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गर्मी में राहत देने वाला एसी कब बन सकता है सेहत के लिए खतरा

 ऑफिस हो या घर, बिना एसी के गर्मी में समय काटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग अपना अधिकतर समय एयर कंडीशनर (AC) में बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी धीरे-धीरे आपको बीमार कर सकती है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, AC का गलत इस्तेमाल शरीर के मेटाबॉलिज्म से लेकर फेफड़ों तक समस्या पैदा कर सकता है. एयर कंडीशनिंग खुद बीमारी नहीं बनाती, लेकिन बहुत तेज़ ठंड, ड्राय हवा और गंदे फिल्टर शरीर पर असर डाल सकते हैं. तो आइए वो कौन सी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक एसी में रहने से होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में जान लीजिए. AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां? एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. मीडिया  के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.  यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं. जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है. थर्मल शॉक और थकान जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे. गंदा AC भी बनता है वजह  पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.

उत्तम नगर दिल्ली में बुलडोजर एक्शन फिर से शुरू, ट्राइब्यूनल ने राहत की अर्जी खारिज की

नई दिल्ली  उत्तम नगर की उसी पुनर्वासित कालोनी में  सुबह एक बार फिर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की, जहां कुछ दिन पहले तरुण नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस बार निगम पूरी कानूनी तैयारी के साथ पहुंचा था। जैसे ही निगम के लिए गठित अपीलीय ट्रिब्यूनल ने डिमालिशन पर रोक हटाई, वैसे ही निगम ने उन विवादित इमारतों को गिराना शुरू कर दिया जो कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर बनाई गई थीं। के अनुसार तरुण की हत्या के कुछ दिन बाद ही जब निगम ने इस मामले में आरोपितों में से एक के घर के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाया था, तब इस मामले में 13 पक्षकारों ने निगम की कार्रवाई के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उन्हें 15 दिन की राहत देते हुए ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था। 28 अप्रैल को याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल पहुंचे। 29 अप्रैल हुई सुनवाई में निगम ने दलील दी कि ये निर्माण न केवल अवैध हैं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी खतरा हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज करते हुए स्टे हटा दिया। इसके अगले ही दिन निगम ने कार्रवाई शुरू कर दी। निगम पश्चिमी जोन के अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को पूरे दिन चली कार्रवाई के दौरान दो संपत्तियों पर निगम ने हथौड़ा चलाया। इनमें एक संपत्ति वह थी जिसपर तीन प्लाटों को जोड़कर इमारत खड़ी की गई थी। वहीं दूसरी संपत्ति ऐसी थी, जिसपर दो प्लाट को जोड़कर घर बनाया गया था। सुबह जब निगम की टीमें कार्रवाई करने पहुंचीं, तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। इस इलाके में कई आवासीय इकाइयों को आपस में जोड़कर बड़ी इमारतें बना ली गई थीं. एक मामले में तीन घरों को मिलाकर एक ढांचा बनाया गया, जबकि दूसरे मामले में दो इकाइयों को जोड़ा गया था. इस मामले में आरोपी के परिवार ने पहले 13 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उन्हें 15 दिनों की अंतरिम राहत दी थी।  कोर्ट ने परिवार को एमसीडी ट्रिब्यूनल में अपील करने का निर्देश दिया था. याचिकाकर्ताओं ने 28 अप्रैल को ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया. 29 अप्रैल को सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने ठोस आधार की कमी की बात कही. इसके बाद स्टे ऑर्डर हटा लिया गया. अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून, 2026 को होगी।  क्या था पूरा मामला? बता दें कि 4 मार्च को दिल्ली के उत्तम नगर स्थित जेजे कॉलोनी, हस्तसाल में होली के दौरान तरुण के परिवार की एक बच्ची ने पानी का गुब्बारा फेंका था. गुब्बारे का पानी पड़ोसी महिला पर गिर गया. इसी बात पर दो पड़ोसियों के बीच खूनी संघर्ष हो गया, जिसमें 26 साल के तरुण की मौत हो गई थी. अब उसी मामले के आरोपियों के अवैध निर्माण पर प्रशासन का डंडा चला है। 

