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बिल्डिंग नियमों पर बड़ा फैसला: कोर्ट की रोक के बाद पंजाब सरकार ने बायलॉज लिए वापस

लुधियाना. पंजाब में बिल्डिंग बनाने वालों को नियमों में छूट नहीं मिलेगी जिसके तहत सरकार ने नए बाईलॉज वापस ले लिए हैं। यहां बताना उचित होगा कि शहरी विकास विभाग द्वारा पिछले साल दिसम्बर के दौरान यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज जारी किए गए थे। जिसमें नगर निगम के एरिया में भी कमर्शियल व रिहायशी बिल्डिंग बनाने वालों को कवरेज के मामले में काफी छूट दी गई थी लेकिन यह बाईलॉज जारी होने के कुछ देर बाद ही कोर्ट द्वारा उसे लागू करने पर रोक लगा दी गई। अब भी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस चल रहा है। इसी बीच सरकार द्वारा 2025 के यूनिफाइड बिल्डिंग बाईलॉज वापस लेने का फैसला कर लिया गया है। इस संबंध में नोटिफिकेशन सोमवार को अर्बन डिवैल्पमैंट विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी के हवाले से जारी किया गया जिसके मुताबिक अगले आदेश तक पंजाब की नगर निगम में 2018 और पुडा के एरिया में 2021 के बिल्डिंग बाईलॉज लागू होंगे। कमर्शियल व रिहायशी कैटेगरी को यह दी गई थी राहत  – टी.पी. स्कीम के एरिया में 60 फुट रोड पर नगर निगम के जरिए सरकार कमर्शियल रोड डिक्लेयर करवाने की लंबी प्रक्रिया से छूट। – कोर एरिया में 3 लाख प्रति ई.सी.एस. के हिसाब से पेड पार्किंग की शर्त पर 21 मीटर तक कवरेज की सुविधा। -ऑल अराउंड सेट बैक छोड़ने के लिए बिल्डिंग की ऊंचाई की सीमा 15 से बढ़ाकर 21 मीटर की गई थी। -किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग में 20 फीसदी फ्रंट सैटबैक छोड़ने की शर्त को 20 मीटर अधिकतम पर किया गया था फिक्स। – 40 फुट रोड पर स्थित 200 गज के रिहायशी मकान की ग्राऊंड फ्लोर पार्किंग के छोडने के बाद 21 मीटर उंचाई तक 4 मंजिला निर्माण करने का प्रावधान। कोर्ट केस में 93 वर्षीय याचिकाकर्त्ता द्वारा यह उठाए गए थे मुद्दे  इस मामले को लेकर कोर्ट में चल रहे केस में याचिकाकर्त्ता 93 वर्षीय महिला हैं जिनके द्वारा मुद्दा उठाया गया है कि नए बिल्डिंग बाईलॉज इससे पहले से लागू फायर प्रिवैंशन एक्ट व नैशनल बिल्डिंग कोड के प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत हैं। इसके अलावा जिस रियल एस्टेट एडवायजरी कमेटी की सिफारिशों को आधार बनाकर नए बिल्डिंग बाईलॉज तैयार किए गए हैं, उस कमेटी में बिल्डर व डिवैल्पर शामिल हैं और उनकी सुविधा का ध्यान रखा गया है जिससे रिहायशी इलाके में बडी संख्या में कर्मिशयल बिल्डिंगों का निर्माण करने का रास्ता साफ हो गया है लेकिन यह फैसला लेने से उन इलाकों में रहने वाले लोगों को विश्वास में नही लिया गया।

