samacharsecretary.com

बेसिक से उच्च शिक्षा तक बड़ी राहत: कैशलेस मेडिकल सुविधा के लिए नया पोर्टल तैयार

लखनऊ लाखों शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए साचीज के सहयोग से पोर्टल बनकर लगभग तैयार हो गया है। जल्द ही इसे लाइव किया जाएगा। प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने का निर्णय कैबिनेट ने जनवरी में लिया था। इसके बाद इसकी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इस क्रम में विभाग की ओर से साचीज को शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराते हुए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों की जानकारी तो मानव संपदा पोर्टल से अपडेट हो जाएगी। किंतु उनको अपने आश्रितों की जानकारी खुद भरनी होगी। जल्द ही इस पोर्टल को लाइव कर दिया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि शिक्षकों को जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाया जा सके। वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों के 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. शशि कपूर ने सभी रजिस्ट्रार व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बताया है कि साचीज के द्वारा अपनी वेबसाइट पर उच्च शिक्षा का टैब दिया जाएगा। इसमें संबंधित लाभार्थी द्वारा अपना विवरण फीड किया जाएगा। विवरण फीड करने के बाद संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव को विवरण दिखाई देगा, जिसे वह अनुमोदन करेंगे। उसके बाद संबंधित विवरण अगली कार्यवाही के लिए स्टेट नोडल अधिकारी के पास जाएगा। उन्होंने सभी संबंधितों को इससे जुड़ी कार्यवाही अपने स्तर से पूरी करने का निर्देश दिया है। साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा का कहना है कि सभी शिक्षकों का डाटा मिल रहा है। इसके साथ ही पोर्टल का ट्रायल भी चल रहा है। हमारा प्रयास है कि इसको मई में शुरू कर दें। ताकि शिक्षकों व उनके आश्रितों को समय से इसका लाभ मिल सके।  

जामगुड़ा में 3 हैंडपंप, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी

जामगुड़ा में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकी रायपुर बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।   जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है। अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने जामगुड़ा जाकर व्यवस्थाएं देखीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। सरपंच और दुलाय कश्यप से मिलकर जलापूर्ति की जानकारी ली अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।

पथ निर्माण विभाग के टेंडर नियमों में बदलाव, बिहार के संवेदकों को मिलेगा फायदा

पटना बिहार में पथ निर्माण विभाग की सड़क निर्माण योजना में 25 लाख से 50 करोड़ रुपये तक के काम के टेंडर में बिहार के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का राज्य सरकार ने नीतिगत फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकार ने 25 लाख से ऊपर और 50 करोड़ तक के सिविल कार्य के लिए राज्य स्तरीय संवेदकों को तरजीह देगी। इस फैसले को अमल में लाने के लिए मंत्रिमंडल ने बिहार लोक निर्माण संहिता में जरूरी बदलाव करने को मंजूरी दी है। सरकार के फैसले से स्थानीय ठेकेदारों को मिलने वाले काम की संख्या में बढ़ोतरी होगी। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नेता भी बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी का काम करते हैं। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की सरकार के दौरान बिहार सरकार ने 2026-27 का बजट पेश किया था। उस बजट में पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 18716 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। बजट मांगों पर चर्चा के दौरान विधानसभा में तत्काली पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि सरकार 'विकसित बिहार' के विजन को गति देने के लिए निरंतर समर्पित है। जायसवाल ने सदन में कहा था कि ​राज्य में सुगम कनेक्टिविटी के लिए जेपी गंगा पथ के विस्तार सहित 16,465 करोड़ से अधिक की नई योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। बेहतरीन सड़कें और आधुनिक सेतु सशक्त बिहार की पहचान बनेंगे। दिलीप जायसवाल ने बताया था कि राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए बजटीय प्रावधान की ज्यादा जरूरत नहीं है। सड़क निर्माण के लिए एडीबी, विश्व बैंक, नाबार्ड सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से राशि ली जाती है। एनएच का निर्माण केंद्र सरकार करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा का जिक्र करते हुए जायसवाल ने कहा था कि इस दौरान 23,974.97 करोड़ रुपये की लागत वाली 137 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। उसमें 111 योजनाओं का काम ठेकेदारों को आवंटित किया जा चुका है और सभी योजनाओं में कार्य प्रगति पर है। पिछले एक साल में 14,757 करोड़ रुपये की 129 अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई, जो क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की आज की बैठक के महत्वपूर्ण फैसले आगे पढ़ें।