पंजाब में फ़्लोर टेस्ट की तैयारियां: अमन अरोड़ा पेश करेंगे प्रस्ताव, 6 BJP सांसदों के शामिल होने से टूट का खतरा

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा का आज 11 बजे विशेष सत्र बुलाया गया है। सरकार की ओर से न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। इसके साथ ही AAP के 6 राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने के बाद सरकार पर भी खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में सरकार आज फ्लोर टेस्ट करवा सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, AAP ने अपने सभी विधायकों को विधानसभा में हाजिर रहने के लिए व्हिप भी जारी कर दी है। यही नहीं पार्टी ने सभी विधायकों को तय समय से एक घंटा पहले विधानसभा में बुला लिया था। दरअसल, पार्टी में टूट की सुगबुगाहट के बीच दो दिन पहले सभी सांसदों व विधायकों को जालंधर में बुलाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उस बैठक में 65 ही विधायक पहुंचे जबकि बाकी नदारद रहे। वहीं तीनों लोकसभा सांसद भी बैठक में नहीं पहुंचे। AAP के पास अभी 117 में से कुल 94 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 59 विधायक जरूरी होते हैं। भगवंत मानने खुद दी थी जानकारी सीएम भगवंत मान ने ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में जानकारी देते हुए बताया था कि पंजाब कैबिनेट द्वारा लिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया है कि 1 मई को ‘मजदूर दिवस’ के अवसर पर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया जाएगा। यह एक दिवसीय सत्र उन मेहनती मजदूरों और कारीगरों को समर्पित होगा, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में अहम योगदान देते हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर सवाल उठाया है। क्या बोले सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा ने विधानसभा सत्र के समय पर आपत्ति जताते हुए कहा किइसे मजदूर दिवस के दिन बुलाया गया है। उन्होंने इसे सरकार की जल्दबाज़ी और संभावित विश्वास प्रस्ताव की तैयारी से जोड़ते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने दावा किया है कि AAP सरकार पहले ही अपना बहुमत खो चुकी है। उनका आरोप है कि जालंधर में हुई एक अहम बैठक में कई विधायक अनुपस्थित रहे और जो पहुंचे वो कथित तौर पर प्रशासनिक दबाव में थे। बीजेपी ने बताया फिजूलखर्ची बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने बुधवार को 1 मई को होने वाले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र को फिजूलखर्ची और सरकारी खजाने पर बोझ बताया। उन्होंने कहा कि भगवंत मान सरकार विधानसभा जैसी संवैधानिक संस्था का दुरुपयोग न केवल अपनी कमजोर होती पार्टी और अस्थिर विधायकों को संभालने के लिए कर रही है, बल्कि पंजाब में अपनी नाकामियों, अक्षमता, टूटे वादों, माफिया राज, गुंडागर्दी और जबरन वसूली के जाल से उपजे बढ़ते जन आक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए भी कर रही है। चुघ ने कहा कि इस तरह का सत्र बुलाने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान को जनता को बताना होगा कि उनके तथाकथित ‘परिवर्तन’ ने चार वर्षों में क्या हासिल किया है। भ्रष्टाचार, अराजकता और आंतरिक कलह ने उनकी अपनी पार्टी को गहरे अविश्वास में धकेल दिया है। वड़िंग का दावा- 50 विधायक पार्टी छोड़ेंगे राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि 30 से 35 विधायक राघव चड्‌ढा व संदीप पाठक के संपर्क में हैं। कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग भी AAP के 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने का दावा कर चुके हैं। अकाली दल के नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया भी आप में टूट की बार-बार बात कर रहे हैं।

