राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि चार मई के बाद किसी को भी बहुविवाह की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक चुनाव शांतिपूर्ण रहे हैं और कोई बड़ी हिंसक घटना या मौत नहीं हुई है। तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए शाह ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का जिक्र किया और निलंबित टीएमसी विधायक व एजेयूपी के संस्थापक हुमांयू कबीर का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके जरिए बंगाल में "बाबरी मस्जिद" बनाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य सरकार पर सामाजिक कल्याण योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि सत्ता में आने पर दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल को "सोनार बांग्ला" बनाने, कानून-व्यवस्था सुधारने और विकास व सुशासन स्थापित करने के लिए भाजपा को सत्ता में लाना जरूरी है।  

अतिक्रमण कार्रवाई पर Supreme Court of India ने हस्तक्षेप से किया इनकार

गुरुग्राम गुरुग्राम में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही तोड़फोड़ कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को संबंधित हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या हो रही है, तो वहीं उचित मंच है जहां इस पर तत्काल सुनवाई कराई जा सकती है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के समक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि गुरुग्राम में स्थानीय प्रशासन बिना नोटिस दिए तोड़फोड़ कर रहा है और यह कार्रवाई सुबह 9 बजे से जारी है. उन्होंने कोर्ट से कम से कम चार दिन के लिए यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘अगर हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश की गलत व्याख्या की जा रही है तो उसे वहीं चुनौती दी जानी चाहिए. यह मांग सीधे यहां क्यों लाई गई?’ कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर निर्माण अनाधिकृत हैं और हाईकोर्ट अपने संवैधानिक दायित्व को निभा रहा है, तो सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की जरूरत क्यों होनी चाहिए. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित निर्माण पूरी तरह वैध हैं और मौके पर परिवार व बच्चे मौजूद हैं, ऐसे में तत्काल राहत जरूरी है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सुनने के बाद याचिकाकर्ता को दिन में ही हाईकोर्ट के समक्ष मेंशनिंग करने की स्वतंत्रता दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विशेष अनुमति याचिका (SLP) का निपटारा करते हुए कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दोपहर 1 बजे या लंच के तुरंत बाद सुनवाई का अनुरोध किया जा सकता है. अब इस पूरे मामले में अगली अहम सुनवाई हाईकोर्ट में होने की संभावना है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं.  

न्यूजीलैंड से FTA समझौते में आम भारतीय के लिए बड़ी राहत, 5000 वीजा और 0 ड्यूटी का फायदा