ऑनलाइन शॉपिंग में नया साइबर खतरा, हजारों फर्जी अकाउंट से हो रही ठगी

भारत में ऑनलाइन शॉपिंग अब जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है. लेकिन इसी के साथ ठगी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. अब फोन कॉल या OTP वाला पुराना स्कैम पीछे छूट रहा है. एक नया ज्यादा खतरनाक और बड़े स्तर पर होने वाला फ्रॉड OTP स्कैम से भी आगे निकल रहा है. इसे ही अब जामताड़ा स्टाइल ई-कॉमर्स फ्रॉड कहा जा रहा है, लेकिन फर्क ये है कि इस बार सब कुछ मशीनों से चल रहा है. जामताड़ा के बारे में नहीं पता तो बता दें कि ये जगह झारखंड में है. जामताड़ा नाम की वेब सीरीज भी बन चुकी है. दरअसल जामताड़ा से देश दुनिया भर में साइबर स्कैम होते आए हैं. वहां कई ऐसे ग्रुप्स हैं जो सालों से साइबर फ्रॉड कर रहे हैं. हाल ही में आई एक रिपोर्ट में सामने आया है कि ठग अब डिवाइस फार्मिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं. आसान भाषा में समझें तो ये लोग एक साथ सैकड़ों-हजारों मोबाइल या वर्चुअल डिवाइस चलाते हैं. डिवाइस फार्मिंग और ई-कॉमर्स वेबसाइट को चूना इन डिवाइस से नकली अकाउंट बनाए जाते हैं और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स को चूना लगाया जाता है. यह पूरा काम इंसान से ज्यादा सिस्टम और ऑटोमेशन के जरिए होता है. पहले जामताड़ा में बैठकर ठग लोगों को फोन करते थे, लिंक भेजते थे और OTP लेकर पैसे निकाल लेते थे. अब वही ठग या उसी तरह के नेटवर्क टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. फर्क बस इतना है कि अब आपको कॉल नहीं आएगा, बल्कि ठगी पर्दे के पीछे चुपचाप हो रही होगी. मान लीजिए किसी शॉपिंग ऐप पर पहले ऑर्डर पर 500 रुपये की छूट मिल रही है. एक आम यूजर इसे एक बार इस्तेमाल करेगा. लेकिन ये गैंग क्या करता है? ये हजारों फर्जी अकाउंट बनाता है. हर अकाउंट को नया यूजर दिखाया जाता है और हर बार वही 500 रुपये की छूट ली जाती है. यानी जहां एक यूजर एक बार फायदा उठाता है, वहीं ये गैंग हजारों बार वही ऑफर ले लेता है. इससे कंपनी को बड़ा नुकसान होता है और पूरा सिस्टम गड़बड़ा जाता है. क्या होती है डिवाइस फार्मिंग? डिवाइस फार्मिंग दरअसल हजारों स्मार्टफोन्स का ग्रुप होता है. हजारों फोन यानी हजारों सिम और हजारों अकाउंट्स. इन अकाउंट्स के जरिए कई तरह के फर्जी काम किए जाते हैं. बॉट पंपिंग से लेकर फेक रिव्यू तक कराने के लिए स्कैमर्स इसी तरह के अकाउंट का सहारा लेते हैं. इनके जरिए फेक रिव्यू दे कर किसी प्रोडक्ट की रेटिंग को ऊपर किया जाता है. ऐसे ही किसी प्रोडक्ट की रेटिंग गिराने के लिए भी ये बल्क में कॉमेंट और डाउनवोट करते हैं. हाल ही में राघव चढ्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ कर बीजेपी ज्वाइन किया है. उनके 1 मिलियन इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कम हो गए. लेकिन इसके बावजूद इनके फॉलोअर्स तेजी से बढ़ने लगे. थोड़ा चेक करने के बाद पता चला कि ये काफी बॉट अकाउंट उन्हें फॉलो कर रहे हैं जो इसी महीने बनाए गए हैं.   प्रॉपर प्रोसेस होता है यूज इस फ्रॉड का स्केल इतना बड़ा है कि यह किसी छोटे ग्रुप का काम नहीं लगता. रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है. कुछ लोग फर्जी सिम कार्ड जुटाते हैं, कुछ अकाउंट बनाते हैं, और कुछ लोग ऑर्डर प्लेस करके सामान को आगे बेच देते हैं. यानी यह अब ठगी नहीं, बल्कि एक पूरा बिजनेस मॉडल बन चुका है. इस पूरे खेल को जामताड़ा 2.0 इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि सोच वही पुरानी है, लेकिन तरीका पूरी तरह नया है. पहले लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसा निकाला जाता था, अब सिस्टम को ही बेवकूफ बनाया जा रहा है. इसका असर सिर्फ कंपनियों तक सीमित नहीं है. जब इस तरह के फ्रॉड बढ़ते हैं, तो कंपनियां अपने ऑफर्स कम कर देती हैं. डिस्काउंट घट जाते हैं और असली यूजर्स को नुकसान होता है. यानी आखिर में कीमत आम लोगों को ही चुकानी पड़ती है. फ्रॉड डिटेक्शन है मुश्किल सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस तरह के फ्रॉड को पकड़ना आसान नहीं है. हर अकाउंट अलग दिखता है, हर डिवाइस नया लगता है और सब कुछ ऑटोमेटेड तरीके से चलता है. यही वजह है कि अब कंपनियां AI और एडवांस सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा ले रही हैं. लेकिन यह एक तरह की दौड़ बन चुकी है. एक तरफ कंपनियां सिस्टम मजबूत कर रही हैं, तो दूसरी तरफ ठग नए तरीके निकाल रहे हैं. इस पूरे मामले से एक ये तो क्लियर है कि, जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ठगी के तरीके भी स्मार्ट होते जा रहे हैं. अब खतरा सिर्फ फोन कॉल या लिंक से नहीं है, बल्कि बैकएंड में चल रहे उन सिस्टम्स से है जो दिखते नहीं, लेकिन बड़ा नुकसान कर देते हैं.

