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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की डीएम-एसपी बैठक, सुशासन और पारदर्शिता पर जोर

 पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि राज्य में कानून का राज हर हाल में कायम रहेगा। क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से साफ तौर पर कहा कि किसी भी आपराधिक या हत्या की घटना में दोषियों को 48 घंटे के अंदर गिरफ्तार करें। 12 से 13 दिनों के अंदर ऐसी सख्त कार्रवाई हो, जो लोगों को दिखे। लोगों के बीच सुशासन की अवधारणा स्थापित करनी है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को पटना के अधिवेशन भवन में सभी डीएम-एसपी के साथ अपनी पहली बैठक में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की और कई अहम निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने नई सरकार की प्राथमिकताएं बतायीं। बैठक में मुख्य सचिव और डीजी समेत प्रशासन और पुलिस के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को दो टूक कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाएं। कानून और योजनाएं को जमीन पर ठीक ढंग से लागू करें। अपराधी किसी तरह का दुस्साहस न करें, इसको लेकर मुस्तैदी से कार्य करें। अधिकारियों से दो-टूक कहा कि लटकाने भटकाने की प्रवृत्ति नहीं रखें, बल्कि जनता के सहयोगी की भूमिका में रहें। पुलिस दीदी कॉन्सेप्ट को बेहतर ढंग से क्रियान्वित करें। बच्चियां सुरक्षित स्कूल आएं-जाएं, इसे सुनिश्चित करें। डीएम-एसपी जनता से मिलें मुख्यमंत्री ने सभी डीएम-एसपी को निर्देश दिया कि वे अपने कार्यालय में निश्चित रूप से सुबह 10 से दिन में एक बजे तक बैठकर लोगों से मिलें। उनकी समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने कहा, आप जितने लोगों से मिलेंगे, जिले के बारे में उतनी अधिक जानकारी होगी और क्षेत्र का विकास करने में सुविधा होगी। पंचायतों में महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को अधिकारी ‘सहयोग शिविर’ लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान 30 दिनों के अंदर करें। घुसपैठिये बाहर किए जाएंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में हमलोगों की सरकार ने जाति आधारित गणना कराई थी। अब जनगणना का कार्य केंद्र सरकार के द्वारा कराया जा रहा है उसमें सभी हाऊस होल्ड को ठीक से चिह्नित करें। कौन कहां से आया है, यहां का निवासी कैसे है, इन सब चीजों की जानकारी प्राप्त करें। किसी भी धर्म के लोग हों, वे भारत के निवासी हैं तो उन्हें सुविधाएं मिलेंगी। वहीं, किसी भी धर्म के हों, अगर घुसपैठिया है तो उन्हें बिहार से बाहर किया जाएगा। हर जिले में 50 डेस्टिनेशन स्पॉट मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। सभी जिलाधिकारी अपने-अपने जिलों में कम-से-कम 50 डेस्टिनेशन स्पॉट को चिह्नित कर उसे और विकसित करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में कई अप्रासंगिक कानूनों को रद्द किया गया। प्रशासन को पारदर्शी एवं सुलभ बनाया गया है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में पिछले 20 वर्षों में बिहार विकास के पथ पर आगे बढ़ा है। कानून-व्यवस्था, बिजली, सड़क सहित सभी क्षेत्रों में प्रगति हुई। राज्य में सुशासन स्थापित रहने से इसका लाभ राज्यवासियों को मिला है। शराबबंदी को सफल करें सम्राट चौधरी ने कहा कि पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने शराबबंदी कानून लागू किया है। शराबबंदी पूरी तरह सफल हो, इसको लेकर बेहतर ढंग से कार्य करें। शराब बेचनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर इस अवैध धंधे को ध्वस्त करें। शराब और मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिस और प्रशासन के जो लोग संरक्षण प्रदान कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर सख्त कार्रवाई करें। प्रखंड, अंचल और थाना का सीएम कार्यालय प्रतिदिन रियल मॉनीटरिंग करेगा। प्रखंड, अंचल और थाने में सीसीटीवी कैमरे अवश्य लगाएं। मुख्यमंत्री के निर्देश ● क्राइम, करप्शन और कम्युनिलिज्म से कोई समझौता नहीं ● बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा पर कोताही नहीं होनी चाहिए ● दोषियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर 48 घंटे के अंदर गिरफ्तार करें ● अपराधी किसी तरह का दुस्साहस न करें, इसको लेकर पुलिस मुस्तैद रहे ● पंचायतों में माह के पहले और तीसरे मंगलवार को सहयोग शिविर लगेगा सीएम का बयान जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक अगर अच्छा काम करते हैं तो जनप्रतिनिधियों के पास लोगों की समस्याओं से जुड़े मामले कम आते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि सभी अधिकारी संवेदनशीलता, तत्परता और पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ जनसेवा सुनिश्चित करेंगे। -सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: ईरान के मामले को युद्ध नहीं कहूंगा, फिर खुद की सराहना की

