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महिला सुरक्षा पर बड़ा कदम, अब कैब-बाइक टैक्सी ड्राइवरों का होगा ऑनलाइन पंजीकरण और वेरिफिकेशन

 लखनऊ  प्रदेशभर में एप से चलने वाले वाहनों की जल्द ही निगरानी शुरू होगी। ओला, उबर, रैपिडो, बाइक टैक्सी व डिलीवरी वाहनों को भी ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इससे वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का मेडिकल, पुलिस वेरिफिकेशन व फिटनेस टेस्ट आदि कराया जाएगा। यात्रियों खासकर महिलाओं की सुरक्षा में यह कदम अहम साबित होगा। परिवहन विभाग को मिले सुझाव व आपत्तियों का जवाब परिवहन विभाग ने शासन को भेज दिया है। अब इस माह के अंत या अगले महीने नई नियमावली लागू होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 93 में एक जुलाई 2025 को संशोधन किया था। केंद्र सरकार के नियम को उत्तर प्रदेश ने अपनाया है। पहले ओला-उबर आदि पर कोई नियंत्रण नहीं था, लेकिन अब इन्हें भी पंजीकरण कराना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 10 मार्च को ही कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक व वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली 2026 पर मुहर लगाई थी। पांच अप्रैल तक नई नीति के संबंध में सुझाव व आपत्तियां मांगी गई थी। परिवहन विभाग को करीब डेढ़ दर्जन से अधिक आपत्तियां व सुझाव मिले थे। सुझाव मिला था कि एप आधारित वाहनों के लिए जगह-जगह हाल्ट बनाए जाएं, ताकि वहां पर ड्राइवरों के विश्राम करने की व्यवस्था हो। ड्राइवरों पर उम्र की शर्त न हो बल्कि वे जब तक फिट रहे वाहन चला सकें। राज्य परिवहन प्राधिकरण के सचिव सगीर अंसारी ने बताया कि परिवहन विभाग ने पॉलिसी से संबंधित ब्योरा शासन को भेज दिया है। शासन ही इस पर अंतिम निर्णय लेकर नई नियमावली लागू करेगा। वाहनों का पंजीकरण कराने की ऑनलाइन आवेदन की फीस 25 हजार रुपये होगी, वहीं 50 से 100 या इससे अधिक वाहन चलाने वाली कंपनी की लाइसेंसिंग फीस पांच लाख रुपये होगी। नवीनीकरण हर पांच साल में होता रहेगा, इसकी फीस पांच हजार रुपये होगी। इसके लिए परिवहन विभाग एप भी बनाएगा। अब 12 साल पुराने वाहनों का पंजीकरण हो सकेगा, पहले वाहन की आयु आठ वर्ष रखने पर मंथन हुआ था लेकिन, वाहन स्वामियों ने यह कहकर विरोध किया था कि सात वर्ष तक वे बैंक का ऋण ही चुकाते रहते हैं। महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए सभी वाहनों में पैनिक बटन लगे होंगे और वीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस से उन्हें जोड़ा जाएगा। वाहन बुक कराते ही ड्राइवर की पूरी जानकारी मोबाइल पर दिखेगी। यात्रियों व ड्राइवरों का होगा बीमा ओला-उबर या अन्य वाहनों के ड्राइवरों व यात्रियों का पांच-पांच लाख लाख रुपये का बीमा होगा। ड्राइवर का पांच लाख रुपये का हेल्थ व टर्म बीमा 10 लाख रुपये का होगा। शिकायतों की सुनवाई के लिए 24 घंटे ग्रीवांस सेल सक्रिय रहेगी। हर वाहन की रेटिंग होगी, यह रेटिंग यात्रियों के हाथ में रहेगी। उसी के आधार पर ड्राइवरों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।  

‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण का हुआ सफल संचालन

भोपाल मध्यप्रदेश के वन्य जीव संरक्षण इतिहास में कान्हा टाइगर रिजर्व में ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना कार्यक्रम के द्वितीय चरण के सफल संचालन से नया अध्याय जुड़ गया।  लगभग एक शताब्दी पूर्व प्रदेश के वनों से विलुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति की वापसी अब साकार हो रही है। कान्हा टाइगर रिजर्व, मंडला के सुपखार परिक्षेत्र में शुक्रवार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मती समिता राजोरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)  एल. कृष्णमूर्ति ने 4 और जंगली भैंसों को विशेष रूप से निर्मित बाड़े में सफलतापूर्वक मुक्त किया। इस अवसर पर संचालक कान्हा टाइगर रिजर्व  रविंद्र मणि त्रिपाठी, उप संचालक (कोर)  प्रकाश वर्मा, उप संचालक (बफर) सु अमिथा के.बी., समस्त सहायक संचालक, परिक्षेत्र अधिकारी एवं स्थानीय वन अमला उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में वन विभाग जैव विविधता संरक्षण और विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिये विशेष अभियान चला रहा है। इसी के अंतर्गत असम के प्रसिद्ध काजीरंगा टाइगर रिजर्व से ‘जंगली भैंस’ को कान्हा के सुपखार क्षेत्र में पुनर्स्थापित किया जा रहा है। सुपखार वह क्षेत्र है, जहां ऐतिहासिक रूप से जंगली भैंसों की उपस्थिति होने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। परियोजना के प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को 4 ‘जंगली भैंस’ (1 नर और 3 मादा)  को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुपखार स्थित विशेष बाड़े में मुक्त किया था। दूसरे चरण में 4 और जंगली भैंसों के आगमन के साथ कान्हा में इनकी संख्या बढ़कर 8 हो गई है। आगामी चरणों में भी परियोजना को और विस्तार दिया जाएगा। इससे प्रदेश में जंगली भैंसों की स्थायी और स्वस्थ आबादी विकसित होगी। काजीरंगा टाइगर रिजर्व से कान्हा टाइगर रिजर्व तक लगभग 2,220 किलोमीटर की लंबी दूरी विशेष वन्यजीव परिवहन वाहनों से तय की गई। यात्रा के दौरान दो विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम लगातार स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी करती रही। सहायक संचालक एवं परिक्षेत्र अधिकारी ने पूरे अभियान का नेतृत्व किया। यह अभियान लगभग 72 घंटे तक चला। ‘जंगली भैंस’ भारतीय वन्यजीव धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है, साथ ही यह वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में भी अहम भूमिका निभाता है। ‘जंगली भैंस’ की वापसी से कान्हा क्षेत्र की जैव विविधता और अधिक समृद्ध होगी और परियोजना देश में वन्यजीव पुनर्स्थापना के सफल मॉडल के रूप में स्थापित हो सकेगी। मध्यप्रदेश, बाघ, चीता और गिद्ध संरक्षण जैसे अभियानों के लिए पहचान बना चुका है। ‘जंगली भैंस’ पुनर्स्थापना अभियान से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर अग्रसर है।  

गदर 3 में लौटेगी सकीना, बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ का टारगेट

बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फ्रैंचाइजी 'गदर' के फैंस के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. फिल्म में 'सकीना' का यादगार किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस अमीषा पटेल ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि 'गदर 3' जरूर बनेगी. अमीषा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक बेहद जोश भरा नोट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने फिल्म के भविष्य और इसके बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस को लेकर बड़ी बात कही है. उन्होंने साफ कर दिया है कि आने वाली फिल्म पिछली दोनों पार्ट्स से कहीं ज्यादा भव्य और दमदार कहानी वाली होगी. अमीषा के इस ऐलान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. अमीषा पटेल ने क्या किया? अमीषा पटेल ने अपने पोस्ट में लिखा कि 'गदर 3' जब भी आएगी, सिनेमाघरों में तूफान लेकर आएगी. उन्होंने कहा कि दर्शकों के बेशुमार प्यार और भगवान के आशीर्वाद से इस फ्रैंचाइज़ी का कद इतना बड़ा हो चुका है कि इसके लिए बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ रुपये कमाना कोई बड़ी बात नहीं, बल्कि यह तो महज एक शुरुआती आंकड़ा है. एक्ट्रेस ने फैंस को भरोसा दिलाया कि इस बार फिल्म का पैमाना और इसकी स्क्रिप्ट पहले से कहीं ज्यादा बड़ी और प्रभावशाली होने वाली है, जिसके लिए दर्शकों को तैयार रहना चाहिए. पीआर गेम पर भी दिया रिएक्शन अपनी बात रखते हुए अमीषा ने फिल्म इंडस्ट्री में चल रहे पीआर (PR) स्टंट्स पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने लिखा कि उनके खाते में 'कहो ना प्यार है', 'गदर 1' और 'गदर 2' जैसी तीन बड़ी सोलो ब्लॉकबस्टर फिल्में हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड तोड़ कमाई की. अमीषा ने तंज कसते हुए कहा कि आज भी ये फिल्में उनके को-स्टार्स के करियर की सबसे बड़ी हिट्स में गिनी जाती हैं. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शायद उनकी पीआर मशीनरी दूसरी एक्ट्रेसेस के मुकाबले थोड़ी कमजोर है, लेकिन उनके पास असली हिट फिल्मों का रिकॉर्ड है. कुछ साल पहले, अमीषा ने 'गदर 3' के बारे में एक फ़ैन के सवाल का जवाब देते हुए X पर लिखा था, 'मुझे सकीना (गदर में उनका किरदार) बहुत पसंद है, और आप सभी का सकीना के प्रति जो प्यार है, मैं उसकी बहुत कद्र करती हूं. लेकिन हां, अगर मुझे 'गदर 3' का ऑफर मिलता है, तो मैं इसे तभी करूंगी, जब मैं इसकी कहानी (script) से पूरी तरह से खुश होऊंगी, ठीक वैसे ही, जैसे मैं 'गदर 1' के समय खुश थी.' 'गदर 2' साल 2023 में रिलीज हुई थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा दिया था. 'गदर 2' के जरिए अमीषा ने कई सालों बाद बड़े पर्दे पर वापसी की थी. लेकिन दर्शकों से उन्हें जो प्यार और तारीफ मिली, उसने उनकी लंबे समय की गैर-मौजूदगी की भरपाई कर दी. सनी देओल के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब पसंद किया.

गुजरात ने ठोके 230 रन, राजस्थान के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य; गिल का शतक अधूरा

जयपुर  गुजरात टाइटंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दमदार शुरुआत की है। शुभमन गिल और साई सुदर्शन के बीच पहले विकेट के लिए 118 रन की साझेदारी हुई। साई सुदर्शन 36 गेंद में 55 रन बनाकर आउट हुए। जोस बटलर ने 10 गेंद में 13 रन बनाए। कप्तान शुभमन गिल 44 गेंद में 84 रन बनाकर पवेलियन लौटे। जेसन होल्डर 7 गेंद में 7 रन ही बना सके। राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच शनिवार को सवाई मानसिंह स्टेडियम में आईपीएल मुकाबला हो रहा है। यशस्वी जायसवाल राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी कर रहे हैं। जायसवाल को यह जिम्मेदारी नियमित कप्तान रियान पराग की अनुपस्थिति में सौंपी गई है। पराग पिछले मैच में हैमस्ट्रिंग (मांसपेशियों में खिंचाव) की चोट के कारण टीम से बाहर हो गए थे। गुजरात टाइटंस ने अपनी टीम में एक बदलाव किया और प्रसिद्ध कृष्णा को मानव सुथार की जगह शामिल किया। राजस्थान रॉयल्स ने दो बदलाव करते हुए शिमरोन हेटमायर और यशराज पुनिया को टीम में शामिल किया। राजस्थान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। राजस्थान-गुजरात प्लेइंग इलेवन गुजरात टाइटंस (प्लेइंग इलेवन): शुभमन गिल (कप्तान), साई सुदर्शन, जोस बटलर (विकेट कीपर), निशांत सिंधु, वाशिंगटन सुंदर, जेसन होल्डर, राहुल तेवतिया, राशिद खान, अरशद खान, कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज राजस्थान रॉयल्स (प्लेइंग इलेवन): यशस्वी जायसवाल (कप्तान), ध्रुव जुरेल (विकेट कीपर), शिमरोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जडेजा, शुभम दुबे, दसुन शनाका, जोफ्रा आर्चर, तुषार देशपांडे, बृजेश शर्मा, यशराज पुंजा

