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हाईकोर्ट का फैसला: Bhojram Nag की जीत बरकरार, निर्वाचन चुनौती देने वाली याचिका खारिज

बिलासपुर. सांसद भोजराज नाग को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कांकेर से निर्वाचित सांसद भोजराज नाग पर ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए तत्कालीन उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने निर्वाचन रद्द करने याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मशीनों की दोबारा जांच के लिए कोई निर्देश तब तक जारी नहीं किया जा सकता, जब तक मौखिक या डॉक्यूमेंट के ज़रिए गड़बड़ी के बारे में कोई सबूत रिकॉर्ड पर न रखा गया हो. याचिका खारिज कर याचिकाकर्ता को डॉक्यूमेंट्री सबूत रिकॉर्ड करने के बाद नई एप्लीकेशन फाइल करने की छूट दी गई है. हाईकोर्ट में यह एप्लीकेशन कांकर से सांसद पद के उम्मीदवार बीरेश ठाकुर ने डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर, रिटर्निंग ऑफिसर को 26 अप्रैल 2024 को कांकेर पार्लियामेंट्री सीट के लिए हुए इलेक्शन में इस्तेमाल हुई ईवीएम (बैलेट यूनिट, कंट्रोल यूनिट, वीवीपेट यूनिट) की चेकिग और वेरिफिकेशन करने की इजाज़त देने के लिए एक ऑर्डर जारी करने के लिए फाइल की है. इस इलेक्शन पिटीशन में पिटीशनर ने आरोप लगाया है कि इलेक्शन प्रोसेस रिटîनग ऑफिसर ने गलत इरादे से किया था, और इसमें कई तरह की गड़बड़ियां और गलत काम किए, जिससे इलेक्शन के नतीजे पर काफी असर पड़ा. पिटीशनर ने आरोप लगाया है कि दूसरी रैंडमाइजेशन रिपोर्ट में मशीन नंबर वीवीपेट यूनिट और अलग-अलग असेंबली सीटों गुंडरदेही नंबर 61, सिहावा नंबर 56, संजरीबालोड नंबर 59, डोंडी लोहारा (एसटी ) नंबर 60, और केशकाल नंबर 82 के पोलिग स्टेशनों के फॉर्म 17सी में मशीन नंबर में कुछ अंतर हैं. गिनती में गड़बड़ी के सबूत लाएं बताई गई कानूनी स्थिति और इलेक्शन पिटीशन में दी गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि इस समय ईवीएम मशीनों की दोबारा जांच के लिए कोई निर्देश तब तक जारी नहीं किया जा सकता जब तक पार्टियों द्बारा मौखिक या डॉक्यूमेंट्री सबूत के ज़रिए गड़बड़ी के बारे में कोई सबूत पहली नज़र में रिकॉर्ड पर न रखा गया हो. याचिका को खारिज कर पिटीशनर को कांकेर संसदीय क्षेत्र नंबर 11 के इन विधानसभा क्षेत्रों में वोटों की गिनती में गड़बड़ी के बारे में कुछ मौखिक या डॉक्यूमेंट्री सबूत रिकॉर्ड करने के बाद नई एप्लीकेशन फाइल करने की छूट दी है.

एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में बड़ी लापरवाही, 240 CCTV कैमरे हुए बंद