नईदिल्ली  कल तक जो सिर्फ फाइलों का हिस्सा था आज वो हकीकत बन चुका है. दिल्ली और वेलिंगटन के बीच समुद्र की दूरियां अब व्यापार के सेतु से सिमट गई हैं। जब दुनिया के बड़े-बड़े देश ट्रेड वॉर और मंदी के साये में दुबके हैं, तब भारत ने महज 270 दिनों के भीतर न्‍यूजीलैंड के साथ वो महाकरार कर लिया है जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तहलका मचा दिया है। यह सिर्फ सरकारों के बीच का हाथ मिलाना नहीं है बल्कि भारत के उस मध्यमवर्गीय युवा के सपनों की उड़ान है जो विदेश में करियर बनाना चाहता है और उस छोटे उद्यमी की हिम्मत है जो अपना सामान दुनिया के कोने-कोने में बेचना चाहता है। 5000 वीजा का वो ब्रह्मास्त्र और जीरो ड्यूटी की वो चाबी अब आपके हाथ में है। आइए, इसे बहुत आसान भाषा में समझते हैं।  समझौते की 5 सबसे बड़ी ताकत · 5,000 वीजा का ‘एक्सप्रेस-वे’: अब हर साल कम से कम 5,000 ‘Temporary Employment Entry Visa’ की गारंटी मिलेगी. इसके तहत स्किल्ड प्रोफेशनल्स 3 साल तक न्यूजीलैंड में रहकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगे।  · 100% ड्यूटी फ्री एक्सेस: अब न्यूजीलैंड के बाजार में ‘मेड इन इंडिया’ का डंका बजेगा. भारत से जाने वाले टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामान पर अब जीरो ड्यूटी लगेगी, जिससे भारतीय व्यापारियों का मुनाफा कई गुना बढ़ जाएगा।  · $20 बिलियन का ‘इन्वेस्टमेंट बूस्टर’: अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड भारत में 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करेगा जिससे भारत के बुनियादी ढांचे और स्टार्टअप्स को नई उड़ान मिलेगी।  · किसानों के लिए ‘कीवी’ तकनीक: केवल व्यापार ही नहीं बल्कि अब न्यूजीलैंड के विशेषज्ञ भारतीय किसानों को कीवी, सेब और शहद के उत्पादन में वैश्विक स्तर की तकनीक सिखाएंगे. यह साझेदारी भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगी।  · शराब और वाइन पर रियायत: भारत से जाने वाली वाइन और स्पिरिट्स को वहां ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी, जबकि न्यूजीलैंड की वाइन पर भारत में मिलने वाली रियायतें 10 वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ाई जाएंगी।  कैसे संभव हुआ यह ‘एक्सप्रेस’ एग्रीमेंट? आमतौर पर फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने में वर्षों का समय लगता है लेकिन न्यूज़ीलैंड के साथ यह महज 9 महीनों में पूरा हो गया. इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित रहे: · रणनीतिक तालमेल: न्यूज़ीलैंड की कृषि और डेयरी विशेषज्ञता और भारत की विशाल मार्केट और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता एक-दूसरे की पूरक (Complementary) हैं।  · चीन से हटकर विकल्प की तलाश: दोनों देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए चीन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं. यह साझा सुरक्षा और आर्थिक हित इस समझौते की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति बना।  · विश्वास की नींव: पीयूष गोयल के नेतृत्व में भारतीय टीम ने पिछले साढ़े तीन साल में 7 समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. यह ‘स्पीड’ भारत के नए वर्क कल्‍चर को दर्शाती है, जहां जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए डेडलाइन पर काम किया गया।  पाइपलाइन में और क्या है? न्यूज़ीलैंड तो बस शुरुआत है. भारत का असली लक्ष्य दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ सीधा व्यापारिक गलियारा बनाना है: · यूरोपीय संघ (EU) और अमेरिका: आने वाले कुछ महीनों में इन दो दिग्गजों के साथ समझौते होने की उम्मीद है. यह भारत के लिए अब तक की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत होगी. ईयू के साथ जनवरी में मदर ऑफ ऑल डील हुई थी. इसके पूरी तरह से लागू होने की प्रक्रियाएं जारी हैं।  · 9 समझौतों का जादुई आंकड़ा: इन समझौतों के बाद भारत के कुल 9 FTA हो जाएंगे. ये कोई साधारण देश नहीं बल्कि 38 विकसित देश होंगे।  · ग्लोबल GDP पर प्रभाव: इसके पूरा होते ही भारत की पहुंच दुनिया के लगभग दो-तिहाई व्यापार और 65-70% वैश्विक जीडीपी तक सीधे तौर पर हो जाएगी।  विकसित भारत 2047 के लिए यह क्यों जरूरी है? 1. मार्केट एक्सेस: भारतीय किसानों, कारीगरों और MSMEs को अब ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह बनाने के लिए ऊंचे टैक्स (Tariffs) का सामना नहीं करना पड़ेगा।  2. निवेश का प्रवाह: न्यूज़ीलैंड का $20 बिलियन का वादा केवल शुरुआत है. अमेरिका और EU के साथ समझौते से भारत में अरबों डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आएगा।  3. सर्विस सेक्टर की ताकत: भारत के आईटी और सर्विस सेक्टर के युवाओं के लिए इन विकसित देशों में काम करने और सेवा देने के रास्ते और आसान हो जाएंगे।  सवाल-जवाब न्यूज़ीलैंड के साथ FTA इतनी जल्दी (9 महीनों में) कैसे पूरा हो गया? यह दोनों देशों के बीच साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, विश्वास और चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीतिक जरूरत की वजह से संभव हुआ. पीयूष गोयल ने इसे “भरोसे और मजबूत रिश्तों” का परिणाम बताया है।  क्या भारत का अमेरिका के साथ भी कोई समझौता होने वाला है? जी हाँ, वाणिज्य मंत्री के अनुसार आगामी कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ दो बड़े समझौते पाइपलाइन में हैं।  इन 9 FTA समझौतों का भारत की जीडीपी पर क्या प्रभाव पड़ेगा? इन समझौतों के बाद भारत की पहुंच दुनिया की लगभग 65-70% ग्लोबल जीडीपी तक हो जाएगी, जिससे भारत के एक्सपोर्ट में भारी बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था में तेज उछाल आने की उम्मीद है।  इस समझौते से आम युवाओं को क्या फायदा होगा? यह FTA स्टार्टअप्स, डिजिटल इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी सेक्टर में नए मौके पैदा करेगा. साथ ही, युवाओं के लिए ग्लोबल मार्केट में कौशल और प्रतिभा दिखाने के रास्ते खुलेंगे।   

