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योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना

गंगा एक्सप्रेसवे की कहानी, जिसने लिखी विकास की महागाथा योगी सरकार की स्पष्ट नीति, साफ नीयत और मजबूत नेतृत्व से साकार हुआ सपना गंगा एक्सप्रेसवे : कड़ी चुनौतियों के बीच भी नहीं रुकी रफ्तार, निर्धारित समयसीमा में पूरा हुआ सपना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देखा गया एक सपना बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के रूप में देश को समर्पित हो गया। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनने की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जहां स्पष्ट नीति, मजबूत इच्छाशक्ति, तकनीक और प्रशासनिक दक्षता ने कच्ची मिट्टी पर विकास की महागाथा लिख दी। गंगा एक्सप्रेसवे की निर्माण यात्रा इस बात का प्रमाण है कि बुलंद इरादों और प्रभावी क्रियान्वयन से कुछ भी संभव है। गंगा एक्सप्रेसवे, निर्णय से निर्माण तक की वह कहानी है, जो उत्तर प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ की दिशा में नई गति देगी। 2017–2019: सुनियोजित विकास की रूपरेखा वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यभार संभाला और ग्रीनफील्ड, एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे विकसित करने का फैसला किया गया। 2018–19 में डीपीआर, भूमि चिन्हांकन और टेक्नो-इकोनॉमिक स्टडी पूरी की गई। यही वह चरण था, जहां प्रदेश के समावेशी विकास तथा भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर इस एक्सप्रेसवे की डिजाइन तैयार की गई और इसे अमली जामा पहनाने के लिए डेडिकेटेड टीम तैयार की गई। 2020–2021: नीति से क्रियान्वयन तक वर्ष 2020 गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुआ, जब परियोजना को आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां प्राप्त हुईं और इसके वित्तीय ढांचे को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत अंतिम रूप दिया गया। इससे न केवल निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि परियोजना के समयबद्ध और पेशेवर क्रियान्वयन की मजबूत नींव भी रखी गई। इसके बाद वर्ष 2021 में टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक तरीके से पूरा करते हुए पूरे प्रोजेक्ट को 4 प्रमुख ग्रुप/पैकेज में विभाजित किया गया। इन पैकेजों का कार्यान्वयन देश की अग्रणी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, आईआरबी, अडानी, एचजी इंफ्रा और एलएंडटी जैसी एजेंसियों को सौंपा गया। यह मल्टी-पैकेज रणनीति परियोजना के लिए गेम चेंजर साबित हुई, क्योंकि इससे अलग-अलग हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सका। 2021–2025: नींव से निर्माण तक 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने शाहजहांपुर में गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास किया, जिसके साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने जमीन पर वास्तविक गति पकड़ी। शिलान्यास के तुरंत बाद 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के अलग-अलग पैकेजों में निर्माण कार्य शुरू किया गया। नतीजतन, जहां पहले ऐसी मेगा परियोजनाएं वर्षों तक खिंच जाती थीं, वहीं इस रणनीतिक योजना के कारण गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण ने अभूतपूर्व गति पकड़ी और यह प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने लगा। 2026: सपना बना हकीकत ट्रायल रन, सेफ्टी ऑडिट और अंतिम तकनीकी जांच पूरी होने के बाद 29 अप्रैल 2026 को गंगा एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस परियोजना का 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया था, उसी का उद्घाटन भी उनके कर-कमलों से संपन्न हुआ, जो समयबद्ध क्रियान्वयन और प्रतिबद्धता का प्रतीक है।  चुनौतियां आईं, लेकिन रुकी नहीं रफ्तार भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय संतुलन, कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी और जटिल तकनीकी कार्यों जैसी बड़ी चुनौतियों के बावजूद गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कभी थमा नहीं। लगभग एक लाख किसानों से भूमि अधिग्रहण को पारदर्शी मुआवजा और डीबीटी के माध्यम से तेज और विवाद-मुक्त बनाया गया, वहीं पर्यावरणीय मानकों का पालन करते हुए अलाइनमेंट को संतुलित ढंग से विकसित किया गया। कोविड काल में श्रमिकों और सप्लाई चेन की बाधाओं के बीच भी स्थानीय संसाधनों के उपयोग और चरणबद्ध निर्माण रणनीति से कार्य निरंतर चलता रहा। सीएम योगी की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता रही निर्णायक इस पूरे प्रोजेक्ट की गति बनाए रखने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सक्रिय निगरानी और प्रतिबद्धता निर्णायक रही। उन्होंने नियमित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों के माध्यम से हर चरण की प्रगति पर नजर रखी, जबकि उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की सक्रिय भूमिका ने जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को गति दी। ड्रोन सर्वे, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग से कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की गई। परिणामस्वरूप, यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल चुनौतियों को पार करता हुआ आगे बढ़ा, बल्कि तय समयसीमा में पूरा होकर प्रभावी प्रशासन और मजबूत नेतृत्व का उदाहरण भी बना।

