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खाताधारकों के अधिकारों पर हाई कोर्ट सख्त: छोटे लेनदेन पर अकाउंट फ्रीज करना गलत

चंडीगढ़. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने बैंक खातों को फ्रीज करने की मनमानी प्रवृत्ति पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केवल संदिग्ध लेनदेन की छोटी राशि के आधार पर पूरे खाते को सील करना कानूनसम्मत नहीं है, खासकर तब जब खाताधारक किसी एफआईआर में नामजद न हो और मजिस्ट्रेट का वैधानिक आदेश भी मौजूद न हो। जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने त्रिपत जीत सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए एचडीएफसी बैंक को उनका बैंक खाता एक सप्ताह के भीतर डी-फ्रीज करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उनका बैंक खाता बिना किसी पूर्व सूचना के फ्रीज कर दिया गया। बैंक ने यह कार्रवाई कथित तौर पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के निर्देश पर की थी। उनके खाते में मात्र 5,000 रुपये की एक संदिग्ध एंट्री आई थी, लेकिन न तो उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज था और न ही किसी वित्तीय धोखाधड़ी में उनकी संलिप्तता का आरोप था। सबसे महत्वपूर्ण यह कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत किसी मजिस्ट्रेट का खाता अटैचमेंट आदेश भी नहीं था। बैंक का पक्ष- एजेंसियों के निर्देश पर हुई कार्रवाई सुनवाई में बैंक की ओर से भी स्वीकार किया गया कि बैंक ने केवल एजेंसियों के निर्देशों पर कार्रवाई की और उसके पास मजिस्ट्रेट का कोई आदेश नहीं है। बैंक ने यह भी माना कि उसे याचिकाकर्ता की किसी आपराधिक भूमिका की जानकारी नहीं है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि बीएनएनएस की धारा 106 के तहत सीधे बैंक खाता अटैच या डेबिट फ्रीज नहीं किया जा सकता। ऐसा कदम केवल धारा 107 के तहत सक्षम मजिस्ट्रेट के आदेश से ही संभव है। अदालत ने कहा कि किसी निर्दोष व्यक्ति का पूरा बैंक खाता फ्रीज कर देना अनुपातहीन, मनमाना और आजीविका के अधिकार पर सीधा प्रहार है। अब सिर्फ 5 हजार की राशि रहेगी फ्रीज कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि किया कि साइबर फ्राॅड या संदिग्ध ट्रांजैक्शन की राशि यदि सीमित और पहचान योग्य हो, तो केवल उतनी राशि सुरक्षित रखी जा सकती है, पूरे खाते को बंद करना उचित नहीं। इसी आधार पर अदालत ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता का पूरा खाता तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए, हालांकि विवादित 5,000 रुपये की राशि फिलहाल फ्रीज रहेगी और उसका उपयोग नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में जांच में याचिकाकर्ता की संलिप्तता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन मौजूदा स्थिति में बैंक और एजेंसियां वैधानिक प्रक्रिया से बाहर जाकर नागरिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकतीं। यह फैसला हजारों खाताधारकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनके खाते मामूली संदिग्ध लेनदेन पर अचानक फ्रीज कर दिए जाते हैं।

RCB की रायपुर में एंट्री, मुंबई इंडियंस ने प्रैक्टिस से बढ़ाई मुकाबले की गर्मी

रायपुर. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में IPL 2026 के दो मैच होने वाले हैं, जिसके लिए RCB की टीम आज रायपुर पहुंच गई है। विराट कोहली के साथ ही अन्य खिलाड़ियों का रायपुर एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से RCB की टीम मायरा रिसॉर्ट के लिए रवाना हो गई है। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम देखने को मिले। नवा रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में शुक्रवार को मुंबई इंडियंस की टीम ने खूब प्रैक्टिस की। आईपीएल के इस सीजन में अपना दूसरा मैच खेलने रायपुर पहुंचे रोहित शर्मा ने खूब पसीना बहाया और लंबे-लंबे शॉट लगाए। रोहित ने नेट्स में अपने सिग्नेचर पुल शॉट और बड़े-बड़े हिट्स का जमकर अभ्यास किया। वही मैच के लिए RCB और MI की टीम रायपुर पहुंच गई है। कल 10 मई को होने वाले मैच के लिए आरसीबी और मुंबई की टीमें आज फिर अभ्यास करेगी। 01 घंटे तक ट्रेनर के साथ मैदान पर चर्चा करते दिखे जसप्रीत बुमराह, रनअप और फिटनेस ड्रिल पर रहा फोकस। 18 मिनट तक मुंबई इंडियंस के खिलाड़ियों ने कैचिंग और वार्मअप सेशन किया। 07 विदेशी खिलाड़ियों ने शाम की प्रैक्टिस में हिस्सा लिया, नेट्स पर तेज गेंदबाजों ने बहाया पसीना। 150+ सपोर्ट स्टाफ, सिक्योरिटी और ग्राउंड क्रू मैच तैयारियों में जुटे रहे। 02 नेट्स पर बल्लेबाज और गेंदबाजों की स्पेशल ट्रेनिंग हुई। वीडियो शूट करते रहे खिलाड़ी प्रैक्टिस मैच के दौरान कुछ खिलाड़ी वीडियो शूट करते भी नजर आए। शार्दुल ठाकुर के साथ ही कई खिलाड़ी एक-एक कर वीडियो बनवा रहे थे। जिसमें वे बैट में बॉल को को खेलते हुए बॉटल बॉक्स में डाल रहे थे। इस दौरान बॉल न जाने पर हंसी ठहाके भी लग रहे थे। इस दौरान प्रैक्टिस का वीडियो भी शूट किया जा रहा है। CCTV से निगरानी CCTV से होगी स्टेडियम की निगरानी आईपीएल मैचों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी। पूरे स्टेडियम की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी। शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अधिकारियों के साथ स्टेडियम पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। कलेक्टर ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग के बाद रायपुर पहुंचने वाले दर्शकों की भीड़ को नियंत्रित करने पर्याप्त वालंटियर तैनात किए जाएं। कलेक्टर ने देखी व्यवस्थाएं आईपीएल मैच के लिए शुक्रवार को कलेक्टर डॉ. गौरव ङ्क्षसह ने शहीद वीर नारायण ङ्क्षसह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का जायजा लिया। एक दिन पहले ही उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करने को कहा था। साथ ही छत्तीसगढ़ स्टेट क्रिकेट संघ (सीएससीएस) को निर्देशित किया था कि शासन के सभी विभागों द्वारा तय एसओपी का पालन करते हुए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करें।

