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पंजाब DGP ने संभाली जांच की कमान, अमृतसर धमाके में ISI एंगल पर शक

अमृतसर. पंजाब में हाल ही में हुए धमाकों के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं और पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। इसी के चलते पंजाब के डीजीपी गौरव यादव आज अमृतसर पहुंचे। शुरुआती जांच में इस घटना के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है, जिससे प्रदेश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ISI का हो सकता है हाथः DGP डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि रात करीब 10:50 बजे धमाके की सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। प्रारंभिक जांच के आधार पर डीजीपी ने संदेह जताया कि इस घटना के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब इस समय प्रॉक्सी वॉर का सामना कर रहा है और ऐसी घटनाओं के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, अभी तक किसी संगठन द्वारा आधिकारिक रूप से जिम्मेदारी नहीं ली गई है। CCTV फुटेज से कुछ मिले अहम सुराग  उन्होंने जानकारी दी कि जांच के लिए मल्टीपल टीमें काम कर रही हैं, जिनमें ह्यूमन इंटेलिजेंस, टेक्निकल इंटेलिजेंस और फॉरेंसिक टीमें शामिल हैं। शुरुआती तौर पर यह लो-इंटेंसिटी ब्लास्ट प्रतीत होता है और मौके से कुछ शार्पनल भी बरामद हुए हैं, जिससे IED के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। फॉरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। डीजीपी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से कुछ अहम सुराग मिले हैं, लेकिन जांच प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें अभी सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। इसके अलावा मोबाइल फोन डेटा और अन्य डिजिटल सबूतों की भी गहन जांच की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जालंधर में हुई घटना से इसका सीधा संबंध अभी तक सामने नहीं आया है।

लेबर रजिस्ट्रेशन की झंझट खत्म, कारोबारियों को एक दिन में मिलेगा प्रमाणपत्र

रायपुर. छत्तीसगढ़ में व्यापार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। राज्य के श्रम विभाग ने ‘छत्तीसगढ़ दुकान एवं स्थापना नियम, 2021’ में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है। नए नियम के लागू होने से दुकान मालिकों को 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मिलेगा। नई व्यवस्था में दुकानदारों को अपनी दुकान की ‘श्रम पहचान संख्या’ (लेबर रजिस्ट्रेशन) प्राप्त करने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। यही नहीं यदि किसी दुकानदार को अपने पंजीकरण प्रमाण-पत्र में कोई बदलाव (जैसे- नियोजक या भागीदार का नाम, पता, कर्मचारियों की संख्या या कार्य का स्वरूप आदि) करना है, तो इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए मात्र 100 रुपये का संशोधन शुल्क तय किया गया है। आवेदन और शुल्क प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर ही नया संशोधित प्रमाण-पत्र भी ऑनलाइन जारी कर दिया जाएगा। श्रम विभाग के नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक दुकान और स्थापना के मालिक की यह जिम्मेदारी होगी कि वह पंजीकरण प्रमाण-पत्र को दुकान के नाम के साथ अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करे। इसे ऐसे स्थान पर लगाया जाना चाहिए, जहां से यह आसानी से देखा और पढ़ा जा सके। तो दुकानदार की होगी पूरी जिम्मेदारी चूंकि यह नई डिजिटल व्यवस्था पूरी तरह से स्वघोषणा (सेल्फ डिक्लेरेशन) पर आधारित है, इसलिए विभाग ने कड़ा प्रावधान किया है। यदि आवेदन में दी गई कोई भी जानकारी, तथ्य या दस्तावेज झूठे, त्रुटिपूर्ण या भ्रामक पाए जाते हैं, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी केवल दुकानदार की ही होगी। सरकार ने 30 दिनों के भीतर मांगे सुझाव राज्य शासन ने इस राजपत्र अधिसूचना का ड्राफ्ट जारी करते हुए आम जनता और इस नियम से प्रभावित होने वाले व्यक्तियों से आपत्तियां और सुझाव मंगाए गए हैं। अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से 30 दिनों के भीतर उप सचिव, श्रम विभाग, मंत्रालय के कार्यालय में कार्यालयीन समय में अपने सुझाव या आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। तय समय में प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इस तरह करना होगा आवेदन बताया गया है कि इसके लिए श्रम पहचान संख्या के लिए निर्धारित प्रारूप (फॉर्म-2) में ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवश्यक दस्तावेजों और ई-चालान के माध्यम से शुल्क जमा करने के महज 24 घंटे के भीतर वेबपोर्टल के जरिए पंजीकरण प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाएगा। यह प्रमाण- पत्र स्वघोषणा पर आधारित और पूरी तरह से सिस्टम-जनरेटेड होगा, जिसमें किसी भी अधिकारी के फिजिकल हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी।

