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पंजाब में मजदूरों की सैलरी में बढ़ोतरी, सीएम भगवंत मान ने झटके में किया ऐलान

चंडीगढ़  पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का ऐतिहासिक ऐलान किया है. सीएम मान के अनुसार यह वृद्धि सरकारी और गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों के सभी मजदूरों पर समान रूप से लागू होगी. विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब में 13 साल के लंबे अंतराल के बाद न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया गया है. उन्होंने इसे राज्य के मेहनतकश वर्ग की आर्थिक मजबूती की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया. इस फैसले से प्रदेश के लाखों अकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में सीधा इजाफा होगा जिससे उन्हें महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।  पंजाब न्यूनतम मजदूरी वृद्धि · 15% की वृद्धि: मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के सभी श्रेणी के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।  · व्यापक कवरेज: यह फैसला सरकारी और गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों के मजदूरों पर समान रूप से लागू होगा।  · 13 साल का अंतराल: राज्य में न्यूनतम मजदूरी में यह संशोधन पूरे 13 वर्षों के लंबे समय के बाद किया गया है।  · श्रमिकों को लाभ: इस क्रांतिकारी कदम से प्रदेश के लाखों अकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में सीधा इजाफा होगा।  · आर्थिक राहत: मुख्यमंत्री ने इसे मेहनतकश वर्ग को महंगाई के दौर में आर्थिक मजबूती देने वाला कदम बताया है।  मजदूरों की लंबे समय से मांग हुई पूरी यह फैसला पंजाब की अर्थव्यवस्था और श्रम शक्ति के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण है: 1. परचेजिंग पावर में वृद्धि: वेतन में 15% की बढ़ोतरी से निचले स्तर के श्रमिकों के हाथ में अधिक पैसा आएगा, जिससे बाजार में मांग बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।  2. महंगाई से लड़ने में सहायक: वर्तमान आर्थिक स्थिति में जहां जीवनयापन की लागत बढ़ रही है, यह वृद्धि श्रमिकों को बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मदद करेगी।  3. श्रमिकों का पलायन रोकना: मजदूरी में सुधार होने से पंजाब पड़ोसी राज्यों के मुकाबले श्रमिकों के लिए अधिक आकर्षक बनेगा, जिससे लेबर शॉर्टेज की समस्या कम हो सकती है।  4. लंबे समय से लंबित सुधार: 13 साल तक मजदूरी न बढ़ाना एक बड़ा अंतराल था; यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार अब श्रम कल्याण को प्राथमिकता दे रही है।  सवाल-जवाब पंजाब में न्यूनतम मजदूरी में कितने प्रतिशत की वृद्धि की गई है? मुख्यमंत्री भगवंत मान ने न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. क्या यह वृद्धि केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए है? नहीं, मुख्यमंत्री के अनुसार यह वृद्धि सरकारी और गैर-सरकारी (प्राइवेट) दोनों क्षेत्रों के सभी मजदूरों पर समान रूप से लागू होगी. पंजाब में पिछली बार न्यूनतम मजदूरी कब संशोधित हुई थी? मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि पंजाब में यह संशोधन 13 साल के लंबे अंतराल के बाद किया गया है. पंजाब में मजदूरों की सैलरी बढ़ने से किन श्रेणियों के श्रमिकों को लाभ होगा? इस फैसले से प्रदेश के लाखों अकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में सीधा इजाफा होगा. इस कदम के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के मेहनतकश वर्ग को आर्थिक रूप से मजबूत करना और उन्हें महंगाई के दौर में बड़ी राहत प्रदान करना है.