Don 3 विवाद में नया मोड़, फरहान अख्तर का बयान आया सामने

बॉलीवुड की मोस्ट अवेटेड फिल्म डॉन 3 इन दिनों अपनी कहानी से ज्यादा विवादों को लेकर सुर्खियों में है. एक तरफ सुपरस्टार रणवीर सिंह का अचानक फिल्म से बाहर होना, तो दूसरी तरफ फिल्ममेकर फरहान अख्तर का इस पूरे मामले पर खुलकर सामने आना. इस टकराव ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. करोड़ों के नुकसान, साइनिंग अमाउंट और लगातार चल रही बयानबाजी के बीच Don 3 अब सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़ा विवाद बन चुकी है. अब फरहान ने पहली बार इस पूरे मामले पर खुलकर बात की है. उनका कहना है कि ऐसे दौर को देखकर वो फील करते हैं कि उन्हें शायद एक्टिंग की ओर वापस रुख कर लेना चाहिए. परेशान हुए फरहान हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया को दिए इंटरव्यू में फरहान अख्तर ने डॉन फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म से जुड़ी देरी और रणवीर सिंह के साथ हुए विवाद पर बात की. उन्होंने कहा- मैंने यही सीखा है कि जिंदगी में कुछ भी पक्का नहीं होता. जब तक चीज पूरी तरह बनकर सामने न आ जाए, तब तक उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता. फरहान ने अपने करियर के अच्छे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि बीच-बीच में मुश्किलें आना नॉर्मल है और इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है. आगे हंसते हुए फरहान ने कहा कि- जब ऐसे रोडब्लॉक्स आते हैं तो मुझे कभी-कभी लगता है कि मुझे वापस एक्टिंग की ओर ही चले जाना चाहिए. तो ऐसी चीजों से डील नहीं करना पड़ेगा. फरहान ने आगे कहा कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब आमिर खान, अक्षय खन्ना, प्रीति जिंटा, डिंपल कपाड़िया, सैफ अली खान और उनके पार्टनर रितेश सिधवानी ने उनके साथ काम करने के लिए हां कहा था. एक्टर-फिल्म मेकर बताते हैं कि तब से लेकर अब तक उनका सफर शानदार रहा है. उन्हें हमेशा अपनी पसंद के लोगों के साथ काम करने का मौका मिला. उन्होंने कहा- कभी-कभी मुश्किल समय भी आता है, लेकिन अगर पहले सब अच्छा रहा है, तो ऐसे समय को भी आराम से संभालना चाहिए.   डॉन 3 का विवाद क्या है? ये मामला तब शुरू हुआ जब रणवीर सिंह ने दिसंबर 2025 में अपनी फिल्म धुरंधर की रिलीज के बाद अचानक डॉन 3 छोड़ दी. इस फिल्म को फरहान अख्तर डायरेक्ट करने वाले थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस फैसले से फरहान खुश नहीं थे और मामला प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया तक पहुंच गया. मीटिंग में ये बताया गया कि फरहान की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट इस फिल्म की प्री-प्रोडक्शन पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी. साथ ही, स्क्रिप्ट को हर स्टेज पर रणवीर की मंजूरी मिली थी. वहीं रणवीर का कहना था कि फरहान ने फिल्म को उनकी करियर की खराब स्थिति के चलते आगे बढ़ाने में देरी की थी. गिल्ड ने दोनों को सलाह दी कि वो कानूनी रास्ता अपनाने की बजाय आपस में बात करके मामला सुलझाएं. खबरों के मुताबिक, रणवीर सिंह ने फरहान की कंपनी को अपना 10 करोड़ साइनिंग अमाउंट लौटाने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही, उन्होंने अपनी अगली फिल्म प्रलय में हिस्सेदारी देने की भी बात कही है. हालांकि, प्रोडक्शन हाउस से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों को गलत बताया है. उनका कहना है कि अभी तक कोई फाइनल समझौता नहीं हुआ है और बातचीत जारी है.

राज्यपाल के समक्ष जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं पर हुई चर्चा

