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अमेरिका की एक बड़ी कंपनी का अंत, रातोंरात बंद होगी – ट्रंप भी नहीं कर पाए कुछ

वाशिंगटन कम बजट में फ्लाइट की सुविधा देने वाली अमेरिका की एक एयरलाइन कंपनी बंद होने की कगार पर आ गई है. आर्थिक तंगी से जूझ रही अमेरिकी एयरलाइन Spirit, सरकार से आवश्यक वित्तीय सहायता न मिलने के बाद बंद होने के कगार पर पहुंच गई।  राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप भी इसे बचाने के प्रयास में विफल रहे हैं. ट्रंप का कहना है कि उनकी सरकार ने बजट एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए टैक्‍सपेयर्स के पैसे से अधिग्रहण का 'अंतिम प्रस्ताव' दिया था, लेकिन समझौता नहीं हो पाने के कारण एयरलाइन के भविष्य को संदेह में डाल दिया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब कंपनी शटडाउन की तैयारियां की जा रही है. स्पिरिट एयरलाइंस या ट्रंप प्रशासन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह दो साल में दूसरी बार है, जब एयरलाइन दिवालियापन की कार्यवाई में फंसी है, लेकिन इस बाद ऑपरेशन बंद होने जा रहा है. ट्रंप ने पिछले सप्‍ताह एयरलाइन को फाइनेंशियल मदद देने का विचार किया था, लेकिन अब इस कंपनी आर्थिक मदद नहीं मिली है।  17,000 से ज्‍यादा नौकरियों पर संकट स्पिरिट एयरलाइन के वकील मार्शल ह्यूब्नर ने कहा कि एयरलाइन बंद होने से लगभग 17,000 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. इस कंपनी की स्थिति कोविड महामारी के बाद से ही खराब चल रही है. ऑपरेशनल कॉस्‍ट और कर्ज में भारी बढ़ोतरी के कारण कंपनी पर बोझ बढ़ता जा रहा है।  2020 से 2.5 अरब डॉलर से ज्‍यादा नुकसान  नवंबर 2024 में दिवालियापन से बचने के लिए चैप्टर 11 के तहत आवेदन करने तक, स्पिरिट को 2020 की शुरुआत से 2.5 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका था. कोर्ट के दस्‍तावेज के अनुसार, बजट एयरलाइन ने अगस्त 2025 में एक बार फिर दिवालियापन से सुरक्षा की मांग की, जब उसने बताया कि उस पर 8.1 बिलियन डॉलर का कर्ज और 8.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति है।  लगातार बढ़ रहीं ईंधन की कीमतें इस एयरलाइंस की आर्थिक तंगी की समस्‍या ऐसे समय में और भी ज्‍यादा हो गई हैं, जब ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. कच्‍चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाने के बाद से लगातार ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है. ऐसे में एयरलाइंस कंपनियों को घाटा हो रहा है. कई एयरलाइंस कंपनियों ने तो सरकार से ईंधन की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए गुहार भी लगाई हैं। 

