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ठगी का नया तरीका: Ludhiana में फर्जी एक्सीडेंट दिखाकर वसूली, महिलाएं-बुजुर्ग टारगेट

लुधियाना. शहर में एक शातिर गिरोह सक्रिय हो गया है, जो व्यस्त ट्रैफिक सिग्नलों और भीड़भाड़ वाले चौकों पर फर्जी एक्सीडेंट का ड्रामा रचकर लोगों से जबरन पैसे वसूल रहा है। इस गिरोह के निशाने पर खासतौर पर महिलाएं और बुजुर्ग ड्राइवर हैं। इस संबंध में धवल अग्रवाल ने पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के अनुसार, गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम देता है। जब कोई कार ट्रैफिक सिग्नल या जाम में रुकती है, तो बाइक सवार युवक कार के बेहद करीब आकर खड़े हो जाते हैं। इसके बाद अचानक चिल्लाने लगते हैं कि कार का टायर उनके पैर पर चढ़ गया या वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। कुछ ही देर में गिरोह के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंचकर ड्राइवर को घेर लेते हैं और आक्रामक व्यवहार शुरू कर देते हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह गिरोह उन ड्राइवरों को ज्यादा निशाना बनाता है जो सीट बेल्ट नहीं लगाए होते या मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे होते हैं। उनके एक दोस्त से दुगरी नहर पुल के पास 40 हजार रुपये वसूले गए, जबकि गिल रोड के पास उनके चाचा के साथ भी ऐसी कोशिश की गई, लेकिन वे बच निकले। उन्होंने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सरकार का बड़ा फैसला: 7 जिलों में पत्थर खनन को मिली मंजूरी, बढ़ेगा राजस्व

 पटना  बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सर्वेक्षण के बाद चयनित आधा दर्जन से अधिक जिलों में पत्थर खनन होगा। इसके पूर्व क्षेत्रों की बंदोबस्ती ई-नीलामी के माध्यम से की जाएगी। सरकार ने इस काम को प्राथमिकता में करने के लिए मेटल स्क्रैप ट्रेड कारपोरेशन (एमएसटीसी) को ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के रूप में चयनित किया है। यह संस्थान पारदर्शी तरीके से आनलाइन नीलामी प्रक्रिया संचालित करेगा। 7 जिलों का कराया सर्वेक्षण खान एवं भू-तत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्टोन चिप्स के लिए प्रदेश को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना होता है। बिहार में पत्थर खनन पर रोक इसकी वजह थी, परंतु अब सरकार ने करीब सात जिलों का सर्वेक्षण कराया है जहां से पत्थर खनन का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से कई फायदे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राज्य में चल रही सरकारी परियोजनाओं के लिए पत्थर और स्टोन चिप्स उचित दर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे निर्माण कार्यों की लागत में कमी आएगी, जिससे सड़कों, पुलों और अन्य विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। बिहार के राजस्व में होगी वृद्धि इसके अलावा, पत्थर खनन पट्टों की व्यवस्थित बंदोबस्ती से राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। अभी तक अवैध खनन या अनियमित प्रक्रियाओं के कारण सरकार को पूरा राजस्व नहीं मिल पाता था, लेकिन ई-नीलामी से यह प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित होगी। इस निर्णय से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खनन कार्यों के संचालन से स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विभाग का दावा है कि यह कदम राज्य के विकास, राजस्व वृद्धि और आम लोगों को सस्ती निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

