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Haryana News: ग्रामीण जल संरक्षण को बढ़ावा, पंचायतों को मिलेगा दोगुना बजट

चंडीगढ़. हरियाणा की ग्रामीण जल व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने 'ग्रामीण जल संरक्षण अभियान' के तहत पेयजल आपूर्ति और उसके बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायतों के हवाले कर दी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) की नई ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस नीति-2026 के साथ ही अब गांवों में पानी कब आएगा, मोटर कब चलेगी और पाइपलाइन की मरम्मत कैसे होगी, यह सब पंच-सरपंच तय करेंगे। इस कदम का सबसे क्रांतिकारी पहलू वित्तीय प्रोत्साहन है। सरकार ने ऐलान किया है कि पंचायतें जल शुल्क (Water Tax) के रूप में जितना पैसा इकट्ठा करेंगी, सरकार उतनी ही 'मैचिंग ग्रांट' उनके खाते में अलग से डालेगी। यानी गांव के विकास के लिए पंचायतों के पास अब पानी के जरिए दोहरा फंड जमा होगा। इस नई व्यवस्था में प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ा गया है। सरकार ने बिल वसूली के काम में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को प्राथमिकता दी है। अब गांव की महिलाएं घर-घर जाकर पानी के बिल कलेक्ट करेंगी। प्रोत्साहन राशि के तौर पर, वसूली गई कुल रकम का 10 प्रतिशत हिस्सा सीधे इन महिलाओं के बैंक खातों में जाएगा। इससे जहां एक ओर विभाग की वर्षों से लंबित रिकवरी में तेजी आएगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव में ही आत्मनिर्भर बनने का मौका मिलेगा। यह मॉडल न केवल आर्थिक रूप से टिकाऊ है, बल्कि इससे जल प्रबंधन में सामुदायिक भागीदारी भी बढ़ेगी। पंचायतों को अब केवल जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि कानूनी शक्तियां भी दी गई हैं। नए नियम के मुताबिक, किसी भी घर में नया पानी या सीवर कनेक्शन देना हो, तो अब बिस्वास (BISWAS) पोर्टल के जरिए पंचायतों के पास ही आवेदन करना होगा। इसके अलावा, गांव में चल रहे अवैध कनेक्शनों को काटने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए जुर्माना लगाने का अधिकार भी पंचायत के पास होगा। सरकार का लक्ष्य है कि हर ग्रामीण को प्रतिदिन कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल मिले। शिकायतों के निपटारे के लिए अब ग्रामीणों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पंचायत स्तर पर ही समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