एमपी में 17 जिलों में बारिश-ओले का अलर्ट, भोपाल में आंधी से कई इलाकों में पेड़ गिरे; 4 मई तक जारी रहेगा मौसम

भोपाल मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है. जहां एक तरफ कई जिलों में तापमान 42 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने लोगों को राहत के साथ परेशानी भी दी है. मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में राज्य के 17 जिलों में तेज आंधी, गरज-चमक और ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है. इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ और ट्रफ लाइन की सक्रियता को वजह माना जा रहा है, जो मध्य भारत के मौसम को तेजी से प्रभावित कर रही है. मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर न रहें. पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें और यात्रा करते समय सावधानी बरतें. किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है।  मौसम के इस दोहरे प्रभाव ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है. एक तरफ लू जैसे हालात हैं तो दूसरी ओर अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, जिससे किसानों, यात्रियों और शहरी जीवन पर मिश्रित असर पड़ेगा. प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ाते हुए लोगों को सुरक्षित रहने और मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है.अगले 2 से 3 दिनों तक प्रदेश में यही स्थिति बनी रह सकती है. कहीं गर्मी तो कहीं आंधी-बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. इसके बाद तापमान में धीरे-धीरे स्थिरता आने की संभावना जताई गई है।  इन 17 जिलों में अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट जिलों में तेज आंधी और ओलावृष्टि की संभावना है. इन इलाकों में 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे बिजली गिरने और पेड़ गिरने का खतरा भी बना रहेगा।  इन जिलों में भीषण गर्मी का असर राजधानी भोपाल समेत रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, रीवा, सतना, मैहर, पन्ना, कटनी, दमोह, जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में गर्मी का प्रकोप जारी है. यहां दिन का तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री ज्यादा रिकॉर्ड किया जा रहा है।  उमरिया-मुरैना में ओले भी गिरे। IMD (मौसम केंद्र) ने शुक्रवार को ग्वालियर समेत 17 जिलों में अलर्ट जारी किया है। गुरुवार को सुबह से रात तक बारिश का दौर बना रहा।भोपाल और ग्वालियर के साथ सतना, श्योपुर, टीकमगढ़, रायसेन, बालाघाट, छतरपुर, मुरैना, सागर, पन्ना, मैहर, उमरिया, रीवा में भी कहीं तेज आंधी-बारिश तो कहीं ओलावृष्टि का दौर जारी रहा। भोपाल में तेज आंधी चलने से कोलार रोड समेत कई इलाकों में पेड़ भी उखड़ गए। देर रात तक प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला रहा। आज इन जिलों में बारिश के आसार शुक्रवार को जिन जिलों में आंधी-बारिश का अनुमान है, उनमें ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी और बालाघाट शामिल हैं। दूसरी ओर, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, रीवा, मऊगंज, सतना, मैहर, पन्ना, कटनी, दमोह, जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि, शाम को कुछ जिलों में तेज आंधी भी चल सकती है। क्यों बदला मौसम का मिजाज मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और मध्य भारत में बनी ट्रफ लाइन के कारण यह बदलाव हो रहा है. नमी और गर्म हवाओं के टकराव से गरज-चमक और ओलावृष्टि की स्थिति बन रही है. यही कारण है कि एक ही समय में अलग-अलग जिलों में अलग मौसम देखने को मिल रहा है।  किसानों और आम लोगों पर असर इस मौसम का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है. ओलावृष्टि से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है, वहीं तेज आंधी से बिजली और यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. शहरी क्षेत्रों में भी अचानक बारिश से ट्रैफिक और जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।   