मध्यम और निम्न आय वर्ग को राहत, 8 लाख रुपये से शुरू होंगे फ्लैट

लखनऊ  राजधानी लखनऊ में किफायती आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मध्यम और अल्प आय वर्ग के लिए बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 3000 से अधिक फ्लैट बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने इन सभी स्थानों का निरीक्षण कर जमीन को अंतिम रूप दे दिया है। अब परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन मकानों की शुरुआती कीमत 8 लाख रुपये होगी। 30 लाख रुपये की कीमत तक के फ्लैट बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय संकट से मिलेगी राहत: शहर में लगातार बढ़ती आबादी और महंगे रियल एस्टेट के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में एलडीए की यह आवासीय योजना लोगों की पहुंच में होगी। खास बात यह है कि परियोजना को ऐसी लोकेशन पर विकसित किया जा रहा है जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं या आसानी से विकसित की जा सकती हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को राहत देना है जो सीमित आय के चलते महंगे फ्लैट खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इन पांच स्थानों पर बनेंगे आवास 1-अनंत नगर योजना, मोहन रोड में मध्यम वर्ग के लिए आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे। स्थल चयन पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। 2-सीतापुर रोड शिया डिग्री कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट बनाने की मंजूरी मिली। 3-वसंत कुंज योजना, सेक्टर-एच यहां भी मध्यम आय वर्ग के लिए बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे। 4-शारदा नगर विस्तार में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस दोनों श्रेणियों के लिए मकान बनाए जाएंगे, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। 5-ऐशबाग में मदरसे के पीछे की जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए एलआईजी फ्लैट बनेंगे। एलडीए इसे पहली ही मंजूरी दे चुका है। तीन योजनाओं में उपकेंद्र शहर के विस्तार के साथ एलडीए ने बिजली ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण अपनी तीन प्रमुख योजनाओं आईटी सिटी, वरुण विहार और नैमिष नगर में बड़े बिजली उपकेंद्र (सब स्टेशन) बनाने जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा उपकेंद्र आईटी सिटी में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए 53 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने जमीन को दी मंजूरी: एलडीए के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की मंडलीय भूमि चयन समिति ने 3 अप्रैल 2026 को आईटी सिटी क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के बाद जमीन को उपयुक्त माना। अब एलडीए जल्द ही यह भूमि कॉरपोरेशन को हस्तांतरित करेगा, ताकि निर्माण शुरू हो सके। नैमिष नगर व वरुण विहार भी योजना में: नैमिष नगर में भी 9 अप्रैल 2026 को स्थलीय निरीक्षण किया गया, जहां चयन समिति ने जमीन को उपयुक्त पाया। यहां भी जल्द जमीन ट्रांसफर की जाएगी। तीसरा उपकेंद्र आगरा रोड स्थित वरुण विहार योजना में प्रस्तावित है, जो बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगा। बिजली व्यवस्था में आएगा बड़ा सुधार एलडीए के अनुसार, इन मेगा उपकेंद्रों के बनने से क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। बढ़ती आबादी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अगले 50 वर्ष के लोड को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्र दोनों को समान रूप से लाभ मिल सके। पहली बार इन योजना के प्रभावित गांवों को भी फायदा इस बार की योजना में खास बदलाव है। पहले एलडीए की कॉलोनियों में 24 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि आसपास के गांवों को अलग लाइन से सीमित सप्लाई मिलती थी। पर अब बनने वाले उपकेंद्रों से न सिर्फ प्राधिकरण की कॉलोनियों बल्कि उन गांवों को भी सीधे बिजली मिलेगी, जिनकी जमीन अधिग्रहित कर योजनाएं विकसित की जा रही हैं। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया गया है। कुछ जगहों पर जमीन को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल्द ही निर्माण शुरू होगा। एलडीए हजारों परिवारों का सस्ते व अपने घर का सपना साकार करेगा।

