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सुपर फास्ट! चीन ने 1000 की स्पीड वाली ट्रेन का सफल परीक्षण किया

बीजिंग  सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो चीन की 1000 किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाली ट्रेन का है. जी हां, चीन 1000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन पर काम कर रहा है और अब चीन ने इसका परीक्षण किया है. सोशल पर दावा किया जा रहा है चीन ने इस खास ट्रेन का एडवांस स्टेड परीक्षण किया है।  ये ट्रेन मैग्नेटिक लेविटेशन वाली वैक्यूम ट्यूब के अंदर 1000 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है. इससे 200 किलोमीटर की दूर कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाएगी. ऐसे में जानते हैं कि आखिर ये ट्रेन कितनी खास है और चीन का ये खास प्रोजेक्ट कैसा है? सोशल मीडिया पर जो वीडियो वायरल हो रहा है,  उसमें ट्रेन की वैक्यूम ट्यूब को दिखाया जा रहा है और इस ट्रेन के बारे में बताया जा रहा है कि ये कितनी तेज है. ये कई मायनों में एयरप्लेन से भी तेज साबित हो सकती है।  ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, ये अल्ट्रा हाई स्पीड लॉ वैक्यूम ट्यूब माग्लेव ट्रांसपोर्ट सिस्टम है. इस ट्रेन सिस्टम की हाई स्पीड 1000 किलोमीटर प्रति घंटा होगी. बताया जा रहा है कि जब ये ट्रेन चलेगी तो बीजिंग से शंघाई का सफर सिर्फ 90 मिनट में हो जाएगा, जो करीब 1200 किलोमीटर है।  4000 तक स्पीड ले जाने पर काम अगर भारत के शहरों से हिसाब से लगाया जाए तो दिल्ली से पटना तक की दूरी करीब 1 घंटे में पूरी हो सकती है. इस ट्रेन की खास बात ये है कि इतनी तेज चलने के बाद भी इस हाईस्पीड ट्रेन में पैसेंजर अपने स्मार्टफोन पर अल्ट्रा-हाई-डेफिनिशन वीडियो देख सकते हैं या ऑनलाइन गेम का आनंद ले सकते हैं. इतनी तेज स्पीड होने के बाद भी इसमें 5 जी इंटरनेट भी चलेगा. इसके साथ ही चीन का ये प्लान भी है कि इस ट्रेन की स्पीड को 4000 तक भी किया जाएगा।  ये ट्रेन ट्यूब के अंदर चलेगी. चीन की 1000 किमी/घंटा की रफ्तार वाली मैगलेव ट्रेन के 2027-2035 के बीच चालू होने की संभावना है. कुछ साल पहले चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CASIC) ने इस मैग्लेव ट्रेन का परीक्षण शांसी स्थित टेस्ट जोन में किया था।  यहां पर दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के अंदर वैक्यूम क्रिएट करके ट्रेन को चलाया गया था. अब चीन इस ट्रेन को बड़े शहरों के बीच चलाने की कोशिश कर रहा है. उत्तर चीन के शांसी प्रांत के डाटोंग शहर में इस ट्रेन के लिए सुपरकंडक्टिंग मैग्लेव टेस्ट लाइन बनाई गई है।  इससे पहले भी चीन हाई स्पीड ट्रेन के मामले में काफी तरक्की कर चुका है और 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड वाली बुलेट ट्रेन चला रहा है। 