वन क्षेत्रों में जल प्रबंधन से भीषण गर्मी में वन्य जीवों को मिलेगी राहत

भोपाल भीषण गर्मी के बीच मध्यप्रदेश में वन्य जीवों को पेयजल के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए ‘जल गंगा संवर्धन अभियान 2026’ के अंतर्गत वन क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जल प्रबंधन के कार्य किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा जंगलों में जल स्रोतों का निर्माण, संरक्षण और पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे वन्य जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान' ‘जल ही जीवन है’ की भावना को साकार करते हुए न केवल मानव जीवन, बल्कि वन्यजीवों और प्रकृति के संतुलन को भी सुरक्षित करने की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में उभर रहा है। वन्य जीवों के लिए विशेष जल प्रबंधन अभियान के अंतर्गत जंगलों में तालाब, स्टॉप डैम, झिरिया और अन्य जल संरचनाओं का निर्माण एवं गहरीकरण किया जा रहा है। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु तालाबों के निर्माण, गहरीकरण, जल स्रोतों के विकास तथा पुराने स्रोतों के जीर्णोद्धार जैसे कार्य प्रगति पर हैं। कई स्थानों पर नए जल स्रोतों का निर्माण किया गया है, जबकि मौजूदा जल संरचनाओं की मरम्मत और पुनर्जीवन का कार्य भी व्यापक स्तर पर जारी है। इससे गर्मी के मौसम में वन्य जीवों को सतत जल उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। वन क्षेत्रों में वन्य जीवों के लिये पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के कार्य क्र. कार्य का विवरण निर्धारित लक्ष्य उपलब्धि वित्तीय लक्ष्य (₹) वित्तीय उपलब्धि (₹) 1 निर्माण हेतु तालाब (संख्या) 11 6 77,96,000 35,96,000 2 तालाब गहरीकरण (संख्या) 3 0.5 10,00,000 0 3 निर्माण सॉसर (संख्या) 19 0.5 10,80,000 0 4 स्टॉपडैम निर्माण (संख्या) 1 0 20,00,000 10,00,000 5 झिरिया निर्माण (संख्या) 22 0 0 0 6 डाइक निर्माण (संख्या) 0 0 0 0 7 वाटर लिफ्टिंग सिस्टम (किमी) 0 0 0 0 8 मौजूदा झिरिया की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार 50 40 5,00,000 4,00,000 कुल       1,23,76,000 49,96,000 पारिस्थितिकी संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम वन क्षेत्रों में जल स्रोतों का निर्माण न केवल वन्य जीवों की प्यास बुझाने का कार्य कर रहा है, बल्कि इससे जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को भी मजबूती मिल रही है। जल उपलब्धता बढ़ने से वन्य जीवों का विचलन कम होगा और मानव–वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आने की संभावना है। जन–आंदोलन के रूप में जल संरक्षण 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन का एक राज्य स्तरीय जन–आंदोलन है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अभियान के तीसरे चरण का शुभारंभ 19 मार्च 2026 को गुड़ी पड़वा (नव संवत्सर) के अवसर पर इंदौर से किया। इस अभियान को ‘जनशक्ति से नवभक्ति’ के मंत्र से जोड़ते हुए आमजन को श्रमदान के माध्यम से जल संरक्षण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 100 दिवसीय राज्य व्यापी अभियान यह अभियान 19 मार्च से 30 जून 2026 तक, लगभग 100 दिनों तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के आसपास व्यापक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इस अभियान में 18 विभागों की सहभागिता सुनिश्चित की गई है, जिसमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को नोडल तथा नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग को सह–नोडल विभाग बनाया गया है। 2500 करोड़ रुपये के कार्य और बड़े लक्ष्य अभियान के अंतर्गत इस वर्ष लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से जल संरक्षण के कार्य किए जा रहे हैं। इसमें 10 हजार से अधिक चेक डैम और स्टॉप डैम की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अभियान में पुराने तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई , नदियों (कोलांस, शिप्रा, बेतवा) के संरक्षण के लिए कार्य योजना, जल स्रोतों के आसपास बड़े पैमाने पर पौधारोपण (लगभग 28 लाख पौधे) और अतिक्रमण हटाने और वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किये जायेंगे। जागरूकता के लिए विशेष आयोजन अभियान के दौरान जन–जागरूकता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण आयोजन भी किए जा रहे हैं। इनमें 23–24 मई को भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय जल सम्मेलन, 25–26 मई को क्षिप्रा परिक्रमा यात्रा और 30 मई से 7 जून तक भारत भवन, भोपाल में सदानीरा समागम आयोजित की जायेगी।  

CCTV में कैद वारदात: एक्टिवा पर आए बदमाशों ने कारों की खिड़कियां तोड़कर की चोरी

कपूरथला. जिले में चोरी की वारदातें बढ़ती जा रही है। सुल्तानपुर लोधी और आस-पास के इलाकों में देर रात 2 अलग-अलग जगहों पर एक ही चोर द्वारा कारों की खिड़कियां तोड़कर चोरी की कोशिश का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, ये घटनाएं रात के समय हुईं, जहां चोर सफेद एक्टिवा स्कूटर पर सवार होकर आया था। चोर ने अपना चेहरा पूरी तरह से ढक रखा था ताकि उसकी पहचान न हो सके और स्कूटर की नंबर प्लेट भी ढकी हुई थी। गांव मेवा सिंह वाला में एक टीचर की कार की खिड़की तोड़कर कार चोरी करने की कोशिश की गई, वहीं सुल्तानपुर लोधी शहर में एक प्रॉपर्टी डीलर की कार को भी निशाना बनाया गया।  दोनों घटनाएं कैमरों में कैद हो गई हैं, जिससे चोर की हरकतें साफ दिखाई दे रही हैं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है। इलाके में चोरी की बढ़ती घटनाओं से लोगों में डर का माहौल है, वहीं पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का भरोसा दिया है।