22 हजार के बदले कमाए 3 लाख रुपए

रायपुर   छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती छोड़कर फूलों की खेती अपनाकर अपनी तकदीर बदल रहे हैं। उद्यानिकी विभाग और सरकारी योजनाओं की मदद से गेंदा, गुलाब जैसे फूलों की वैज्ञानिक खेती कर किसान कम लागत में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और उद्यानिकी विभाग से मार्गदर्शन मिलने के कारण किसान वैज्ञानिक पद्धति से अधिक उत्पादन ले रहे हैं। एक किसान आनंदराम सिदार की सफलता देखकर अब अन्य ग्रामीण भी परंपरागत खेती से आगे बढ़कर उद्यानिकी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।                परंपरागत खेती के दौर में जहाँ किसान अक्सर कम मुनाफे से परेशान रहते हैं, वहीं रायगढ़ जिले के लैलूंगा विकासखण्ड के एक छोटे से गाँव कोड़केल के किसान  आनंदराम सिदार ने नवाचार से समृद्धि की नई इबारत लिखी है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन की श्गेंदा क्षेत्र विस्तार योजनाश् का लाभ उठाकर आनंदराम ने अपनी आय में कई गुना वृद्धि की है। धान बनाम गेंदा- मुनाफे का बड़ा अंतर            आनंदराम सिदार पहले पारंपरिक धान की खेती पर निर्भर थे। वे 10 क्विंटल धान का उत्पादन कर मुश्किल से 31 हजार रुपए की कुल आय प्राप्त कर पाते थे, जिसमें से लागत काटकर उनके हाथ मात्र 22 हजार रुपए का लाभ आता था। लेकिन उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती शुरू की, जिससे उनकी आय का ग्राफ अचानक बदल गया। तकनीकी सहयोग और बंपर उत्पादन           वर्ष 2025-26 के दौरान उद्यानिकी विभाग ने उन्हें उन्नत बीज, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। आनंदराम की मेहनत और विभागीय सहयोग का नतीजा यह रहा कि उन्होंने कुल उत्पादन लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल बेचकर   3 लाख रुपए से अधिक की कुल आमदनी हासिल की। धान की तुलना में बेहतर रिटर्न और कम समय में अधिक आय प्राप्त किया। क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडल           सिदार की इस सफलता ने पूरे रायगढ़ जिले में गेंदा जैसी नगदी फसलों के प्रति अन्य किसानों का रुझान बढ़ा दिया है। अब क्षेत्र के कई किसान धान के स्थान पर फूलों की खेती को एक लाभकारी विकल्प के रूप में अपना रहे हैं। आनंदराम सिदार का कहना है कि शुरुआत में जोखिम लग रहा था, लेकिन उद्यानिकी विभाग के तकनीकी सहयोग और सही समय पर की गई देखरेख ने मेरी तकदीर बदल दी। आज मैं आत्मनिर्भर हूँ और अपने परिवार को बेहतर जीवन दे पा रहा हूँ। विभाग की सक्रिय पहल        रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय बागवानी मिशन की गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना से जुड़ने के बाद आनंदराम सिदार का जीवन की दिशा ही बदल गई। उद्यानिकी विभाग की सक्रियता से फूलों की खेती अब एक टिकाऊ और मुनाफे वाले व्यवसाय के रूप में उभर रही है। विभाग द्वारा लगातार किसानों को प्रशिक्षण और प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।

तीन दिन बारिश का कहर: प्री-मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई राज्यों में चेतावनी जारी

नई दिल्ली प्री-मानसून (Pre-Monsoon) ने जब से देश में दस्तक दी है, असर दिखा रहा है। देश के कई राज्यों में बादल बरस रहे हैं और यह सिलसिला बना हुआ है। मानसून (Monsoon) के 2025 सीज़न में देशभर में शानदार बारिश हुई और कई राज्यों में तो पिछले कई सालों से ज़्यादा बारिश हुई। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्सपर्ट्स ने पूर्वानुमान लगाया था कि 2026 में भी जोरदार बारिश होगी, लेकिन अल-नीनो के असर की भी संभावना बनी हुई है। इसी बीच अब देश में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) ने कई राज्यों में 3, 4 और 5 मई को भारी बारिश का अलर्ट (Heavy Rain Alert) जारी किया है। उत्तरपश्चिम भारत उत्तरपश्चिम भारत में प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई जगह भारी बारिश होगी। साथ ही कई जगह रिमझिम बारिश का भी अलर्ट है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है। दक्षिण भारत दक्षिण भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, माहे, यनम, कराईकल और रायलसीमा में जमकर बादल बरसेंगे। इस दौरान कई जगह 30-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है। पूर्वी और मध्य भारत पूर्वी और मध्य भारत में भी प्री-मानसून रफ्तार पकड़ेगा। ऐसे में मौसम विभाग ने 3, 4 और 5 मई को मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में कई जगह भारी बारिश तो कई जगह हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि का भी अलर्ट है। हवा की रफ्तार 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की संभावना है। उत्तरीपूर्व भारत उत्तरीपूर्व भारत में भी मौसम बदल गया है। ऐसे में मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है कि 3, 4 और 5 मई को असम, त्रिपुरा, मणिपुर, मिज़ोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में तेज़ बारिश होगी। इस दौरान कई जगह 50-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज़ हवा चलने, धूल भरी आंधी चलने और बिजली गरजने का भी अलर्ट है।