ईशा अंबानी ने मेट गाला में बताया, ये हैं दूसरी बार प्रेग्नेंट

मुंबई  सबसे बड़े फैशन इवेंट मेट गाला 2026 में अंबानी परिवार की लाडली ईशा ने फैशन के जलवे बिखेरे. उनके स्टाइलिश लुक ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. वो गौरव गुप्ता की कस्टम मेड गोल्ड टिश्यू साड़ी में दिखीं. उनका ये लुक ट्रैडिशनल और मॉर्डन क्रिएटिविटी का मिक्स था. अपनी साड़ी को ईशा ने ड्रामेटिक गोल्डन कैप के साथ कंप्लीट किया. उनका ब्लाउज हीरे-मोतियों से जड़ा था।  ईशा का इंटनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जहां वो एक लेडी की सेकंड प्रेग्नेंसी अनाउंस करती हुई दिख रही हैं. न्यूयॉर्क की फेमस जूलरी डिजाइन जूलिया कैफे से ईशा मेट गाला इवेंट के दौरान मिलीं. ईशा वीडियो में तैयार हो रही हैं. वो रेड कारपेट पर जाने से पहले टचअप ले रही हैं. तभी रूम में जूलिया की एंट्री होती है. दोनों एक-दूसरे को ग्रीट करती हैं. ईशा उनके पहले बेबी का हाल चाल लेती हैं।  लेकिन तभी ईशा ने जूलिया का बेबी बंप नोटिस किया. वो उनकी सेकंड प्रेग्नेंसी को लेकर सवाल करती हैं. जूलिया बताती हैं कि उनका दूसरा बेबी सितंबर में आने वाला है. जूलिया ने कैप्शन में लिखा- बेबी कैफे सितंबर 2026 में आ रहा है. कभी नहीं सोचा था ईशा अंबानी मेट गाला के दिन मेरी प्रेग्नेंसी अनाउंस करेंगी. फैंस और सेलेब्स ने जूलिया को प्रेग्नेंट होने पर बधाई दी है।  कौन हैं जूलिया? जूलिया जानी मानी न्यूयॉर्क बेस्ड जूलरी इंफ्लुएंसर, डिजाइनर और कंटेंट क्रिएटर हैं. वो सोशल मीडिया पर काफी फेमस हैं. उनके इंस्टा पर 902K फॉलोअर्स हैं. जूलिया की अंबानी परिवार संग अच्छी बॉन्डिंग है. जूलिया कैफे फाइन जूलरी नाम से उनकी जूलरी लाइन है. वो अपने एनर्जेटिक और फास्ट इंफोर्मेटिव जूलरी ब्रेकडाउन वीडियोज के लिए फेमस हैं. वो वीडियोज में सेलेब्स की पहनी गई जूलरी की कीमत, उनकी क्वॉलिटी और कैरेट्स की जानकारी देती हैं. उनके वीडियो लाइफस्टाइल और फैशन को लेकर अपडेट देते हैं।  कैसा है ईशा का मेट गाला लुक? ईशा का मेट गाला लुक भारतीय संस्कृति की झलक दिखाता है. उनके आउटफिट को 50 कारीगरों ने 1200 घंटों में बनाया. उनके लुक को अनीता श्रॉफ अदजानिया ने स्टाइल किया है. जूलरी से जड़ा उनका ब्लाउज सबसे बड़ा हाईलाइट रहा. ईशा ने मां नीता अंबानी के प्राइवेट कलेक्शन की जूलरी को मेट गाला के लिए चुना. उनका ब्लाउज 1800 कैरेट डायमंड, एमराल्ड, पोलकी और कुंदन से सजा है. ईशा का मल्टीलेयर्ड कुंदन नेकलेस, ईयरिंग्स, रिंग्स मां के कलेक्शन से थीं। 

लखनऊ में जमीन हुई महंगी: अनंत नगर में दरें बढ़ीं, 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7 लाख से ज्यादा का अतिरिक्त बोझ

