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रांची हाईकोर्ट सख्त: कस्टडी में मौत केस में जेल रिकॉर्ड न देने पर नाराजगी

 रांची  हाई कोर्ट के जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की अदालत में हिरासत में कथित यातना और मौत के मामले में दाखिल याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जेल से युवक के स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। कहा गया कि जेल अधीक्षक के सेवानिवृत्त होने के कारण युवक के स्वास्थ्य से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो सका है। उसे मंगवाने के लिए समय चाहिए। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते करते हुए मौखिक कहा कि दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए बहाना नहीं बनाएं। अगर दस्तावेज ही प्रस्तुत करना था तो आज क्यों नहीं किया गया? अदालत ने 5 मई तक हर हाल में दस्तावेज पेश करने को कहा है। यदि दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया तो जेल आइजी और गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ेगा। मामले में सीजेएम पलामू ने मृतक युवक के खिलाफ दर्ज केस का मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत किया गया। पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष यह बात सामने आई थी कि युवक को रिमांड पर लेने के लिए पलामू सीजेएम कोर्ट के यहां अस्पताल का प्रमाण पत्र दिया गया था उसमें कस्टडी के लिए फिट लिखा हुआ था, जिसके आधार पर पुलिस ने उसे रिमांड पर लिया था। लेकिन सरकार के शपथ पत्र में छह मार्च 2025 को युवक का एक अन्य फिटनेस से संबंधित कागजात है, जिसमें युवक को घायल बताया गया है। कोर्ट ने इसको गंभीरता से लिया और सीजेएम पलामू से युवक के केस का मूल रिकार्ड मांगा था। प्रार्थी की ओर से अदालत को बताया था कि एक मार्च 2025 को युवक महफूज अहमद को नवाबाजार में पुलिस पकड़ कर ले गई थी। हिरासत में लेकर उसके साथ मारपीट की गई। बाद में उसके खिलाफ पांकी थाना में केस दर्ज कर सीजेएम कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया। उस दौरान सीजेएम कोर्ट में पुलिस ने अस्पताल का एक सर्टिफिकेट भी प्रस्तुत किया था ,जिसमें युवक के घायल होने के बाद भी उसे फिट फार कस्टडी बताया गया था।

छत्तीसगढ़ 12वीं रिजल्ट: 72% टॉपर्स गवर्नमेंट स्कूल से, लड़कियां फिर सबसे आगे

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 43 स्टूडेंट्स ने जगह बनाई है। इनमें 31 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 72% स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से हैं। टॉप करने वालों में 32 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 7 से 8 लड़कियां आई  टॉप। 15 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 7 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 8 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा। दसवीं के उलट 12वीं में वैराइटी है। किसी एक स्कूल का दबदबा नहीं है। सिर्फ पेन्ड्रा-मरवाही का स्वामी आत्मनानंद इंग्लिश स्कूल ही एक ऐसा है, जहां से दो टॉपर निकले हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज 2.20% के दायरे में हैं सिमट गई है। यानी रैंक 1 से रैंक 10 के बीच 11 नंबर का ही अंतर है। वहीं 41 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स फेल हुए हैं। विषयवार रिजल्ट में साइंस के छात्रों का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। साइंस स्ट्रीम का पास प्रतिशत 87.52 फीसदी दर्ज किया गया। वहीं कॉमर्स संकाय का रिजल्ट 82.76 फीसदी रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 के साथ सबसे पीछे रहा।   15 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह टॉपर्स लिस्ट में इस बार रायपुर से सबसे ज्यादा 8 टॉपर्स हैं। इसके बाद रायगढ़ ने 6 टॉपर्स के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। तीसरे स्थान पर महासमुंद और गरियाबंद रहे। यहां से 4-4 टॉपर्स मेरिट लिस्ट में शामिल हुए। वहीं जशपुर, पेंड्रा-मरवाही, बालौदाबाजार और कांकेर जिलों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 3-3 टॉपर्स दिए। बेमेतरा और दुर्ग से 2-2 टॉपर्स सामने आए हैं। जबकि धमतरी, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई से 1-1 छात्र मेरिट लिस्ट में जगह बनाने में सफल रहे। लड़कियों का दबदबा कायम मेरिट सूची में लड़कियों ने एक बार फिर बाजी मारी है। कुल 43 टॉपर्स में से 31 लड़कियां हैं, जो 72.09 प्रतिशत है, जबकि लड़कों की संख्या 12 यानी 27.91 प्रतिशत ही रही। सिर्फ 12 छात्र निजी स्कूलों से इस बार सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को पीछे छोड़ दिया। कुल 43 टॉपर्स में से 31 छात्र सरकारी स्कूलों से हैं, जो 72 प्रतिशत है, जबकि 12 छात्र निजी स्कूलों से हैं, जो 28 प्रतिशत है। विशेष रूप से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जहां से 14 टॉपर्स आए हैं। मेरिट में बेहद कड़ी टक्कर इस वर्ष मेरिट सूची का अंतर बेहद कम रहा। रैंक 1 से रैंक 10 के बीच सिर्फ 2.20 प्रतिशत यानी लगभग 11 अंकों का अंतर है। रैंक 1 और 2 के बीच 2 अंक, रैंक 2 और 3 के बीच भी 2 अंक का अंतर रहा। ओवरऑल रिजल्ट- 83.04% छात्र पास इस वर्ष कुल 2,46,166 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 2,44,453 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 2,02,549 छात्र-छात्राएं पास हुए। कुल पास प्रतिशत 83.04 रहा। लड़कियों का पास प्रतिशत 86.04 रहा, जबकि लड़कों का 78.86 प्रतिशत रहा। इस प्रकार लड़कियां 7.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ आगे रहीं। जबकि रैंक 4 से आगे लगभग हर स्थान पर केवल 1 अंक का अंतर देखने को मिला। यही कारण है कि रैंक 9 और 10 में सबसे ज्यादा छात्र शामिल हुए। संकायवार प्रदर्शन में साइंस आगे संकायवार विश्लेषण में साइंस वर्ग का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जहां 87.52 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए। कॉमर्स संकाय का पास प्रतिशत 82.76 रहा, जबकि आर्ट संकाय 78.69 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे रहा। हर संकाय में लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन किया, जो इस बार के रिजल्ट की सबसे बड़ी विशेषता है। 63 प्रतिशत फर्स्ट डिविजन पास परिणाम के अनुसार लगभग 1.27 लाख विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी प्राप्त की, जो कुल उत्तीर्ण छात्रों का करीब 63 प्रतिशत है। वहीं करीब 9.8 प्रतिशत छात्र एक या दो विषय में फेल रहे और लगभग 7.2 प्रतिशत छात्र पूरी से फेल घोषित किए गए।