शिलान्यास से उद्घाटन तक: योगी सरकार की तेज़ी से विकास की पहचान

शिलान्यास से लेकर उद्घाटन तक का संकल्प, तेज गति है योगी सरकार की पहचान एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर से उत्तर प्रदेश को मिली नई पहचान योगी सरकार में हर विकास योजना को रिकॉर्ड समय में किया गया पूरा लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने यह दिखाया है कि योजनाओं को केवल शुरू करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूरा करना ही असली विकास है। सीएम योगी ने यूपी को ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ दिया। इसमें परियोजनाओं की परिकल्पना से लेकर उनके पूर्ण होने तक काम कभी नहीं रुकता, चाहे जेवर एयरपोर्ट, गंगा, पूर्वांचल, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे हों या इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी अन्य योजनाएं। ताजा उदाहरण देखा जाए तो गंगा एक्सप्रेसवे हमारे सामने है। 595 किलोमीटर के एक नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश में 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास किया गया और 29 अप्रैल 2026 को आज जनता को समर्पित कर दिया गया। सीएम योगी ने उत्तर प्रदेश को 9 वर्षों में बीमारू राज्य की पहचान से बाहर निकाला। उन्होंने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सड़क, मेट्रो, एयरपोर्ट समेत अन्य तमाम क्षेत्रों में सौगात दी। सीएम योगी के कार्यकाल में सिर्फ योजनाएं बनी ही नहीं बल्कि वह जमीन पर भी उतरीं। उन्होंने योजनाओं का शिलान्यास किया फिर जमीनी स्तर पर इनकी तैयारी, विभागों की जिम्मेदारी, निर्माणाधीन योजनाओं की लगातार निगरानी खुद की और आखिर में उनका लोकार्पण कर प्रदेश की जनता को लाभ पहुंचाया। सीएम योगी के निर्देशन में ही जेवर एयरपोर्ट के पहले फेज का रिकॉर्ड टाइम में उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ, जिसका शिलान्यास 25 नवंबर 2021 को किया गया था। यह उत्तर प्रदेश का पांचवां इंटरनेशनल एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात के दबाव कम करने का काम कर रहा है। साथ ही सीएम योगी के विजन के चलते ही उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जहां 5 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे बन चुके हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे समेत लिंक एक्सप्रेस पूरे हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन की ही देन है कि 14 जुलाई 2018 को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास हुआ और 16 नवंबर 2021 को इसका उद्घाटन भी कर दिया गया। इसी क्रम में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की आधारशिला फरवरी 2020 में रखी गई और जुलाई 2022 में इसे जनता को समर्पित किया गया। उत्तर प्रदेश को बीमारू राज्य से बाहर निकालने के लिए बुंदेलखंड जैसे तमाम पिछड़े क्षेत्रों सड़क नेटवर्क को बढ़ावा दिया गया। इससे क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति में भी बदलाव हो रहा है। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का भी मार्च 2019 में शिलान्यास हुआ। यह एक्सप्रेसवे भी लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण योगी सरकार अगले कुछ महीने में कर सकती है। इससे लखनऊ-कानपुर के बीच की यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर 45 मिनट हो जाएगा।  वहीं पूर्वांचल की राह आसान करने वाले गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में पूरा किया गया। इस परियोजना पर काम फरवरी 2020 से शुरू हुआ था। प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के चलते इसका जून 2025 में योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन किया। वहीं 115 किलोमीटर लंबे झांसी लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर भी कार्य योजना बनाई जा रही है। अनुमान है कि इस पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह 63 गांव से होकर गुजरेगा, जिससे विकास की धारा बहेगी। इन्हीं विजन के चलते आज देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गई है। एयरपोर्ट कनेक्टिविटी में शानदार उपलब्धि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में केवल दो एयरपोर्ट संचालित हो रहे थे, जिसमें लखनऊ और वाराणसी का नाम शामिल है। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन ने देश में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल दी। राज्य 21 एयरपोर्ट का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीएम योगी ने यूपी को 5 इंटरनेशनल एयपोर्ट वाले राज्य के रूप में पहचान दिलाई है। इसका सबसे जीवंत उदाहरण अयोध्या एयरपोर्ट भी है। अयोध्या में फरवरी 2022 से महर्षि वाल्मीकि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनना शुरू हुआ था। यह रिकॉर्ड समय में बनकर तैयार हुआ और 30 दिसंबर 2023 में उद्घाटन किया गया। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के लिए 10 मार्च 2024 की तारीख काफी अहम रही। इस दिन एक साथ आजमगढ़, अलीगढ़, चित्रकूट, मुरादाबाद और श्रावस्ती के हवाई अड्डों का उद्घाटन किया गया। सीएम योगी के विजन का नतीजा है कि जहां 2016-17 में महज 59.97 लाख लोगों ने हवाई यात्रा की थी। वहीं 2024-25 में यह संख्या 14 करोड़ से ज्यादा हो गई। हर शहर को मेट्रो देने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश में रैपिड रेल और मेट्रो परियोजनाओं को लेकर भी काफी काम हुआ है। इस तरफ भी योगी सरकार ने पूरा ध्यान दिया है। यूपी के शहरों के अंदर यातायात सुधारने के लिए तेजी से मेट्रो कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। इसी क्रम में 7 दिसंबर 2020 को आगरा मेट्रो की नींव रखी गई। महज चार साल के अंदर मार्च 2024 में इसका उद्घाटन कर संचालन शुरू किया गया। वहीं 22 फरवरी 2026 को मेरठ मेट्रो का संचालन शुरू हुआ। वहीं योगी सरकार ने गोरखपुर, वाराणसी, मेरठ और प्रयागराज में भी मेट्रो संचालन की मंशा जाहिर की है। रक्षा क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का बढ़ रहा योगदान केंद्र सरकार ने योगी सरकार पर भी भरोसा जताया और नतीजा रहा कि आज यूपी में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट भी बन चुकी है। लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन मई-जून 2025 में हुआ, जिससे देश में यूपी की अलग छवि बनी है। वहीं वर्ष 2019 में यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) की नींव रखी गई और वर्ष 2023 से इसका संचालन शुरू हुआ। इसके तहत कानपुर में गोला-बारूद और मिसाइल संयंत्र अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस में फरवरी 2024 से काम शुरू हो गया है। रक्षा उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश बड़ी भूमिका निभा रहा है। इन विकास योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि योगी सरकार के ‘कंप्लीट पैकेज मॉडल’ की सफलता के पीछे बदलाव की लाने की इच्छा और प्रशासनिक सुधार महत्वपूर्ण कारण हैं। अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है और काम में लापरवाही के लिए सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। इसके साथ ही तकनीक का उपयोग बढ़ाकर परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाया गया, जिससे सफलता … Read more

अपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव की भव्य पदभार यात्रा संपन्न

भोपाल अपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने आज सांय 5:00 बजे अपेक्स बैंक के सुभाष यादव समन्वय भवन में अपनी विशाल पदभार यात्रा के साथ प्रवेश किया l  आपके साथ मध्य प्रदेश शासन के माननीय सहकारिता तथा खेलकूद व युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, माननीय पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर, प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा, भोपाल के विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दस सबनानी, मध्य प्रदेश सहकारिता प्रकोष्ठ के संयोजक किशनसिंह भटोल, प्रदेश मंत्री श्रीमती राजो मालवीय, प्रवक्ता अजय सिंह यादव, नगर निगम के अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी, पूर्व नगर निगम अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह चौहान, रविंद्र यति सहित विशाल जन समूह ने यात्रा के रूप में पहुंचकर आयोजन को गरिमामयी बनाया . इस पदयात्रा को प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने  प्रदेश बी जे पी कार्यालय से रवाना किया. यह यात्रा का लिंक रोड नंबर 1 पर लगभग 20 जगह स्वागत मंचों के माध्यम से स्वागत हुआ, तदुपरान्त अपेक्स बैंक प्रांगण में पहुंची. पदभार ग्रहण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के सहकारिता एवं खेलकूद व युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने महेंद्र सिंह यादव जी को संगठन एवं पार्टी का एक कर्मठ निष्ठावान कार्यकर्ता बताया तथा मध्य प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व व माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का सहकारी साख आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह की आकांक्षाओं के अनुरूप मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में निरंतर प्रगति पद पर अग्रसर है एवं महेंद्र सिंह यादव मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रदेश कि सहकारी साख संरचना को और मजबूती प्रदान करेंगे यह मुझे विश्वास है. उन्होंने यादव के सफल कार्यकाल के लिए मंगल कामनाएं दीं. उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने  0% ब्याज पर किसानों के लिए ऋण उपलब्ध कराकर देश के आम सर्वहारा वर्ग की सेवा करने का जो संकल्प लिया है उसमें हम सब सहभागिता करते हुए निरंतर अग्रसर रहेंगे.  समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंहअपेक्स बैंक के नवनियुक्त प्रशासक महेंद्र सिंह यादव जी में आज अपराह्न 5:00 बजे अपेक्स बैंक के सुभाष यादव समन्वय भवन में अपनी विशाल पदभार यात्रा को साथ प्रवेश किया आपके साथ मध्य प्रदेश शासन के माननीय सहकारिता तथा खेलकूद्वा युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मध्य प्रदेश की माननीय पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती कृष्णा गौर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा भोपाल के विधायक भगवान दास सबनानी रामेश्वर शर्मा मध्य प्रदेश सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रादेशिक अध्यक्ष कृष्ण सिंह भटोल प्रदेश मंत्री राजू मालवीय प्रादेशिक प्रवक्ता अजय सिंह यादव राय जिला अध्यक्ष ग्रामीण नगर निगम के अध्यक्ष किशन सिंह सूर्यवंशी पूर्व नगर निगम अध्यक्ष डॉक्टर सुरजीत सिंह चौहान सहित विशाल जैन समूह ने यात्रा के रूप में पहुंचकर आयोजन को गरिमा में बनाया .  