लखनऊ राजधानी लखनऊ में अपना फ्लैट लेना और आसान हो गया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अपनी अफोर्डेबल हाउसिंग योजना अटल नगर को और अधिक बजट फ्रेंडली बना दिया है। अब लोग यहां 10 वर्ष की आसान किस्तों में फ्लैट ले सकेंगे, वह भी पहले से कम ब्याज दर पर। लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने लोगों की मांग पर इसका आदेश जारी कर दिया। छूट तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि देवपुर पारा स्थित अटल नगर योजना में 12 से लेकर 19 मंजिल के 15 टावरों में कुल 2,496 फ्लैट्स हैं। 30 वर्गमीटर से लेकर 54.95 वर्गमीटर क्षेत्रफल के इन फ्लैटों की कीमत लगभग 9.83 लाख रुपये से शुरू होती है। यहां अधिकांश फ्लैटों का लॉटरी से आवंटन किया जा चुका है। 630 फ्लैटों के लिए 18 अप्रैल से 17 मई, 2026 के मध्य ऑनलाइन पंजीकरण खोला गया है। इसमें 01 बीचके के 539 और 02 बीचके के 91 फ्लैट शामिल हैं। टॉवरों में लगभग 2500 फ्लैट बनाए गए हैं अटलनगर योजना में लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने अनंत नगर योजना में जमीन की कीमतें बढ़ा दी हैं। पहले यहां जमीन की कीमत 41150 रुपये प्रति वर्गमीटर थी। जिसे अब बढ़ाकर 44,731 रुपये प्रति वर्ग मीटर कर दिया है। एक झटके में प्रति वर्ग मीटर की कीमत में 3,581 रुपये का इजाफा किया गया है। 200 वर्ग मीटर प्लॉट पर 7.16 लाख ज्यादा चुकाने होंगे कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर मध्यम वर्ग पर पड़ा है। 200 वर्ग मीटर का भूखंड खरीदने वालों को अब पहले के मुकाबले करीब 7,16,200 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। जिन्हें पहले प्लाट आवंटित हो चुका है, उन्हें पुरानी दर पर ही भूखण्ड मिलेगा। नई बुकिंग कराने वालों का नई दर देनी होगी। व्यावसायिक भूखंड भी हुए महंगे आवासीय के दाम बढ़ने से एलडीए की व्यावसायिक भूखंडों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो गई है। पहले 82,300 रुपये प्रति वर्ग मीटर दर प्रस्तावित थी। लेकिन अब यह बढ़कर 89,462 रुपये हो गयी है। यानी 7,162 का इजाफा हुआ है। छह लेन की सड़क बनेगी लखनऊ। लखनऊ में यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सोमवार को योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत आउटर रिंग रोड (किसान पथ) के रैथा अंडरपास से पीएम मित्र पार्क (टेक्सटाइल पार्क) तक 14.280 किलोमीटर लंबाई की छह लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा आईआईएम लखनऊ से आउटर रिंग रोड रैथा अंडरपास मार्ग को दो लेन चौड़ा किया जाएगा। चौड़ीकरण का काम 8.70 किलोमीटर लंबाई में होगा। लोक निर्माण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक परियोजना की पुनरीक्षित लागत ₹546 करोड़ 51 लाख 83 हजार रुपये आंकी गई है। यह परियोजना पीएम मित्र पार्क को बेहतर कनेक्टिविटी देगी, जिससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अलावा सड़क अवसंरचना में सुधार से यातायात सुगमता बढ़ेगी और आमजन को आवागमन में राहत मिलेगी।

घरों से विधानसभा तक का सफर: कलिता माझी बनी बीजेपी विधायक

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार एक ऐसी कहानी उभरी है, जो सिर्फ जीत-हार से कहीं आगे जाकर उम्मीद, संघर्ष और बदलाव की मिसाल बन गई. बीजेपी की कलिता माझी ने, तृणमूल कांग्रेस के श्यामा प्रसन्न लोहार को हराकर औसग्राम (SC) विधानसभा क्षेत्र संख्या 273 में जीत हासिल की है. कलिता माझी ने श्यामा प्रसन्न को 12,535 वोटों के अंतर से हराया।  कलिता माझी को कुल 107692 वोट मिले, जबकि श्यामा प्रसन्न को 95157 वोटों से ही संतुष्ट करना पड़ा. इसके अलावा सीपीआई (एम) के चंचल कुमार माझी को 16478, कांग्रेस के तापस बराल को 2082 और निर्दलीय उम्मीदवार निहार कुमार हाजरा को महज 994 वोट ही मिल सके।  बीजेपी सांसद पी. सी. मोहन ने ‘एक्स’ पर लिखा, “बीजेपी बंगाल की उम्मीदवार कलिता माझी, जो 4 घरों में घरेलू कामगार के तौर पर काम करती हैं और महीने के ₹2,500 कमाती हैं, ने औसग्राम निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की है. यही बीजेपी की ताकत है, जहां एक आम नागरिक भी आगे बढ़ सकता है और एक सचमुच प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है।  औसग्राम सीट से बीजेपी उम्मीदवार कलिता माझी (Kalita Majhi) की जीत ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में आम आदमी की ताकत क्या होती है. चार घरों में घरेलू काम करके हर महीने महज 2,500 रुपये कमाने वाली कलिता माझी का सफर आसान नहीं रहा।  रोज़मर्रा की ज़िंदगी की चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने कभी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन वे विधानसभा तक पहुंचेंगी. लेकिन यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है, जहां जमीन से जुड़ा एक साधारण नागरिक भी अपनी मेहनत और हौसले के दम पर इतिहास रच सकता है।  औसग्राम जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय से पारंपरिक राजनीति का असर रहा है, वहां कलिता माझी की जीत सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकेत भी मानी जा रही है. यह जीत उन लाखों लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं। 