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि जनजातीय कार्यशाला में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनजातीय सशक्तिकरण के लिए सरकार के दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। जनजातीय विकास से संबद्ध विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय अत्यंत आवश्यक है।     प्रदेश के परिदृश्य में हो नवाचारों का अध्ययन।      विकास कार्य, जनजातीय क्षेत्र फोकस्ड हों।     अन्तर्विभागीय समन्वय जरूरी।     क्रियान्वयन में जवाबदारी बढ़ाए।     स्कूलों की गुणवत्ता में पेसा समितियों को जोड़े।  राज्यपाल  पटेल मंगलवार को लोकभवन में जनजातीय प्रकोष्ठ के साथ जनजातीय कार्य विभाग की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि जनजातीय सशक्तिकरण और विकास के लिए प्रावधानित बजट का जनजाति उन्मुख उपयोग हो। राशि को लक्षित उद्देश्य पर ही खर्च किया जाए। राज्यपाल  पटेल ने मैदानी भ्रमण कर जनजातीय विकास प्रयासों की जमीनी हकीकत जानने के और अधिक सघन प्रयासों पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सर्वाधिक जनजातीय जनसंख्या वाला विस्तृत क्षेत्र है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में निवासरत जनजातियों के विकास एवं कल्याण के कार्य और अधिक क्षेत्र फोकस्ड होना जरूरी है। कार्यशाला में प्राप्त देश के जनजातीय बाहुल्य राज्यों द्वारा जनजातीय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि के क्षेत्र में किए गए नवाचारों का प्रदेश की आवश्यकता के संदर्भ में अध्ययन किया जाए, उन्हें समझ कर अपनाने के प्रयास किए जाने चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि कमजोर वर्गों के कल्याण प्रयासों में संवेदनशीलता सबसे महत्वपूर्ण है। समानुभूति की भावना के साथ किए गए आत्मीय प्रयास सदैव सुफल देते हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय कल्याण प्रयासों में जन प्रतिनिधियों और शासकीय सेवकों की और अधिक संवेदनशीलता तथा सक्रियता जरूरी है। पात्र हितग्राहियों का चयन, योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, बजट राशि के समुचित उपयोग की प्रक्रियाओं में और अधिक जवाबदारी होनी चाहिए। जिम्मेदारी के निर्वहन में लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि शिक्षा, प्रगति का मार्ग सुनिश्चित करती है। जनजातीय समुदाय के सशक्तिकरण में शिक्षा के प्रसार की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसलिए जरूरी है कि जनजाति क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए। पेसा निगरानी समिति के माध्यम से शिक्षकों, शिक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ताओं आदि की निगरानी और मूल्यांकन के प्रयास किए जाए।  राज्यपाल  पटेल को बैठक में जनजातीय कार्य विभाग के प्रमुख सचिव  गुलशन बामरा ने विगत 16 और 17 अप्रैल 2026 को आयोजित जनजातीय उपयोजना कार्यशाला की अनुशंसाओं की विस्तार से जानकारी दी। लोकभवन के जवाहर खण्ड सभाकक्ष में आयोजित बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष  दीपक खाण्डेकर, राज्यपाल के उप सचिव  सुनील दुबे, जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त सह संचालक डॉ. सतेन्द्र सिंह, जनजातीय कार्य विभाग, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य और लोकभवन के अधिकारी उपस्थित थे।  

“मौके को पहचानें: आज का सुविचार जो आपकी जिंदगी बदल सकता है”

 जिंदगी में अक्सर हम यह सोचते हैं कि हमें सही मौके का इंतजार करना चाहिए, लेकिन सच यह है कि मौके हमेशा हमारे आसपास ही होते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि हम उन्हें पहचान पाते हैं या नहीं। “आज का सुविचार” हमें यही समझाता है कि अगर आप अपनी सोच और नजरिया बदल लें, तो हर दिन आपके लिए एक नया अवसर बन सकता है। सफलता कोई अचानक मिलने वाली चीज नहीं है, बल्कि यह सही समय पर लिए गए फैसलों और मेहनत का नतीजा होती है। इस आर्टिकल में दिए गए मोटिवेशनल कोट्स आपको जीवन में आगे बढ़ने और मौके को पहचानने की प्रेरणा देंगे। मौके को पहचानना सीखें “मौके हमेशा सामने होते हैं, बस उन्हें पहचानने की समझ और सही समय पर कदम उठाने की हिम्मत होनी चाहिए।” “जो इंसान हर परिस्थिति में अवसर ढूंढ लेता है, वही जिंदगी में आगे बढ़ता है और कामयाबी हासिल करता है।” इंतजार नहीं, एक्शन जरूरी है “जो लोग मौके का इंतजार करते रहते हैं, वे पीछे रह जाते हैं और जो तुरंत कदम उठाते हैं वही आगे निकल जाते हैं।” छोटी शुरुआत, बड़ी सफलता “हर बड़ी सफलता की शुरुआत छोटे कदम से होती है, इसलिए किसी भी मौके को छोटा समझकर नजरअंदाज न करें।” सोच बदलें, जिंदगी बदलेगी “जब आप अपनी सोच को सकारात्मक बना लेते हैं, तो हर मुश्किल में भी आपको एक नया मौका दिखाई देने लगता है।” डर को छोड़ें, आगे बढ़ें “डर हमें रोकता है, लेकिन जो इसे पीछे छोड़ देता है वही नए अवसरों को अपनाकर आगे बढ़ता है।” समय पर फैसला लें “सही समय पर लिया गया एक छोटा सा फैसला भी आपकी पूरी जिंदगी बदल सकता है।” मेहनत से ही पहचान बनती है “मौके तो सबको मिलते हैं, लेकिन मेहनत करने वाले ही उन्हें सफलता में बदल पाते हैं।” खुद पर भरोसा रखें “अगर आपको खुद पर विश्वास है, तो हर मौका आपके लिए सफलता का रास्ता बन सकता है।” आज से ही शुरुआत करें “कामयाबी खुद चलकर तभी आएगी जब आप आज से ही अपने सपनों के लिए कदम उठाना शुरू करेंगे।” इस सुविचार का सीधा सा मतलब है – मौके का इंतजार मत कीजिए, बल्कि उन्हें पहचानकर तुरंत काम करना शुरू करें। जब आप इस एक बात को अपने जीवन में उतार लेते हैं, तो सफलता धीरे-धीरे आपकी ओर खुद आने लगती है।