गूगल सर्च पर फर्जी नंबर से साइबर फ्रॉड, इलाज में देरी से गई जान

जमशेदपुर लौहनगरी में साइबर अपराधियों की संवेदनहीनता का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। ठगों ने न केवल एक परिवार की गाढ़ी कमाई लूटी, बल्कि उनकी मदद की उम्मीद तोड़कर एक मरीज की जान भी जोखिम में डाल दी। मानगो निवासी आरएन चौहान से ठगों ने एयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के नाम पर 8 लाख रुपये की ठगी कर ली। समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण मरीज को हैदराबाद नहीं ले जाया जा सका, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इलाज की जल्दबाजी का उठाया फायदा शिकायतकर्ता आरएन चौहान के अनुसार, उनके रिश्तेदार मोहन सिंह की स्थिति गंभीर थी और वे जमशेदपुर के TMH (टाटा मुख्य अस्पताल) के CCU में भर्ती थे। चिकित्सकों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी थी। परिजनों ने आनन-फानन में इंटरनेट पर एयर एंबुलेंस सेवा की तलाश शुरू की। सर्च इंजन (Google) पर मिले एक नंबर पर संपर्क करने पर अपराधियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित एयर एंबुलेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताया। सौदा 8 लाख रुपये में तय हुआ, जिसे परिजनों ने तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया। पैसे मिलते ही शुरू हुई बहानेबाजी रकम ट्रांसफर होने के बाद, कथित कंपनी ने एंबुलेंस भेजने के नाम पर टालमटोल शुरू कर दी। कभी तकनीकी खराबी तो कभी क्लीयरेंस का बहाना बनाया गया। परिजन परेशान होते रहे जब तक परिजनों को ठगी का अहसास हुआ और वे वैकल्पिक व्यवस्था करते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों के अभाव और समय पर शिफ्टिंग न होने के कारण मरीज मोहन सिंह ने दम तोड़ दिया। ऐसे करते हैं बदमाशी 1. खोज नहीं सावधानी जरूरी: साइबर अपराधी अक्सर गूगल एड्स का सहारा लेकर फर्जी वेबसाइट्स और नंबरों को टॉप सर्च में लाते हैं। लोग मुसीबत के वक्त पहले या दूसरे नंबर पर भरोसा कर लेते हैं। इसे Search Engine Result Page (SERP) Poisoning कहा जाता है। 2. एयर एंबुलेंस का औसत खर्च: आमतौर पर भारत में एयर एंबुलेंस का खर्च दूरी और सुविधाओं के आधार पर 5 लाख से 15 लाख रुपये तक होता है। अपराधी इसी रेंज का फायदा उठाकर लोगों को असली होने का भरोसा दिलाते हैं। 3. आधिकारिक स्रोत: किसी भी आपातकालीन हवाई सेवा के लिए केवल DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा प्रमाणित ऑपरेटरों या बड़े निजी अस्पतालों के आधिकारिक पैनल पर ही भरोसा करना चाहिए। बचाव के लिए क्या करें?     सत्यापन: केवल वेबसाइट पर दिए नंबर पर भरोसा न करें। कंपनी का भौतिक पता और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें।     अस्पताल की मदद लें: TMH जैसे बड़े अस्पतालों का अपना पैनल होता है या वे विश्वसनीय सेवाएं सुझाते हैं। बाहरी अज्ञात स्रोत के बजाय अस्पताल प्रशासन से संपर्क करें     पेमेंट गेटवे: सीधे बैंक ट्रांसफर या UPI के बजाय आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भुगतान की कोशिश करें, हालांकि आपात स्थिति में यह कठिन होता है।     शिकायत: ऐसी किसी भी ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।  

Census 2027: रांची नगर निगम की पहल, 16 भाषाओं में ऑनलाइन जनगणना सुविधा

रांची  जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (स्वयं विवरण भरने) विषय पर बुधवार को रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता रौशनी खलखो ने की, जबकि उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव एवं अपर नगर आयुक्त संजय कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर बताया गया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जनभागीदारी आधारित होगी। नागरिक अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। स्व-गणना (स्वयं विवरण भरना) के तहत लोगों को स्व-गणना जनगणना की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवासी अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं आनलाइन भरकर जमा करते हैं। वही नागरिक 1 मई से 15 मई तक अपने मोबाइल के https://se.census.gov.in/⁠ के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण इसके बाद यह सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस चरण में सबसे पहले मकान सूचीकरण (घर-घर का विवरण) किया जाएगा, जिसके बाद जनसंख्या गणना शुरू होगी। इसके अतिरिक्त 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। महापौर रौशनी खलखो ने नागरिकों से निर्धारित अवधि में स्व-गणना पूरा करने की अपील करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। लोगों को डेटा रहेगा सुरक्षित को लेकर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि यह डिजिटल जनगणना रांची नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मकान गणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे और नागरिकों को 16 भाषाओं में फार्म भरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ओटीपी (एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड) या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जाएगी तथा सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं स्थिर रहेंगी। इस दौरान कोई नया वार्ड या नगर निकाय नहीं बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई भी अधिकारी आपसे ओटीपी या दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। केवल फार्म में पूछी गई जानकारी ही भरनी होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता, नगर निगम के अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।

