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UP Transport Data Leak? निजी DBA पर गंभीर सवाल, वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मचारी निशाने पर

लखनऊ परिवहन विभाग का संवेदनशील डेटा निजी डाटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर (डीबीए) के हाथों में है। प्रदेश के कई जिलों में अफसरों के खास डीबीए वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, ये डीबीए दलालों को वाहनों और ड्राइविंग लाइसेंसों से संबंधित विवरण उपलब्ध करा रहे हैं। इससे विभाग का पूरा डेटा गंभीर खतरे में है और दलालों से इनकी मिलीभगत उजागर हुई है।   करीब बीस वर्ष पहले परिवहन विभाग को ऑनलाइन डेटा रखरखाव के लिए ऐसे कर्मचारियों की आवश्यकता महसूस हुई थी। आरटीओ-एआरटीओ को डेटा निकासी के लिए अधिकृत किया गया था, लेकिन डीबीए ही उनकी यूजर आईडी से डेटा निकालते हैं। ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ियों की फिटनेस, परमिट और उनकी संख्या सहित पूरा डेटा डीबीए की आसान पहुंच में है। वर्षों से एक ही जिले में तैनात डीबीए की दलालों से सांठगांठ हो गई है। वे दलालों को डीएल, परमिट और फिटनेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मिलीभगत की जानकारी वरिष्ठ अफसरों को भी है। प्रदेशभर में कुल 80 डीबीए कार्यरत हैं, जिनमें से दो लखनऊ में तैनात हैं। बरेली, बदायूं, पीलीभीत, शाहजहांपुर, अमरोहा, वाराणसी, मुरादाबाद, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और कानपुर में कई डीबीए वर्षों से एक ही जगह पर हैं। भेदभावपूर्ण कार्रवाई पर सवाल ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने डीएल बनाने वाले निजीकर्मियों की शिकायत की थी। उन्होंने दलालों से मिलीभगत का हवाला देते हुए पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह से शिकायत की। इसके बाद बिना किसी जांच के निजी डीएलकर्मियों का प्रदेशभर में स्थानांतरण और हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। सूत्रों के अनुसार, पूर्व अपर परिवहन आयुक्त, आईटी पर निजीकर्मियों से वसूली के आरोप भी लगे थे। किंजल सिंह ने इन मामलों में कोई जांच नहीं करवाई। सवाल उठता है कि जब निजी डीएलकर्मियों का स्थानांतरण हो सकता है, तो डीबीए को क्यों बचाया जा रहा है। डीबीए के स्थानांतरण में विफलता ऐसा नहीं है कि डीबीए के स्थानांतरण की कोशिशें नहीं हुईं। तीन साल पहले परिवहन विभाग के आला अफसरों ने स्थानांतरण की कवायद शुरू की थी। हालांकि, अफसरों के खास और जुगाड़ी डीबीए इस प्रक्रिया से बच निकलने में सफल रहे। उन पर किसी भी तरह की आंच नहीं आई और वे अपनी जगह पर बने रहे। सूत्र बताते हैं कि ये डीबीए दलालों के साथ मिलकर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। इसी कारण अफसरों ने उन्हें बचाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। डाटा सुरक्षा और मिलीभगत का खतरा डीबीए की आसान पहुंच के कारण विभाग का संवेदनशील डाटा लगातार खतरे में है। दलालों को गोपनीय जानकारी मिलने से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। यह स्थिति परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अफसरों की मिलीभगत या उदासीनता के कारण यह समस्या वर्षों से बनी हुई है। डाटा सुरक्षा सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है। डीबीए की तैनाती और स्थानांतरण नीतियों की समीक्षा करना महत्वपूर्ण है।  