मतगणना से पहले EVM कहाँ रहती हैं? जानिए स्ट्रॉन्ग रूम और उसके सख्त प्रोटोकॉल

नई दिल्ली बंगाल, तमिलनाडु सहित 5 राज्यों के चुनाव अब खत्म हो चुके हैं। चुनाव परिणाम सोमवार 04 मई 2026 को जारी किये जाएंगे। इसके बाद तय होगा कि कौन उस राज्य का अगला मुख्यमंत्री होगा। साथ ही चुनाव खत्म होते ही कई लोगों के मन में यह सवाल होता है कि वोटिंग मशीनें आखिर जाती कहां हैं और उन्हें सुरक्षित कैसे रखा जाता है? इसका जवाब है 'स्ट्रॉन्ग रूम'। यह एक ऐसा विशेष सुरक्षित स्थान होता है, जहां EVM और VVPAT मशीनों को मतगणना तक पूरी सुरक्षा में रखा जाता है। आमतौर पर स्ट्रॉन्ग रूम के लिए किसी सरकारी कॉलेज, पॉलिटेक्निक संस्थान या प्रशासनिक गोदाम को चुना जाता है। इन जगहों को पहले से तैयार किया जाता है, ताकि सुरक्षा और निगरानी में कोई कमी न रहे। वोटिंग के तुरंत बाद शुरू होती है प्रक्रिया मतदान समाप्त होते ही पोलिंग बूथ पर ही EVM और VVPAT मशीनों को सील कर दिया जाता है। इसके बाद इन्हें कड़ी पुलिस सुरक्षा में स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों को मौजूद रहने का मौका दिया जाता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। जब मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम में रख दी जाती हैं, तो कमरे को आधिकारिक तौर पर सील कर दिया जाता है। इस दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है, जिससे बाद में किसी तरह का विवाद न हो। सुरक्षा के कई स्तर स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा साधारण नहीं होती। इसके चारों तरफ मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा बनाया जाता है। इसमें पुलिस और अर्धसैनिक बल 24 घंटे तैनात रहते हैं। हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे लगाए जाते हैं, जिनकी लगातार मॉनिटरिंग होती है। कई जगहों पर उम्मीदवारों को बाहर लगे स्क्रीन के जरिए लाइव निगरानी देखने की सुविधा भी दी जाती है। इससे भरोसा और पारदर्शिता दोनों बने रहते हैं। डबल लॉक और सील की खास व्यवस्था स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे पर खास तरह की सील लगाई जाती है, जिस पर उम्मीदवारों के हस्ताक्षर होते हैं। इसका मतलब यह होता है कि अगर कोई छेड़छाड़ होगी, तो तुरंत पता चल जाएगा। इसके अलावा, 'डबल लॉक सिस्टम' भी होता है। यानी कमरे को खोलने के लिए दो अलग-अलग चाबियों की जरूरत होती है, जो अलग-अलग अधिकारियों के पास रहती हैं। इससे कोई एक व्यक्ति अकेले कमरे को नहीं खोल सकता। अंदर जाने की सख्त पाबंदी स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर जाने की अनुमति बेहद सीमित होती है। केवल रिटर्निंग ऑफिसर (RO), जिला निर्वाचन अधिकारी और अधिकृत चुनाव कर्मी ही अंदर जा सकते हैं। आम जनता, मीडिया और यहां तक कि उम्मीदवार भी अंदर नहीं जा सकते। हालांकि उनके एजेंट बाहर से निगरानी कर सकते हैं। काउंटिंग वाले दिन क्या होता है? मतगणना के दिन सुबह करीब 7 बजे स्ट्रॉन्ग रूम खोला जाता है। इस दौरान RO, चुनाव पर्यवेक्षक और उम्मीदवार या उनके प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। सबसे पहले सील की जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मशीनें पूरी तरह सुरक्षित हैं। इसके बाद मशीनों को काउंटिंग हॉल तक ले जाया जाता है। इस पूरे रास्ते की भी वीडियो रिकॉर्डिंग होती है। काउंटिंग हॉल में हर टेबल पर उम्मीदवार का एक एजेंट मौजूद रहता है, ताकि पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जा सके।

हर दो दिन में मौसम का मिजाज बदलेगा, आंधी और बारिश से आम की फसलें होंगी प्रभावित, पैदावार में गिरावट