ममता के इस्तीफा न देने वाले स्टंट की सीमा केवल कल तक

कलकत्ता पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे चार मई को आ गए. इस बार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने परचम लहराया और इस तरह बीते 15 सालों से टीएमसी की सत्ता का सूपड़ा साफ हो गया. चुनाव नतीजे आने के बाद से ही अब तक सीएम रहीं ममता बनर्जी आक्रामक मोड में हैं. उन्होंने पहले तो यह आरोप लगाया कि मतगणना केंद्रों पर वोटों की हेरफेर हुई है. यहां तक कि उन्होंने कहा कि कुछ गुंडों ने उन्हें भवानीपुर के मतगणना केंद्र पर पीटा भी।  ममता बनर्जी ने कहा- वह हारी नहीं, उन्हें हराया गया मंगलवार शाम को ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बीजेपी पर तमाम आरोप लगाते हुए कहा कि, उनके सीएम पद से इस्तीफा देने का सवाल नहीं. ममता बनर्जी के इस बयान से राज्य में एक तरह का संवैधानिक संकट खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है. सवाल उठ रहे हैं कि ममता ने इस्तीफा नहीं दिया तो क्या होगा? असल में बीजेपी 10 मई से पहले-पहले शपथ ग्रहण की तैयारी में जुटी है।  बुधवार को छह तारीख हो चुकी है. सात मई 2026 को पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. ऐसा होने पर सभी पद संवैधानिक रूप से खुद ही समाप्त हो जाएंगे. ऐसे में ममता बनर्जी खुद-ब-खुद सीएम नहीं रहेंगी. यानी वह इस्तीफा दें या न दें, विधानसभा भंग होने के बाद वह वैसे भी सीएम नहीं रहने वाली हैं।  सिर्फ आज तक ही है उनके इस बयान का मतलब? यानी ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने की मियाद सिर्फ एक दिन यानी आज ही के दिन तक है.  इसके बाद उनके इस बयान कि मैं 'इस्तीफा नहीं दूंगी.' इसका भी कोई मतलब नहीं रह जाएगा. चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई विधानसभा के गठन के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है और इसे राज्यपाल को भेज भी दिया है तो ममता बनर्जी के इस्तीफा देने या न देने के लिए भी सिर्फ आज ही का दिन है।  वैसे भी ममता बनर्जी बीते तीन महीने से औपचारिक तौर पर सीएम नहीं हैं. इस बात को बताया है टीएमसी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने. उन्होंने ममता बनर्जी का बचाव करते हुए कहा कि ममता व्यावहारिक रूप से सीएम के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. उन्होंने कहा कि 'पिछले तीन महीनों से राज्य में आचार संहिता लागू थी, इसलिए ममता बनर्जी व्यावहारिक रूप से मुख्यमंत्री के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. ऐसे में इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता।  कल्याण बनर्जी ने कहा, 'पिछले 3 महीनों से मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू है. सरकार कौन चला रहा था? मुख्य सचिव. इसलिए पिछले 3 महीनों से ममता बनर्जी मुख्यमंत्री के तौर पर काम नहीं कर रही थीं. फिर इस्तीफे का सवाल कहां है?' हालांकि ममता बनर्जी के बयान ने ये एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि क्या कोई मुख्यमंत्री चुनाव हारने के बाद भी पद पर बना रह सकता है? संविधान क्या कहता है? दो बड़े कानून के जानकारों ने इस पर अपनी राय दी है।  