यूपी में मौसम बना आफत: तेज आंधी, बारिश और वज्रपात से 18 लोगों की जान गई

लखनऊ  प्रदेश में जारी भीषण गर्मी और लू के दौर के बीच बुधवार को तेज हवाओं के साथ हुई बारिश कुछ जिलों के लिए आफत बनकर बरसी। इस दौरान आंधी-बारिश के कारण दीवार ढहने, पेड़ गिरने और बिजली गिरने से हुए हादसों में प्रदेश में 18 लोगों की मौत हो गई। सुल्तानपुर में 7, अमेठी व अयोध्या में 3-3 लोगों की जान चली गई। पूर्वांचल के जिलों में पांच लोगों की मौत हुई है। लखनऊ में शहर से गांव तक की बिजली व्यवस्था चरमरा गई। 100 खंभे और बिजली के तार टूट गए। मौसम की मार ट्रेनों के संचालन पर भी पड़ी। उत्तर व पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल की कई ट्रेनें प्रभावित हुईं। मौसम विभाग ने बृहस्पतिवार को भी प्रदेश के करीब 35 जिलों में गरज-चमक और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। प्रदेश के करीब 20 जिलों में बुधवार को गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का दौर चला। वाराणसी में 109 किमी प्रति घंटे, अयोध्या में 87 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली। हालांकि, इन सबके बीच 45.8 डिग्री सेल्सियस के साथ बांदा बुधवार को भी प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा। लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, सीतापुर में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। गोरखपुर में 19.2 मिमी, प्रयागराज में 11.2 मिमी और वाराणसी में 9 मिमी वर्षा दर्ज की गई। अमेठी और आजमगढ़ में 5 मिमी बारिश हुई। लखनऊ में जगह-जगह तार पर पेड़ों के गिरने से 400 गांवों व कस्बों की बिजली व्यवस्था तीन से सात घंटे तक ध्वस्त रही। 24 घंटे तक रहेगा ऐसा ही मौसम मध्य क्षोभमंडल में उत्तरी पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से पूरे प्रदेश में यह बदलाव देखने को मिला। अगले 24 घंटे तक मौसम का यही रुख बने रहने के संकेत हैं। अतुल कुमार सिंह, आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक   यहां है गरज चमक के साथ वज्रपात की संभावना बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, उन्नाव, रायबरेली, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया, जालौन, हमीरपुर महोबा, झांसी, ललितपुर व आस पास के क्षेत्र। यहां है झोंकेदार हवा (गति 40-50 किमी/घंटा) की आशंका बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, सोनभद्र, मिर्जापुर, भदोही, कन्नीज, कानपुर देहात, कानपुर नगर व आस पास के क्षेत्र।    

ट्रंप के बयान से बाजार की गिरावट, ब्रेंट क्रूड 4% चढ़ा, पॉवेल बने नफरत का कारण

मुंबई  शेयर बाजार में कमजोरी के साथ 30 अप्रैल को कारोबार की शुरुआत हुई है. सुबह 9:30 बजे पर सेंसेक्स 902.35 अंक गिरकर 76,594 पर ट्रेड करते हुए नजर आया. निफ्टी 277 अंक उछलकर 23,900 पर कारोबार करते हुए दिखा. सभी सेक्टर्स में बिकवाली देखी जा रही है. मेटल, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई है. इस गिरावट के पीछे कई वजह शामिल हैं।  सबसे पहली वजह मानी जा रही है कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान देते हुए कहा कि वह अपनी स्थिति संभाल नहीं पा रहा और बिना परमाणु हथियार वाले समझौते पर फैसला लेने में भी असमंजस में है. सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने साफ चेतावनी दी कि ईरान को जल्द समझदारी दिखानी होगी, वरना हालात और बिगड़ सकते हैं. उनके इस सख्त रुख के बाद ग्लोबल मार्केट में असर दिखा और कच्चे तेल की कीमत बढ़कर करीब 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।  डोनाल्ड ट्रंप का बयान डोनाल्ड ट्रंप का ‘नो मोर मिस्टर नाइस गाय’ बयान सिर्फ एक सामान्य कमेंट नहीं, बल्कि उनकी रणनीति का संकेत माना जा रहा है. इसका मतलब है कि अब वह कूटनीतिक नरमी छोड़कर ज्यादा आक्रामक रुख अपनाने के पक्ष में हैं. यूएस और ईरान के बीच बढ़ता टेंशन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई बाधित होने का खतरा, ग्लोबल डर बढ़ा रहा है।  डोनाल्ड ट्रंप के कट्टर दुश्मन माने जाने वाले फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने US Fed की अपनी आखिरी बैठक में एक बार फिर से अमेरिकी पॉलिसी रेट्स को स्थिर रखने को फैसला किया है. यानी इनमें किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. वेस्ट एशिया संषर्ष और इससे महंगाई के खतरे का हवाला देते हुए फेड ने US Policy Rates Unchanged रखे हैं. इसका असर अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट के रूप में दिखा, तो भारत समेत एशियाई शेयर मार्केट क्रैश हो गए।  Sensex-Nifty खुलते ही बिखरे ग्लोबल शेयर बाजारों में मचे कोहराम के बीच भारतीय शेयर मार्केट में आई इस बड़ी गिरावट के बीच BSE Sensex ने अपने पिछले बंद 77,496 के मुकाबले तेज गिरावट लेकर 77,014 पर ओपन हुआ और फिर ये लगातार फिसलता चला गया. कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 900 अंक से ज्यादा का गोता लगाकर 76,502 के लेवल पर आ गिरा।  भारतीय रुपया में गिरावट डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर करीब 95.21 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है, जो रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब माना जा रहा है. रुपये में यह गिरावट विदेशी निवेशकों (FII) के लिए चिंता बढ़ाती है, क्योंकि इससे निवेश का रिटर्न कम हो सकता है, और इसी वजह से शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ जाता है।  यूएस फेड का फैसला ग्लोबल संकेत भी फिलहाल नेगेटिव बने हुए हैं. यूएस फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को भले ही स्थिर रखा है, लेकिन बढ़ती महंगाई और जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण 2026 में रेट कट की उम्मीदें कम हो गई हैं. वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड खासकर 10 साल की करीब 4.4% पर पहुंचने से अमेरिका में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से कैपिटल आउटफ्लो का खतरा बढ़ सकता है।  निफ्टी लगातार गिरते हुए करीब 23,900 के स्तर पर पहुंच गया है और बाजार में पैनिक सेलिंग जैसा माहौल देखने को मिल रहा है. India VIX करीब 4% उछलकर कारोबार कर रहा है, जो इस बात का संकेत है कि भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव (वॉलिटिलिटी) बढ़ रहा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है. अब निवेशकों की नजर Q4 नतीजों पर टिकी है, जहां ACC, Adani Ports, Hindustan Unilever और Bajaj Finserv जैसी बड़ी कंपनियां अपने रिजल्ट्स जारी करेंगी, जो बाजार की आगे की दिशा तय करने में अहम फैक्टर रहेगा। 