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ ने फिर मारी बाज़ी, अनुपमा की घटती रेटिंग”

टेलीविजन पर हर हफ्ते कौनसे सीरियल का राज रहता है, इसकी जानकारी सामने आ चुकी है. गुरुवार को इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स का खुलासा हुआ है, जिसमें एक बार फिर एकता कपूर के सीरियल ने बाजी मारी है. क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2 सीरियल अपने सक्सेसफुल रन को कायम रखे हुए है. एकता के शो में इस हफ्ते हमने एक ऐसा ट्विस्ट देखा था, जिसने करोड़ों दर्शकों की दुनिया हिला दी थी. सीरियल में तुलसी के बेटे अंश गुजराल बने एक्टर आकाशदीप सहगल की एंट्री हुई. इस बार वो तुलसी के पोते बनकर आए और आते ही छा गए. हालांकि इस ट्विस्ट ने कई लोगों को सोचने पर मजबूर भी किया. उन्होंने मेकर्स की कास्टिंग चॉइस पर सवाल उठाए और उन्हें ट्रोल भी किया. टीआरपी लिस्ट में कौन कितने नंबर पर? इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स में क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2, 1.8 रेटिंग्स के साथ टॉप पर बना रहा. पिछले हफ्ते 2 रेटिंग के मुकाबले, इस बार दो अंकों का फर्क नजर आया. वहीं, जी टीवी के दो सीरियल्स वसुधा और गंगा माई की बिटिया 1.7 रेटिंग्स के साथ नंबर 2 और 3 पर बने दिखे. नंबर 4 और 5 पर स्टार प्लस के सीरियल अनुपमा और तुम से तुम तक थे, जिन्हें 1.6 रेटिंग्स मिली. वहीं इसके बाद- ये रिश्ता क्या कहलाता है 1.5, उड़ने की आशा 1.5, क्योंकि रिश्तों के भी रूप बदलते हैं 1.5 रेटिंग्स के साथ टॉप 10 में शामिल दिखे. नागिन 7, तारक मेहता का उल्टा चश्मा और लाफ्टर शेफ जैसे शोज ने भी इस हफ्ते की टीआरपी रेटिंग्स में अपनी जगह बनाई रखी. अनुपमा की घटती टीआरपी रूपाली गांगुली का शो अनुपमा हर हफ्ते टीआरपी के मामले में कम-ज्यादा होता नजर आता है. पिछले हफ्ते इसकी टीआरपी रेटिंग 1.8 थी, जो अब घटकर 1.6 हुई. एक समय था जब अनुपमा को टीआरपी चार्ट में कोई सीरियल टक्कर नहीं दे पाता था. यहां तक कि जब टीआरपी किंग कहा जाने वाला शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' टीवी पर आया था, तब भी अनुपमा टॉप पर था. लेकिन अब ये शो टॉप 3 में भी जगह बनाने के लिए स्ट्रगल करता दिख रहा है. मेकर्स की बनाई हुई कहानी शायद अब ऑडियंस को उतनी रास नहीं आ रही, जैसे पहले आती थी.

गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर: वात, पित्त और कफ के अनुसार सही देखभाल

गर्मी ने धीरे-धीरे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया है। इस मौसम में मेरे पास आने वाले कई लोग ऑयलीनेस बढ़ने, मुंहासे से लेकर टैनिंग होने, सेंसिटिविटी बढ़ने और स्किन डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं लेकर आते हैं। आयुर्वेद कहता है कि इसके लिए कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट की जगह चंदन, उशीरा, लोध्र, त्रिफला और यष्टिमधु जैसी औषधीय गुणों से भरपूर चीजों का इस्तेमाल कर लंबे समय तक बरकरार रहने वाले सकारात्मक परिणाम पाए जा सकते हैं। ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि आयुर्वेद सिर्फ ऊपरी चीजें देखकर इलाज नहीं करता, बल्कि वो पहले शरीर की प्रकृति को समझने पर जोर देता है और फिर उपचार शुरू करता है। यही वजह है कि इसका फायदा गहराई से मिलता है और प्रभाव लंबे समय तक नजर आता है। गर्मियों का स्किन पर असर अष्टाङ्गहृदयम् जैसे पौराणिक आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रीष्म ऋतु एक ऐसा समय है, जब तेज गर्मी के कारण शरीर की ताकत और नमी धीरे-धीरे कम होती चली जाती है। इस दौरान शरीर में पित्त (शरीर की हीट एनर्जी) भी जमा होने लगता है। वातावरण में बढ़ती शुष्कता और पित्त का जमा होना, ये मिलकर ऐसा मेल बनाते हैं, जिससे त्वचा का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौसम में गर्मी के कारण पसीने भी ज्यादा आता है, जो स्रोतोरोध (स्किन के माइक्रोचैनल से जुड़े ब्लॉकेज) को जन्म देता है। अगर मौसम के अनुसार सही देखभाल न दी जाए, तो व्यक्ति को कई तरह की त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें इन्फ्लेमेशन, रेडनेस, पिंपल्स और डलनेस आदि शामिल हैं। नतीजन अक्सर गर्मियों में लोगों की स्किन थकी, अनइवन और रिएक्टिव नजर आती है। प्रकृति के आधार पर कैसा हो गर्मियों में आयुर्वेदिक स्किनकेयर वात प्रधान वात प्रधान लोगों की त्वचा प्राकृतिक रूप से रूखी होती है। गर्मियों में बाहरी शुष्कता के कारण ये समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।     इस तरह की प्रकृति वाले लोग मुडगा (हरा चना) को जेंटल क्लीनिंग के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। ये बिना नैचरल ऑयल को डैमेज किए त्वचा की सफाई करता है।     यष्टिमधु (मुलेठी) को दूध में मिलाकर लगाने से स्किन के खोए हाइड्रेशन को वापस लाया जा सकता है। ये स्किन के टेक्सचर को भी बेहतर बनाता है।     लाइट टेक्सचर के ऑयल भी स्किन के मॉइस्चर को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इससे गर्मी के कारण स्किन को कम नमी के चलते होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है। पित्त प्रधान पित्त प्रधान स्किन आमतौर पर काफी ज्यादा सेंसिटिव होती है, जिस वजह से इन्हें मुंहासों की समस्या, रेडनेस, इन्फ्लेमेशन और पिगमेंटेशन होने की आशंका काफी ज्यादा रहती है। गर्मियों में ये जोखिम और बढ़ जाता है। इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए स्किन को ठंडक देने वाले तरीके अपनाने की जरूरत होती है।   ठंडे पानी या गुलाब जल से चेहरा धोने पर जलन की समस्या कम करने में मदद मिलती है।   स्किन को शांत करने, गर्मी कम करने और रंगत को सुधारने के लिए चंदन, उशीरा और लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा) के क्लासिक कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कफ प्रधान कफ प्रधान लोगों की स्किन काफी ऑयली होती है। इस वजह से स्किन के ऐसे पार्ट्स जहां पहले से ही ज्यादा नमी मौजूद होती है, वहां के पोर्स बंद होने का ज्यादा खतरा रहता है इस तरह की स्किन वाले आयुर्वेद लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोसा)और त्रिफला (आंवला, हरीतकी, बिभीतकी) का पाउडर लगा सकते हैं। ये स्किन को साफ रखने और ऑयल को सोखने में मदद करता है। इस औषधीय पाउडर के इस्तेमाल से जेंटल एक्सफोलिएशन होता है, जो त्वचा की गंदगी को साफ करता है और प्राकृतिक संतुलन को फिर से स्थापित करता है। इससे स्किन कंजेशन को रोकने में मदद मिलती है। औषधीय लेप से रखें गर्मी में त्वचा का ख्याल शार्ंगधर संहिता जैसे ग्रंथों में लेप को स्किनकेयर का एक अहम पहलू बताया गया है। आम फेसपैक के उलट, ये औषधीय गुणों से भरा फॉर्मूलेशन खास स्किन कंडीशन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जाता है, ताकि असरदार रिजल्ट्स मिल सकें। उदाहरण के लिए:     चंदन-उशिरा-लोधरा से बना लेप शरीर की गर्माहट और गर्मी से हुई टैनिंग को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।     लोधरा-त्रिफला का लेप मुंहासों वाली स्किन की समस्याओं के लिए असरदार माना जाता है।     रूखी त्वचा और डलनेस के लिए मुलेठी को दूध में मिलाकर लगाने की सलाह दी जाती है। इन्हें लगाने का सही तरीका भी काफी महत्व रखता है। लेप की पतली लेयर स्किन पर लगाएं और वो पूरी तरह से सूखे, उससे पहले उसे हटा लें। ऐसा करने से स्किन और ज्यादा ड्राई नहीं होगी।