भारत का रक्षा खर्च 8.66 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा, ऑपरेशन सिंदूर का प्रभाव

  नई दिल्ली स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने 27 अप्रैल 2026 को अपनी नई रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के अनुसार साल 2025 में पूरी दुनिया का सैन्य खर्च रिकॉर्ड 28.87 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. यह 2024 की तुलना में 2.9 प्रतिशत ज्यादा है. दुनिया भर में लगातार संघर्ष और युद्ध बढ़ रहे हैं, इसलिए हर देश अपनी सुरक्षा के लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहा है. यह 11वां साल है जब दुनिया का सैन्य खर्च लगातार बढ़ा है।  भारत 2025 में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश रहा. भारत ने अपना सैन्य खर्च 8.9 प्रतिशत बढ़ाकर 8.66 लाख करोड़ रुपये कर लिया. इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह मई 2025 में पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर था।  इस ऑपरेशन के बाद भारत ने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और आधुनिक हथियारों की खरीद तेज कर दी। पाकिस्तान का रक्षा खर्च भी 11 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.12 लाख करोड़ रुपये हो गया।  मध्य पूर्व में खर्च लगभग स्थिर मध्य पूर्व का सैन्य खर्च 2025 में 2.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2024 से सिर्फ 0.1% ज्यादा है. इजरायल का खर्च 4.9% घटकर 4.54 लाख करोड़ रुपये रह गया क्योंकि जनवरी 2025 में हमास के साथ संघर्ष विराम हो गया था. लेकिन तुर्की का खर्च 7.2% बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया. ईरान का खर्च दूसरी बार घटा और 5.6% कम होकर 69,560 करोड़ रुपये रह गया।  दुनिया के टॉप तीन देश: अमेरिका, चीन और रूस दुनिया के सबसे ज्यादा रक्षा खर्च करने वाले तीन देश अमेरिका, चीन और रूस हैं. इन तीनों ने मिलकर 2025 में 13.91 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो पूरी दुनिया के सैन्य खर्च का 51 प्रतिशत है. अमेरिका ने 2025 में लगभग 8.97 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो 2024 से 7.5 प्रतिशत कम है।  मुख्य वजह यह थी कि साल भर में यूक्रेन को नई सैन्य मदद नहीं दी गई. लेकिन अमेरिका ने अपने परमाणु और सामान्य हथियारों में निवेश बढ़ाया ताकि चीन को इंडो-पैसिफिक में रोका जा सके।  यूरोप में 14% की भारी बढ़ोतरी 2025 में यूरोप का सैन्य खर्च सबसे तेजी से बढ़ा. यह 14% बढ़कर 8.12 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. रूस का खर्च 5.9% बढ़कर 1.79 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो उसके कुल जीडीपी का 7.5% है. यूक्रेन ने 20% बढ़ोतरी के साथ 7.9 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जो उसके जीडीपी का 40% है।  NATO के 29 यूरोपीय देशों ने कुल 5.25 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. जर्मनी का खर्च 24 प्रतिशत बढ़कर 1.07 लाख करोड़ रुपये हो गया. स्पेन का खर्च तो 50 प्रतिशत बढ़कर 3.78 लाख करोड़ रुपये हो गया।  मध्य पूर्व में खर्च लगभग स्थिर मध्य पूर्व का सैन्य खर्च 2025 में 2.05 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 2024 से सिर्फ 0.1% ज्यादा है. इजरायल का खर्च 4.9% घटकर 4.54 लाख करोड़ रुपये रह गया क्योंकि जनवरी 2025 में हमास के साथ संघर्ष विराम हो गया था. लेकिन तुर्की का खर्च 7.2% बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये हो गया. ईरान का खर्च दूसरी बार घटा और 5.6% कम होकर 69,560 करोड़ रुपये रह गया।  एशिया और ओशिनिया में सबसे तेज बढ़ोतरी एशिया और ओशिनिया में सैन्य खर्च 8.1 प्रतिशत बढ़कर 6.40 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. यह 2009 के बाद सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी है. चीन ने 7.4 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 3.16 लाख करोड़ रुपये खर्च किए. जापान का खर्च 9.7 प्रतिशत बढ़कर 5.85 लाख करोड़ रुपये हो गया. ताइवान ने 14 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 1.71 लाख करोड़ रुपये खर्च किए।  मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. इसके बाद भारत सरकार ने रक्षा खरीद को बहुत तेज कर दिया. खासतौर पर ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम, एयर डिफेंस और आधुनिक सैन्य प्लेटफॉर्म्स पर जोर दिया गया. SIPRI रिपोर्ट साफ बताती है कि भारत अब अपनी सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए लगातार खर्च बढ़ा रहा है।  दुनिया क्यों बढ़ा रही है रक्षा खर्च? SIPRI की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में संघर्ष बढ़ रहे हैं – यूक्रेन-रूस युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव, चीन-ताइवान की स्थिति और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव. हर देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहा है. 2026 में अमेरिका का खर्च और बढ़ने की उम्मीद है।  भारत का 8.66 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट दिखाता है कि देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आधुनिक हथियारों को प्राथमिकता दे रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बढ़ोतरी भारत की मजबूत रक्षा नीति का प्रमाण है।  SIPRI की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया में संघर्ष बढ़ रहे हैं – यूक्रेन-रूस युद्ध, मध्य पूर्व में तनाव, चीन-ताइवान की स्थिति और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव. हर देश अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च कर रहा है. 2026 में अमेरिका का खर्च और बढ़ने की उम्मीद है।  भारत का 8.66 लाख करोड़ रुपये का रक्षा बजट दिखाता है कि देश अपनी सीमाओं की सुरक्षा और आधुनिक हथियारों को प्राथमिकता दे रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह बढ़ोतरी भारत की मजबूत रक्षा नीति का प्रमाण है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 अप्रैल को सूपखार में करेंगे भैंस पुनर्स्थापन का शुभारंभ