बिंदोली रोकने और मारपीट के खिलाफ सड़क पर उतरा समाज, भीम आर्मी ने किया समर्थन

 उदयपुर राजस्थान के उदयपुर जिले में एक दुल्हन ने अपनी बिंदोली रोके जाने और मारपीट के विरोध में गुरुवार को कलेक्ट्रेट के बाहर अनूठा प्रदर्शन किया. डबोक के हरियाव गांव की रहने वाली यह दुल्हन समाज के लोगों और भीम आर्मी के सदस्यों के साथ गाजे-बाजे के साथ घोड़ी पर सवार होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंची. इस दौरान प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई. बिंदोली के दौरान हुआ था विवाद पूरा मामला 29 अप्रैल का है, जब हरियाव गांव में मेघवाल समाज की इस दुल्हन की बिंदोली निकाली जा रही थी. आरोप है कि बिंदोली के दौरान स्वर्ण समाज और मेघवाल समाज के कुछ लोगों के बीच कहासुनी हो गई. विवाद इतना बढ़ा कि दुल्हन को घोड़ी से नीचे उतार दिया गया और मामला मारपीट तक जा पहुंचा. घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मामला दर्ज किया था, लेकिन समाज में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश था. भीम आर्मी ने समर्थन में निकला जुलूस इसी घटना के विरोध में आज समाज के लोग और भीम आर्मी के कार्यकर्ता टाउन हॉल में एकत्रित हुए. वहां से दुल्हन को दोबारा घोड़ी पर बिठाया गया और शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए जुलूस के रूप में कलेक्ट्रेट लाया गया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि समाज की परंपराओं और सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. '12 आरोपी थे, सिर्फ 4 को पकड़ा' दुल्हन पूजा मेघवाल और समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस ने 12 में से सिर्फ 4 आरोपियों को पकड़ा है. विरोध प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा गया. इसमें मांग की गई है कि हरियाव गांव की घटना में शामिल शेष आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

वार्डबंदी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अकाली दल की चुनौती नहीं हुई स्वीकार

बठिंडा. बठिंडा नगर निगम चुनावों को लेकर शिरोमणि अकाली दल द्वारा दायर की गई याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इस याचिका में नगर निगम की वार्डबंदी, वार्डों की सीमाओं और मतदाताओं की संख्या को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। यह याचिका शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज इकबाल सिंह बबली ढिल्लों की ओर से दाखिल की गई थी। अकाली दल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि बठिंडा नगर निगम की वार्डबंदी प्रक्रिया के दौरान कई तरह की अनियमितताएं की गई हैं। पार्टी का कहना था कि कुछ वार्डों में मतदाताओं की संख्या असमान रूप से तय की गई है, जबकि कई इलाकों की सीमाएं भी गलत तरीके से निर्धारित की गई हैं। अकाली दल ने दलील दी थी कि यह सब सत्ताधारी पक्ष को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है। याचिका में पारदर्शिता पर उठे थे सवाल याचिका में यह भी कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वार्डबंदी और मतदाता सूचियों की दोबारा समीक्षा की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं का मानना था कि यदि इस प्रकार की गड़बड़ियों को नहीं रोका गया तो नगर निगम चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होंगे। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद बठिंडा नगर निगम चुनावों को लेकर चल रही कानूनी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई है। इस फैसले के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। सत्ताधारी पक्ष ने फैसले का किया स्वागत सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने कहा कि पार्टी ने जनता की आवाज और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह मामला अदालत के समक्ष रखा था। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि वार्डबंदी को लेकर लोगों में अब भी नाराजगी है और पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक स्तर पर उठाती रहेगी। वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से विवादित बनाने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों और निर्धारित प्रावधानों के तहत पूरी की गई है।