वाशिंगटन दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मामले को युद्ध मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के अभियान के बाद ईरान की नौसेना और थल सेना कमजोर हो गई है और अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ड्रोन फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ईरान की परमाणु क्षमता को भी धराशायी कर दिया गया है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा था कि टैरिफ का दबाव बनाकर उन्होंने युद्ध रुकवाया था। युद्ध रुकवाने के दावे करके वह कई बार नोबेल पुरस्कार की भी इच्छा जता चुके हैं। इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला तो वह काफी भड़के हुए थे। युद्ध को लेकर क्या कह रहे डोनाल्ड ट्रंप डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें मानने को तैयार नहीं होता तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के श्री ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं। अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।

बड़ा मंगल 2026: सुंदरकांड की 5 शक्तिशाली चौपाइयां और उनका महत्व

4 मई 2026 को पहला बड़ा मंगल है। ज्येष्ठ माह के मंगलवार पर हनुमान जी की विशेष पूजा- अर्चना की जाती है। बड़ा मंगल पर आप सुंदरकांड की कुछ शक्तिशाली चौपाइयों का पाठ कर हनुमान जी के साथ भगवान राम की भी कृपा पा सकते हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में विस्तार से। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में हनुमान जी की विशेष उपासना का दिन है। ज्येष्ठ माह के हर मंगलवार को मनाए जाने वाले इस व्रत में भक्त हनुमान जी के साथ-साथ भगवान राम की कृपा भी प्राप्त करते हैं। साल 2026 में पहला बड़ा मंगल 4 मई 2026 को है। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी की कृपा के साथ राम जी की विशेष अनुकंपा प्राप्त होती है। सुंदरकांड में कुछ खास चौपाइयां ऐसी हैं, जिनका पाठ करने से भक्तों के संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। बड़ा मंगल का महत्व बड़ा मंगल सामान्य मंगलवार से ज्यादा शक्तिशाली माना जाता है। इस दिन हनुमान जी की पूजा के साथ राम-सीता और लक्ष्मण जी की भी आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सुंदरकांड पढ़ने या सुनने से भक्त को राम जी की कृपा सीधे प्राप्त होती है। खासकर पहला बड़ा मंगल संकल्प और नई शुरुआत के लिए बहुत शुभ होता है। सुंदरकांड क्यों पढ़ा जाता है? सुंदरकांड रामायण का वह हिस्सा है, जिसमें हनुमान जी की वीरता, भक्ति और शक्ति का अद्भुत वर्णन है। यह कांड भक्तों को संकट से मुक्ति, साहस और विश्वास प्रदान करता है। बड़े मंगल के दिन सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। हनुमान जी की कृपा पाने वाली 5 खास चौपाइयां यहां 5 महत्वपूर्ण चौपाइयां दी गई हैं, जिनका पाठ बड़े मंगल के दिन विशेष रूप से फलदायी माना जाता है: 1. कवन सो काज कठिन जग माहीं। जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।। यह चौपाई हनुमान जी की असीम शक्ति को दर्शाती है। सीता माता का पता लगाने के लिए समुद्र लांघकर लंका जाने के लिए हनुमान जी को जब उनके बल की याद जामवंत जी दिला रहे थे, तो उन्होंने बजरंबली से बोला था कि आपके लिए इस संसार में कोई भी कार्य कठिन नहीं है। मान्यता है कि हनुमान जी को उनकी वीरता