इस भाव पदयात्रा का शुभारंभ प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी एवं सरकार माननीय सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश शरण जी ने करवाया कराया यह यात्रा लिंक रोड नंबर 1 से लगभग 20 जगह स्वागत मंचों के माध्यम से स्वागत के उपरांत अपेक्स बैंक प्रांगण में पहुंची  अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता जी ने आरंभ में अतिथियों का स्वागत किया एवं के बारे में प्रकाश डाला कार्यक्रम में विश्वास कैलाश सारंगी भगवान दास सबनानी नारायण सिंह कुशवाहा भगवान दास सबनानी ने अपने उद्गार व्यक्त किया  मध्य प्रदेश के सहकारिता मंत्री एवं खेलकूद वायु व कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने महेंद्र सिंह यादव जी को संगठन एवं पार्टी का एक कर्मठ विस्थापन कार्तिक कार्यकर्ता बताया तथा मध्य प्रदेश के शीश नेतृत्व व माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का सहकारी शाखा आंदोलन माननीय नरेंद्र मोदी जी एवं मनीष अमित शाह जी की आकांक्षाओं के अनुरूप मध्य प्रदेश में डॉक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में निरंतर प्रगति पद पर अग्रसर होगा एवं महेंद्र सिंह यादव मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहकारी सख्त संरचना को और मजबूती प्रदान करेंगे यह में विश्वास दिलाता हूं उन्होंने यादव के सफल एवं शुद्धिक जीवन की मंगल कामनाएं विधि उन्होंने आगे बताया कि हमारी सरकार ने विकास 0% ब्याज पर किसानों के लिए ऋण उपलब्ध कराकर देश के आम सर्वहारा वर्ग की सेवा करने का जो संकल्प लिया है उसमें हम सब सहभागिता करते हुए निरंतर अग्रसर रहेंगे.  इसलिए अवसर पर ऊर्जा मंत्री प्रदुभन सिंह तोमर भी उपस्थित रहें. समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने बताया कि महेंद्र यादव जी के साथ उनके लगभग 35 वर्ष पुराना रिश्ता है और मेरे जीवन की शुरुआत भी सहकारिता से ही हुई है निश्चित रूप से यादव अपेक्स बैंक के प्रशासक के रूप में अपने दीघा अनुभवों एवं समर्पित कार्यशैली से अपेक्स बैंक को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्रयास करने में सफल होंगे और जन आकांक्षाओं पर खरे उतरेंगे.  इस अवसर पर विधायक भगवान दास सबनानी ने भी महेंद्र सिंह यादव जी के साथ अपनी लगभग तीन दशक की राजनीतिक यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्हें एक सरल सहज हुआ निष्ठावान व्यक्ति बताया.  पदभार ग्रहण करने के उपरांत महेंद्र सिंह यादव ने अपने उद्बोधन में प्रदेश के नेतृत्व एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया और बताया कि मैं स्वयं एक किसान पृष्ठभूमि से संबंध रखता हूं मुझे याद है पूर्ववर्ती सरकारों में जब 18 परसेंट 15% ब्याज दर पर किसानों को बहुत मुश्किल से उपलब्ध हो पाता था और किसान साहूकारों के चंगुल में फंसा रहता था लेकिन 2013 के बाद जब मध्य प्रदेश में हमारी सरकार आई तब हमारी सरकार ने 0% ब्याज पर किसानों को सरल प्रक्रिया से ऋण उपलब्ध कराकर सर्वहारा वर्ग की सेवा का जो बीड़ा उठाया था वह आज पूरे प्रदेश में फली भूत हो रहा है.  कार्यक्रम की शुरू में अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक महोदय ने अतिथियों का स्वागत किया एवं स्वागत उद्बोधन में कहां की दिनांक 14 अप्रैल से मध्य प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर एवं माननीय से सहकारिता मंत्री जी की मार्गदर्शन में प्रदेश में नए 10 लाख सदस्य बनाने का अभियान शुरू हुआ है जिसमें अभी तक 4 लाख सदस्य बन चुके हैं एवं 60000 लोगों ने अंश पूंजी जमा कर … Read more

सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच

सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “सही दवा, शुद्ध आहार यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में मनेंद्रगढ़, झगराखांड और खोंगापानी क्षेत्र में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने विभिन्न दुकानों की जांच कर स्वच्छता, गुणवत्ता और लाइसेंस से जुड़े मानकों की पड़ताल की। मनेंद्रगढ़ स्थित मोहनलाल साहू की जलजीरा दुकान में एक्सपायरी विनेगर सिरप मिलने पर उसे मौके पर ही नष्ट कराया गया और संचालक को सख्त चेतावनी दी गई। वहीं प्रांशु गुप्ता की चाट दुकान में प्रतिबंधित खाद्य रंग के उपयोग पर करीब 5 किलो चाट नष्ट कराई गई। अभियान के तहत गन्ना रस और आइसक्रीम विक्रेताओं पर भी विशेष निगरानी रखी गई। कई दुकानों में अस्वच्छ बर्फ और गंदे आइस बॉक्स पाए जाने पर उन्हें हटवाकर साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए। डेयरी प्रतिष्ठानों की जांच में जया डेयरी और सिंह डेयरी से पनीर, दही और दूध के नमूने परीक्षण के लिए लिए गए, जबकि कृष्णा डेयरी द्वारा पंजीयन प्रस्तुत नहीं करने पर 3 दिनों के भीतर लाइसेंस जमा करने के निर्देश दिए गए। वहीं औषधि शाखा की टीम ने 14 दवा दुकानों का निरीक्षण किया, जिसमें संदेह के आधार पर 2 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए। 3 प्रतिष्ठानों में नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 15 दिवसीय विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है, वहीं आम जनता को सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के प्रति जागरूक बनाना भी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खाद्य सामग्री और दवाएं खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, वैधता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

पद्म पुरस्कार 2027 के लिए नामांकन शुरू, गुमनाम नायकों को मिलेगा मंच

पद्म पुरस्कार 2027 के लिए नामांकन शुरू, गुमनाम नायकों को मिलेगा मंच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस 2027 पर घोषित होने वाले पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री के लिए नामांकन प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू कर दी है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2027 निर्धारित की गई है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण, वनांचल और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत ‘गुमनाम नायकों’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। समाज सेवा, शिक्षा, कला, खेल, चिकित्सा, विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों के नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को आगे लाकर नामांकन के लिए प्रोत्साहित करें। आवेदन प्रक्रिया में सहयोग के लिए जिला स्तर पर सहायता भी उपलब्ध रहेगी।

अंबानी के घर के करीब आलीशान फ्लैट किराए पर मिल रहा, जीवनस्तर को दें नई ऊंचाई

मुंबई  मुंबई के पेडर रोड पर स्थित ऐतिहासिक मार्लबोरो हाउस (Marlboro House) इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. मुकेश अंबानी के आवास 'एंटीलिया' के बेहद करीब स्थित इस बिल्डिंग का एक शानदार 4BHK फ्लैट किराए के लिए उपलब्ध है, जिसका वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।  लग्जरी रियल एस्टेट कंटेंट क्रिएटर गौरव बोधिजा द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो में घर के मॉडर्न इंटीरियर और आलीशान डेक की झलक दिखाई गई है. हाल ही में रेनोवेट किए गए इस 4BHK अपार्टमेंट की सबसे बड़ी खूबी इसका गार्डन और डेक है।  यह घर आधुनिक लग्जरी और पुराने दौर की भव्यता का एक अनोखा मिश्रण है. आर्ट डेको (Art Deco) शैली में बनी इस ऐतिहासिक इमारत के वीडियो ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. 1938 में बनी यह इमारत दक्षिण मुंबई का एक प्रमुख लैंडमार्क है. इसे मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट क्लॉड बैटली ने डिजाइन किया था, जिनका बॉम्बे की आधुनिक वास्तुकला में बहुत बड़ा योगदान माना जाता है।  इस घर का इतिहास काफी रोचक है. इसे मूल रूप से एक जर्मन महिला के लिए बनाया गया था, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के कारण उन्हें भारत छोड़कर जाना पड़ा और वे कभी इस घर में रह नहीं सकीं. बाद में साल 1945 में रामजी हंसराज कमानी ने इस इमारत को खरीद लिया था. फिलहाल इस बिल्डिंग में कुल छह फ्लैट हैं. दक्षिण मुंबई के पेडर रोड जैसी वीआईपी लोकेशन और ऐतिहासिक वास्तुकला की वजह से इस फ्लैट का वीडियो न केवल रियल एस्टेट के शौकीनों के बीच, बल्कि इतिहास प्रेमियों के बीच भी सुर्खियां बटोर रहा है।  कितना है किराया? मार्लबोरो हाउस की पहली मंजिल पर एक आलीशान 4BHK अपार्टमेंट का मासिक किराया 12 लाख रुपये तय किया गया है. करीब 3,000 स्क्वायर फीट में फैले इस घर की सबसे बड़ी खूबी इसका 750 स्क्वायर फीट का निजी गार्डन है, जो मुंबई जैसे घने शहर में एक दुर्लभ विलासिता है. इस अपार्टमेंट में तीन मुख्य बेडरूम, चार बाथरूम और एक पाउडर रूम के साथ-साथ दो कारों की पार्किंग और सर्वेंट क्वार्टर की सुविधा भी दी गई है।  यहां रहने वाले किरायेदारों को पिकल-बॉल कोर्ट जैसी आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी. हालांकि, इस प्राइम लोकेशन पर रहने के लिए जेब अच्छी-खासी ढीली करनी होगी, क्योंकि किराए के साथ ही किरायेदारों को 6 महीने का किराया (करीब 72 लाख रुपये) सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर जमा करना होगा। 