आत्मसमर्पण के बाद बढ़ी अंदरूनी कलह, Naxal Central Committee का देवजी पर बड़ा हमला

जगदलपुर. नक्सल मोर्चे से बड़ी खबर सामने आई है, जहां माओवादी संगठन के भीतर आंतरिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) द्वारा जारी एक प्रेस नोट में आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी पर तीखा हमला किया गया है। NCC ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि देवजी अब संगठन के लिए “गद्दार” हैं और उनके आत्मसमर्पण के बाद संगठन का उनसे कोई संबंध नहीं रह गया है। इस बयान के बाद माओवादी खेमे में हलचल और तेज हो गई है। आत्मसमर्पण के बाद बढ़ा विवाद बता दें कि वेणुगोपाल देवजी के आत्मसमर्पण को लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बताई जा रही थी। अब NCC के ताजा बयान ने इस विवाद को सार्वजनिक रूप से और बढ़ा दिया है। संगठन ने यह भी कहा है कि उनका संघर्ष अब भी जारी रहेगा और वे सशस्त्र आंदोलन को ही अंतिम रास्ता मानते हैं। ‘गोरिल्ला युद्ध’ जारी रखने का दावा प्रेस नोट में NCC ने दोहराया है कि संगठन कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन वह खत्म नहीं हुआ है। बयान में कहा गया है कि वे “गोरिल्ला युद्ध” के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहेंगे और “क्रांति” को जारी रखेंगे। प्रतिबंध हटाने की मांग खारिज, आंतरिक एकता का दावा देवजी द्वारा माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को भी NCC ने सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने इसे व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि यह विचार संगठन की आधिकारिक नीति नहीं है। अपने बयान में NCC ने यह भी दावा किया है कि संगठन के भीतर किसी भी तरह की दरार या मतभेद नहीं हैं और वे पूरी तरह एकजुट हैं।

करिश्मा कपूर के बच्चों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, सौतेली मां से छीना गया अधिकार

