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रेल ट्रैक धमाके का मास्टरमाइंड गिरोह बेनकाब: आरोपी का सहयोगी पकड़ा, कई हमलों की गुत्थी सुलझी

पटियाला. पंजाब में हाल के समय में हुए तीन बड़े आतंकी घटनाक्रमों को लेकर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मोगा में जांच एजेंसी कार्यालय पर ग्रेनेड हमला, सरहिंद रेलवे ट्रैक विस्फोट और शंभू रेलवे ट्रैक धमाका- इन तीनों मामलों को पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। इस कार्रवाई में मुख्य आरोपी के सहयोगी गुरजिंदर सिंह उर्फ बाबा बेंत को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह कार्रवाई राज्य की विशेष संचालन इकाई, पठानकोट की खुफिया टीम और पटियाला पुलिस के संयुक्त अभियान के तहत की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी का संबंध मुख्य आरोपी जगरूप सिंह से था, जिसकी शंभू धमाके में मौत हुई थी। दोनों एक साथ मिलकर कर रहे थे काम जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि गुरजिंदर और जगरूप लंबे समय से एक साथ काम कर रहे थे और शंभू घटना वाले दिन दोनों अलग-अलग रास्तों से राजपुरा पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो। धमाके के समय गुरजिंदर मौके पर मौजूद था, लेकिन कुछ दूरी पर होने के कारण वह सुरक्षित बच निकला और बाद में फरार हो गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में यह भी सामने आया है कि तीनों घटनाएं एक ही गिरोह द्वारा अंजाम दी गई थीं और इन्हें विदेश में बैठे संचालकों के निर्देश पर अंजाम दिया गया। नेटवर्क के तार मलेशिया, अमेरिका और पाकिस्तान तक जुड़े होने की बात सामने आई है। आतंकी नेटवर्क तोड़ने में मिली सफलता इससे पहले पुलिस ने इस मामले में चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था और उनके कब्जे से हथियार, विस्फोटक सामग्री और संचार उपकरण भी बरामद किए गए थे। बाद में जगरूप के भाई की निशानदेही पर और भी घातक हथियार बरामद किए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरफ्तारी प्रदेश में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि आगे की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि प्रदेश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

11 मई 2026 को ग्रहों का बड़ा बदलाव, मंगल और सूर्य के गोचर से 5 राशियों पर खास असर

द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 मई 2026 को ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. इस दिन दो महत्वपूर्ण गोचर होंगे. दोपहर 12 बजकर 47 मिनट पर मंगल ग्रह मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि शाम 7 बजकर 37 मिनट पर सूर्य कृत्तिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. एक ही दिन सूर्य और मंगल की यह स्थिति ज्योतिष में बेहद खास मानी जा रही है. माना जा रहा है कि यह ग्रह परिवर्तन ऊर्जा, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को बढ़ा सकता है. व्यापार और नौकरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव के संकेत मिल रहे हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन का प्रभाव खास तौर पर 5 राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरा रहेगा. मंगल आपकी ही राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे काम में तेजी आएगी. नए अवसर मिल सकते हैं और रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं. नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है. व्यापार में लाभ के संकेत हैं. हालांकि, जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा. वृषभ राशि सूर्य का यह गोचर वृषभ राशि वालों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. कामकाज में आपकी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा. कार्यक्षेत्र में पहचान बढ़ सकती है. आर्थिक लाभ के अवसर बन सकते हैं. परिवार में शांति बनी रहेगी. आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी. सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में आगे बढ़ने का हो सकता है. नौकरी बदलने या प्रमोशन के योग बन सकते हैं. व्यापार में विस्तार के अवसर मिलेंगे. आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. रुका हुआ पैसा वापस मिलने के संकेत हैं. समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा. धनु राशि धनु राशि वालों के लिए यह ग्रह परिवर्तन सकारात्मक परिणाम दे सकता है. रुके हुए काम पूरे होंगे. करियर में स्थिरता आएगी. नौकरी में सम्मान बढ़ सकता है. व्यापार में सुधार के संकेत हैं. अचानक धन लाभ की संभावना भी बन सकती है. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह समय नए अवसर लेकर आ सकता है. नौकरी में प्रमोशन और व्यापार में नए संपर्क बनने के योग हैं. आपकी बातचीत और व्यवहार लोगों को प्रभावित करेगा. हालांकि खर्चों पर ध्यान देना जरूरी रहेगा. परिवार में खुशी का माहौल रहेगा.