Collector Office Dispute Ends: प्रशासन-संगठनों में समझौता, विवाद का हुआ पटाक्षेप

मुंगेली. कलेक्टर कार्यालय से जुड़ा विवाद, जिसने बीते कुछ दिनों में जिले का माहौल गरमा दिया था और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बना हुआ था, अब पूरी तरह शांत हो गया है। 26 अप्रैल 2026 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय मुंगेली में आयोजित शांतिवार्ता बैठक के बाद प्रशासन, जोहार पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया। इस बैठक में एसडीएम अजय कुमार शतरंज, तहसीलदार शेखर पटेल, नायब तहसीलदार प्रकाश यादव सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के पदाधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान 24 अप्रैल को कलेक्टर परिसर में हुए पूरे घटनाक्रम की विस्तार से समीक्षा की गई और दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। अंततः सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति बन गई और भविष्य में किसी भी विवाद को संवाद के माध्यम से सुलझाने पर जोर दिया गया। क्या था पूरा मामला दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 24 अप्रैल को उस वक्त हुई थी, जब कुछ लोग कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे थे। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दावों में आरोप लगाया गया कि कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए आवेदन को सार्वजनिक रूप से फेंक दिया। इस दावे को स्थानीय भाषा और अस्मिता के अपमान के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ी और मामला तेजी से तूल पकड़ने लगा। वायरल पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि ज्ञापन जनगणना में छत्तीसगढ़ी भाषा को शामिल करने की मांग को लेकर दिया जा रहा था, लेकिन आवेदन देने पहुंचे लोगों की बात नहीं सुनी गई और उनके साथ असम्मानजनक व्यवहार हुआ। देखते ही देखते यह मुद्दा केवल एक प्रशासनिक घटना न रहकर सामाजिक और भावनात्मक बहस का विषय बन गया। प्रशासन ने आरोपों को बताया था निराधार हालांकि, जिला प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। प्रशासन का कहना था कि कलेक्टर ने आवेदन को विधिवत स्वीकार करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोग बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय परिसर में बैठ गए थे और नारेबाजी करने लगे, जिससे शासकीय कार्य प्रभावित हुए। इस दौरान कर्मचारियों के साथ बहस और हंगामे की स्थिति भी बनी। थाने तक पहुंच गया था मामला घटना के बाद कलेक्टर कार्यालय के कर्मचारियों ने सिटी कोतवाली में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 24 अप्रैल को दोपहर करीब 12:15 से 1:00 बजे के बीच कुछ लोगों ने कलेक्टर कक्ष के बाहर नारेबाजी और हंगामा किया, जिससे कार्यालय का माहौल प्रभावित हुआ और आम लोगों को भी असुविधा हुई। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम की सीसीटीवी फुटेज मौजूद है और मामले की सूचना पुलिस को दे दी गई थी।प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया था कि घटना के बाद कुछ लोगों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी और अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ। शांतिवार्ता से मामले का पटाक्षेप इसी बढ़ते विवाद और जनभावनाओं को देखते हुए 26 अप्रैल को शांतिवार्ता बैठक आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने परिपक्वता दिखाते हुए विवाद को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाया। लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि भविष्य में किसी भी मुद्दे को टकराव के बजाय बातचीत और समन्वय के जरिए सुलझाया जाएगा। बैठक के बाद दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे बेहतर समाधान है। प्रशासन और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना व जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के पदधिकारियों के बीच बनी यह सहमति न केवल तत्काल विवाद को खत्म करती है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संदेश देती है। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण बनकर सामने आया है कि डिजिटल युग में किसी भी घटना के कई पहलू सामने आ सकते हैं, लेकिन सही तथ्यों, पारदर्शिता और आपसी संवाद से किसी भी विवाद का समाधान संभव है। फिलहाल, मुंगेली में स्थिति सामान्य हो चुकी है और प्रशासन व सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित हो गया है।