शहडोल   मध्य प्रदेश में पिछले दो तीन दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है. प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में भीषण गर्मी के बाद तेज आंधी व बूंदाबांदी से मौसम तेजी से बदला है. शहडोल में भी पिछले दो दिनों से मौसम इसी तरह बदल रहा है, जिसने आम की फसलों पर बड़ा संकट पैदा कर दिया है।  शहडोल में दो दिन से आंधी बारिश शहडोल जिले के किसान भोलू गुप्ता बताते हैं, '' पिछले दो दिन से तेज गर्मी से राहत मिली हुई है, जिस तरह से सूर्य देव का पारा चढ़ा हुआ था, उससे हालत खराब थी लेकिन पिछले दो दिन से मौसम ऐसा बदला है, कि शाम को ठंडक महसूस हो रही है. आंधी और बारिश से मौसम ठंडा हो गया है पर कई फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।  बदलते मौसम से आम को बड़ा नुकसान मौसम के इस बदलते मिजाज से किस तरह का नुकसान हो सकता है? इसे लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' जो आंधी तूफान आया है इससे जो पेड़ वर्गीय फसल है जैसे आम, केला आदि तो इनके गिरने से तो निश्चित ही नुकसान होता है लेकिन अन्य कई वजहों से भी फल प्रभावित होते हैं. तूफान में आम की कमजोर डगालें व फूल टूटने से आने वाले आमों की संख्या कम हो जाती है, इससे सबसे ज्यागदा नुकसान होता है।  सब्जी व अन्य फसलों का क्या होगा? कृषि वैज्ञानिक डॉ. बीके प्रजापति बताते हैं, '' इसके अलावा सब्जी वर्गीय फसलों की बात करें या गर्मी की फसल मूंग-उड़द की बात करें तो जब तक ओले नहीं गिरेंगे तब तक ज्यादा नुकसान नहीं है. बारिश हो रही है, मौसम ठंडा है तो इसका फायदा ही इन फसलों को मिलेगा. बस जिस तरह से तेज आंधी चल रही है उसका असर आम की फसल पर जरुर पड़ सकता है क्योंकि आम की फसल वक्त से पहले ही झड़ रही है।  तूफानी आंधी न मचाई तबाही  तेज आंधी ने शहडोल में कई स्थानों पर जमकर नुकसान किया, कहीं शादी का टैंट उड़ा दिया, तो कहीं बिजली के खंबे और पेड़. बिजली की तारों पर पेड़ गिरने से कई इलाकों में ब्लैक आउट हो गया और बिजली कर्मचारी बिजली दुरुस्त करने में लगे रहे. इसके अलावा कई गांव में कई घंटे तक ब्लैकआउट रहा, शुक्रवार को पूरे दिन लाइट अप एंड डाउन चलती रही, क्योंकि लगातार मेंटेनेंस का कार्य चलता रहा। 

आम आदमी पार्टी से जुड़े पूर्व मंत्रियों व कुमार विश्वास को कोर्ट का समन, 15 मई तय

सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता और जाने-माने कवि कुमार विश्वास के साथ- साथ दिल्ली सरकार के दो पूर्व मंत्रियों सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती को समन भेजा है। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इन सभी नेताओं को 15 मई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। क्या है 12 साल पुराना मामला? सरकारी वकील कालिका प्रसाद मिश्र के अनुसार, यह घटना 6 मई 2014 की है, जब देश में लोकसभा चुनाव हो रहे थे। उस समय कुमार विश्वास अमेठी से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव आयोग के नियमानुसार, वोटिंग शुरू होने से 48 घंटे पहले जो लोग उस क्षेत्र के वोटर नहीं होते हैं, उन्हें वहां से जाना होता है। उस समय पुलिस ने कुमार विश्वास और उनके साथियों को अमेठी छोड़ने को कहा था, क्योंकि वे वहां के वोटर नहीं थे। आरोप है कि प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी देने के बावजूद कुमार विश्वास, तत्कालीन मंत्री सत्येंद्र जैन और सोमनाथ भारती ने अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र नहीं छोड़ा। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज कर लिया था।   कोर्ट का सख्त रुख और आगे की प्रक्रिया यह मामला पहले एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रहा था। लेकिन हाल ही में इसे स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त रुख अपनाया है और सभी आरोपियों को समन भेजा है। वहीं अगली सुनवाई 15 मई को होगी, जिसमें सभी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना होगा। काफी चर्चा में था 2014 का अमेठी चुनाव साल 2014 का अमेठी लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित मुकाबलों में से एक था। इस सीट पर आम आदमी पार्टी ने पूरी ताकत झोंक दी थी और वहीं कुमार विश्वास का सीधा- सीधा मुकाबला कांग्रेस मंत्री राहुल गांधी और बीजेपी मंत्री स्मृति ईरानी से था। अब इतने साल बाद, कोर्ट के इस कदम से यह पुराना राजनीतिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

जबलपुर-इटारसी के बीच रेलवे की तीसरी लाइन पूरी, दिल्ली तक तेज़ी से दौड़ेंगी ट्रेनें