याद दिलाने वाले इस चौपाई का पाठ करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 2. प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदय राखि कोसलपुर राजा।। यह चौपाई हनुमान जी के लंका प्रवेश की है। इसमें भक्ति और सावधानी का सुंदर मेल दिखता है। हनुमान जी कहते हैं कि राम नाम को हृदय में रखकर कोई भी कार्य किया जाए, तो जहर अमृत बन जाता है, शत्रु मित्र बन जाते हैं और छोटा सा गोपद भी समुद्र के समान हो जाता है। मान्यता है कि इस चौपाई का पाठ करने से कार्य में सफलता और सुरक्षा मिलती है। 3. हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम। राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम।। यह चौपाई हनुमान जी के समर्पण को दर्शाती है। जब हनुमान जी समुद्र पार कर रहे थे, तब मैनाक पर्वत ने उन्हें विश्राम करने का आमंत्रण दिया था। हनुमान जी मैनाक पर्वत से कहते हैं कि राम का काम पूरा किए बिना उन्हें विश्राम नहीं है। इसका पाठ करने से लक्ष्य के प्रति समर्पण बढ़ता है। 4. धरइ जो बिबिध देह सुरत्राता। तुम्ह से सठन्ह सिखावनु दाता॥ हर कोदंड कठिन जेहिं भंजा। तेहि समेत नृप दल मद गंजा॥ यह चौपाई हनुमान जी की राम भक्ति का सार है। रावण से श्रीराम जी का गुणगान करते हुए हनुमान जी कहते हैं कि जो अच्छे लोगों की रक्षा के लिए शरीर लेते हैं और अज्ञानियों को शिक्षा देते हैं। जिन्होंने शिवजी के कठोर धनुष को तोड़ डाला और उसी के साथ राजाओं के समूह का घमंड भी चूर कर दिया। वो भगवान हमेशा सच्चे और अच्छे लोगों का साथ देते हैं और बुरे काम करने वालो को सजा देते हैं। पाठ से भक्ति, विश्वास और शुद्धता बढ़ती है। 5. दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।। लंका दहन करने के बाद जब हनुमान जी वापस आने लगे, तो उस समय माता सीता नुमान जी से कहती हैं कि वे प्रभु श्रीराम को यह संदेश दें कि हे दुखियों पर दया करने वाले प्रभु! आप अपने दयालु स्वभाव की मर्यादा को याद रखें और मेरे इस भारी संकट को दूर कर दीजिए। यह चौपाई संकट मोचन हनुमान जी से सीधे प्रार्थना है। संकट के समय इसका पाठ करने से बहुत जल्दी राहत मिलती है। बड़े मंगल पर इन चौपाइयों का पाठ कैसे करें? 4 मई 2026 को सुबह स्नान के बाद लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें। हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं। सुंदरकांड का पूरा पाठ करने के बाद ऊपर दी गई 5 चौपाइयों का 11, 21 या 108 बार जाप करें। अंत में हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें। प्रसाद में बूंदी के लड्डू या केला चढ़ाएं। बड़े मंगल के लाभ     हनुमान जी और राम जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।     संकटों से मुक्ति मिलती है।     साहस, आत्मविश्वास और शक्ति बढ़ती है।     नौकरी, व्यापार और विवाह संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।     मन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर आप बड़े मंगल पर सुंदरकांड की इन 5 चौपाइयों का श्रद्धा से पाठ करेंगे, तो हनुमान जी की कृपा के साथ भगवान राम की विशेष अनुकंपा प्राप्त होगी। संकटों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यह सरल लेकिन अत्यंत प्रभावी उपाय है।

राजस्थान में 1.25 लाख सरकारी नौकरियों का ऐलान, मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा – ‘नो पेपर लीक्स’