अमृतसर में 6 किलो हेरोइन सहित तस्कर गिरफ्तार, दुबई से चल रहा नेटवर्क, मास्टरमाइंड अंतरप्रीत का था हाथ

चंडीगढ़  पंजाब में नशीले पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरुवार को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। अमृतसर की काउंटर इंटेलिजेंस टीम ने अमृतसर-जालंधर हाईवे पर अड्डा मानावाला के पास कार्रवाई करते हुए एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से 6 किलोग्राम हेरोइन बरामद की। डीजीपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान सुल्तानविंड निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है, जो पहले से ही नशीले पदार्थों की तस्करी के कई मामलों में वांछित है। पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय है और पंजाब में नशे की सप्लाई करने में संलिप्त रहा है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सप्लाई चैन की जानकारी जुटाई जा रही है। इस मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी संभव है। बरामद नशीले पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। यूएई में बैठे हैंडलर के निर्देश पर कर रहा था काम प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार आरोपी दुबई (यूएई) में बैठे एक हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था। इस हैंडलर की पहचान अमृतसर के सुल्तानविंड इलाके के निवासी अंतरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि अंतरप्रीत सिंह पहले भी नशा तस्करी के कई मामलों में शामिल रहा है और उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। पुलिस ने नेटवर्क की गहराई से जांच शुरू की पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस प्रतिबद्ध पुलिस का कहना है कि नशा तस्करों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों ने यह भी कहा कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस दिशा में आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। इससे पहले पंजाब पुलिस ने 23 अप्रैल को सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी करने वाले तीन आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था, जिनके पास से 915 ग्राम 'आइस' (मेथैम्फेटामाइन), पांच पिस्तौल और कारतूस बरामद किए गए थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह में संलिप्त लोग पाकिस्तान में बैठे लोगों के संपर्क में थे और उन्हें अपने यहां से हथियार व नशीले पदार्थों की आपूर्ति किया करते थे। इसके बाद पुलिस ने इस गिरोह को चिह्नित कर इसमें संलिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से पहले इस मामले को लेकर गेट हकीमा पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। अब आगे इस गिरोह को कैसे पूरी तरह से खत्म किया जाए। इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि इस गिरोह को पूरी तरह से खत्म करने के लिए पूरी रूपरेखा तैयार की जा चुकी है, जिसके तहत मौजूदा समय में काम किया जा रहा है। इस गिरोह में संलिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।