क्या कहते हैं एक्सपर्ट? वकील और संविधान के जानकार ज्ञानंत सिंह कहते हैं कि ममता का यह बयान संविधान से ज्यादा एक राजनीतिक चाल है. यानी इसका असर कानूनी कम और राजनीतिक ज्यादा होगा. उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 164 के मुताबिक मुख्यमंत्री और बाकी मंत्री राज्यपाल की मर्जी तक अपने पद पर रहते हैं. इसका मतलब यह है कि राज्यपाल चाहें तो ममता को हटा सकते हैं.लेकिन एक पेच है।  अगर राज्यपाल अभी ममता को हटाते हैं और नई सरकार नहीं बनती तो राज्य में एक खालीपन आ जाएगा यानी राज्य चलाने वाला कोई नहीं होगा. यह संवैधानिक रूप से सही नहीं होगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 356 के तहत अगर ममता खुद को मुख्यमंत्री मानते हुए बड़े फैसले लेने लगें तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकते हैं।  एक और अहम बात उन्होंने यह बताई कि अगर कोई मुख्यमंत्री विधानसभा में बहुमत साबित नहीं कर पाता तो राज्यपाल किसी नए मुख्यमंत्री को नियुक्त कर सकते हैं. भले ही हारने वाला मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से मना कर दे. एक और जरूरी बात यह है कि पुरानी विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका है और नई विधानसभा के लिए चुनाव हो चुके हैं. इसलिए SR बोमई वाला फ्लोर टेस्ट का नियम यहां लागू नहीं होगा. पुरानी विधानसभा में ममता को बिना फ्लोर टेस्ट के भी हटाया जा सकता है।  ममता न दें इस्तीफा तो राज्यपाल कर सकते हैं बर्खास्त वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान के जानकार आर के सिंह और भी सीधी बात करते हैं. वो कहते हैं कि अगर ममता इस्तीफा नहीं देतीं तो राज्यपाल सीधे उन्हें बर्खास्त कर सकते हैं. उन्होंने एक बहुत दिलचस्प बात कही. उन्होंने कहा कि जिस दिन विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाता है, उस दिन से मौजूदा मुख्यमंत्री संविधान की भाषा में 'संवैधानिक रूप से मृत' हो जाते हैं. यानी कानूनी तौर पर उनका अस्तित्व खत्म हो जाता है. और हमारे संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि कोई 'संवैधानिक रूप से मृत' नेता देश या राज्य चला सके. उन्होंने संविधान के चार अनुच्छेदों का हवाला दिया।  क्या कहते हैं संविधान के अनुच्छेद 164 और 172 अनुच्छेद 164 कहता है कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और मंत्री राज्यपाल की मर्जी तक पद पर रहते हैं. सरकार तभी तक चलती है जब तक उसे विधानसभा का भरोसा मिला हुआ है. जैसे ही बहुमत जाता है, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. अनुच्छेद 163 कहता है कि राज्यपाल आमतौर पर मंत्रिपरिषद की सलाह पर चलते हैं. लेकिन जब नई सरकार बनानी हो या बहुमत खो जाए तो राज्यपाल अपनी मर्जी से फैसला ले सकते हैं।  अनुच्छेद 172 कहता है कि विधानसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है. जब यह खत्म होता है तो नई विधानसभा को सत्ता में आना ज़रूरी हो जाता है. अनुच्छेद 174 राज्यपाल को विधानसभा बुलाने, बंद करने और भंग करने का अधिकार देता है. चुनाव में जब किसी पार्टी को साफ बहुमत मिलता है तो राज्यपाल उस बहुमत वाले नेता को सरकार बनाने का मौका दे सकते हैं।  उन्होंने SR बोमई केस … Read more

पंजाब में धमाकों पर सियासत तेज, CM मान ने भाजपा को ठहराया माहौल बिगाड़ने का जिम्मेदार

