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पुलिस विभाग में एक साथ 14 पुलिसकर्मियों का तबादला, जानें किसे कहां किया गया तैनात

रायपुर   छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा मरवाही जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यहां एक साथ 14 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर के आदेश जारी हुए हैं। यह आदेश एसपी मनोज खेलारी द्वारा जारी किए गए। इसके तहत 5 टीआई (निरीक्षक), 2 सब इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक), 1 एएसआई (सहायक उप-निरीक्षक), 2 प्रधान आरक्षक और 4 आरक्षकों को इधर उधर किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, ​ शनिप रात्रे को गौरेला थाना प्रभारी, शैलेंद्र सिंह को मरवाही थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शुक्ला को यातायात प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो जिले की यातायात व्यवस्था को सुधारने का जिम्मा संभालेंगे। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अंजना केरकेट्टा को नवगठित अजाक थाना के साथ-साथ महिला थाना प्रभारी का दोहरा दायित्व दिया गया है। इसके साथ ही अजय वारे को शिकायत शाखा का प्रभारी और मनोज हनौतिया को साइबर सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि जिले में पहली बार अजाक (अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण) थाने का गठन किया गया है, जो विशेष शिकायतों के निवारण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ​

UGC NET 2023 के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, आवेदन की आखिरी तारीख 20 मई

लुधियाना  देश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने और जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जे.आर.एफ.) हासिल करने का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एन.टी.ए.) ने यू.जी.सी. नेट जून सत्र के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है और ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 29 अप्रैल से शुरू हो गई है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवार अब एन.टी.ए. की आधिकारिक वैबसाइट पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। शैड्यूल के अनुसार रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान की अंतिम तिथि 20 मई निर्धारित की गई है। इसके बाद उम्मीदवारों को आवेदन में सुधार के लिए 22 मई से 24 मई तक करेक्शन विंडो का मौका दिया जाएगा। विभाग द्वारा एग्जाम सिटी स्लिप 10 जून को और एडमिट कार्ड 15 जून को जारी किए जाएंगे जबकि मुख्य परीक्षाओं का आयोजन 22 जून से 30 जून के बीच किया जाएगा। 

मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वनांचलों की संजीवनी, साढ़े तीन महीनों में 2000+ ग्रामीणों का हुआ इलाज

​वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार ​विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल  पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर ​रायपुर     छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ​पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म    ​पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है। ​एक ही छत के नीचे जांच और दवा      ​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है। ​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं। ​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना      ​प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। ​परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम       ​इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

गरुड़ पुराण: मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा और कर्मों के फल का गहरा रहस्य