प्रदेश में अधोसंरचना और उद्योगों के समन्वित विस्तार को मिलेगा सशक्त आधार

भोपाल  मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को नई गति देने और निवेश के लिए दीर्घकालिक आधार तैयार करने की दिशा में इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का प्रथम चरण एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में स्थापित हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आगामी 2 मई को इस परियोजना के प्रथम चरण का भूमि-पूजन करेंगे। यह कॉरिडोर केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिक संरचना को अधिक संगठित, सक्षम और निवेश का आदर्श गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा, जिसमें अधोसंरचना, उद्योग और शहरी विकास को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए प्रक्रियाओं के सरलीकरण, नीति समर्थन और बेहतर कनेक्टिविटी पर लगातार कार्य किया जा रहा है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी क्रम में एक ऐसा विकास मॉडल प्रस्तुत करता है, जहां औद्योगिक गतिविधियों, वाणिज्यिक विस्तार और नागरिक सुविधाओं का संतुलित समावेश सुनिश्चित किया गया है। यह परियोजना निवेशकों को एक सुव्यवस्थित, पूर्व नियोजित और अधोसंरचना से परिपूर्ण स्थान उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकेगी। कनेक्टिविटी आधारित विकास: लॉजिस्टिक्स दक्षता और क्षेत्रीय संतुलन को बढ़ावा इंदौर-पीथमपुर इकॉनामिक कॉरिडोर 20.28 कि.मी. लंबाई में फैलाव के साथ इन्दौर एयरपोर्ट के समीप सुपर कॉरिडोर को पीथमपुर निवेश क्षेत्र से सीधे जोड़ेगा। परियोजना का विस्तार 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसके समुचित विकास के लिए कुल 2360 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अधोसंरचना की दृष्टि से 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क के साथ दोनों ओर सुव्यवस्थित बफर ज़ोन विकसित किया जाएगा, जो इस कॉरिडोर को एक आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विस्तार योग्य स्वरूप प्रदान करेगा। यह मार्ग एनएच-47 और एनएच-52 को जोड़ते हुए न केवल इन्दौर शहर के यातायात दबाव को कम करेगा, बल्कि माल परिवहन की गति और विश्वसनीयता को भी बढ़ाएगा। इस कनेक्टिविटी का प्रभाव केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक इकाइयों के लिए लागत में कमी, समय की बचत और सप्लाई चेन की दक्षता में सुधार के रूप में भी सामने आएगा, जो निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण आकर्षण का केंद्र बनेगा। निवेश सशक्तिकरण का आधार : औद्योगिक क्लस्टर्स का एकीकरण इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, पीथमपुर निवेश क्षेत्र, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क, पीएम मित्र पार्क और विक्रम उद्योगपुरी जैसे प्रमुख औद्योगिक स्थानों को एकीकृत रूप में जोड़ते हुए एक मजबूत औद्योगिक नेटवर्क तैयार करेगा। इस प्रकार का समेकित विकास निवेशकों को अलग-अलग स्थानों के बजाय एक संगठित इकोसिस्टम में कार्य करने का अवसर प्रदान करता है, जहां कनेक्टिविटी, संसाधन और बाजार तक पहुंच एक साथ उपलब्ध होती है। इससे बड़े निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार अधिक सुव्यवस्थित ढंग से हो सकेगा। साथ ही, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए भी बड़े उद्योगों के साथ जुड़कर आगे बढ़ने के अवसर विकसित होंगे। सेक्टर-आधारित विकास: आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स को नई ऊर्जा यह कॉरिडोर इन्दौर को आईटी और फिनटेक गतिविधियों के लिए एक सशक्त स्थान के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक सिद्ध होगा। इसके साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एमएसएमई और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज होने की संभावनाएं हैं। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और इन्दौर की स्थापित औद्योगिक पहचान को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना विभिन्न सेक्टरों के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करती है। लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, तेज कनेक्टिविटी और नियोजित अधोसंरचना उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाएगी, जिससे प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकेगा। संतुलित शहरीकरण और भविष्य उन्मुख अधोसंरचना का विकास इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर, उज्जैन-इन्दौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में एक महत्वपूर्ण विकास धुरी के रूप में कार्य करेगा। यह परियोजना केवल औद्योगिक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत वाणिज्यिक, आवासीय और सार्वजनिक उपयोग की भूमि का भी नियोजित विकास किया जाएगा, जिससे एक संतुलित और सुव्यवस्थित शहरी संरचना विकसित हो सके। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह कॉरिडोर बहुविकल्पीय कनेक्टिविटी, ट्रैफिक प्रबंधन और बड़े आयोजनों के दौरान सुचारू आवागमन सुनिश्चित करने में भी सहायक होगा। इस प्रकार यह परियोजना दीर्घकालिक शहरी और आर्थिक विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है। इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और शहरी विस्तार को एकीकृत रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में उभर रहा है, जो मध्यप्रदेश को एक संतुलित, सक्षम और प्रतिस्पर्धी आर्थिक प्रणाली की ओर अग्रसर करेगा।  