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में बालिका शिक्षा में तेजी से प्रगति हो रही है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की उन नीतियों को जाता है जो बुनियादी ढांचे के विस्तार और सभी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। वे पाली जिले के रोहट में राजेश्वर भगवान अंजनी माता कन्या गुरुकुल संस्थान द्वारा स्थापित नवनिर्मित बालिका महाविद्यालय के उद्घाटन और गुरुकुल के 10वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर क्षेत्रीय विकास निर्भर होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नया महाविद्यालय युवा महिलाओं को शिक्षित करने और क्षेत्र में शैक्षिक पहुंच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य सरकार ने युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों पर केंद्रित एक व्यापक विकास रोडमैप तैयार किया है। राम जल सेतु लिंक परियोजना, देवास परियोजना, यमुना जल समझौता और सोम-कमला-अंबा परियोजना सहित जल और बिजली से संबंधित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 24 जिलों के किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, और यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से 2027 तक पूरे राजस्थान में विस्तारित की जाएगी। रोजगार प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 10 लाख नौकरियां सृजित करना है, जिनमें से 6 लाख निजी क्षेत्र में और 4 लाख सरकारी क्षेत्र में होंगी। अब तक लगभग 1.25 लाख सरकारी पदों पर भर्ती हो चुकी है, 1.33 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है, और 1.25 लाख अन्य पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी किया जा चुका है। निजी क्षेत्र में, विभिन्न पहलों के तहत अब तक लगभग 3 लाख नौकरियां सृजित की जा चुकी हैं। उन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में पिछली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पहले ऐसी घटनाओं से युवाओं की उम्मीदें चकनाचूर हो जाती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए शर्मा ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसे प्रमुख अभियानों पर प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और समग्र जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम-2026) का आयोजन 23 से 25 मई तक जयपुर में किया जाएगा, जिसमें देशभर के किसान, पशुपालक, वैज्ञानिक और निवेशक भाग लेंगे। उन्होंने किसानों से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। शर्मा ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 71 नए सरकारी कॉलेज खोले गए हैं और 185 कॉलेजों के भवनों का उद्घाटन किया गया है, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में केवल 57 कॉलेज भवनों का निर्माण किया था।

मध्य प्रदेश में श्रमिकों को राहत: CM मोहन ने 600 करोड़ का ट्रांसफर किया, गिग वर्कर्स को भी लाभ

भोपाल   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि श्रमिकों के हित में केन्द्र और राज्य सरकार की अनेक योजनाएं संचालित हैं। अब असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी संबल योजना का लाभ दिया जा रहा है। इनमें विभिन्न प्रकार की उपभोक्ता सामग्री पहुंचाने वाले गिग वर्कर्स और प्लेटफार्म वर्कर्स को भी शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश में 3529 गिक वर्कर्स को पहली बार योजना का लाभ प्रदान करने के लिये विभाग की सराहना की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि इस क्षेत्र के पात्र श्रमिकों को पंजीकृत कर सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करवाना हम सभी का दायित्व है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालयीन बैठक कक्ष से सिंगल क्लिक द्वारा मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना में 27 हजार से अधिक श्रमिक परिवारों के लिए 600 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि  अंतरित करते हुए ये बातें कहीं। इस अवसर पर श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे। राशि अंतरण के अवसर पर प्रदेश के जिलों में स्थित प्रशासनिक अधिकारी, श्रमिक भाई और जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रम स्टार रेटिंग की अनूठी पहल शुरू की गई है। इस व्यवस्था में औद्योगिक संस्थाओं द्वारा श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का कार्य किया जा रहा है। श्रेष्ठ कार्य के लिए प्रतिष्ठानों को श्रम स्टार रेटिंग के माध्यम से आंकलन कर प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे श्रम कानूनों का बेहतर पालन करने वाले औद्योगिक संस्थानों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। प्रदेश में 554 कारखानों ने स्वेच्छा से श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था को अपनाया है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि श्रम विभाग, श्रम संगठनों के साथ ही नागरिकों का भी यह दायित्व है कि जिस प्रतिष्ठान से खरीदारी करते हैं, वहां श्रम स्टार रेटिंग की व्यवस्था लागू करने को प्रोत्साहित करें। ऐसे संस्थानों से उत्पाद क्रय करने और सेवाएं लेने को प्राथमिकता भी दी जाए जो श्रमिक भाइयों के अधिकारों और उनके कल्याण के लिए तत्पर रहते हैं।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 4 नई श्रम संहिताओं का प्रावधान किया है। राज्य सरकार भी इन संहिताओं के अनुरूप नियम तैयार कर लागू करेगी। श्रमिक हित में लागू की गई केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक श्रमिकों को दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संबल योजना में श्रेष्ठ प्रदर्शन वाले 5 जिलों बालाघाट, धार, सागर, जबलपुर और खरगौन की तरह अन्य जिलों से भी श्रमिकों को अनुग्रह सहायता देने के कार्य में सक्रिय प्रदर्शन की अपेक्षा की।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव की श्रमिक हितैषी नीतियों में श्रम एवं पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री पटेल ने विश्वास व्यक्त कर श्रमिक कल्याण की प्राथमिकता के लिये आभार माना। मंत्री श्री पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में श्रमिकों के हित में प्रारंभ हुई योजना से अब तक एक करोड़ 83 लाख श्रमिक जुड़ चुके हैं। अब तक 8 लाख 27 हजार से अधिक प्रकरणों में 7 हजार 720 करोड़ रूपए से अधिक की सहायता हितग्राहियों को दी जा चुकी है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्रमिकों को राशि अंतरित किए जाने के अवसर पर श्रम विभाग के अपर सचिव श्री संजय कुमार को उनके सेवानिवृत्ति दिवस पर भावी जीवन के लिए मंगलकामनाएं दीं। बैठक में सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय  आलोक सिंह, श्रम विभाग के सचिव एम. रघुराज सहित अन्य अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे।

महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय

मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण हेतु विशेष सत्र: एक तिहाई आरक्षण के संकल्प को मिला व्यापक समर्थन महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव रखा जाएगा याद – मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति किया आभार प्रकट रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा है कि मातृशक्ति उनके लिए केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि सृजन, संस्कार और सामर्थ्य की आधारशिला है। इसी भावना के साथ छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषय पर एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें संसद एवं देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसी क्रम में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी सशक्त करना हमारा अगला महत्वपूर्ण कदम है। यह संकल्प देश की आधी आबादी को उनके अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस महत्वपूर्ण विषय पर विशेष सत्र आयोजित करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में सदैव याद रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस विशेष सत्र में समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने इस ऐतिहासिक पहल के समर्थन में अपने विचार रखे और महिलाओं के अधिकारों तथा उनके सशक्तिकरण के लिए सशक्त स्वर प्रदान किया। सदन में वरिष्ठ विधायकों और महिला नेतृत्व ने भी पूरे मनोयोग से चर्चा में भाग लेते हुए अपने विचार साझा किए और इस महत्वपूर्ण संकल्प का समर्थन किया। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट रूप से कहा कि नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। यह विषय किसी दल या राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्र के समग्र विकास और उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस दिशा में हर सकारात्मक पहल का समर्थन आवश्यक है।

पूर्णिमा पर घर-घर गूंजा गायत्री यज्ञ

पूर्णिमा पर घर-घर गूंजा गायत्री यज्ञ अखिल विश्व गायत्री परिवार बड़वानी  शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में 1 मई 2026 बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर देशभर में गृह-गृह गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। प्रातः 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक लाखों घरों में एक साथ यज्ञ सम्पन्न हुए, जिनका उद्देश्य विश्व शांति, सर्वकल्याण, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्त भारत और राष्ट्र की अखंडता व सशक्तिकरण रहा। बड़वानी जिले में भी हजारों घरों में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक यज्ञ कर “स्वाहा इदं गायत्री इदं नमः” के मंत्रों से वातावरण को आध्यात्मिक बनाया। गायत्री परिवार के दिनेश चौधरी ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर जिलेभर के साधकों ने पूरे समर्पण के साथ इस अभियान को सफल बनाने में सहभागिता की। युवा प्रकोष्ठ जिला समन्वयक लखन विश्वकर्मा ने जानकारी दी कि वर्ष 2026 परम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा का जन्म शताब्दी वर्ष है। इस अवसर पर गायत्री परिवार द्वारा लाखों घरों को “देव परिवार” बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे जिले के कार्यकर्ता पूरी निष्ठा से पूर्ण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री और यज्ञ भारतीय संस्कृति के मूल आधार हैं और इनके माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ दिशा मिलती है। वहीं,  जिला समन्यवक विक्रम जमरे ने बताया कि मातृ जन्म शताब्दी वर्ष के अंतर्गत गृह-गृह गायत्री महायज्ञ, देव स्थापना एवं दीप यज्ञ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम से जुड़ने के लिए श्रद्धालुओं ने मोबाइल, पीडीएफ, वीडियो लिंक, यूट्यूब एवं हरिद्वार से लाइव प्रसारण के माध्यम से भी भागीदारी की। सभी तहसील प्रभारियों एवं कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में जनसंपर्क कर इस अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। इन आयोजनों के माध्यम से परम पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के “मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण” के संकल्प को साकार करने का प्रयास किया जा रहा है।

