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10 हजार की पहली किस्त मिली, लेकिन 20 हजार के लिए नहीं मिल रहीं पात्र महिलाएं

 आरा भोजपुर जिले में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार की पहली किस्त हासिल करने वाली महिला लाभार्थियों की संख्या चार लाख सत्रह सौ साठ थी। इसके बावजूद जिले में करीब 22 हजार महिलाओं को राशि विलंब से आवेदन करने के कारण नहीं मिल सकी। उन्हें आज भी इस राशि का इंतजार है। वहीं, दूसरी किस्त के लिए योग्य महिला उद्यमी नहीं मिल रही हैं। जिनको 20-20 हजार रुपए दिए जाने हैं। मई माह में राज्य सरकार ने दूसरी किस्त जारी करने का निश्चय किया है। सभी जिले को पत्र देकर दूसरी किस्त के योग्य महिला उद्यमी की सूची सौंपनी है। भोजपुर जिले में भी सूची तैयार हो रही है। इसमें चौंकाने वाली रिपोर्ट आ रही है। सूची तैयार करने की जिम्मेदारी ग्राम संगठनों की है। जिले में 1582 ग्राम संगठन हैं। ग्राम संगठन मानक के अनुसार दूसरी किस्त के लिए योग्य जीविका दीदी को चयन कर रहे हैं। इन्हें मानक के अनुसार कुल लाभार्थी के पांच से छह प्रतिशत महिला उद्यमी मिले हैं। जिला जीविका दीदी के पदाधिकारी मनीष ने बताया कि जिले में पहली किस्त प्राप्त करने वाले अधिकांश महिला उद्यमी अभी अपना रोजगार शुरू नहीं की है। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, जिले में दूसरी किस्त के लिए करीब 24 हजार महिला उद्यमी को मानक के अनुसार योग्य पाया गया है। दूसरी किस्त के लिए तैयार हो रहा आंकड़ा विगत फरवरी माह से जिले में महिला उद्यमियों को चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसमें महिला उद्यमी से 10 हजार रुपए की राशि, क्या रोजगार में शुरू किया, की जानकारी मांगी जाती है। इस बाबत ग्राम संगठनों ने सात प्रश्न सुनिश्चित किया है। जो महिला उद्यमी उसको पूरा करती हैं, उसी को 20-20 हजार रुपए की किस्त मिलेगी। इनका डेटा पोर्टल पर अपलोड हो रहा है। मुख्यालय भेजने के लिए आज मंगलवार तक अंतिम तिथि निर्धारित थी। आरा सदर प्रखंड में 1 प्रतिशत भी कम योग्य लाभार्थी भोजपुर जिले के सबसे अधिक शहरी इलाका आरा सदर प्रखंड में है। यहां पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत पहली किस्त हासिल करने वाली महिलाओं की संख्या करीब 26 हजार रही है। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपए की राशि प्राप्त की है। इस प्रखंड में 120 ग्राम संगठन है। दूसरी किस्त के लिए सर्वे के बाद 234 जीविका दीदी को दूसरी किस्त के लायक पाया गया। यह संख्या कुल लाभार्थियों के एक प्रतिशत से भी कम है।