इंदौर में बनेगा प्रदेश का पहला क्वांटम कंप्यूटर, हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम

इंदौर  मध्यप्रदेश हाईटेक टेक्नोलॉजी की दौड़ में बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) में 3 साल में क्वांटम कम्प्यूटर तैयार होंगे। ये कम्प्यूटर रूम टेम्परेचर पर काम करेंगे। ऐसा करने वाला यह मध्यप्रदेश (MP)का इकलौता संस्थान होगा। यह तकनीक नई दवाइयों की खोज में मददगार होगी। अभी दवाइयों की खेाज में वर्षों लगते हैं। यह सिस्टम अणुओं के व्यवहार को सटीक सिमुलेट करेगा। दुर्लभ बीमारियों की दवा जल्द बन सकेगी। इंटरनेट सुरक्षा ज्यादा मजबूत होगी। साइबर सिक्योरिटी बढ़ेगी। ट्रैफिक, फ्लाइट शेड्यूल में आ रहीं ऑप्टिमाइजेशन की समस्या भी यह हल करेगा। इससे ईंधन बचेगा। 8000 से ज्यादा आवेदन आए देश के 23 संस्थानों में एक हमारे देश में नेशनल क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम कम्यूप्टिंग लैब के लिए 8000 से ज्यादा आवेदन आए। इनमें से 23 संस्थान चुने। ज्यादातर आइआइटी-ट्रिपल आइटी हैं। मध्यप्रदेश से राज्य इंजीनियरिंग कॉलेज SGSITS को चुना। संस्थानों को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस-टेक्नोलॉजी (डीएसटी) 1-1 करोड़ रुपए फंड देगा। स्टूडेंट्स को मिलेंगे नए कोर्स और ड्यूल डिग्री के अवसर संस्थान में क्वांटम कम्प्यूटिंग की पढ़ाई और रिसर्च को बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां पहले से 15 सीटों पर एमटेक इन क्वांटम कम्प्यूटिंग कोर्स चल रहा है। अब बीटेक में 20 क्रेडिट का माइनर प्रोग्राम शुरू होगा। हर सेमेस्टर 5-5 क्रेडिट दिए जाएंगे। इस कोर्स में 30 सीटें रहेंगी। इसे करने वाले छात्रों को बीटेक के साथ अतिरिक्त डिग्री मिलेगी। राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (RGPV) से जुड़े छात्र ड्यूल डिग्री प्रोग्राम में भी हिस्सा ले सकेंगे। स्टार्टअप-रिसर्च को बढ़ावा क्वांटम कम्प्यूटिंग इंटर डिसिप्लिनरी क्षेत्र। इसमें कम्प्यूटर साइंस, आइटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, फिजिक्स और मैथ्स जैसे विषयों के विशेषज्ञ मिलकर काम करेंगे।     लैब में छात्रों को क्वांटम डिवाइस बनाने की ट्रेनिंग।     इंटर्नशिप और स्टार्टअप शुरू करने में भी मदद मिलेगी।     संस्थान क्वांटम मटेरियल पर भी काम करेगा। देश में ऐसा…     देश में क्वांटम टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने 4 बड़े हब आइआइटी दिल्ली, बॉम्बे, चेन्नई और खडग़पुर पहले से काम कर रहे हैं।     उन्हें स्टार्टअप और रिसर्च के लिए 800 करोड़ फंड दिया। 8 स्टार्टअप शुरू।     आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू सरकार ने बड़ा निवेश किया।     40 क्यूबिट का सिस्टम स्थापित किया है। विश्व में 1000 क्यूबिट तक के क्वांटम कम्प्यूटर। टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम यह प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश (MP) ही नहीं, देश के लिए भी टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ा कदम साबित होगा। आने वाले 3 साल में लक्ष्य पूरा होने पर इंदौर क्वांटम टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। -जेटी एंड्रूस थॉमस, एचओडी, फिजिक्स, एसजीएसआइटीएस

मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा में बदलाव, 64 कॉलेजों के बंद होने से शिक्षा पर असर

