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अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का नया समय, आज से लागू: अब शाम 6:30 बजे तक

अमृतसर  अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोज़ाना आयोजित होने वाली मशहूर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन के नए फैसले के अनुसार, अब यह देशभक्ति से भरपूर समारोह शाम 6:00 बजे शुरू होगा और 6:30 बजे तक चलेगा। पहले यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे शुरू होकर 6:00 बजे समाप्त होता था। अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव मौसम और दिन के समय में हो रहे परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। साथ ही, इसका उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर अनुभव देना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाना भी है। हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। अब इस नए शेड्यूल पर होगा आयोजन नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अब इस नए शेड्यूल के अनुसार अपनी योजना बनानी होगी। भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा किया जाने वाला यह बीटिंग रिट्रीट समारोह अनुशासन, जोश और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। दर्शकों में गूंज उठता है ‘वंदे मातरम्’ का नारा हर शाम हजारों दर्शकों की मौजूदगी में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय से पहले पहुंचें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और इस शानदार समारोह का पूरा आनंद लिया जा सके। मौसम और दिन की घटती-बढ़ती रोशनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय में यह बदलाव जरूरी था। अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर रोज होने वाली इस देशभक्ति से भरपूर सेरेमनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है यह नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है। यानी अब जो भी पर्यटक या स्थानीय लोग इस सेरेमनी को देखने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए समय के अनुसार ही पहुंचना होगा। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा की जाने वाली एक विशेष परंपरा है, जिसमें जोश, अनुशासन और देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है। हजारों लोग बनते हैं आयोजन का हिस्सा हर दिन हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से गूंज उठता है। इस बदलाव के बाद उम्मीद है कि लोग समय से पहुंचकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले पाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और निर्धारित समय से पहले ही पहुंचकर अपनी सीट सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

नर्मदा में क्रूज डूबने से 9 की मौत, 9 लापता; पर्यटन मंत्री ने पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक की जानकारी न होने की बात कही

जबलपुर  मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार शाम पर्यटन विभाग का एक क्रूज अचानक आई तेज आंधी के चलते डूब गया। अब तक 9 शव मिल चुके हैं। 24 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रशासन के मुताबिक 9 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। हादसा किनारे से करीब 300 मीटर दूर हुआ। बरगी सिटी सीएसपी अंजुल मिश्रा ने बताया कि शुरुआती रेस्क्यू में SDRF ने कई लोगों को बचाया, लेकिन अंधेरा और खराब मौसम से राहत कार्य प्रभावित हुआ। शुक्रवार सुबह फिर से रेस्क्यू जारी है। वहीं प्रदेश के पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी जबलपुर पहुंचे हैं, लेकिन उनका हैरान करने वाला बयान सामने आया है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- नर्मदा में पेट्रोल-डीजल बोट पर रोक है। उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।चना मिलते ही SDRF और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और युद्ध स्तर पर राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।   मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी सहित वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और हर संभव मदद दी जाएगी। यह हादसा एक बार फिर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और मौसम की सतर्क निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और लापता लोगों की तलाश तेज कर दी गई है। सेना और स्पेशल टीमों ने संभाला मोर्चा हादसे की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ अब राष्ट्रीय स्तर की टीमें भी तैनात की गई हैं। आर्मी भी मौके पर मौजूद है। हैदराबाद से एक स्पेशल टीम और हेलिकॉप्टर रवाना किया गया है। कोलकाता से पैरामिलिट्री की एक विशेष टीम जबलपुर पहुंच चुकी है। हाइड्रॉलिक मशीनों और पोकलेन की मदद से 20 फीट गहरे पानी में फंसे क्रूज को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। क्रूज पायलट बोले- संभलने का मौका ही नहीं मिला क्रूज के पायलट महेश ने बताया, 'सुरक्षा के इंतजाम तो थे, लेकिन अचानक आए तेज तूफान के चलते क्रूज अनियंत्रित हो गया। किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला।' महेश को 10 साल का अनुभव है। खमरिया के एक परिवार के 15 लोग सवार थे ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया के A3 सेक्शन में कार्यरत कर्मचारी कामराज आर्य परिवार के 15 लोगों के साथ घूमने गए थे। कामराज के माता-पिता भी साथ में थे, लेकिन वे किनारे बैठे हुए थे। कामराज के साथ उनकी पत्नी, भाभी और बच्चे क्रूज में घूमने गए हुए थे। कामराज मूलत: कर्नाटक के रहने वाले हैं। उनके एक बेटे को बचा लिया गया। वहीं कामराज, उनकी पत्नी और एक बेटा अब भी लापता है। पर्यटन विभाग बोला- क्रूज 20 साल पुराना पर्यटन विभाग के एक अधिकारी योगेंद्र रिछारिया ने बताया, ‘बरगी डैम में फिलहाल एक क्रूज ऑपरेट किया जा रहा है। इसे 2006 में बनाया गया था। इसकी कैपेसिटी 60 यात्रियों की है। एक अन्य क्रूज खराब है।’ अब तक इन मृतकों की पहचान हुई     श्रीमती नीतू सोनी (43), निवासी कोतवाली, जबलपुर     श्रीमती सौभाग्यम अलागन (42), निवासी अन्नानगर, वेस्ट तारापुरम, तमिलनाडु     श्रीमती मधुर मैसी (62), निवासी खाजन बस्ती, नई दिल्ली     श्रीमती काकुलाझी (38), निवासी वेस्ट लैंड खमरिया, जबलपुर     श्रीमती रेशमा सैयद (66)     शमीम नकवी (66)     मरिना मैसी पति प्रदीप मैसी (39)     त्रिशान पिता प्रदीप मैसी (4) एक डेडबॉडी की पहचान की प्रक्रिया जारी है।