आंधी-बारिश का असर, दिल्ली-NCR में सुधरी हवा

नई  दिल्ली राजधानी में इस साल की सबसे साफ हवा सोमवार को दर्ज की गई। करीब 25 दिनों बाद एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 100 से नीचे पहुंच गया, जिससे लोगों को प्रदूषण से आंशिक राहत मिली। CPCB)के एयर बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को दिल्ली का AQI 88 रिकॉर्ड किया गया, जो “संतोषजनक” श्रेणी में आता है। इस दौरान मुख्य प्रदूषकों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂), ओजोन (O₃) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) शामिल रहे। हालांकि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं रहने वाली है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, आज से प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ सकता है और AQI सामान्य श्रेणी में पहुंच सकता है। इससे पहले 8 अप्रैल को AQI 93 रिकॉर्ड किया गया था। इस साल अब तक यह तीसरा मौका है जब AQI 100 से नीचे रहा—20 मार्च और 8 अप्रैल को भी AQI 93 दर्ज हुआ था। दिल्ली में सबसे साफ हवा शादीपुर इलाके में रही, जहां AQI महज 46 दर्ज किया गया। वहीं एनसीआर के अन्य शहरों में अलग-अलग स्तर की वायु गुणवत्ता देखी गई फरीदाबाद (73), गाजियाबाद का 114, ग्रेटर नोएडा का S9, गुरुग्राम का 104 और नोएडा (s6)। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 5 से 7 मई तक प्रदूषण का स्तर सामान्य बना रहेगा, लेकिन इसके बाद यह “सामान्य से खराब” श्रेणी में जा सकता है। हवाओं की गति सोमवार को 20 से 70 किमी/घंटा के बीच रही, जिससे प्रदूषक कणों का फैलाव हुआ और हवा साफ बनी रही। मंगलवार को हवा की रफ्तार 12 से 40 किमी/घंटा और बुधवार को 12 से 20 किमी/घंटा रहने की संभावना है, जिससे प्रदूषण स्तर में फिर बढ़ोतरी हो सकती है। दिल्ली-NCR से हटा GRAP-1 CAQM) की सब-कमिटी ने सोमवार को हालात की समीक्षा कर GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के पहले चरण (GRAP-1) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया। गौरतलब है कि 16 अप्रैल को प्रदूषण के स्तर के “खराब” श्रेणी में पहुंचने के बाद GRAP-1 लागू किया गया था। लेकिन हाल के दिनों में बारिश और अनुकूल मौसम की वजह से वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है, जिसके चलते यह फैसला लिया गया। CAQM की बैठक में दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा हालात का आकलन किया गया और पाया गया कि मौसम फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण के लिए अनुकूल है। इसी आधार पर GRAP-1 को हटाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, कमिटी ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए जरूरी कदम लगातार जारी रखें। साथ ही, वायु गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी बनाए रखने की बात भी कही गई है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को भी शहर के अलग-अलग इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जो सामान्य से कम माना जा रहा है। पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले तीन से चार दिनों तक दिल्ली में हल्के बादलों की मौजूदगी बनी रहेगी। इसके चलते फिलहाल तेज गर्मी के लौटने के आसार कम हैं और लोगों को राहत मिलती रहेगी। पश्चिमी विक्षोभों का असर राजधानी में थो इस बार गर्मी से राहत का बड़ा कारण बार-बार सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ रहे हैं।  मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च और अप्रैल के दौरान 12 से अधिक पश्चिमी विक्षोभों ने दिल्ली के मौसम को प्रभावित किया। इन विक्षोभों के कारण समय-समय पर बारिश, धूल भरी आंधी और ओलावृष्टि हुई, जिससे तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर इस समय तक तेज गर्मी पड़ने लगती है, लेकिन इस बार मौसम अपेक्षाकृत सुहाना बना रहा। अप्रैल में 84% अधिक वर्षा मौसम विभाग के मुताबिक, मार्च में सामान्य से 15 प्रतिशत और अप्रैल में 84 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार सक्रिय हो रहे पश्चिमी विक्षोभों के चलते दिल्ली में बारिश, आंधी और बादल छाए रहने का सिलसिला बना हुआ है, जिससे तापमान नियंत्रित रहा और लोगों को गर्मी से राहत मिली। मई के पहले सप्ताह में भी यही पैटर्न जारी है। विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे फिलहाल भीषण गर्मी के लौटने के आसार कम हैं। राजधानी में घटी बिजली की खपत मौसम में आए बदलाव का असर अब बिजली की मांग पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले दो दिनों में पावर डिमांड में करीब 200-300 मेगावॉट की कमी दर्ज की गई है। बिजली कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को दिल्ली में अधिकतम बिजली मांग 5159 मेगावॉट रही, जो हाल के दिनों के मुकाबले काफी कम है। वहीं रविवार को यह आंकड़ा 5836 मेगावॉट दर्ज किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि बिजली की मांग पूरी तरह से मौसम के मिजाज पर निर्भर करती है। अप्रैल के आखिरी दिनों में तेज धूप और उमस के चलते बिजली की खपत तेजी से बढ़ गई थी और एक दिन मांग 7000 मेगावॉट तक पहुंच गई थी।

झारखंड आबकारी नीति विवाद: अनिल टुटेजा पर क्या हैं आरोप?