मुंबई  दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म एक्ट्रेस करिश्मा कपूर के बच्चों (कियान और समायरा) की तरफ से दायर एक याचिका पर फैसला सुनाते हुए उन्हें बड़ी राहत दे दी। अदालत ने इन बच्चों की सौतेली मां और दिवंगत कारोबारी संजय कपूर की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर को संजय कि संपत्ति से किसी भी तरह का लेन-देन करने से अंतरिम तौर पर रोक दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संजय कपूर के बैंक खाते और विदेश में मौजूद उनकी क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स फिलहाल निष्क्रिय रहेंगी। जस्टिस ज्योति सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि मामले का ट्रायल लंबा चल सकता है, इसलिए इस दौरान संपत्ति को सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है और उसे किसी भी तरह से खत्म या स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए। ..ताकि आखिरी फैसले तक संपत्ति की स्थिति ना बदले अदालत ने कहा कि संजय कपूर की पूरी संपत्ति को संरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि अंतिम निर्णय तक उसकी स्थिति में कोई बदलाव न हो। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई सभी चिंताओं का जवाब प्रतिवादी (प्रिया कपूर) को देना होगा। बच्चों ने जताई थी संपत्ति में हेरफेर की आशंका यह अंतरिम आदेश करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर उस याचिका पर आया है, जिसमें उन्होंने संजय कपूर की संपत्ति से जुड़े मामले में अंतरिम राहत की मांग की थी। करिश्मा कपूर के बच्चों ने कथित वसीयत को चुनौती देते हुए आशंका जताई थी कि संपत्ति में हेरफेर या उसे इधर-उधर किया जा सकता है। संजय छोड़ गए 30 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति देश के बड़े कारोबारियों में से एक संजय कपूर का पिछले साल जून में लंदन में निधन हो गया था। वे अपने पीछे करीब 30,000 करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़ गए हैं। संजय कपूर और उनकी दूसरी पत्नी करिश्मा कपूर के बच्चों कियान और समायरा का आरोप लगाया है कि संजय की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर ने उनके दिवंगत पिता के नाम पर एक फर्जी वसीयत तैयार की और उनकी संपत्तियों का अधूरा ब्यौरा जमा किया। इस मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने आगे कहा कि वसीयत की प्रामाणिकता को लेकर उठ रहे संदेहों को दूर करने की जिम्मेदारी प्रिया कपूर पर है। कोर्ट ने यह भी कहा कि करिश्मा कपूर के बच्चों ने पहली नजर में अपना मामला साबित कर दिया है। संजय की मां ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई है याचिका इससे पहले इसी परिवार से जुड़े एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार को दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की पत्नी प्रिया कपूर और अन्य से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें उनकी मां ने पारिवारिक न्यास को 'अमान्य' घोषित करने के निर्देश देने का अनुरोध किया है। 80 वर्षीय रानी कपूर द्वारा दायर इस याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित न्यास को जाली, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी वाले दस्तावेजों से बनाया गया है। उनकी याचिका पर कोर्ट ने प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को मध्यस्थता के विकल्प तलाशने का सुझाव दिया है। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने सोना ग्रुप फैमिली न्यास को लेकर विवाद में शामिल पक्षों से मध्यस्थता का विकल्प तलाशने को कहा। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कपूर की तरफ से पेश हुए वकील से कहा, 'आप सब क्यों लड़ रहे हैं? यह आपके मुवक्किल के लड़ने की उम्र नहीं है।' बेंच ने कहा, 'एक बार मध्यस्थता का रास्ता अपना लें। वरना यह सब व्यर्थ होगा। आपकी उम्र 80 साल है। यह आपके मुवक्किल के लिए लड़ने की उम्र नहीं है।' कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए सात मई की तारीख तय की है।

ड्रग माफिया पर सरकार का वार, Bathinda में अवैध निर्माण ध्वस्त

बठिंडा. पंजाब में नशा विरोधी अभियान के तहत सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में बठिंडा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के अंतर्गत धोबियाना बस्ती में वीरवार को प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एनडीपीएस मामले के आरोपी की अवैध इमारत पर बुलडोजर चला दिया। यह निर्माण कमल गर्ग पुत्र रमेश कुमार द्वारा गैरकानूनी तरीके से किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार संबंधित व्यक्ति को कई बार नोटिस जारी किए गए थे और अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके आरोपी ने न तो निर्माण हटाया और न ही प्रशासन के आदेशों का पालन किया। इसके बाद डिप्टी कमिश्नर कम मजिस्ट्रेट के निर्देशों पर सिविल प्रशासन ने पुलिस सुरक्षा के बीच कार्रवाई करते हुए इमारत को गिरा दिया। नशा तस्करी के चार मामले पहले से दर्ज बताया जा रहा है कि आरोपी के खिलाफ मादक पदार्थ से जुड़े कानून के तहत चार मामले पहले से दर्ज हैं। इस वजह से प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पंजाब सरकार के ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान के तहत की गई है, जिसके अंतर्गत जिले में लगातार अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि नशे के खिलाफ इस अभियान में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें। इसके लिए एंटी ड्रग हेल्पलाइन नंबर 97791-00200 और 91155-02252 जारी किए गए हैं। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। अब तक 16 अवैध निर्माण गिराए जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार बठिंडा में अब तक 16 अवैध निर्माणों को गिराया जा चुका है। इसके अलावा एक मार्च 2025 से अब तक 2418 मामले दर्ज किए गए हैं और 3458 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें 89 बड़े तस्कर भी शामिल हैं। वहीं वर्ष 2023 से अब तक 87 आरोपियों की करीब 14 करोड़ 21 लाख रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा चुकी है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और नशा तस्करों के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- ‘नागरिकों का सम्मान करिए’