बेंगलुरु आईपीएल 2026 के दौरान बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. दरअसल, 24 अप्रैल को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के हुए मुकाबले से पहले स्टेडियम में लगे सीसीटीवी से छेड़छाड़ की गई, जिससे निगरानी ठप पड़ गई. हालांकि, पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इन लोगों पर स्टेडियम के निगरानी सिस्टम (CCTV) को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. स्टेडियम के 240 से ज्यादा CCTV कैमरे बंद हो गए थे. आरोपियों ने रिकॉर्डिंग यूनिट्स (NVR) और फाइबर ऑप्टिक केबल जैसे जरूरी उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाया. कैमरों के अचानक बंद होने से स्टेडियम की सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा हो गया, जिससे मैच के दौरान कुछ भी अनहोनी हो सकती थी. क्या है पूरा मामला? पुलिस के अनुसार यह पूरी घटना सुरक्षा में एक बड़ी सेंधमारी थी. दोनों आरोपियों की पहचान मंजूनाथ और अब्दुल कलाम के रूप में हुई है, जो आईवीएस डिजिटल सॉल्यूशंस नाम की एक सब-कॉन्ट्रैक्टर कंपनी के लिए काम करते हैं. इसी कंपनी को स्टेडियम में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था संभालने का काम सौंपा गया था. पुलिस ने बताया कि इन दोनों ने एक डी-एक्टिवेटेड एक्सेस कार्ड का इस्तेमाल किया और बिना किसी वैध पास के स्टेडियम के सीसीटीवी सर्वर रूम में घुस गए. उन्होंने सुरक्षा के सभी नियमों को तोड़ दिया. इसके बाद आरोपियों ने सर्वर रूम के अंदर जाकर NVR और फाइबर केबल को काट दिया. इससे स्टेडियम के कई हिस्सों की निगरानी बंद हो गई. इसकी वजह से एंट्री गेट, स्टैंड्स और स्टेडियम के आसपास के इलाकों में लगे कैमरे ठप हो गए, जिससे लाइव मॉनिटरिंग रुक गई. जांच में जुटी पुलिस भले ही कैमरों ने काम करना बंद कर दिया था, लेकिन जैसे ही अधिकारियों को इस गड़बड़ी का पता चला, उन्होंने तुरंत वैकल्पिक इंतजाम कर दिए. इसकी वजह से मैच के दौरान सुरक्षा में कोई बड़ी कमी नहीं आने दी गई. इस मामले में कब्बन पार्क पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर लिया गया है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन लोगों ने ऐसा क्यों किया और इसके पीछे उनका क्या मकसद था. चिन्नास्वामी स्टेडियम आईपीएल के सबसे व्यस्त मैदानों में से एक है. यहां पिछले साल हुई एक दुखद भगदड़ और टिकटों की कालाबाजारी जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई थी. अब सीसीटीवी के साथ हुई इस छेड़छाड़ ने प्रशासन की तैयारी और निगरानी के दावों पर फिर से सवाल उठा दिए हैं. मैच की बात करें तो मैदान के अंदर खेल शानदार रहा. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने गुजरात टाइटंस को हरा दिया. डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी ने बेंगलुरु में अपने घरेलू मैचों में शानदार खेल दिखाया. उन्होंने यहां खेले गए 5 में से 4 मैचों में जीत दर्ज की. अब आरसीबी अपने बाकी बचे ‘होम मैच’ बेंगलुरु के बजाय रायपुर में खेलेगी. यह बदलाव पहले से तय था.

पंजाब सरकार का बड़ा ऐलान: शुक्रवार को सरकारी छुट्टी, सभी स्कूल-कॉलेज और दफ्तर रहेंगे बंद

चंडीगढ़  पंजाब के छात्रों और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बता दें कि पंजाब सरकार ने 1 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है, जिसके चलते पूरे प्रदेश में स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। जानकारी के अनुसार, यह अवकाश मई दिवस के उपलक्ष्य में घोषित किया गया है। हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला यह दिन मजदूरों और श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित होता है। इस निर्णय का असर राज्यभर के शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी विभागों पर पड़ेगा, जहां नियमित कामकाज इस दिन स्थगित रहेगा। हालांकि, आवश्यक सेवाएं जैसे स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। राज्य में हीट वेव को लेकर अलर्ट                                वहीं आपको बता दें कि उत्तर भारत में लगातार बढ़ती गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। पंजाब में भी तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए हीट वेव को लेकर अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार अगले हफ्ते से गर्मी और ज्यादा तीव्र हो सकती है, जिससे खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों पर असर पड़ने की आशंका है। ऐसे में लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।  