नर्मदापुरम   जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन पर तीसरी रेल लाइन की तैयारी तेज हो गई है. इसके लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर लिया गया है. अब विभिन्न स्तरों पर इसकी परीक्षण प्रक्रिया जारी है. परीक्षण पूरा होने के बाद काम शुरू होगा. तीसरी लाइन बनने से जबलपुर-नर्मदापुरम के बीच ट्रेनों का आवागमन तेज हो जाएगा. इसका असर ये होगा कि राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों सहित सभी ट्रेनों की रफ्तार तेज हो जाएगी. क्रॉसिंग के लिए हॉल्ट की समस्या भी खत्म होगी।  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी जबलपुर-इटारसी रेल सेक्शन के बीच तीसरी लाइन की योजना के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी को जानकारी दी. सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री का इसके लिए आभार जताते हुए कहा "यह परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की प्रमुख मांग रही है. तीसरी लाइन बनने से ट्रेनों की आवाजाही सुचारू होगी. समयबद्धता में सुधार आएगा और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी. नर्मदापुरम, नरसिंहपुर समेत आसपास के जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।  ट्रेनों के साथ ही मालगाड़ियों की स्पीड बढ़ेगी तीसरा ट्रैक बिछने से इस बिजी रूट पर ट्रेनें सनसनाती हुई निकलेंगी. अभी इस रेल लाइन पर ट्रैफिक का प्रेशर रहता है. इस कारण क्रॉसिंग कर सुपरफास्ट ट्रेनों को पहले निकाला जाता है. अब एक और ट्रैक बनने से ये समस्या खत्म हो दाएगी. जाहिर है इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और मालगाड़ियों का परिचालन भी बिना किसी बाधा के संभव हो सकेगा. तीसरा ट्रैक बनने से जबलपुर और इटारसी के बीच आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी. माना जा रहा है कि डीपीआर की परीक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेलवे बजट आवंटित करेगा. इसके बाद टेंडर होगा।  इटारसी से मानिकपुर तक प्लानिंग भी शामिल इसके अलावा पश्चिम मध्य रेलवे की प्लानिंग के अनुसार इटारसी रेलवे जंक्शन से जबलपुर होकर मानिकपुर तक जाने वाले रेलवे लाइन का विस्तार करने की है. यहां पर तीसरा ट्रैक बिछाने की तैयारी की जा रही है. इस लाइन की भी स्वीकृति की मांग रेलवे बोर्ड की गई है. ये तीसरी लाइन डलने के बाद इटारसी-जबलपुर-मानिकपुर रेल लाइन पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ जाएगी। 