15 साल की बच्ची ने झेला असहनीय दर्द, CJI सूर्यकांत हुए भावुक, बोले- 'मैडम, नागरिकों का सम्मान करिए' CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- 'नागरिकों का सम्मान करिए' 15 साल की बच्ची ने कितना दर्द झेला', CJI सूर्यकांत ने किया भावुक बयान, 'मैडम, नागरिकों का सम्मान जरूरी है' नईदिल्ली   नाबालिग के गर्भपात मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है. नाबालिग के गर्भपात मामले में में एम्स दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और अपील पर विचार करने की गुहार लगाई थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को कहा कि 15 साल की रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी खत्म करने का फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का होना चाहिए, जिसमें मेडिकल एक्सपर्ट उन्हें सही फैसला लेने में मदद करें. सीजेआई सूर्यकांत ने बच्ची की पीड़ा को समझते हुए साफ-साफ कहा कि अनचाही प्रेग्नेंसी नहीं थोपी जा सकती है. उन्होंने सरकारी वकील से कहा कि जरा सोचिए इस बच्ची ने कितनी पीड़ा झेली होगी।  मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स (AIIMS) जैसी संस्थाएं परिवार को गाइड कर सकती हैं, ताकि वे सोच-समझकर फैसला ले सकें. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी पीड़िता पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती और इसमें होने वाले इमोशनल और फिजिकल ट्रॉमा को भी हाईलाइट किया. दरअसल, सरकार ने एक 15 साल की बच्ची की 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने के पहले के आदेश के खिलाफ एक क्यूरेटिव याचिका दायर की थी. उस बच्ची के साथ रेप हुआ था. महिलाओं के अपने शरीर पर अधिकार की लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हो सकने वाले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांग की कि वह व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करे।  ‘अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती’ सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि किसी नाबालिग को रेप से हुई प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके पहले से सहे जा रहे दुख को और बढ़ा देगा और उसके मन पर ज़िंदगी भर के लिए गहरे ज़ख्म छोड़ सकता है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘यह 15 साल की बच्ची की अनचाही प्रेग्नेंसी है… किसी भी इंसान पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती. जरा सोचिए, वह अभी बच्ची है. उसे अभी पढ़ाई करनी चाहिए. लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं. जरा सोचिए, इस पूरी घटना में उस बच्ची ने कितना दर्द झेला होगा और कितनी बेइज्जती सही होगी।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रेग्नेंसी खत्म करने से मां को कोई परमानेंट डिसेबिलिटी नहीं होती है, तो इस पर विचार किया जा सकता है. सीजेआई की बेंच ने फिर दोहराया कि आखिरी फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का ही होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया कि वह परिवार की काउंसलिंग करे, ताकि वे सोच-समझकर कोई फैसला ले सकें।  कोर्ट ने कानूनी सुधार की जरूरत बताई सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या मौजूदा कानूनों में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि रेप पीड़िता के मामलों में प्रेग्नेंसी खत्म करने की मौजूदा 20 हफ्ते की समय सीमा को बढ़ाया जा सके।  ‘कानून को समय के साथ बदलना चाहिए’ अधिक लचीले कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कोई सख्त समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा, ‘जब रेप की वजह से प्रेग्नेंसी होती है, तो कोई समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कानून को लचीला होना चाहिए और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।  AIIMS ने मेडिकल चिंताएं जताईं AIIMS की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना शायद मेडिकल तौर पर मुमकिन न हो. उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी 30 हफ़्ते तक पहुंच चुकी है और भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिग मां को गंभीर शारीरिक विकृतियों और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. उन्होंने गोद लेने (Adoption) के विकल्प का भी सुझाव दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि अंतिम फैसला पीड़ित और उसके माता-पिता का ही होगा, जिसमें मेडिकल विशेषज्ञ उनकी मदद करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल के अपने एक पिछले आदेश का भी जिक्र किया, जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने 30 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाज़त दी थी।  चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में इस पर क्या हुआ, किसने क्या कहा?     सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आज यानी गुरुवार सुबह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को फटकार लगाते हुए कहा, ‘रेप के बाद उस बच्ची (पीड़िता) ने जो तकलीफ झेली है, उसकी भरपाई कोई भी चीज नहीं कर सकती।      उन्होंने सरकार की वकील से कहा, ‘नागरिकों का सम्मान करें, मैडम. आपके पास (कोर्ट के प्रेग्नेंसी खत्म करने के आदेश को) चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है… केवल पीड़िता या उसका परिवार ही इसे चुनौती दे सकता है।      जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, ‘हम व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करते हैं, और आपको भी करना चाहिए…’     सुप्रीम कोर्ट ने यह फटकार तब लगाई जब सरकारी वकील भाटी ने दलील दी कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि बच्ची के पास अब केवल एक ही विकल्प बचा है. बच्चे को जन्म देना और उसे गोद देने के लिए सौंप देना।      इससे पहले भाटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था, बहुत दुख के साथ हमें यह क्यूरेटिव याचिका पेश करनी पड़ रही है. यह AIIMS की रिपोर्ट पर आधारित है. प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. पैदा होने वाला बच्चा गंभीर शारीरिक विकृतियों के साथ जीवित होगा… और नाबालिग माँ को ज़िंदगी भर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।   