अनोखी शादी: अंगारों पर चलकर दूल्हा-दुल्हन ने पूरी की रस्में, सदियों पुरानी परंपरा बरकरार

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक ऐसी अनोखी शादी चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें दूल्हा-दुल्हन ने पारंपरिक सात फेरों के साथ-साथ जलते अंगारों पर चलकर विवाह की रस्में पूरी कीं। यह परंपरा कोई नई नहीं, बल्कि दशकों से आदिवासी समाज में चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ निभाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित बिलासपुर गांव में राठिया परिवार के गंधेल गोत्र में यह अनोखी परंपरा आज भी जीवित है। शादी के बाद जब दुल्हन को घर लाया जाता है, तो घर के देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद मंडप में जलते अंगारे बिछाए जाते हैं। इसके बाद दूल्हा-दुल्हन के साथ परिवार के सदस्य नंगे पांव इन अंगारों पर चलकर रस्में पूरी करते हैं। घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता परंपरा के अनुसार, मंडप में बकरे की बलि देने के बाद घर के मुखिया पर देवता सवार होने की मान्यता है। इसके बाद वे नाचते-गाते हुए मंडप में अंगारे बिछाते हैं और पूरे अनुष्ठान का नेतृत्व करते हैं। इस दौरान दूल्हा-दुल्हन समेत कई लोग अंगारों पर चलते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि किसी के पैरों में जलन या चोट नहीं होती। परिवार के सदस्य रखते हैं उपवास परिवार के सदस्यों का कहना है कि इस परंपरा के दौरान कई लोग उपवास रखते हैं और पानी तक ग्रहण नहीं करते। दुल्हन के घर आने के बाद सबसे पहले एक बकरे की बलि देकर उसके खून से तिलक लगाया जाता है, फिर घर में प्रवेश कराया जाता है। इसके बाद मंडप में दूसरी बलि दी जाती है और फिर अंगारों पर चलने की रस्म पूरी होती है। परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता होंगे नाराज गांव के बुजुर्गों के अनुसार, यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है। हर शादी में इस रस्म को निभाना अनिवार्य माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर यह परंपरा नहीं निभाई गई, तो देवी-देवता नाराज हो सकते हैं और परिवार पर विपत्ति आ सकती है। अनोखी शादी को देखने उमड़ती है भीड़ इस अनोखी शादी को देखने के लिए न केवल गांव, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। जलते अंगारों पर चलते दूल्हा-दुल्हन का यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आस्था का केंद्र बना हुआ है। फिलहाल यह अनोखी शादी सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इस परंपरा को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

AAP को बड़ा झटका: 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने से बदला राजनीतिक समीकरण

चंडीगढ़ आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है। क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा? AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा।  

उद्योग की मांग के अनुसार ट्रेड्स का प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट सुनिश्चित करें: मंत्री टेटवाल