23 साल पुराने आदेश पर सवाल, हिंदू पक्ष ने पूछा—ना वजूखाना, ना मीनार, फिर मस्जिद कैसे?

धार  मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से अदालत में मांग की गई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई को भोजशाला परिसर के मूल धार्मिक स्वरूप को बहाल करने का निर्देश दिया जाए और वहां केवल हिंदुओं को पूजा की अनुमति दी जाए।  एएसआई के 2003 के आदेश को दी चुनौती हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को चुनौती दी। इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज अदा करने की अनुमति दी गई है। वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत में कहा कि एएसआई का यह आदेश प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 का खुला उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी संरक्षित स्मारक या तीर्थ स्थल का उपयोग उसके मूल स्वरूप के विपरीत उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। पूजा के अधिकार के उल्लंघन का आरोप हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि एएसआई के आदेश के आधार पर लागू व्यवस्था हिंदुओं के पूजा के अधिकार का उल्लंघन करती है। साथ ही उन्होंने मुस्लिम पक्ष की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह मामला जनहित याचिका नहीं बल्कि सिविल विवाद है और इसकी सुनवाई सिविल कोर्ट में होनी चाहिए। हिंदू पक्ष ने मुस्लिम पक्ष के तर्कों का खंडन करते हुए कहा कि उसके द्वारा दायर जनहित याचिका कोई दीवानी मुकदमा नहीं है। साथ ही हिंदू पक्ष ने यह भी पूछा कि जब उस इमारत में मीनार और वजूखाना दोनों नहीं है तो वह मस्जिद कैसे कहलाएगी। इसके साथ ही सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई की कि वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को 11वीं सदी के इस संरक्षित स्मारक का 'मूल धार्मिक स्वरूप' बहाल करने का निर्देश दे क्योंकि ASI की मौजूदा व्यवस्था से उसके बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ताओं में शामिल संगठन 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' के वकील विष्णु शंकर जैन ने विवादित स्मारक को लेकर ASI के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी और स्मारक में केवल हिंदुओं को उपासना का अधिकार दिए जाने की गुहार लगाई। दरअसल ASI के वर्तमान आदेश के अनुसार विवादित परिसर में हर मंगलवार को हिंदुओं और हर शुक्रवार को मुस्लिमों को उपासना की अनुमति दी गई है। जैन ने कहा कि ASI का यह आदेश प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करता है। ASI के आदेश को बुनियाद अधिकार का उल्लंघन बताया विष्णुशंकर जैन ने कहा कि इस कानून के एक प्रावधान में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित कोई स्मारक पूजास्थल या तीर्थस्थल है, तो उसका उपयोग उसके स्वरूप के विपरीत किसी भी उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा। जैन ने कहा, 'ASI के साल 2003 में दिए गए आदेश के आधार पर जारी व्यवस्था से हमारे उपासना के अधिकारों के साथ ही बुनियादी अधिकारों का भी उल्लंघन हो रहा है।' सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण पर विवादित स्मारक के 'मूल धार्मिक स्वरूप' के अनुरूप कार्य करने का वैधानिक दायित्व है। विष्णुशंकर जैन ने दिया मुस्लिम पक्ष के तमाम दलीलों का जवाब जैन ने मुस्लिम पक्ष की इस आपत्ति को खारिज किया कि भोजशाला विवाद को लेकर 'हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस' की जनहित याचिका वस्तुतः एक दीवानी मुकदमा है और इसे उच्च न्यायालय की रिट कार्यवाही के बजाय किसी दीवानी अदालत में चलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा,'यह कोई दीवानी मुकदमा नहीं है और इसमें तथ्यों से संबंधित कोई विवादित प्रश्न नहीं हैं।' मुस्लिम पक्ष ने दिया उपासना स्थल अधिनियम का हवाला मुस्लिम पक्ष का कहना है कि धार का विवादित स्मारक देश की आजादी की तारीख यानी 15 अगस्त 1947 को मस्जिद के रूप में वजूद में था, लिहाजा उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के प्रावधानों के तहत इसका धार्मिक स्वरूप बदला नहीं जा सकता। हालांकि जैन ने उनकी इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भोजशाला पर यह कानून लागू नहीं होता क्योंकि वह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष के वकील ने पूछा- मीनार या वजूखाना नहीं तो मस्जिद कैसे उधर हिंदू पक्ष के एक अन्य याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी के वकील मनीष गुप्ता ने मुस्लिम पक्ष के दावों पर सवाल उठाए और कहा कि विवादित स्मारक में कोई मीनार या वजूखाना (नमाज से पहले हाथ-मुंह धोने का स्थान) नहीं है, ऐसे में इसे मस्जिद कैसे कहा जा सकता है? तिवारी ने इमारत के जैन मंदिर होने के दावे को भी नकारा साथ ही तिवारी ने भोजशाला के जैन मंदिर होने के दावे को भी गलत बताया और कहा कि यह स्मारक परमार राजवंश के राजा भोज द्वारा 1034 में स्थापित सरस्वती मंदिर है। मामले में अगली सुनवाई 11 मई को होगी। बता दें कि उच्च न्यायालय भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर दायर पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर छह अप्रैल से नियमित सुनवाई कर रहा है। धार की भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है।   मुस्लिम पक्ष ने पूजा स्थल अधिनियम का दिया हवाला सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि धार स्थित यह विवादित स्मारक 15 अगस्त 1947 यानी स्वतंत्रता के समय एक मस्जिद के रूप में मौजूद था। इसलिए पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम 1991 के तहत इसके धार्मिक स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। इस पर हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने जवाब देते हुए कहा कि यह कानून भोजशाला परिसर पर लागू नहीं होता, क्योंकि यह एएसआई द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष ने कहा- भोजशाला मंदिर है, मस्जिद नहीं एक अन्य हिंदू याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी की ओर से पेश वकील मनीष … Read more