कांग्रेस की टेढ़ी नजर उद्धव ठाकरे की खाली सीट पर, कैंडिडेट उतारने को लेकर विपक्ष में विवाद

मुंबई  उद्धव ठाकरे ने इस बार विधान परिषद सदस्य न बनने का फैसला लिया है। उनके स्थान पर उद्धव सेना चाहती है कि अंबादास दानवे को सदन में भेजा जाए। उद्धव ठाकरे ऐसे पहले सदस्य थे, जो ठाकरे फैमिली से सदन में पहुंचे थे। इसको लेकर यह भी कहा गया था कि यह गलत परंपरा है और बालासाहेब ठाकरे से अलग है, जो खुद कभी किसी सदन के लिए निर्वाचित नहीं हुए थे। ऐसे में उनके फैसले को खुद को सही करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि भले ही उद्धव ठाकरे विधान परिषद के मेंबर नहीं बनना चाहते, लेकिन INDIA अलायंस अब उनके स्थान पर किसी उद्धव सेना के किसी और नेता के नाम पर सहमत नहीं दिख रहा है। कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि उद्धव ठाकरे खुद सदन नहीं जाएंगे तो फिर वह अपना कैंडिडेट उतार सकती है। महाराष्ट्र में विधान परिषद की कुल 9 सीटें खाली हो रही हैं और इनमें से एक सीट ही विपक्षी गठबंधन जीतने की स्थिति में है। ऐसे में हालात एक अनार सौ बीमार वाले बन रहे हैं। उद्धव ठाकरे बड़े नेता हैं तो उनके आगे कोई दावेदारी नहीं जता रहा था, लेकिन जब वह पैर पीछे हटा रहे हैं तो फिर कांग्रेस की उम्मीदें भी परवान चढ़ने लगी हैं। 2020 में जब उद्धव ठाकरे सीएम बने थे तो एनसीपी और कांग्रेस ने उन्हें विधान परिषद जाने को कहा था। इस तरह सत्ता के लिए तीनों दल एकजुट थे, लेकिन अब विपक्ष में रहने के दौरान एक-एक सीट के लिए संघर्ष की स्थिति बन रही है। पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सकपाल ने उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। उनका कहना था कि वह खुद चुनाव में उतरें। इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि सेना चीफ खुद नहीं विधान परिषद जाएंगे तो फिर कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतारना चाहती है। बुधवार को हर्षवर्धन सकपाल दिल्ली में थे और पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि उन्होंने हाईकमान से यह मांग की है कि अब उद्धव की खाली हो रही सीट पर कांग्रेस को अपना कैंडिडेट उतारना चाहिए। हालांकि उद्धव सेना ऐलान कर चुकी है कि हम अंबादास दानवे को उद्धव के स्थान पर भेजेंगे। कांग्रेस बोली- हम उद्धव सेना के खिलाफ उतार सकते हैं कैंडिडेट ऐसे में यदि कांग्रेस की ओर से अपने कैंडिडेट के लिए दबाव बनाया गया तो तय है कि आपस में खींचतान शुरू हो जाएगी। कांग्रेस की एक दलील यह भी है कि आखिर उद्धव सेना सहयोगी दलों को भरोसे में लिए बिना एकतरफा फैसला कैसे कर सकती है। यही नहीं एक अन्य कांग्रेस नेता भाई जगताप ने तो दानवे के खिलाफ कैंडिडेट ही खड़े करने की बात कर दी। उन्होंने कहा कि इस मामले में सही राय तो सकपाल रखेंगे, लेकिन मुझे इतनी जानकारी है कि अंबादास दानवे के खिलाफ कांग्रेस अपना कैंडिडेट उतार सकती है। अब यह मामला रोचक होता दिख रहा है क्योंकि विपक्ष में बंटवारा होते देख भाजपा और शिवसेना की ओर से एक अतिरिक्त कैंडिडेट भी उतारा जा सकता है।