धमतरी की मंदरौद ग्राम पंचायत ने पंचायत विकास सूचकांक में प्रदेश में मारी बाजी

​धमतरी का डंका: पंचायत विकास सूचकांक में मंदरौद ग्राम पंचायत प्रदेश में अव्वल ​रायपुर       ​छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण के क्षेत्र में धमतरी जिले ने एक नया इतिहास रचा है। राज्य सरकार द्वारा जारी पंचायत विकास सूचकांक (PDI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, धमतरी जिले की ग्राम पंचायतों ने शानदार प्रदर्शन किया है। इसमें सबसे बड़ी उपलब्धि कुरूद विकासखंड की मंदरौद ग्राम पंचायत के नाम रही है, जिसने 'गरीबी मुक्त एवं आजीविका संवर्धन' (थीम-1) में 94.4 अंक हासिल कर पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। ​सतत विकास के मॉडर्न मॉडल के रूप में उभरा धमतरी     ​PDI रैंकिंग में केवल मंदरौद ही नहीं, बल्कि जिले की अन्य पंचायतों ने भी अपनी छाप छोड़ी है। 'स्वस्थ पंचायत', 'जल संपन्न पंचायत' और 'स्वच्छ एवं हरित पंचायत' जैसी श्रेणियों में जिले की कई पंचायतों ने A+ और A ग्रेड प्राप्त कर यह साबित किया है कि यहाँ शासन की योजनाएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर मजबूती से उतर रही हैं। ​ "पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा"     ​इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर राज्य के नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन ने हर्ष व्यक्त किया है।उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री ​श्री विजय शर्मा  मंत्री ने मंदरौद पंचायत को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित है। मंदरौद की सफलता प्रदेश की अन्य पंचायतों के लिए एक प्रेरणास्रोत और नवाचार का मॉडल बनेगी।विधायक ​श्री अजय चंद्राकर ने इस जीत का श्रेय सामूहिक प्रयासों को देते हुए कहा कि बयह स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत अमले और जागरूक ग्रामीणों की मेहनत का फल है। धमतरी विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। कलेक्टर ने इस उपलब्धि को पारदर्शी प्रशासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है, और यह रैंकिंग उसी दिशा में एक मील का पत्थर है। ​सफलता के पीछे के मुख्य कारक     ​मंदरौद और धमतरी की अन्य पंचायतों की इस सफलता के पीछे तीन मुख्य स्तंभ रहे हैं। सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना। विकास कार्यों में ग्रामीणों की सक्रिय जनभागीदारी सुनिश्चित करना और ​आजीविका पर फोकस करते हुए गरीबी उन्मूलन के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के साधनों का संवर्धन करना रहा।​धमतरी जिले की यह गौरवपूर्ण उपलब्धि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सशक्तिकरण और समग्र विकास की एक नई इबारत लिख रही है।

सुशासन तिहार: गांवों में शिकायतों का खात्मा, अब हर समस्या का होगा समाधान

सुशासन तिहार: गांवों में खत्म हो रहा शिकायतों का दौर  बलौदाबाजार जिले में जनसमस्या निवारण का महाभियान शुरू 10 जून तक चलेंगे शिविर,ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में कुल 49 स्थानों पर पहुंचेंगी 'समाधान की चौपाल पहले शिविर में उमड़ा जनसैलाब, राजस्व मंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश- 'समय सीमा में हो हर आवेदन का निराकरण' ​रायपुर        छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के साथ ही 'सुशासन' को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में 'सुशासन तिहार' के जरिए प्रशासन सीधे ग्रामीणों के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। शुक्रवार को ग्राम रिसदा से शुरू हुए इस अभियान ने पहले ही दिन सफलता के नए मानक स्थापित किए हैं। ​मौके पर न्याय: 47% आवेदकों को तत्काल राहत     इस अवसर पर राजस्व मंत्री ने  कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति के व्यक्ति को मुस्कुराते हुए देखना है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविर के बाद भी आवेदकों से फीडबैक लिया जाए कि वे समाधान से संतुष्ट हैं या नहीं।     ​रिसदा के हाई स्कूल प्रांगण में लगे शिविर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी संवेदनशीलता रही। शिविर में आए 573 आवेदनों में से लगभग आधे  का निराकरण राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा की मौजूदगी में अधिकारियों ने तुरंत किया। यह इस बात का प्रमाण है कि सरकारी मशीनरी अब फाइलों को अटकाने के बजाय सुलझाने पर ध्यान दे रही है। जिन आवेदनों में तकनीकी पेच हैं, उनके लिए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने समय-सीमा (Timeline) निर्धारित कर दी है। ​विकास का 'वन-स्टॉप' डेस्टिनेशन बने विभागीय स्टॉल     ​शिविर में केवल शिकायतें ही नहीं सुनी गईं, बल्कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का 'डिलीवरी सेंटर' भी बनाया गया। पुलिस विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा हेतु हेलमेट वितरण और भारत माता वाहिनी को संसाधन भेंट किए गए। इसी तरह युवाओं को कौशल विकास का सम्मान पत्र और टीबी मुक्त गांव के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सामाजिक सहभागिता को सराहा गया। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर डिजिटल एक्स-रे और तत्काल आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा ने बुजुर्गों और मरीजों को बड़ी राहत दी। 10 जून तक हर घर तक पहुंच         ​कलेक्टर  ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिवसीय आयोजन नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान है। जिले के 30 ग्रामीण केंद्रों और 19 नगरीय निकायों में सुशासन तिहार के जरिए प्रत्येक नागरिक की पहुंच प्रशासन तक सुनिश्चित की जाएगी। ​       बलौदाबाजार से शुरू हुआ यह 'सुशासन का रथ' अब जिले के अन्य हिस्सों की ओर बढ़ रहा है। रिसदा शिविर की सफलता ने यह साफ कर दिया है कि यदि प्रशासन जन-प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बिठाकर गांव की चौपाल तक पहुंचे, तो बड़ी से बड़ी समस्याओं का समाधान चुटकियों में संभव है।