बंगाल के रिजल्ट से पहले यूपी में BJP की सक्रियता, PM मोदी समेत नेता जुटे मोर्चे पर

लखनऊ  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे भी नहीं आए थे और भारतीय जनता पार्टी ने साल 2027 में होने वाले चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी थीं। इसके संकेत भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई पार्टी दिग्गजों के दौरों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों से मिल रहे हैं। बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। वहीं, अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव होने हैं। भाजपा को यूपी में भी असम की तरह हैट्रिक की उम्मीद है। UP में जुटे भाजपा के टॉप नेता 29 अप्रैल को बंगाल में दूसरे चरण का मतदान हुआ है। इससे एक दिन पहले ही भाजपा चीफ और पीएम मोदी 28 अप्रैल को उत्तर प्रदेश पहुंच गए थे। वहीं, जब पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने दल बदल किया, तो बंगाल में चुनावी ड्यूटी निभा रहे कई भाजपा नेता दिल्ली पहुंच गए थे। बंगाल के नतीजों के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नारी शक्ति वंदन (संशोधन) विधेयक का विरोध की कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों को कड़ी सजा मिली है। उन्होंने दावा किया कि सपा को भी जल्द ही महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उनका इशारा उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की ओर था। क्यों अहम है उत्तर प्रदेश साल 2014 में जब भाजपा ने कुल 282 लोकसभा सीटें जीती थीं, तो इसमें यूपी की 71 सीटें भी शामिल थीं। खास बात है कि 80 सीटों वाला यूपी लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा राज्य है। वहीं, 2024 के चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा था और पार्टी घटकर महज 33 सीटों पर आ गई थी। इससे पहले 2019 में भाजपा को यूपी में 62 लोकसभा सीटें मिली थीं। एक ओर जहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव PDA यानी पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। वहीं, भाजपा गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वर्गों को वापस जोड़ने की कोशिश कर रही है जो लोकसभा चुनाव में उनसे छिटक गए थे। अब बीजेपी अपने पुराने वोट बैंक को फिर से हासिल करने के लिए कई बड़े कदम उठा सकती है ताकि यादव और जाटव वोटों के अलावा अन्य जातियों में अपनी पकड़ फिर से बनाई जा सके। बंगाल का जीत बनेगी भाजपा का इंश्योरेंस बंगाल में जीत के साथ ही भाजपा ने उत्तर और पश्चिम की तरह पूर्व में भी मजबूती हासिल कर ली है। हालांकि, दक्षिण में कर्नाटक को छोड़ दिया जाए, तो भाजपा को लोकसभा में खास समर्थन नहीं मिलता है। साथ ही बंगाल की जीत को भाजपा इंश्योरेंस की तरह भी देख सकती है, जहां अगर उसे किसी मजबूत राज्य में लोकसभा चुनाव में झटका लगता है, तो बंगाल से भरपाई की जा सके। यहां कुल 42 लोकसभा सीटें हैं। पंजाब पर भी नजरें कहा जा रहा है कि पंजाब को हमेशा से प्रधानमंत्री मोदी सरकार चुनावी रूप से अहम मानती रही है। सिख बहुल राज्य में भाजपा लगातार समुदाय को अपनी ओर लाने के प्रयास करती रही है। वही, दल सत्तारूढ़ आप को भी कुर्सी से बेदखल करने की कोशिश में है। 7 राज्यसभा सांसदों का आना भाजपा को कुछ हद तक चुनावी रूप से मददगार साबित हो सकता है। चुनाव के नतीजे बंगाल में भाजपा ने ऐतिहासिक 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, असम में शतक लगाकर चुनावी जीत की हैट्रिक पूरी की। इधर, केरल में भी भाजपा की सीटों का ग्राफ बढ़ा है। जबकि, तमिलनाडु में एक्टर विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनी। पुडुचेरी में एनडीए ने जीत हासिल की।

जल गंगा संवर्धन अभियान: पुष्पराजगढ़ में नहरों को मजबूती देने का प्रयास

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान-पुष्पराजगढ़ में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से हो रहा है नहर सुदृढ़ीकरण अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से बदलेगी तस्वीर भोपाल  अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से यहाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। करीब 19 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से यह कार्य पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल अंतिम छोर के खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होगा। लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर लंबा नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के लगभग एक हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आयेगी। अनूपपुर कलेक्टर हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे। पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है। 