चाणक्य नीत,जीवन की 4 बड़ी गलतियां जो बनाती हैं इंसान को दुखी

 आज 27 अप्रैल 2026 का दिन पुरानी बातों को पीछे छोड़कर नई शुरुआत करने की प्रेरणा दे रहा है। यह दिन हमें सिखाता है कि जब हम कड़वाहट और नकारात्मक यादों को जाने देते हैं, तभी जीवन में नई खुशियों के लिए जगह बनती है। चाणक्य नीति में एक महत्वपूर्ण श्लोक है: 'कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम्। कष्टात् कष्टतरं चैव परगेहे निवासनम्।।' इसका अर्थ है – मूर्खता दुखदायी है, जवानी भी कष्टपूर्ण है, लेकिन इन सबसे ज्यादा कष्टदायक है दूसरों के घर में रहना। चाणक्य जी इस श्लोक के जरिए जीवन की चार बड़ी गलतियों की ओर इशारा करते हैं, जो इंसान को दुख और अपमान दोनों देते हैं। मूर्खता सबसे बड़ा कष्ट आचार्य चाणक्य कहते हैं कि मूर्ख होना सबसे बड़ा दुख है। मूर्ख व्यक्ति बार-बार एक ही गलती करता है, सही सलाह नहीं मानता और दूसरों की बातों में आसानी से बहक जाता है। वह अपनी कमियों को नहीं देख पाता, इसलिए जीवन में अपमान और असफलता बार-बार उसके हिस्से में आती है। मूर्खता सिर्फ पढ़ाई की कमी नहीं, बल्कि समझ की कमी है। जो व्यक्ति अपनी गलतियों से नहीं सीखता, वह बार-बार एक ही गड्ढे में गिरता है। जवानी का कष्ट जवानी उत्साह और ऊर्जा का समय है, लेकिन आचार्य चाणक्य इसे भी कष्टदायक बताते हैं। इस उम्र में इंसान अक्सर आवेश में आकर गलत फैसले ले लेता है। गुस्सा, जल्दबाजी, गलत संगत और अहंकार युवावस्था को कष्टपूर्ण बना देते हैं। बहुत से युवा अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल करते हैं और बाद में पछताते हैं। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जवानी में अनुशासन और विवेक रखें। ऊर्जा को सही दिशा दें, पढ़ाई, काम और अच्छी आदतों पर ध्यान केंद्रित करें। बिना सोचे-समझे किए गए काम बाद में जीवन भर का दुख देते हैं। पराए घर में निवास – सबसे कष्टदायक श्लोक में आचार्य चाणक्य दूसरों के घर में रहने पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं। इसका मतलब है दूसरों पर आश्रित होना, उनकी कृपा पर जीना और अपनी स्वतंत्रता खो देना। जब इंसान पराए घर में रहता है, तो उसे बार-बार अपमान सहना पड़ता है। उसकी इज्जत नहीं रहती, फैसले खुद नहीं ले पाता और हर समय दूसरों की मर्जी पर चलना पड़ता है। चाणक्य नीति सिखाती है कि आत्मनिर्भर बनें। अपनी कमाई से जीना सीखें, चाहे शुरुआत में कितना भी संघर्ष हो। स्वतंत्रता से बढ़कर कोई सुख नहीं है। इन गलतियों से बचने के उपाय चाणक्य नीति के अनुसार, इन चार गलतियों से बचने के लिए कुछ सरल उपाय अपनाएं। रोज कुछ नया सीखें, किताबें पढ़ें और अनुभवी लोगों की सलाह लें। जवानी में आवेश को काबू में रखें और सोच-समझकर फैसले लें। आत्मनिर्भर बनें और अपनी कमाई पर भरोसा करें। पुरानी बातों को दिल में न रखें, गलतियों से सीखें और आगे बढ़ें। सुखी जीवन का सार चाणक्य नीति हमें सिखाती है कि दुख और अपमान ज्यादातर अपनी गलतियों से आते हैं। मूर्खता, जवानी का आवेश, पराश्रित जीवन और पुरानी कड़वाहट, ये चार चीजें इंसान को बार-बार कष्ट देती हैं। अगर हम विवेक, अनुशासन और आत्मनिर्भरता अपनाएं, तो जीवन में सुख और सम्मान दोनों मिल सकते हैं। आचार्य चाणक्य की ये नीतियां सदियों पुरानी हैं, लेकिन आज भी उतनी ही सही और उपयोगी हैं।