चंडीगढ़ में यूटी कैडर के IAS अधिकारियों का वर्चस्व बढ़ने से पंजाब-हरियाणा का प्रभाव कम हुआ

 चंडीगढ़  केंद्रीय सेवा नियम लागू होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन में अफसरशाही का संतुलन तेजी से बदलता नजर आ रहा है। यूटी कैडर के एक नए आईएएस अधिकारी डी. कार्तिकेयन ने वीरवार को प्रशासन में ज्वाइन किया। डी. कार्तिकेयन के ज्वाइन करने से यूटी कैडर के प्रशासन में आठ आईएएस हो गए, वहीं पंजाब और हरियाणा के दो-दो आईएएस प्रशासन में सेवाएं दे रहे हैं। केंद्रीय सेवा नियम लागू होने से पहले चंडीगढ़ प्रशासन में एडवाइजर को छोड़कर सभी विभागों में 60-40 के अनुपात से पंजाब और हरियाणा कैडर के आईएएस कार्यरत होते थे लेकिन अब यह परिस्थिति बदलती नजर आ रही है। डी. कार्तिकेयन को ज्वाइनिंग के बाद सेक्रेटरी आईटी, सेक्रेटरी विजिलेंस, सेक्रेटरी एग्रीकल्चर मार्केट बोर्ड और चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर (सीईओ) चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड का चार्ज दिया गया है। आईटी का हरियाणा और हाउसिंग बोर्ड सीईओ पद से पंजाब का खोया कब्जा : केंद्रीय सेवा नियम लागू होने से पहले प्रशासन के आईटी विभाग में सचिव पद का कार्यभार हरियाणा कैडर के आईएएस जो कि गृह सचिव पर आसीन होते थे, वह संभालते थे। वहीं, हाउसिंग बोर्ड के सीईओ का चार्ज पंजाब कैडर के आईएएस के पास होता था। इसी प्रकार शिक्षा विभाग सचिव का कार्यभार पंजाब कैडर से आए वित्त सचिव के पास होता था, जो कि आज यूटी कैडर की आईएएस प्रेरणा पुरी के पास है। अभिजीत हुए रिलीव तो कार्तिकेयन ने किया ज्वाइन चंडीगढ़ प्रशासन में अभी तक आठ आईएएस यूटी जबकि दो-दो पंजाब हरियाणा के ही हैं। वीरवार को स्पेशल सेक्रेटरी अभिजीत विजय चौधरी प्रशासन से रिलीव हुए, वह चंडीगढ़ में ही बीएसएफ में डिप्टी फाइनेंशियल एडवाइजर ज्वाइन करेंगे। वहीं, दानिक्स कैडर से प्रमोट हुए डी. कार्तिकेयन ने चंडीगढ़ में ज्वाइन किया। 60-40 के अनुपात पर इसलिए भी सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि बीते दिनों प्रशासन की तरफ से पंजाब के चार आईएएस का नाम केंद्र को भेजा था जिसे नकारा जा चुका है। ऐसे में इस समय यूटी कैडर का दबदबा बढ़ रहा है जबकि पंजाब-हरियाणा का वजूद कमजोर प्रतीत हो रहा है। पंजाब और हरियाणा सरकारें पहले भी चंडीगढ़ प्रशासन में अपने अधिकारियों की संख्या और अहम विभागों की जिम्मेदारी को लेकर मुद्दा उठाती रही हैं। अब यूटी कैडर के लगातार बढ़ते दखल और 60-40 फार्मूले के कमजोर पड़ने से यह विवाद फिर गहराने के संकेत हैं। यह है यूटी कैडर के आईएएस इस समय चंडीगढ़ में आठ आईएएस आफिसर हैं, जिसमें चीफ सेक्रेटरी राजेश प्रताप सिंह, कार्मिक विभाग में सचिव स्वप्निल एम. नाइक, शिक्षा सचिव प्रेरणा पुरी, फूड एंड सप्लाई सचिव मोहम्मद मंसूर, संस्कृति और पर्यटन सचिव डॉ. सैयद आबिद राशिद शाह, सीएसएस से अनुराधा चगती हैं। वहीं, हरियाणा कैडर से होम सेक्रेटरी मंदीप सिंह बराड़ और डिप्टी कमिश्नर निशांत कुमार यादव और पंजाब कैडर से फाइनेंस दीप्रा लाकड़ा और नगर निगम में कमिश्नर अमित कुमार तैनात हैं। राधिका को रिलीव कर डॉ. पालिका को बनाया उच्चतर शिक्षा विभाग निदेशक वीरवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल में डी. कार्तिकेयन की ज्वाइनिंग के साथ निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग का कार्यभार भी बदला गया। निदेशक उच्चतर शिक्षा विभाग का कार्यभार डॉ. राधिका से लेकर डॉ. पालिका को दिया गया है।  

लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश

आम जनता से शालीनता से पेश आएं अधिकारी – मुख्यमंत्री लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं – मुख्यमंत्री का अधिकारियों को दो टूक निर्देश शालीनता और संवेदनशीलता – यही हो प्रशासनिक अधिकारी की पहचान: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से  शासकीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे आमजन के साथ शालीनता, धैर्य और सम्मान के साथ व्यवहार करें। उन्होंने दो टूक कहा कि मुख्यालय और फील्ड स्तर पर शासकीय अधिकारी ही शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका आचरण शासन की छवि को प्रभावित करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को सुनना प्रशासनिक अधिकारियों  का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि वे जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवाद तभी सार्थक है, जब उसमें संवेदना और समस्याओं का समाधान करने की नीयत हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण को प्रभावी, सरल और भरोसेमंद बनाया जाए। जब कोई आम नागरिक किसी शासकीय कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सकारात्मक अनुभव ही जनता के मन में विश्वास पैदा करता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारी फील्ड में सक्रिय रहें, लोगों से सीधे संवाद करें और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुरूप कार्य करें। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और तत्परता ही प्रशासन की असली ताकत है। उन्होंने अधिकारियों से पारदर्शिता और जवाबदेही को अपने कार्य का मूल आधार बनाने की अपेक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे बनाए रखने के लिए ईमानदारी के साथ-साथ व्यवहार में शालीनता और विनम्रता भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। यदि अधिकारी जनता के साथ सरल, सहज,  सहयोगात्मक और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का तरीका हर समय अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वयमेव अधिक प्रभावी हो जाता है और शिकायतों की संख्या स्वतः कम होने लगती है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना तभी साकार होगा, जब प्रशासन हर नागरिक के लिए सुलभ, संवेदनशील और सम्मानजनक बने। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे इस भावना को अपने कार्य का मूल मंत्र बनाकर आगे बढ़ें और हर व्यक्ति को यह अहसास दिलाएं कि सरकार उसके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया कि सुशासन तिहार के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों में आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार पक्ष का भी अवलोकन करेंगे।उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के दौरान अधिकारियों की संवेदनशीलता, शालीनता और जवाबदेही को प्राथमिकता के साथ परखा जाएगा। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण के लिए “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समाधान शिविर लगाए जाएंगे।इस दौरान पंचायत एवं वार्ड स्तर पर शिविरों में आवेदन स्वीकार कर जनसमस्याओं का निराकरण किया जाएगा। सुशासन तिहार में  जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रहेगी तथा स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा औचक निरीक्षण और जनसमस्याओं के निराकरण और शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ 10वीं रिजल्ट: सरकारी स्कूलों से 81% टॉपर्स, टॉप 10 में सिर्फ 1.5% का फर्क