GT ने RCB को 4 विकेट से हराया, बटलर-गिल की दमदार पारियां

अहमदाबाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 42वें मैच में गुजरात टाइटंस (GT) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 4 विकेट से हराते हुए अपनी 5वीं जीत दर्ज की। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए मैच में RCB ने पहले खेलते हुए सभी विकेट खोकर 155 रन बनाए। जवाब में GT ने जोस बटलर (39) और शुभमन गिल (43) की पारियों की मदद से लक्ष्य हासिल किया। आइए मैच में बने रिकॉर्ड्स पर एक नजर डालते हैं। इस तरह से जीती GT की टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए RCB ने 35 रन तक विराट कोहली (28) और जैकब बेथल (5) के विकेट गंवाए। निरंतर अंतराल पर गिर रहे विकेटों के बीच देवदत्त पडिक्कल ने 40 रन बनाते हुए टीम का स्कोर 150 के पार पहुंचाया। GT से अरशद खान ने 3 विकेट लिए। जवाब में साई सुदर्शन (6) के जल्दी आउट होने के बाद बटलर और गिल ने तेज रन बनाए। इसके बाद राहुल तेवतिया (27*) ने जीत सुनिश्चित की। कोहली ने पूरे किए 450 टी-20 छक्के कोहली ने 13 गेंदों में 28 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 5 चौके और एक छक्का लगाया। अपने इकलौते छक्के के साथ ही कोहली ने टी-20 क्रिकेट में अपने 450 छक्के पूरे किए। वह इस आंकड़े को छूने वाले दूसरे भारतीय बने। कोहली टी-20 क्रिकेट में 450 छक्के पूरे करने वाले विश्व के कुल 21वें बल्लेबाज बने। भारतीय बल्लेबाजों में कोहली से ज्यादा छक्के सिर्फ रोहित शर्मा (555) ने लगाए हैं। बटलर ने पूरे किए 200 IPL छक्के बटलर ने 19 गेंदों में 39 रन की पारी खेली। इस बीच उन्होंने 2 चौके और 4 छक्के लगाए। इस इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपने IPL करियर में 200 छक्के पूरे किए। अपने IPL करियर में उन्होंने 130 मैचों में 39.90 की औसत और 149.88 की स्ट्राइक रेट के साथ 4,429 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 7 शतक और 26 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर 124 रन रहा है। अरशद और होल्डर ने की उम्दा गेंदबाजी GT की ओर से अरशद सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने 3.2 ओवर में 22 रन देते हुए 3 सफलताएं हासिल की। यह उनके IPL करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है। ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने अपने 4 ओवर के कोटे में 29 रन देते हुए 2 विकेट चटकाए। अनुभवी लेग स्पिनर राशिद खान ने 19 रन देते हुए 2 विकेट अपने नाम किए। भुवनेश्वर ने पूरे किए अपने 350 टी-20 विकेट भुवनेश्वर ने अपने 4 ओवर में 28 रन देते हुए 3 विकेट लिए। इस बीच उन्होंने अपने टी-20 करियर के 350 विकेट पूरे किए। GT के सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन उनका 350वां शिकार बने। क्रिकइंफो के अनुसार, टी-20 विकेटों के मामले में भारतीयों में भुवनेश्वर सिर्फ युजवेंद्र चहल से पीछे हैं। चहल 391 विकेटों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर हैं। IPL 2026 में भुवनेश्वर अब तक 17 विकेट ले चुके हैं।  