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि चीता पुनर्स्थापना की ऐतिहासिक सफलता के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। प्रदेश में एक सदी से अधिक समय से विलुप्त हो चुकी जंगली भैंस (वाइल्ड बफेलो) प्रजाति की पुनर्स्थापना की रणनीति अब साकार हो रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 28 अप्रैल को बालाघाट जिले के सूपखार एवं टोपला क्षेत्र में कार्यक्रम के अंतर्गत जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री सूपखार में 4 जंगली भैंसों को उनके नए प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे। इनमें 3 मादा और एक नर जंगली भैंसा शामिल है। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री  उदय प्रताप सिंह, अधिकारीगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहेंगे। इस पहल से भैंस प्रजाति के संरक्षण के साथ ही राज्य का वन पारिस्थितिकी तंत्र भी सशक्त बनेगा। काजीरंगा से कान्हा तक: ऐतिहासिक ट्रांसलोकेशन इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत असम के काजीरंगा से जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व लाया जा रहा है। पहले चरण में 4 भैंसों का दल अपनी यात्रा प्रारंभ कर चुका है। कुल 50 भैंसों के समूह को ‘फाउंडर पॉपुलेशन’ के रूप में लाने का लक्ष्य निर्धारित है। इस सीजन में 8 भैंसों को स्थानांतरित किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अनुभवी पशु-चिकित्सकों की निगरानी में वैज्ञानिक तरीके से संपन्न की जा रही है। एमपी–असम के बीच वन्यजीव सरंक्षण और जैव विविधता सहयोग का विस्तार इस परियोजना के साथ ही मध्यप्रदेश और असम के बीच वन्यजीव आदान-प्रदान का नया अध्याय भी जुड़ रहा है। असम से गैंडे (राइनो) के दो जोड़े मध्यप्रदेश लाए जाएंगे, जिन्हें भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा। इसके बदले में मध्यप्रदेश, असम की मांग के अनुसार 3 बाघ और 6 मगरमच्छों का स्थानांतरण करेगा। इस पर गुवाहाटी में मुख्यमंत्री डॉ. यादव और असम के मुख्यमंत्री  हिमंता विश्व सरमा के बीच हुई बैठक में सहमति बनी थी। ‘चीते के बाद अब भैंस’-जैव-विविधता को समृद्ध बनाने की एक और पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि चीता पुनर्स्थापना के बाद अब जंगली भैंसों की वापसी से प्रदेश की जैव-विविधता में एक नया आयाम जुड़ेगा। यह पहल एक प्रजाति के संरक्षण के प्रयास के साथ ही प्रदेश के वन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश पहले ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है। जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन इस गौरव को और सुदृढ़ करेगा। महत्वपूर्ण है यह पुनर्स्थापन मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की आबादी लगभग 100 वर्ष पहले समाप्त हो गई थी। कान्हा के सूपखार क्षेत्र में 1979 के आसपास जंगली भैसा देखा गया था। अत्यधिक शिकार, मानव हस्तक्षेप, आवास का क्षरण और घास के मैदानों का नष्ट होना इसके प्रमुख कारण रहे। वर्तमान में इनकी प्राकृतिक आबादी मुख्य रूप से असम में सीमित है, जबकि छत्तीसगढ़ में इनकी संख्या अत्यंत कम है। कान्हा सबसे उपयुक्त प्राकृतिक आवास भारतीय वन्यजीव संस्थान (देहरादून) द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे उपयुक्त पाया गया है। यहाँ के विस्तृत घासभूमि क्षेत्र, पर्याप्त जल स्रोत और न्यूनतम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। प्रकृति संतुलन की दिशा में निर्णायक पहल सूपखार में जंगली भैंसों को छोड़े जाने के साथ यह ‘वाइल्ड-टू-वाइल्ड’ पुनर्स्थापना परियोजना एक नए चरण में प्रवेश करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे कान्हा की घासभूमि पारिस्थितिकी को मजबूती मिलेगी और जैव-विविधता संतुलन को नया जीवन मिलेगा। यह पहल मध्यप्रदेश वन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में संचालित एक और ऐतिहासिक संरक्षण अभियान है, जो आने वाले समय में देश के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित होगा।  