रायपुर  छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं की टॉप-10 मेरिट लिस्ट में इस बार 42 विद्यार्थियों ने जगह बनाई है। इनमें 34 टॉपर सरकारी स्कूलों से हैं। यानी 81% से ज्यादा स्टूडेंट गवर्नमेंट स्कूलों से आते हैं। टॉप करने वालों में 27 लड़कियां शामिल हैं। यानी टॉप करने वाले हर 10 में से 6 से 7 लड़कियां हैं। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई। इनमें 5 जिले ऐसे हैं, जहां से किसी भी लड़के ने टॉप नहीं किया। रायपुर 10 टॉपर्स के साथ सबसे आगे रहा, जबकि महासमुंद ने 8 टॉपर्स दिए। टॉप 2 में महासमुंद के 4 स्टूडेंट हैं। टॉप-10 की पूरी सूची महज डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमट गई है। इसका मतलब टॉप 1 से टॉप 10 तक सिर्फ 1.5% का फर्क रहा, यानी 1-2 नंबर से ही रैंक बदल गई। 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने मेरिट लिस्ट में बनाई जगह मेरिट सूची में कुल 13 जिलों के स्टूडेंट्स ने जगह बनाई। सबसे ज्यादा टॉपर रायपुर (10) से रहे। इसके बाद महासमुंद (8), बिलासपुर (5) और दुर्ग (4) का नंबर रहा। मुंगेली से 3, रायगढ़, जशपुर और कोरिया से 2-2 छात्र मेरिट में पहुंचे। यह बताता है कि छोटे जिलों के विद्यार्थियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया।जिलेवार टॉपर्स का एनालिसिस करें तो महासमुंद के 8 टॉपर्स हैं, सभी टॉपर्स लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन महासमुंद के 4 स्टूडेंट्स हैं। रायपुर से सबसे ज्यादा 10 टॉपर्स हैं, इनमें छह लड़के और 4 लड़कियां हैं। रायपुर के स्टूडेंट्स हर रैंक में मौजूद हैं। लेकिन 9th-10th पोजिशन में सबसे ज्यादा 5 स्टूडेंट्स शामिल हैं।बिलासपुर से 5 स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई है, सभी लड़कियां हैं। मिड-लोअर रैंक्स यानी 7वें से 10वें पोजिशन में बिलासपुर मजबूत स्थिति में हैं।दुर्ग से कुल चार स्टूडेंट्स ने टॉप 10 में जगह बनाई हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। मिश्रित रैंक है, लेकिन कोई टॉप-3 में नहीं हैं।मुंगेली से 3 टॉपर्स निकले हैं, इनमें दो लड़कियां हैं। टॉप 2 पोजिशन में दो स्टूडेंट हैं। यानी कुल टॉपर्स कम हैं, लेकिन टॉप पोजिशन पर अच्छा रिजल्ट रहा रहा। कबीरधाम, गरियाबंद, कांकेर और सारंगढ़ इन चार जिलों से कुल चार टॉपर निकले हैं। इनमें दो लड़के और दो लड़कियां हैं। कबीरधाम टॉप 2 में मौजूद हैं। अन्य ने 8th से 10th पोजिशन में जगह बनाई है। प्राइवेट स्कूल पिछड़े, सरकारी स्कूलों का दबदबा कुल टॉपर्स की संख्या 42 है। इनमें सरकारी स्कूल के 34 यानी 81% बच्चे हैं। जबकि प्राइवेट स्कूल के सिर्फ 8 (19%) बच्चे ही इस लिस्ट में शामिल हैं। सरकारी संस्थाओं में प्रयास से सबसे अधिक 13 स्टूडेंट्स ने टॉप किया है। टॉप-10 में महज 1.5% का अंतर, 0.17% के मामूली अंतर से बदली रैंकिंग दसवीं में टॉप-1 से लेकर टॉप-10 तक के स्टूडेंट्स के बीच कुल अंतर सिर्फ 1.50 प्रतिशत का रहा। टॉप रैंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों ने 99.00 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, जबकि दसवें स्थान पर रहने वाले विद्यार्थियों का प्रतिशत 97.50 रहा। हर रैंक के बीच का अंतर बेहद कम, लगभग 0.16 से 0.17 प्रतिशत के बीच रहा। यानी सिर्फ एक-दो अंकों के फर्क से छात्रों की रैंकिंग ऊपर-नीचे हो रही है। उदाहरण के तौर पर, 99.00 प्रतिशत से 98.83 प्रतिशत पर आते ही रैंक सीधे पहले से दूसरे स्थान पर पहुंच गई। 10वीं में तीन और 12वीं में जिज्ञासु वर्मा ने किया टॉप हाई स्कूल (10वीं) की परीक्षा में इस बार जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। संध्या नायक, परी रानी प्रधान और अंशुल शर्मा ने संयुक्त रूप से 99 प्रतिशत अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं, हायर सेकेंडरी (12वीं) की परीक्षा में जिज्ञासु वर्मा ने प्रदेश में टॉप किया है। 12वीं की ही मेरिट लिस्ट में जिज्ञासु वर्मा ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर शीर्ष स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं टॉपर्स लिस्ट संध्या नायक (रैंक 1) परी रानी प्रधान (रैंक 1) अंशुल शर्मा (रैंक 1) रिया केशवानी (रैंक 2) रानु सिद्धमयी साहू (रैंक 2) रेणुका प्रधान (रैंक 2) दीपांशी बौद्ध (रैंक 2) नंदिता देवगन (रैंक 2) छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की टॉपर लिस्ट जिज्ञासु वर्मा (रैंक 1) ओमनी (रैंक 2) कृष महंत (रैंक 3) शानदार रहा पास प्रतिशत छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं का रिजल्ट 77.15 प्रतिशत रहा। यह पिछले साल से 5 फीसदी अधिक रहा। लड़कों का रिजल्ट 72 फीसदी और लड़कियों का 81 फीसदी रिजल्ट रहा। वहीं छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं का रिजल्ट कुल 83.04 फीसदी रहा। 12वीं में बालक 78.8 प्रतिशत पास हुए जबकि बालिकाएं 86.4 प्रतिशत पास हुईं। सीजीबीएसई छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2026 में दो छात्राओं और एक छात्र ने 99 प्रतिशत अंक लाकर रैंक 1 हासिल की है। तीनो संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे। टॉपर्स के लिए इनामों की बौछार मेधावी छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़े पुरस्कारों की घोषणा की है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के टॉपर्स को 1.50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि पुरस्कार के रूप में दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि सुविधाओं के अभाव में भी प्रतिभा निखर सकती है।

हुड्डा सरकार पर नियम बदलकर भूखंड आवंटन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप

पंचकूला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दायर कर दी है। आरोपों में आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं शामिल हैं। इसमें धोखाधड़ी से धन का गबन और स्वयं या दूसरों के लिए आर्थिक लाभ प्राप्त करने का आरोप है। सीबीआई ने आरोप पत्र के साथ हरियाणा सरकार की केस चलाने की मंजूरी को भी चार्जशीट के साथ अदालत में जमा कराया है। इसमें हुड्डा के अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा का नाम शामिल है। इस मामले में अदालत ने संबंधित लिपिक को दस्तावेजों की जांच कर चार जून को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। सीबीआई ने यह मामला 19 मई 2016 को दर्ज किया था। चार्जशीट के मुताबिक भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब मुख्यमंत्री रहते हुए एचएसवीपी के अध्यक्ष थे तो उन्होंने पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के लिए आवेदन मांगे थे। अपने चहेतों को प्लॉट देने के लिए हुड्डा ने आवेदन की तिथि बीत जाने के बाद नियमों में बदलाव कर दिया। इसमें अनुभव व योग्यता कम कर दी गई और मौखिक परीक्षा के अंक बढ़ा दिए गए। वित्तीय क्षमता के अंक 25 से घटाकर 10 कर दिए गए जबकि वाइवा-वॉइस के अंक 15 से बढ़ाकर 25 कर दिए गए। 14 भूखंडों के लिए 582 आवेदन आए थे। जांच के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये के भूखंड 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित किए गए। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सीबीआई ने कोर्ट में यह भी बताया कि डीपीएस नांगल के खिलाफ धारा 197 के तहत तो स्वीकृति मिल चुकी है मगर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत मंजूरी का इंतजार है। मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से एक गवाह नरेंद्र कुमार सोलंकी की धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज बयान भी सीलबंद लिहाफे में अदालत में पेश किया गया जिसे सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। इन्हें बनाया गया आरोपी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा : पूर्व मुख्यमंत्री व हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन धर्मपाल सिंह नांगल : पूर्व आईएएस व हुडा के पूर्व मुख्य प्रशासक सुभाष चंद्र कांसल : हुडा के पूर्व मुख्य वित्तीय नियंत्रक भारत भूषण तनेजा : हुडा के डिप्टी सुपरिटेंडेंट वाईपीटी इंटरटेनमेंट हाउस प्राइवेट लिमिटेड के मालिक रेनू हुड्डा : पूर्व सीएम की करीबी व उनके पैतृक गांव की निवासी अशोक वर्मा : कांग्रेस नेता अशोक काका के दामाद सिद्धार्थ भारद्वाज : कांग्रेस नेता संजीव भारद्वाज के बेटे कंवर प्रीत सिंह संधू : हुड्डा के सहपाठी डीडी संधू के बेटे डॉ. गणेश दत्त रतन : हुड्डा के दोस्त। मोना बेरी : हुड्डा के ओएसडी बलदेव राज बेरी डागर कात्याल : हुड्डा के दोस्त सुनील कात्याल के बेटे प्रदीप कुमार : हुड्डा के निजी सचिव राम सिंह के बेटे मनजोत कौर : हुड्डा की परिचित की बहू चंडीगढ़ साफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के मालिक नंदिता हुड्डा : हुड्डा के पैतृक गांव की निवासी व कांग्रेस नेत्री    

गर्मी में बच्चों को हाइड्रेटेड रखने के 5 आसान ड्रिंक्स

न्यूट्रिशनिस्ट कहती हैं क‍ि बच्चे बड़ों की तुलना में जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि उनका मेटाबॉलिज्‍म तेज होता है और वे पसीने के जरिए ज्यादा मात्रा में पानी खो देते हैं। 1- कंसंट्रेशन पर असर पड़ सकता है डॉक्‍टर भावना आगे बताती हैं क‍ि शोध बताते हैं कि अगर बच्चों के शरीर में थोड़ी भी पानी की कमी हो जाए, तो इसका सीधा असर उनकी एनर्जी, ध्यान लगाने की क्षमता और ओवर ऑल हेल्‍थ पर पड़ सकता है। 2-हीट एग्जॉशन का रहता है खतरा एक्‍सपर्ट कहती हैं क‍ि शरीर का तापमान बनाए रखने, बच्‍चों को पाचन में मदद करने और पोषक तत्वों को शरीर में पहुंचाने में पानी बहुत जरूरी होता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर से पानी के साथ- साथ सोडियम और पोटेशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी कम हो सकते हैं। अगर इनकी पूर्ति न की जाए, तो थकान, चक्कर आना और गंभीर मामलों में हीट एग्जॉशन (गर्मी से थकावट) जैसी समस्या हो सकती है। 1. नींबू पानी सामग्री: नींबू का रस, पानी, एक चुटकी नमक, चीनी या गुड़ विधि: सभी सामग्रियों को ठंडे पानी में मिलाकर अच्छे से मिक्स करें। लाभ: यह विटामिन C से भरपूर, इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करता है और इम्यूनिटी बढ़ाता है। 2. छाछ सामग्री: दही, पानी, भुना जीरा पाउडर, नमक विधि: दही को पानी में मिलाकर उसमें मसाले डालें और अच्छे से फेंट लें। लाभ: पाचन में मदद करती है, शरीर को ठंडक देती है और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना नार‍ियल का पानी और आम पन्‍ना 3. नारियल पानी सामग्री: ताजा नारियल पानी विधि: सीधे ताजा परोसें, किसी तैयारी की जरूरत नहीं। लाभ: प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर, डिहाइड्रेशन से बचाता है और ऊर्जा बनाए रखता है। 4. आम पन्ना सामग्री: कच्चा आम, चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक विधि: कच्चे आम को उबालकर उसका गूदा निकालें और बाकी सामग्री व पानी के साथ मिलाएं। लाभ: लू से बचाव करता है और विटामिन A व C से भरपूर होता है। 5. तरबूज का रस सामग्री: ताजे तरबूज के टुकड़े विधि: ब्लेंड करें और चाहें तो छान लें। लाभ: पानी की मात्रा अधिक होती है, शरीर को ठंडक देता है और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। ​ 6- घर का बना फ्रूट स्मूदी​ सामग्री: केला, आम या सेब, दूध या दही विधि: सभी चीजों को ब्लेंड करके स्मूदी तैयार करें। लाभ: ऊर्जा देता है, पोषक तत्वों से भरपूर होता है और बच्चों को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है। ​ बच्चों के डेली रूटीन में ये समर ड्रिंक्स शामिल करना उन्हें हाइड्रेटेड और पोषित रखने का एक आसान और असरदार तरीका है। कम सामग्री और सरल विधि से बने ये ड्र‍िंक्‍स गर्मी से प्राकृतिक रूप से बचाव करते हैं। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को इन ताजगी भरे ड्रिंक्स का नियमित सेवन कराएं, ताकि वे पूरे मौसम में स्वस्थ, ऊर्जावान और फिट बने रहें।

शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ में टकराव, सफाई व्यवस्था ठप होने की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय विभाग और कर्मचारी संघ के बीच खींचतान अब बड़े टकराव का रूप ले चुकी है। चंडीगढ़ में निकाय विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारी नेताओं के बीच हुई मैराथन वार्ता बेनतीजा रहने के बाद, आज से प्रदेश के करीब 30 हजार निकाय कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। वार्ता विफल होने के मुख्य कारण हरियाणा सर्व कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान और नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीना के साथ मुलाकात की। वार्ता के दौरान कर्मचारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के कारण सहमति नहीं बन सकी। कर्मचारियों की प्रमुख मांगें     पक्का करने की मांग: सीवरेज से संबंधित ठेका कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     ठेका प्रथा का अंत: सीवरेज कार्य से जुड़े सभी ठेकों को तुरंत समाप्त किया जाए।     वेतन वृद्धि: सीवरेज कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन ₹30,000 निर्धारित हो।     बहाली की मांग: गुरुग्राम के 3,480 कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा जाए और 26 आंदोलनकारी नेताओं की बर्खास्तगी रद्द हो। प्रशासन की अपील और संघ का रुख बैठक के दौरान विभाग के सचिव अशोक मीना ने प्रदेश में चल रहे विशेष सफाई अभियान का हवाला देते हुए कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की भावुक अपील की। हालांकि, कर्मचारी नेताओं ने इसे सिरे से नकार दिया। नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि हमें लंबे समय से केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। अब हमारे पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, हड़ताल जारी रहेगी। आम जनजीवन पर असर की आशंका इस हड़ताल में सफाई कर्मचारी, सीवरेज कर्मी और अन्य निकाय कर्मचारी शामिल हैं, जिसके चलते प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था और सीवरेज प्रबंधन पूरी तरह ठप हो सकता है। वार्ता के दौरान निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक वाईएस गुप्ता और कई दिग्गज कर्मचारी नेता भी मौजूद रहे। टोहाना में सफाई व्यवस्था ठप, 240 कर्मचारी दो दिन की हड़ताल पर नगर परिषद कार्यालय में दमकल कर्मचारियों की 24 दिन से जारी हड़ताल के बीच अब सफाई कर्मचारियों ने भी दो दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते शहर में डोर-टू-डोर कचरा उठाने का काम पूरी तरह ठप हो गया है। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस हड़ताल में नगर परिषद के कच्चे, पक्के और डोर-टू-डोर वाले करीब 240 कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने शुक्रवार को नगर परिषद परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, परिवार सहित प्रदर्शन जारी रहेगा।   कर्मचारी नेता रविंद्र व सुरेश कुमार ने बताया कि ड्यूटी के दौरान दमकल कर्मचारी की मौत के बाद भी सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की। परिवार को मुआवजा और नौकरी देने की मांग को लेकर दमकल कर्मचारी 24 दिन से धरने पर हैं, लेकिन सरकार का रवैया उदासीन है। इसी के विरोध में सफाई कर्मचारियों ने भी काम बंद कर दिया है। नेताओं ने कहा कि फिलहाल यह हड़ताल दो दिन के लिए है। अगर इसके बाद भी सरकार नहीं जागी तो आंदोलन को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाया जाएगा। हड़ताल के पहले दिन ही शहर की गलियों और बाजारों में कचरे के ढेर लगने शुरू हो गए हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर परिषद बहादुरगढ़ के सफाई कर्मचारी हड़ताल पर, कामकाज प्रभावित बहादुरगढ़ में नगर परिषद के सभी कच्चे और पक्के सफाई कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आज हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने सुबह से ही काम बंद कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को अवगत करा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उनकी प्रमुख मांगों में नौकरी की सुरक्षा, वेतन में बढ़ोतरी और ठेका प्रथा को खत्म करना शामिल है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।