आईएएफ का रेस्क्यू: पानी की टंकी पर चढ़े बच्चों को सीढ़ी टूटने के बाद 16 घंटे तक किया गया बचाया

सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर में रविवार सुबह भारतीय वायुसेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन में पानी की टंकी पर फंसे दो बच्चों को सुरक्षित नीचे उतारा. करीब 16 घंटे तक टंकी पर फंसे रहने के बाद दोनों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू किया गया. यह घटना कांशीराम आवासीय कॉलोनी की है, जहां शनिवार को पांच बच्चे रील बनाने के लिए पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए थे।  इसी दौरान सीढ़ी टूट गई और सिद्धार्थ, शनि और गोलू नाम के तीन बच्चे नीचे गिर गए, जबकि पवन और कल्लू नाम के दो बच्चे टंकी के ऊपर ही फंस गए. टंकी से नीचे गिरने के कारण गंभीर चोट लगने से सिद्धार्थ की मृत्यु हो गई. वहीं शनि और गोलू को इलाज के लिए माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।  टंकी की सीढ़ी क्षतिग्रस्त होने के कारण उनके पास नीचे उतरने का कोई रास्ता नहीं बचा था. रात में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की टीम गोरखपुर से मौके पर पहुंची और बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन टंकी तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं थी, जिस कारण उनकी लिफ्ट काम नहीं कर सकी और रेस्क्यू ऑपरेशन सफल नहीं हो पाया।  स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने राज्य सरकार से मदद मांगी. इसके बाद भारतीय वायुसेना ने गोरखपुर स्थित सेंट्रल एयर कमांड से एक Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर को बच्चों के रेस्क्यू मिशन के लिए रवाना किया. रविवार सुबह करीब 5:20 बजे हेलीकॉप्टर पानी की टंकी के पास पहुंचा और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. वायुसेना के जवानों ने 15 मिनट के भीतर 16 घंटे से पानी की टंकी पर फंसे दोनों बच्चों को सुरक्षित उतार लिया।  रेस्क्यू के बाद दोनों बच्चों को उसी हेलीकॉप्टर से गोरखपुर ले जाया गया, जहां उनका मेडिकल चेकअप हुआ. इससे पहले प्रशासन ने रात के दौरान टंकी तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ता बनाने की कोशिश की थी. रात करीब 3 बजे तक सड़क निर्माण लगभग पूरा हो गया था, लेकिन अचानक बारिश शुरू होने से काम रुक गया. इसके बाद हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू का फैसला लिया गया. पूरे अभियान के दौरान जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस बल और अन्य एजेंसियां मौके पर मौजूद रहीं और लगातार स्थिति की निगरानी करती रहीं। 

जंगल बचाने की मुहिम तेज, कई जगहों पर मिला अवैध कब्जा

नरसिंहपुर जिले के वन क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध बसाहट और वन भूमि के दुरुपयोग की मिल रही शिकायतों के बाद अब वन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। शासन के निर्देश पर जिले के सभी वन परिक्षेत्रों में वन सीमा रेखाओं का सत्यापन अभियान शुरू कर दिया गया है। वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मानचित्र के साथ जंगलों में पहुंचकर सीमाओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं। इस दौरान यह देखा जा रहा है कि किन-किन स्थानों पर वन भूमि का दुरुपयोग हो रहा है और कहां अतिक्रमण किया गया है। बताया जा रहा है कि करेली और गाडरवारा वन परिक्षेत्र में यह अभियान तेज गति से चल रहा है। सत्यापन के दौरान कई स्थानों पर वन भूमि के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं, जिनमें संबंधित लोगों को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जांच के दौरान कुछ स्थानों पर वन क्षेत्र के भीतर विद्युत ट्रांसफार्मर लगे होने की जानकारी भी सामने आई है। अब इसकी विस्तृत जांच कर विद्युत वितरण कंपनी से पत्राचार किया जाएगा कि ट्रांसफार्मर लगाने के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति के स्थापना पाई जाती है तो वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि जिले में सघन वन क्षेत्र होने के बावजूद कई स्थानों पर वन भूमि का उपयोग खेती सहित अन्य कार्यों में किया जा रहा है। वन विभाग समय-समय पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी करता रहा है, लेकिन अब व्यापक स्तर पर सीमा सत्यापन के जरिए स्थिति स्पष्ट करने और सख्ती से नियंत्रण करने की तैयारी है। वनभूमि के दुरुपयोग से यह नुकसान वन क्षेत्र घटने से जैव विविधता पर सीधा असर वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित पर्यावरण संतुलन बिगडऩे का खतरा भूजल स्तर और जल स्रोतों पर नकारात्मक प्रभाव भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं की आशंका वनक्षेत्र की सीमा लाइन का सत्यापन कार्य निरंतर चल रहा है। जहां भी अतिक्रमण मिल रहा है उसे हटाने के पूर्व संबंधितों को नोटिस दिए जा रहे हैं। कुछ जगह वनभूमि में ट्रांसफार्मर मिलने की जानकारी सामने आई है, आगे नियमानुसार कार्रवाई होगी। सुनील वर्मा, एसडीओ गाडरवारा वन विभाग