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब में हाल ही में हुए बम धमाकों को लेकर विपक्ष पर हमला बोल दिया है। श्री आनंदपुर साहिब से शुकराना यात्रा शुरू करने के दौरान मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये धमाके भाजपा की चुनावी तैयारी का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा चुनाव से पहले लोगों में डर और तनाव का माहौल बनाकर राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद भाजपा नेताओं ने खुद कहा था कि अब पंजाब की बारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का तरीका यही रहा है कि जहां चुनाव आते हैं, वहां पहले लोगों को आपस में लड़ाया जाता है और फिर डर का माहौल बनाकर वोट हासिल करने की कोशिश की जाती है। छोटे-मोटे धमाकों से पंजाब डरने वाला नहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के लोग समझदार हैं और छोटे-मोटे धमाकों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब पहले भी कठिन और काले दौर देख चुका है, लेकिन यहां के लोगों ने हमेशा शांति और भाईचारे को बनाए रखा है। उन्होंने साफ कहा कि पंजाब एक शांतिप्रिय प्रदेश है और यहां नफरत की राजनीति सफल नहीं होगी। बेदअदबी पर सख्त हुई सरकार मुख्यमंत्री ने हाल ही में लागू किए गए श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कानून संशोधन 2026 का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून से भाजपा परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले बेअदबी की घटनाओं के जरिए माहौल खराब करने की कोशिश की जाती थी, ताकि दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो सके। लेकिन अब नए कानून के तहत सख्त सजा का प्रावधान होने के कारण ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी। उन्होंने मोहाली में हुई बेअदबी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ नए कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है और धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल पश्चिम बंगाल के चुनावों पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि वहां चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ममता बेनर्जी की ओर से यह आरोप लगाया गया है कि भाजपा ने 100 से अधिक सीटों में गड़बड़ी की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव आयोग को किसी राजनीतिक दल की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए, बल्कि स्थिति को स्पष्ट करते हुए लोगों के सवालों का जवाब देना चाहिए। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में नया विवाद खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा की ओर से भी इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। बीजेपी पर लगाए आरोप वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, 'भाजपा एक सांप्रदायिक पार्टी है. बंगाल चुनाव अब खत्म हो चुके हैं और अब वे कह रहे हैं कि पंजाब की बारी है. ये धमाके भाजपा की साजिश हैं. मैं भाजपा से कहना चाहता हूं कि इस तरह की हरकतें बंद करे. जहां-जहां भाजपा चुनाव लड़ना चाहती है, वहां इस तरह की घटनाएं होने लगती हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'क्या भाजपा ऐसे धमाकों के जरिए वोट लेना चाहती है? पंजाब में जो हो रहा है, वह भाजपा की तैयारी का हिस्सा है। शिरोमणि अकाली दल ने सीएम के बयान को बताया राष्ट्र विरोधी शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में धमाकों को लेकर मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. शिरोमणि अकाली दल ने सीएम के बयान को “राष्ट्रविरोधी” करार दिया है. अकाली दल की ओर से कहा गया कि बिना किसी जांच के मुख्यमंत्री इस तरह का आरोप कैसे लगा सकते हैं. पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या सीएम मान अपने इस बयान के जरिए राष्ट्रविरोधी तत्वों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं? अकाली दल ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के पास किसी तरह की खुफिया या पुख्ता जानकारी है तो उसे सार्वजनिक करें और एजेंसियों के सामने रखें. पार्टी नेताओं ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में राजनीतिक आरोप लगाने से पंजाब का माहौल खराब हो सकता है. साथ ही अकाली दल ने राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बता दें कि जालंधर के बीएसएफ चौक पर बीएसएफ मुख्यालय पर भीड़भाड़ वाले इलाके में खड़ी एक स्कूटर में ब्लास्ट हुआ था. चश्मदीदों ने बताया कि ब्लास्ट के कुछ ही देर बाद स्कूटर में आग लग गई, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना के कुछ घंटों बाद, मंगलवार देर रात अमृतसर के खासा इलाके में बीएसएफ ठिकानों के पास स्थित एक आर्मी कैंप के बाहर दूसरा धमाका हुआ. शुरुआती शक के आधार पर माना जा रहा है कि मोटरसाइकिल पर सवार किसी हमलावर ने कथित तौर पर उस जगह पर ग्रेनेड फेंका था. यह इलाका अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मुख्यमंत्री साय ने दूरभाष पर पद्मश्री फुलबासन यादव से की चर्चा, जाना हालचाल