यूपी होमगार्ड परीक्षा में कड़ी सुरक्षा, दूर-दराज से आए अभ्यर्थियों की बढ़ी परेशानी

लखनऊ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा आयोजित होमगार्ड भर्ती परीक्षा के आखिरी दिन सोमवार को राजधानी के परीक्षा केंद्रों पर जबरदस्त सख्ती देखने को मिली। सुरक्षा और शुचिता के नाम पर हुई इस जांच के दौरान अभ्यर्थियों को कड़े नियमों से गुजरना पड़ा। केंद्रों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा और चेकिंग के दौरान पुरुषों के जूते-बेल्ट तो उतरवाए ही गए, विवाहित महिलाओं के मंगलसूत्र, पायल और अन्य आभूषण तक उतरवा दिए गए। महाराजा बिजली पासी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय केंद्र पर सुरक्षा जांच के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब महिला पुलिसकर्मियों ने परीक्षार्थियों के धातु के गहने पहनने पर रोक लगा दी। हरदोई से आईं परीक्षार्थी सरिता देवी को कान की बाली, कंगन, पायल और मंगलसूत्र उतारने के निर्देश दिए गए। सरिता सहित कई अन्य महिला अभ्यर्थियों ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन नियमों का हवाला देते हुए उनकी एक न सुनी गई। अंततः अभ्यर्थियों को अपने कीमती आभूषण केंद्र के बाहर खड़े परिजनों को सौंपने पड़े। जूते-घड़ी और बेल्ट पर भी रही पाबंदी आजमगढ़ से आए अभ्यर्थी शैलेश कुमार ने बताया कि परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले सभी के जूते और बेल्ट निकलवा दिए गए। मोबाइल, घड़ी और पेन ले जाने पर भी पूरी तरह पाबंदी रही। अभ्यर्थियों को केवल आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही प्रवेश की अनुमति दी गई। 300-400 किमी दूर सेंटर होने से नाराजगी परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी गाजीपुर, गोरखपुर, मऊ और देवरिया जैसे दूरदराज के जिलों से लखनऊ पहुंचे थे। परीक्षार्थियों ने विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि होमगार्ड जैसे पद की भर्ती के लिए 300 से 400 किलोमीटर दूर सेंटर आवंटित करना समझ से परे है। इससे न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा, बल्कि अभ्यर्थियों को भारी मानसिक और शारीरिक थकान का सामना करना पड़ा। एसआई स्तर के कठिन सवालों ने उलझाया राजधानी के 55 केंद्रों पर दो पालियों में आयोजित इस परीक्षा के स्तर को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए।परीक्षार्थियों के अनुसार, होमगार्ड भर्ती के प्रश्नपत्र का स्तर उपनिरीक्षक (एसआई) भर्ती जैसा कठिन था। परीक्षा में सामान्य ज्ञान, हिंदी, विज्ञान, इतिहास और भूगोल विषय के सवाल शामिल किए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि लगभग 90 प्रतिशत प्रश्न काफी जटिल थे, जिन्हें हल करने में समय की कमी महसूस हुई।  