बंगाल में बवंडर, लेकिन असली कमाल सीएम योगी का; स्ट्राइक रेट ने दी झकझोरने वाली जीत

लखनऊ  पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं, जिसमें टीएमसी का सूपड़ा साफ हो गया. बीजेपी की इस कदर आंधी चली है कि खुद ममता बनर्जी अपनी भवानीपुर सीट तक हार गईं. इस बार के चुनाव में बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. खुद पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से लेकर तमाम दिग्गज नेता चुनाव प्रचार के लिए पश्चिम बंगाल पहुंचे हुए थे. हाालंकि सबकी नजर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिकी हुई थी कि सीएम योगी ने जहां-जहां चुनाव प्रचार किया, वहां बीजेपी का क्या हाल रहा. बीजेपी ने उन सीटों पर जीत हासिल की है या फिर हार का सामना करना पड़ा. हालांकि जो नतीजे आए हैं, उससे यह जाहिर है कि सीएम योगी का स्ट्राइक रेट बंगाल चुनाव में भी जबरदस्त रहा है. सीएम योगी ने कुल 22 विधानसभा सीटों पर प्रचार किया था, उनमें से 18 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है।  जानिए किस सीट पर सीएम योगी ने किया चुनाव प्रचार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोनामुखी, नंदकुमार, कांथी दक्षिण, बाराबनी, रामपुरहाट, बोलपुर, माथाभंगा, धुपगुड़ी, जॉयपुर, गारबेटा, जोरासांको, चकदहा, उदयनारायणपुर, नबद्वीप, कटवा, बागदा, धानेखाली और राजारहाट गोपालपुर विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाएं की. इसके अलावा उन्होंने बांकुड़ा, कल्याणी और दमदम में रोड शो किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए थे।  किन-किन सीटों पर बीजेपी ने हासिल की जीत सोनामुखी में बीजेपी दिबाकर घरामी, नंदकुमार से बीजेपी के खानरा निर्मल, कांथी दक्षिण से अरूप कुमार दास, बाराबनी से बीजेपी के अरजित रॉय, रामपुरहाच से बीजेपी के धुर्वा साहा, माथाभांगा से बीजेपी के निसिथ प्रामाणिक, धुपगुड़ी से बीजेपी के नरेश रॉय, बांकुडा से बीजेपी के नीलाद्री शेखर दाना, पिंगला से बीजेपी के स्वागत मन्ना, जॉयपुर से बीजेपी के बिस्वजीत महतो, जोरासांको से बीजेपी के विजय झा, चकदहा से बीजेपी के बंकिम चंद्र घोष, नबद्वीप से बीजेपी के श्रुति शेखर गोस्वामी, कटवा से बीजेपी के कृष्णा घोष, बागदा से बीजेपी के सोमा ठाकुर, कल्याणी से बीजेपी के अनुपम बिश्वास, दमदम से बीजेपी के अरजित बख्शी, राजारहाट गोपालपुर से तरुण ज्योति तिवारी जीत गए।  कहां हुई हार धानेखली विधानसभा सीट पर टीएमसी उम्मीदवार असिमा पात्रा ने बीजेपी उम्मीदवार को 13057 वोटों से हराया है. वहीं बोलपुर विधानसभा सीट पर टीएमसी के चंद्रनाथ सिन्हा ने बीजेपी के दिलीप घो, को 13188 वोटों से हरा दिया। 