ट्रेन से तेज सफर! गंगा एक्सप्रेसवे बदलेगा यूपी का ट्रैवल टाइम, 14 घंटे का रास्ता होगा 6 घंटे में पूरा

लखनऊ यूपी परिवहन निगम की कोई भी बस अभी प्रयागराज से सीधे मेरठ नहीं जाती है। वहां जाने के दो माध्यम हैं, ट्रेन या फिर निजी साधन। प्रयागराज से जो दो एक्सप्रेस ट्रेन मेरठ जाती है, उसमें से एक जितना समय लेती है उससे आधे से भी कम तो दूसरी से लगभग ढाई घंटे कम समय में ही निजी साधन से गंगा एक्सप्रेस वे के जरिए मेरठ पहुंचा जा सकेगा। दावा किया जा रहा है कि गंगा एक्सप्रेस वे से मेरठ तक की दूरी छह घंटे में तय हो सकेगी। प्रयागराज संगम रेलवे स्टेशन से नौचंदी एक्सप्रेस रोजाना शाम 5.50 बजे चलकर 653 किमी की दूरी तय करते हुए अगले दिन सुबह 8.30 बजे मेरठ पहुंचती है। यह ट्रेन लखनऊ, हरदोई, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा व हापुड़ से होकर मेरठ जाती है। कुल 14 घंटे लगते हैं पर गंगा एक्सप्रेस वे पर निजी साधन से सफर करने में इससे लगभग आठ घंटा कम लगेगा। इसी तरह सूबेदारगंज स्टेशन से चलने वाली संगम एक्सप्रेस फतेहपुर, कानपुर, इटावा, टुंडला, हाथरस, बुलंदशहर व हापुड़ होते हुए मेरठ तक करीब 8.30 घंटे में पहुंचती है।यह ट्रेन सूबेदारगंज से शाम 5.50 बजे चलती है और अगले दिन 637 किमी की दूरी तय करके सुबह 8.30 बजे पहुंचती है। इस ट्रेन से जितना वक्त लगता है, उससे ढाई घंटा कम गंगा एक्सप्रेस वे से लगेगा। अपने निजी वाहन से मेरठ जाने वालों को अभी तक कानपुर के रास्ते होकर जाना पड़ता था। एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण हो जाने से 594 किमी का सफर छह घंटे में पूरा हो जाएगा। प्रयागराज की सोरांव तहसील के जूड़ापुर दांदू गांव के पास एक्सप्रेस-वे का दूसरा टोल प्लाजा बनाया गया है। प्रतापगढ़ से 143 किमी दूरी कम, बचेंगे छह घंटे अभी तक प्रतापगढ़ से मेरठ जाने के लिए न तो कोई सीधी ट्रेन है और न ही यूपी परिवहन निगम की कोई बस ही वहां के लिए चलती है। काशी और पद्मावत दो ट्रेन हैं, जो प्रतापगढ़ होते हुए हापुड़ तक जाती हैं। हापुड़ तक जाने में ही दोनों ट्रेन दस घंटे से अधिक का समय लेती हैं। सीधे मेरठ जाने वालों के पास एक मात्र विकल्प निजी साधन है। निजी साधन से मेरठ जाने में अभी 11 से 12 घंटे लगते हैं। प्रतापगढ़ से मेरठ तक की कुल दूरी 738 किमी है, गंगा एक्सप्रेस वे से यह दूरी कम होकर 595 रह जाएगी। 143 किमी कम होने और एक्सप्रेस वे के सुगम यातायात की वजह से यह दूरी आधे समय यानी छह घंटे में ही तय की जा सकेगी। इससे उन कारोबारियों को खास तौर से सहूलियत होगी, जिनका कारोबार के सिलसिले में अक्सर मेरठ तक जाना होता है।

छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक

सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन की बन रही नई पहचान छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक रायपुर हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।           राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।           मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।          राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।            महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।           इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।          आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।            छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है। डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)

बुध गोचर 2026: मेष राशि में प्रवेश से बदलेगा सभी 12 राशियों का भाग्य

द्रिक पंचांग के अनुसार, आज (30 अप्रैल) को बुध राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं. वे मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेंगे. मीन राशि में बुध कमजोर माने जाते हैं, लेकिन मेष राशि में पहुंचकर उनकी स्थिति मजबूत हो जाएगी. बुध 15 मई 2026 तक मेष राशि में रहेंगे, इसके बाद वे वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे. लगभग 15 दिनों तक बुध का यह गोचर सभी 12 राशियों को प्रभावित करेगा. मेष राशि में पहले से सूर्य देव विराजमान हैं, ऐसे में बुध और सूर्य के साथ आने से बुधादित्य योग का निर्माण होगा. यह योग बुद्धि, करियर और निर्णय क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. जैसा कि माना जाता है, बुध ग्रह बुद्धि, व्यापार और एनालिटिकल पावर का कारक है. जब बुध मजबूत होता है, तो व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र से जानते हैं कि बुध गोचर कैसा रहेगा सभी 12 राशियों के लिए. मेष राशि बुध का गोचर आपकी ही राशि में होगा, जिससे आपकी बौद्धिक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति मजबूत होगी. करियर में तरक्की के अवसर मिलेंगे. नौकरीपेशा लोग अपने टैलेंट के दम पर आगे बढ़ सकते हैं, जबकि व्यापारियों को लाभ के मौके मिलेंगे. उपाय: प्रतिदिन भगवान गणेश की आरती करें. वृषभ राशि आपकी राशि से 12वें भाव में बुध का गोचर होगा, इसलिए स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. खर्चों पर नियंत्रण रखें. किसी भी काम में जल्दबाजी न करें. वाणी पर संयम रखें, वरना रिश्तों में खटास आ सकती है. उपाय: भगवान शिव और गणेश जी का अभिषेक करें. मिथुन राशि आपकी राशि के स्वामी बुध हैं, इसलिए यह गोचर आपके लिए लाभकारी रहेगा. करियर में नए अवसर मिलेंगे. व्यापार में मजबूती आएगी. उपाय: बुधवार को हरे फल का दान करें. कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए यह गोचर प्रोफेशन में सफलता दिलाएगा. नई स्किल सीखने और आगे बढ़ने का अच्छा समय है. उपाय: बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं. सिंह राशि भाग्य का साथ मिलेगा और मान-सम्मान में वृद्धि होगी. प्रमोशन और उन्नति के योग बनेंगे. उपाय: भगवान गणेश की आरती करें. कन्या राशि आपकी राशि के स्वामी बुध हैं, लेकिन यह गोचर थोड़ा संभलकर चलने का संकेत देता है. स्वास्थ्य और रिश्तों का ध्यान रखें. उपाय: शिव परिवार का अभिषेक करें और गाय को हरा चारा खिलाएं. तुला राशि धन लाभ के योग बनेंगे और रुके हुए काम पूरे होंगे. विवाह के प्रस्ताव भी आ सकते हैं. उपाय: गणेश जी को हरे फल का भोग लगाकर दान करें. वृश्चिक राशि काम में सावधानी बरतें और जल्दबाजी से बचें. निवेश करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें. उपाय: गणेश जी की आरती करें और गाय को हरा चारा खिलाएं. धनु राशि करियर में सफलता और प्रमोशन के योग हैं. छात्रों और संतान पक्ष के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा. उपाय: प्रतिदिन गणेश जी की आरती करें. मकर राशि घर-परिवार की समस्याएं दूर होंगी. प्रॉपर्टी से जुड़े फैसले ले सकते हैं. उपाय: बुधवार को हरे फल का दान करें. कुंभ राशि आत्मविश्वास बढ़ेगा और मित्रों का सहयोग मिलेगा. नई स्किल सीखने का अच्छा समय है. उपाय: शिव परिवार का अभिषेक करें. मीन राशि वाणी पर संयम रखें और सोच-समझकर बोलें. धन लाभ के अवसर मिलेंगे. करियर में सफलता मिलेगी. उपाय: शिव परिवार का अभिषेक करें.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण

भारत को जोड़ने की ताकत हैं राम-कृष्ण और शिवः सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर किया धर्म ध्वजारोहण  सीएम योगी ने भगवान शिव व रामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर उतारी आरती जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय सुनिश्चित हैः मुख्यमंत्री सीएम ने की अपील- महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए अयोध्या,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर स्थित शिव मंदिर के शिखर पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ धर्म ध्वजारोहण किया। मुख्यमंत्री ने भगवान शिव व श्रीरामलला का विधिवत दर्शन-पूजन कर आरती भी उतारी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु राम हमें जोड़ने के माध्यम बने हैं। श्रीराम उत्तर को दक्षिण से और श्रीकृष्ण पूरब को पश्चिम से जोड़ रहे हैं। इसी प्रकार भगवान शंकर द्वादश ज्योतिर्लिंग के माध्यम से भारत के कण-कण को जोड़ रहे हैं। ये तीनों भारत को जोड़ने की शक्ति हैं और यही हमारी भी सबसे बड़ी ताकत है। डॉ. लोहिया कहते थे कि श्रीराम, श्रीकृष्ण व शिवशंकर हैं तो कोई भारत का बाल बांका नहीं कर सकता, लेकिन यह बात उनके शिष्य नहीं समझेंगे, क्योंकि समझ उन्हें आता है, जिनमें समझ का सामर्थ्य होता है। जिनमें समझ का सामर्थ्य नहीं, उन रामद्रोहियों-शिवद्रोहियों के लिए कोई ठौर-ठिकाना नहीं होगा।  जहां अयोध्या और राम होंगे, वहां विजय ही होगी  सीएम ने गर्व से कहा कि इतने बड़े आंदोलन ने बता दिया कि जहां अयोध्या होगी और जहां राम होंगे, वहां विजय होगी। सम-विषम परिस्थितियों में हम न रुकेंगे, न झुकेंगे, न डिगेंगे और लक्ष्य को भी प्राप्त करेंगे। दुनिया अयोध्या धाम का अनुसरण कर रही है। सीएम ने नई अयोध्या की स्थिति का भी जिक्र किया। कहा कि नई अयोध्या त्रेतायुग की याद दिला रही है और यही डबल इंजन की ताकत है। यह तभी हो पाया, जब एक साथ एक स्वर में सनातन धर्मावलंबी बोल उठे, तभी रामजन्मभूमि में मंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया था।  महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए सीएम ने लोगों से आग्रह किया कि सनातन धर्म की एकता के जरिए भारत की एकता व अखंडता को मजबूती दीजिए। महापुरुषों को जातीयता के दायरे में मत बांटिए और बांटने वालों से सावधान रहिए। यह वही पाप कर रहे हैं, जो मध्यकाल में देश को बांटने और समाज की एकता को खंडित करने वालों ने किया था। बांटने का पाप देशद्रोह से कम नहीं है। यह पाप कभी मत होने दें। जिस दिन 140 करोड़ भारतवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास करते हुए बढ़ेंगे, दुनिया उनके सामने बाधक नहीं बन सकती।  ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया सीएम ने कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी पहले तपती गर्मी, फिर बिजली की कड़क और बारिश की चेतावनी से चिंतित हो गए, लेकिन यह ईश्वरीय कृपा ही है कि मौसम सुहाना हो गया। प्रभु की कृपा के लिए शुद्ध नीयत से उनके पास शरणागत होना पड़ेगा। जब भक्त और याचक बनकर प्रभु के चरणों में जाते हैं तो हमारी मनोकामना पूर्ण होती है। जब यह अकड़ होती है कि हमने किया है, तो प्रभु उसे रगड़ भी देते हैं।  सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु का मंदिर बने और हम अपनी आंखों से देख सकें सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण अभियान है। भारत व दुनिया में जहां भी सनातन धर्मावलंबी रहा, वह गिरिवासी, वनवासी, वंचित, भिक्षावृत्ति से जीवन यापन करने वाला हो या राजमहल जैसे प्रासाद में रहने वाला बड़ा उद्यमी, सभी के मन में एक ही भाव था कि प्रभु राम का भव्य मंदिर बने और वह इसे अपनी आंखों से देख सके। पीढ़ी दर पीढ़ी चली गईं, संघर्ष व आंदोलन बढ़ता गया। महिला, पुरुष, बच्चे, युवा समेत समाज के हर तबके ने, सनातन धर्म की हर उपासना विधियों से जुड़े लोगों ने लगातार 500 वर्ष तक संघर्ष किया। एक दिन वह काली रात आई थी, जब प्रभु श्रीराम के मंदिर को अपवित्र करके विवादित ढांचा खड़ा कर दिया गया, लेकिन 1528 से बिना किसी रोक-टोक या भय के कोई दिन ऐसा नहीं रहा होगा, जब सनातन धर्मावलंबियों ने श्रीराम जन्मभूमि के लिए सोचा न हो और कुछ करने की इच्छाशक्ति के साथ अभियान का हिस्सा न बनें हो।  देश के हर कोने में लोग जयश्रीराम कहते हैं  सीएम योगी ने कहा कि प्रभु जब अपना काम कराना चाहते हैं, तभी सफलता प्राप्त होती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जब 1983 में आंदोलन को अपने हाथों में लिया तो आंदोलन चरम की ओर बढ़ता गया। अशोक सिंहल जी ने बिखरी हुई ताकत को एक किया। इस आंदोलन में क्षेत्र, जाति, भाषा की दीवारें टूटी हैं। आज भी देश के किसी कोने में हम जाते हैं तो उसके प्रभाव को महसूस करते हैं। अरुणाचल या ओडिशा, नगालैंड हो या मिजोरम, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल, उत्तराखंड का सुदूर कोना, पश्चिमी-पूर्वी, उत्तरी-दक्षिण, मध्य भारत हो या छत्तीसगढ़ के बस्तर जैसा जनजाति क्षेत्र, जैसे ही लोग हमें देखते हैं, वे सबसे पहले जयश्रीराम कहते हैं। मैं पश्चिम बंगाल के चुनाव में दूरदराज के गांवों में गया। वहां भी सड़कों पर आकर महिलाएं, बच्चे, पुरुष सभी ने जयश्रीराम से अभिवादन किया।  जिस दिन राम मंदिर का फैसला आया, वह भारत के इतिहास का सबसे खुशहाल दिन  सीएम योगी ने कहा कि हम सभी गुलामी का ढांचा हटने और आंदोलन के साक्षी हैं। जब उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्मति से रामजन्मभूमि का फैसला दिया तो देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी झूम उठे। कुछ लोग धमकाते थे कि राम जन्मभूमि का फैसला आएगा तो यह होगा-वह होगा। ये वही लोग हैं, जो वकील खड़ा करते थे, रामसेतु को तोड़ना चाहते थे, रामभक्तों पर गोलियां चलाते थे और चाहते थे कि समस्या का समाधान न निकले और सनातन धर्मावलंबी अपमानित हो, लेकिन जब उच्चतम न्यायालय ने सनातन धर्म की भावनाओं के अनुरूप साक्ष्यों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला किया तो देश-दुनिया ने भी उसका स्वागत किया। जिस दिन यह फैसला आया, वह भारत के इतिहास के सबसे शांत और खुशहाल दिन में से एक था।   जब मंदिर बना तो हर आंख में थे खुशी के आंसू सीएम योगी ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद के नेतृत्व में श्रीरामजन्मभूमि … Read more