बिहार सरकार का नया समीकरण: कैबिनेट विस्तार में युवाओं और नए चेहरों पर भरोसा

पटना बिहार कैबिनेट विस्तार में बीजेपी और जदयू ने नए चेहरों पर ज्यादा भरोसा जताया है। सम्राट मंत्रिमंडल में कई वरिष्ठ और पुराने मंत्रियों का प्रभाव कम हुआ है, जबकि पहली बार मंत्री बने नेताओं को अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीजेपी कोटे से मंत्री बने मिथिलेश तिवारी को शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। नीतीश सरकार में यह विभाग जदयू के पास था, लेकिन अब सम्राट सरकार में इसे बीजेपी को दिया गया है। मिथिलेश तिवारी पहली बार मंत्री बने हैं और उन्हें कैबिनेट के सबसे अहम विभागों में से एक सौंपा गया है। सम्राट कैबिनेट में नए चेहरों की एंट्री वहीं, पिछली सरकार में बीजेपी के पास रहा स्वास्थ्य विभाग इस बार जदयू को मिला है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी पहली बार मंत्री बने निशांत कुमार को सौंपी गई है। इसी तरह जदयू विधायक डॉ. श्वेता गुप्ता को समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। वह पहली बार विधायक बनी हैं और पार्टी ने उन्हें बड़ा विभाग देकर भरोसा जताया है।   गोपालपुर से विधायक बुलो मंडल को भी पहली बार मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है। उन्हें ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी मिली है। यह विभाग करीब तीन दशक तक बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास रहा था। इसके अलावा, बिहपुर से विधायक ई. शैलेन्द्र को पथ निर्माण विभाग सौंपा गया है। वहीं, श्रेयसी सिंह और लेशी सिंह का भी नए मंत्रिमंडल में कद बढ़ा है। कई पुराने नेताओं का घटा कद वहीं, नए मंत्रिमंडल में कई पुराने मंत्रियों का कद घटा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव लंबे समय से ऊर्जा विभाग संभाल रहे थे। नई सरकार में उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया है, लेकिन ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी उनसे वापस ले ली गई है। इसी तरह, नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में गिने जाने वाले अशोक चौधरी का भी नई सरकार में प्रभाव कम हुआ है। पहले उनके पास ग्रामीण कार्य विभाग जैसा महत्वपूर्ण मंत्रालय था, लेकिन अब उन्हें खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। पूर्व शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का भी नए मंत्रिमंडल में कद घटा है। सम्राट कैबिनेट में उन्हें ग्रामीण कार्य विभाग सौंपा गया है। पहले उनके पास 68,216 करोड़ रुपये के बजट वाला शिक्षा विभाग था, जबकि अब उन्हें करीब 11,312 करोड़ रुपये के बजट वाला विभाग मिला है। इसके अलावा, पूर्व समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी, प्रमोद चंद्रवंशी, संजय टाइगर और रामकृपाल यादव के विभागों में भी बदलाव किया गया है, जिससे उनके राजनीतिक कद में कमी मानी जा रही है।

हरा सोना, नई उड़ान: वनोपज से आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़