नशे की समस्या पर चिंता जताई, सांसद ने मरीजों के बेहतर इलाज और नशा केंद्रों पर दिया जोर

चंडीगढ़  दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में हर सेकंड कीमती होता है। कुछ मिनटों की देरी जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। पंजाब में अब समय के साथ चल रही यह जंग लगातार जीती जा रही है, क्योंकि भगवंत मान सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के तहत तेज और कैशलेस एंजियोप्लास्टी सेवाएं मरीजों को जरूरत पड़ने पर समय पर यह आपातकालीन इलाज उपलब्ध करवा रही हैं। हार्ट अटैक केवल एक चिकित्सीय आपातकालीन स्थिति ही नहीं होता, बल्कि यह परिवारों पर आर्थिक बोझ भी डालता है। पहले इलाज के लिए पैसों का प्रबंध करने, जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने और अस्पताल से मंजूरी लेने में परिवारों का कीमती समय बर्बाद हो जाता था। अब यह स्थिति तेजी से बदल रही है। स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के तहत सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की जांच और आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया, इलाज से पहले भुगतान में होने वाली देरी के बिना, तेजी से पूरी की जा रही है। यह बदलाव विशेष रूप से ‘गोल्डन ऑवर’ — अर्थात हार्ट अटैक के बाद के पहले 60 मिनट — के दौरान कीमती जानें बचाने में निर्णायक साबित हो रहा है। विश्व स्तर पर हृदय संबंधी बीमारियां मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल लगभग 17.9 मिलियन लोगों की मौत हृदय रोगों के कारण होती है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है, जहां इलाज में हुई देरी जानलेवा साबित होती है। पंजाब की स्वास्थ्य प्रणाली अब इस चुनौती से सक्रिय रूप से निपट रही है। राजभर के डॉक्टरों के अनुसार, दिल की बीमारियों के मामले अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हैं। आरामदायक जीवनशैली, तनाव, अस्वास्थ्यकर खानपान और डायबिटीज के बढ़ते मामले इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं। हालांकि, इसके साथ-साथ हृदय संबंधी बीमारियों के आपातकालीन इलाज तक पहुंच भी पहले से बेहतर हुई है। नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई बैठक में तिवारी ने शहर में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खासकर रिहायशी कॉलोनियों और शहरी गांवों में युवाओं में नशे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। कई महिलाओं ने भी उनसे बच्चों में बढ़ते नशे को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सेक्टर-18 के नशा मुक्ति केंद्र समेत शहर के सभी डी-एडिक्शन सेंटर पूरी तरह सक्षम होने चाहिए, ताकि नशे की लत छोड़ना चाहने वाले लोगों को सही इलाज और मदद मिल सके। साथ ही इलाज का खर्च भी कम रखा जाए। फंड से अस्पतालों में स्थायी सुविधाएं बेहतर करे तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीजों को मुफ्त इलाज, जांच और इमरजेंसी सेवाएं मिल रही हैं। इससे लोगों खासकर गरीब और जरूरतमंद वर्ग को काफी राहत मिल रही है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का मकसद हर व्यक्ति तक बेहतर और सस्ता इलाज पहुंचाना होना चाहिए। उन्होंने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों को निर्देश देते हुए कहा कि समिति के फंड का उपयोग मुख्य रूप से अस्पतालों में स्थायी सुविधाएं विकसित करने पर किया जाए। इसमें नए मेडिकल उपकरण खरीदना, अस्पतालों