IMD का बड़ा अलर्ट: मई में होगी सामान्य से ज्यादा बारिश, हीटवेव से मिलेगी राहत

नई दिल्ली भारत में इस साल मई का महीना असामान्य रूप से गीला होने वाला है. भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि पूरे देश में मई 2026 में सामान्य से ज्यादा बारिश होगी. बारिश सामान्य स्तर से 110 फीसदी अधिक हो सकती है।  इसका मतलब है कि जहां आमतौर पर कम बारिश होती है वहां भी इस बार खूब पानी बरसेगा. लेकिन इसके साथ गरज के साथ बादल, बिजली गिरना और तेज हवाएं भी चलेंगी जिनकी रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का भी खतरा है।  भारतीय मौसम विभाग के पास 1971 से 2020 तक का डेटा है. इस डेटा के अनुसार मई महीने में आमतौर पर उत्तर भारत और पूरे देश में 64.1 मिलीमीटर बारिश होती है. इस साल की पूर्वानुमान यह है कि बारिश इस सामान्य स्तर से 110 फीसदी ज्यादा हो सकती है. यानी करीब 70-71 मिलीमीटर या इससे भी ज्यादा हो सकती है।  ये असामान्य है क्योंकि मई का महीना आमतौर पर गरमी का होता है, बारिश का नहीं. मई में तो लू यानी गर्म हवाएं चलती हैं. लेकिन इस बार ये पैटर्न बदलने वाला है।  बारिश का असर क्या होगा? अच्छी खबर ये है कि इतनी बारिश से तापमान में कमी आएगी. जो भयंकर गर्मी आ रही थी उसमें से थोड़ी राहत मिलेगी. मिट्टी में नमी आएगी जिससे खेतों को फायदा होगा. जल स्रोतों में पानी भर जाएगा। लेकिन बुरी खबर ये है कि बारिश समान रूप से नहीं होगी. कुछ इलाकों में कम बारिश होगी जबकि कुछ इलाकों में बहुत ज्यादा होगी. पूर्व और उत्तरपूर्व भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रहेगी।  किन इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश? सब-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम को सबसे ज्यादा बारिश मिलेगी. यहां 5 मई तक बहुत भारी बारिश के साथ गरज, बिजली और तेज हवाएं चलेंगी. पूर्वोत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी ऐसा ही होगा।  पश्चिमी हिमालय, उत्तर भारत के मैदान और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में 3 से 6 मई के बीच अलग-अलग जगहों पर गरज और बिजली आएगी. पूर्वी भारत और पूर्वी तट पर भी ऐसी हालत होगी।  खतरे क्या हैं? अगर कम समय में बहुत सारी बारिश एक साथ हो जाए तो कई शहरों में बाढ़ आ सकती है. खेतों में फसलें खराब हो सकती हैं. तेज हवाएं बिजली के खंभे और पेड़ों को गिरा सकती हैं. बिजली गिरने से लोगों को जान का खतरा हो सकता है।  ये मौसम क्यों अजीब है? मई वसंत और मानसून के बीच का महीना होता है. इस समय कुछ असामान्य मौसम की घटनाएं होती हैं. लेकिन इस बार गरज और बादलों की गतिविधि सामान्य से बहुत ज्यादा होने वाली है।  लोगों को क्या करना चाहिए? मौसम विभाग ने कहा है कि सभी राज्यों के अधिकारियों और लोगों को अपने इलाके की मौसम सूचना पर नजर रखनी चाहिए. विशेषकर उन इलाकों में जहां भारी बारिश और गरज के खतरे हैं. घरों में पानी निकास के रास्ते साफ रखें ताकि बाढ़ न आए. किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए। 

April 2026 Car Sales: Hyundai, Tata और Mahindra की बिक्री में उछाल, Kia ने भी बढ़ाया ग्राफ