पटना पीएमसीएच में डिजिटल क्रांति, हाई-स्पीड इंटरनेट से बदलेगी इलाज की व्यवस्था

 पटना पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) अब पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक अस्पताल बनाने की कवायद आरंभ हुई है। नए भवन में इंटरनेट की परेशानी को देखते हुए अब यहां लीज लाइन लगाने की कवायद हो गई है। मई के दूसरे सप्ताह से नए भवन में हाई-स्पीड इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधाएं शुरू होने जा रही हैं, इससे इलाज की व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। करीब 40 लाख रुपये की लागत से भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) पूरे परिसर में लीज लाइन (BSNL Lease Line in PMCH) बिछा रहा है। इसके तहत हर फ्लोर को हाई-स्पीड वाई-फाई से जोड़ा जाएगा। इससे डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों का डेटा तुरंत उपलब्ध हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने योजना स्वीकृत कर पीएमसीएच को पत्र भेज दिया है। रियल-टाइम डेटा से बेहतर निगरानी पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि डिजिटल सिस्टम (PMCH Patna Digital Hospital) का सबसे अधिक असर स्त्री एवं प्रसूति और शिशु रोग विभाग में दिखेगा। जन्म और मृत्यु से जुड़ी जानकारी रियल-टाइम में सीधे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ, भारत सरकार और बिहार सरकार को भेजी जा सकेगी। इससे स्वास्थ्य निगरानी और नीति निर्माण में सटीकता बढ़ेगी। पेपरलेस सिस्टम: रिपोर्ट सीधे स्क्रीन पर अस्पताल को पूरी तरह पेपरलेस (Paperless Treatment in PMCH) बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। एक्स-रे, पैथोलाजी और अन्य जांच की रिपोर्ट सीधे डॉक्टर के कंप्यूटर पर उपलब्ध होगी। मरीजों को रिपोर्ट के लिए लाइन में लगने या भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डिजिटल रिकार्ड से फाइल खोने की समस्या खत्म होगी और इलाज तेज व पारदर्शी बनेगा। नेटवर्क समस्या होगी खत्म नए भवन में लंबे समय से बनी नेटवर्क की समस्या भी इस पहल से समाप्त हो जाएगी। डाक्टरों को मरीजों का डेटा एक्सेस करने और कर्मचारियों को प्रशासनिक कार्य निपटाने में अब कोई बाधा नहीं होगी। साथ ही, मेडिकल छात्रों के लिए डिजिटल सेमिनार और अध्ययन भी आसान होगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से खत्म होगी भीड़ भीड़ नियंत्रण के लिए ऑनलाइन अपाइंटमेंट सिस्टम (PMCH Online Registration System) लागू करने की तैयारी है। मरीज घर बैठे रजिस्ट्रेशन कर नंबर ले सकेंगे। इससे उन्हें तय समय पर डाक्टर से मिलने की सुविधा मिलेगी और ओपीडी में लंबी कतारों से राहत मिलेगी। नंबर में हेराफेरी की आशंका भी खत्म होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल को आधुनिक बनाने के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करना पहला कदम है। लक्ष्य है कि मरीज को केवल इलाज के लिए अस्पताल आना पड़े, न कि रिपोर्ट या नंबर के लिए लाइन में लगना पड़े। यह डिजिटल पहल न सिर्फ मरीजों को बेहतर सुविधा देगी, बल्कि पीएमसीएच को वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के करीब ले जाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। फाइव-जी लीज लाइन लगने के बाद     मरीजों का डेटा तेजी से ऑनलाइन अपडेट हो सकेगा     डाक्टरों को डिजिटल रिपोर्ट और इमेजिंग तुरंत उपलब्ध होगी     टेलीमेडिसिन और ई-हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा     अस्पताल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी  