उद्योग की मांग के अनुसार ट्रेड्स का प्रशिक्षण देकर प्लेसमेंट कराना सुनिश्चित करें : मंत्री टेटवाल मंत्री टेटवाल ने ‘आईटीआई चले हम’ प्रवेश 2026 का किया शुभारंभ भोपाल  कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने ‘आईटीआई चले हम’ प्रवेश 2026 अभियान का शुभारंभ करते हुए प्रदेशभर में कौशल आधारित शिक्षा को जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। मंत्री टेटवाल ने इस अवसर पर आयोजित समीक्षा बैठक में विभिन्न जिलों के आईटीआई संस्थानों की प्रगति, प्रशिक्षण व्यवस्था, प्लेसमेंट और विद्यार्थियों की सहभागिता का समग्र मूल्यांकन किया। मंत्री टेटवाल ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल प्रवेश प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं को कौशल, आत्मनिर्भरता और रोजगार से जोड़ने का व्यापक प्रयास है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी आईटीआई संस्थानों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए तथा प्राचार्यों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हों, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार हो सके। समीक्षा के दौरान प्लेसमेंट की स्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए मंत्री टेटवाल ने कहा कि उद्योगों की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रमों को अद्यतन किया जाए और प्रशिक्षण को पूरी तरह प्रैक्टिकल एवं जॉब-ओरिएंटेड बनाया जाए। मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, ब्यूटी पार्लर, फूड प्रोसेसिंग सहित अन्य उभरते सेक्टर्स में रोजगारोन्मुख कोर्सेस को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए, जिससे अधिकाधिक युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही अवसर मिल सकें। विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मंत्री टेटवाल ने हॉस्टल सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन, जरूरतमंद विद्यार्थियों को सहयोग उपलब्ध कराने तथा ड्रॉपआउट युवाओं को पुनः प्रशिक्षण से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने आईटीआई में बेटियों के प्रवेश को बढ़ावा देने और उनके लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सभी आई टी आई में शत प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करें। मंत्री टेटवाल ने निर्देशित किया कि प्रशिक्षण के साथ सॉफ्ट स्किल्स, कम्युनिकेशन और इंटरव्यू प्रिपरेशन को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, जिससे विद्यार्थी रोजगार के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। साथ ही, जिन संस्थानों में विद्यार्थियों की उपस्थिति और सहभागिता कम है, वहां सुधार के लिए जवाबदेही तय कर नियमित समीक्षा की जाए। प्रशिक्षण की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के मॉड्यूल्स और स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स (एसडीपी) को प्रभावी रूप से लागू करने, सेमिनार और ट्रेनिंग सेशन्स की नियमितता सुनिश्चित करने तथा उत्कृष्ट संस्थानों के मॉडल को अन्य स्थानों पर अपनाने के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए डिजिटल माध्यमों के उपयोग को बढ़ाते हुए पोस्टर, फिल्म और अन्य डिजिटल कंटेंट के जरिए अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए गए। साथ ही, कौशल विकास को स्कूल शिक्षा से जोड़ने की दिशा में भी कार्य करने की बात कही गई। मंत्री टेटवाल ने कहा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें मुख्यमंत्री से भेंट का अवसर दिया जाएगा, जिससे युवाओं में प्रेरणा और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होगी। मंत्री टेटवाल ने कार्यक्रम में पहुंचे विद्यार्थियों का मिठाई खिलाकर स्वागत किया और उन्हें आईटीआई से जुड़कर अपने भविष्य को सशक्त बनाने के लिए प्रेरित किया। बैठक में डायरेक्टर बसंत कुर्रे और सीईओ गिरीश शर्मा ने जानकारी दी कि विगत वर्ष आई टी आई में 96.4 प्रतिशत सीटों पर विद्यार्थियों का पंजीयन हुआ था। इस वर्ष सीटों की संख्या बढ़ाकर उन पर शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें प्रशिक्षण शुल्क प्लेसमेंट के बाद लिया जाना, फीस की किस्तों में भुगतान की सुविधा तथा विभिन्न प्रकार के अनुदान शामिल हैं। ग्लोबल स्किल पार्क में 13 राज्यों के बच्चे भी विभिन्न ट्रेड्स में प्रशिक्षण ले रहे हैं। जल्दी ग्लोबल स्किल पार्क में कट सिस्को और द्रोण का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ड्रॉपआउट, दिव्यांग एवं अनाथ आश्रम के बच्चों को भी आईटीआई में पंजीयन कराकर कौशल प्रशिक्षण से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे रोजगार के अवसरों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। मंत्री टेटवाल ने आईटीआई के प्रतिभावान प्रशिक्षणार्थियों की सफलता की कहानियों पर आधारित फिल्म का विमोचन किया। साथ ही ऑटोमोबाइल सेक्टर में बालिकाओं की सफलता पर आधारित ग्लोबल स्किल्स पार्क द्वारा निर्मित फिल्म का अवलोकन किया। इसके बाद उन प्रशिक्षणार्थियों की प्रेरणादायक फिल्म प्रदर्शित की गई जो प्रशिक्षण के साथ पार्ट टाइम जॉब कर रहे हैं।  