रांची  झारखंड के शराब घोटाला मामले में IAS अनिल टुटेजा को जमानत मिल गई है। उन पर झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने और करोड़ों रुपये का कमीशन कमाने का आरोप है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो साल्वेंट जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि कोर्ट ने ये शर्त रखी है कि अगर IAS ने जांच में किसी भी तरह की बाधा डाली, तो EOW अग्रिम जमानत के आदेश को रद कराने वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में टुटेजा को जांच में सहयोग करने व गवाहों को प्रभावित न करने की सख्त हिदायत भी दी है। अभी जेल से निकलना मुश्किल बता दें कि करीब एक सप्ताह पहले छत्तीसगढ़ के चर्चित डीएमएफ घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे अनिल टुटेजा की जमानत याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। ऐसे में उनका जेल से बाहर आना फिलहाल मुश्किल है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने अनिल टुटेजा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और आईपीसी की धारा 420, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई नीति आरोप है कि टुटेजा और अन्य आरोपितों ने झारखंड में छत्तीसगढ़ के आबकारी मॉडल की तर्ज पर अवैध शराब का कारोबार चलाने के लिए सिंडिकेट बनाया था। सिंडिकेट ने झारखंड की आबकारी नीति में बदलाव करवाकर अपने पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया और करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन कमाया। अपनी याचिका में टुटेजा ने ये लगाए आरोप वहीं, अनिल टुटेजा ने कोर्ट को बताया कि यह उसे हमेशा जेल में रखने की साजिश का मामला है। जब भी एक मामले में जमानत मिलने वाली होती है तो जेल में रखने के लिए एक नई FIR दर्ज कर दी जाती है। झारखंड पुलिस ने इसी मामले में अलग से एफआइआर दर्ज की है, लेकिन टुटेजा को आरोपित तक नहीं बनाया गया है। छापेमारी में नहीं मिली कोई अवैध संपत्ति याचिका में कहा है कि बीते पांच साल में पांच अलग-अलग एजेंसियों ने छापेमारी की, लेकिन उनके के पास से एक भी रुपए की बेहिसाब संपत्ति नहीं मिली। जांच एजेंसी के पास कोई डिजिटल सबूत, कॉल रिकॉर्ड या वित्तीय लेनदेन का प्रमाण भी नहीं है, जो उसे झारखंड के अधिकारियों से जोड़ता हो। राज्य सरकार टुटेजा को बताया मास्टरमाइंड छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा, अनिल टुटेजा चावल मिलिंग, डीएमएफ, कोयला और शराब जैसे कई घोटालों का मास्टरमाइंड है। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि टुटेजा ने रायपुर में बैठकें कर झारखंड के अधिकारियों के साथ साजिश रची, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। सिंडिकेट माडल के जरिए बेहिसाब संपत्ति अर्जित की गई।

सरकारी जमीन को लेकर दो गुटों में हिंसा, श्योपुर में 24 घायल, 8 की हालत गंभीर

 श्योपुर /वीरपुर  सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात वीरपुर थाना क्षेत्र के नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। रावत और जाटव समाज के लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला घटना के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया। इतना ही नहीं, पथराव भी हुआ जिससे हालात और बिगड़ गए। इस हिंसा में कुल 24 लोग घायल हो गए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। लंबे समय से चल रहा था विवाद जानकारी के अनुसार, नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने सोमवार रात उग्र रूप ले लिया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते। हल्का पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक ढिलाई के कारण इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। वीरपुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें दबंगों के कब्जे में होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी मामले में वीरपुर पुलिस कार्रवाई कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारी का बयान इस संबंध में महाराज सिंह बघेल ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर दो गुटों में संघर्ष हुआ है। इसमें कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।  