छत्तीसगढ़ ने मनरेगा श्रमिकों की ई-केवाईसी में किया नया कीर्तिमान, देश में अव्वल

मनरेगा श्रमिकों की ई- के वाय सी में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश ने रचा नया कीर्तिमान  रायपुर  महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत श्रमिकों के ई-के वाय सी कार्य में छत्तीसगढ़ ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 97.11 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-के वाय सी पूर्ण कर लिया गया है, जो राष्ट्रीय स्तर पर सर्वाधिक है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने केरलम, त्रिपुरा, मिजोरम जैसे छोटे राज्यों तथा कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे बड़े राज्यों को भी पछाड़कर यह उपलब्धि हासिल की है।                महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ;मनरेगा के तहत श्रमिकों की ई.केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को पूरा करने में छत्तीसगढ़ ने देश भर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रदेश में लगभग 56.87 लाख से ज्यादा मजदूरों की डिजिटल वेरिफिकेशन (e-KYC) पूरी की गई है जो भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। यह डिजिटल प्रक्रिया फर्जी जॉब कार्डों को हटाने और सीधे वास्तविक लाभार्थियों के बैंक खातों में मजदूरी पहुंचाने में मदद कर रही है।              यह उपलब्धि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल मार्गदर्शन एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा के सतत नेतृत्व, मॉनिटरिंग और प्रभावी रणनीति का परिणाम है। राज्य में योजनाबद्ध ढंग से अभियान चलाकर ई-के वाय सी की प्रक्रिया को तेज किया गया, जिससे बड़ी संख्या में श्रमिकों को समयबद्ध रूप से इससे जोड़ा जा सका।          रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में कुल 58 लाख से अधिक सक्रिय श्रमिकों में से 56 लाख से अधिक का ई-के वाय सी सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।        मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीब और श्रमिक वर्ग के हितों के संरक्षण एवं उन्हें योजनाओं का पारदर्शी लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। ई-के वाय सी के माध्यम से श्रमिकों को समय पर भुगतान एवं योजनाओं का सीधा लाभ सुनिश्चित हो रहा है।        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम स्तर पर कार्यरत टीमों के समन्वित प्रयास का परिणाम है। उन्होंने बताया कि ई-के वाय सी से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगी है, बल्कि वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने में भी पारदर्शिता आई है। शर्मा ने सभी संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए निर्देशित किया कि शेष लंबित प्रकरणों को भी शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश को 100 प्रतिशत e-KYC (ई – के वाय सी) लक्ष्य की ओर अग्रसर किया जाए।            प्रदेश में चलाए गए विशेष अभियान, ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता और तकनीकी संसाधनों के प्रभावी उपयोग से यह सफलता हासिल हुई है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करती है।

चंडीगढ़ के कर्मचारियों को मिलेगा महंगाई भत्ते में इज़ाफा, जल्द मिलेगा फायदा

चंडीगढ़ चंडीगढ़ प्रशासन के वित्त विभाग ने कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की दरों में बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है। नए आदेश के अनुसार महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। यह निर्णय भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के 22 अप्रैल को जारी आदेश के अनुरूप लिया गया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस निर्णय को अपनाते हुए इसे अपने अधीन कार्यरत सभी कर्मचारियों पर लागू कर दिया है। यह बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा, भारतीय वन सेवा तथा अन्य संबंधित सेवाओं के अधिकारियों और चंडीगढ़ प्रशासन के सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा। वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों, प्रशासनिक सचिवों और कार्यालय प्रमुखों को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इस आदेश को प्रशासन की आधिकारिक जानकारी प्रणाली पर दर्ज करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। इस फैसले से कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई से राहत मिलने की उम्मीद है और उनकी आय में वृद्धि होगी। 1 जनवरी से लागू हुआ 60% महंगाई भत्ता लाखों रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (Dearness Relief) में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इस फैसले से पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई का सामना करने में बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी। महंगाई राहत में कितनी बढ़ोतरी हुई है और यह कब से लागू होगा? पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग के जारी एक कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, महंगाई राहत (DR) में 2% का इजाफा किया गया है। इस बढ़ोतरी के साथ ही बेसिक पेंशन पर मिलने वाला DR मौजूदा 58% से बढ़कर 60% हो गया है। पेंशनर्स के लिए अच्छी खबर यह है कि यह नई दर 1 जनवरी 2026 से पूर्वव्यापी (retroactive) प्रभाव से लागू मानी जाएगी, जिसका मतलब है कि उन्हें पिछले महीनों का एरियर भी मिलेगा। इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा किन पेंशनर्स को मिलेगा? आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ व्यापक स्तर पर लाभार्थियों को मिलेगा, जिनमें मुख्य रूप से सभी केंद्र सरकार के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी, सशस्त्र बल के पेंशनभोगी और रक्षा सेवा अनुमानों से भुगतान पाने वाले नागरिक (Civilian) पेंशनभोगी, रेलवे के पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी, अखिल भारतीय सेवा के रिटायर्ड अधिकारी और पेंशनभोगी और वर्तमान में प्रोविजनल पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनभोगी शामिल हैं। क्या बढ़ा हुआ पैसा खाते में आने में कोई देरी होगी? बिल्कुल नहीं। सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं कि पेंशनर्स को उनके बढ़े हुए लाभ बिना किसी रुकावट या देरी के मिलें। अकाउंटेंट जनरल के कार्यालयों और अधिकृत पेंशन वितरण बैंकों (Pension Disbursing Banks) को तत्काल संशोधित DR के भुगतान की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। ज्ञापन में साफ तौर पर कहा गया है कि बैंकों को "किसी अन्य निर्देश की प्रतीक्षा किए बिना" कैलकुलेशन और भुगतान की प्रक्रिया तुरंत आगे बढ़ानी चाहिए।    