कहीं ढांचे तो कहीं कब्जे: नाले-नालियों की सफाई में आ रहीं कई अड़चनें

नरसिंहपुर बारिश से पहले नगरीय क्षेत्र में नाले-नालियों की साफ-सफाई के लिए नगर पालिका का अमला सक्रिय हो गया है, लेकिन अतिक्रमण इस अभियान की सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आ रहा है। शहर के कई वार्डों में नालियों पर कच्चे-पक्के कब्जों के कारण सफाई कार्य प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्टेशनगंज क्षेत्र के कृष्ण वार्ड में हालात सबसे अधिक गंभीर हैं। यहां जगह-जगह नालियों पर अतिक्रमण होने से सफाई कर्मचारियों को कचरा निकालने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर नालियों के ऊपर पक्का फर्श, सीढिय़ा और चबूतरे तक बना दिए गए हैं, जिससे नालियां पूरी तरह ढंक गई हैं। इसी तरह निरंजन वार्ड और कामत वार्ड में भी नाले-नालियों पर कब्जे के कारण सफाई कार्य प्रभावित रहा है।  स्थिति यह है कि नालियों में लंबे समय से जमा कचरा और मलबा अब सफाई के दौरान बाहर निकल रहा है, जिससे पूर्व में सफाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कृष्णा वार्ड में नालियों के ऊपर अतिक्रमण की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। कई जगह नालियां पूरी तरह बंद हैं और लोगों ने उन पर स्थायी कब्जा कर लिया है। ऐसे में जब सफाई अमला मौके पर पहुंचता है, तो सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि सीमित संसाधनों में बेहतर तरीके से सफाई कैसे की जाए। कृष्णा वार्ड में नाले-नालियों के ऊपर अतिक्रमण है। वार्ड की अधिकांश सडक़ें संकीर्ण वार्ड की अधिकांश सडक़ें संकरी होने के कारण जलभराव की समस्या भी यहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक बनी रहती है। बारिश के दिनों में कमराय स्कूल से लगी सडक़ पर नालियों का गंदा पानी भर जाता है। यही पानी पास स्थित वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर तक पहुंचता है, जिससे हर साल नागरिकों के साथ-साथ कर्मचारी और छात्र-छात्राओं को भी परेशानी उठानी पड़ती है। नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो बारिश के दौरान हालात और बिगड़ सकते हैं। नगर प्रशासन को ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी करना चाहिए जो जानबूझकर नाले-नालियों में कचरा डालकर पानी की निकासी बाधित करते हैं। कई स्थानों पर नालियों के ऊपर पक्का फर्श, सीढिय़ा और चबूतरे तक बना दिए गए हैं अतिक्रमण हटे बिना सफाई मुश्किल कई वार्डों में नालियों पर कच्चे-पक्के कब्जे पक्का फर्श, सीढिय़ां और चबूतरे बन रहे बाधा संकरी सडक़ों के कारण बढ़ता है जलभराव बारिश में स्कूल व शासकीय परिसरों तक पहुंचता गंदा पानी समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेंगी समस्याएं नाले-नालियों की सफाई के लिए निरंतर कार्य चल रहा है। जेसीबी मशीन के साथ ही कर्मचारियों की टीम लगी है। कई जगह अतिक्रमण मिल रहा है उसे हटाने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में जल्द ही कार्रवाई होगी।- इंजी. पुरुषोत्तम बाडबुद्धे, नगरपालिका नरसिंहपुर