में अतिरिक्त बेड बढ़ाना, मरीजों के बैठने की बेहतर व्यवस्था करना, भवनों की मरम्मत, नई स्वास्थ्य सुविधाएं तैयार करना और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना शामिल होना चाहिए। विकास कार्यों में इस्तेमाल हो फंड तिवारी ने कहा कि अस्पतालों के रोजमर्रा के खर्च जैसे बिजली-पानी के बिल, सामान्य रखरखाव, स्टाफ वेतन, अन्य प्रशासनिक खर्च चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्र सरकार के नियमित बजट से पूरे किए जाने चाहिए, ताकि रोगी कल्याण समिति का फंड विकास कार्यों में इस्तेमाल हो सके। स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के सुझाव बैठक में मौजूद समिति के अन्य सदस्यों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए। सदस्यों ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को कम खर्च में अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरी में डॉक्टरों, दवाइयों और मेडिकल जांच सुविधाओं को बढ़ाया जाना चाहिए। स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों के दौरान स्वास्थ्य योजना के तहत कुल 5,054 हृदय संबंधी सर्जरियां की गई हैं। इनमें 5,000 परक्यूटेनियस ट्रांसल्यूमिनल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी (पीटीसीए) प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनमें डायग्नोस्टिक एंजियोग्राम भी शामिल हैं, जबकि 54 मामलों में पेरिफेरल एंजियोप्लास्टी की गई। इन इलाजों की कुल लागत लगभग 49.6 करोड़ रुपये रही, जिसमें पीटीसीए प्रक्रियाएं संख्या और कुल खर्च दोनों मामलों में सबसे अधिक रहीं। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि इस योजना का प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा, “अब अधिक मरीज उन स्थितियों से भी बच रहे हैं, जिन्हें पहले लगभग जानलेवा माना जाता था। ऐसे नाजुक समय में स्वास्थ्य कार्ड सिस्टम के कारण इलाज की तेजी ही राज्य के लिए जीवनरक्षक बन रही है।” अस्पतालों के कार्डियोलॉजी विभाग को तेजी से नई जरूरतों के अनुरूप ढाला जा रहा है। आपातकालीन प्रोटोकॉल इस प्रकार सुव्यवस्थित बनाए जा रहे हैं कि हार्ट अटैक के संभावित मरीजों की तुरंत जांच हो सके और प्रशासनिक कार्रवाई में फंसे बिना उन्हें आवश्यक इलाज उपलब्ध कराया जा सके। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और राजिंदरा अस्पताल, पटियाला के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ शर्मा ने कहा, “स्वास्थ्य कार्ड लोगों को समय पर इलाज दिलाने में मदद कर रहा है। इलाज के खर्च को लेकर जो हिचकिचाहट पहले होती थी, वह अब काफी हद तक कम हो गई है। पहले कई परिवार इलाज की लागत को लेकर असमंजस में रहते थे, जिसके कारण प्रक्रिया के लिए मंजूरी देने में देरी होती थी।” डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि कैशलेस सुविधा उपलब्ध होने से यह रुकावट लगभग समाप्त हो चुकी है। यह बदलाव जिलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। पहले मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर किए जाने के कारण खतरनाक देरी का सामना करना पड़ता था। अब योजना के तहत अधिक अस्पतालों के सूचीबद्ध होने और बेहतर सुविधाओं से लैस होने के कारण कई केंद्र लंबी दूरी तक रेफर किए बिना ही एंजियोप्लास्टी शुरू करने में सक्षम हो गए हैं। 5 हजार हृदय संबंधी सर्जरियां हुईं पंजाब में स्टेट हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ महीनों … Read more