UP में गंगा एक्सप्रेसवे से आगे, 10 और सुपर हाईवे का निर्माण, जुड़ेंगे विंध्य, चित्रकूट और नोएडा

लखनऊ  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया. हरदोई में हुए इस लोकार्पण कार्यक्रम के बाद प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर हो गई है. यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों जैसे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं और प्रयागराज के बीच पहुंच काफी आसान हो गई है।  पीएम मोदी ने इस एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के दौरान कहा कि आधुनिक प्रगति के इस दौर में उनके समीप से गुजरता यह एक्सप्रेस-वे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा. अब कुछ ही घंटों में आप प्रयागराज के संगम पहुंच सकते हैं और काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करके वापस आ सकते हैं. इसी के साथ उन्होंने उत्तर प्रदेश में आगे की आने वाली एक्सप्रेस वे परियोजनाओं की भी जानकारी दे दी।  पीएम मोदी ने भविष्य के रोडमैप का जिक्र करते हुए कहा, देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे में शुमार, यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे 5 साल के भीतर बनकर तैयार हो गया है. उन्होंने कहा- एक ओर गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा हुआ है, तो इसके विस्तार पर भी काम चल रहा है. यह मेरठ से आगे बढ़कर हरिद्वार तक पहुंचेगा. इसके और बेहतर उपयोग के लिए फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण करके इसे अन्य एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा।  पीएम मोदी ने असल में बताया कि गंगा एक्सप्रेस वे के लोकार्पण के बाद केंद्र और प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश में 10 और एक्सप्रेस वे व लिंक एक्सप्रेस वे पर काम कर रही है.  इसमें कई छोटी दूरी के लिंक एक्सप्रेसवे भी हैं जो बड़े और प्रमुख एक्सप्रेस वे सीधे जुड़ेंगे और सुदूर गांवों तक को एक्सप्रेस वे से कनेक्ट करेंगे।  इन एक्सप्रेस वे के जरिए विंन्ध्याचल (मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी) को पूर्वांचल से, फर्रुखाबाद को पूर्वांचल एक्सप्रेस वे से, जेवर को गंगा एक्सप्रेस वे से, लखनऊ और कानपुर को आपस में कनेक्ट करते हुए और चित्रकूट को भी गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. इसके लिए 50 किमी तक के छोटे लिंक एक्सप्रेस वे बनाए जाने पर काम हो रहा है।  ये 10 एक्सप्रेस वे हैं, जिन पर काम जारी विंध्य एक्सप्रेसवे – 320 किमी मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे – 136 किमी झांसी लिंक एक्सप्रेसवे – 118 किमी विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे – 100 किमी फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी जेवर-गंगा लिंक एक्सप्रेसवे – 74 किमी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे – 64 किमी लखनऊ लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे – 50 किमी चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे – 15.17 किमी बता दें कि उत्तर प्रदेश में अभी सात एक्सप्रेस वे ऐसे हैं जो ऑपरेशल हैं. ये एक्सप्रेस वे प्रदेश में एक छोर से दूसरे छोर तक अलग-अलग दूरियों में कनेक्टिविटी के लिहाज से सुविधाजनक बने हैं।  यमुना एक्सप्रेसवे – 165 किमी (ग्रेटर नोएडा से आगरा) आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे – 302 किमी (आगरा से लखनऊ) पूर्वांचल एक्सप्रेसवे – 341 किमी (लखनऊ से गाजीपुर) गंगा एक्सप्रेसवे – 594 किमी (मेरठ से प्रयागराज) बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे – 296 किमी (चित्रकूट से इटावा) दिल्ली-Meerut एक्सप्रेसवे – 82 किमी (दिल्ली से मेरठ) गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे – 91 किमी (गोरखपुर से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे) बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा एक्सप्रेसवे से कई उभरते हुए क्षेत्रों में आवासीय और वाणिज्यिक रियल एस्टेट की मांग में भारी उछाल आने की उम्मीद है. इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के चालू होने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि यह माल और यात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा. सरकार को उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को जबरदस्त बढ़ावा देगा. इसके अलावा, यह एक्सप्रेसवे किसानों के लिए अपनी उपज को बड़ी मंडियों तक तेजी से पहुंचाने में सहायक होगा। 