भाई ने निभाई परंपरा, बहन के घर 11 लाख का मायरा लेकर निकली भव्य यात्रा

भीलवाड़ा लग्जरी गाड़ियों के दौर में एक किसान भाई ने 11 ऊंट गाड़ियों और 51 ट्रैक्टर पर भात भरण की अनूठी शोभायात्रा निकाली. भीलवाड़ा के जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र के पंडेर गांव से टिठोडी गांव तक 7 किलोमीटर की यात्रा की. ग्रामीणों ने भी खूब पुष्प वर्षा की. भात यात्रा का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. किसान परिवार ने पुरानी परंपरा को न‍िभाया. बहन के घर पहुंचकर 11 लाख का मायरा भरा. "बहन को पिता की कमी महसूस न हो" किसान मुकेश जाट ने कहा क‍ि पिता के देहांत के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी. उन्होंने यही कोशिश की कि बहन को कभी पिता की कमी महसूस न हो, जो भी किया है, वह अपने पिता के सपनों को पूरा करने और बहन के चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए किया है.   "हमारी पुरानी परंपराएं ही असली पहचान" उन्होंने कहा,  "हमारी पुरानी परंपराएं ही हमारी असली पहचान है, इसलिए मैंने उसी परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया है." बदलते आधुनिक दौर में जहां एक ओर परंपराओं को जिंदा रखा, वहीं भाई ने 11 लाख रुपये का भात भरा. पुरानी परंपराओं को जीवंत करते हुए मायरा भरने की परंपरा को पुनर्जीवत किया.   मुकेश जाट की पत्नी माया पंचायत प्रशासक हैं. पिता के निधन के बाद भाई की अनूठी भात शोभायात्रा को देखकर बहन भी भावुक हो गई. नाचते-गाते हुए करीब 7 किलोमीटर का सफर तय क‍िया.

कुएं, तालाब और नदियों की सफाई से जल सुरक्षा की ओर मजबूत पहल

भोपाल  मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान 19 मार्च से प्रारंभ होकर 30 जून तक संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। इसके अंतर्गत कुएँ, तालाब, बावड़ी और नहरों की सफाई, गहरीकरण, पुनर्जीवन, पौधरोपण, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग तथा जल गुणवत्ता सुधार जैसे कार्य किए जा रहे हैं। यह अभियान अब जन-आंदोलन का रूप ले रहा है, जिसमें ग्रामीण और शहरी स्तर पर सामूहिक श्रमदान और जागरूकता गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं। डिंडोरी जिले में जारी है नर्मदा घाटों पर साप्ताहिक सफाई अभियान डिंडोरी जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “मैया अभियान” के तहत प्रत्येक रविवार को नर्मदा घाटों पर व्यापक सफाई की जा रही है। कलेक्टर मती अंजू पवन भदौरिया के मार्गदर्शन में विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संगठनों और नागरिकों द्वारा श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है। इससे नर्मदा घाटों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। देवास में किया जा रहा जल संरचनाओं का निर्माण और गहरीकरण का कार्य देवास जिले में कलेक्टर  ऋतुराज सिंह के निर्देशन में जल संरचनाओं का निर्माण, गहरीकरण और मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं। ग्राम नानूखेड़ा में सामुदायिक कूप गहरीकरण तथा ग्राम गुसट में तालाब गहरीकरण जनसहयोग से किया गया। इसके अलावा छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ विकासखंड में तालाबों की सफाई और श्रमदान कार्य किए गए। साथ ही, दीवार लेखन, स्कूल गतिविधियों और विद्यार्थियों के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश फैलाया जा रहा है। तालाब और प्राचीन बावड़ियों की सफाई कर संरक्षण कार्यों को मिली गति जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत छतरपुर में फुटेरा तालाब और प्राचीन बावड़ियों की सफाई कर संरक्षण कार्यों को गति दी गई। अभियान के तहत “हर बूंद का संरक्षण-जीवन का संरक्षण” का संदेश दिया जा रहा है। इसी तरह उमरिया जिले में भी अभियान के तहत दीवार लेखन और जनजागरूकता कार्यक्रमों के साथ-साथ ग्राम बरदढार में बोरी बंधान का कार्य किया गया, जिससे जल संचयन और भूजल स्तर में वृद्धि होगी। टीकमगढ़ में ईदगाह स्थित कुएं की सफाई के लिए श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर  विवेक श्रोत्रिय ने नागरिकों से जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील की। दीवार लेखन, पोस्‍टर और निबंध प्रतियोगिता के माध्‍यम से जागरूकता पांढुर्णा जिले में दीवार लेखन, पोस्टर और निबंध प्रतियोगिताओं के माध्यम से जल संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। विद्यार्थियों ने “जल ही जीवन है” जैसे संदेशों के जरिए लोगों को प्रेरित किया। इसके अतिरिक्‍त अभियान के तहत शहडोल में नाग तलैया की सफाई के लिए श्रमदान कार्यक्रम आयोजित कर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई और नागरिकों को सामूहिक शपथ दिलाई गई। “जल गंगा संवर्धन अभियान” मध्यप्रदेश में जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल बनकर उभर रहा है, जिसमें शासन और समाज मिलकर जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।  