‘सफाई साथी अभियान’ के तहत पतरातू डैम पर शुरू हुई अनोखी पहल की हो रही चर्चा

रांची रामगढ़ जिला अंतर्गत पतरातू डैम के पास एक नई पहल की शुरुआत हुई है। यहां बीआइटी मेसरा के छात्र छात्राओं ने यत्र तत्र फेंकी हुई पानी की बोतल से बेहद मजबूत डस्टबिन बनाए हैं। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बेहद सशक्त संदेश है, जिसकी खूब चर्चा हो रही है। बीआईटी मेसरा के छात्रों ने वेस्ट वाटर और प्लास्टिक बोतलों से डस्टबिन बनाए। बीआईटी मेसरा के डिपार्टमेंट आफ मैनेजमेंट की मानसी सिंह और उनकी टीम ने 'सफाई साथी अभियान' के तहत पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता पर जोर दिया है। इस तरह का प्रयोग पहली बार राज्य के किसी संस्थान के छात्र छात्राओं द्वारा किया गया है। वेस्ट वाटर बोतलों, प्लास्टिक बोतलों से बनाए गए डस्टबिन को पतरातू में लगाया गया है, जिसे बीआइटी मेसरा के डिपार्टमेंट आफ मैनेजमेंट के छात्रों द्वारा तैयार किया गया है। छात्रा मानसी कुमारी ने बताया कि कहीं भी आप जाएं तो आपके इर्द गिर्द बेकार पड़ी पानी की बोतलें फेंकी रहती हैं, जो हमारे पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है। हमारी टीम ने इन बोतलों को नया रूप देने की ठानी और पतरातु डैम से इसकी शुरुआत की गई है। वहां हमलोग गए और फेंकी हुई बोतल को जमा कर डस्टबिन का रूप देने में लगा गए। जब डस्टबिन तैयार हो गया तो देखने में बेहद आकर्षक लग रहा था। आसपास के लोग भी इस नए प्रयोग को देखने जुट गए। उन्होंने बताया कि बीआईटी मेसरा कैंपस में भी प्रतिदिन बोतलें जहां तहां फेंकी दिख जाती हैं। जिसका उपयोग हम रचनात्मक कार्यों में कर सकते हैं। इस नेक कार्य में संस्थान के यूथ टूरिज्म क्लब का भी भरपूर सहयोग मिला। क्लब की मीनाक्षी, हनाफ, गौतम, स्नेहल, तनिष्क, निधि, ईशा, साकेत, मुस्कान जैसे सहयोगियों ने मिलकर इस कार्य को अंजाम तक पहुंचाया। अपने अनुभव साझा करते मानसी ने बताया कि जब मेसरा कैंपस में फेंकी हुई बोतल को चुनती थी तो वहां सहयोगी और कुछ लोग कहते थे कि एमबीए करने के बाद अब यही काम तुम्हें करना बाकी रह गया है, लेकिन हमने फेंकी हुई बोतल से डस्टबिन बनाने की ठान ली थी तो पीछे नहीं हटी। यही कारण है कि डस्टबिन इंस्टालेशन की शुरुआत पतरातु से की। हालांकि, मेसरा कैंपस में भी जल्द ही एक डस्टबिन इंस्टाल करूंगी। बताया कि आमतौर एक नीले और पीले रंग के डस्टबिन की कीमत 4500 रूपये होती है जबकि बेकार या फेंकी हुई प्लास्टिक बोतलों से यह डस्टबिन महज 1200 रूपये में तैयार की जा रहीं हैं। बोतल को जमा कर की पेंटिंग मानसी सिंह ने बताया कि सबसे पहले हमने फेंकी हुई बोतलों को जमा किया। अच्छी तरह से धोने के बाद बोतल की पेंटिंग की ताकि दिखने में आकर्षक लगे। कहा कि झारखंड में यह पहल पहली बार की जा रही है, जिसमें वेस्ट प्लास्टिक बोतलों से डस्टबिन बनाकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की जा रही है। मानसी ने बताया कि हमने देखा की अक्सर ये बोतलें नालों में चली जाती हैं जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है बल्कि बरसाती दिनों यही जमा बोतलें नाला जाम का कारण बनती हैं और नाले का गंदा पानी उफनकर बाहर निकलता है और गंदगी फैलती है। इस समस्या को देखते हुए मानसी सिंह और उनकी टीम ने 'सफाई साथी अभियान' की शुरुआत करने का निर्णय लिया। इस पहल के अंतर्गत इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को पुनः उपयोग करके डस्टबिन बनाए जा रहे हैं, ताकि कचरे का सही प्रबंधन हो सके और लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी बढ़े। उन्होंने कहा कि इस डस्टबिन को बनाने और पतरातु डैम जाकर इंस्टाल करने में प्रबंधन की अनुमति के लिए चार माह का समय लग गया जबकि आमजनों से जुड़ा यह नवाचार है।