‘मेरे महबूब कयामत होगी’ गाने के पीछे किसका था हाथ? जानिए गीतकार की कहानी

हिंदी फिल्मों में अपनी आवाज का जादू चलाने वाले सिंगर किशोर कुमार ने कई शानदार गाने गाए। राजेश खन्ना की आवाज उन्हें ही कहा जाता था। किशोर कुमार अपनी गायिकी के साथ एक्टिंग से भी कमाल कर चुके थे। करियर की शुरुआत में उन्होंने कई फिल्मों में एक्टिंग की। खुद के लिए गाने गाए। उनमें से एक 1964 में आई फिल्म मिस्टर एक्स इन बॉम्बे थी। इस फिल्म के हीरो भी किशोर कुमार ही थे। इस फिल्म के सभी गाने जबरदस्त हिट थे। लेकिन ‘मेरे महबूब कयामत होगी आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी’ ने ऑडियंस के बीच एक अलग माहौल बनाया। ये गाना उस दौर में भी हिट था और आज के दौर में भी लोग इसे गुनगुनाते हैं। लेकिन क्या आप इस खूबसूरत गाने को लिखने वाले गीतकार का नाम जानते हैं? मेरे महबूब क़यामत होगी 964 में आई फिल्म मिस्टर एक्स इन बॉम्बे में कुल 6 गाने थे। कहा जाता है कि फिल्म का सबसे पॉपुलर गाना ‘मेरे महबूब कयामत होगी आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी’ पहले कोई दूसरा सिंगर गाने वाला था। लेकिन किशोर कुमार ने कहा कि वो अपने ऊपर फिल्माए गाने खुद गा सकते हैं। और इसके बाद जो हुआ वो इतिहास बन गया। किशोर कुमार ने खुद पर फिल्माए गाने खुद गाए। उनका साथ दोय लता मंगेशकर ने। म्यूजिक तैयार किया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की जोड़ी ने। ये गाना सिंगर और म्यूजिक कंपोजर का पहला गीत बना। इसके बाद इस तिकड़ी ने कई हिट गाने बनाए। ये थे कमाल के गीतकार फिल्म मिस्टर एक्स इन बॉम्बे के सभी गाने आनंद बक्शी और असद भोपाली ने लिखे थे। लेकिन ‘मेरे महबूब कयामत होगी’ के ये बोल आनंद बक्शी की कलम से निकले थे। इस खूबसूरत गाने ने उस दौर में खूब कमाल किया। ये गाना खुद किशोर कुमार का फेवरेट था। उनके बेटे अमित कुमार ने बताया था कि उनके पिता जी अक्सर इसी गाने को सुना करते थे। अमित कुमार ने भी अपनी कई परफॉरमेंस में इस गाने से माहौल खास बना दिया था। फिल्म के सभी गाने मिस्टर एक्स इन बॉम्बे के के कुल 6 गानों में ‘मेरे महबूब कयामत होगी’ के दो वर्जन रिलीज किए गए। इसके अलावा 'रुक जा रोकता है दीवाना', 'चली रे चली गोरी पनिया भरन को चली', 'खूबसूरत हसीना जान-ए जान', 'जान-ए मन', 'अल्लाह करे तू भी आ जाए', 'जुल्मी हमारे संवारिया हो राम'। इन गानों में किशोर कुमार का साथ लता मंगेशकर ने दिया।  

ट्रंप का चेतावनी भरा बयान: ईरानी विदेश मंत्री की रूस यात्रा से भड़के, 3 दिन का वक्त दिया