राजनांदगांव में खेल सुविधाओं का विस्तार: 5 एकड़ भूमि पर खेल मैदान और क्रिकेट अकादमी, मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद

राजनांदगांव को मिली खेल विकास की बड़ी सौगात: आधुनिक खेल मैदान व क्रिकेट अकादमी के लिए 5 एकड़ भूमि आवंटित, राजनांदगांववासियों के साथ विस अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने जताया मुख्यमंत्री साय का  आभार युवाओं के सपनों को मिलेगा नया आसमान: कैबिनेट के ऐतिहासिक निर्णय से राजनांदगांव में खेल अधोसंरचना को बढ़ावा रायपुर  विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र के पश्चात राजनांदगांव के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी से उनके विधानसभा स्थित कक्ष में सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान हाल ही में आयोजित कैबिनेट बैठक में राजनांदगांव के खेल विकास को लेकर लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय पर विस्तार से चर्चा हुई। कैबिनेट द्वारा आधुनिक खेल मैदान एवं क्रिकेट अकादमी के निर्माण हेतु जिला क्रिकेट एसोसिएशन राजनांदगांव को सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा अंतर्गत दर्ज भूमि में से 5 एकड़ भूमि रियायती दर पर आवंटित करने के निर्णय पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इस निर्णय को क्षेत्र के खेल प्रतिभाओं के लिए एक नई दिशा देने वाला कदम बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की। इस पहल से न केवल क्षेत्र में खेल अधोसंरचना सुदृढ़ होगी, बल्कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के बेहतर अवसर भी प्राप्त होंगे।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का आदेश, AAP बोली- ‘हम भुगतने को तैयार हैं