न्याय को सरल बनाने सर्वाेच्च न्यायालय की पहल पर चलाया जा रहा समाधान समारोह 2026

न्याय को सरल बनाने सर्वाेच्च न्यायालय की पहल पर चलाया जा रहा समाधान समारोह 2026 सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों का होगा सरल समाधान रायपुर  न्याय को आमजन के लिए सरल, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में भारत का सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026 की अभिनव पहल शुरू की गई है। यह राष्ट्रीय स्तर का अभियान 21 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो चुका है, जिसका समापन 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगा।        इस विशेष लोक अदालत का आयोजन सर्वाेच्च न्यायालय परिसर में किया जाएगा, जिसमें सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों का आपसी सहमति एवं सुलह के माध्यम से निराकरण किया जाएगा। यह पहल न्यायिक प्रक्रिया को अधिक मानवीय, समयबद्ध और कम खर्चीला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।        छत्तीसगढ़ में इस अभियान के अंतर्गत निर्देशानुसार सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला एवं जनपद स्तर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत संचालित मध्यस्थता केंद्रों में किया जा रहा है। इन केंद्रों में प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी पक्षकारों को आपसी सहमति से समाधान तक पहुंचने में सहयोग प्रदान कर रहे हैं।          समाधान समारोह के तहत सुलह-वार्ताएं 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारंभ हो चुकी हैं, जिनमें पक्षकार व्यक्तिगत रूप से या वर्चुअल माध्यम से भी भाग ले सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों की संख्या को कम करना तथा विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए वैकल्पिक और सरल मंच उपलब्ध कराना है। सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा अधिवक्ताओं, वादकारियों एवं संबंधित सभी पक्षों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया है। छत्तीसगढ़ के नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे इस अवसर का लाभ उठाते हुए अपने मामलों का समाधान आपसी सहमति से कराने का प्रयास करें।         समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) में अपने सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित मामलों को शामिल करने के लिए सर्वाेच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट  https://www.sci.gov.in⁠ पर उपलब्ध गूगल फॉर्म को 31 मई 2026 तक भरना होगा। यह प्रक्रिया सरल एवं सहज है, जिससे कोई भी इच्छुक पक्षकार अपने मामले को इस विशेष पहल में शामिल कर सकता है। इस संबंध में किसी सहायता एवं जानकारी हेतु वन स्‍टाप सेंटर (वार रूम) इन-चार्ज समाधान समारोह (स्‍पेशल लोक अदालत) के दूरभाष नं. 011-23115662, 011-23116464 अथवा सीआरपी निदेशक के दूरभाष नं. 011- 23115652, 011- 23116465 पर अथवा वन स्टॉप सेंटर कक्ष क्रमांक 806 एवं 808, बी ब्लॉक, अतिरिक्त भवन परिसर, सर्वोच्च न्यायालय दूरभाष नं. 011- 23116464 पर सम्पर्क किया जा सकता है। मेल आईडी – speciallokadalat2026@sci.nic.in पर मेल भी कर सकते हैं।