अग्नि-4 मिसाइल का परीक्षण हो सकता है बंगाल की खाड़ी में, NOTAM जारी

 नई दिल्ली भारत सरकार ने बंगाल की खाड़ी में लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के लिए NOTAM (Notice to Airmen) जारी किया है. यह चेतावनी 25 अप्रैल से 6 मई 2026 तक लागू रहेगी. NOTAM में करीब 3550 किलोमीटर लंबा खतरे का इलाका घोषित किया गया है।  रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान अग्नि-4 मिसाइल का परीक्षण किया जा सकता है. यह परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के आसपास होने जा रहा है, जिससे यह परीक्षण सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी देने वाला माना जा रहा है. अग्नि-4 मिसाइल की विशेषताएं  अग्नि-4 भारत की महत्वपूर्ण मिसाइलों में से एक है. यह एक Intermediate Range Ballistic Missile (IRBM) है।      रेंज: 3500 से 4000 किलोमीटर       वजन: लगभग 17 टन       लंबाई: करीब 20 मीटर       ईंधन: सॉलिड फ्यूल (ठोस ईंधन)       चरण: दो चरण वाली मिसाइल        वॉरहेड: 1000 किलोग्राम तक का परमाणु या पारंपरिक हथियार ले जा सकती है.       विशेषता: बेहद सटीक निशाना लगाने की क्षमता और मोबाइल लॉन्चर पर चलने वाली मिसाइल।  अग्नि-4 भारत की न्यूक्लियर ट्रायड का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह रेल और सड़क दोनों जगहों से लॉन्च की जा सकती है, जिससे दुश्मन को इसे पहले से नष्ट करना बहुत मुश्किल होता है।  क्यों जारी किया गया NOTAM? NOTAM जारी करके भारत ने पायलटों और जहाजों को चेतावनी दी है कि वे तय क्षेत्र में न जाएं. यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में है, जो अग्नि-4 जैसी मिसाइल के परीक्षण के लिए उपयुक्त है. रक्षा सूत्रों के अनुसार, फ्लाइट पाथ और खतरे वाले क्षेत्र की दूरी अग्नि-4 की क्षमता से बिल्कुल मेल खाती है।  ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर परीक्षण का मतलब ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किया गया था. अब ठीक एक साल बाद यह मिसाइल परीक्षण हो रहा है. हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इसे आधिकारिक रूप से वर्षगांठ से जोड़ा नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह परीक्षण भारत की सैन्य तैयारियों और मजबूती का संदेश देगा।  भारत की मिसाइल क्षमता बढ़ रही है हाल के महीनों में भारत ने अपनी मिसाइलों के परीक्षण तेज कर दिए हैं. अग्नि सीरीज के अलावा K-4 (सबमरीन से लॉन्च होने वाली), हाइपरसोनिक मिसाइल LRAShM और ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के 800 किलोमीटर रेंज वाले वर्जन का परीक्षण चल रहा है।  ब्रह्मोस का नया वर्जन 2027 तक भारतीय सेना में शामिल होने वाला है. इन सभी परीक्षणों से साफ है कि भारत अपनी रक्षा क्षमता को लगातार आधुनिक और मजबूत बना रहा है।  क्यों जरूरी है अग्नि-4 जैसी मिसाइल? अग्नि-4 चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती है. यह मिसाइल भारत को क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस नीति को मजबूत करती है. ठोस ईंधन होने के कारण इसे जल्दी लॉन्च किया जा सकता है. दुश्मन के रडार से बचना भी आसान होता है।  बंगाल की खाड़ी में जारी NOTAM और अग्नि-4 का संभावित परीक्षण भारत की सैन्य ताकत और तैयारियों को दर्शाता है. ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगांठ पर यह परीक्षण रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. भारत लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को बेहतर बना रहा है ताकि देश की सुरक्षा अटूट बनी रहे। 