 गरुड़ पुराण हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो 18 महापुराणों में से एक है. इस ग्रंथ को किसी मृत्यु के दौरान पढ़ा जाता है. यह ग्रंथ मुख्य रूप से भगवान विष्णु और उनके वाहन गरुड़ के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया है. इसमें जीवन, मृत्यु और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में विस्तार से बताया गया है. खासतौर पर यह ग्रंथ व्यक्ति के कर्मों के फल, पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक और मोक्ष के सिद्धांतों को समझाता है. क्यों पढ़ा जाता है गरुड़ पुराण? मान्यता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके घर में गरुड़ पुराण का पाठ करने से आत्मा को शांति मिलती है और परिजनों को धर्म और जीवन के गहरे सत्य समझने का अवसर मिलता है. गरुड़ पुराण में मिलता है अगले जन्म का जिक्र गरुड़ पुराण में जीवन और मृत्यु के बाद की स्थिति को लेकर कई गहरी बातें बताई गई हैं. इसमें साफ कहा गया है कि इंसान का अगला जन्म उसके कर्मों पर निर्भर करता है. यानी व्यक्ति जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल उसे अगले जीवन में मिलता है. अगला जन्म अचानक तय नहीं होता है. बल्कि इंसान के पूरे जीवन के कर्म और अंतिम समय की सोच पहले से ही उसकी अगली योनि और जीवन की दिशा तय कर देते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय व्यक्ति का मन जिस स्थिति में होता है, उसका असर उसके अगले जन्म पर पड़ता है. यदि उस समय मन शांत हो और ईश्वर में लगा हो, तो आत्मा को बेहतर जन्म मिलता है. वहीं अगर मन में क्रोध, लालच या नकारात्मकता हो, तो इसका प्रभाव विपरीत पड़ सकता है. धर्म का अनादर करने वालों का परिणाम इस ग्रंथ में बताया गया है कि जो लोग धर्म, वेद और भगवान का अपमान करते हैं या केवल भोग-विलास में डूबे रहते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद कठिन परिणाम भुगतने पड़ते हैं. ऐसे लोगों को अगले जन्म में कष्ट और अभाव से भरा जीवन मिल सकता है. विश्वासघात और छल का फल गरुड़ पुराण में मित्रता को बहुत पवित्र माना गया है. जो लोग अपने स्वार्थ के लिए दोस्तों के साथ धोखा करते हैं, उन्हें अगले जन्म में ऐसी स्थिति मिलती है जो उनके कर्मों का प्रतीक होती है. इसी तरह जो लोग झूठ, धोखे और चालाकी से दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें भी अपने कर्मों का दंड भुगतना पड़ता है. अंतिम पल का प्रभाव गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जीवन का आखिरी पल बेहद महत्वपूर्ण होता है. उस समय व्यक्ति के मन में जो भाव होते हैं, वही उसके आगे के जीवन को प्रभावित करते हैं. अगर मृत्यु के समय मन शांत रहे और ईश्वर का स्मरण हो, तो आत्मा को अच्छा और श्रेष्ठ जन्म मिल सकता है. लेकिन यदि उस समय मन में लालच, क्रोध या नकारात्मक विचार हों, तो इसका असर विपरीत पड़ता है और आत्मा को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. 84 लाख योनियों का चक्र इस ग्रंथ के अनुसार, आत्मा शरीर छोड़ने के बाद अपने कर्मों का पूरा परिणाम भोगती है. कहा जाता है कि जीव 84 लाख योनियों में भटकता है, जिनमें मनुष्य जीवन सबसे महत्वपूर्ण माना गया है. यही एक ऐसा जन्म है, जहां इंसान अपने कर्म सुधारकर आगे का मार्ग बेहतर बना सकता है. अच्छे कर्म करने वालों को ऊंचा और सुखद जीवन मिलता है, जबकि बुरे कर्म करने वालों को निम्न स्तर के जीवन में जाना पड़ता है.

दिलजीत दोसांझ के वैंकूवर कॉन्सर्ट में हंगामा, खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों ने की नारेबाजी

दिलजीत दोसांझ अब ग्लोबल स्टार बन चुके हैं. इंडिया में कॉन्सर्ट के बाद, वो अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया जैसे महाद्वीपों में शोज करते हैं. वहां भी दिलजीत का जादू सभी के सिर चढ़कर बोलता है. 23 अप्रैल को दिलजीत ने कनाडा के वैंकूवर में अपने औरा टूर की शुरुआत की थी. वहां करीब 50,000 से ज्यादा इंडियन्स आए थे. ये पल सिंगर के लिए बेहद खास था, जिसका जिक्र उन्होंने बीते दिनों जिम्मी फॉलन के लेट नाइट शो पर भी किया था. मगर इस कॉन्सर्ट में एक और बवाल खड़ा हुआ, जिसकी जानकारी अब सामने आ रही है. दिलजीत के वैंकूवर कॉन्सर्ट में कुछ खालिस्तानी समर्थक घुस गए थे, जो वहां सिंगर के खिलाफ नारे लगा रहे थे. जानकारी के मुताबिक, मामला काफी गंभीर हो गया था. मगर सिक्योरिटी ने कुछ ही देर में उन्हें शो से बाहर किया और माहौल को शांत किया. कहा जा रहा है कि दिलजीत खालिस्तानियों का अगला निशाना हैं. दिलजीत के शो में हुआ हंगामा दरअसल, शो के दौरान अचानक कुछ लोग खालिस्तान के झंडे लेकर अंदर घुस आए और नारेबाजी शुरू कर दी. इन लोगों ने भारत के खिलाफ भी नारे लगाए और दिलजीत पर बीजेपी और आरएसएस का एजेंट होने के आरोप लगाए. मौके पर मौजूद सिक्योरिटी टीम ने जब हालात संभालने की कोशिश की, तो प्रदर्शनकारी उनसे भिड़ गए. कुछ देर के लिए कॉन्सर्ट का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया, हालांकि बाद में स्थिति को काबू में कर लिया गया. सूत्रों के मुताबिक हंगामा करने वालों में पवनदीप सिंह बस्सी और मनदीप सिंह रवि नाम के दो लोग शामिल बताए जा रहे हैं. इन पर आरोप है कि ये सिख्स फोर जस्टिस (SFJ) से जुड़े हुए हैं, जो भारत में बैन संगठन है और इसके प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू हैं. सूत्रों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने आगे भी दिलजीत दोसांझ के शो में विरोध करने की चेतावनी दी है. हालांकि दिलजीत ने अभी तक खालिस्तानी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई किसी भी नारेबाजी पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है. सिंगर पिछले कुछ वक्त से ही गुरपतवंत सिंह पन्नू के निशाने पर नजर आए हैं. उन्होंने दिलजीत को कई बार धमकी दी, मगर सिंगर ने उसका असर अपने ऊपर नहीं पड़ने दिया. उन्होंने हमेशा प्यार फैलाने की बात कही.