बुद्ध पूर्णिमा 2026: आज बन रहे कई शुभ योग, ज्योतिष अनुसार दिन रहेगा खास

 आज बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. बुद्ध पूर्णिमा को ही वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, उन्हें ज्ञान और महानिर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इस दिन श्रीहरि और माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इस बार की बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही नहीं, बल्कि ज्योतिष नजरिए से भी बहुत ही खास मानी जी रही है. दरअसल, आज कई ग्रह अपनी चाल में परिवर्तन करेंगे और कुछ राजयोगों का भी निर्माण होगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्धि के देवता बुध आज मेष राशि में अस्त हो रहे हैं. इसके अलावा, आज मेष राशि में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. आज सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है. तो चलिए जानते हैं कि बुद्धि पूर्णिमा इन सभी शुभ योगों के बनने से किन राशियों को लाभ होगा. मेष राशि बुधादित्य राजयोग का असर मेष राशि के लोगों के लिए काफी फायदेमंद रहने वाला है. इस समय पुराने अटके काम धीरे-धीरे पूरे हो सकते हैं. पैसों से जुड़ी परेशानियों में कमी आएगी. कर्ज से राहत मिलने के संकेत हैं. करियर में भी नई संभावनाएं बनेंगी, जिससे तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं. वृषभ राशि इस राजयोग के चलते वृषभ राशि वालों के जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. धन लाभ के योग बन रहे हैं. अगर कहीं निवेश करने का विचार है, तो समय आपके पक्ष में रह सकता है. आगे चलकर अच्छा फायदा दे सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. आत्मविश्वास बढ़ेगा. फैसले लेने में आसानी होगी. हालांकि इस दौरान खर्चों पर ध्यान देना जरूरी है, वरना बजट बिगड़ सकता है. सही योजना बनाकर चलेंगे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह समय मिला-जुला रह सकता है. कोई भी बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा. जल्दबाजी में उठाया गया कदम नुकसान दे सकता है, लेकिन समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ दिला सकते हैं. इस दौरान सोच में सकारात्मकता भी बढ़ेगी.  

अब 18 से 40 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा लाभ, 10 लाख रुपये तक लोन की तैयारी

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार जल्द ही युवाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना की सफलता को देखते हुए जल्द इसका विस्तार होगा। युवा उद्यमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि आवेदन पात्रता की आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दिए जाने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। अब तक 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 1.68 लाख युवा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक बिना बैंक गारंटी के ब्याज मुक्त लोन हासिल कर चुके हैं। अब न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया जाएगा जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 ही रहेगी। इसके साथ ही पांच लाख को डबल कर 10 लाख करने की भी तैयारी है। सीमा युवा उद्यमी योजना के तहत युवा सर्विस व मैनुफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर इनोवेटिव बिजनेस में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। योजना के तहत पांच लाख रुपये तक लिए गए लोन को चार वर्ष में चुकाने के बाद दूसरे चरण में साढ़े सात लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। ताकि भविष्य में पहले चरण को पूरा करने के उपरांत युवा उद्यमी अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए बड़ी राशि हासिल कर सकें। इसके चलते राशि को दोगुना किए जाने का भी प्रस्ताव है यानी पांच लाख के स्थान पर युवा 10 लाख रुपये तक और साढ़े सात लाख रुपये के स्थान पर 15 लाख रुपये तक लोन हासिल कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर युवा उद्यमी योजना की शुरुआत 24 जनवरी 2024 को यूपी दिवस के अवसर पर हुई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत डेढ़ लाख युवाओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी के ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आंकड़ों की नजर में योजना कुल आवेदन – 530487 – परियोजना लागत – 24964.7 करोड़ रुपये बैंक से स्वीकृत आवेदन – 180756 – परियोजना लागत – 6142.97 करोड़ रुपये बैंक द्वारा वितरित – 168516 – परियोजना लागत – 5913.15 करोड़ रुपये महिलाओं की 28 प्रतिशत भागीदारी योजना के तहत अब तक कुल लोन हासिल करने वालों में 28 प्रतिशत महिलाएं और 72 प्रतिशत पुरुष हैं। ओबीसी युवाओं की भागीदारी 50 फीसदी लोन हासिल करने वालों में सर्वाधिक 49.9 लाभार्थी ओबीसी वर्ग के हैं। इनके अलावा 34.3 प्रतिशत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति के 15.5 और अनुसूचित जनजाति के 0.3 प्रतिशत युवाओं ने लोन लिया है। किस क्षेत्र में कितना लोन सर्विस सेक्टर – 62 प्रतिशत मैनुफैक्चरिंग सेक्टर 38 प्रतिशत

मई महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा से, बना दुर्लभ धार्मिक संयोग