वाशिंगटन ईरान के विदेश मंत्री की रूस की यात्रा से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भड़क गए हैं। उन्होंने धमकी देते हुए कहा है कि अगर तीन दिन के अंदर ईरान समझौता नहीं करता है तो फिर उसकी तेल की पाइपलाइनों में भयंकर विस्फोट होगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान तेल निर्यात करने के लायक ही नहीं बचेगा। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी की वजह से ईरान जहाजों के जरिए निर्यात नहीं कर पा रहा है। वहीं पाइपलाइन ध्वस्त होने के बाद उसका निर्यात एकदम से बंद हो जाएगा। बता दें कि ईरान के विदेश मंत्री पाकिस्तान से एक बार फिर रूस पहुंचे हैं और वह अब पुतिन से वार्ता करने वाले हैं। रूसी मीडिया ने इसकी पुष्टि की है। ईरानी विदेश मंत्री के रूस दौरे से नाराज ट्रंप? दरअसल ईरान के विदेश मंत्री अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता के लिए पाकिस्तान गए थे। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने से इनकार कर दिया। इसके बाद ईरानी विदेश मंत्री अराघची भी रूस और ओमान की यात्रा पर निकल गए। रूस के दौरे से वह एक बार फिर पाकिस्तान लौटे। उधर ट्रंप ने कहा कि अब उनकी टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी बल्कि जो भी बात होगी, फोन पर ही होगी। ईरान ने भेजा अपना प्रस्ताव ईरान ने एक लिखित प्रस्ताव डोनाल्ड ट्रंप को भेजा था जिसे उन्होंने तुरंत खारिज कर दिया। ट्रंप ने दावा किया कि पहले प्रस्ताव खारिज होने के बाद ईरान ने दूसरा प्रस्ताव भेजा जो कि उससे बेहतर है। उन्होंने कहा कि वार्ता के लिए आने-जाने में सफर बहुत करना पड़ता है और अब सारी बातें फोन पर होंगी। ईरान जब चाहें उन्हें फोन कर सकता है। जानकारी के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्री एक बार फिर रूस चले गए हैं और ईरान का कहना है कि मॉस्को में अब आगे की बातें होंगी। राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा है कि उसकी तेल की पाइपलाइन को इस तरह तबाह किया जाएगा कि दोबारा वह वैसी पाइपलाइन नहीं बना पाएगा। जियो टीवी' ने ईरानी समाचार एजेंसी 'आईएसएनए' के हवाले से बताया कि अराघची ''युद्ध को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के ढांचे पर ईरान के रुख और विचारों'' से अवगत कराएंगे। ग्यारह और बारह अप्रैल को आयोजित शांति वार्ता का पहला दौर संघर्ष में शामिल पक्षों के लिए वांछित परिणाम लाने में विफल रहा। शनिवार को अराघची के ओमान रवाना होने के बाद, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अब ईरान के साथ वार्ता के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएंगे। रविवार को ट्रंप ने दोहराया कि अमेरिकी और ईरानी अधिकारी संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए फोन पर बातचीत कर सकते हैं।

राघव चड्ढा का अटका बिल: अगर पास होता तो AAP की टूटन और BJP में जाने की बात न होती