रायपुर छत्तीसगढ़, जिसे हर्बल स्टेट के रूप में जाना जाता है, आज अपनी समृद्ध वन संपदा और दूरदर्शी शासकीय नीतियों के बल पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहा है। यहाँ के वनों से प्राप्त होने वाला ग्रीन गोल्ड अब केवल स्थानीय उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाज़ारों में अपनी चमक बिखेर रहा है। छत्तीसगढ़ की यह पहल न केवल वनों का संरक्षण कर रही है, बल्कि ग्रामीण समाज में स्वावलंबन, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा की एक नई चेतना का संचार कर रही है। ‘ग्रीन गोल्ड’ (हरा सोना) वनों की असली पूँजी छत्तीसगढ़ में वनोपज को श्हरा सोनाश् कहा जाता है, जो राज्य की आर्थिक रीढ़ है। तेंदूपत्ता एवं बांस बहुमुखी उपयोगिता के कारण इन्हें प्रमुखता से श्हरा सोनाश् माना जाता है। लाख, शहद और दुर्लभ औषधीय पौधों के साथ-साथ सागौन, साल, बीजा और शीशम जैसे कीमती वृक्ष यहाँ प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। आधुनिक प्रसंस्करण के माध्यम से इन कच्चे माल को उच्च मूल्य के उत्पादों में बदला जा रहा है। जामगांव एम केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और वन मंत्री  केदार कश्यप द्वारा लोकार्पित यह इकाई वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था का पावरहाउस है। आंवला, बेल, गिलोय और अश्वगंधा जैसे उत्पादों को जूस, कैंडी और हर्बल पाउडर में परिवर्तित किया जाता है। वैज्ञानिक भंडारण यहाँ 20 हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले अत्याधुनिक गोदाम हैं, जो उपज को सुरक्षित रखते हुए संग्राहकों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाते हैं।           छत्तीसगढ़ हर्बल्स स्थानीय से वैश्विक तक राज्य सरकार का यह आधिकारिक ब्रांड शुद्धता और प्राकृतिक उत्पादों का पर्याय बन चुका है। संजीवनी स्टोरों की संख्या 30 से बढ़कर अब 1,500 से अधिक हो गई है। ई-कॉमर्स अब ये उत्पाद अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हैं। प्रमुख उत्पाद भृंगराज तेल, नीम तेल, च्यवनप्राश, शुद्ध शहद, महुआ उत्पाद, बेल शर्बत और विभिन्न आयुर्वेदिक चूर्ण। महिला सशक्तिकरण अर्थव्यवस्था की रीढ़           इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में महिला स्व-सहायता समूह हैं। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाएं मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण और पैकेजिंग का कार्य संभाल रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन में कमी आई है और परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह मॉडल आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्तश् बनाने का सफल उदाहरण है।           हर्बल एक्सट्रैक्शन यूनिट (2025) भविष्य की राह को देखते हुए वर्ष 2025 में स्थापित इस यूनिट ने छत्तीसगढ़ को हर्बल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित कर दिया है। यहाँ औषधीय पौधों से उच्च गुणवत्ता वाले अर्क तैयार किए जाते हैं, जिनकी भारी मांग अंतर्राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल और वेलनेस इंडस्ट्री में है। राज्य अब केवल कच्चा माल देने वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि परिष्कृत उत्पादों का निर्माता बन गया है।