यूपी विधानसभा में गरजे सीएम योगी, सपा-कांग्रेस को महिला मुद्दों पर घेरा

लखनऊ यूपी विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा को महिलाओं को लेकर हुई घटनाओं के बारे में आईना दिखाया। मायावती के साथ गेस्ट हाउस कांड को याद दिलाकर योगी सपा पर जमकर बरसे। योगी ने कहा कि उस समय गेस्ट हाउस कांड में दलित महिला मुख्यमंत्री मायावती की हत्या करने की कोशिश की गई। योगी ने कहा कि सपा माफियाओं के सामने नतमस्तक है। योगी ने कहा कि सपा विधायक पूजा पाल इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि जब राजू पाल की हत्या हुई थी, तब सपा माफियाओं के सामने झुक गई थी. सीएम ने आरोप लगाया कि सपा की सहानुभूति न तो पिछड़ों, दलितों और न ही पूजा पाल जैसे लोगों के प्रति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाहबानों प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का जिस तरह यूपी में पतन हुआ है वह न हुआ होता अगर कांग्रेस मुस्लिम महिला को न्याय देने के लिए मौलानाओं के आगे घुटने टेक कर नाक न रगड़ती। उन्होंने कहा सपा का भी ऐसा ही हश्र होने वाला है, इसमें ज्यादा देर नहीं लगेगी। विपक्ष ने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा विरोध किया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को महिला सशक्तिकरण के लिए बुलाए गए विशेष सत्र के दौरान निंदा प्रस्ताव रखने से पहले बोल रहे थे। योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी हो या फिर कांग्रेस इन्होंने महिला कल्याण से जुड़े सभी फैसलों में हमेशा कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नारी के उन्नयन, उत्थान और उन्हें संपन्न बनाने के लिए समय-समय पर आए मुद्दों का इंडी गठबंधन ने हमेशा विरोध किया है। जब वर्ष 2014 में महिलाओं के लिए जनधन योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। फिर जब नारियों की गरिमा कायम रखने के लिए खुले में शौच के विरोध में शौचालय बनाने की योजना आई तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में विधवा पेंशव व वृद्धा पेंशन में 300 रुपये देते थे। लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को आड़े हाथों लिया उन्होंने इंडी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली से लेकर लखनऊ आने तक सपा के सदस्य बहुत उतावले दिखाई दे रहे हैं। रंग बदलने में तो गिरगिट भी सपा के सामने संकोच कर जाए। रंग बदलने में ये इतने आगे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद में नारी वंदन अधिनियम पास न होने के बाद सपा-कांग्रेस के सदस्य कैसे हंस रहे थे और मेजें थपथपा रहे थे। उनका यह आचरण सभी ने देखा है। मुख्यमंत्री ने एक-एक कर सभी लाभकारी योजनाएं गिनाएं और सपा-कांग्रेस को जमकर आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री बोले, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया तो सपा-कांग्रेस ने विरोध किया। सपा सरकार में ढाई वर्ष में मात्र 40 लाख शौचालय बने थे। वर्ष 2017 के बाद हमने डेढ़ वर्ष में दो करोड़ से अधिक शौचालय बनवाए। पूरे देश में 12 करोड़ शौचालय बनाए गए। संसद में विरोध क्यों किया गया मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की ओर इशारा करते हुए कहा कि आप तो सोशलिस्ट हैं। शौचालय नारी गरिमा के प्रतीक थे, मोहल्लों की स्वच्छता के प्रतीक थे लेकिन आपने विरोध किया। हमने दो करोड़ से अधिक शौचालय बनाए और पूर्वांचल से इंस्फेलाइटिस रोग को काबू किया। कहा कि आज मैं कह सकता हूं कि एक भी मौत इंस्फेलाइटिस से नहीं हो रही जबकि पहले हजारों बच्चों की मौत होती थी। उन्होंने कहा कि जब गांव में महिलाओं शौच के लिए जाती थीं तो सपा के शोहदे उन पर छींटाकशी करते थे। आखिर सपा चाहती है कि कानून लागू किया जाए तो फिर संसद में विरोध क्यों किया गया। सपा ने नहीं दिया एक भी प्रधानमंत्री आवास मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा के ढाई वर्ष के शासन में एक भी पीएम आवास नहीं बन सका था। एनडीए सरकार ने देश भर में 4 करोड़ मकान बनाए हैं। सिर्फ यूपी में 65 लाख पीएम आवास बनाए गए हैं। यही नहीं भूमि का मालिकाना हक देने के लिए पीएम घरौनी योजना लागू की गई। अब भूमि का मालिकाना हक महिलाओं को दिया जा रहा है। यूपी में एक करोड़ घरौनी दी गई है। इसी तरह सपा ने सामूहिक विवाह योजना का विरोध किया। यूपी में 6 लाख बेटियों की शादी कराई गई है। सपा ने इसका भी विरोध किया था। सपा ने कन्या सुमंगला योजना का भी विरोध सपा-कांग्रेस ने किया। हम 26 लाख से अधिक महिलाओं को 25 हजार रुपये दे रहे हैं।