मुख्यमंत्री  साय ने दूरभाष पर पद्मश्री फुलबासन यादव से की चर्चा, जाना हालचाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर फुलबासन यादव ने जताया संतोष, कहा- मिला पूरा सहयोग पुलिस प्रशासन को कड़ी कार्रवाई के दिए गए हैं निर्देश रायपुर पद्मश्री सम्मान से अलंकृत वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती फुलबासन यादव के साथ हुई अप्रिय घटना को मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने आज सुबह स्वयं दूरभाष पर श्रीमती फुलबासन यादव से चर्चा कर उनका कुशलक्षेम जाना तथा घटना की जानकारी ली।    मुख्यमंत्री  साय ने आश्वस्त किया कि इस मामले की हर पहलू से गहन जांच की जाएगी। दोषी चाहे जो हो, बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन को इस संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए हैं। पद्मश्री  फुलबासन यादव ने घटना के बाद पुलिस द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पुलिस प्रशासन के प्रति आभार प्रकट किया।

नूंह में भीषण एक्सीडेंट, यूपी पुलिस के 5 जवानों की मौत

नूंह   हरियाणा के नूंह जिले में कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर  बड़ा हादसा हो गया, जिसमें यूपी पुलिस के पांच कर्मियों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले पांचों पुलिसकर्मी यूपी के जालौन जिले में तैनात थे। यह घटना धुलावत टोल प्लाजा के पास हुई। पुलिस ने बताया कि पलवल की तरफ से आ रही काली एसयूवी का चालक एक वाहन को ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था, तभी उसका नियंत्रण बिगड़ गया और वह आगे चल रहे दूसरे वाहन से टकरा गई। टक्कर के बाद एसयूवी पलट गई और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिसमें अंदर बैठे लोग फंस गए। ताऊरू सदर थाने के प्रभारी शीश राम यादव ने कहा, ''हादसे में मारे गए सभी लोग उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान थे, जो जालौन में तैनात थे। हमने जालौन के एसपी को सूचना दे दी है।''पुलिस ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है। कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे पर गश्त कर रहे एक कर्मचारी ने बताया कि टक्कर की तेज आवाज और धूल के गुबार से सड़क पर घबराहट फैल गई। दूसरे वाहनों ने तुरंत बचाव के लिए ब्रेक लगाए और कुछ समय के लिए ट्रैफिक रुक गया। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि रेस्क्यू टीम और एंबुलेंस को एसयूवी से शव निकालने में काफी दिक्कत हुई। पुलिस के अनुसार, वाहन से मिले पहचान पत्र के जरिए मृतकों की पहचान की गई।रेस्क्यू टीम को शव निकालते समय एक पुलिसकर्मी का आईडी कार्ड मिला, जिससे उनकी पहचान सब-इंस्पेक्टर मोहित कुमार यादव के रूप में हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस से संपर्क किया गया।पुलिस अधिकारी ने बताया कि बाद में क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त एसयूवी को एक्सप्रेसवे से हटाया गया, ताकि ट्रैफिक फिर से सामान्य हो सके।

डॉक्टर के पास मिले छिपे रिकॉर्ड, बटला हाउस और शाहीन बाग का लिंक; आगरा धर्मांतरण रैकेट में खुलासा