सिद्धार्थनगर हादसा: तेज आंधी में 32 लाख की टंकी टूटकर हवा में लटकी

 सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के खुनियाव ब्लॉक के रमवापुर विशुनपुर गांव में जल जीवन मिशन योजना के तहत बनाई जा रही एक पेयजल टंकी आंधी के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. यह हादसा 5 मई को दोपहर करीब 12 बजे उस समय हुआ जब मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कर्मचारी टंकी के ऊपरी हिस्से में जिंक एलम मटेरियल की बोल्टिंग कर रहे थे. अचानक आए तेज हवा के दबाव के कारण निर्माणाधीन टॉप रूफ टूटकर नीचे की ओर लटक गया. मौसम विभाग की चेतावनी के चलते मजदूर पहले ही नीचे उतर आए थे, जिससे इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई।  32 लाख की लागत से बन रही थी टंकी हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग कंपनी द्वारा बनाई जा रही इस पेयजल टंकी की कुल लागत 32.41 लाख रुपये बताई जा रही है. डेढ़ लाख लीटर की स्टोरेज क्षमता वाली यह टंकी निर्माणाधीन अवस्था में थी।  कंपनी को जिले में ऐसी करीब 150 टंकियां बनाने का जिम्मा मिला हुआ है. स्थानीय लोगों ने जब टंकी के ऊपरी हिस्से को टूटते देखा, तो गांव में अफरातफरी मच गई, हालांकि मजदूरों की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।  इंजीनियर ने बताया कैसे हुआ हादसा जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि टंकी का आरसीसी निर्माण पहले ही पूरा हो चुका था. वर्तमान में कंटेनर में जिंक एलम का काम लेयर दर लेयर चल रहा था. दो लेयर का काम पूरा होने के बाद आज बोल्टिंग की प्रक्रिया जारी थी. करीब 15-16 मीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव इतना अधिक था कि बोल्टिंग पूरी न होने की वजह से ढांचा भार नहीं सह सका. अब इसे दोबारा मानक के अनुसार तैयार कराया जाएगा।  सुरक्षा के मद्देनजर काम रोकने के आदेश घटना की सूचना मिलते ही विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया. मौसम विभाग द्वारा जारी खराब मौसम के अलर्ट को देखते हुए अधिशाषी अभियंता ने जिले में चल रहे सभी टंकी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोकने के आदेश दिए हैं. इंजीनियर जायसवाल के अनुसार, जिले में लगभग 100 ऐसी टंकियां सुरक्षित रूप से पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना और खराब मौसम में काम न करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। 

गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, सीएम ने पानी-बिजली पर कड़ा रुख अपनाया

रांची  राज्य में लगातार बढ़ती गर्मी और हीटवेव के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के उपायुक्तों और वरीय अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में पेयजल आपूर्ति, बिजली व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सख्त निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि गर्मी के इस दौर में आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी क्षेत्रों में पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जलापूर्ति योजनाओं, चापाकलों और टैंकरों की नियमित मॉनिटरिंग हो तथा जहां भी जल संकट की सूचना मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। बिजली आपूर्ति को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि गर्मी के दौरान निर्बाध बिजली आपूर्ति बेहद जरूरी है। ट्रांसफार्मर खराबी, बिजली कटौती और अन्य तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हीटवेव और लू से प्रभावित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में पूरी तैयारी रहनी चाहिए। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां, ओआरएस, पेयजल और पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। ऑफिस से निकलें, जमीनी हकीकत जानें अधिकारी सीएम ने राज्य के सभी उपायुक्तों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने और जमीनी हकीकत का आकलन करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अधिकारी आम लोगों से सीधे संवाद करें, उनकी समस्याएं सुनें और त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। बैठक में प्रशासनिक समन्वय पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें ताकि किसी भी नागरिक को पानी, बिजली या स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में कठिनाई का सामना न करना पड़े। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव (गृह) वंदना दादेल सहित सभी जिलों के उपायुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