रेलवे ट्रैक पर ड्रोन से होगी निगरानी, CCTV कैमरे लगवाने का फैसला: रवनीत बिट्टू

पटियाला/चंडीगढ़ रेलवे लाइनों पर ड्रोन से नजर रखी जाएगी। जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने शंभू के निकट हाल ही में हुए विस्फोट स्थल का बीते दिन दौरा किया और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) के साथ सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। मीडिया को संबोधित करते हुए मंत्री ने पंजाब में रेलवे को निशाना बनाकर हो रही बार-बार की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की और सुरक्षा व निगरानी को मजबूत करने के लिए सख्त कदम उठाने का आश्वासन दिया। रवनीत सिंह ने घोषणा की कि रेलवे ईडीएफसी पर 24 घंटे गश्त को और सघन करेगा तथा निगरानी व्यवस्था का व्यापक विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में अंबाला मंडल के पंजाब क्षेत्र में 173 सीसीटीवी कैमरे पहले ही लगाए जा चुके हैं और अतिरिक्त कैमरों की स्थापना जारी है। कॉरिडोर के एकांत एवं संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां ड्रोन निगरानी सहित उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे के की-मैन द्वारा निरंतर जमीनी गश्त की जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह घटना पिछले 3 महीनों में लगभग 35 किलोमीटर के दायरे में दूसरी घटना है। पहली घटना 23 जनवरी को हुई थी, जो राष्ट्रीय राजमार्ग-44 से लगभग 800–900 मीटर की दूरी पर थी, जबकि ताजा विस्फोट स्थल इसी राजमार्ग से लगभग 300 मीटर दूर स्थित है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि असामाजिक तत्व राजमार्ग से आसान पहुंच का उपयोग कर रेलवे ट्रैक को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि बाहरी तत्वों की संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं, जो रेलवे जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना को निशाना बनाकर क्षेत्र को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं न केवल सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक गतिविधियों को बाधित करने का भी प्रयास हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो साहनेवाल को पश्चिम बंगाल से जोड़ता है, एक महत्वपूर्ण आर्थिक धुरी है, जहां प्रतिदिन लगभग 30 ट्रेनें औद्योगिक और कृषि उत्पादों का परिवहन करती हैं। इस नेटवर्क में किसी भी प्रकार का व्यवधान राज्य और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है। मंत्री ने लोको पायलट की सतर्कता की सराहना की, जिन्होंने झटका महसूस होते ही तुरंत ट्रेन को रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। तत्पश्चात सुरक्षा एवं आपातकालीन दलों को तुरंत मौके पर भेजा गया। सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि रेलवे संपत्तियों की सुरक्षा, यात्रियों और मालगाड़ियों की सुरक्षित आवाजाही तथा आर्थिक गतिविधियों को निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