 आगरा आगरा के कथित धर्मांतरण रैकेट की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं. आरोपियों से पूछताछ में बटला हाउस और शाहीन बाग तक जुड़े कनेक्शन के साथ फंडिंग नेटवर्क का सुराग मिला है, जबकि रिकॉर्ड एक डॉक्टर के यहां छिपाए जाने की बात भी सामने आई है. पुलिस रिमांड खत्म होने के बाद कोर्ट ने इस मामले के चार आरोपियों को जेल भेजने के आदेश दिए, जबकि रिमांड अवधि बढ़ाने की मांग खारिज कर दी गई।  इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर, जाविश उर्फ जतिन और मौलाना हसन शामिल हैं. पुलिस ने रिमांड के दौरान इनसे पूछताछ की, जिसमें कई अहम खुलासे हुए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, जांच में फंडिंग और कथित ब्रेनवॉशिंग से जुड़े पहलुओं पर जानकारी मिली है।  पुलिस के अनुसार, पूछताछ में यह भी सामने आया कि कुछ अहम दस्तावेज और रिकॉर्ड दिल्ली के बटला हाउस इलाके में एक डॉक्टर के यहां छिपाए गए थे. इसके अलावा शाहीन बाग में लेन-देन से जुड़े दस्तावेज होने की बात भी सामने आई है. इन जानकारियों के आधार पर पुलिस अब संबंधित स्थानों और नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।  इस मामले में मुख्य सरगना अब्दुल रहमान और आयशा समेत कुल 14 आरोपी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित नेटवर्क है, जो विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा था. जांच एजेंसियां अब इस रैकेट की फंडिंग के सोर्स और उससे जुड़े लोगों की पहचान करने में लगी हैं. साथ ही, बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।  पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं. वहीं, सुरक्षा एजेंसियां भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हर पहलू की गहन जांच कर रही हैं। 

पंचायत चुनाव से पहले दरभंगा प्रशासन का बड़ा कदम, जनसंख्या आंकड़ों पर 18 मई तक आपत्ति दर्ज कराने का मौका

दरभंगा. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया के पहले चरण के तहत प्रपत्र-1 यानी निर्वाचन क्षेत्रों की आबादी का प्रारूप जारी कर दिया है। यह प्रकाशन 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर है। अब इन आंकड़ों के आधार पर ही मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति और जिला परिषद जैसे पदों पर आरक्षण की स्थिति निर्धारित होगी। यानी जनसंख्या का यह प्रारूप ही पंचायतों में तय करेगा कि कौन-सी सीट एससी, एसटी, ओबीसी या महिला के लिए आरक्षित होगी। आयोग ने जनता से इस बारे में सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। जिन लोगों को जनसंख्या के इन आंकड़ों या सीमाओं पर कोई संदेह है, वे 18 मई तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इन आपत्तियों का निपटारा 22 मई तक किया जाएगा। फिर पांच जून को प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन होगा। जिले के गजट में प्रपत्र-1 का प्रकाशन नौ जून को होगा। जानकारी या शिकायत के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने टोल-फ्री नंबर 1800-3457-243 जारी किया है। मतदाता यहां सीधे संपर्क कर सकते हैं। जिन क्षेत्रों में भौगोलिक बदलाव हुए हैं या जो क्षेत्र शहरी निकायों यानी नगर परिषद या नगर पंचायत में शामिल हो गए हैं, वहां नए सिरे से डेटा मिलान किया जा रहा है। दावा या आपत्ति के लिए इन आंकड़ों की सूचना जिला समाहरणालय के सूचना पट्ट, जिला पंचायत के सूचना पट्ट, अनुमंडल कार्यालय के सूचना पट्ट, पंचायत कार्यालय के सूचना पट्ट के अलावा जिले की वेबसाइट पर देनी होगी। इतना ही नहीं, राज्य चुनाव आयोग ने प्रपत्र-1 के प्रारूप प्रकाशन पर दावा या आपत्ति के लिए विभिन्न मीडिया में विज्ञापन के साथ-साथ ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों में डुगडुगी बजाकर लोगों को सूचित करने को भी कहा है। ईवीएम से होगा चुनाव पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। जिससे एक साथ छह अलग-अलग पदों के लिए मतदान होगा। यह बदलाव चुनाव प्रक्रिया को अधिक तेज, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत मतदाता को अलग-अलग पदों के लिए बार-बार वोट देने की जरूरत नहीं होगी। एक ही मशीन में सभी पदों के लिए मतदान किया जा सकेगा। मई तक उपलब्ध होगी मशीनें जिला पंचायत राज पदाधिकारी पवन कुमार यादव ने बताया कि जिले को 951 ईवीएम, 5706 कंट्रोल यूनिट और डेटा संग्रहीत करने को लेकर 951 चिप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंचायत चुनाव को लेकर 15 टेबल बनाए जाएंगे। ईवीएम को 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी में रखा जाएगा। एक साथ सभी छह पदों पर मतदान की सुविधा होगी। मतदाता एक साथ छह पदों के लिए वोट डाल सकेंगे। पंचायत चुनाव में मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए अब तक इन सभी पदों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। जिससे समय और संसाधन दोनों अधिक लगते थे। नई व्यवस्था से यह प्रक्रिया आसान और तेज हो जाएगी।