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा झटका दे चुके हैं. आम आदमी पार्टी में बगावत करने वाले राघव चड्ढा अब भाजपाई हो चुके हैं. उनके साथ छह अन्य सांसद भी आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं. अब वे सभी भाजपा में हैं. राघव चड्ढा आज भले ही दल बदलकर भाजपा में जा चुके हैं. मगर राघव चड्ढा का ही लाया बिल पास हो गया होता तो वह आज आम आदमी पार्टी छोड़कर अलग नहीं हो पाते. न ही वह बगावत कर पाते. राघव चड्ढा की यह खबर सिर्फ एक नेता के पार्टी बदलने की नहीं है. इसमें एक बड़ी विडंबना छिपी है. चार साल पहले राघव चड्ढा ने खुद एक बिल लाया था, जो दल-बदल को बहुत सख्ती से रोकता. अगर वह बिल कानून बन गया होता तो आज राघव चड्ढा की कहानी कुछ और होती।  जी हां, चार साल पहले राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर अगस्त 2022 में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाया था. उस बिल का मकसद दल-बदल कानून को और सख्त बनाना था. वह कानून बन गया होता तो राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर नहीं जा पाते. न ही वह सदन के अपने छह अन्य पार्टी सदस्यों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल हो पाते. दो दिन पहले ही उन्होंने यह घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदन में मौजूद 10 सदस्यों की कुल संख्या में से दो-तिहाई बहुमत होने का हवाला दिया था।  राघव चड्ढा ने चार साल पहले लाया था बिल  खबर के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा का प्रस्तावित बिल कानून बन गया होता तो पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के लिए राघव चड्ढा को अपनी पार्टी के छह नहीं, बल्कि सात सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ती. इतना ही नहीं पार्टी तोड़ने के आरोप में इस मौजूदा टीम पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती।  उस बिल में क्या था? ऐसा इसलिए, क्योंकि संविधान संशोधन बिल में दलबदल विरोधी कानून को और अधिक सख़्त बनाने की मांग की गई थी. यह बिल उन्होंने राज्यसभा में शामिल होने के तीन महीने बाद पेश किया था. इस बिल के तहत पार्टी में वैध रूप से टूट या विभाजन करने के लिए दो-तिहाई नहीं, बल्कि तीन-चौथाई बहुमत की जरूरत होती. इस बिल को राघव चड्ढा ने 5 अगस्त 2022 को एक ‘निजी सदस्य बिल’ के तौर पर सदन में पेश किया था. तब राघव आप चीफ अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी थे।  बिल में क्या मांग की गई थी? ‘विधायकों द्वारा पूरी तरह से लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी करते हुए गलत इरादे से पार्टी बदलने’ का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के प्रस्तावित बिल में संविधान की दसवीं अनुसूची के लिए और भी अधिक सख़्त प्रावधानों के जरिए दलबदल विरोधी नियमों को मजबूत करने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि दसवीं अनुसूची में दलबदल के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े नियम शामिल हैं।  दसवीं अनुसूची में क्या है वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य मिलकर दूसरी पार्टी में चले जाएं तो उन्हें अयोग्य नहीं माना जाता. राघव चड्ढा के बिल ने इसे बढ़ाकर तीन-चौथाई (3/4) कर दिया था. मतलब 10 सदस्यों वाली पार्टी में कम से कम 8 सदस्यों का सहमत होना जरूरी होता. सिर्फ 7 से काम नहीं चलता।  जानिए बिल में क्या-क्या?     इस प्रस्तावित कानून का मकसद संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 में संशोधन करके और दसवीं अनुसूची में बदलाव करके पार्टी के भीतर विलय के लिए ज़रूरी सदस्यों की संख्या को 2/3 से बढ़ाकर 3/4 करके  लोकतंत्र को मज़बूत करना और जन प्रतिनिधियों को राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बजाय जानकार कानून निर्माता बनने में मदद करना था।      बिल में यह भी लिखा था कि अगर कोई सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलता है तो उसे छह साल तक कोई चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी. साथ ही ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ रोकने के लिए अगर कोई सरकार से समर्थन वापस लेता है तो उसे सात दिन के अंदर स्पीकर या चेयरमैन के सामने हाजिर होना पड़ता. अगर वह नहीं करता तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता था।      बिल में साफ लिखा था कि दल-बदल कानून का मकसद विधायकों-सांसदों के खरीद-फरोख्त को रोकना था, लेकिन आज भी यह समस्या बदस्तूर जारी है. दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग हो रहा है. यह हमारे लोकतंत्र पर कलंक है. बिल ने अनुच्छेद 102 और 191 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा था ताकि सांसद या विधायक अयोग्य होने पर सदन की सदस्यता चली जाए।  और यह विडंबना तब राघव चड्ढा ने बिल पेश करते समय कहा था कि जनता ने जिस उम्मीद से विधायकों को चुना है, उसके खिलाफ फ्लोर क्रॉसिंग (दल-बदल) करना गलत है. लेकिन आज वही राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की दो-तिहाई बहुमत का हवाला देकर भाजपा में चले गए हैं. अगर उनका 2022 वाला बिल कानून बन जाता तो आज उन्हें सात सदस्यों (न कि छह) का समर्थन चाहिए होता और पूरी टीम को छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता। 

‘व्हील ऑफ फॉर्च्यून’ फिनाले में भावुक हुए अक्षय कुमार, ट्रिब्यूट वीडियो देख छलके आंसू