डॉ. मोहन यादव का किसानों के बीच अचानक दौरा, चाय पर चर्चा में CM ने पूछा भुगतान और तौल व्यवस्था

महेश्वर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक दिन पहले ही कहा था कि वे कभी भी और कहीं भी उपार्जन केंद्रों का अचानक निरीक्षण कर सकते हैं। कुछ ही घंटों बाद मोहन यादव खरगोन में थे। उन्होंने गुरुवार को सुबह अचानक कतरगांव में बनाए गए उपार्जन केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से भी चर्चा की और उनके साथ चाय भी पी। किसान कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (MP CM Mohan Yadav) ने कल यानी 29 अप्रैल को जो कहा था, वैसा ही 30 अप्रैल को किया। उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। और, हुआ भी यही। डॉ. यादव एक दिन पहले ही 29 अप्रैल को महेश्वर पहुंच गए थे जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया था। गुरुवार को सुबह मोहन यादव कतरगांव के उपार्जन केंद्र का अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद किसानों के साथ सीएम का सीधा संवाद भी हुआ। सीएम ने किसानों के साथ चाय भी पी। गेहूं उपार्जन की व्यवस्था के बीच अपने साथ सीएम को पाकर किसानों के चेहरे पर मुस्कान थी। मोहन यादव ने उपार्जन केंद्र की व्यवस्था करने वाले कर्मचारियों को दिशा-निर्देश भी दिए। महेश्वर विधानसभा के दौरे पर आए सीएम ने रात्रि विश्राम के बाद सुबह हेलीपैड के लिए प्रस्थान किया था। हालांकि, उन्होंने अचानक अपना काफिला बड़वाह मार्ग की ओर मोड़ दिया। सीधे कतरगांव खरीदी केंद्र पहुंच गए। मुख्यमंत्री को अपने बीच देखकर वहां मौजूद किसान और कर्मचारी हैरान रह गए। बता दें कि मुख्यमंत्री ने बुधवार को महेश्वर प्रवास के दौरान संकेत दिए थे कि व्यवस्थाओं को परखने के लिए किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का निरीक्षण कर सकते हैं। उपार्जन केंद्र पर क्या है खास 0-किसानों के लिए उपार्जन केंद्रों पर छाया, बैठक और कई अन्य सुविधाओं की व्यवस्था। 0-अब किसान किसी भी उपार्जन केन्द्र पर उपज विक्रय कर सकते हैं। 0-उपार्जन केन्द्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है। 0-सरकार जिलों में और भी तौल कांटे बढ़ा रही है। 0-सरकार ने चमकविहीन गेहूं की सीमा भी 50 प्रतिशत कर दी है। 0-सूकड़े दाने की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक की गई है। 0-क्षतिग्रत दानों की सीमा बढ़ाकर 6 प्रतिशत तक की गई है। 0-बारदाने, तौल कांटे, हम्माल तुलावटी, सिलाई मशीन, कम्यूंटर, नेट कनेक्शन, कूपन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, उपज की साफ-सफाई के लिए पंखा, छन्ना आदि व्यवस्थाएं मिलेंगी। सीएम ने किसानों से की सीधी बात सीएम ने किसी औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन किए बिना किसानों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें भुगतान समय पर मिल रहा है? तौल में गड़बड़ी तो नहीं हो रही। सीएम ने मौजूद कलेक्टर भव्या मित्तल और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को धूप में खड़े न रहना पड़े। उन्होंने ठंडे पानी और बैठने की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। निरीक्षण के दौरान महेश्वर विधायक राजकुमार मेव भी उनके साथ थे, जिनसे सीएम ने क्षेत्र की कृषि समस्याओं पर फीडबैक लिया। सीएम ने तौल और भुगतान में पारदर्शिता के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि गेहूं की स्लॉट बुकिंग से लेकर तौल और भुगतान तक की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सरकार ने तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी है। आवश्यकता पड़ने पर इसे और बढ़ाया जाएगा। सीएम ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार 2625 रुपए प्रति क्विंटल (बोनस सहित) की दर से उनके गेहूं का पाई-पाई भुगतान करेगी। निरीक्षण के बाद सीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में वे प्रदेश के किसी भी जिले में अचानक उतरकर केंद्रों की स्थिति का जायजा ले सकते हैं, इसलिए प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहना चाहिए। युद्ध के बावजूद बड़ा लक्ष्य सरकार ने इस साल युद्ध की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए 9.83 लाख किसानों द्वारा 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं के विक्रय के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं। एमपी में अब तक 5 लाख 8 हजार 657 किसानों से 22 लाख 70 हजार मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया गया था।