स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा बदलाव, OnePlus और Realme ने मिलकर बनाई नई स्ट्रैटेजी

 पिछले कुछ समय से अफवाह थी कि OnePlus बंद हो सकता है। इसे लेकर अब बड़ा अपडेट आया है। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus और Realme आपस में मर्ज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा चीन और ग्लोबल दोनों बाजारों के लिए किया गया है। ऐसे में यह एक अलग सब-प्रोडक्ट सेंटर बन गया है, जहां दोनों ब्रैंड्स की रिसर्च, डेवलपमेंट और मार्केटिंग टीमें एक साथ मिलकर काम करेंगी। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या OnePlus पूरी तरह से बंद होने वाला है, जिसका जवाब है नहीं। बताया जा रहा है कि यह विलय बदलते स्मार्टफोन मार्केट का नतीजा है। कुछ समय से स्मार्टफोन मार्केट में कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और चिप्स की कमी ने कंपनियों के लिए अस्तित्व में बने रहना मुश्किल कर दिया है। इसके अलावा बाजार में कंपटीशन की भी कमी नहीं है। यही वजह है कि बीबीके ग्रुप ने फैसला लिया है कि OnePlus और Realme एक साथ R&D, सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट का काम देखेंगे। क्या बंद हो जाएगा OnePlus? इस मर्जर की खबरें आने के बाद से लोग सोशल मीडिया पर कयास लगा रहे हैं कि क्या यह OnePlus का अंत है? रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐसा नहीं है। बताया जा रहा है कि इस मर्जर के बाद Oneplus प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर और Realme बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर फोकस करेगा। ऐसा भी बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस अब ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर दे रहा है, जो कि लागत कम करने का तरीका हो सकता है।(REF.) यूजर्स को इससे फायदा या नुकसान?     इस मर्जर से यूजर्स को कुछ फायदे होंगे, तो कुछ नुकसान भी। दरअसल:     अब दोनों ब्रांड्स की टीमें रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयर करेंगी। इससे संभव है कि पहले के मुकाबले सॉफ्टवेयर अपडेट्स और लेटेस्ट फीचर्स तेजी से यूजर्स को मिल सकें।     दोनों कंपनियों के रिसोर्स और सप्लाई चेन जुड़ने से प्रोडक्शन पर आने वाली लागत गिरेगी। कंपनी चाहे तो यह बचत ग्राहकों तक पहुंचा सकती है। Oneplus-Realme मर्जर से यूजर्स को ये नुकसान     इस मर्जर से बाजार में वैरायटी की कमी हो सकती है। दरअसल पहले ही ये ब्रैंड्स वनप्लस नॉर्ड CE6 लाइट और रियलमी P4X को एक जैसे हार्डवेयर के साथ पेश कर चुके हैं। ऐसे में आगे चलकर ऐसा और भी ज्यादा होने की संभावना है।     इस मर्जर से OnePlus की ब्रैंड वैल्यू पर फर्क पड़ सकता है। असल में OnePlus की एक प्रीमियम और अलग पहचान थी। अब Realme भी OnePlus जैसे फोन लॉन्च कर उसकी पहचान को धुंधला जरूर करेगा।     बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर देगा। ऐसे में वे यूजर्स जो ऑफलाइन फोन खरीदना पसंद करते हैं, वे OnePlus से दूर होने लगेंगे।  