12 मामलों में घिरे बाबा अशोक खरात, SIT की जांच तेज, फार्महाउस से मिले संदिग्ध वीडियो

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में नासिक की एक स्थानीय अदालत ने स्वयंभू 'बाबा' अशोक खरात को यौन शोषण के छठे मामले में रविवार को नौ मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। खरात को 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया था। उसपर कई महिलाओं का यौन शोषण और 'दैवीय शक्तियों' तथा काला जादू का ज्ञान होने का दावा कर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी करने के आरोप हैं। जीवन बर्बाद करने की दी थी धमकी छठे मामले में खरात पर एक युवती का यौन शोषण करने का आरोप है। यह युवती अपनी व्यक्तिगत समस्याओं का समाधान पाने के लिए खरात के पास गई थी। लिस के अनुसार, खरात ने कथित रूप से युवती को धमकी दी कि वह अपनी 'दैवीय शक्तियों' से उसके परिवार को बर्बाद कर देगा। उसने पीड़िता के परिवार के सदस्यों के आधार, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज भी अपने पास रख लिए थे। नासिक और अहिल्यानगर जिलों में दर्ज यौन शोषण और धोखाधड़ी के 12 मामलों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गुरुवार को अदालत में आवेदन देकर छठे मामले में खरात की हिरासत की मांग की थी। अदालत की अनुमति मिलने के बाद एसआईटी ने उसे अपनी हिरासत में लिया और शुक्रवार को अदालत में पेश किया था। अदालत ने तब उसे रविवार तक पुलिस हिरासत में भेजा था। पुलिस हिरासत समाप्त होने पर रविवार को उसे अदालत में पेश किया गया। सुरक्षा कारणों से कार्यवाही वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हुई और उसे व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने न्यायिक हिरासत की मांग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने खरात को नौ मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। फार्महाउस से मिले संदिग्ध वीडियो एसआईटी खरात को सोमवार को फिर अदालत में पेश करेगी और एक महिला के यौन उत्पीड़न से जुड़े सातवें मामले में पुलिस हिरासत की मांग करेगी। इस बीच, पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि सिन्नर तालुका स्थित खरात के फार्महाउस से कुछ और आपत्तिजनक एवं संदिग्ध वीडियो बरामद हुए हैं। पुलिस ने शुक्रवार को खरात के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया, जिसमें उस पर 2018-23 के दौरान अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से 8.76 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। पीड़ित कभी उसका करीबी था और सिन्नर तालुका के एक मंदिर के प्रबंधन से जुड़े उसके 'शिवानिका ट्रस्ट' में ट्रस्टी के रूप में कार्यरत था। अब तक खरात के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें आठ महिलाओं के यौन शोषण और चार धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में उसके खिलाफ सात और मामले दर्ज किए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं

रायपुर मुख्य सचिव  विकासशील ने कहा कि राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने और ग्राम पंचायतवार कार्ययोजना बनाएं। राज्य में जलवायु परिवर्तन कार्यक्रमों के लिए सीएसआर मद की उपलब्ध राशि का उपयोग करना प्रस्तावित करें। छत्तीसगढ़ राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना के लिए गठित स्टियरिंग समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।  बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र, राज्य की जलवायु परिवर्तन पर कार्य योजना, राज्य में जलवायु परिवर्तन विषयक कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और राज्य जलवायु परिवर्तन प्राधिकरण के गठन और राज्य में कार्बन क्रेडिट आधारित कार्यक्रमों के क्रियान्वयन के संबंध में विचार-विमर्श किया गया। विभागीय सचिवों से जलवायु परिवर्तन पर कार्ययोजना के क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव मती ऋचा शर्मा ने जलवायु परिवर्तन की पृष्ठ भूमि, जलवायु परिवर्तन के कारक और छत्तीसगढ़ राज्य में भी जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। बैठक में पीसीसीएफ  निवास राव, एपीसीसीएफ  सुनील मिश्रा शामिल हुए। वृक्ष-आवरण में देश में प्रथम स्थान पर रहा छत्तीसगढ           छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जलवायु परिवर्तन से संबंधित विविध कार्य किये जा रहें हैं। इनमें मुख्यतः वृक्षारोपण कार्य किये जा रहें हैं। एक पेड़ माँ के नाम योजना के तहत् करीब 7 करोड़ पौधारोपण किया जा चुका है। किसान वृ़क्ष मित्र योजना के तहत् 3 करोड़ 68 लाख वृक्षारोपण किया गया। अधिकारियों ने बताया कि आई.एस.एफ.आर. 2025 के अनुसार राज्य के वन एवं वृक्ष-आवरण में सर्वाधिक वृद्धि 683 किलोमीटर किया गया है, जो देश में प्रथम स्थान पर रहा है। राज्य में जलवायु परिवर्तन के तहत ई-वाहनों के चालन के लिए जन-सामान्य को प्रेरित किया जा रहा है। किसानों को सोलर पम्प वितरित किये जा रहे हैं।             अधिकारियों ने बताया कि राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025-2026 में लगभग 55 हजार 50 हेक्टेयर भूमि पर जैविक खेती की गई। राज्य में 300 से अधिक बांधों की हाईड्रोलॉजिकल प्लानिंग के साथ 24 वृहद एवं मध्यम जलाशयों का सेडिमेंटेशन सर्वे पूर्ण किया जा चुका है। राज्य में जलवायु परिवर्तन ज्ञान केन्द्र निर्मित किए जाने के लिए अधिकारियों ने अपने विचार रखें।              बैठक में जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना के क्रियान्वयन के संबंध में कृषि एवं किसान कल्याण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, नगरीय प्रशासन, परिवहन, वाणिज्य एवं उद्योग, खनिज, ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, महिला एवं बाल विकास और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों अपने-अपने विभाग की जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की सचिव मती निहारिका बारिक सिंह, विधि एवं विद्यायी विभाग की प्रमुख सचिव मती सुषमा सावंत, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव मती शहला निगार, खनिज संसाधन एवं मुख्यमंत्री के सचिव  पी.दयानंद, नगरीय प्रशासन विकास विभाग एवं मुख्यमंत्री के सचिव  बसवराजु एस., वाणिज एवं उद्योग विभाग के सचिव  रजत कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, परिवहन विभाग के सचिव  एस.प्रकाश, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की विशेष सचिव सु इफ्फत आरा सहित राज्य योजना आयोग, नाबार्ड, सेंटर फॉर एन्वायरमेंट एजुकेशन, इंडियन इंस्टयूट ऑफ साइंस और कृषि मौसम विज्ञान विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी सहित राज्य शासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