‘भारत ने शुरू किया था लंबा ऑपरेशन…’, राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर पर किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को इस नई विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया. यह ऑपरेशन लगभग एक साल पहले पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों की हत्या कर दी थी।  इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया. रक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की नीति साफ है – किसी भी हालत में आतंकवादी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  भारत ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपना रुख साबित किया है. उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिर्फ 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी तैयारी थी. अगर जरूरत पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था।  आज की दुनिया तेजी से बदल रही है. कई बड़े देश अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं. राष्ट्रीय हितों को पहले से ज्यादा जोर-शोर से सामने रख रहे हैं. पुराना नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय सिस्टम अब सवालों के घेरे में है. संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कमजोर पड़ रही हैं।   प्रौद्योगिकी, सप्लाई चेन और डिजिटल टूल्स को भी हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में भारत को इस नई दुनिया में और ज्यादा सतर्कता के साथ आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा और विकास की रणनीति को नई परिस्थितियों के अनुसार ढालना होगा।  आतंकवाद के तीन आयाम और उसकी जड़ें राजनाथ सिंह ने आतंकवाद को मानवता पर एक काला धब्बा बताया. उन्होंने कहा कि आतंकवाद सिर्फ एक विकृत मानसिकता है. यह सुरक्षा का मुद्दा ही नहीं, बल्कि मानव मूल्यों की रक्षा की लड़ाई है. आतंकवाद को अक्सर धर्म या किसी हिंसक विचारधारा के नाम पर जायज ठहराने की कोशिश की जाती है, जो दरअसल आतंकियों को कवर फायर देना है।  रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि आतंकवाद सिर्फ राष्ट्र-विरोधी कृत्य नहीं है, बल्कि इसके तीन आयाम हैं – ऑपरेशनल (संचालन संबंधी), आइडियोलॉजिकल (वैचारिक) और पॉलिटिकल (राजनीतिक). आतंकवाद की असली ताकत उसकी वैचारिक और राजनीतिक जड़ों में है. उन्होंने इसे रावण की नाभि से जोड़कर समझाया कि जब तक इस नाभि यानी वैचारिक और राजनीतिक संरक्षण को नहीं सुखाया जाएगा, आतंकवाद पूरी तरह खत्म नहीं होगा. इसलिए आतंकवाद को सिर्फ सैन्य स्तर पर नहीं, बल्कि सभी तीन आयामों में लड़ना जरूरी है।  पाकिस्तान पर सीधा हमला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया कि वह लगातार आतंकवाद को समर्थन देता रहा है. उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान आजादी के समय एक साथ स्वतंत्र हुए, लेकिन आज भारत सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के लिए जाना जाता है, जबकि पाकिस्तान इंटरनेशनल टेररिज्म (International Terrorism) का केंद्र बन गया है।  उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसके प्रायोजकों (स्पॉन्सर्स) में कोई फर्क नहीं करता. पीएम मोदी की नीति के तहत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का रवैया अपनाया गया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को परमाणु हमले की धमकियां भी मिलीं, लेकिन भारत उनमें नहीं फंसा और राष्ट्रहित में जो जरूरी था, वह किया।  तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत का प्रदर्शन ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य शक्ति के नए रूप का उदाहरण बना. इसमें थल सेना, नौसेना और वायु सेना ने एक साथ, एक योजना के तहत काम किया. रक्षा मंत्री ने कहा कि अब भारत की सैन्य शक्ति साइलो में नहीं चलती, बल्कि संयुक्त और एकीकृत रूप में उभरी है. यह एक वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की छवि को मजबूत करता है।  भारत ने ऑपरेशन अपनी शर्तों और अपने समय पर शुरू किया और अपनी शर्तों पर ही समाप्त किया. सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया गया जो हमले के जिम्मेदार थे. ऑपरेशन इसलिए नहीं रोका गया क्योंकि क्षमता कम थी, बल्कि भारत ने अपनी मर्जी से रोका. जरूरत पड़ने पर ज्यादा कुछ भी किया जा सकता था।  स्वदेशी हथियारों की बढ़ती विश्वसनीयता ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम से लेकर निगरानी प्लेटफॉर्म तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का खूब इस्तेमाल हुआ. इससे भारत की सटीकता और घातक क्षमता काफी बढ़ गई. रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन के बाद स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता दुनिया भर में बढ़ी है।  अब कई देश भारत से हथियार और रक्षा सामग्री खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारत का मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स अब शांति काल के साथ युद्ध के समय में भी तेज सप्लाई देने के लिए तैयार है. सर्ज कैपेसिटी और स्टोरेज कैपेसिटी मजबूत हुई है. इससे भारत की डिटरेंस बढ़ी है।  भविष्य की तैयारी: AI और टेक्नोलॉजी रक्षा मंत्री ने भविष्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है. GPU क्षमता बना रहा है. फ्यूचर स्किल्स प्रोग्राम चला रहा है. AI को 'Augmented Infantry' यानी बढ़ी हुई पैदल सेना के रूप में देखा जा रहा है. सेना ने AI, मशीन लर्निंग और बिग डेटा का इस्तेमाल करके अपनी क्षमताएं मजबूत करने का रोडमैप तैयार किया है. इससे देश न सिर्फ ज्यादा सुरक्षित बनेगा, बल्कि शक्तिशाली और समृद्ध भी होगा।  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के इन बयानों से साफ है कि नया भारत आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ बिना किसी समझौते के खड़ा है. ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ आतंकियों को सबक सिखाया, बल्कि दुनिया को भारत की सैन्य तैयारी, संयुक्त ताकत और स्वदेशी क्षमता का संदेश भी दिया. बदलते विश्व में भारत अपनी सुरक्षा और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग और तैयार है।   