मई 2026 में बुध अस्त का प्रभाव, कई राशियों के लिए चुनौती भरा समय

मई 2026 की शुरुआत ज्योतिष के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही है. इस दौरान बुध ग्रह की स्थिति में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिसका सीधा असर लोगों की सोच, कम्युनिकेशन और फैसले लेने की क्षमता पर पड़ सकता है. खास बात यह है कि यह बदलाव कुछ राशियों के लिए चुनौती भरा साबित हो सकता है, इसलिए इस समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी माना जा रहा है.ज्योतिष के अनुसार, जब बुध सूर्य के बेहद करीब आ जाता है, तो उसकी ऊर्जा कमजोर पड़ जाती है, इसी स्थिति को बुध अस्त कहा जाता है.  इस दौरान मानसिक भ्रम, गलतफहमी और कामों में देरी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. क्या होता है बुध अस्त? जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक करीब पहुंच जाता है, तो उसकी चमक कम हो जाती है और वह प्रभावी नहीं रह पाता. बुध ग्रह बुद्धि, तर्क, संवाद और व्यापार का कारक माना जाता है. ऐसे में इसके अस्त होने पर व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. लोग बात समझने या समझाने में गलती कर सकते हैं, जिससे गलतफहमियां और तनाव बढ़ सकता है. कब तक रहेगा बुध अस्त? ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, बुध 28 अप्रैल 2026 से 23 मई 2026 तक अस्त रहेगा. इस पूरे समय को थोड़ा संवेदनशील माना जा रहा है, खासकर फैसले लेने और कम्युनिकेशन के मामलों में. इन राशियों को रहना होगा सबसे ज्यादा सतर्क मेष राशि- इस समय जल्दबाजी भारी पड़ सकती है. गलत फैसले आर्थिक और प्रोफेशनल नुकसान दे सकते हैं, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाना जरूरी है. कर्क राशि- भावनात्मक उतार-चढ़ाव बढ़ सकते हैं. छोटी-छोटी बातों पर तनाव और गलतफहमियां बढ़ने की संभावना है, इसलिए संयम रखना जरूरी होगा. तुला राशि- करियर और पैसों से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है. काम में देरी या रुकावट आ सकती है, इसलिए बड़े फैसले फिलहाल टालना बेहतर रहेगा. मकर राशि- मानसिक दबाव और काम में बाधाएं महसूस हो सकती हैं.प्लानिंग बिगड़ सकती है, इसलिए धैर्य और समझदारी से काम लेना जरूरी है. किन बातों का रखें खास ध्यान बिना सोचे-समझे कोई बड़ा फैसला न लें जरूरी डॉक्यूमेंट्स ध्यान से पढ़ें कम्युनिकेशन साफ और स्पष्ट रखें जल्दबाजी और गुस्से से बचें