अक्षय कुमार के रियलिटी शो 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' को शुरुआत से ही दर्शकों का काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है. अब 27 अप्रैल को शो का ग्रैंड फिनाले होने वाला है. फिनाले एपिसोड को धमाकेदार बनाने के लिए फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन फर्नांडीस ने शिरकत की. लेकिन इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि अक्षय कुमार कैमरे पर ही इमोशनल हो गए. नम हुईं अक्षय की आंखें शो का एक नया प्रोमो वीडियो सामने आया है. फिनाले एपिसोड में मेकर्स ने अक्षय के लिए एक खास 'ट्रिब्यूट वीडियो' तैयार किया, जिसे देखकर खिलाड़ी कुमार अपने आंसू नहीं रोक पाए. नेशनल टीवी पर उनकी आंखें नम हो गईं. ट्रिब्यूट वीडियो में अक्षय की शो में शानदार जर्नी दिखाई गई. वीडियो में शो के दौरान अक्षय के हंसते-खेलते और मस्ती-मजाक के पलों को भी दिखाया गया. साथ में खिलाड़ी कुमार के लिए एक दिल को छू लेने वाला मैसेज भी शेयर किया गया. वीडियो में अक्षय के लिए कहा गया- कल से ये मंच नहीं होगा. लेकिन आपकी मुस्कुराहट याद रहेगी. आपकी शरारतें, नादानियां और शैतानियां याद रहेंगी. आप याद रहेंगे. शायद ही पहले कभी किसी ने अक्षय कुमार को कैमरों पर रोते हुए देखा होगा. अक्षय को इमोशनल देखकर उनके फैंस की आंखें भी भर आई हैं. अक्षय ने मामा को किया इंट्रोड्यूस ट्रिब्यूट वीडियो देखकर अक्षय काफी इमोशनल हो गए. उनकी आंखें नम हो गईं. इमोशनल होते हुए अक्षय ने अपने मामा से भी मिलवाया. मामा को इंट्रोड्यूस करते हुए खिलाड़ी कुमार ने कहा- मेरे मामा जी भी यहां आए हैं, उन्होंने एक भी शो मिस नहीं किया है. वो मुझे बताते हैं- बेटा, जैसे ही रात के 9 बजते हैं, मैं शो देखने बैठ जाता हूं. इस शो को इतना प्यार देने के लिए शुक्रिया इंडिया. फिनाले एपिसोड होगा धमाकेदार फिनाले एपिसोड में फराह खान, भूमि पेडनेकर और जैकलीन संग अक्षय कुमार खूब मस्ती मजाक भी करते दिखेंगे. चारों सितारों ने मिलकर स्टेज पर धमाका करते दिखेंगे. अक्षय और फराह और एक दूसरे को टीज करते हुए भी नजर आएंगे. प्रोमो वीडियो में दोनों का बॉन्ड और खट्टी-मीठी नोकझोंक फैंस को काफी एंटरटेनिंग लग रही है. आप भी मिस मत करिएगा 'व्हील ऑफ फॉर्च्यून' का फिनाले एपिसोड.

फर्जी लिंक से हो रही ठगी, टाटा पावर ने ग्राहकों को किया सतर्क

जमशेदपुर देश भर में बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘वॉट्सऐप स्कैम’ को लेकर टाटा पावर ने अपने ग्राहकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. कंपनी ने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि यह आपकी जमा-पूंजी और निजी डेटा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि ​हाल के दिनों में देखा गया है कि जालसाज ग्राहकों को वॉट्सऐप पर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. इन संदेशों में बिजली कटने का डर दिखाकर या केवाईसी अपडेट करने के बहाने संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं. जैसे ही कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है. उसका फोन हैक होने या बैंक खाते से पैसे चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है. ​ टाटा पावर की ग्राहकों को  सलाह ​कंपनी ने स्पष्ट किया है कि टाटा पावर कभी भी वॉट्सऐप, एसएमएस, कॉल या ईमेल के जरिए आपसे ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड नहीं मांगता है. किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. ये लिंक आपके फोन और व्यक्तिगत डेटा से समझौता कर सकते हैं. ऐसे किसी भी संदेश के जवाब में अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें. ​केवल आधिकारिक ऐप का उपयोग करें. ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. किसी अन्य सोर्स से भेजे गये ऐप डाउनलोड लिंक पर क्लिक न करें. सुरक्षा के लिए ग्राहक इन बातों का कड़ाई से पालन करें. ​ संदिग्ध गतिविधि होने पर क्या करें? ​टाटा पावर ने अपील की है कि यदि आपको कोई संदिग्ध मैसेज प्राप्त होता है या आपके साथ कोई अनधिकृत लेनदेन होता है. तो तुरंत ​हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. ​साइबर पोर्टल नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें. सिर्फ टाटा पावर के आधिकारिक संचार माध्यमों से ही संपर्क करें. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें. आपकी जागरूकता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।