केंद्र सरकार की नई पहल,शहरों के रोजगार और अर्थव्यवस्था का तैयार होगा विस्तृत रिपोर्ट कार्ड

रांची तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य के बीच केंद्र सरकार बड़े शहरों के समग्र विकास के लिए ठोस डेटा आधारित नीति तैयार करेगी। केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने देश के उन 47 शहरों के लिए सिटी लेवल स्टैटिस्टिकल रिपोर्ट (नगर-स्तरीय सांख्यिकी रिपोर्ट) तैयार करने का प्रस्ताव रखा है, जिसकी आबादी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 10 लाख से अधिक है। इसमें झारखंड के दो शहर रांची और धनबाद का चयन हुआ है, जिसके आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से विशेष शहरी नीति निर्माण योजना बनानी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहरों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को समझना और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करना है। क्यों आवश्यकता पड़ी केंद्र का मानना है कि देश के कई शहर आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन के रूप में उभर रहे हैं। संरचनात्मक बदलाव के बावजूद शहर स्तर पर आधिकारिक आंकड़ों की उपलब्धता सीमित है, जिससे साक्ष्य-आधारित शहरी नीति निर्माण और नियोजन में बाधा उत्पन्न होती है। साथ ही अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर जो भी आर्थिक आंकड़े जारी होते थे, वे मुख्य रूप से देश या राज्य स्तर के होते थे। शहरों के भीतर रोजगार की क्या स्थिति है या वहां का व्यापार कैसा चल रहा है, इसका कोई सटीक सरकारी डेटा उपलब्ध नहीं था। इसी कमी को दूर करने के लिए केंद्रीय मंत्रालय के अधीन ‘एनएसओ’ ने यह नई पहल शुरू की है। इसमें रांची और धनबाद जैसे शहरों को स्वतंत्र इकाई मानकर उनका डेटा अलग से संकलित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। इच्छुक व्यक्ति 15 मई तक अपने सुझाव दे सकते हैं। पड़ोसी राज्यों में यूपी के सात शहर, बिहार के केवल एक चयनित 47 शहरों में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 10 शहर शामिल हैं। झारखंड के दो शहर के अलावा उत्तर प्रदेश के 7 शहर, पश्चिम बंगाल एवं छत्तीसगढ़ के 2-2 और बिहार के एक शहर का चयन किया गया है। दो भागों में तैयार होगी रिपोर्ट पहली रिपोर्ट में दस लाख से अधिक आबादी वाले संबंधित शहरों का विस्तृत रोजगार प्रोफाइल होगा। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को शामिल करते हुए कुल छह प्रमुख संकेतकों (इंडिकेटरों) का विश्लेषण किया जाएगा। इनमें श्रम बल सहभागिता दर, श्रमिक जनसंख्या अनुपात, बेरोजगारी दर, रोजगार की स्थिति और विभिन्न उद्योगों में रोजगार का वितरण शामिल होगा। इससे यह स्पष्ट होगा कि शहरों में रोजगार के अवसर किस क्षेत्र में अधिक हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। दूसरी रिपोर्ट असंगठित क्षेत्र के उद्यमों पर केंद्रित होगी। इसमें उन आर्थिक गतिविधियों (रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, निर्माण मजदूर और छोटे घरेलू उद्योग) को शामिल किया जाएगा, जो सरकारी विनियमन या कराधान के दायरे से बाहर हैं। इसमें कुल 13 संकेतकों के आधार पर विश्लेषण होगा। इसमें प्रतिष्ठानों की संख्या, स्वामित्व और साझेदारी आधारित प्रतिष्ठानों का प्रतिशत, किराए पर काम कर रहे कर्मचारी वाले प्रतिष्ठानों का अनुपात, महिला स्वामित्व वाले उद्यमों की हिस्सेदारी और व्यापार में इंटरनेट के उपयोग का प्रतिशत आदि प्रमुख हैं। इससे असंगठित क्षेत्र की वास्तविक स्थिति और उसकी चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।