रोहित शर्मा का नया टीवी शो जल्द, टीजर ने बढ़ाया फैंस का एक्साइटमेंट

इंडियन क्रिकेट टीम के स्टार बैटर और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा जो भी काम करते हैं, वो हमेशा उनके फैंस को पसंद ही आता है. फिर चाहे वो कोई इंटरव्यू हो या ऐड, रोहित का निराला अंदाज हमेशा लोगों के दिलों पर छाए रहता है. ऐसे में क्या होगा जब क्रिकेटर वही अंदाज लेकर खुद टीवी पर आ जाएं? तो अब ऐसा जल्दी होने वाला है. रोहित शर्मा सोनी टीवी पर जल्द अपना एक नया रियलिटी शो लेकर आएंगे. बीते दिनों इसका मजेदार टीजर जारी किया गया, जिसमें क्रिकेटर का वही अंदाज दिखा. हालांकि इस टीजर में ये नहीं बताया गया कि उनका शो क्या और किस बारे में होगा. लेकिन रोहित ने अभी से फैंस की एक्साइटमेंट को दोगुना कर दिया है. क्यों अपनी एक लाइन से परेशान हुए रोहित? क्रिकेटर के शो के टीजर में हम उन्हें उनके फैंस से मिलते हुए देखते हैं, जो रोहित से उनकी आइकॉनिक लाइन 'कोई गार्डन में नहीं घूमेगा' बोलने की डिमांड करते हैं. जितने भी फैंस आकर उनसे मिलते हैं, सभी रोहित से यही डिमांड रखते हैं जिससे बाद में वो परेशान भी हो जाते हैं. एक वक्त पर रोहित इस कदर परेशान हो जाते हैं कि वो किसी को कॉल करके अपने घर की छत पर हो रहे गार्डन का काम रुकवा देते हैं. यहां देखें रोहित के नए शो का टीजर: अंत में वो खुद सोचते हैं कि जब उनकी ये एक लाइन इतनी वायरल हो सकती है, तो क्या होगा जब उनका पूरा शो टीवी पर आएगा? जिसके बाद हम खुद रोहित को स्माइल करते देख सकते हैं. सोनी टीवी ने रोहित के शो को सबसे बड़ा एंटरटेनमेंट डेब्यू घोषित किया है. उनके करोड़ों फैंस को बस अब इस शो का इंतजार है, जिसमें वो अपने फेवरेट क्रिकेटर को होस्ट करते देख सकेंगे. जब क्रिकेटर्स ने की होस्टिंग रोहित से पहले कई और क्रिकेटर्स अपना शो लेकर आ चुके हैं, जिसे उन्होंने खुद होस्ट भी किया है. पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली बंगाली टीवी पर अपना क्विज शो 'दादागिरी अनलिमिटेड' के लिए फेमस हैं. इसके अलावा हरभजन सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू, वसीम अकरम, श्रीशांत, सनथ जयसूर्या जैसे वर्ल्ड क्लास क्रिकेटर्स भी टीवी पर नजर आ चुके हैं. क्रिकेटर्स को दर्शकों का हमेशा से प्यार मिला है. अब रोहित शर्मा, जो खुद क्रिकेट के सुपरस्टार माने जाते हैं, वो जब टीवी पर अपना शो लेकर आएंगे तो जनता उसे कितना प्यार देगी ये देखने लायक बात होगी. बात करें रोहित शर्मा की, तो उन्होंने टेस्ट और टी20 क्रिकेट से रिटायरमेंट ले लिया है. वो सिर्फ वनडे क्रिकेट खेलते हैं. इन दिनों रोहित आईपीएल 2026 में मुंबई इंडियन्स के लिए खेलते दिखाई दे रहे हैं. ये सीजन भी उनकी बैटिंग का जलवा दिखाई दे रहा है.

बायोमेट्रिक और फेस रिकग्निशन जांच के बाद ही मिलेगा परीक्षा केंद्र में प्रवेश

जयपुर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रयोगशाला सहायक (Lab Assistant) एवं कनिष्ठ सहायक (Junior Assistant) के कुल 804 पदों पर भर्ती परीक्षा को लेकर प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं. परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए इस बार सुरक्षा के बेहतर इंतजाम किए गए हैं. हाईटेक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस बार अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के अंदर जाने के लिए 'डबल लेयर' सुरक्षा जांच से गुजरना होगा. अभ्यर्थियों की न केवल बायोमेट्रिक जांच की जाएगी, बल्कि फेस रिकग्निशन तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा. इन दोनों प्रक्रियाओं के मिलान के बाद ही परीक्षार्थी को अपनी सीट पर बैठने की अनुमति दी जाएगी. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध परीक्षा  केंद्र के भीतर मोबाइल फोन, ब्लूटूथ, कैलकुलेटर, स्मार्ट घड़ी, बैग या किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना पूरी तरह मना है.  इसके अलावा किताबें या सादा कागज ले जाने पर भी पाबंदी रहेगी. बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सुरक्षित परिवहन और वीडियोग्राफी परीक्षा सामग्री (क्वेश्चन पेपर और ओएमआर शीट) की सुरक्षा के लिए विशेष 'उप समन्वयक दल' तैनात किए गए हैं.  यह दल कोषागार (Treasury) से पेपर बॉक्स को सीधे परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने और परीक्षा समाप्ति के बाद सामग्री को सुरक्षित वापस जमा कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके साथ ही, हर परीक्षा केंद्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीडियोग्राफी भी अनिवार्य की गई है.  एक घंटे पहले बंद होंगे गेट प्रशासन ने परीक्षार्थियों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है कि वे परीक्षा शुरू होने के निर्धारित समय से कम से कम 1 से 2 घंटे पहले केंद्र पर पहुंच जाएं. बोर्ड के नियमों के मुताबिक, परीक्षा शुरू होने से ठीक एक घंटे पहले प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाएंगे.  इसके बाद किसी भी स्थिति में किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा, 804 पदों के लिए हो रही परीक्षा राजस्थान प्रयोगशाला सहायक एवं कनिष्ठ सहायक के कुल 804 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी कर घोषणा की गई थी.  जारी अधिसूचना के अनुसार राजस्थान प्रयोगशाला सहायक आवेदन 2026 (Rajasthan Lab Assistant Application 2026) प्रक्रिया 27 जनवरी से 25 फरवरी तक चली थी.

Prabhas की ‘Spirit’ से टकराव में Salman Khan की SVC63 को 50 करोड़ ओपनिंग का झटका?