बिहटा टेक्नोलॉजी सेंटर उद्घाटन: बिहार के विकास को लेकर सरकार का नया रोडमैप

पटना मंगलवार को पटना से सटे बिहटा में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से बनाए गए टेक्नोलॉजी सेंटर का उद्घाटन किया गया है। उस उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद थे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में इस टेक्नोलॉजी सेंटर को बिहार के विकास में एक अहम मोड़ बताया। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने बताया कि 28 नवंबर 2027 को नई सरकार के एक साल पूरा होने पर उनका टारगेट क्या है। सीएम ने इस दौरान उनकी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र भी किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार बदल रहा है। अगर बिहार को समृद्ध बनाना है तो सबसे पहले एमएसएमई की पूरी व्यवस्था खड़ी करनी होगी। एमएसएमई ने जितना काम किया है उसे देखकर मैं अचंभित हूं। बिहार में 1 करोड़ 86 लाख लोग MSME से जुड़े और लगभग एक लाख करोड़ का बाजार है। ये बिहार है। अब तक बिहार को कोई नहीं देखता था। लोग सोचते थे कि यहां जनसंख्या अधिक है तो यहां गरीबी इसी वजह से है। लेकिन अब भारत की अर्थव्यवस्था में 14 करोड़ बिहारी एक उपभोक्ता के तौर पर इस देश को जीएसटी देने का काम कर रहे हैं। इसलिए आज बिहार बदल रहा है और जब बिहार बदलेगा तब ही तो हम समृद्ध हो पाएंगे। सम्राट चौधरी ने आगे कहा, 'मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने सड़क, बिजली और घरों तक पानी पहुंचाने का काम किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने पूरी ताकत से बिजली से जुड़ी चीजों को मजबूती देने का काम किया है। लेकिन हमारा टारगेट है कि अगले 20 नवंबर को जब इस सरकार के एक साल पूरे हो तो हम जरुर आश्वस्त करते हैं कि हमारा प्रयास है कि बिहार में जो निवेश नहीं होता है तो सबसे पहले 5 लाख करोड़ का निवेश इसी बिहार की धरती पर लाने का काम किया जाएगा और सभी लोग उद्योग से जुड़ेंगे। ' सम्राट चौधरी ने गिनाए तीन बड़े फैसले इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार द्वारा लिए गए तीन बड़े फैसलों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन बड़े फैसले हमलोगों ने ली है। पहला- डिग्री कॉलेज। जिन बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे अनुमंडल या ब्लॉक में जाना पड़ता था। इस बार हमलोगों ने तय किया है कि जुलाई माह जितने भी बिहार में वैसे ब्लॉक हैं जो बिना डिग्री कॉलेज के हैं उन सभी ब्लॉक में डिग्री कॉलेज खोलने का काम किया जाएगा। इसके बाद सीएम ने कहा कि बिहार में लोग चिंतित रहते थे हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ेंगे। हमलोगों ने तय किया है कि 533 ब्लॉक में एक-एक मॉडल स्कूल खोलेंगे ताकि वहां के बच्चे वहीं पढ़ाई करेंगे उन्हें बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी। तीसरे बड़े फैसले के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इसके बाद मैंने कहा कि एक सहयोग कार्यक्रम चलाइए। इसके तहत हम महीने में 2 कैंप लगाएंगे। 2 कैंप लगाकर ब्लॉक, अंचल और थाने की समस्या को ऑन स्पॉट हमारे पदाधिकारी समाप्त करने का काम करेंगे।