चिलुआताल में हंगामा, अपहरण केस के बाद फिर प्रेमी से मिलने पर अड़ी किशोरी

गोरखपुर गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र के एक गांव में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक किशोरी प्रेमी के घर जाने की जिद में हाईटेंशन पोल पर चढ़ गई। घटना की सूचना फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिसवालों ने किसी तरह से समझा-बुझाकर ढाई घंटे बाद उसे नीचे उतारवाया। इससे पहले किशोरी की मां ने युवक पर अपहरण का केस दर्ज कराया था, जिसमें पुलिस ने बेटी को बरामद कर आरोपी युवक को जेल भेज दिया था। अब किशोरी फिर उसी के साथ जाना चाहती है। जानकारी के अनुसार, गुरुवार को किशोरी चिलुआताल इलाके में स्थित हाईटेंशन बिजली पोल पर चढ़ गई। देखते ही देखते आसपास के ग्रामीणों की भीड़ लग गई। पुलिस ने किशोरी को समझाने का प्रयास शुरू किया, लेकिन वह जिद पर अड़ी रही। इससे पहले इलाके के एक गांव की रहने वाली महिला ने 26 मार्च 2026 को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि बालापार निवासी शिवम उर्फ गणेश उसकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किशोरी को बरामद कर परिजनों को सौंप दिया था, जबकि आरोपी को जेल भेज दिया गया था। गुरुवार को किशोरी दोबारा प्रेमी के पास जाने की जिद पर अड़ गई और हाईटेंशन पोल पर चढ़ गई। पुलिस ने काफी देर तक उसे फोन के माध्यम से समझाया, लेकिन वह नहीं मानी। करीब ढाई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे आश्वासन दिया, जिसके बाद वह नीचे उतरने को तैयार हुई। पुलिस किशोरी को थाने ले गई, जहां समझाने-बुझाने के बाद उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया। दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी को जेल, 24 घंटे में चार्जशीट पीपीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी प्रेमी विपिन विश्वकर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, पुलिस ने पीड़िता का कोर्ट में बयान दर्ज कराने के साथ ही मेडिकल परीक्षण भी करा दिया है। इस प्रकरण में 24 घंटे में ही पुलिस ने चार्जशीट भी लगा दी। घटना 28 अप्रैल की है। किशोरी के परिजन एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। घर पर केवल महिलाएं थीं, जो विवाह समारोह में व्यस्त थीं। इसी दौरान कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के ग्राम गजरहिया निवासी विपिन विश्वकर्मा ने किशोरी को बहला फुसलाकर गांव में स्थित अपने मामा के घर ले जाकर कमरे में बंद कर दुष्कर्म किया। किशोरी इसके बाद घर चली गई और बुधवार को इसकी भनक भाई को लग गई। वह किशोरी को लेकर थाने पहुंच गया और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। लेकिन बाद में किशोरी की मां थाने पहुंच गई और प्रेमी विपिन विश्वकर्मा पर आरोप लगाते हुए तहरीर दी। पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपी को हिरासत में ले लिया था। एसओ अरुण कुमार सिंह के मुताबिक, आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवा दिया गया। किशोरी का मेडिकल परीक्षण व मजिस्ट्रेट बयान दर्ज कराकर चार्जशीट लगा दिया गया। एसपी नार्थ, ज्ञानेंद्र ने कहा कि पुलिस महिला अपराध के प्रति संवेदनशील है। किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को जेल भिजवाने के साथ ही 24 घंटे में चार्जशीट लगा दी गई। पुलिस सजा दिलाने के लिए कोर्ट में भी मजबूत पैरवी करेगी।

वास्तु शास्त्र: घर का फर्श भी तय करता है भाग्य, गलत रंग से बढ़ सकता है वास्तु दोष