बिहार सरकार का निर्णय: पटना चिड़ियाघर अब ‘पटना जू’, बदला गया संस्थानों का नाम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने पटना चिड़ियाखाना और डेयरी तकनीकी संस्थान से संजय गांधी के नाम को हटाने का फैसला लिया है। सीएम सम्राट की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक ने इमरजेंसी लगाने के सूत्रधार कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी का नाम राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से डिलीट कर दिया है। पटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान को अब पटना जू के नाम से जाना जाएगा। आम लोग पहले भी इसे पटना का चिड़ियाखाना या पटना जू ही कहते थे, लेकिन कागज पर नाम संजय गांधी से ही शुरू होता था। वन और पर्यावरण विभाग के अंतर्गत जू को संचालित करने वाली समिति का नाम संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास समिति से पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया गया है। इसी तरह राज्य के डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के तहत चल रहे संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम बदलकर बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना करने का भी फैसला कैबिनेट ने लिया है। बिहार पुश चिकित्सा विश्वविद्यालय के तहत चल रहे इस संस्थान में डेयरी टेक्नोलॉजी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमिस्ट्री, डेयरी माइक्रोबायलॉजी, डेयरी बिजनेस मैनेजमेंट और डेयरी एक्सटेंशन एजुकेशन विभागों में अलग-अलग कोर्स के जरिए छात्र-छात्राओं को पेशेवर शिक्षा दी जाती है। 1973 में चालू हुआ था संजय गांधी जैविक उद्यान संजय गांधी जैविक उद्यान 1973 में आम लोगों के लिए खुला था। 1969 में तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की 34 एकड़ जमीन वनस्पति उद्यान के लिए दी थी। 1972 में इसमें सरकार ने लगभग 120 एकड़ जमीन और जोड़कर इसे जैविक उद्यान और बोटैनिकल पार्क का रूप दे दिया। पटना जू में इस समय 110 प्रजातियों के लगभग 800 जीव-जंतु हैं, जिसमें बाघ, शेर, राइनो वगैरह शामिल हैं। वनस्पति उद्यान में लगभग 300 तरह के पेड़-पौधे हैं। बड़े चिड़ियाघर में पटना जू का देश में चौथा स्थान है। 1980 में स्थापित हुआ था संजय गांधी गव्य प्रावैधिकी संस्थान कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना 1980 में हुई थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त इस डेयरी संस्थान का पहला बैच पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में 1982 में आया। 1986 में संस्थान को पटना लाया गया और 1999 में यह अपने मौजूदा कैंपस में गया। बीच में कुछ समय संस्थान को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से भी जोड़ दिया गया था। 2016 में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद संस्थान को इससे जोड़ दिया गया।