samacharsecretary.com

चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू, छात्रों को मिलेगी फेलोशिप

 रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।   किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

वास्तु शास्त्र: छाया वेध और कोण वेध से घर-व्यापार पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

घर या किसी भी व्यवसायिक स्थान, दुकान पर किसी भी वस्तु की छाया आना दोषपूर्ण होता है। घर पर किसी भी टॉवर, वृक्ष या धार्मिक स्थल में बने ऊंचाई की छाया पड़ती है तो ऐसे में घर में रहने वाले या व्यवसायिक स्थल पर काम करने वालों को पर्याप्त धन लाभ होते हुए भी नित नई-नई परेशानियों और तनावों का सामना करना पडता है। वास्तुशास्त्र के नियमों को मानें तो छाया वेध के कारण घर में आकस्मिक घटनाएं घटने की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं, यही छाया वेध व्यवसाय स्थल पर होने से वहां कार्य करने वालों को भी तनाव में रखता है, जिससे लाभ की अपेक्षा घाटे की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं। कुल मिलाकर छाया वेध से घर व व्यवसायिक मालिक के लिए रोग, धन-यश नाशक दरिद्रजनक स्थिति होती है, अतः घर या दुकान खरीदते समय इस बात पर अवश्य ध्यान दें कि कहीं आपके घर, दुकान पर किसी की छाया तो नहीं पड़ रही। कोण वेध- कोण वेध भी वास्तु शास्त्र के निमयों के अनुसार अनिष्टकारक होता है, जैसे दुकान या व्यवसाय स्थल के प्रवेश द्वार के ठीक सामने अन्य किसी इमारत का कोना आ जाता है, उसे कोण वेध कहते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रवेश द्वार को परिवर्तित कर देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो द्वार को गोलाई युक्त करवा देने से भी कोण वेध कम हो जाता है। द्वार वेध- द्वार संबंधी किसी भी रुकावटे या बाधा, असुविधा या विकृति को द्वार वेध कहा जाता है। यह अक्सर हानि, दुख और अपयश का कारण बनता है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि समस्त द्वार खुलते और बंद होते समय भूमि में रगड़, किसी प्रकार की आवाज, उपयोग करते समय भारी होना, कठोर होना या तेज गति से खुलना बंद होना द्वार वेध होता है, इससे प्रगति, सुख, व्यवसाय मार्ग के रास्ते अवरोधित हो जाते हैं, अतः समस्त प्रकार के वेध अवरोध से बचना चाहिए।  

नागपुर में RSS मुख्यालय और स्मृति मंदिर को ‘रेडिएशन’ अटैक की धमकी, सुरक्षा बढ़ाई गई