बस्तर पर विष्णु देव साय की नजर: नवाचार-रोजगार पर होगी चर्चा, सुशासन तिहार बना आकर्षण का केंद्र

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जगदलपुर दौरे के लिए रवाना हुए। रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि वे महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय में आयोजित नवाचार महाकुंभ में शामिल होंगे। बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। इस कार्यक्रम में खास तौर पर बस्तर क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों पर चर्चा की जाएगी। अब सरकार का फोकस यहां के युवाओं को रोजगार से जोड़ने पर है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश में चल रहे सुशासन तिहार को लेकर कहा कि इसे लेकर जनता में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। पिछले दो दिनों में 6 जिलों का दौरा कर चुके हैं। इस दौरान वे ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक पहुंचकर पेड़ों के नीचे चौपाल लगाकर लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह जानना है कि योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंच रही है या नहीं। लोग राशन, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना का लाभ भी पा रहे हैं और आम जनता संतुष्ट नजर आ रही है। पीएम मोदी के बयान का समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस को “अर्बन नक्सल” कहे जाने वाले बयान पर मुख्यमंत्री साय ने उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी विश्व के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मंत्र के साथ देश का नेतृत्व कर रहे हैं। वो कुछ बोल रहे हैं तो सोच समझ के बोल रहे हैं। विपक्ष पर साधा निशाना चुनावी हार के बाद विपक्ष के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि उन्हें जनता के फैसले को स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हार के बाद आरोप-प्रत्यारोप करना स्वाभाविक है और विपक्ष “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” जैसी स्थिति में है। हार से बौखलाए लोग चुनाव आयोग और ईवीएम पर दोषारोपण कर रहे हैं।

योगी सरकार का बड़ा कदम, गोबर से बनेगी कमाई और ऊर्जा का नया स्रोत

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि और पशुपालन के एकीकरण से ग्रामीण समृद्धि का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने अब राज्य की गोशालाओं को आत्मनिर्भर 'बिजनेस मॉडल' के रूप में ढालने की तैयारी कर ली है। सरकार का लक्ष्य गोबर आधारित कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत और घनामृत के उत्पादन को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर एक मजबूत मार्केटिंग नेटवर्क स्थापित करना है। केमिकल मुक्त खेती और मिट्टी की उर्वरता पर फोकस पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने हाल ही में कृषि और पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर जैविक खेती को मुख्यधारा में लाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रदेश में उपलब्ध लाखों मीट्रिक टन गोबर का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाई जाए। गोबर खाद के उपयोग से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाकर बंजर होती जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने पर जोर दिया जाए। सफल मॉडलों का होगा प्रदेशव्यापी विस्तार झांसी, चंदौली, कानपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में बायोगैस और जैविक खाद के सफल प्रयोगों को अब पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा।     दोहरा लाभ: किसानों को बायोगैस से सस्ती ऊर्जा मिलेगी और संयंत्र से निकलने वाली 'स्लरी' का उपयोग खेतों में सर्वोत्तम खाद के रूप में होगा।     सीबीजी प्लांट: प्रदेश भर में कम्प्रेश्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों के जाल को विस्तार देने की योजना है, जिससे कचरे से कंचन बनाने की राह आसान होगी। मार्केटिंग और मानकीकरण सरकार केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। असली जोर गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर है।     मानकीकरण: खाद की पैकेजिंग, नमी और पोषक तत्वों के कड़े मानक तय किए जाएंगे ताकि किसानों का भरोसा बढ़े।     सहकारी नेटवर्क: सहकारी समितियों के माध्यम से जैविक उत्पादों की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।     रिसर्च: कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे कम लागत वाले सरल मॉडल विकसित करें, जिन्हें आम किसान भी अपना सके।  