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) इन दिनों जहां एक तरफ पार्टी में टूट के संकट से जूझ रही है तो दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेता अदालती लड़ाई में भी उलझे हैं। खुद पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ बहिष्कार वाला सत्याग्रह छेड़ दिया है, जिसमें अब उनके अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक भी शामिल हो गए हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में बुधवार को इन नेताओं की ओर से ना तो कोई वकील पेश हुआ और ना ही इनकी ओर से कोई जवाब दिया गया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर से दिए गए ‘अंतिम मौके’ पर 'आप' ने एक बार फिर अपना रुख जाहिर कर दिया है। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में 'सत्याग्रह' जारी रखने की बात कहते हुए कहा कि परिणाम भुगतने को तैयार हैं और सबकुछ सोचकर फैसला लिया गया है कि जहां न्याय की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। अनुराग ने कहा, 'मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल जी की तरफ से, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की तरफ से साफ कह दिया गया है कि वह इन कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। यह सत्याग्रह है हम लोगों का।' परिणाम भुगतने को तैयार, सोचकर लिया फैसला: केजरीवाल आप नेता ने कहा कि कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे पर अभी यह साफ है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में तीनों ही नेता अपना केस नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा, 'सत्याग्रह इसलिए कि हमने कानूनी प्रक्रिया अपनाई, रिक्यूजल के प्रोसेस में गए और सबकुछ किया। इसके बाद दो फैक्ट्स को मानते हुए जज कहती हैं कि मैं ही इस केस को सुनूंगी तो उनके सामने जाने का क्या फायदा, जब हमको पता है कि हमें इंसाफ मिलेगा या नहीं मिलेगा। सत्याग्रह जारी है। जब राजघाट गए थे तो इस प्रण को दृठ करते हुए कि दुष्परिणाम के लिए तैयार हैं। सारी चीजों को सोचकर फैसला लिया है। जहां न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। जो भी कानूनी विकल्प होंगे उन्हें अपनाएंगे। लेकिन अभी तक स्पष्ट है कि ना तीनों ही नेता जाएंगे और ना ही वकील के माध्यम से पक्ष रखेंगे।' जज ने दिया आखिरी मौका आप के नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के सामने सुनवाई का बहिष्कार किया है। हालांकि, जज ने उन्हें अपना जवाब दाखिल करने का एक अंतिम मौका दिया है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि 'हम रिकॉर्ड मंगवाएंगे और सोमवार से सुनवाई शुरू करेंगे' और निर्देश दिया कि रिकॉर्ड कल तक मंगवा लिया जाए। अदालत ने यह भी गौर किया कि कई पक्षों ने अपने-अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं लेकिन बरी किए गए कुछ आरोपियों ने अब तक ऐसा नहीं किया है। अदालत ने कहा, '(अदालत) उन्हें जवाब दाखिल करने का एक और आखिरी मौका देगी। वे शनिवार तक जवाब दाखिल कर दें।' जस्टिस शर्मा ने खुद को अलग करने से किया इनकार, केजरीवाल का बहिष्कार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा शर्मा ने 20 अप्रैल को इस मामले से खुद को अलग करने संबंधी केजरीवाल और सिसोदिया की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद आप नेताओं ने खुला पत्र लिखकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे। केजरीवाल समेत अन्य आप नेताओं ने जस्टिस पर हितों के टकराव समेत कुछ आरोप लगाए हैं और आशंका जाहिर की है कि उनकी अदालत में न्याय नहीं मिल पाएगा।

एमपी में इस तारीख को ‘प्री-मानसून’ की एंट्री, अगले 72 घंटे आंधी और बारिश का अलर्ट

ग्वालियर बीते एक सप्ताह से झुलसा रही गर्मी के बीच मौसम ने राहत की ठंडी सांस दी। हल्के बादलों और धूल भरी हवा के असर से सूरज की तपिश फीकी पड़ गई और अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो सामान्य से 1.9 डिग्री कम रहा। लंबे समय बाद पारा 40 डिग्री से नीचे आने से दिन में गर्मी का असर कमजोर पड़ा और लोगों ने राहत महसूस की। सुबह से आसमान में बादलों की आवाजाही और बदली हवा ने मौसम का मिजाज बदल दिया। राजस्थान से आने वाली गर्म हवाओं पर ब्रेक लगने से लू जैसे हालात नहीं बने। भीषण गर्मी से मिलेगी राहत पश्चिमी हवा का रुख उत्तर की ओर मुडऩे और अरब सागर से नमी आने से शहर के मौसम में नरमी घुल गई। न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत में बने चक्रवातीय घेरे के असर से अगले तीन दिन आंधी और तेज बारिश की संभावना बनी हुई है।  यदि यह सिस्टम सक्रिय रहा तो मई की शुरुआत राहतभरी हो सकती है। दोपहर में तापमान 38.4 डिग्री तक पहुंचा, लेकिन तपिश चुभन नहीं बन सकी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि नमी और बादलों की मौजूदगी से फिलहाल भीषण गर्मी से कुछ राहत बनी रह सकती है। रीवा में हुई तेज बारिश प्रदेश में रीवा शहर के मौसम में बड़ा बदलाव आया है। सुबह से ठंड हवाओं के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। भीषण गर्मी के बीच ठंडक ने दी बड़ी राहत। इसी सप्ताह रीवा में तापमान 44.5 डिग्री तक पहुंच गया था लेकिन बारिश और ठंड हवाओं के कारण इसमें तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। आगे भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। सीधी में भी हुई बारिश सीधी में भी भीषण गर्मी के बीच अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। कुछ ही मिनटों में आए अंधड़ ने मौसम बदल दिया। जिसके बाद साथ झमाझम बारिश शुरु हो गई। लगातार चल रही रिमझिम बारिश होने के कारण लोगों को ठंड से राहत मिल गई। कब आएगा प्री मानसून जानकारी के लिए बता दें कि मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि 16 जून के आसपास प्रदेश में प्री-मानसून सक्रिय हो जाएगा, जिसके बाद कई जिलों में झमाझम बारिश की संभावना है। पिछले कुछ हफ्तों से गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, लेकिन अब एमपी के कई जिलों में मौसम में बड़ा बदलाव आने जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और सागर संभाग में प्री-मानसून की बौछारें सबसे पहले पहुंचेंगी। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश के आसार हैं। धीरे-धीरे यह असर पूरे प्रदेश में दिखाई देगा।  