समय पर जानकारी न देने का तर्क खारिज, क्लेम रोकने पर 80 हजार का भुगतान आदेश

भोपाल स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में जिला उपभोक्ता आयोग में उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए इलाज में खर्च राशि ब्याज सहित देने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला इसलिए खास माना जा रहा है, क्योंकि संबंधित बीमा एक सामाजिक संस्था के माध्यम से देशभर के जैन समुदाय के लिए सामूहिक रूप से कराया गया था। जब उपभोक्ता के पिता को इलाज के बाद क्लेम राशि नहीं मिली, तो उसने बीमा कंपनी के साथ-साथ संस्था के खिलाफ भी याचिका दायर किया। ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना और इलाज का खर्च दरअसल, भोपाल के पटेल नगर निवासी सौरभ जैन ने जिला उपभोक्ता आयोग क्रमांक-2 में मुंबई स्थित बीमा कंपनी और जैन इंटरनेशनल संस्था के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सौरभ के अनुसार, संस्था द्वारा जैन समाज के सदस्यों के लिए ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस योजना चलाई जा रही थी। उन्होंने “खुशहाल परिवार योजना” के तहत वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक नियमित प्रीमियम जमा करते हुए परिवार के चार सदस्यों के लिए 10 लाख रुपये का बीमा लिया था।  

बारां से होते हुए मनोहरथाना में दिखा चीता, वन विभाग अलर्ट

झालावाड़ कूनो से निकला चीता KP-3 राजस्थान में दस्तक दे चुका है. बारां होते हुए चीते की एंट्री झालावाड़ जिले के मनोहरथाना इलाके में हुई, जिससे ग्रामीणों में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल है. गांव के लोग डर के साए में जी रहे हैं. व‍न व‍िभाग की टीम मॉनिटरिंग कर रही है.   चंदीपुर रेंज में पहुंचा चीता कूनो नेशनल पार्क का चीता KP-3 बारां जिले के शेरगढ़ और हरनावदाशाहजी क्षेत्र से गुजरते हुए झालावाड़ जिले की मनोहरथाना चंदीपुर रेंज में पहुंचा. शाम के समय चीते की मूवमेंट 4 ग्राम पंचायत अर्जुनपुरा, खेरखेड़ा, शोरती और चंदीपुर में देखी गई. इन गांवों से होते हुए चीता पचेटा गांव तक पहुंचा. ग्रामीणों ने देखा चीता   आशंका जताई जा रही है कि चीता KP-3 मध्य प्रदेश के गुना जिले की ओर बढ़ गया है. स्थानीय ग्रामीणों ने चीते की हलचल देखे जाने की पुष्टि की है.  ग्रामीणों में डर का माहौल है, वहीं लोग सतर्क भी नजर आ रहे हैं. वन विभाग की टीम की नजर वन विभाग से मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, कूनो नेशनल पार्क की स्पेशल ट्रैकिंग टीम और मनोहर थाना वन रेंज की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं. चीते की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है.