पंजाब के मुख्यमंत्री की राष्ट्रपति से अकेली मुलाकात, 6 सांसदों के राइट टू रिकॉल पर करेंगे चर्चा

चंडीगढ़   राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ 5 मई की मुलाकात से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद जो होगा, उससे आगे की रणनीति तय की जाएगी। राघव चड्ढा समेत 7 राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें पंजाब का गद्दार बताया था। इसके साथ ही, भगवंत मान ने दलबदल से जुड़े विषय को लेकर राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा था। खास बात है कि भगवंत मान ने राष्ट्रपति से अपने सारे विधायकों संग मिलने का समय मांगा था, लेकिन राष्ट्रपति ने सिर्फ भगवंत मान को अकेले मिलने का समय दिया है। अब भगवंत मान ने कहा है कि वह अपने सारे विधायकों के साथ दिल्ली राष्ट्रपति भवन जाएंगे। राष्ट्रपति ने भगवंत मान के अकेले मिलने का समय दिया गुरुवार को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी दी कि राष्ट्रपति ने उन्हें 5 मई को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिखा, 'पंजाब की जनता के जनादेश और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 5 मई को दोपहर 12 बजे मिलने का समय दिया है। हालांकि, हमने सभी विधायकों के लिए समय मांगा था, लेकिन मुझे अकेले ही मिलने का निमंत्रण मिला है।' राष्ट्रपति से मिलने के बाद बनाएंगे रणनीति भगवंत मान ने कहा कि वह अपने साथी विधायकों के साथ राष्ट्रपति भवन जाएंगे। उनके सारे विधायक बाहर इंतजार करेंगे और वह अकेले राष्ट्रपति से मिलने अंदर जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं अंदर जाकर राष्ट्रपति के समक्ष सभी की ओर से पंजाब की आवाज और जनता का पक्ष मजबूती से रखूंगा। बैठक के बाद अगली रणनीति साझा की जाएगी। यह कीमती समय देने के लिए माननीय राष्ट्रपति का तहे दिल से धन्यवाद। राघव चड्ढा को लेकर भगवंत मान ने क्या कहा इससे पहले, सीएम मान ने बुधवार को अपने एक बयान में कहा कि जो लोग इस दलबदल को सामान्य बात या परंपरा बता रहे हैं, वे जनता के फैसले की घोर अवहेलना को उचित ठहरा रहे हैं। यह अस्वीकार्य है, और इस तरह बोलने वाले लोग अपनी निष्ठा बदलने की तैयारी में दिख रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता के जनादेश का अपमान करने वाले ये सांसद किसी भी दया के पात्र नहीं हैं, क्योंकि वे पंजाब और पंजाबियों के गद्दार हैं। राष्ट्रपति से क्यों मिलने जा रहे CM मान आम आदमी पार्टी (AAP) के कुल 7 व पंजाब से राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद पार्टी में बड़ी फूट की खबरें सामने आई थीं। पालिटिकल एक्सपर्ट डॉ. कृपाल सिंह औलख की मानें तो विधायकों को साथ ले जाकर मान यह दिखाना चाहते हैं कि पंजाब के विधायक अभी भी उनके और अरविंद केजरीवाल के साथ पूरी तरह एकजुट हैं। इसके अलावा वह पंजाब में भी मैसेज देने की कोशिश करेंगे कि उनकी पार्टी के 6 सांसदों ने