पहली बार ऑनलाइन जनगणना सुविधा शुरू, 15 मई तक खुद भर सकेंगे नागरिक डेटा

जयपुर  राजस्थान में आज यानी 1 मई 2026 से जनगणना 2027 के पहले चरण 'हाउस लिस्टिंग' की शुरुआत हो गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने जयपुर में सबसे पहले अपना स्व-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरकर इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया है. सीएम ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं. उन्होंने कहा, 'सटीक जानकारी ही सरकार की योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक पहुंचाने में मदद करेगी.' सीएम ने खुद ऑनलाइन फॉर्म भरकर यह संदेश भी दिया कि तकनीक के माध्यम से समय की बचत की जा सकती है. आज से प्रदेश में प्रारंभ हो रही जनगणना के प्रथम चरण ‘हाउस लिस्टिंग' प्रक्रिया के अंतर्गत, मैंने अपना स्वयं-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरा।  यह प्रक्रिया सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुँचाने तथा प्रदेश के समग्र विकास के लिए सटीक नीतियाँ… पहली बार घर बैठे खुद गणना करने की सुविधा इस बार की जनगणना बेहद खास है क्योंकि पहली बार नागरिकों को वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प दिया गया है. सभी नागरिक 1 मई से 15 मई के बीच http://se.census.gov.in पर जाकर अपनी डिटेल खुद भर सकते हैं. अगर आप खुद फॉर्म भरते हैं, तो जब कर्मचारी आपके घर आएंगे, तो आपको लंबी कागजी कार्यवाही नहीं करनी होगी, बस अपनी SE ID दिखानी होगी. 16 मई से 14 जून तक कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा वेरिफिकेशन और मकानों की लिस्टिंग करेंगे. तैयार रखें इन 33 सवालों के जवाब जनगणना कर्मचारी जब आपके घर पहुंचेंगे, तो वे आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे. इनमें प्रमुख हैं:- मकान का नंबर, फर्श, दीवार और छत किस सामग्री से बनी है? परिवार के मुखिया का नाम, जेंडर और क्या वे एससी/एसटी वर्ग से हैं? मकान अपना है या किराए का? परिवार के पास रहने के लिए कितने कमरे हैं? पीने के पानी और रोशनी का मुख्य स्रोत क्या है? शौचालय की सुविधा, गंदे पानी की निकासी और रसोईघर की क्या व्यवस्था है? खाना पकाने के लिए कौन सा ईंधन (LPG/PNG) इस्तेमाल होता है? घर में टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन, साइकिल, कार या बाइक जैसी कितनी सुविधाएं मौजूद हैं? परिवार मुख्य रूप से खाने में किस अनाज का इस्तेमाल करता है?

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता: राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्रार्थना सभा, पेयजल और पहनावे में बदलाव किए