पीएम आवास राशि गबन, पेयजल संकट, अतिक्रमण, अवैध खनन और राजस्व मामलों पर प्रशासन ने दिखाई गंभीरता

बिलासपुर कलेक्टर  संजय अग्रवाल ने आज आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में जिलेभर से पहुंचे नागरिकों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए। जनदर्शन में शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से कुल 103 आवेदन विभिन्न विषयों से संबंधित प्राप्त हुए। इस दौरान नगर निगम आयुक्त  प्रकाश सर्वे एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी  संदीप अग्रवाल ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने जनदर्शन में पहुंचे प्रत्येक आवेदक से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने कहा। जनदर्शन में राजस्व, आवास, पेयजल, अतिक्रमण, सामाजिक सुरक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों की अधिकता रही।        जनदर्शन में पचपेड़ी तहसील के ग्राम बिनौरी निवासी बुजुर्ग  तुलसीराम कुर्रे ने प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृत राशि में गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम स्वीकृत 95 हजार रुपए की किश्त अन्य व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कर राशि का दुरुपयोग किया गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ को जांच कर राशि वापस दिलाने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। बेलतरा तहसील के बैमा गांव के ग्रामीणों ने मुक्तिधाम से अतिक्रमण हटाने संबंधी तहसीलदार के आदेश का पालन नहीं होने की शिकायत की। ग्रामीणों ने बताया कि श्मशान भूमि से कब्जा हटाने में बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। कलेक्टर ने एसडीएम बिलासपुर को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।         तखतपुर क्षेत्र से भी कई आवेदन प्राप्त हुए। ग्राम सिलतरा निवासी मती गुलाबा बाई साहू ने शौचालय निर्माण हेतु आर्थिक सहायता की मांग की, वहीं ग्राम चनाडोंगरी निवासी  राजेश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत मजदूरी भुगतान लंबित होने की शिकायत दर्ज कराई। दोनों मामलों में जिला पंचायत को परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करने कहा गया। मोछ गांव के ग्रामीणों ने सामूहिक आवेदन देकर कुम्हार तालाब में अवैध मशीनों से खुदाई कर मुरूम चोरी की शिकायत की। ग्रामीणों ने बताया कि इससे जनजीवन और जलस्रोत दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कलेक्टर ने उप संचालक खनिज को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।        रतनपुर तहसील के ग्राम पोंड़ के ग्रामीणों ने चारडबरी तालाब को एक निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज किए जाने और उनके द्वारा जलस्रोत को पाटे जाने की शिकायत की। कलेक्टर ने कोटा एसडीएम को जांच कर नामांतरण की वैधता परीक्षण करने तथा तालाब संरक्षण हेतु कार्रवाई के निर्देश दिए। तखतपुर के ग्राम कुवां निवासी  प्रतिम वास ने गैस कनेक्शन स्वीकृत होने के बावजूद सिलेंडर सुविधा नहीं मिलने की शिकायत की। कलेक्टर ने खाद्य नियंत्रक को मामले की जांच कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने कहा।        बिल्हा विकासखंड के ग्राम गोढ़ी एवं ग्राम पत्थरखान से पेयजल संकट के मामले भी जनदर्शन में पहुंचे। ग्राम गोढ़ी की सरपंच ने बताया कि गांव में जलस्तर 500 मीटर से नीचे पहुंच गया है तथा जल जीवन मिशन की टंकी वर्षों से बंद पड़ी है। कलेक्टर ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को परीक्षण कर शीघ्र व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए। इसी तरह इमलीभांटा स्थित अटल आवास ब्लॉक-ए के रहवासियों ने आवासीय समस्याओं को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर नगर निगम आयुक्त को आवश्यक निराकरण सुनिश्चित करने कहा गया। जनदर्शन में आज राजस्व सीमांकन, अतिक्रमण, आवास निर्माण, पेयजल और जनसुविधाओं से जुड़े मामलों पर प्रशासन की सक्रियता देखने को मिली। कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निराकरण प्राथमिकता से कर आम नागरिकों को राहत पहुंचाई जाए।