पाकिस्तान की हालत हुई दयनीय, सऊदी मदद भी नाकाम, ईरान युद्ध ने किया बर्बाद

करांची  अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध की वजह से पाकिस्तान पर बड़ा असर दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में खुद ये बात कही है और चेतावनी दी है कि महंगे होते तेल और क्षेत्रीय अस्थिरता ने देश की आर्थिक हालत पतली कर दी है. कैबिनेट बैठक में उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले पाकिस्तान का साप्ताहिक तेल बिल करीब 300 मिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 800 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है. ऐसे में हालात पर नजर रखने के लिए सरकार ने एक टास्क फोर्स भी बनाई है. आपको बता दें कि पाकिस्तान इस वक्त महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर देख रहा है और तेल-गैस के लिए यहां त्राहिमाम मचा हुआ है।  शहबाज शरीफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पिछले दो वर्षों में पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति को गंभीर नुकसान पहुंचाया है.पाकिस्तान महंगाई की मार तो झेल ही रहा है, लेकिन शांति बनाने में भी वो सक्रिय है. शहबाज शरीफ ने बताया कि इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराई गई, जो 21 घंटे तक चली. इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता हो ही नहीं पाई. फिलहाल संघर्ष विराम बना हुआ है और पाकिस्तान किसी भी तरह से वार्ता को फिर से शुरू करना चाहता है।  तेल के बढ़ते दाम ने रुलाया प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें फिर आसमान छू रही हैं, इसलिए नए दाम तय करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से हालात पर काबू पाने की कोशिश जारी है. इस बीच उन्होंने पेट्रोलियम मंत्री के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी ओर से उठाए गए कदमों के कारण पाकिस्तान में स्थिति अन्य देशों की तुलना में संतोषजनक है और कहीं भी लंबी कतारें नहीं हैं. हालांकि युद्ध से पहले और बाद की तुलना में 500 मिलियन डॉलर का उछाल आया है, जो अर्थव्यवस्था को की रीढ़ तोड़ रहा है. सरकार मितव्ययिता और बचत के जरिए हालात संभालने की कोशिश कर रही है, इसके लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई गई है. सरकारी उपायों के चलते ईंधन की खपत में काफी कमी आई है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी, लेकिन युद्ध के कारण प्रगति को नुकसान पहुंचा है।  ईरान-अमेरिका युद्ध में पाकिस्तान कर रहा मध्यस्थता     पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और तेल संकट के बीच इस पहल को काफी अहम माना जा रहा है, हालांकि ये कुछ खास परिणाम नहीं दे पाई है।      पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू कराने की कोशिश की है. जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई, जिसमें युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की गई. फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष विराम बना हुआ है, जिसे बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।      पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था से परेशान है और शांति चाहता है और दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए खूब उठापटक कर रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री के साथ संपर्क में रहकर आगे की रणनीति पर काम किया जा रहा है।   