पार्टी बदली तो उन्होंने उनकी मेंबरशिप खारिज करने तक की लड़ाई लड़ी। इससे इस बात का भी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश होगी कि AAP ने गैर पंजाबियों को चुनकर राज्यसभा भेजा था। चूंकि राज्यसभा के लिए विधायक वोटिंग करते हैं, इसलिए इसमें लोगों का सीधा दखल नहीं है। इस फैसले की जिम्मेदार उन्हें राज्यसभा भेजने वाली पार्टी ही होती है। कल विधायकों की जालंधर मीटिंग की इनसाइड स्टोरी भी पढ़िए… कल आम आदमी पार्टी (AAP) ने जालंधर में मीटिंग बुलाई थी। सवा घंटे चली इस मीटिंग में विधायकों ने इकट्ठा होकर शक्ति प्रदर्शन किया। राघव चड्ढा के सवाल पर हर विधायक चिढ़ता नजर आया। खुद सिसोदिया यह कहकर निकल गए कि BJP बहुत घटिया और झूठी पार्टी है। उसकी बातों में मत आया करो। मीटिंग में CM भगवंत मान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे। इस दौरान CM ने सुखपाल खैहरा का उदाहरण देते हुए विधायकों को अप्रत्यक्ष तौर पर चेतावनी दी। CM ने कहा- कुछ गड़बी पानी निकलने से नदी नहीं सूखती। खैहरा को भी गलतफहमी हुई थी कि AAP को छोड़ने से AAP खत्म हो जाएगी। खैहरा के न रहते भी 92 MLA आए। जो गए, उन्हें भी यही भ्रम है, लेकिन अच्छा हुआ वे वक्त से गए। इनके जाने से जो निगेटिविटी फैली है, उसे अगले कुछ महीनों में दूर कर लिया जाएगा। पार्टी सूत्र ने दावा किया की मीटिंग में 80 से ज्यादा विधायक आए थे। कुछ हाजिरी लगाकर निकल गए, क्योंकि उनके कार्यक्रम पहले से शेड्यूल थे। AAP की मीटिंग के क्या राजनीतिक मायने…     कार्यकर्ताओं-विधायकों को बुलाकर विरोधियों को जवाब: पंजाब की AAP सरकार ने जालंधर में करीब 1 हजार ऑब्जर्वर और विधायकों की मीटिंग बुलाई। पार्टी सूत्रों ने बताया कि राघव चड्ढा के साथ हुए विवाद और फिर पार्टी के 6 राज्यसभा सांसदों के टूटने से बॉटम लाइन वर्करों में मैसेज जा रहा था कि पार्टी में गड़बड़ी है। विरोधी कई दिन से AAP पर हमलावर थे। मीटिंग के जरिए उन्हें जवाब दिया गया।     वर्करों के बीच जाकर साथ खड़े होने का संदेश: BJP ने AAP के राज्यसभा सांसदों को तोड़कर बड़ा डेंट दिया है। सूत्र बताते हैं कि मीटिंग में वर्करों की निराशा को दूर करने पर काम किया गया। उन्हें गेम खिलाना इसी का हिस्सा रहा। खुद सिसोदिया ने एक-एक के पास जाकर हाथ मिलाया।     विधायकों-ऑब्जर्वर्स की बॉन्डिंग चेक की: पार्टी के ही एक जिला लेवल वर्कर ने बताया कि मीटिंग और गेम्स के जरिए विधायकों और ऑब्जर्वर्स के बीच की बॉन्डिंग भी चेक की गई। चुनाव सामने हैं और पार्टी इससे पहले हर तरह का नाराजगी को दूर करना चाहती है। इसलिए, सबको एक मंच पर लाया गया, ताकि ऊपर से भेजे मैसेज का नीचे तक असर हो।     एक्टिविटी करवाकर जोश भरा: पार्टी की तरफ से विधायकों और ऑब्जर्वर्स के बीच 20 मिनट तक गेम करवाए गए। इसमें रस्साकसी और रिंग के बीच से शरीर निकालने का कंपीटिशन करवाया गया। खुद मनीष सिसोदिया ने वर्करों और विधायकों के … Read more

हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की ठोस प्रतिबद्धता

(1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष) हर हाथ को काम, हर श्रमिक को सम्मान: विष्णु देव सरकार की प्रतिबद्धता छगन लोन्हारे, उप संचालक जंनसंपर्क रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।  मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है। प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।  श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।  उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।

बिरयानी कांड के बाद मुंबई में तरबूज की बिक्री पर रोक, दुकानदारों में खौफ

मुंबई  दक्षिण मुंबई के पाइधोनी इलाके से दिलचस्प खबर सामने आ रही है. यहां बाजार से तरबूज एकदम गायब हो गया है. इसी इलाके में हाल ही में बिरयानी के साथ तरबूज खाने से एक परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी. जिसके बाद जांच के लिए पाइधोनी इलाके में पहुंची खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) टीम पहुंची।  हालांकि इस मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब एफडीए की टीम बाजार में जांच के ल‍िए पहुंची लेक‍िन उसे इलाके में एक भी तरबूज बेचने वाला नहीं मिला और न ही क‍िसी फल की दुकान पर तरबूज म‍िला।  बता दें कि 27 अप्रैल को अब्दुल्लाह डोकड़िया (40), उनकी पत्नी नसीम (35) और बेटियां आयशा (16) व जैनब (13) ने तरबूज और बिरयानी खाने के बाद उल्टी और बेहोशी के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए थे. चारों की कुछ ही घंटों के अंतराल में मौत हो गई थी।  एफडीए अब लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, लेकिन शायद यही डर है कि बाजार में तरबूज बेचने वाले सभी विक्रेता अचानक गायब हो गए हैं. इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी है।  इस घटना के बाद तरबूज को लेकर डर का आलम ऐसा था कि जब रविवार शाम 7 बजे एफडीए की टीम पहली बार पाइधोनी बाजार पहुंची, तब तक इलाके से तरबूज पूरी तरह गायब हो चुका था. बाजार में एक भी फल विक्रेता के पास तरबूज नहीं मिला. उसके बाद सोमवार, मंगलवार और बुधवार को भी FDA की टीमें लगातार बाजार में छापेमारी करती रहीं कि किसी के पास तरबूज मिले लेकिन वहां एक भी विक्रेता या तरबूज नहीं मिला।  एक FDA अधिकारी ने कहा, “यह बहुत अजीब मामला है. हमने पहले कभी ऐसा नहीं देखा. हमने पिछले रिकॉर्ड्स भी चेक किए, लेकिन तरबूज या तरबूज-बिरयानी से जुड़ा कोई फूड पॉइजनिंग का केस पहले नहीं मिला।  तरबूज बेचने वाले के गायब होने से रुकी जांच अधिकारियों ने कहा कि इलाके में तरबूज विक्रेता का पता न चल पाने से जांच की एक महत्वपूर्ण दिशा रुक गई है.अगर तरबूज स्थानीय बाजार से खरीदा गया था, तो हो सकता है कि इसे अन्य लोगों ने भी खाया हो लेकिन अब तक ऐसा कोई और केस रिपोर्ट नहीं हुआ है. परिवार के रिश्तेदारों से पूछताछ भी की गई लेकिन यह पता नहीं चल सका कि तरबूज आखिर कहां से खरीदा या लाया गया था।  एफडीए ने लिए 11 सैंपल जांच के बीच एफडीए ने मृतक परिवार के घर से 11 सैंपल इकठ्ठा किए हैं, जिनमें फ्रिज से बचा हुआ तरबूज और बिरयानी, बर्तनों से निकाला गया पुलाव, फ्रीजर से कच्चा चिकन, मसाले, चावल, आधा खाया हुआ खजूर, गिलासों में रखा पानी और मिट्टी का घड़ा शामिल है। फिलहाल लैब रिपोर्ट आने में देरी के चलते जांच आगे बढ़ने में दिक्कत आ रही है. हालांकि एफडीए अब लैब रिजल्ट का इंतजार कर रही है, ताकि मौत की असली वजह का पता  लगाया जा सके। 