Prabhas की Spirit की वजह से Salman Khan की SVC63 कौन सा रिकॉर्ड बनाने से चूक जाएगी? Saif Ali Khan और Saurabh Dwivedi की Kartavya का Trailer कैसा है? क्या Akshay Kumar Salaam-E-Ishq 2 करने वाले हैं? सिनेमा से जुड़ी ऐसी ही और ख़बरों के लिए नीचे स्क्रॉल करें: 'स्पिरिट' के चलते 50 करोड़ भी नहीं कमा पाएगी SVC63? प्रभास की 'स्पिरिट' और सलमान खान की SVC63 आसपास ही रिलीज़ होंगी. 'स्पिरिट' 5 मार्च को आएगी और SVC63 9 या 10 मार्च को. क्योंकि इन्हीं दिनों पर ईद पड़ रहा है. दोनों के बीच क्लैश तय है. और इसका असर दोनों ही फिल्मों के बिज़नेस पर होगा. हालांकि 'स्पिरिट' को सलमान की फिल्म से पहले रिलीज़ होने का अडवांटेज मिलेगा. SVC63 को भी ईद की छुट्टी का फायदा होगा. मगर प्रभास-वांगा के कॉम्बिनेशन की हाइप हिंदी बेल्ट में तगड़ी बन चुकी है. और ये SVC63 की ओपनिंग पर असर डालेगा. कोईमोई के मुताबिक सलमान की फिल्म में 50 करोड़ की ओपनिंग का पोटेंशियल तो है, मगर वो ये कमाई करने से चूक जाएगी. इसकी पहली वजह तो फिल्म का मिड वीक रिलीज़ है. 'स्पिरिट' शुक्रवार को रिलीज़ हो रही है. 6 मार्च को शनिवार के साथ महाशिवरात्रि भी है. वीकेंड और हॉलीडे का फायद 'स्पिरिट' को मिलेगा. जबकि सलमान की फिल्म मंगलवार या बुधवार को आएगी. दूसरा पहलू है स्क्रीन काउंट. SVC63 को स्क्रीन्स तो शेयर करनी ही पड़ेंगी. लिहाज़ा इसके लिए अपना फुल पोटेंशियल शुरुआती हफ्ते में दिखाना मुश्किल होगा. और इन्हीं सब समीकरणों को देखते हुए ट्रेड का मानना है, कि सलमान की फिल्म का 50 करोड़ रुपये की ओपनिंग लेने का टार्गेट इस बार भी अधूरा रह जाएगा. 'टाइगर 3' इस आंकड़े के सबसे करीब पहुंची थी. मगर ये भी 44.5 करोड़ रुपये पर सिमट गई थी.  मैट रीव्स की 'दी बैटमैन 2' का शूट शुरू मैट रीव्स ने 'दी बैटमैन 2' की शूटिंग शुरू कर दी है. आज 8 मई की सुबह उन्होंने सोशल मीडिया पर शूट की कुछ तस्वीरें पोस्ट कीं. कैप्शन में लिखा, 'स्नो टायर्स'. फिल्म में ब्रूस वेन यानी बैटमैन का रोल रॉबर्ट पैटिन्सन कर रहे हैं. हार्वी डेंट के कैरेक्टर में सेबेस्टियन स्टैन नज़र आएंगे. स्कारलेट जोहैन्सन, हार्वी की पत्नी और चार्ल्स डांस, बैटमैन के दुश्मन हार्वी डेंट के पिता का रोल कर रहे हैं. ये फिल्म 1 अक्टूबर 2027 को रिलीज़ होगी.  सैफ़ अली खान की 'कर्तव्य' की ट्रेलर आया सैफ़ अली खान स्टारर फिल्म 'कर्तव्य' का ट्रेलर आया है. सैफ़ इसमें पुलिस ऑफिसर के रोल में हैं. नाम है पवन मलिक. ट्रेलर में दिखाया गया है कि एक जर्नलिस्ट जिसकी उसे हिफ़ाज़त करनी थी, उसकी हत्या कर दी गई है. हर कोई उसे कोस रहा है. इधर उसके घर में भी हालात ठीक नहीं हैं. ट्रेलर में वरिष्ठ पत्रकार सौरभ द्विवेदी की झलक भी दिखी. वो इस फिल्म में अनंत श्री नाम के बाहुबली के किरदार में हैं. और फिल्म के विलन हैं. संजय मिश्रा, रसिका दुग्गल और मनीष चौधरी भी इसमें ज़रूरी किरदारों में हैं. पुलकित के डायरेक्शन में बनी ये फिल्म 15 मई को नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर होगी. 'रागिनी 3' में नरगिस फाखरी की एंट्री 'रागिनी MMS' फ्रैंचाइज़ की तीसरी फिल्म बनने जा रही है. टाइटल है 'रागिनी 3'. तमन्ना भाटिया और जुनैद खान के बाद अब इसमें नरगिस फाखरी को भी कास्ट कर लिया है. बॉक्स ऑफिस वलर्डवाइड के मुताबिक नरगिस इस फिल्म में पुलिस ऑफिसर का रोल करेंगी. इसे शशांक घोष डायरेक्ट कर रहे हैं. सलमान-अक्षय की 'सलाम-ए-इश्क़' का सीक्वल बनेगा साल 2007 की फिल्म 'सलाम-ए-इश्क़' के सीक्वल की ख़बरें हैं. वैरायटी इंडिया के मुताबिक डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने इसकी कास्टिंग भी शुरू कर दी है. अक्षय कुमार का नाम तय हो चुका है. मगर पिंकविला की रिपोर्ट में इस खबर का खंडन किया गया है. इस रिपोर्ट में बताया गया कि अक्षय किसी भी कपैसिटी में निखिल के इस प्रोजेक्ट से नहीं जुड़े हैं.  इटैलियन फिल्म का रीमेक करेंगे शाहिद कपूर? शाहिद कपूर 'बधाई हो' फेम डायरेक्टर अमित शर्मा की फिल्म करने जा रहे हैं. ये इटैलियन साई-फाई कॉमेडी फिल्म 'हसबैंड एंड वाइफ़' का रीमेक है. वैरायटी इंडिया के मुताबिक ये फिल्म बॉडी स्वॉपिंग के कॉन्सेप्ट पर बनेगी. इसमें पति-पत्नी की बॉडीज़ स्वॉप हो जाएंगी. और फिर रूटीन लाइफ़ में सिचुएशनल कॉमेडी होगी. शाहिद का नाम फाइनल हो चुका है. मगर फीमेल लीड अभी तय नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक जान्हवी कपूर और कियारा आडवाणी इस रोल की टॉप कंटेंडर्स हैं.