UAE का OPEC से अलगााव, पश्चिमी एशिया की जियोपॉलिटिक्स में आया बड़ा बदलाव

नई दिल्ली फारस की खाड़ी की चमकती सतह पर सब कुछ हमेशा शांत दिखता है- ऊपर से. लेकिन उसी पानी के नीचे कई परतों में तनाव, शक और रणनीतिक करंट बहते रहते हैं. संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. बाहर से यह दुनिया का सबसे चमकदार बिजनेस हब लगता है, लेकिन इसके भीतर एक बड़ा फैसला पक रहा था- OPEC (तेल निर्यातक देशों का संगठन) से बाहर निकलने का।  पहली नजर में यह फैसला एक छोटे से विवाद जैसा लगता है कि, UAE पांच मिलियन बैरल रोज़ तेल बेचना चाहता था, जबकि उसे करीब साढ़े तीन मिलियन बैरल का कोटा दिया गया था. लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है, खत्म नहीं. यह डेढ़ मिलियन बैरल का झगड़ा नहीं, बल्कि दशकों पुरानी रीजनल लीडरशिप को चुनौती देने का एलान है. जिसमें बताया गया है कि यूएई महज कोई छोटा-सा खाड़ी देश नहीं, बल्कि ग्लोबल पावर सेंटर है।  UAE का फैसला, अमेरिकी चाहत भी! अबू धाबी में जब OPEC से बाहर होने का फैसला लिया जा रहा था, तब इसकी गूंज सिर्फ खाड़ी तक सीमित नहीं थी. वॉशिंगटन भी इसे ध्यान से देख रहा था. अमेरिका लंबे समय से OPEC को एक “कार्टेल” मानता रहा है. एक ऐसा समूह जो तेल की कीमतों को अपने हिसाब से नियंत्रित करता है और कई बार रूस जैसे देशों के साथ मिलकर ग्लोबल ऑयल मार्केट को प्रभावित करता है।  ऐसे में UAE का OPEC से बाहर निकलना अमेरिका के लिए एक रणनीतिक मौका है. इससे OPEC की सामूहिक ताकत कमजोर होगी, अरब-रूस की तेल साझेदारी में दरार आएगी और तेल को “पॉलिटिकल वेपन” की तरह इस्तेमाल करने की क्षमता घटेगी. इसलिए भले ही यह फैसला UAE का हो, लेकिन इसकी गूंज अमेरिकी विदेश नीति की जीत के तौर पर भी सुनाई देती है।  विशेषज्ञों का मानना है कि यूएई के इस बड़े कदम के पीछे अमेरिका के साथ हुआ एक खास समझौता भी है, जिसे 'डॉलर-दिरहम स्वैप एग्रीमेंट' कहा जा रहा है. आसान शब्दों में कहें तो इस समझौते के तहत अमेरिका ने यूएई को जरूरत पड़ने पर सीधे और तुरंत अमेरिकी डॉलर मुहैया कराने की गारंटी दी है. जब ईरान के साथ युद्ध जैसे हालात बने, तो यूएई की मुद्रा 'दिरहम' पर खतरा मंडराने लगा था. ऐसे में अमेरिका के साथ हुए इस स्वैप डील ने यूएई की तिजोरी को एक सुरक्षा कवच दे दिया. अभी तक यूएई ओपेक के कड़े नियमों से बंधा था, जिसकी वजह से वह अपनी मर्जी से तेल उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहा था. अमेरिका से मिली 'डॉलर की गारंटी' ने यूएई को यह भरोसा दिलाया कि अगर वह ओपेक से अलग होता है और तेल बाजार में कोई उतार-चढ़ाव आता है, तो भी उसकी अर्थव्यवस्था नहीं डगमगाएगी. यदि यूएई की करेंसी डॉलर के समकक्ष रहती है, तो इससे वहां बिजनेस करने वालों को भी भरोसा रहेगा. इसी भरोसे के दम पर यूएई ने ओपेक की बंदिशों को अलविदा कह दिया और अपनी स्वतंत्र आर्थिक राह चुन ली।  ’UAE एप’ का हैंग होना UAE को अगर आप सिर्फ एक देश समझते हैं, तो आप उसकी असली ताकत को मिस कर रहे हैं. यह एक “एप” है- एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां दुनिया के कारोबार बिना ज्यादा सवालों के चलते हैं।  ईरान पर प्रतिबंध लगे, तो उसका व्यापार यहीं से घूमकर दुनिया तक पहुंचा. भारत और पाकिस्तान के बीच कई बिजनेस डील्स UAE के रास्ते पूरी होती रहीं. यहां तक कि प्रतिबंधित रूसी तेल भी “शैडो टैंकर” के जरिए यहीं से बाजार तक पहुंचा।  