रसोई, किचन, बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और यहां तक कि मकान का फर्श भी वास्तु दोष के लिए बहुत रिस्पॉन्सिबल होता है. (Photo: ITG) वास्तु के शुभ और अशुभ परिणामों का असर उसमें रहने वाले लोगों पर ही पड़ता है. फिर चाहे मकान अपना हो या फिर किराए का. घर की हर दिशा में वास्तु मौजूद है. रसोई, किचन, बेडरूम, ड्रॉइंग रूम और यहां तक कि मकान का फर्श भी वास्तु दोष के लिए बहुत रिस्पॉन्सिबल होता है. आचार्य कमल नंदलाल कहते हैं कि घर का फर्श इंसान की तरक्की और बर्बादी दोनों के लिए जिम्मेदार हो सकता है. इसलिए घर के फर्श को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए. ज्योतिषविद ने बताया कि आजकल लोग घरों में फ्लोर बनाने के लिए मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं. लोग फ्लोर बनाने के लिए सेरेमिक टाइल्स या ग्रेनाइट मार्बल का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि फ्लोर पर मार्बल का इस्तेमाल आदमी को नुकसान दे सकता है. दरअसल, मार्बल को फर्श पर लगाने से चंद्रमा छठे भाव में प्रभाव छोड़ने लगता है जो अपने आप में वास्तु दोष क्रिएट करता है. इस तरह का वास्तु दोष आपके जीवन में न्यूरो से जुड़ी समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है. डार्क कलर के फर्श का जादू ज्योतिषविद ने बताया कि घर के फर्श पर कभी भी सफेद रंग का फ्लोर न बिछाएं. इस तरह का फर्श इंसान को आसमान से जमीन पर ला सकता है. वास्तु के दृष्टिकोण से गहरे हरे रंग का फर्श सबसे उत्तम होता है. यह बुध ग्रह का प्रतीक होता है. काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार छठे भाव का कारक ही बुध है. इसके अलावा आप काले, नीले या भूरे रंग का फर्श भी बनवा सकते हैं. किस दिशा में बनवाएं कौन सा फर्श? वास्तु के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा में भूरे रंग का फर्श बनवाना चाहिए. यहां बृहस्पति स्थिति को बैलेंस रखते हैं. घर की पूर्व दिशा में हमेशा काले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. क्योंकि यह शनि को छठे या सातवें भाव में रखकर सूर्य को बलवान बनाता है. दक्षिण-पूर्व दिशा की बात करें तो यहां गहरे नीले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. दक्षिण दिशा में काले रंग का फर्श बनवाना चाहिए. इससे शनि और मंगल की स्थिति ठीक रहती है. दक्षिण-पश्चिम दिशा में नीले या भूरे रंग का फर्श बनवाना चाहिए. पश्चिम दिशा में ग्रे या हल्के ब्राउन कलर का फर्श बनवाना चाहिए. जबकि उत्तर दिशा में डार्क ग्रीन कलर का फर्श बनवाना चाहिए. इससे इंसान के लाइफस्टाइल में सुधार बना रहता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार रहता है. छत पर हमेशा ग्रे और तह खानों में डार्क ब्राउन या नीले रंग का फ्लोर बनवाना चाहिए.