भोपाल  मध्यप्रदेश में इंजीनियरिंग शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। प्लेसमेंट के घटते अवसर और पारंपरिक ब्रांचों में छात्रों की कम होती रुचि ने कई कॉलेजों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यही वजह है कि इस साल भी कई इंजीनियरिंग कॉलेज सीटें सरेंडर करने की तैयारी में हैं। पिछले साल प्रदेश में 754 सीटें सरेंडर की गई थीं। हाल इतने बुरे हैं कि बीते 10 सालों में प्रदेश के 64 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), मशीन लर्निंग (एमएल) और ई-मोबिलिटी जैसी आधुनिक ब्रांचों की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके चलते कॉलेज इन क्षेत्रों में सीटें बढ़ाने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग को प्रस्ताव भेज रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अब छात्र और अभिभावक केवल उन्हीं संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां बेहतर प्लेसमेंट की गारंटी हो। इससे छोटे और कम पहचान वाले कॉलेजों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदेश के इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव आ रहा है। एक ओर जहां इंजीनियरिंग कॉलेजों में ताला लग रहा है, 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हो चुके हैं वहीं नए कोर्सेस की डिमांड बढ़ भी रही है। प्लेसमेंट के दबाव से यह स्थिति बन रही है। नई ब्रांच में रुचि, पुरानी में गिरावट प्रदेश में इंजीनियरिंग की कुल 75722 सीटों में से पिछले साल सबसे ज्यादा 20 हजार से अधिक एडमिशन केवल कंप्यूटर साइंस (सीएसई) में हुए। इसके विपरीत, कई पारंपरिक और विशेष ब्रांचों की हालत बेहद खराब रही। एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, बायोटेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, ई व्हीकल्स जैसी 12 ब्रांचों में पिछले दो साल से सीटें लगभग खाली रहीं। बदलती प्राथमिकताएं: 2015-16 में जहां प्रदेश में 200 इंजीनियरिंग कॉलेज और करीब 95 हजार सीटें थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर 138 कॉलेज और 74722 सीटों तक सिमट गई है। यह गिरावट स्पष्ट संकेत देती है कि इंजीनियरिंग शिक्षा अब केवल संख्या का खेल नहीं रह गया, बल्कि गुणवत्ता और रोजगार से सीधे जुड़ गई है। प्रमुख बिंदु इंजीनियरिंग क्षेत्र में जबर्दस्त बदलाव एमपी के इंजीनियरिंग कॉलेजों में लग रहा ताला एक दशक में 5 दर्जन से ज्यादा कॉलेज बंद हुए प्लेसमेंट के दबाव से स्थिति बदली स्टूडेंट का नई ब्रांच की ओर रुझान एआइ की सबसे ज्यादा डिमांड इंजीनियरिंग की पुरानी सीटें सरेंडर कर रहे कॉलेज नए कोर्सेस के लिए भेजे प्रस्ताव दस साल में स्थिति सत्र -कॉलेज- सीट 2025-26- 138- 74722 2024-25- 142- 63338 2023-24- 140- 71400 2022-23- 143- 69966 2020-21- 150- 56008 2019-20- 162- 59000 2018-19- 160- 65000 2017-18- 197- 79899 2016-17- 194- 90303 2015-16- 200- 94980  

‘आप इस जमाने की होकर 5 बच्चे कर रही हो’, IAS विदिशा मुखर्जी ने प्रसूता पर किया तीखा बयान

 मैहर मध्य प्रदेश के मैहर की कलेक्टर IAS बिदिशा मुखर्जी इन दिनों अपने सख्त और संवेदनशील तेवरों के लिए चर्चा में हैं. हाल ही में जब वे मैहर के सिविल अस्पताल का औचक जायजा लेने पहुंचीं, तो वहां का नजारा देख वह खुद को रोक नहीं पाईं और एक 'सुपर वुमेन' की तरह समाज की कुरीतियों पर दहाड़ती नजर आईं. पांचवें बच्चे का जन्म सुनकर दंग रह गईं… अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में निरीक्षण के दौरान कलेक्टर को जब यह पता चला कि एक महिला ने अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया है, तो वे दंग रह गईं।  उन्होंने महिला के पास जाकर बड़ी ही आत्मीयता, लेकिन दृढ़ता के साथ उसे समझाइश दी कि आज के महंगाई के दौर में इतने बच्चों का पालन-पोषण, उनकी अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. कलेक्टर ने महिला से सीधे सवाल किया कि आखिर इतने बड़े परिवार का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? ​ अस्पताल में उनके इस तेवर ने वहां मौजूद कर्मचारियों और मरीजों के परिजनों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया. यह पूरा घटनाक्रम समाज की उस गहरी सोच पर प्रहार करता है जहां आज भी 'पुत्र प्राप्ति' या अन्य सामाजिक कारणों से लगातार बच्चे पैदा किए जाते हैं।  महिला सशक्तिकरण का दिया उदाहरण कलेक्टर ने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज जमाना बदल गया है. उन्होंने उदाहरण दिया कि "आज मध्य प्रदेश में 31% कलेक्टर महिलाएं हैं, हमारी पूरी टीम महिलाओं की है. फिर यह भेदभाव क्यों?" ग्राउंड स्टाफ को फटकार उन्होंने केवल महिला को ही नहीं टोका, बल्कि स्वास्थ्य विभाग के अमले और मैदानी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल दागे. कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आखिर परिवार नियोजन को लेकर जागरूकता अभियान कहां है? उन्होंने साफ शब्दों में निर्देश दिए कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम न करे, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों को छोटे परिवार के फायदों और मातृ स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करे।  कलेक्टर ने अस्पताल में मिल रहे भोजन की क्वालिटी की भी जांच की और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के निर्देश दिए।   उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि मैहर एक नया जिला है और यहां महिला रोग विशेषज्ञ, नेफ्रोलॉजिस्ट और ऑर्थोपेडिक सर्जन जैसे विशेषज्ञों की कमी एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रही हैं।