मुंबई  अप्रैल 2026 के खत्म होने के साथ ही कार बनाने वाली कंपनियों ने वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ बिक्री में एक पॉज़िटिव नोट हासिल किया है. बीते माह के दौरान, लगभग सभी कार ब्रांड्स ने वित्त वर्ष 2026 की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल अच्छी बढ़त दर्ज की है. घरेलू बाज़ार में Tata Motors और Mahindra दूसरे और तीसरे स्थान पर मज़बूती से बने रहे।  हालांकि Hyundai ने इस महीने अपने अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन के साथ Mahindra के साथ का फ़ासला कम कर दिया. वहीं Kia India की बात करें तो दूसरी जनरेस की Kia Seltos और Sonet की ज़बरदस्त मांग के चलते अप्रैल महीने में कंपनी ने अपने अब तक के सबसे अच्छे होलसेल आंकड़े को छू लिया. यहां हम टॉप-6 कार निर्माताओं की बिक्री के बारे में बता रहे हैं।  1. Maruti Suzuki की बिक्री सबसे पहले Maruti Suzuki की बात करें तो अप्रैल 2026 में कंपनी ने 1,87,704 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो इसकी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक बिक्री है. यह कार निर्माता कंपनी हैचबैक, सेडान और SUV के विस्तृत मिश्रण की बदौलत बिक्री के मामले में बाज़ार में काफ़ी बड़े अंतर से अपनी बढ़त बनाए हुए है।  कंपनी के कॉम्पैक्ट और मिड-साइज़ सेगमेंट की बिक्री 80,659 यूनिट्स की रही, जबकि Maruti Alto K10, WagonR और S-Presso जैसी छोटी कारों का योगदान 16,066 यूनिट्स का रहा. वहीं, इस महीने Maruti eVitara का योगदान भी 2,006 यूनिट्स का रहा, जिसमें से लगभग 85 प्रतिशत बिक्री इसकी बड़ी 61kWh बैटरी वाले वेरिएंट से हुई।  2. Tata Motors की बिक्री स्वदेशी कार निर्माता Tata Motors की बात करें तो अप्रैल 2026 में यह कंपनी दूसरे स्थान पर बनी रही. इस दौरान कंपनी के वाहनों की बिक्री में साल-दर-साल 30.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह अप्रैल 2025 के 45,199 यूनिट्स से बढ़कर लगभग 59,000 यूनिट्स तक पहुंच गई।  Tata Motors की बिक्री को Nexon और Punch जैसे मॉडल्स की मज़बूत मांग के साथ लगातार समर्थन मिल रहा है, जो इसकी बिक्री में अहम योगदान दे रहे हैं. इसके अलावा, कंपनी के इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की बिक्री में भी ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें साल-दर-साल 72.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।  3. Mahindra & Mahindra की बिक्री Mahindra & Mahindra ने अप्रैल 2026 में 56,331 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जो अप्रैल 2025 की 52,330 यूनिट्स की तुलना में साल-दर-साल 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. हालांकि, मार्च 2026 की 60,272 यूनिट्स की तुलना में कंपनी की बिक्री में 6.5 प्रतिशत की गिरावट आई है।  बीते माह भी कार निर्माता कंपनी ने अपना तीसरा स्थान बरकरार रखा है, और Tata Motors के साथ उसका अंतर कम बना हुआ है, जिससे हाल के महीनों में देखने को मिली कड़ी टक्कर जारी है. कंपनी की बिक्री मुख्य रूप से उसकी SUV लाइन-अप से ही बढ़ रही है, जिसमें Mahindra Scorpio, Thar और XUV रेंज जैसे मॉडल्स बिक्री को आगे बढ़ा रहे हैं।  4. Hyundai Motors की बिक्री साउथ कोरियन कार निर्माता कंपनी Hyundai ने अप्रैल 2026 में 51,902 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और चौथे स्थान पर बनी रही. कंपनी की इस बिक्री में मुख्य योगदान Hyundai Creta, Venue और Exter जैसे मुख्य मॉडल्स का रहा. इसके साथ ही Hyundai Grand i10 Nios और i20 जैसी हैचबैक कारों की मांग भी लगातार बनी रही।  बाते माह Hyundai Venue का प्रदर्शन खास तौर पर अच्छा रहा, और कंपनी ने 12,420 यूनिट्स की बिक्री के साथ अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा मासिक घरेलू बिक्री दर्ज की. Hyundai Motor ने इस बेहतरीन प्रदर्शन का श्रेय काफी हद तक इस मॉडल को हाल ही में मिली पांच-स्टार Bharat NCAP सुरक्षा रेटिंग को दिया है।  5. Toyota Kirloskar Motor की बिक्री Toyota की बिक्री पर नजर डालें तो कंपनी ने अप्रैल 2026 में 30,159 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, जिससे यह पांचवें स्थान पर रही. अप्रैल 2025 में 24,833 यूनिट्स की तुलना में बिक्री में साल-दर-साल 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इसकी मुख्य वजह Innova HyCross, Urban Cruiser Hyryder और Fortuner जैसे मॉडल्स की लगातार बनी रही मांग थी।  इस महीने की एक अहम उपलब्धि कंपनी की Innova HyCross का 2 लाख यूनिट्स की कुल बिक्री का आंकड़ा पार करना रही. Toyota Kirloskar ने भारत के लिए अपनी पहली EV, Urban Cruiser EBella से भी पर्दा उठा दिया है, और इसकी कीमत की घोषणा जल्द ही की जा सकती है।  6. Kia India की बिक्री Hyundai के स्मामित्व वाली कंपनी Kia India ने अप्रैल 2026 में 27,286 यूनिट्स की घरेलू बिक्री दर्ज की, और Toyota के बाद अपनी दूसरी जगह बनाए रखी. कार बनाने वाली इस कंपनी ने अप्रैल महीने में अपनी अब तक की सबसे ज़्यादा बिक्री भी दर्ज की, जिसमें उसके मुख्य मॉडल्स की ज़बरदस्त मांग का अहम योगदान रहा।  कंपनी की Kia Seltos और Sonet इस बिक्री में मुख्य योगदान देने वाले मॉडल्स रहे. इस महीने के दौरान दोनों ही मॉडल्स ने 10,000 यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया, जबकि Kia Carens Clavis ने भी कुल बिक्री को बढ़ाने में अपना योगदान जारी रखा। 