मुंबई का 243 रन भी न था काफ़ी, हैदराबाद ने 6 विकेट से रौंदा

मुंबई  वानखेड़े स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 243 रनों का विशाल स्कोर डिफेंड न कर पाने के बाद मुंबई इंडियंस (MI) के कप्तान हार्दिक पंड्या बेहद निराश नजर आए। हार के बाद दिए गए बयान में हार्दिक ने हार के कारणों और टीम की स्थिति पर खुलकर बात की। मुंबई इंडियंस ने बोर्ड पर 243 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया था, लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद ने इस लक्ष्य को 8 गेंद शेष रहते ही हासिल कर लिया। यह आईपीएल इतिहास का चौथा सबसे बड़ा रन-चेज है। मैच के बाद हार्दिक पंड्या ने हार के लिए किसी एक खिलाड़ी को नहीं बल्कि टीम के ओवरऑल प्रदर्शन और खराब गेंदबाजी को मुख्य कारण बताया। ओपनिंग साझेदारी और खराब गेंदबाजी बनी मुजरिम हार्दिक पंड्या ने स्पष्ट किया कि ओस ने मैच में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई। उन्होंने हार का असली मुजरिम खराब गेंदों को बताया। हार्दिक ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि ओस की कोई खास भूमिका थी। बात बस इतनी थी कि उन्होंने (अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड) कुछ अच्छे शॉट्स खेले और हमने कुछ बहुत खराब गेंदें फेंकी। उन्हें शानदार शुरुआत मिल गई। हमने वापसी करने की कोशिश की, लेकिन वह काफी नहीं था।' इतना बड़ा स्कोर नहीं बचा पाने के बावजूद हार्दिक ने अपने गेंदबाजों का बचाव किया। उन्होंने कहा कि वह अपने गेंदबाजों को इस हार का इकलौता दोषी मानकर उन पर दबाव नहीं डालेंगे। हार्दिक के अनुसार, 'मैं अपने गेंदबाजों को दोष नहीं दूंगा। मुझे भरोसा था कि 244 का स्कोर डिफेंड किया जा सकता है, लेकिन आज हमारा एग्जीक्यूशन सही नहीं रहा। एक यूनिट के तौर पर हम वो नहीं कर पाए जिसके लिए मुंबई इंडियंस जानी जाती है।' किस्मत और मौकों का हाथ से निकलना मैच में ट्रेविस हेड का एक कैच छूटना या अपील न करना मुंबई को बहुत भारी पड़ा। इस पर हार्दिक ने कहा कि जब आप मौके भुनाते हैं, तब मोमेंटम बदलता है, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करते तो यह आपको चोट पहुंचाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि इस सीजन में किस्मत और मौके उनके पक्ष में नहीं रहे हैं। फैंस की हूटिंग और वफादारी पर दर्द मैच के दौरान वानखेड़े में विपक्षी टीम के नाम के नारे लगने पर हार्दिक ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने कहा, 'कभी-कभी दुख होता है जब विपक्षी टीम आती है और फैंस उनके नाम के नारे लगाते हैं। हमारे फैंस बहुत वफादार रहे हैं, लेकिन हमें उन्हें एंटरटेन करने और उनका भरोसा फिर से जीतने की जरूरत है।'  

अंश निर्धारण में बहराइच ने मारी बाजी, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला

अंश निर्धारण में बहराइच अव्वल, 99.6% निस्तारण के साथ बना मॉडल जिला मुख्यमंत्री योगी के राजस्व सुधार अभियान को मिली गति, जमीनी स्तर पर सक्रियता से हासिल हुई बड़ी उपलब्धि डीएम अक्षय त्रिपाठी के नियमित समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने से यह उपलब्धि हासिल हुई लखनऊ  प्रदेश में भूमि संबंधी कार्यों को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए चल रहे योगी सरकार के अंश निर्धारण अभियान में बहराइच जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के नेतृत्व में जिले ने निर्धारित समय सीमा के भीतर 99.6 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर एक नई मिसाल कायम की है। जमीनी स्तर पर सक्रियता बनी सफलता की कुंजी योगी सरकार की प्राथमिकता वाले इस अभियान के तहत बहराइच जिला प्रशासन ने गांव-गांव जाकर अंश निर्धारण की प्रक्रिया को गति दी। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने किसानों एवं भूमिधरों के बीच विवादित हिस्सों का सत्यापन कर रिकॉर्ड को अपडेट किया, जिससे वर्षों से लंबित मामलों का समाधान संभव हो सका। जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने बताया कि नियमित समीक्षा, जिम्मेदारी तय करने और समयबद्ध लक्ष्य निर्धारण के कारण यह उपलब्धि हासिल हुई। प्रशासन की इस सक्रियता से न केवल भूमि विवादों में कमी आएगी, बल्कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी अधिक सुगम होगी। प्रदेश के लिए बन सकता है रोल मॉडल अंश निर्धारण की प्रक्रिया भूमि प्रबंधन और विकास कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहले कई परियोजनाएं इसी कारण अटक जाती थीं, लेकिन अब बहराइच जैसे जिलों के बेहतर प्रदर्शन से यह समस्या दूर होती दिख रही है। बहराइच का यह मॉडल अन्य जिलों में भी लागू किए जाने की दिशा में देखा जा रहा है, जिससे पूरे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाया जा सके।

शुभमन गिल की टाइटंस तैयार, लेकिन भुवनेश्वर कुमार-हेजलवुड की जोड़ी बनेगी सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली  आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर है और गुरुवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में एक हाई-वोल्टेज मुकाबला होने जा रहा है। गुजरात टाइटंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु एक हफ्ते के भीतर दूसरी बार आमने-सामने होंगे। शुभमन गिल की कप्तानी वाली टाइटंस पिछली हार का हिसाब चुकता करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी, क्योंकि पिछली भिड़ंत में RCB ने 206 रनों के विशाल लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया था। गुजरात टाइटंस के लिए बदले का मौका गुजरात टाइटंस ने पिछले मैच में चेन्नई सुपर किंग्स को 8 विकेट से करारी शिकस्त देकर अपनी हार का सिलसिला तोड़ दिया है। यह जीत टीम के मनोबल के लिए संजीवनी साबित हुई है। हालांकि, बेंगलुरु के खिलाफ जीत दर्ज करने के लिए उन्हें अपनी पुरानी गलतियों से सीखना होगा। विशेष रूप से, टाइटंस को अपनी सुरक्षित बल्लेबाजी की रणनीति को बदलकर थोड़ा और आक्रामक रुख अपनाना होगा। RCB का विजय रथ, गेंदबाजी और बल्लेबाजी में बेजोड़ संतुलन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु इस समय शानदार फॉर्म में है। दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ पिछले मुकाबले में उनके गेंदबाजों ने जो कहर बरपाया, उससे पूरी लीग में खौफ है। पूरी दिल्ली की टीम को मात्र 75 रनों पर समेटकर बेंगलुरु ने अपनी गेंदबाजी की ताकत का लोहा मनवाया है। भुवनेश्वर और हेजलवुड का डबल अटैक बेंगलुरु की सफलता का एक बड़ा श्रेय उनके अनुभवी तेज गेंदबाजों को जाता है। 36 साल के भुवनेश्वर कुमार और 35 साल के जोश हेजलवुड ने साबित कर दिया है कि टी20 क्रिकेट में अनुभव से बढ़कर कुछ नहीं है। पिछले मैच में इन दोनों ने मिलकर सिर्फ 17 रन दिए और 7 महत्वपूर्ण विकेट झटके। टाइटंस के बल्लेबाजों के लिए इस जोड़ी की सटीक लाइन-लेंथ से पार पाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। 200 का आंकड़ा अब बच्चों का खेल RCB की बल्लेबाजी इस समय फीयरलेस मोड में है। फिल साल्ट जैसे विस्फोटक खिलाड़ी की गैरमौजूदगी में भी जैकब बेथेल ने टीम के आक्रमण को कमजोर नहीं होने दिया। बेंगलुरु के लिए अब 200 से अधिक का लक्ष्य पीछा करना या बनाना बेहद आसान नजर आ रहा है। उनकी गहराई भरी बल्लेबाजी लाइन-अप किसी भी गेंदबाजी आक्रमण को तहस-नहस करने की क्षमता रखती है।