नहीं रहे गीतकार चन्न गोराया वाला, पंजाबी इंडस्ट्री में शोक की लहर

जालंधर. मशहूर गीतकार चन्न गोराया वाला का निधन हो गया। उनके अचानक निधन से कला और साहित्य जगत में गहरा दुख पाया जा रहा है। चन्न गोराया वाला ने अपने गीत लिखने के शुरुआती दिनों में सबसे पहले सतगुरु रविदास महाराज जी की महिमा को अपनी कलम के जरिए प्रकट किया। उनके द्वारा लिखे धार्मिक और भावनात्मक गीत आज भी घर-घर और गुरु घरों में श्रद्धा से सुने जाते हैं और लोगों के दिलों में बसते हैं। पंजाब के मशहूर गायकों और लेखकों ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है। मशहूर सिंगर कंठ कलेर, फिरोज खान, रणजीत राणा, गीतकार महिंदर संधू, रत्तू रंधावा, गायक नीलम जस्सल, दलजीत हंस, हरमेश रसीला, रमेश नुस्सीवाल, जॉनी महे, रमेश महे, बलदेव राही और लेखक मदन बांगड़ समेत कई हस्तियों ने कहा कि चन्न गोराया वाला का जाना पंजाबी संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनका अंतिम संस्कार आज गोराया के श्मशान घाट, तहसील फिल्लौर, जालंधर जिले में किया जाएगा।

हारी सीटों पर कांग्रेस की रणनीति पर साव का तंज, कहा- “इस पार्टी का कुछ नहीं होना”

रायपुर. आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अभी से हारने वाली सीटों पर कांग्रेस ने फोकस करने वाले बयान पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने तंज कसा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का कुछ नहीं होना है. कांग्रेस के पास न नेतृत्व है, ना नीयत है. अर्बन नक्सल की तरह देश में भ्रम और अफवाह फैलाने का काम कर रही कांग्रेस पूरी तरह से एक्पोज हो चुकी है. जनता इनसे दूर जा चुकी है. इसका लाभ उन्हें नहीं होगा. उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मीडिया से चर्चा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी गई है. छत्तीसगढ़ में एक अच्छा वातावरण बना है, बस्तर विकास की ओर आगे बढ़ेगा, बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प पूरा होगा. वहीं कांग्रेस के गृहमंत्री शाह के उद्योगपतियों के लिए जमीन देखने आने वाले बयान पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस अफवाह फैला रही है. वे इसी तरह का बयान देते हैं. जिससे लगता है कि कांग्रेस अर्बन नक्सल्स की तरह काम कर रही है. उन्हें बस्तर में पेयजल की समस्या, अस्पताल, सड़क निर्माण की चिंता नहीं है. 3 लाख 91 हजार आदिवासी भाइयों ने बस्तर ओलंपिक में अपना पंजीयन कराया, उन्हें इसकी चिंता नहीं है. देश की जनता ने कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति को नकारा है. सुशासन तिहार को लेकर कांग्रेस जनता के बीच जाकर सरकार की खामियां गिनाए जाने पर उप मुख्यमंतमरी साव ने कहा कि लोगों ने कांग्रेस को अपने घर, अपने मन से निकाल दिया है, उसका कुछ होना नहीं है. वहीं पद्मश्री फूलबासन यादव के अपहरण की कोशिश पर साव ने कहा कि इस तरह की बात मैने भी सुनी है. प्रशासन संज्ञान लेगा. छत्तीसगढ़ का ये वातावरण नहीं है. वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश को अपराध का गढ़ बनाया. वे किस मुंह से ऐसी बातें बोलते हैं.