16 साल के दलित बच्चे को थर्ड डिग्री, जयपुर अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती

 भिवाड़ी राजस्थान के भिवाड़ी में खाकी एक बार फिर सवालों में घिरती नजर आ रही है. यहां यूआईटी थाने में एक 16 वर्षीय नाबालिग दलित बालक के साथ पुलिस कस्टडी में बर्बरता और थर्ड डिग्री यातना देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. पुलिस की कथित पिटाई से मासूम की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे जयपुर के निम्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है. भारी जन-आक्रोश और रातभर चले धरने के बाद पुलिस ने आरोपी थाना प्रभारी दारा सिंह सहित चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. घर से जबरन उठाकर ले गए   परिजनों का आरोप है कि 21 अप्रैल को सिपाही गोपाल और अन्य पुलिसकर्मी नाबालिग को उसके घर से जबरन उठाकर ले गए थे. उस वक्त बच्चा पूरी तरह स्वस्थ था. बाद में पीड़ित के चचेरे भाई को थाना प्रभारी का फोन आया जिस पर बच्चे ने रोते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगाई. अगले दिन जब परिवार थाने पहुंचा तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया. दोपहर में अचानक फोन आया कि बच्चा अस्पताल में भर्ती है और उसका आधार कार्ड लेकर पहुंचें. जब परिजन पहुंचे तो मासूम बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर था. वीडियो डिलीट कराने और मामले को दबाने का आरोप पीड़ित परिवार ने बताया कि जब उन्होंने अस्पताल में बच्चे की हालत की वीडियो बनाने की कोशिश की तो थाना प्रभारी दारा सिंह और पुलिसकर्मी पवन यादव ने उन्हें धमकाया और जबरन वीडियो डिलीट करवा दिए. आरोप है कि पुलिस इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी. यहां तक कि शुरुआत में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने से भी मना कर दिया था. भारी तनाव के बीच रात 1 बजे दर्ज हुई FIR पूर्व विधायक संदीप यादव और ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बाद भिवाड़ी एसपी ब्रजेश उपाध्याय मौके पर पहुंचे. तनाव बढ़ता देख एसपी के निर्देश पर रात करीब 1 बजे मुकदमा दर्ज किया गया. इस FIR में थाना प्रभारी दारा सिंह, सिपाही गोपाल, गोविंद और पवन यादव को नामजद किया गया है. मामले की जांच एससी एसटी सेल के आरपीएस अधिकारी शीशराम मीणा को सौंपी गई है.

सुखबीर सिंह बादल के बयानों पर सख्त कार्रवाई की मांग, SGPC प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन

अमृतसर में सोमवार को सिख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त साहिब पर उस समय गंभीर और संवेदनशील माहौल देखने को मिला जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल मास्टर मिठू सिंह काहनेके के नेतृत्व में वहां पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल ने जत्थेदार साहिब को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपते हुए शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और उनके खिलाफ सख्त धार्मिक कार्रवाई की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने अपने ज्ञापन में आरोप लगाया कि सुखबीर सिंह बादल द्वारा दिए गए बयान सिख मर्यादा, परंपराओं और धार्मिक अनुशासन के खिलाफ हैं, जिससे पूरे पंथ की गरिमा को ठेस पहुंची है। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि अकाल तख्त साहिब के आदेशों को साजिश बताना बेहद गंभीर और अस्वीकार्य कदम है, जिसे किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सिख पंथ की सर्वोच्च मर्यादा का हवाला मीडिया से बातचीत करते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने सिख इतिहास के कई उदाहरणों का उल्लेख किया, जिसमें बताया गया कि जब भी किसी ने पंथिक नियमों का उल्लंघन किया, तो उसने अकाल तख्त साहिब के सामने पेश होकर अपनी गलती स्वीकार की और सजा को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल अनुशासन नहीं बल्कि सिख पंथ की आस्था और सम्मान का मूल आधार है। प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि यदि इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह गलत संदेश देगा और भविष्य में अकाल तख्त साहिब के आदेशों की अनदेखी करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। ‘तनखैया’ घोषित करने की जोरदार मांग इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और गंभीर मांगपत्र यह रहा कि सुखबीर सिंह बादल को “तनखैया” घोषित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि केवल ऐसी सख्त धार्मिक कार्रवाई ही पंथ की मर्यादा और अनुशासन को बनाए रख सकती है। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि पूरी सिख परंपरा की गरिमा से जुड़ा हुआ है। SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल इस विवाद के बीच SGPC अध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि 2 दिसंबर 2024 को अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी आदेशों का पालन सुनिश्चित करना SGPC नेतृत्व की जिम्मेदारी थी, लेकिन इसमें गंभीर लापरवाही बरती गई। इसी आधार पर मांग की गई कि SGPC अध्यक्ष को भी अकाल तख्त साहिब में तलब किया जाए और उनसे पूरी जवाबदेही तय की जाए। पंथिक एकता बनाम राजनीतिक टकराव इस पूरे घटनाक्रम ने सिख पंथ के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक तरफ पंथिक मर्यादा और अनुशासन की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक टकराव के रूप में भी देखा जा रहा है। धार्मिक संस्थाओं की भूमिका और राजनीतिक नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी इस विवाद को और जटिल बना रही है। सख्त चेतावनी और भविष्य की चिंता प्रतिनिधिमंडल ने अंत में चेतावनी दी कि यदि अकाल तख्त साहिब के आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह एक खतरनाक परंपरा स्थापित कर सकता है, जिससे भविष्य में धार्मिक संस्थाओं की शक्ति और सम्मान दोनों पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पंथ की एकता और अनुशासन बनाए रखने के लिए कठोर निर्णय लेना अब अनिवार्य हो गया है।

खुशियों की दावत में मातम: बिरयानी-तरबूज खाने के बाद परिवार पर टूटा मौत का साया

देश  मुंबई के पायधुनी इलाके में एक ही परिवार के चारों सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। शनिवार रात परिवार के साथ बिरयानी की दावत करने के कुछ घंटों बाद ही एक परिवार के चार सदस्यों की फूड पॉइजनिंग से मौत हो गई। महज 12 घंटे के अंदर माता-पिता और उनकी दोनों बेटियों की मौत हो से सभी सकते में आ गये। मृतकों की पहचान अब्दुल्लाह अब्दुल कादर, उनकी पत्नी नसरीन, बड़ी बेटी आयशा और छोटी बेटी जैनब के रूप में हुई है। कैसे हुई चारों की मौत? अब्दुल्लाह मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान चलाते थे। परिवार ने शनिवार रात करीब 10:30 बजे पांच अन्य रिश्तेदारों के साथ बिरयानी की दावत की थी। घर लौटने के बाद रात करीब 1 बजे उन्होंने तरबूज खाया। रविवार तड़के करीब 5 बजे पूरे परिवार को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हुई। हालत बिगड़ने पर पड़ोस के डॉक्टर जियाद कुरैशी ने उन्हें देखा और तुरंत JJ अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टर कुरैशी ने बताया, 'वे बहुत बुरी हालत में थे। उल्टी और दस्त के साथ थकान भी थी। अस्पताल जाते समय उन्होंने बताया कि उन्होंने तरबूज खाया था।' जांच में जुटी पुलिस  अस्पताल पहुंचने के बाद छोटी बेटी जैनब की सुबह करीब 10:15 बजे मौत हो गई। इसके कुछ देर बाद मां नसरीन और बड़ी बेटी आयशा भी इलाज के बावजूद नहीं बच सकीं। पिता अब्दुल्लाह की मौत रात करीब 10:30 बजे हुई। पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ का केस दर्ज कर लिया है। पोस्टमॉर्टम के दौरान शवों के सैंपल लिए गए हैं। आधा खाया हुआ तरबूज भी लैब टेस्टिंग के लिए भेजा गया है। मुंबई पुलिस के डिप्टी कमिश्नर प्रवीण मुंडे ने कहा कि फॉरेंसिक टीम और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विभाग जहर या मिलावट की जांच कर रहा है। JJ अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बैक्टीरिया और इंफेक्शन की जांच हो रही है। फिलहाल हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट का इंतजार है।