Bank of Maharashtra लूट केस: यूपी STF का एक्शन, सरगना समेत तीन दबोचे

वाराणसी हजारीबाग (झारखंड) में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बरही शाखा से सोना और नगदी की लूट के मामले में यूपी एसटीएफ ने शुक्रवार रात तीन डकैतों को गिरफ्तार कर लिया। गत 24 अप्रैल को बैंक से चार किलो सोना और 4.22 लाख की नगदी दिनदहाड़े लूट ली गई थी। तीनों डकैतों की गिरफ्तारी सिंहपुर (सारनाथ) से हुई। कार्रवाई में झारखंड पुलिस भी शामिल थी। डकैतों के पास से लूट के 912.22 ग्राम सोना, 20 लाख नगदी, बिहार के नंबर की एसयूवी तथा छह मोबाइल फोन बरामद किए गए। वारदात में शामिल चार अन्य डकैतों की तलाश की जा रही है। एसटीएफ वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक विनोद सिंह ने बताया कि गिरफ्तार डकैतों में सरगना नवादा (बिहार) नरहट निवासी मो. अफजल, गोरखपुर के बनगाई (गुलहरिया) निवासी पंकज सिंह उर्फ रौनक तथा मऊ के सियहरीं बरजरा (दोहरीघाट) निवासी सौरभ यादव उर्फ सोनू हैं। बरामद एसयूवी अफजल की है। 24 अप्रैल को वारदात के बाद बदमाश झारखंड से बिहार होते हुए 27 अप्रैल को वाराणसी आ गए थे। यहां अलग-अलग होटलों में ठिकाना बदलते रहे। झारखंड पुलिस के साथ यूपी एसटीएफ भी गिरफ्तारी के लिए लगी थी सर्विलांस एवं वारदात के समय की फुटेज एवं तस्वीरों के जरिए बदमाशों के वाराणसी में होने की पुष्टि हुई। इस आधार पर इंस्पेक्टर अमित श्रीवास्तव और अनिल कुमार सिंह के नेतृत्व में टीमें सतर्क थीं। मुखबिर की सूचना के आधार पर सिंहपुर से तीनों को गिरफ्तार कर सारनाथ पुलिस को सौंपा गया। तीनों बदमाश दिल्ली भागने के फिराक में थे। झारखंड पुलिस की अर्जी पर कोर्ट से दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली है। चार मई की शाम पांच बजे तक हजारीबाग की कोर्ट में तीनों को पेश करना होगा। ओडिशा में हुई डकैती देखने के बाद हजारीबाग की साजिश रची झारखंड के हजारीबाग जिले में बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की बरही शाखा से 24 अप्रैल को सोना और नगदी की डकैती में गिरफ्तार बदमाशों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पूछताछ में डकैतों ने बताया कि बीते दिनों ओडिशा के किलंजर में बैंक आफ महाराष्ट्रा से ही आठ किलो सोना की लूट हुई थी। समाचार चैनलों पर इस वारदात की खबर को देखा। फिर उन्हें लगा कि जब किलंजर के ग्रामीण क्षेत्र के इस बैंक में आठ किलो सोना हो सकता है तो हजारीबाग में और अधिक होगा। इसके बाद मो. अफजल पंकज के साथ रेकी करने लगा। फिर रमजान के समय गाजीपुर के सैदपुर भीतरी के शोएब एवं चुन्नू को भी बुलाया गया। अफजल की एसयूवी से सभी ने कई बार रेकी की। मो. अफजल रमजान माह के दौरान ही बैंक के अंदर गया। वहां स्टाफ एवं बैंक के अंदर की स्थिति का आकलन किया। डकैती को अंजाम देने के लिए बिहार के आरा निवासी संतोष ने बाइक उपलब्ध कराई। शोएब उर्फ टाइगर ने पिस्टल एवं कट्टा की व्यवस्था की। मो. अफजल ने संतोष के पास से दो पिस्टल ली और साजिश में संतोष को भी शामिल कर लिया। पहले 17 अप्रैल को ही वारदात को अंजाम देना था, लेकिन आने-जाने के लिए पैसे की व्यवस्था नहीं होने पर अफजल के घर पर पंकज एवं अन्य बदमाश रुक गए। मो. अफजल और पंकज 17 अप्रैल को अफजल की एसयूवी से नवादा, कोडरमा, तलैया होते हुए निकले। चौपारण की तरफ टोल से आगे अफजल और पंकज से संतोष, शोएब एवं सुहैल दो बाइक के साथ आकर मिले। तय किया कि फोन पर इनकी आपस में बहुत बात हो गई है। मास्क आदि भी नहीं लगाए हैं। इसलिए 24 अप्रैल को डकैती तय की गई। हत्या में जेल गया, फिर गिरोह बनाया मो. अफजल धनबाद में कोयले का काम करता था। व्यवसाय में रंजिश को लेकर 2008 में कोलकाता के व्यवसायी की गोली मारकर हत्या कर दी। इसमें वह जेल गया। चार साल जेल में रहा। वहां उसका परिचय पंकज सिंह उर्फ रौनक सिंह, उत्तम महतो, दशरथ महतो, बाबू राजा उर्फ सिद्वार्थ, सोहेल उर्फ फैजल, सुनील पंडित एवं अन्य बदमाशों से हुआ। जेल से छूटने के बाद इन सभी ने बैंकों की डकैती के लिए एक गिरोह बनाया, जिसका सरगना अफजल है। ये सभी लूटा गया सोना बेचकर रियल एस्टेट में निवेश करते हैं।