जांच से पहले कार्रवाई! जबलपुर में हादसे वाला क्रूज तोड़ने पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर. बरगी बांध हादसे की जांच अभी जारी है, लेकिन हादसे में शामिल क्रूज को तोड़े जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। लापता पर्यटकों की की तलाश के बीच दुबे क्रूज को तट पर लाने के बाद शनिवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया था. लोगों और मृतकों के स्वजन में गुस्सा बढ़ गया। उनका कहना है कि इस कदम से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिससे हादसे की असली वजह सामने आना मुश्किल हो जाएगा। एसपी बोले- फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा था क्रूज अधिकारियों के बयान अलग-अलग सामने आए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि क्रूज को अंदर फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा गया, जबकि पर्यटन मंत्री ने इसे निकालने के दौरान हुई क्षति बताया। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। हवा और लहरों से टकराकर डूबने से सुरक्षा पर उठे सवाल बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तेज हवा और पानी की लहरों के भार को वह सहन नहीं कर सका। संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया हादसे में बचे वकील रोशन आनंद समेत अन्य पर्यटकों ने भी क्रूज को समय से पहले तोड़े जाने को संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया। बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे चंद मिनटों के अंदर डूब गया। जबलपुर के पास बरगी बांध में हुई इस घटना ने क्रूज की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़ कर दिए है। गुरुवार को घटना के समय क्रूज बरगी बांध में दूसरी बार राइड पर था। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे। तभी लहरों के बीच वह डूब गया था। 19 वर्ष से लगातार चल रहा था क्रूज का संचालन बरगी बांध से होता है। लेकिन क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, 19 वर्ष से लगातार चल रहा था। निर्माता कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी। एमपीटी के कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया कि यह क्रूज हैदराबाद बोट क्लब से खरीदा गया था। कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी संबंधित कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी है। यह क्रूज कैटामारन हाल तकनीक से बना था, जिसमें दो बोट को जोड़कर एक बड़ी बोट बनाई जाती है। यह क्रूज की वर्तमान में देश में प्रचलित आधुनिक तकनीक में से एक बताई जा रही है। जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता दो बोट को जोड़कर बनाए जाने वाले शिप का संतुलन पानी में बेहतर होता है। इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। फाइबर रिनइनफोर्स प्लास्टिक सामग्री के उपयेाग के कारण इसमें जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता है। हवा से पलटा, लहर से क्षतिग्रस्त हुआ, पानी भरा और डूबा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब क्रूज राइड पर निकला था तो मौसम सामान्य था। जब वह सफर पर आधी दूरी में पहुंचा तभी हवा तेज हो गई। क्रू केप्टन ने क्रूज को मोड़कर वापस लाना चाहा, लेकिन तभी तेज हवा और बांध के पानी में उठती लहरों से क्रूज डगमगाने लगा। लहरे लगातार क्रूज को ढकेल रही थी तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ। जहाज को आगे बढ़ाने और उसे घुमाने वाले प्रापेलर्स को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। आशंका है कि पानी की एक लहर ने क्रूज को नीचे की ओर खींचा और दूसरी लहर से उसे उफर उठाया। इसी दौरान वह पलटा और डूब गया। अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी क्रूज में अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी, लेकिन घटनाक्रम तेजी से घटा। क्रूज में मौसम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं था। संचालन से संबंधित जिम्मेदार मौसम विभाग की जारी होने वाली रिपोर्ट और स्थानीय मौसम की स्थितियों को देखकर क्रूज के संचालन का निर्णय करते थे।