गौतम बुद्ध के संन्यास के बाद यशोधरा का जीवन, सादगी और धैर्य की मिसाल

 बुद्ध पूर्णिमा का पर्व आज मनाया जा रहा है. इस दिन भगवान गौतम बुद्ध की पूरे विधि-विधान के साथ पूजा की जाती है. कहते हैं कि गौतम बुद्ध ने गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास ले लिया था. तो आइए जानते हैं कि गौतम बुद्ध के गृहस्थ जीवन छोड़ने के बाद उनकी पत्नी यशोधरा का जीवन कैसा हो गया था. जानते हैं पूरी कथा. कथा के मुताबिक, कोलिय वंश के राजा सुप्पाबुद्ध और रानी पामिता की पुत्री यशोधरा अपनी सुंदरता और दयालु स्वभाव के लिए जानी जाती थीं. उसी समय दूसरी ओर, शाक्य वंश के राजा शुद्धोधन और महारानी मायादेवी के घर लुंबिनी वन में एक पुत्र का जन्म हुआ था, जिसका नाम सिद्धार्थ रखा गया. यही सिद्धार्थ आगे चलकर ज्ञान प्राप्त कर महात्मा बुद्ध के रूप में प्रसिद्ध हुए. कैसे हुआ था यशोधरा-सिद्धार्थ का विवाह? कहते हैं कि जब महारानी मायादेवी सिद्धार्थ को गर्भ में धारण किए हुए थीं, तब उन्होंने एक अद्भुत सपना देखा था- एक सफेद हाथी, जिसके छह दांत थे, उनके गर्भ में प्रवेश करता हुआ दिखाई दिया था. उस समय शाक्य और कोलिय वंश के समान स्तर का कोई अन्य राजघराना नहीं था, इसलिए इन दोनों वंशों के बीच ही रिश्ते तय होते थे. इसी परंपरा के चलते आगे चलकर यशोधरा का विवाह सिद्धार्थ से हुआ, जो उनके रिश्ते में भी थे. उस समय दोनों की उम्र लगभग 16 वर्ष बताई जाती है. विवाह के बाद यशोधरा ने एक आदर्श पत्नी की तरह सिद्धार्थ का पूरा साथ निभाया. वह उनके काम और मन की स्थिति को अच्छे से समझती थीं. जब भी सिद्धार्थ जीवन के सच और लोगों के दुख-दर्द को जानने के लिए बाहर जाते, तो यशोधरा उनका सहयोग करती थीं. दोनों अक्सर समाज और लोगों की परेशानियों को लेकर बातचीत भी करते थे, जिससे उनके बीच गहरा समझ और जुड़ाव बना रहता था. सिद्धार्थ का संन्यास और यशोधरा की समझ धीरे धीरे समय के साथ यशोधरा को यह एहसास होने लगा था कि सिद्धार्थ का मन सांसारिक जीवन में पूरी तरह नहीं लग रहा है. उन्हें कई बार संकेत मिल चुके थे कि सिद्धार्थ एक दिन राजसी सुखों को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग चुन सकते हैं. यहां तक कि उनके पिता ने भी इस बात को लेकर पहले ही आगाह कर दिया था. सिद्धार्थ के मन में जीवन के दुख, बीमारी, बुढ़ापा और मृत्यु- को लेकर गहरी चिंता थी, जो उन्हें भीतर से बेचैन करती रहती थी. राहुल का जन्म और बड़ा फैसला विवाह के करीब 13 साल बाद यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम राहुल रखा गया. लेकिन इस समय तक सिद्धार्थ अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय ले चुके थे. उन्हें लगा कि परिवार का यह बंधन उनकी आत्मज्ञान की खोज में रुकावट बन सकता है. इसलिए उन्होंने एक दिन सब कुछ छोड़कर सत्य की तलाश में निकलने का रास्ता चुन लिया. यशोधरा का धैर्य और त्याग जब यशोधरा को यह पता चला कि सिद्धार्थ घर छोड़ चुके हैं, तो वह स्वाभाविक रूप से दुखी हुईं. लेकिन उन्होंने इस सच्चाई को स्वीकार कर लिया था. उन्होंने खुद को मजबूत बनाया और दूसरों की सहानुभूति के बजाय अपने आत्मबल पर भरोसा किया. उनका मानना था कि जीवन में बड़े लक्ष्य पाने के लिए कुछ त्याग करना जरूरी होता है. पति के जाने के बाद यशोधरा ने भी शाही जीवन से दूरी बना ली थी. उन्होंने महंगे कपड़े और आभूषण छोड़ दिए और बेहद साधारण जीवन जीना शुरू कर दिया था. वह महल की बजाय एक साधारण स्थान पर रहने लगीं, जमीन पर सोतीं और दिन में सिर्फ एक बार भोजन करती थीं. अपने बेटे राहुल को भी वह सादगी, संयम और उनके पिता के आदर्शों के बारे में सिखाती रहती थीं. गौतम बुद्ध की वापसी कई सालों बाद जब सिद्धार्थ ज्ञान प्राप्त कर गौतम बुद्ध बन चुके थे, तब वे अपने पिता के कहने पर वापस लौटे. उनके साथ कई साधु भी आए थे. उनके साधारण रूप और भिक्षा पात्र को देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए. जब बुद्ध लौटे, तो यशोधरा उनसे मिलने के लिए महल के द्वार पर नहीं गईं, बल्कि अपने स्थान पर ही उनका इंतजार किया. वह जानती थीं कि अब सिद्धार्थ सब कुछ समझ चुके होंगे. जब बुद्ध स्वयं उनके पास पहुंचे, तो यह देखकर सभी चकित रह गए. यशोधरा ने उनका सम्मान किया और शांति के साथ उनसे मुलाकात की. इसके बाद यशोधरा अपने पुत्र राहुल को लेकर बुद्ध के पास गईं. धीरे-धीरे उन्होंने भी उसी मार्ग को अपनाने का निर्णय लिया, जिस पर सिद्धार्थ चले थे. अंततः यशोधरा ने भी भिक्षुणी का जीवन अपनाया और आत्मज्ञान की दिशा में आगे बढ़ गई थीं.