सरकार का नया नियम: LPG कनेक्शन बंद होने से बचने के लिए फटाफट करें ये जरूरी काम

 नई दिल्‍ली वेस्‍ट एशिया में जंग के कारण मिडिल ईस्‍ट से गैस और तेल का आयाता पूरे फ्लो के साथ नहीं आ पा रहा है, जिस कारण भारत में गैस के दाम में उछाल और पैनिंग बाइंग जैसी समस्‍याएं देखने को मिली है. ऐसे में सरकार ने एलपीजी बुकिंग और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन को लेकर कुछ नियमों को सख्‍त किया है, जो एक मई से देशभर में लागू हो रहे हैं।  इसी में से एक नियम डबल गैस कनेक्‍शन को लेकर है. सरकार का कहना है कि अगर आपके पास एलपीजी गैस सिलेंडर का कनेक्‍शन है और आपके घर पर या घर के आसपास पीएनजी पाइपलाइन का भी कनेक्‍शन है, तो आपको अपने LPG सिलेंडर को सरेंडर करना पड़ेगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो भी आपको तेल कंपनियों की ओर से गैस की सप्‍लाई नहीं की जाएगी. साथ ही आपको केवाईसी गाइडलाइन का भी पालन करना होगा, बिना केवाईसी के भी सिलेंडर रिफील करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।  इस कारण कई परिवारों के लिए, 1 मई से सब्सिडी वाले खाना पकाने के गैस सिलेंडरों तक पहुंच खत्‍म हो जाएगाी. तेल कंपनियों द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों का उद्देश्य डुप्लिकेट कनेक्शन, सब्सिडी वाले सिलेंडरों के दुरुपयोग और निष्क्रिय खातों पर अंकुश लगाना है।  ई-केवाईसी वेरिफिकेशन अगर आपके पास भी एलपीजी का कनेक्‍शन है तो आपको आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी वेरिफिकेशन फटाफट करवा लेना चाहिए. जिन उपभोक्ताओं का आधार कार्ड वेरिफिकेशन अधूरा है, उन्हें वेरिफिकेशन पूरा होने तक सिलेंडर की डिलीवरी नहीं मिल सकती है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन कस्‍टमर्स ने पहले ही अथेंटिफिकेशन पूरा कर लिया है, उन्हें यह प्रक्रिया दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी।  इसके अलावा, कई क्षेत्रों में ओटीपी आधारित डिलीवरी अनिवार्य होता जा रहा है. ग्राहकों को उनके रजिस्‍टर्ड मोबाइल नंबर पर एक डिलीवरी प्रमाणीकरण कोड प्राप्त होगा, और ओटीपी वेरिफिकेशन के बाद ही सिलेंडर दिया जाएगा. खबरों के मुताबिक, तेल कंपनियां घरेलू सिलेंडरों की जमाखोरी और व्यावसायिक हेराफेरी को कम करने के प्रयास में बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतर को भी बढ़ा रही हैं।   जून 2025 से पहले एलपीजी रिफिल करवाने वालों को भी करना होगा वेरिफाई  सबसे बड़ा जोखिम उन उपभोक्ताओं के लिए है जिनके केवाईसी रिकॉर्ड अधूरे या पुराने हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन परिवारों ने जून 2025 से पहले एलपीजी सिलेंडर रिफिल करवाया था, उन्हें संभावित निष्क्रिय उपयोगकर्ता के रूप में माना जाएगा. ऐसे उपभोक्ता ई-केवाईसी वेरिफिकेशन पूरा होने तक नए सिलेंडर ऑर्डर नहीं कर पाएंगे।  अब दो कनेक्‍शन नहीं  जांच के दायरे में आने वाली एक अन्य कैटेगरी में वे घर शामिल हैं, जिनके पास पहले से ही PNG का पाइपलाइन कनेक्शन है. अधिकारी दोहरे ईंधन का उपयोग करने वाले घरों की पहचान करने के लिए एलपीजी और पीएनजी डेटाबेस को रजिस्‍टर्ड कर रहे हैं. कई मामलों में, एक्टिव पीएनजी कनेक्शन वाले यूजर्स सब्सिडी वाले एलपीजी रिफिल या यहां तक ​​कि नए एलपीजी कनेक्शन के लिए भी योग्‍यता खो सकते हैं।  यूजर्स को क्‍या करना चाहिए?      अपने एलपीजी डिस्‍ट्रीब्‍यूटर के साथ आधार बेस्‍ड ई-केवाईसी प्रॉसेस पूरा करें.      तय करें कि ओटीपी डिलीवरी के लिए उनका मोबाइल नंबर अपडेट किया गया हो.      सब्सिडी ट्रांसफर के लिए यह जांच लें कि आधार बैंक खातों से ठीक से जुड़ा हुआ है या नहीं.      यह देखें कि इनएक्टिव या डुप्लिकेट कनेक्शन बंद कर दिए गए हैं.      क्‍या आपका एरिया पीएनजी कनेक्‍शन के तहत आता है या नहीं.