नागपुर   महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय और डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर में 'रेडिएशन' की धमकी से हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर को भेजी गई एक गुमनाम चिट्ठी में दावा था कि आरएसएस मुख्यालय और स्मृति मंदिर में रेडियोएक्टिव पदार्थ फैला दिया गया है। यह चिट्ठी कथित तौर पर 'डीएसएस' नाम के एक संगठन ने भेजी है। इस चिट्ठी के मिलने के बाद एक बड़े पैमाने पर जांच शुरू हो गई है, जिसमें एंटी-टेररिज्म स्क्वाड (एटीएस) और एनडीआरएफ भी शामिल हैं। अंग्रेजी में लिखी यह गुमनाम चिट्ठी 27 अप्रैल को डाक के जरिए पुलिस कमिश्नर रविंद्रकुमार सिंघल के दफ्तर पहुंची। इसमें आरएसएस के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था और एक चेतावनी दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में कहा गया था कि सीजियम-137 नाम का एक बेहद खतरनाक रेडियोएक्टिव पाउडर कई अहम जगहों पर कथित तौर पर रख दिया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीजियम-137 (137सीएस) धातु सीजियम का एक रेडियोएक्टिव आइसोटोप है। यह प्राकृतिक रूप से नहीं पाया जाता। यह न्यूक्लियर रिएक्टरों और हथियारों में यूरेनियम के न्यूक्लियर विखंडन से बनने वाला एक उप-उत्पाद है। इसकी हाफ-लाइफ (अर्ध-आयु) 30.05 साल होती है, जिसका मतलब है कि इसकी रेडियोएक्टिविटी को आधा होने में तीन दशक लग जाते हैं। इससे बीटा कण और शक्तिशाली गामा किरणें निकलती हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चिट्ठी में दावा किया गया है कि यह रेडियोएक्टिव पदार्थ आरएसएस मुख्यालय, रेशिमबाग स्थित स्मृति मंदिर, गणेशपेठ स्थित भाजपा दफ्तर, ऑरेंज और एक्वा दोनों लाइनों की मेट्रो ट्रेनों की सीटों पर, और बसों में रखा गया है। दावा किया गया कि उन्हें यह रेडियोएक्टिव पदार्थ एक कैंसर अस्पताल से मिला था। चिट्ठी में आगे अधिकारियों को चुनौती देते हुए कहा गया है, "नागपुर शहर अब पूरी तरह से रेडिएशन के खतरे में है। जब तारापुर एटॉमिक पावर स्टेशन के विशेषज्ञ यहां आकर जांच करेंगे, तब आपको इस बात की सच्चाई का पता चलेगा।" चिट्ठी में हाल ही में हुई एक घटना का भी जिक्र किया गया, जिसमें दोसर भवन मेट्रो स्टेशन के पीछे एक खाली प्लॉट में डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें मिली थीं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 'डीएसएस' ने उन विस्फोटकों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा था, "वह तो बस एक चेतावनी थी। असली खेल तो अब शुरू हुआ है।" पत्र मिलने के बाद, एटीएस ने एनडीआरएफ और परमाणु ऊर्जा विशेषज्ञों के साथ मिलकर आरएसएस मुख्यालय, मेट्रो स्टेशनों और बताई गई दूसरी जगहों की पूरी तरह से तलाशी ली। विशेषज्ञों की शुरुआती तलाशी में अभी तक कोई भी रेडियोएक्टिव पदार्थ नहीं मिला है। हालांकि, एटीएस की शिकायत के आधार पर सदर पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस मुख्यालय 150 सीआईएसएफ जवानों और नागपुर पुलिस की 24 घंटे की कई-स्तरीय सुरक्षा घेरे में है।

डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सेवाएं

राजस्व विभाग की नई पहल ​डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ ​रायपुर          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ​ भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा      राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। ​निःशुल्क डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति ​मोबाइल ऐप की सुविधा और SMS से अपडेट       ​राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब ​निःशुल्क    खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट  के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है। कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।       ​       अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) ​वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है।​ वर्तमान में  राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है। ​असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण         राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।         ​इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व ​कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। ​प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।       इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।​

कीट प्रकोप से कपास फसल प्रभावित, हरियाणा के किसान अब बाजरा और ग्वार की तरफ मुड़े

ढिगावा मंडी. हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।

कृतिका कामरा का बड़ा खुलासा: कास्टिंग काउच के मामले में ‘मैं बाल-बाल बचीं’