थलापति के विजय रथ के सामने खड़ी हो सकती हैं पिता की दो संतानें: DMK और AIADMK

चेन्नई  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की टीवीके पार्टी ने जबर्दस्त जीत हासिल कर पूरे देश में कोहराम मचा दिया है. राज्य की 234 सदस्यीय विधानसभा में टीवीके को 108 सीटों पर जीत मिली है. देश के इतिहास में यह अपने तरह की अभूतपूर्व घटना है. महज दो साल पुरानी पार्टी अपने दम पर एक बड़े राज्य में इतनी बड़ी जीत हासिल कर सकती है. इस बात का भरोसा अच्छे-अच्छे चुनावी पंडितों को भी नहीं था. टीवीके की स्थापना दो मार्च 2024 को हुई थी. लेकिन, इतनी शानदार जीत हासिल करने के बावजूद टीवीके बहुमत से थोड़ी दूर रह गई है. राज्य में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. उसको कम से कम 10 और विधायकों की जरूरत है. लेकिन, उसके लिए यह 10 का नंबर अब भारी पड़ता दिख रहा है।  एक संभावना यह बन रही है कि टीवीके के विजय रथ को रोकने के लिए राज्य की दोनों प्रमुख पार्टियां डीएमके और एआईएडीएमके पुरानी दुश्मनी भूलकर साथ आ सकती हैं. ऐसा इसलिए भी संभव है कि ये दोनों एक ही पिता की संतानें हैं. इनके बीच एक तरह से खून का रिश्ता है. दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति में DMK और AIADMK लंबे समय से दुश्मन के रूप में जानी जाती हैं. लेकिन दोनों का जन्म द्रविड़ आंदोलन से हुआ है. दोनों की विचारधारा लगभग एक समान है. दोनों द्रविड़ संस्कृति, सामाजिक न्याय, भाषाई गौरव और हिंदुत्व की विरोधी रही हैं।  डीएमके के बंटवारे की कहानी इस कहानी की शुरुआत 1972 में डीएमके के टूटने से होती है. दरअसल, DMK के संस्थापक सीएन अन्नादुरै की मृत्यु के बाद पार्टी में दो बड़े नेता एम. करुणानिधि और एम.जी. रामचंद्रन (MGR) चेहरा बने. करुणानिधि पार्टी अध्यक्ष और मुख्यमंत्री थे, जबकि MGR पार्टी के सबसे बड़े चेहरे, कोषाध्यक्ष और जनप्रिय अभिनेता थे. सबसे बड़ा विवाद पैसे और पारदर्शिता को लेकर हुआ. MGR ने पार्टी नेताओं से अपनी संपत्ति घोषित करने की मांग की. उन्होंने 1972 के मदुरै सम्मेलन के हिसाब-किताब पर सवाल उठाए और पार्टी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. करुणानिधि इसे अपनी सत्ता पर चुनौती मान बैठे. तनाव पहले से बढ़ रहा था. 1971 में करुणानिधि ने MGR को कैबिनेट में जगह देने से मना कर दिया था. इसके अलावा करुणानिधि ने बेटे एमके मुथु को फिल्मों में MGR का मुकाबला करने के लिए तैयार किया, जो MGR को नागवार गुजरा. यही आग अक्टूबर 1972 में सुलग गई. 10-11 अक्तूबर को MGR को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया।      14 अक्टूबर: DMK की आम परिषद ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया।      17 अक्टूबर: MGR ने नई पार्टी अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (ADMK) का ऐलान कर दिया. 1976 में इमरजेंसी के दौरान उन्होंने ऑल इंडिया जोड़कर इसे AIADMK बना दिया।  एक ही पिता की संतानें DMK और AIADMK में वैचारिक रूप से कोई बड़ी दूरी नहीं है. दोनों ही पेरियार के द्रविड़ आंदोलन की विरासत का दावा करती हैं. दोनों समाज के पिछड़े वर्गों, मंदिर प्रबंधन, जाति विरोध और तमिल गौरव की बात करती हैं. उनका झगड़ा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, सत्ता और करुणानिधि-MGR के बीच व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का था, न कि विचारधारा का।  जब एमजीआर बने सीएम वर्ष 1972 नई पार्टी बनने के महज दो महीने में AIADMK में करीब दस लाख सदस्य जुड़ गए, ज्यादातर MGR के फैन क्लबों के जरिए. 1977 के चुनाव में AIADMK ने भारी जीत हासिल की और MGR भारत के पहले अभिनेता मुख्यमंत्री बने. उसके बाद पांच दशक तक तमिलनाडु में DMK और AIADMK के बीच सत्ता की अदला-बदली चलती रही।  2026 में नया मोड़ 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस लंबे द्वंद्व को नई चुनौती मिली है. थलापति विजय की पार्टी टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया है. विजय की लोकप्रियता, युवाओं का समर्थन और सिनेमा की ताकत ने पुरानी दो-दलीय व्यवस्था को हिला दिया है. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या DMK और AIADMK जो पिछले 50 साल से एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे, थलापति विजय के बढ़ते विजय रथ को रोकने के लिए एक साथ आ सकती हैं? कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह संभव है. दोनों पार्टियां जानती हैं कि अगर वे अलग-अलग रहीं तो विजय की TVK तमिलनाडु की राजनीति को नया आकार दे सकती है।  एक ही गठबंधन में डीएमके-एआईएडीएमके ऐतिहासिक रूप से देखें तो दोनों पार्टियों ने राज्य में आपस में कभी गठबंधन नहीं किया. लेकिन, ये दोनों दल एक ही समय में राष्ट्रीय स्तर पर एक ही गठबंधन में साझेदार रह चुके हैं. दिवंगत अटल बिहार वाजपेयी के नेतृत्व वाले एनडीए में 1999 में ये दोनों दल एक ही समय में गठबंधन में साझेदार थे. इसी तरह इन दोनों दलों ने एक समय केंद्र की यूपीए सरकार को समर्थन दिया था. ऐसे में बदले हुए राजनीतिक परिदृश्य में कुछ भी असंभव नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इस वक्त टीवीके ने डीएमके और एआईएडीएमके के अस्तित्व को सीधी चुनौती दी है। 