 आज से मई का महीना शुरू हो चुका है. ज्योतिषियों के मुताबिक, मई का महीना धार्मिक नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है. दरअसल, मई में एक अनोखा संयोग बन रहा है, जहां महीने की शुरुआत और समापन दोनों ही पूर्णिमा से होगा. ऐसे योग बहुत कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इस पूरे महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. इस दिन पूरे महीने श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा करें और मनोकामना पूर्ति के लिए उनके आगे तेल का दीपक भी जलाएं. पूर्णिमा से होगी महीने की शुरुआत मई की शुरुआत 1 तारीख को वैशाख पूर्णिमा से हो रही है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बहुत पवित्र माना जाता है. इस दिन लोग सुबह स्नान करके पूजा करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. बुद्ध पूर्णिमा का खास महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करना बहुत शुभ होता है. वहीं बौद्ध धर्म में यह तिथि इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था. इसलिए यह दिन आध्यात्म और साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. महीने का अंत भी होगा पूर्णिमा पर दिलचस्प बात यह है कि मई का आखिरी दिन यानी 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि पड़ेगी. यह ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी, जो अपने आप में बहुत विशेष मानी जाती है. अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. अधिक पूर्णिमा क्यों मानी जाती है खास? अधिकमास करीब ढाई से तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान आने वाली पूर्णिमा को बहुत पुण्यदायक माना जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलने की मान्यता है. शास्त्रों में महत्व धार्मिक ग्रंथों में इस पूर्णिमा को बहुत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. इसे ‘सर्व सिद्धिदायिनी’ तिथि भी कहा जाता है. इन कामों को करना रहेगा शुभ इस पूरे महीने में खासतौर पर पूर्णिमा के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना और सत्यनारायण कथा सुनना लाभकारी माना जा रहा है. इसके अलावा गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करके अन्न, कपड़े और धन का दान करना भी बहुत शुभ माना गया है.

लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, टोल दरें तय

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है। हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है। एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है। 254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल: बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी

पारिस्थितिकी बहाली का छत्तीसगढ़ मॉडल – बारनवापारा में काले हिरणों की वापसी'                            बलौदाबाजार मन की बात' से राष्ट्रीय क्षितिज तक का सफर- प्रायः सभी प्रकृति प्रेमियों का मानना है कि प्रकृति कभी भी अपना ऋण नहीं भूलती। यदि मनुष्य पूरी ईमानदारी से उसके संरक्षण की ओर एक कदम बढ़ाता है, तो प्रकृति उसे अपनी भव्यता से कई गुना वापस लौटाती है। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो सदियों से अपनी नैसर्गिक संपदा और सघन वन क्षेत्रों के लिए विख्यात रही है, आज वन्यजीव संरक्षण के एक नए स्वर्णिम युग की ओर बढ़ रही है।   छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य (लगभग 245 वर्ग किमी) में काले हिरणों (ब्लैकबक) का सफलतापूर्वक पुनरुद्धार हुआ है, जहाँ इनकी संख्या अब 200 के करीब पहुँच गई है। 1970 के दशक में विलुप्त हो चुके इन हिरणों को 2018 की पुनरुद्धार योजना और 2026 तक के वैज्ञानिक प्रयासों से वापस लाया गया। हाल ही में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में जब बारनवापारा अभ्यारण्य के काले हिरणों की सफल वापसी का उल्लेख किया, तो यह केवल एक राज्य की उपलब्धि नहीं रही, बल्कि भारत के पर्यावरण मानचित्र पर वन्यजीव संरक्षण का एक नया अध्याय बन गई।      विजन भरा नेतृत्व और प्रतिबद्धता- इस गौरवमयी उपलब्धि के सूत्रधार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हैं। उन्होंने इस सफलता को राज्य की समृद्ध जैव विविधता और पर्यावरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतिफल बताया है। मुख्यमंत्री साय का मानना है कि प्रधानमंत्री की सराहना केवल एक प्रशंसा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के वन विभाग और वहां के स्थानीय समुदायों के कठिन परिश्रम पर लगी राष्ट्रीय मुहर है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ आज विकास और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के बीच उस दुर्लभ संतुलन को साध रहा है, जिसकी आज पूरे विश्व को आवश्यकता है।        वैज्ञानिक रणनीति: विलुप्ति से पुनर्वास तक- बारनवापारा अभ्यारण्य में काले हिरणों (Blackbucks) का दिखाई देना एक समय दुर्लभ हो गया था। लेकिन वन मंत्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के रणनीतिक निर्देशन ने इस असंभव लक्ष्य को वास्तविकता में बदल दिया। फरवरी 2026 का महीना छत्तीसगढ़ के वन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जब विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में 30 काले हिरणों को उनके प्राकृतिक आवास में 'सॉफ्ट रिलीज' पद्धति से मुक्त किया गया। यह प्रक्रिया केवल उन्हें जंगल में छोड़ने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि वे नए वातावरण में बिना किसी तनाव (Stress-free) के रच-बस सकें। ब्लैकबक कंजर्वेशन सेंटर में बेहतर पोषण और वैज्ञानिक देखभाल से इनकी संख्या में वृद्धि हुई।      प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मैदानी संघर्ष- इस महाअभियान के पीछे उन जांबाज अधिकारियों और मैदानी अमले की मेहनत है, जिन्होंने दिन-रात एक कर दिया। मुख्य वन संरक्षक (रायपुर) श्रीमती सतोविशा समाजदार और वनमंडलाधिकारी (बलौदाबाजार) धम्मशील गणवीर के नेतृत्व में फील्ड स्टाफ, जीव वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम ने एक ढाल की तरह काम किया। वर्तमान में इन हिरणों की सुरक्षा के लिए हाई-टेक निगरानी प्रणाली, जीपीएस ट्रैकिंग और नियमित पेट्रोलिंग का उपयोग किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ वन विभाग की तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। रामपुर ग्रासलैंड:- एक सुरक्षित भविष्य का पालना बारनवापारा अभ्यारण्य का यह मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए एक 'केस स्टडी' बन सकता है। यहाँ केवल काले हिरण की प्रजाति का पुनर्वास नहीं हुआ, बल्कि उनके लिए एक संपूर्ण आवास तंत्र विकसित किया गया। रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक प्रबंधन, प्राकृतिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार और घास की स्थानीय प्रजातियों का संवर्धन वे मुख्य कारक हैं, जिन्होंने काले हिरणों को वहां फलने-फूलने के लिए प्रेरित किया। इसके अतिरिक्त, स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की एक अनूठी मिसाल पेश की है। काला हिरण (ब्लैकबक) भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है। नर काले हिरण का रंग गहरा भूरा से काला होता है, उसके लंबे सर्पिलाकार सींग होते हैं और शरीर का निचला भाग सफेद होता है। मादा काले हिरण हल्के भूरे रंग की होती हैं और सामान्यतः उनके सींग नहीं होते। यह प्रजाति खुले घास के मैदानों में पाई जाती है और दिन के समय सक्रिय रहती है। इसका मुख्य आहार घास और छोटे पौधे होते हैं। इनकी ऊंचाई लगभग 74 से 84 सेंटीमीटर होती है। नर का वजन 20 से 57 किलोग्राम के बीच और मादाओं का 20 से 33 किलोग्राम तक होता है। नर काले हिरण की सर्पिलाकार सींगें, जो लगभग 75 सेंटीमीटर तक लंबी हो सकती हैं, इन्हें आसानी से पहचानने योग्य बनाती हैं।                   भविष्य की राह और राष्ट्रीय संदेश- बारनवापारा अभ्यारण्य में गूंजती काले हिरणों की चहल-कदमी और उनकी कुलाचें इस बात का जीवंत साक्ष्य हैं कि यदि इंसान प्रकृति के प्रति अपनी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी समझ ले, तो खोई हुई धरोहर को फिर से लौटाया जा सकता है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक 'लिविंग लैबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) के रूप में कार्य करेगी, जहाँ वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाना सीख सकेंगी।                मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' ने हमारे नवाचारों को एक वैश्विक मंच प्रदान किया है। छत्तीसगढ़ सरकार पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जोड़कर एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर रही है, जहाँ मनुष्य और वन्यजीव दोनों सुरक्षित हों।आज जब हम बारनवापारा अभ्यारण्य की खुली वादियों में कुलाचें भरते काले हिरणों को देखते हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है कि प्रकृति स्वयं मुस्कुराते हुए छत्तीसगढ़ के इस सराहनीय प्रयास को अपना आशीर्वाद दे रही है। यह छत्तीसगढ़ के गौरव का वह उत्कर्ष है, जिसकी चमक अब पूरे देश को प्रेरित कर रही है।  धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

अहमदाबाद जा रहे बच्चों की तस्करी का मामला, उज्जैन-नागदा में 26 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल CWC उज्जैन में रखा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।