मुंबई  कृतिका कामरा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत एक टीवी शो से की थी. टीवी पर पॉपुलर होने के बाद, उन्होंने 2018 में फिल्मों में कदम रखा. लेकिन स्ट्रीमिंग शो 'तांडव' उनके करियर का गेम-चेंजर साबित हुआ. हालांकि यह इतना आसान नहीं था. फिल्मी परिवार का सपोर्ट न होना, यह एक ऐसी चीज है, जिससे इंडस्ट्री के बाहर से आए कई लोगों को जूझना पड़ता है. इसपर कृतिका कामरा ने खुलकर बात की है।  कृतिका कामरा ने खुलासा किया कि अपने करियर के शुरुआती सालों में वह 'कास्टिंग काउच' से कैसे बचीं. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने कास्टिंग काउच जैसी चीजों के बारे में सुना था. मेरे माता-पिता ने भी अखबारों में इसके बारे में पढ़ा था. मेरा भी इससे सामना हुआ था, लेकिन मैं बिना किसी नुकसान के बच निकली. यह बस किस्मत और इत्तेफाक था. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि मैं बहुत ज्यादा स्मार्ट थी. सच कहूं तो मैं स्मार्ट नहीं थी, क्योंकि जब मैंने शुरुआत की थी, तब मैं बहुत छोटी थी।  हालांकि आज उन्होंने खुद को खासकर स्ट्रीमिंग की दुनिया में एक सफल एक्ट्रेस के तौर पर स्थापित कर लिया है, फिर भी कृतिका का कहना है कि उन्हें आज भी 'तरजीही बर्ताव' (preferential treatment) का सामना करना पड़ता है. उनका मानना ​​है कि इसका एक कारण उनका बैकग्राउंड और 'टीवी का टैग' भी हो सकता है. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने इस तरह की ऊंच-नीच (hierarchy) का अनुभव किया है. मैं खुशी-खुशी टीवी पर काम कर रही थी, और मेरे मन में टीवी और फिल्मों के बीच कोई फर्क नहीं था।  मुझे स्मार्ट नहीं समझते फिल्ममेकर्स- कृतिका कृतिका के अनुसार, यह भेदभाव उन्हें 'सामंतवाद' (feudalism) जैसा लगता है. 'मैं एक छोटे शहर से आई थी, और मेरे लिए जो भी इंसान स्क्रीन पर दिखता था, वह एक एक्टर ही होता था. मुझे इस 'बिन-कही ऊंच-नीच' के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जो एक तरह से सामंतवाद जैसा ही है. मुझे इस बात का भी अंदाजा नहीं था कि स्क्रीन पर दिखने और निभाए गए किरदारों के आधार पर लोगों के बारे में कैसी राय बना ली जाती है।  जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या फिल्ममेकर्स पहले और कभी-कभी आज भी उन्हें जज करते हैं? इस पर एक्ट्रेस ने कहा,'मुझे लगता है कि जब लोग मुझसे बात करते हैं, या जब उन्हें पता चलता है कि एक्टिंग के अलावा भी मुझे दूसरी चीजों की जानकारी है, तो उनके चेहरे पर हैरानी का एक हल्का सा भाव जरूर होता है. मैं यह तो नहीं कहूंगी कि यह उनकी तरफ से कोई 'जजमेंटल' रवैया है, लेकिन मुझे लगता है कि एक्टर्स के साथ अक्सर ऐसा होता ही है।  'मुझे लगता है कि वे मुझे ऐसा इंसान समझते हैं जो स्मार्ट नहीं है. किसी ने सीधे शब्दों में ऐसा नहीं कहा, लेकिन मुझे यही समझ आया. असल में, जब उन्हें लगा कि मैं स्मार्ट नहीं हूं, तो यह मेरे लिए एक अजीब सी तारीफ थी. अब जैसे-जैसे वह इन सब चीजों से गुज़र रही हैं, उनके लिए एक बात जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता, वह है 'मजबूत इरादों वाली महिलाओं' का किरदार निभाना।  एक्ट्रेस ने कहा, 'मैं एक फेमिनिस्ट हूं. मैं यह गर्व से कहती हूं. मुझे इस बात की परवाह है कि स्क्रीन पर महिला किरदारों को कैसे दिखाया जाता है. यहां तक कि TV पर भी, मैं किचन ड्रामा या ऐसे शो से दूर रही, जिनमें कुछ दकियानूसी सोच वाली चीजों को बढ़ावा दिया जाता था. मैंने ज्यादातर प्रगतिशील चीजें करने की कोशिश की. यह कुछ ऐसा था, जिसका फैसला मैंने अपनी जिंदगी में बहुत पहले ही कर लिया था. फिल्में और वेब शो करते समय भी मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हूं।  अंत में कृतिका ने कहा, 'अपनी पहली फिल्म 'मित्रों' में भी, मैं कोई बेचारी लड़की नहीं थी. मैं एक मजबूत इरादों वाली हीरोइन थी. लेकिन उसके बाद, मुझे आमतौर पर ऐसी कुछ फिल्में ऑफर हुईं, जिनमें मेरे सिर्फ दो सीन और एक गाना था. मैंने उन फिल्मों के लिए मना कर दिया. मैं किसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हूं। 