जयपुर राजस्थान में आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली लू के बीच स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश का शिक्षा विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बुधवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी एक विशेष आदेश ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक पारा नीचे नहीं आता, तब तक स्कूलों को नई गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। अब भारी यूनिफॉर्म से आजादी इस नए आदेश के तहत सबसे बड़ी राहत बच्चों को उनके पहनावे में दी गई है। अब भीषण गर्मी में छात्रों को भारी-भरकम और गहरे रंग की स्कूल यूनिफॉर्म पहनने की मजबूरी नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनकर आने की अनुमति दें, ताकि गर्मी के कारण होने वाली घबराहट और हीटस्ट्रोक से बचा जा सके। आउटडोर गतिविधियों पर 'नो एंट्री' सूरज के तीखे तेवरों को देखते हुए स्कूलों में होने वाली तमाम आउटडोर एक्टिविटीज, खेलकूद और धूप में होने वाले कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब मैदानों में पीटीआई क्लास या खेल प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं की जाएंगी। क्लासरूम में होगी प्रार्थना सभा और पानी की सख्ती स्कूलों में हर सुबह होने वाली प्रार्थना सभा के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। अब असेंबली का समय कम कर दिया गया है और स्कूलों को हिदायत दी गई है कि प्रार्थना या तो किसी छायादार स्थान पर कराएं या फिर सीधे क्लासरूम के भीतर ही आयोजित की जाए। विभाग ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि छुट्टी के समय घर जाते वक्त बच्चों के पास ठंडे पानी की पर्याप्त उपलब्धता रहे। जल्दी छुट्टियों पर लगा विराम अभिभावकों और शिक्षकों के बीच जल्दी गर्मियों की छुट्टियों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने फिलहाल विराम लगा दिया है। मंत्री दिलावर ने स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही चलेंगे। उन्होंने इसके पीछे शैक्षणिक लक्ष्यों का तर्क देते हुए कहा, 'हमारा लक्ष्य है कि छुट्टियों से पहले 20% सिलेबस पूरा कर बच्चों का टेस्ट लिया जाए, ताकि वे अवकाश के दौरान उसका रिवीजन कर सकें।' प्रदेश में स्कूल की छुट्टियां 16 मई से 21 जून तक ही रहेंगी, जबकि कॉलेजों में 1 मई से ही अवकाश शुरू हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग भी 'हाई अलर्ट' पर गर्मी के इस संकट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी मैदान में उतर गया है। गुरुवार से शनिवार तक प्रदेश के सभी जिलों में विशेष स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं, जो अस्पतालों में लू से निपटने की तैयारियों और दवाओं के स्टॉक का निरीक्षण करेंगी। साथ ही, फूड सेफ्टी अधिकारी सार्वजनिक स्थानों और हॉस्टलों में खाने-पीने की गुणवत्ता की जांच करेंगे ताकि भीषण गर्मी में संक्रमण को रोका जा सके।

फेसबुक विज्ञापन से लखपति बनने का सपना बना जाल, ‘ट्रैक्टर नोट’ स्कैम का खुलासा

 अजमेर क्या आपके पास भी वह पुराना 5 रुपये वाला नोट है, जिसके पीछे ट्रैक्टर चलाता हुआ किसान बना है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए! जिसे आप अपनी 'किस्मत की चाबी' समझ रहे हैं, वही आपकी जमा-पूंजी साफ करने का जरिया बन सकता है. राजस्थान के अजमेर जिले में एक महिला के साथ ऐसा ही हुआ, जहां एक फेसबुक विज्ञापन ने उसे लखपति बनाने का सपना दिखाकर लाखों का चूना लगा दिया. फेसबुक पोस्ट ने दिखाया '48 लाख' का सपना मामला अजमेर के पॉश इलाके शास्त्री नगर का है. यहां रहने वाली एक महिला ने फेसबुक पर एक लुभावना विज्ञापन देखा. विज्ञापन में दावा किया गया था कि अगर किसी के पास 'ट्रैक्टर वाला' पुराना 5 रुपये का नोट है, तो उसके बदले उसे 48 लाख रुपये मिल सकते हैं. महिला इस विज्ञापन के झांसे में आ गई और दिए गए नंबर पर संपर्क किया. ठगों ने बुना बातों का जाल महिला ने जैसे ही संपर्क किया, ठगों ने खुद को एक बड़ी पुरानी मुद्रा (Antique Currency) खरीदने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताया. उन्होंने महिला का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड्स तक दिखाए. महिला को यकीन दिलाया गया कि उसका 5 रुपये का नोट वाकई 'दुर्लभ' है और उसे 48 लाख रुपये दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. किश्तों में पार किए 3.66 लाख रुपये ठगी का खेल तब शुरू हुआ जब ठगों ने 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर पैसे मांगना शुरू किया. महिला से कभी GST, कभी रजिस्ट्रेशन शुल्क, तो कभी फाइल चार्ज और ट्रैवलिंग चार्ज के नाम पर किश्तों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए. महिला को बार-बार आश्वासन दिया गया कि बस यह आखिरी चार्ज है, इसके बाद 48 लाख सीधे खाते में आ जाएंगे. लालच और उम्मीद में महिला पैसे भेजती रही. जब तक महिला को ठगी का अहसास हुआ, वह कुल 3 लाख 66 हजार रुपये ठगों के खातों में जमा कर चुकी थी. साइबर थाना जांच में जुटा जब महिला को न तो पैसे मिले और न ही प्रतिनिधि का फोन लगा, तब उसे ठगी का अहसास हुआ. पीड़िता ने अजमेर के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. डीवाईएसपी शमशेर खान ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है.