राजस्थान वेदर अपडेट: कई जिलों में तेज हवाएं और बारिश का येलो अलर्ट जारी

जयपुर राजस्थान के पश्चिमी भाग में गर्मी का प्रकोप है. दूसरी ओर आंधी-बारिश का दौर भी जारी है. मौसम लोगों पर दोहरी मार कर रहा है. शनिवार देर शाम प्रदेश के कई इलाकों में भयंकर आधी तूफान का मंजर देखने को मिला, इससे कई जगहों पर पेड़ गिर गए. कई जगहों पर बिजली के खंभे गिर गए. राजधानी में जयपुर में पारा दो डिग्री कम 38.1 डिग्री रहा. सुबह से ही राजधानी में आंधी-बारिश का दौर रहा. शाम होते ही तेज हवाओं की आंधी के साथ जमकर बारिश हुई, इससे गर्मी में थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन कई जगहों पर पेड़ गिरने और तेज आंधी के कारण नुकसान हुआ. तापमान में कमी की संभावना   विभाग के मुताबिक, आगामी दिनों में राज्य के ज्यादातर इलाकों के अधिकतम तापमान में कमी होने की संभावना है. प्रदेश में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण आगामी कुछ दिनों में कई भागों में तेज हवा के साथ हल्की से मध्यम बरसात हो सकती है. इससे हीटवेव से राहत मिलेगी. फिलहाल आंधी तूफान के बीच लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत की उम्मीद है.   इन जिलों में बारिश की संभावना मौसम विभाग की ओर से आज अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, जयपुर, झुंझुनूं, करौली, खैरथल तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, सवाई माधोपुर, सीकर, चूरू और डीडवाना कुचामन जिलों में तेज हवा के साथ बारिश की संभावना है. इन जिलों में करीब 30 से 40 किमी प्रतिघंटा के साथ तेज हवाएं चलने का येलो अलर्ट है.   कल बारिश का ऑरेंज अलर्ट वहीं, कल यानी 4 मई के लिए प्रदेश के बीकानेर, झुंझुनूं, सीकर, चूरू, डीडवाना कुचामन, हनुमानगढ़, नागौर और श्रीगंगानगर में ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है.  वहीं, प्रदेश में गर्मी का प्रकोप भी समानांतर जारी है. राज्य में सर्वाधिक तापमान जैसलमेर में 44.4 डिग्री दर्ज किया गया है.

उज्जैन में चमत्कारिक खोज! महाकाल मंदिर परिसर से निकला नया शिवलिंग, गुफानुमा संरचना भी मिली