चाणक्य नीति: मजबूत आर्थिक भविष्य के लिए बचत और समझदारी से खर्च जरूरी

 आज के दौर में सफलता की परिभाषा सिर्फ अच्छे करियर तक सीमित नहीं रह गई है. लोग चाहते हैं कि उनके पास पर्याप्त धन हो, भविष्य सुरक्षित हो और जीवन में स्थिरता बनी रहे. लेकिन अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही तरीके से संभालना और बढ़ाना.  यही कारण है कि सदियों पहले महान अर्थशास्त्री और रणनीतिकार आचार्य चाणक्य ने जीवन और धन प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण नीतियां दी थीं. उनकी बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यवहारिक समझ पर आधारित हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बने, पैसा टिके और समय के साथ बढ़े, तो चाणक्य की ये सीख आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.  बचत: भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा चाणक्य के अनुसार, कमाई का एक हिस्सा हमेशा बचाकर रखना चाहिए. यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है. जीवन में कब कठिन समय आ जाए, इसका अंदाजा नहीं होता, ऐसे में बचत ही आपको संभालती है.  आज के समय में इसे आप इमरजेंसी फंड के रूप में समझ सकते हैं.  चाहे आपकी आय कम हो या ज्यादा, हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाना आपकी वित्तीय स्थिरता की नींव रखता है. फिजूलखर्ची से दूरी ही समझदारी चाणक्य साफ कहते हैं कि बिना सोचे-समझे खर्च करने वाला व्यक्ति कभी धनवान नहीं बन सकता. दिखावे, ट्रेंड या दूसरों को प्रभावित करने के लिए किया गया खर्च लंबे समय में नुकसान ही देता है. आज की लाइफस्टाइल में यह बात और भी ज्यादा लागू होती है, ऑनलाइन शॉपिंग, डिस्काउंट ऑफर्स और सोशल मीडिया के प्रभाव में हम अक्सर जरूरत और चाहत के बीच फर्क भूल जाते हैं.  समझदारी यही है कि खर्च से पहले खुद से पूछें कि क्या यह सच में जरूरी है?  धन का सम्मान करना सीखें पैसा सिर्फ कमाने की चीज नहीं है, बल्कि उसे संभालना एक कला है. चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति धन का सम्मान करता है, वही उसे लंबे समय तक बनाए रख सकता है.  इसका मतलब है बजट बनाना, खर्चों पर नजर रखना और अनावश्यक चीजों पर नियंत्रण रखना.  छोटी-छोटी लापरवाहियां ही बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं. आय के कई स्रोत बनाएं चाणक्य का मानना था कि एक ही स्रोत पर निर्भर रहना जोखिम भरा है. अगर किसी कारण से वह स्रोत बंद हो जाए, तो पूरी आर्थिक व्यवस्था डगमगा सकती है. आज के समय में यह बात और भी अहम है. आप अपनी स्किल्स को बढ़ाकर फ्रीलांसिंग, पार्ट-टाइम काम या निवेश के जरिए अतिरिक्त आय के रास्ते बना सकते हैं. मल्टीपल इनकम सोर्स आपको न सिर्फ सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि तेजी से आगे बढ़ने में भी मदद करते हैं. ज्ञान ही सबसे बड़ा निवेश है चाणक्य के अनुसार, सबसे सुरक्षित निवेश ज्ञान होता है. पैसा कभी भी खत्म हो सकता है, लेकिन ज्ञान आपको फिर से खड़ा होने की ताकत देता है. नई स्किल्स सीखना, खुद को अपडेट रखना और बदलते समय के साथ आगे बढ़ना ये सभी चीजें आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं.