10 मई को दमोह में पीएम मोदी, स्वावलंबी गोशाला की आधारशिला रखेंगे

दमोह मध्य प्रदेश के दमोह जिले के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रदेश के दौरे पर आ रहे हैं। इस बार वे किसी चुनावी रैली या सभा के लिए नहीं आ रहे हैं पीएम मोदी इस बार एक बेहद खास काम के लिए दमोह आ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 10 मई 2026 को पीएम मोदी पथरिया विधानसभा क्षेत्र में आएंगे। दमोह जिले के पथरिया में एक विशाल स्वावलंबी गोशाला बनने जा रही है। यह गोशाला कोई आम गोशाला नहीं होगी, बल्कि इसे आधुनिक और आत्मनिर्भर मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इसी गोशाला का भूमि पूजन करेंगे और इसकी नींव रखेंगे। 517 एकड़ जमीन पर तैयार होगी इस पूरी योजना के लिए कुल 517 एकड़ जमीन इसके लिए चुनी गई है। ये जमीन विकासखंड पथरिया के तीन गांवों रानगिर, कल्याणपुरा और बिजोरी में है।इतनी बड़ी जमीन पर गोशाला बनने से न केवल गायों को बेहतर ठिकाना मिलेगा, बल्कि इलाके के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी।हाल ही में आईएएस प्रताप नारायण यादव और पुलिस अधीक्षक (SP) श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने खुद मौके पर जाकर जमीन का मुआयना किया।  मुंबई की कंपनी को मिला है जिम्मा मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड ने इस गोशाला के निर्माण के लिए मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी को आदेश जारी कर दिए हैं।पशुपालन विभाग के उपसंचालक डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि कंपनी को सख्त निर्देश दिए गए हैं। साथ ही 10 मई से पहले जमीन की फेंसिंग का काम पूरा हो जाने की बात कही है। इसके अलावा कम से कम 200 गायों के रहने के लिए अस्थायी शेड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा और तैयारियों का जायजा दमोह के एसपी ने साफ किया है कि भूमि पूजन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री के हाथों होना है। इसलिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिले के बड़े अधिकारी लगातार पथरिया का दौरा कर रहे हैं ताकि व्यवस्थाओं में कोई कमी न रह जाए। अंतिम चरण में चल रही तैयारियां स्वीकृत भूमि पर गोशाला के निर्माण और संचालन के लिए मेसर्स श्रीराम मानेक एग्रो प्रोडक्टस प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड भोपाल द्वारा आदेशित किया गया है। दिए गए निर्देश इस संबंध में उपसंचालक पशुपालन डॉ. बृजेंद्र असाटी ने बताया कि मध्य प्रदेश गौसंबर्धन बोर्ड द्वारा गोशाला के संचालन के लिए नियुक्त कंपनी को समय सीमा में भूमि की फेंसिंग और अस्थायी 200 गौवन्श की गोशाला का निर्माण 10 मई 2026 के पहले किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया जायजा एसपी ने कहा कि, इस गोशाला का भूमि पूजन वैसे तो प्रधानमंत्री के सानिध्य में होना प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियां प्रक्रिया के अंतिम चरण में चल रही हैं। इसी के चलते कलेक्टर के साथ – साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया और समय पर निर्धारित काम निपटाने के साथ साथ तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा – निर्देश दिए। पीएम मोदी के पिछले दौरे प्रधानमंत्री मोदी का मध्य प्रदेश से पुराना लगाव रहा है। इससे पहले वे 17 सितंबर 2025 को अपने 75वें जन्मदिन के मौके पर प्रदेश आए थे। उस दौरान उन्होंने कई बड़े काम किए थे।     धार दौरा: बदनावर के भैसोला गांव में देश के पहले पीएम मित्रा पार्क का शिलान्यास किया था।     महिला सशक्तिकरण: 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार' अभियान की शुरुआत की थी। साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को पैसे ट्रांसफर किए थे।     भोपाल दौरा (31 मई 2025): रानी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर भोपाल आए थे। इंदौर मेट्रो के एक खास कॉरिडोर का उद्घाटन किया था।