कच्चे माल के संकट में फंसी कॉटन इंडस्ट्री, पंजाब का टेक्सटाइल सेक्टर अब दूसरे राज्यों पर निर्भर

लुधियाना कच्चे माल की कमी ने पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री की रफ्तार थाम दी है। हालत यह है कि स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार कपास उपलब्ध नहीं हो रही, जिसके चलते उद्योगों को महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से कच्चा माल मंगवाकर उत्पादन चलाना पड़ रहा है।  इस संकट ने खासकर जिनिंग सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां कभी 422 इकाइयां संचालित होती थीं, अब उनकी संख्या घटकर मात्र 25 रह गई है। उद्यमियों का कहना है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। 7 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.2 लाख पर सिमटा रकबा एक समय पंजाब में सात लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती थी, जिससे राज्य में जिनिंग और स्पिनिंग उद्योग तेजी से विकसित हुआ। लेकिन बीते वर्षों में कपास का रकबा लगातार घटता गया, 2019 में यह 3.35 लाख हेक्टेयर था और अब यह करीब 1.2 लाख हेक्टेयर तक सिमट चुका है। रकबा घटने के पीछे कीटनाशक हमले, कम पैदावार और किसानों का अन्य फसलों की ओर झुकाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। उन्नत बीज की कमी से पिछड़ रहा पंजाब पंजाब कॉटन फैक्ट्रीज एंड जिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान बांसल के अनुसार, महाराष्ट्र में किसानों को जी-4 जैसी उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जो गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी जैसी बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी है। इससे वहां प्रति एकड़ 12-15 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। इसके विपरीत, पंजाब अभी भी पुरानी किस्मों पर निर्भर है, जिससे पैदावार कम है और किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं। उत्पादन में भारी अंतर, बाहर से मंगानी पड़ रही कपास आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में महाराष्ट्र में लगभग 1.15 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन हुआ, जबकि पंजाब में यह आंकड़ा केवल 1.5 लाख गांठ तक सीमित है। यही कारण है कि राज्य की स्पिनिंग मिलों और जिनिंग इकाइयों को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। –देशभर में 26 अप्रैल 2026 तक कपास की आवक 308.70 लाख गांठ को पार कर चुकी है और 30 अप्रैल 2026 तक 311 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है। पूरे सीजन में कुल उत्पादन 335 लाख गांठ से अधिक रहने की संभावना है, लेकिन इसमें पंजाब की हिस्सेदारी बेहद कम है। कई इकाइयां बंद, कारोबार का पलायन कपास की कमी के चलते राज्य में बड़ी संख्या में जिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं। कई उद्योगपति अपना कारोबार राजस्थान और अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर चुके हैं। इससे न केवल उद्योग प्रभावित हुआ है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ा है। सरकार का फोकस: सब्सिडी और रकबा बढ़ाने का लक्ष्य स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने कपास की खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रमाणित बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने का फैसला किया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, सरकार ने 2026 के लिए कपास का रकबा 1.25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित 87 बीटी हाइब्रिड और चार देसी किस्मों को शामिल किया गया है। सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। धान से कपास की ओर शिफ्ट की अपील सरकार ने किसानों से अधिक पानी खपत करने वाली धान की खेती छोड़कर कपास की ओर रुख करने की अपील की है। इसे ‘सफेद सोना’ बताते हुए वैज्ञानिक खेती और उन्नत बीजों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि सरकार के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उद्योग को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही। जब तक उत्पादन और रकबा दोनों में ठोस वृद्धि नहीं होती, तब तक पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री पर संकट के बादल छाए रहेंगे।