पंजाब में CM भगवंत मान का ऐतिहासिक निर्णय, विधानसभा में प्रस्ताव से 6 महीने के लिए सुरक्षित होगी AAP सरकार

चंडीगढ़  पंजाब में आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्यसभा सांसदों की बगावत के बाद अब पंजाब में पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए आलाकमान बड़ा कदम उठा रहा है. सूत्रों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'ऑपरेशन लोटस' से बचने के लिए AAP सरकार पंजाब विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव ला सकती है।  पंजाब विधानसभा चुनाव का विशेष सत्र 1 मई को बुलाया गया है. यह असेंबली सेशन बुलाया तो श्रमिक दिवस के मौके पर गया है, लेकिन उम्मीद है कि इसमें बहुमत का प्रस्ताव लाया जाएगा. इसका फायदा यह है कि विधानसभा में एक बार बहुमत साबित होने के बाद अगले 6 महीने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार सुरक्षित हो जाएगी।  सरकार गिरने की चिंता से मुक्त होना चाहती है AAP दरअसल, 7 राज्यसभा सांसदों के पाला बदलने के बाद पंजाब में विधायकों की टूट की अटकलें लग रही हैं. अगर ऐसा होता है तो साल 2022 के विधानसभा चुनाव में 92 सीट जीतने वाली AAP पर सरकार बचाने का संकट गहरा सकता है. इसलिए विशेष सत्र में प्रस्ताव लाकर पार्टी बहुमत पर मुहर लगाना चाहती है ताकि सियासी चिंता को संवैधानिक तरीके से खत्म किया जा सके।  सत्र से पहले मान कैबिनेट की बैठक पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र से पहले सुबह भगवंत मान सरकार की कैबिनेट बैठक होगी. यह बैठक सुबह 9.30 बजे बुलाई गई है. विशेष सत्र अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर बुलाया गया है. हालांकि इसमें सरकार कॉन्फिडेंस मोशन भी ला सकती है. पंजाब के 6 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में जाने के बाद कुछ विधायकों के भी पाला बदलने की अटकलें हैं।  इससे पहले भी अक्टूबर 2022 में सरकार कॉन्फिडेंस मोशन लाई थी जब आम आदमी पार्टी ने बीजेपी पर राज्य में ऑपरेशन लोटस के तहत विधायकों को तोड़ने की कोशिश के इल्जाम लगाए थे। 

कपिल शर्मा शो का नया एपिसोड बनेगा हंसी का तड़का, सुनील ग्रोवर और डिजिटल स्टार्स भी शामिल

कहते हैं हंसी ही हर दर्द की दवा है, और जब मौका 'वर्ल्ड लाफ्टर डे' का हो, तो मनोरंजन का डोज दोगुना होना लाजमी है. नेटफ्लिक्स इस खास दिन को यादगार बनाने के लिए 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' का एक ऐसा एपिसोड लेकर आ रहा है, जो कॉमेडी की दुनिया के पुराने महारथियों और आज के डिजिटल दौर के सितारों को एक ही मंच पर खड़ा कर देगा. इस बार का जश्न इसलिए भी बड़ा है क्योंकि इसमें हंसी के साथ-साथ एक अनोखा तालमेल देखने को मिलने वाला है. जिसकी चर्चा बीत 1 साल में सबसे ज्यादा हुई है. इस खास एपिसोड की सबसे बड़ी खूबी इसका जबरदस्त 'क्रॉसओवर' है. एक तरफ कॉमेडी के बेताज बादशाह कपिल शर्मा अपना मोर्चा संभाले हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया और पॉडकास्ट की दुनिया के दो बड़े नाम—समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया. समय और रैना पहली बार साथ? 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' का ये एपिसोड इसलिए भी खास होने वाला है क्योंकि 'India’s Got Latent' विवाद के बाद समय रैना ने रणवीर पर कई बार तंज कसा था. हाल ही में पैप्स से बात करते हुए रणवीर ने कहा था, 'हम दोनों का समय चल रहा है…' जब समय रैना का नाम आया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के जवाब दिया, 'समय… कौन समय?  हमारा समय. यह हमारा समय है, मेरा समय अब ​​है.' वहीं समय ने समय ने बीते दिनों अपना स्टैंड-अप स्पेशल 'Still Alive' रिलीज किया था. जिसमें उन्होंने कहा था,  'उसने (रणवीर) मेरी पूरी मेंटल हेल्थ खराब कर दी, उसे तो मेडिटेशन भी आता है, मुझे तो कुछ भी नहीं आता.' उन्होंने मजाक में रणवीर को 'The Monk Who Sold My Ferrari' भी कहा था.  लेकिन अब देखना दिलचस्प होगा कि दोनों कपिल शर्मा शो में क्या करते हैं. कौन-कौन आएगा नजर? कपिल शर्मा, समय रैना और रणवीर इलाहाबादिया के अलावा शो में ड्रामा और मस्ती का तड़का लगाने के लिए सुनील ग्रोवर भी पूरी तरह तैयार हैं. इसके अलावा रही-सही कसर कृष्णा अभिषेक अपनी 'मोना' वाली अदाओं से और कीकू शारदा 'सोना' बनकर पूरी करेंगे. कब देख पाएंगे ये शो? आप भी अगर इस वर्ल्ड लाफ्टर डे पर हंसी के ठहाकों का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो कैलेंडर में तारीख मार्क कर लीजिए. अलग-अलग टैलेंट और रीयल कॉमेडी का यह खास मेल 2 मई को सिर्फ नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने जा रहा है. कुल मिलाकर यह एपिसोड उन लोगों के लिए एक ट्रीट है जो लंबे समय से कपिल और उनकी टीम की बेमिसाल मस्ती का इंतजार कर रहे थे.