देशभर में 14 मई को ब्लैकआउट मॉक ड्रिल? सायरन सुनते ही बंद करनी होंगी लाइटें

पूर्णिया. एक बार फिर पूर्णिया समेत सीमांचल के चारों जिले के साथ राजधानी पटना में ब्लैक आउट होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देश के आलोक में किसी भी आपातकालीन स्थितियों से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए आगामी 14 मई को हवाई हमला एवं ब्लैकआउट संबंधी एक वृहद मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। जिला प्रशासन, पूर्णिया की ओर से जारी सूचना में आम जनमानस से यह अपील किया गया है कि 14 मई को शहर में सायरन बजने, अचानक बिजली कटने या आपातकालीन वाहनों की आवाजाही देखकर बिल्कुल भी घबराएं नहीं। यह कोई वास्तविक आपात स्थिति नहीं है, बल्कि हमारी सुरक्षा और बचाव प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए किया जा रहा एक मॉक ड्रिल है। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा दिए जाने वाले दिशा-निर्देशों का पूर्णतः पालन कर इस मॉक ड्रिल को सफल बनाने में अपना सहयोग प्रदान करें। राज्य के छह जिलों में हो रहा है आयोजन केंद्र सरकार के निर्देशानुसार वर्ष में दो बार इस तरह के अर्द्धवार्षिक मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाना है। राज्य के छह नागरिक सुरक्षा जिलों पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया तथा कटिहार में यह आयोजन किया जा रहा है। राज्य स्तर पर नागरिक सुरक्षा निदेशालय को इस मॉक ड्रिल के सफल आयोजन के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है, जिसकी तैयारियां राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन विभाग की निगरानी में की जा रही हैं। इस वृहद अभ्यास के दौरान आपातकाल के विभिन्न परिदृश्यों का सजीव चित्रण और प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया जाएग। बताया गया है कि सायरन बजते ही पूरे क्षेत्र की बत्तियां बंद कर अंधेरा रखना है। इसके लिए विद्युत विभाग के साथ विशेष समन्वय स्थापित किया गया है। इस मॉक ड्रिल में विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय और उनके रिस्पांस टाइम का आकलन किया जाएगा। इसके लिए अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, पुलिस प्रशासन, होमगार्ड, रेड क्रॉस सोसाइटी एवं नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों की विशेष रूप से तैनाती की जायेगी।

लेबनान पर 4-0 की जीत से भारत का धमाका, फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप की उम्मीदें भी मजबूत

सुझोउ (चीन) भारत ने शुक्रवार को अपने आखिरी ग्रुप बी मैच में लेबनान के विरुद्ध 4-0 की शानदार जीत के साथ पहली बार एएफसी अंडर-17 महिला एशियाई कप के क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करके इतिहास रच दिया। भारत का क्वार्टर फाइनल में पहुंचना तब पक्का हो गया जब फिलीपींस और चीनी ताइपे अपने आखिरी ग्रुप सी मैच को 12 या उससे ज्यादा गोल के अंतर से जीतने में नाकाम रहे। भारतीय टीम का दमदार खेल सूझोउ ताइहू फुटबॉल स्पो‌र्ट्स सेंटर में खेले गए मैच में भारत की ओर से प्रीतिका बर्मन ने छठे और 85वें मिनट में दो गोल दागे, जबकि अल्वा देवी सेंजाम ने 36वें मिनट और जया ने 72वें मिनट में गोल कर टीम को ऐतिहासिक उपलब्धि के करीब पहुंचा दिया था। इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंचने से भारत का 2026 फीफा अंडर-17 महिला विश्व कप में स्थान पक्का हो जाएगा।     2005 के बाद मिली जीत भारत ने 2005 के बाद इस टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। इस शानदार जीत ने भारत को टूर्नामेंट की सबसे अच्छी तीसरे स्थान वाली टीमों में से एक के तौर पर क्वार्टर-फाइनल में पहुंचने में मदद की। फिलीपींस को चीनी ताइपे को 12 गोल से हराना था, जबकि चीनी ताइपे को 13 गोल से जीतना था। इससे पहले, भारत को जापान ने 3-0, जबकि आस्ट्रेलिया ने 2-0 से हराया था।