जनता की सुनवाई और त्वरित निराकरण: सुशासन तिहार बना राहत का मंच

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेशभर में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” के तहत आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी मौके पर प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में 4 हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित आवासों की चाबी सौंपी गई। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की जेरोम, मयूरचुंदी के बीरबल यादव, करडेगा के टूना राम तथा जगदीश यादव शामिल हैं। पक्के मकान की चाबी पाकर सभी हितग्राहियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें बारिश, धूप और अन्य कठिनाइयों से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का सपना साकार हुआ है और अब वे अपने परिवार के साथ नए घर में सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करेंगे। सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। हितग्राहियों को मिले राशन कार्ड मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में आयोजित “सुशासन तिहार 2026” आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। “गांव-गांव, द्वार-द्वार” पहुंच रही प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों की समस्याओं का निराकरण कर उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है। इसी क्रम में जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा में आयोजित जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में पात्र हितग्राहियों को राशन कार्ड वितरित किए गए। शिविर में कुल 5 हितग्राहियों को नए राशन कार्ड प्रदान किए गए, जिससे उन्हें सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्यान्न प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। लाभान्वित हितग्राहियों में ग्राम सिमड़ा की अनामिका टोप्पो, मयूरचुंदी की लीलावती गोंड तथा सेली खेस की गीता सिंह सहित अन्य हितग्राही शामिल हैं। राशन कार्ड प्राप्त होने पर महिलाओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया। हितग्राहियों ने कहा कि सुशासन तिहार उनके लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ है। अब उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ते, बल्कि प्रशासन स्वयं गांव के नजदीक पहुंचकर त्वरित समाधान उपलब्ध करा रहा है।सुशासन तिहार के माध्यम से शासन की योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंच रहा है, जिससे आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। घुटनों के बल चलने की मजबूरी थमी छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सुशासन’ की संकल्पना अब धरातल पर उन चेहरों पर मुस्कान बनकर लौट रही है, जो वर्षों से अभावों में जी रहे थे। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम सिवनीकला में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ एक ऐसा ही मंच बना, जिसने दिव्यांग जीवन लाल साहू के संघर्षपूर्ण जीवन को नई गति और गरिमा प्रदान की है। सिवनीकला निवासी जीवन लाल साहू बचपन से ही दोनों पैरों की गंभीर दिव्यांगता का दंश झेल रहे हैं। दशकों तक उन्होंने वह दर्द सहा है, जहाँ चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए उन्हें घुटनों के बल रेंगना पड़ता था। शारीरिक अक्षमता के बावजूद जीवन लाल ने कभी खुद को बेबस नहीं माना। वे न केवल अपने परिवार की दो एकड़ कृषि भूमि की देखरेख में हाथ बंटाते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। ​शासन की योजनाओं का मिला संबल जीवन लाल के परिवार को शासन की विभिन्न जनहितैषी योजनाओं का निरंतर लाभ मिल रहा है। दिव्यांग पेंशन के रूप में 500 रुपए की ​आर्थिक सहायता और राशन कार्ड के जरिए हर महीने मिलने वाला 35 किलो चावल मिल रहा है। सुशासन तिहार के माध्यम से मौके पर ही ट्राइसाइकिल की उपलब्धता से अब कही आने जाने में समस्या नही होगी। ​ जब जीवन लाल को ग्रामीणों से ‘सुशासन तिहार’ के बारे में पता चला, तो वे अपनी अर्जी लेकर समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता का आलम यह था कि उनके आवेदन पर बिना किसी विलंब के तत्काल कार्यवाही की गई और शिविर स्थल पर ही उन्हें निशुल्क ट्राइसाइकिल भेंट की गई। इस पर जीवन लाल ने कहा कि अब मुझे खेत जाने या गांव में कहीं भी आने-जाने के लिए दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मेरे लिए नए पैर हैं जो मुझे आत्मनिर्भर बनाएंगे।   संवेदनशील प्रशासन, सशक्त नागरिक ट्राइसाइकिल पाकर भावुक हुए जीवन लाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि सरकार की इस संवेदनशीलता ने उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ दिया है। धमतरी के इस सुशासन तिहार ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासन द्वार तक पहुँचता है, तो अंतिम पंक्ति के व्यक्ति का जीवन वाकई बदल जाता है। जीवन लाल की यह कहानी प्रदेश के हजारों दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा और सुशासन के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। मत्स्य पालकों के लिए सुशासन शिविर बना वरदान दंतेवाडा जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में कलस्टर वार हो रहे सुशासन शिविरों से जहां मौके पर ही ग्रामीणों की अधिकतर समस्याओं का समाधान किया जा रहा हैं। वही विभिन्न विभागों द्वारा हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों से युक्त यंत्र उपकरण सामग्रियां निशुल्क वितरण की जा रही है। इससे हितग्राहियों में अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है और अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। इस क्रम में विगत दिवस भूसारास और हल्बारास में संपन्न हुए सुशासन शिविर में मत्स्य विभाग द्वारा मत्स्य पालकों को उन्नत जाल और आईस बाक्स वितरण करके उनके व्यवसाय को सुविधाजनक और आर्थिक अनुकूलन बनाने का सफल प्रयास किया जा रहा हैं। विकासखंड कटेकल्याण अंतर्गत ग्राम भूसारास में 6 मई को हुए हितग्राही हिड़मा मण्डावी एवं महादेव मरकाम भी लाभान्वित ग्रामीणों में से एक है। इस संबंध में मत्स्य कृषक हिड़मा ने बताया कि वह विगत 10 वर्षों से अपने स्वयं की भूमि में 0.20 हे. का तालाब निर्माण कर भारतीय मेजर कार्प रोहू, कतला, मृगल का संचयन कर मछली पालन का कार्य … Read more

कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा हुए गिरफ्तार, ED ने लिया सख्त एक्शन

चंडीगढ़  पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को शनिवार को बड़ा झटका लगा है। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। 100 करोड़ से ज्यादा के कथित फर्जी जीएसटी खरीद बिल और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में शनिवार को करीब 7 घंटे लंबी चली रेड के बाद ईडी ने संजीव अरोड़ा की यह गिरफ्तारी की है। चंडीगढ़ में उनके सरकारी आवास से उम्हें गिरफ्तार किया गया है। उनके बेटे की भी गिरफ्तारी की सूचना है। अरोड़ा के चंडीगढ़ समेत कई ठिकानों पर ईडी ने आज सुबह रेड की थी। अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी की कार्रवाई पांच परिसरों में की गई, जिनमें आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरोड़ा का चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास भी शामिल है। छापेमारी दिल्ली और हरियाणा के गुरुग्राम स्थित परिसरों में भी की गई। इनमें 'हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड' नामक कंपनी का परिसर भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय एजेंसी द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की आपराधिक धाराओं के तहत नया मामला दर्ज किए जाने के बाद ये छापेमारी की गई। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में यह तीसरी बार है जब ईडी संजीव अरोड़ा के घर पहुंची है, लेकिन एजेंसी को अब तक कुछ नहीं मिला. उन्‍होंने कहा कि पंजाब गुरुओं और शहीदों की धरती है, जिसे दबाया नहीं जा सकता. भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है.  आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी केंद्र सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने ईडी को भाजपा का ‘सुपारी किलर’ बताते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को बदनाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्‍होंने कहा कि कुछ दिनों तक कार्रवाई और खबरों का दौर चलेगा, लेकिन बाद में एजेंसी खाली हाथ लौट जाएगी.  पंजाब सरकार में मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी ईडी की कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया. उन्होंने कहा कि चुनावों से पहले भाजपा इस तरह की कार्रवाई कर विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने की कोशिश करती है. चीमा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के नेताओं को डराने और कामकाज प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. ईडी ने अप्रैल में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के दीवानी प्रावधानों के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापे मारे थे। अरोड़ा (62) लुधियाना पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। भगवंत मान ने साधा केंद्र पर निशाना वहीं, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा शनिवार को छापेमारी किए जाने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा। मान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत केंद्र सरकार पर अपने राजनीतिक मकसद पूरे करने के लिए ईडी और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों को 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री मान ने संगरूर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी एजेंसियां भाजपा के पास मौजूद वे चार-पांच हथियार हैं, जिनका राजनीतिकरण कर दिया गया है। मान ने कहा, ''वे लंबे समय से अपनी राजनीति के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। चाहे महाराष्ट्र हो या ओडिशा, बिहार हो या कर्नाटक अथवा पश्चिम बंगाल। अब पंजाब उनके निशाने पर है।''