सीएम योगी का विपक्ष पर हमला, बोले- 40 साल से यूपी में बंजर है कांग्रेस, अब सपा की बारी

लखनऊ  उत्तर प्रदेश विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि सपा ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों पर डकैती डालने का काम किया है. आज विपक्ष महिलाओं के श्राप से श्रापित हो चुका है. मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 40 वर्ष बीत गए, लेकिन उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से बंजर जमीन बन गई है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सपा ने कांग्रेस का समर्थन किया है, इसलिए सपा भी जल्द ही बंजर बन जाएगी।  सीएम योगी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ हुए अन्याय और मौलवियों के सामने नाक रगड़ने की वजह से कांग्रेस की दुर्गति हुई. उन्होंने याद दिलाया कि यदि शाहबानो मामले में न्याय मिल गया होता तो कांग्रेस की यह हालत नहीं होती. कांग्रेस ने तीन तलाक की कुप्रथा का समर्थन किया और अब भी सुधरने के बजाय देश को कठमुल्लापन की ओर ले जाना चाहती है।  देख सपाई बिटिया घबराई मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 9 वर्ष में डबल इंजन कि सरकार के कार्यों के परिणाम सामने है. पहले देख सपाई बिटिया घबराई का नारा पब्लिक लगाती थी. पहले लोग अपने बेटियों को पढ़ने के लिए UP से बाहर भेजते थे. आज महिला वर्क फ़ोर्स 26% और अर्थव्यवस्था 3 गुणा बढ़ी है. NCRB के मुताबिक हत्या में 43% गिरावट आई. दहेज़ उत्पीड़न में 19%, रेप दुष्कर्म में 67% की कमी आई. आज देश के सबसे बड़े राज्य के सदन में आधी आबादी के सम्मान पर चर्चा हो।  पूजा पाल का किया जिक्र  मुख्यमंत्री ने सपा पर माफियाओं के सामने नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं. उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है।  महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष की आलोचना योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर संसद में महिला आरक्षण बिल गिराने का आरोप लगाया और कहा कि बिल गिराने के बाद सपा और कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे. उन्होंने कहा कि विपक्ष के इस आचरण से पूरा देश आहत है. सीएम ने सदन में कुछ पुरानी घटनाओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने मई 2014 में बदायूं की चचेरी बहनों से हुई घटना, जुलाई 2016 में बुलंदशहर के राजमार्ग पर हुए सामूहिक बलात्कार और आजम खान द्वारा इसे “राजनीतिक साजिश” बताने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि एक महिला ने एक विधायक पर बलात्कार का आरोप लगाया था, लेकिन न्याय मिलने के बजाय उस महिला की हत्या कर दी गई. लखनऊ के मोहनलालगंज में हुई शर्मनाक घटना का भी उन्होंने जिक्र किया. सीएम योगी ने कहा कि आजम खान और एसटी हसन जैसे नेता जेल से बयान देते थे और विपक्ष आज भी महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के प्रति संवेदनशील नहीं है।