दुबई और अबू धाबी ने खुद को न्यूट्रल, स्थिर और सुरक्षित हब के रूप में स्थापित किया था. यही वजह थी कि यूरोप और अमेरिका की बड़ी कंपनियां यहां से ऑपरेट करती थीं. रियल एस्टेट बूम पर था, टूरिज्म चरम पर था और UAE एक “परफेक्ट बिजनेस मशीन” बन चुका था।  लेकिन फिर ईरान के साथ संघर्ष ने इस मशीन में झटका दे दिया. हमलों ने सिर्फ तेल ठिकानों को नहीं, बल्कि उस भरोसे को भी चोट पहुंचाई जिस पर UAE की पूरी ब्रांडिंग टिकी थी. अचानक कॉर्पोरेट्स ने अपने विकल्प तलाशने शुरू कर दिए-सिंगापुर, हांगकांग और कुछ मामलों में यूरोप वापसी।  जो UAE खुद को न्यूट्रल बताता था, वह अब अमेरिकी-इजरायली खेमे में दिखने लगा. और यहीं से उसकी सबसे बड़ी चुनौती शुरू हुई-“क्या वह अब भी उतना ही सुरक्षित और स्थिर है?” सऊदी विजन 2030 का पिछड़ना इस कहानी में एक और किरदार है- सऊदी अरब. कभी UAE का सबसे करीबी सहयोगी, अब उसका सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी।  सऊदी अरब का पूरा दांव उसके महत्वाकांक्षी ‘विजन 2030’ पर लगा है. इस प्रोजेक्ट को फंड करने के लिए उसे तेल की ऊंची कीमतें चाहिए. इसलिए वह उत्पादन कम रखकर कीमतें ऊपर बनाए रखने की रणनीति पर चलता है।  दूसरी ओर UAE का मॉडल अलग है. उसने अपनी इकोनॉमी को डायवर्सिफाई किया हुआ है. प्रोडक्शन कॉस्ट यहां बेहद कम है, और उसने 2030 तक 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता हासिल करने के लिए 122 बिलियन डॉलर से ज्यादा निवेश किया है. लेकिन OPEC के कोटे उसे 2.6 से 3.1 मिलियन बैरल के बीच सीमित रखते रहे।  अबू धाबी के लिए यह “अंडरग्राउंड पड़ा तेल” एक जोखिम है-क्योंकि 2040 तक फॉसिल फ्यूल की डिमांड घटने की आशंका है. यानी अगर अभी नहीं बेचा, तो बाद में शायद बेचना ही संभव न हो. यही सोच सऊदी और UAE के बीच की दूरी को टकराव में बदल देती है।  यमन, सोमालीलैंड में बिल्डअप तेल का विवाद तो सिर्फ एक हिस्सा है. असली दरार कई मोर्चों पर एक साथ बनी. यमन में UAE ने सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल का समर्थन किया-एक अलगाववादी गुट, जो सऊदी के सहयोगियों के खिलाफ खड़ा था. हालात इतने बिगड़े कि सऊदी अरब ने UAE समर्थित ठिकानों और सैन्य संसाधनों पर एयरस्ट्राइक तक कर दी, खासकर मुकल्ला पोर्ट के आसपास।  उधर सोमालीलैंड को लेकर भी तनाव बढ़ा. जब इजरायल ने उसे मान्यता दी, तो सऊदी को यह कदम अस्थिरता फैलाने वाला लगा-और उसे UAE की भूमिका पर भी शक हुआ।  इसके बाद दोनों देशों के बीच दो महीने तक सोशल मीडिया, कूटनीतिक चैनलों और वॉशिंगटन में लॉबिंग के जरिए आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।  ईरान वॉर में सऊदी ‘मांडवाली’ फिर … Read more

गुजारा-भत्ता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता’

ग्वालियर  शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है। मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।  दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह     कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक 'अकुशल श्रमिक' के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।     पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है। क्या होता है गुजारा भत्ता जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है। ये भी जानें -मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है। -यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है। -यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।