राजस्थान में 70,000 छात्रों का AI से एग्जाम एनालिसिस, अब ‘स्कोर कार्ड’ की जगह ‘स्किल्स कार्ड’

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर जिले में शिक्षा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. जिले के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई एक एआई (Artificial Intelligence) आधारित प्रायोगिक परियोजना ने छात्रों के मूल्यांकन और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है. अब शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए घंटों पसीना नहीं बहाना पड़ता, बल्कि एआई प्रणाली महज कुछ ही सेकंड में यह काम पूरा कर रही है. लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का 'सुपरफास्ट' मूल्यांकन 'योग्यता-आधारित मूल्यांकन और स्कूल रिपोर्टिंग प्रायोगिक परियोजना' के दूसरे चरण के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 6 से 9 तक के 70,000 से अधिक छात्रों का मूल्यांकन किया गया. इसमें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के 5 मुख्य विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) में कुल 3 लाख से अधिक टेस्ट पेपर जांचे गए. जहां पहले इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते थे, वहीं अब शिक्षकों के जरिए ऐप से स्कैन की गई कॉपियों का परिणाम मात्र 3 दिनों केअंदर विस्तार  के साथ तैयार हो जाता है. स्कोर कार्ड नहीं, अब 'स्किल्स कार्ड' की बारी इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसका सूक्ष्म विश्लेषण है. अधिकारियों ने कहा कि कुल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय, मूल्यांकन अब विशिष्ट दक्षताओं पर आधारित है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र सांख्यिकी में बेहतर है लेकिन भाषा की समझ में कमजोर है, तो रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख रहता है. रिपोर्ट कार्ड में छात्र के सुधार के लिए विषय-वार विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को सटीक दिशा मिलती है. प्रशासन का विजन, 1000 स्कूलों तक विस्तार मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रजनी शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जिले के सभी 15 ब्लॉक के 1,000 से अधिक स्कूलों में लागू है. इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में पहले चरण के रूप में जोधपुर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम के 54 सरकारी स्कूलों में की गई थी, जिसमें छठी से आठवीं कक्षा तक के 3,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया था. इस प्रक्रिया में शिक्षक एक विशेष ऐप के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करते हैं, जिसके बाद एआई प्रणाली उत्तरों का मूल्यांकन करती है.

‘नौवें बम’ मामले में सरवर और शाहबाज की स्टे अपील खारिज, जेल में रहेंगे उम्रकैद

 जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी. क्या है 'नौवें बम' का मामला? 13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी, और 185 लोग घायल हुए थे. पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था, जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी 'जिंदा बम' मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. 'जब 8 केस में बरी, तो यहां क्यों नहीं?' दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है. ऐसे में 'जिंदा बम' मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए. ई-मेल बना मुख्य सबूत राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं. धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. ई-मेल के जरिए धमाकों को 'सही' ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है. अदालत का फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा. इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.