उज्जैन उज्जैन में बाबा महाकाल के आंगन में एक बार फिर 'महादेव प्रकट हुए'। महाकालेश्वर मंदिर क्षेत्र में चल रही खुदाई के दौरान यहां एक प्राचीन शिवलिंग मिला। इसके साथ ही एक गुफानुमा संरचना भी निकली। मंदिर परिसर में पूर्व में भी प्राचीन प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। मई 2020 में परमारकालीन मंदिर के अवशेष और मूर्तियां मिली थीं। महाकालेश्वर मंदिर परिसर की इस खुदाई ने छह वर्ष बाद फिर उज्जैन की प्राचीन विरासत को जीवंत करने के संकेत दिए हैं। टनल और वेटिंग हॉल निर्माण के दौरान खुदाई में ये शिवलिंग और गुफानुमा संरचना मिलीं। इस प्राचीन वैभव ने न सिर्फ आस्था में बढ़ोत्तरी की, बल्कि क्षेत्र की गहरी पुरातात्विक परतों की ओर भी ध्यान खींचा है। करीब 1000-1200 वर्ष पुराना बताया जा रहा संभावना जताई जा रही है कि यह शिवलिंग और गुफा परमार कालीन हो सकते हैं। इन्हें करीब 1000-1200 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। महाकालेश्वर मंदिर के प्रस्तावित गेट-4 के पास निर्माण कार्यों के लिए खुदाई का काम चल रहा है। शुक्रवार सुबह करीब 5 बजे पोकलेन ऑपरेटर को खुदाई के दौरान शिवलिंग दिखा तो तुरंत खुदाई रोक दी गई। इसके बाद पुजारियों ने विधि- विधान से पूजा-अर्चना कर शिवलिंग को सुरक्षित करवा दिया। शिवलिंग के साथ अन्य अवशेष जैसे नंदी प्रतिमा या प्राचीन स्थापत्य के हिस्से मिलने की संभावना इस क्षेत्र को संभावित पुरातात्विक स्थल के रूप में स्थापित करती है विशेषज्ञों के अनुसार, शिवलिंग के साथ अन्य अवशेष जैसे नंदी प्रतिमा या प्राचीन स्थापत्य के हिस्से मिलने की संभावना इस क्षेत्र को संभावित पुरातात्विक स्थल के रूप में स्थापित करती है। अब इस खोज का अहम पहलू इसकी प्राचीनता तय करना है। जल्द ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण या राज्य पुरातत्व विभाग की टीम वैज्ञानिक परीक्षण करेगी। महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पूर्व में भी पुरानी प्रतिमाएं मिल चुकी हैं। मई 2020 में महाकाल मंदिर विस्तार के दौरान 25- 30 फीट गहराई में परमारकालीन मंदिर के अवशेष और मूर्तियां मिली थीं। वर्तमान खोज उसी ऐतिहासिक श्रृंखला का विस्तार हो सकती है। प्रमुख बिंदु महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रहा निर्माण कार्य खुदाई में निकला प्राचीन वैभव शिवलिंग और गुफा मिले बाबा महाकाल के आंगन में 'प्रकट हुए महादेव' खुदाई के दौरान मिले शिवलिंग की पुजारियों ने की पूजा-अर्चना गुफानुमा संरचना भी सहेजी

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा कदम: चंडीगढ़ में 2000 करोड़ की लागत से बनेगा हाईटेक अस्पताल

चंडीगढ़. शहर में बढ़ती मरीजों की संख्या और अस्पतालों पर दबाव को कम करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने 2,154 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित करने की योजना को मंजूरी दी है। यह केंद्र ट्राइसिटी और आसपास के राज्यों के लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने सेक्टर-53 में 13.6 एकड़ भूमि पर बनने वाले क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र को स्वीकृति दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पंजाब के राज्यपाल एवं केंद्र शासित प्रदेश प्रशासक ने मंजूरी प्रदान की है तथा केंद्र सरकार से शीघ्र स्वीकृति देने का आग्रह किया है। करीब 2,154 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना में 1,704 करोड़ रुपये भवन निर्माण और संबंधित सुविधाओं पर तथा 450 करोड़ रुपये अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों पर खर्च किए जाएंगे। यह केंद्र 1000 बिस्तरों वाला होगा, जिसमें 500 बिस्तर महिला एवं बाल स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तथा 500 बिस्तर उच्च स्तरीय विशिष्ट चिकित्सा और आपातकालीन उपचार के लिए निर्धारित होंगे। इस केंद्र में हृदय रोग, तंत्रिका रोग, पाचन तंत्र रोग, गुर्दा रोग सहित अनेक उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही यह संस्थान उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान का प्रमुख केंद्र भी बनेगा। वर्तमान में शहर के सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की कमी के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार एक ही बिस्तर पर एक से अधिक मरीजों को रखना पड़ता है। ऐसे में यह नया चिकित्सा केंद्र स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना न केवल चंडीगढ़ बल्कि मोहाली, पंचकूला तथा पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के लोगों को भी बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराएगी। इससे बड़े सरकारी अस्पतालों पर बढ़ते दबाव में कमी आने की संभावना है।